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हम पहचानों के नाम पर लड़ते क्यों हैं : नीरज बधवार
दक्षिण अफ्रीका की टीम कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट के शतक के बावजूद 45.3 ओवर में सभी विकेट खोकर 246 रन ही बना सकी। भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने पांच विकेट हॉल लिया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
भारतीय महिला टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर महिला विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। भारत ने पहली बार विश्व कप जीता है। इससे पहले भारत ने 2005 और 2017 में फाइनल तक सफर तय किया था लेकिन ट्रॉफी हाथ नहीं लगी थी। वहीं महिला क्रिकेट को 25 साल बाद नया चैंपियन मिला है। इस बीच पत्रकार और लेखक नीरज बधवार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट करते हुए अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने लिखा, सिख लड़की ने कप्तानी की, क्रिश्चियन (ईसाई) लड़की ने सेमीफाइनल जिताया, बंगाली लड़की की पावर हिटिंग (ताक़तवर बल्लेबाज़ी) से टीम 300 के करीब पहुँच पाई, जाटों की लड़की शेफाली फ़ाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच बनी, और ब्राह्मणों की लड़की दीप्ति प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुनी गई और आख़िरकार भारत वर्ल्ड चैंपियन (विश्व विजेता) बन गया।
सवाल यह है कि जब इनकी अलग-अलग पहचानें हमें विश्व विजेता बनाने में आड़े नहीं आतीं, तो देश को आगे ले जाने के नाम पर हम इन्हीं पहचानों के नाम पर लड़ते क्यों हैं? ऐसा ही जज़्बा हमें देश की तरक़्क़ी के लिए भी चाहिए।
आपको बता दें, भारतीय टीम ने महिला वनडे विश्व कप 2025 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 298 रन बनाए। इसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट के शतक के बावजूद 45.3 ओवर में सभी विकेट खोकर 246 रन ही बना सकी। भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने पांच विकेट हॉल लिया।
सिख लड़की ने कप्तानी की, क्रिश्चियन लड़की ने सेमीफाइनल जिताया, बंगाली लड़की की पावर हिटिंग से टीम 300 के करीब पहुंच पाई, जाटों की लड़की शेफाली फाइनल में Player of the Match बनी, और ब्राह्मणों की लड़की दीप्ति Player of the Tournament चुनी गई — और आखिरकार भारत वर्ल्ड चैंपियन बन… pic.twitter.com/SxvaLB8DwO
— Neeraj Badhwar (@nirajbadhwar) November 2, 2025
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