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गौतम बुद्ध नगर की डीएम को हटाया जाना चाहिए : ऋचा अनिरुद्ध
समय पर मदद मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। पीड़ित के पिता राजकुमार मेहता ने कहा, 'उनका बेटा खुद को बचाने के लिए पानी में लगभग दो घंटे तक पानी में संघर्ष करता रहा।'
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में गिरकर साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। नोएडा प्राधिकरण के CEO हटाए गए है और तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) का गठन कर दिया है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट कर अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने एक्स पर लिखा, सवाल यह है कि 1.5 से 2 घंटे तक नोएडा पुलिस क्या कर रही थी? क्या वह एक युवक को मरते हुए देखती रही, तमाशबीन बनी रही? हादसे की ज़िम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण के सीईओ की हो सकती है, लेकिन हादसा हो जाने के बाद समय रहते युवक को बचाने की ज़िम्मेदारी किसकी थी? पुलिस अधिकारी तो खुद बच गए और अब दूसरों के खिलाफ मामले दर्ज कर रहे हैं, लेकिन क्या अपनी जिम्मेदारी पर भी कोई सवाल उठेगा?
Sack the DM of Gautam Buddha Nagar too! She HEADS the DDMA, She is the primary official for disaster planning and immediate response, coordinating bodies like the SDRF and local authorities for emergencies like floods or other crises..Where is/was she?! Why is she not being… pic.twitter.com/G7Y9wNxrgg
— richa anirudh (@richaanirudh) January 20, 2026
अपनी एक और पोस्ट में उन्होंने लिखा, गौतम बुद्ध नगर की डीएम को भी हटाया जाना चाहिए। वही डीडीएमए की प्रमुख हैं और आपदा प्रबंधन, तत्काल राहत व प्रतिक्रिया की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है। बाढ़ या किसी भी आपात स्थिति में एसडीआरएफ और स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय करना उनका काम है। फिर सवाल है—वह कहाँ थीं या कहाँ हैं? उनसे सवाल क्यों नहीं पूछे जा रहे, उन्हें हटाया क्यों नहीं जा रहा? आखिर उन्हें बचा कौन रहा है?
आपको बता दें, पीड़ित के परिवार ने बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है, और कहा है कि अगर समय पर मदद मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी, क्योंकि वह दो घंटे तक जूझता रहा। पीड़ित के पिता राजकुमार मेहता ने कहा, 'उनका बेटा खुद को बचाने के लिए पानी में लगभग दो घंटे तक पानी में संघर्ष करता रहा।'
सवाल ये है कि 1.5-2 घंटे तक @noidapolice क्या कर रही थी??? एक युवक को मरते देख रही थी? तमाशबीन बनी हुई थी? दुर्घटना हुई इसकी ज़िम्मेदारी @CeoNoida की हो सकती हैं लेकिन दुर्घटना होने के बाद समय रहते बचाने की ज़िम्मेदारी किसकी थी? पुलिस अधिकारी तो बच गए..दूसरों के खिलाफ केस दर्ज कर… https://t.co/hh62uj90uc
— richa anirudh (@richaanirudh) January 19, 2026
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