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अनुभव सिन्हा को सामने आकर तथ्यों पर हर सवाल का जवाब देना चाहिए: मानक गुप्ता
चीफ़ का असली नाम इब्राहिम अतहर था। डॉक्टर का असली नाम शाहिद अख़्तर सईद था। बर्गर का असली नाम सनी अहमद क़ाज़ी। भोला का असली नाम ज़हूर मिस्त्री था। शंकर का असली नाम शाकिर था।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
मानक गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार, एंकर ( न्यूज़ 24 )
IC 814 की हाइजैकिंग मैंने लगातार 7 दिन LIVE स्टूडियो से देखी और देश-दुनिया को दिखाई थी। तब मैं Zee News में बतौर ऐंकर काम कर रहा था। उस वक़्त देश में सिर्फ़ दो ही न्यूज़ चैनल होते थे। ज़ी न्यूज़ और स्टार न्यूज़। 7 दिन और 7 रातें…24 घंटे की कवरेज थी।
24 दिसंबर से 31 दिसंबर 1999 तक के वो 7 दिन देश पर कितने भारी गुज़रे, इसका अंदाज़ा वही लगा सकता है जो उस दौर में होश संभाल चुका था। अनुभव सिन्हा की सीरीज़ IC 814 बड़ी उम्मीदों से देखी। न तो उसमें वो गहराई महसूस हुई और न ही उसमें देश और पीड़ितों के साथ न्याय किया गया है।
उस समय की सरकार की नाकामी सही दिखाई गई है लेकिन उन आतंकवादियों में इंसानियत दिखाना बेईमानी है, उनके असली मुस्लिम नाम अंत तक छुपाना और बड़ी बेईमानी है। हां, वो कोड-नेम थे पर आपकी ज़िम्मेदारी थी कि सारे तथ्य बताते। शुरू से बताते। ISI को क्लीन चिट क्यों दी गई है, समझ से परे है।
सिर्फ़ इसलिए कि लादेन ने ISI वालों को बाद की पार्टी में नहीं बुलाया, उनके पाप धो दिये गये। तब के विदेश मंत्री जसवंत सिंह जी ने ख़ुद लिखा था कि ISI वाले तीनों छुड़वाये गये आतंकियों मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख के परिवार वालों को कंधार ले गये थे।
IC 814 की हाइजैकिंग मैंने लगातार 7 दिन LIVE स्टूडियो से देखी और देश-दुनिया को दिखाई थी. तब मैं Zee News में बतौर ऐंकर काम कर रहा था. उस वक़्त देश में सिर्फ़ दो ही न्यूज़ चैनल होते थे - ज़ी न्यूज़ और स्टार न्यूज़. 7 दिन और 7 रातें…24 घंटे की कवरेज थी.
— Manak Gupta (@manakgupta) September 3, 2024
24 दिसंबर से 31 दिसंबर 1999…
छोड़ने पर इन आतंकियों की पहचान करने के लिए। पहचान के बाद ही हमारे यात्रियों को छोड़ा गया। पूरा प्लॉट पाकिस्तान का ही था। पाकिस्तान-ISI का पूरा सच पता नहीं क्यों नहीं बताया गया ? पाक के नॉन-स्टेट ऐक्टर्स की थ्योरी को जान बूझ कर बल दिया गया या अनजाने में?
जब पूरी सीरीज़ में बार-बार कहानी का फ़्लो तोड़ कर तथ्य और बैकग्राउंड बताने के लिए नरेशन का सहारा लिया गया है, तो चीफ़, डॉक्टर, बर्गर, भोला और शंकर के असली नाम भी बताते। बताते चलते कि -चीफ़ का असली नाम इब्राहिम अतहर था। डॉक्टर का असली नाम शाहिद अख़्तर सईद था। बर्गर का असली नाम सनी अहमद क़ाज़ी। भोला का असली नाम ज़हूर मिस्त्री था। शंकर का असली नाम शाकिर था।
ये भी ढंग से बताते कि सारे के सारे हाईजैकर्स पाकिस्तानी थे। उल्टे आतंकियों को यात्रियों से अन्ताक्षरी खेलते दिखाया है। यात्रियों की फ़िक्र-मदद करते भी दिखाया है। अनुभव सिन्हा को सामने आ कर रिसर्च-तथ्यों पर हर सवाल का जवाब देना चाहिए। इस सीरीज़ में उपयुक्त बदलाव करने चाहियें ताकि आज और आगे की पीढ़ियाँ सही इतिहास जान सकें। पीड़ितों के बारे में भी थोड़ा सोचा होता। बहुत कुछ नहीं बताया।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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