फ्रंट पेज पर इन बड़ी खबरों को रखने से चूका यह अखबार

जैकेट विज्ञापन के कारण नवभारत टाइम्स में तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है, जबकि हिन्दुस्तान में भी आज तीसरा पेज फ्रंट पेज है

नीरज नैयर by
Published - Wednesday, 22 January, 2020
Last Modified:
Wednesday, 22 January, 2020
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नागरिकता संशोधन कानून पर भले ही विरोध-प्रदर्शन का दौर चल रहा है, लेकिन सरकार अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। गृहमंत्री अमित शाह ने एक बार फिर साफ किया है कि सीएए किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा। दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में अन्य खबरों के साथ ही इस समाचार को भी प्रमुखता मिली है। आज सबसे पहले बात करते हैं नवभारत टाइम्स की। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। पेज की शुरुआत केजरीवाल के नामांकन से जुड़े टॉप बॉक्स से हुई है। केजरीवाल पर्चा भरने के लिए 6 घंटे से ज्यादा बैठे रहे, अब उनकी पार्टी इसे भाजपा की साजिश बता रही है।

लीड प्रियंका सिंह की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि शाहीन बाग़ से 29 को भारत बंद का ऐलान किया गया है। इसी में अमित शाह का बयान भी लगाया गया है। जहांगीरपुरी में डबल मर्डर और संसद-विधानसभा सदस्यों को अयोग्य घोषित करने के स्पीकर के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी पेज पर है। कोर्ट का कहना है कि संसद विचार करे कि यह फैसला स्पीकर ले या स्वंत्रत निकाय। गणतंत्र दिवस की तैयारियों को दर्शाते फोटो को भी जगह मिली है। इसके अलावा, चार सिंगल समाचार हैं। जिसमें नीरव मोदी जैसा एक और बैंक घोटाला, नेपाल में 8 भारतीयों की मौत और अयोध्या केस फिर कोर्ट में, प्रमुख हैं। एंकर की बात करें, तो यहां रेलवे की ई-टिकटिंग से आतंकी फंडिंग के बारे में बताया गया है।

अब हिन्दुस्तान का रुख करें, तो यहां भी तीसरा पेज फ्रंट पेज है। लीड नागरिकता संशोधन कानून पर अमित शाह का सख्त रुख है, जबकि शाहीन बाग़ से भारत बंद की घोषणा को अलग से सिंगल कॉलम में रखा गया है। केजरीवाल का नामांकन प्रमुखता के साथ पांच कॉलम में है। वहीं, ई-टिकटिंग से आतंकी फंडिंग के खुलासे के साथ ही स्पीकर के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को भी तवज्जो मिली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर कश्मीर राग छेड़ा है। उन्होंने इमरान खान से कहा है कि यदि दोनों देश चाहें तो वह मदद के लिए तैयार हैं। अखबार ने इस खबर को फ्रंट पेज पर जगह दी है। इसके अलावा तीन सिंगल समाचारों को भी स्थान मिला है, जिनमें अयोध्या फैसले पर याचिका और नेपाल में 8 भारतीयों की मौत प्रमुख है। एंकर में ग्रीनपीस की रिपोर्ट को सजाया गया है। इसके अनुसार देश के 23 शहरों में उच्च स्तर का वायु प्रदूषण बरकरार है। अखबार ने बैंक घोटाले को फ्रंट पेज पर नहीं रखा है, जबकि यह काफी बड़ी खबर है।

दैनिक भास्कर ने आज भी टॉप बॉक्स से फ्रंट पेज की शुरुआत की है। इसमें राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी विजय उपाध्याय की बाईलाइन स्टोरी को जगह मिली है। विजय ने बताया है कि ट्रस्ट के लिए 17 नामों की सूची तैयार हो गई है, जिसकी घोषणा 30 को होगी। लीड नागरिकता संशोधन कानून पर अमित शाह का बयान है। हालांकि भारत बंद के ऐलान को इसमें नहीं रखा गया है।

स्पीकर की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को प्रमुखता के साथ पेज पर लगाया गया है, वहीं ट्रम्प का कश्मीर राग सिंगल कॉलम में है। केजरीवाल के नामांकन को भी पेज पर जगह मिली है। एंकर में एक सर्वे रिपोर्ट को सजाया गया है, जिसके मुताबिक भारत में सरकार और मीडिया पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। बैंक घोटाला और आतंकी फंडिंग के खुलासे को अखबार ने फ्रंट पेज पर नहीं रखा है, जबकि ये दोनों काफ़ी बड़ी खबरें हैं।

वहीं, दैनिक जागरण के फ्रंट पेज पर नजर डालें, तो यहां आतंकी फंडिंग के खुलासे को लीड का दर्जा मिला है। इस खबर को अखबार ने सबसे विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा है। सीएए पर अमित शाह का बयान पेज की दूसरी बड़ी खबर है। अखबार ने बैंक घोटाले को भी प्रमुखता के साथ जगह दी है और स्पीकर की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को एंकर में रखा गया है।

सबसे आखिर में आज राजस्थान पत्रिका का रुख करते हैं। अखबार ने नागरिकता संशोधन कानून पर अमित शाह के बयान को लीड लगाया है। अच्छी बात यह है कि आज दिल्ली की चुनावी सरगर्मियों को अखबार ने प्रमुखता देते हुए टॉप में जगह दी है। केजरीवाल का नामांकन फोटो के साथ पेज पर है। अयोध्या फैसले पर कोर्ट में याचिका और 370 निष्प्रभावी करने पर कोर्ट में सुनवाई के साथ ही बैंक घोटाला भी पेज पर है। हालांकि, आतंकी फंडिंग के खुलासे के मामले से जुड़ी खबर फ्रंट पेज पर नहीं है। एंकर में राजीव मिश्रा की बाईलाइन है, जिन्होंने बताया है कि कैसे वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में कृत्रिम भूकंप पैदा किया।       

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के लिहाज से आज नवभारत टाइम्स सबसे बेहतर है। हिन्दुस्तान को दूसरे नंबर पर रखा जा सकता है।

2: खबरों की प्रस्तुति के मामले में दैनिक जागरण को छोड़कर सभी अखबारों के फ्रंट पेज अच्छे नजर आ रहे हैं।

3: कलात्मक शीर्षक की बात करें तो आज सभी अखबार एक जैसे हैं, यानी शीर्षक को कलात्मक बनाने का प्रयास नहीं किया गया है। हालांकि, नवभारत टाइम्स ने एंकर के शीर्षक में जरूर प्रयोग करने का प्रयास किया है।

4: खबरों की बात करें तो नवभारत टाइम्स के साथ ही दैनिक जागरण को अव्वल कहा जा सकता है, क्योंकि दोनों ने फ्रंट पेज पर आतंकी फंडिंग और बैंक घोटाले को जगह दी है। दैनिक भास्कर में राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर एक्सक्लूसिव स्टोरी है, लेकिन इन महत्वपूर्ण ख़बरों के मामले में उससे चूक हो गई है।

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न्यूजपेपर इंडस्ट्री के फ्यूचर को लेकर क्या है दिग्गजों का आकलन, पढ़ें यहां

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में पिछले दिनों किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी प्रभावित हुआ है

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
Newspaper Industry

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से देश में किए गए लॉकडाउन के कारण प्रिंट मीडिया भी काफी प्रभावित हुआ है। हालांकि, अब अधिकांश स्थानों पर अनलॉक 1.0 की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अखबारों की पब्लिशिंग और सर्कुलेशन का काम भी अपने सामान्य रूप में वापस लौट रहा है। ‘एडवर्टाइजिंग क्लब बेंगलुरु’ (Advertising Club Bangalore) की ओर से ‘Re-imagining Print’ पर आयोजित लाइव चैट के दौरान इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना था कि देश में अखबारों का सर्कुलेशन करीब 70-75 प्रतिशत तक हो गया है। इस दौरान पैनल में ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम और ‘दैनिक भास्कर ग्रुप’ के प्रमोटर और डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल बतौर स्पीकर शामिल थे और इसे ऐड क्लब की मैनेजिंग पार्टनर राधिका रमानी ने मॉडरेट किया।

इस मौके पर गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘लॉकडाउन के पहले हफ्ते में अखबारों का सर्कुलेशन काफी प्रभावित हुआ था। इसके दो कारण थे। पहला तो यह कि नेशनल लॉकडाउन के कारण लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि अखबार कैसे डिलीवर होंगे। दूसरा कारण यह था कि सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ने लगी थी कि अखबारों की वजह से कोरोनावायरस फैल सकता है। एक सप्ताह में यह दोनों चीजें स्पष्ट हो गईं। उस समय सर्कुलेशन 60-65 प्रतिशत गिर गया था और अप्रैल तक यह करीब 70-75 प्रतिशत पर वापस आ गया, जबकि मई-जून में अधिकांश अखबारों ने 80 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर लिया।’ अनुमान है कि बाकी का 20-25 प्रतिशत सर्कुलेशन भी अगले एक-दो महीने में पटरी पर वापस आ जाएगा। मलयाला मनोरमा (Malayala Manorama) पहले ही 97 प्रतिशत वापसी कर चुका है।  

वहीं, सुंदरम के अनुसार, कोविड-19 की शुरुआत एक शहरी घटना के रूप में हुई और इसलिए शुरुआती दौर में गैर शहरी केंद्रों की तुलना में प्रमुख शहरों में इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया। सुंदरम ने कहा, ‘मैं इस मुद्दे को दो तरह से (एक तो घरों पर जाने वाली कॉपी और दूसरी होटल, एयरलाइंस अथवा एयरपोर्ट्स आदि में जाने वाली इंस्टीट्यूशनल कॉपी) रखना चाहता हूं। मुझे लगता है कि इंस्टीट्यूशनल कॉपियां इतनी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं और इन्हें पटरी पर आने में समय लगेगा, क्योंकि इन दिनों ज्यादातर घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) हो रहा है। ऐसे में हम हाउसहोल्ड कॉपियों यानी घरों पर डिलीवर की जाने वाली कॉपियों पर फोकस कर रहे हैं और इस दिशा में काफी काम किया जा चुका है। हम अपनी कॉपियों की संख्या दोगुनी कर रहे हैं और महामारी के दौरान हम 65 प्रतिशत सर्कुलेशन का आंकड़ा पार कर चुके हैं।’

कोविड-19 के बारे में शोर नवंबर 2019 में शुरू हुआ था। किसी भी अखबार समूह को इस बात की आशंका नहीं थी कि वायरस इस हद तक संकट पैदा करेगा। इनमें से अधिकांश यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके पास न्यूजप्रिंट का पर्याप्त स्टॉक हो। सुंदरम ने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त संसाधन थे और स्टॉक को सही तरीके से डिस्ट्रीब्यूट किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘पॉलिसी के तहत हम हमेशा 45 से 75 दिनों का स्टॉक रखते हैं। पिछले 18 महीनों में न्यूजप्रिंट की कीमतों में नरमी को देखते हुए हमने अच्छी इन्वेंट्री विकसित कर ली थी। अप्रैल की शुरुआत में हमारे पास करीब 70-80 प्रतिशत स्टॉक था।’ सुंदरम का कहना था कि जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो उस समय अखबार का डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता थी।   

वहीं, अग्रवाल का कहना था, ‘हम मेक इन इंडिया में विश्वास रखते हैं। हम 50 प्रतिशत न्यूजप्रिंट इंडिया से लेते हैं, जबकि बाकी का 50 प्रतिशत बाहर से आयात करते हैं। हम 65 स्थानों से अखबार पब्लिश करते हैं। शुरुआत के दो हफ्तों में न्यूजप्रिंट को मार्केट में भेजना मुश्किल था, यह समस्या अब हल हो गई है। मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि लॉकडाउन के दौरान देश का कोई भी न्यूजपेपर ऑर्गनाइजेशन बंद नहीं हुआ।’

रेवेन्यू के मुद्दे पर अग्रवाल ने कहा, ‘अखबार का 75 प्रतिशत रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग से और 25 प्रतिशत रेवेन्यू सर्कुलेशन से आता है। कोविड के दौरान एडवर्टाजिंग बिल्कुल नहीं थी और 75 प्रतिशत रेवेन्यू 10 से 30 प्रतिशत रह गया था। हमने पेजों की संख्या घटाई, जिससे पब्लिशिंग कॉस्ट कम हुई और सब्सिडी शून्य हो गई। इन वजहों से ही हम 10 से 30 प्रतिशत रेवेन्यू के साथ सर्वाइव कर सके।’

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इस आशंका को दूर करने में कामयाब रहे अखबार, यूं मिला फायदा

एक्सचेंज4मीडिया की ‘Go Dakshin’ सीरीज के तहत आयोजित वेबिनार में मीडिया दिग्गजों ने दक्षिण भारत में प्रिंट मीडिया पर कोविड-19 के प्रभाव को लेकर चर्चा की

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2020
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‘साक्षी ग्रुप’ (Sakshi Group) के डायरेक्टर (एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग) केआरपी रेड्डी का कहना है कि उत्तर और पश्चिम में जो हो रहा है, उससे दक्षिण का मार्केट पूरी तरह अलग है। हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) की वेबिनार सीरिज ‘गो दक्षिण’ ('Go Dakshin) में ‘Print: Emerging Stronger Post Covid-19’ टॉपिक पर अपने विचार रखते हुए रेड्डी का कहना था, ‘हमारा सर्कुलेशन अन्य क्षेत्रों की तरह ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है। हां, शहरी क्षेत्रों में कुछ असर पड़ा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र इससे पूरी तरह अप्रभावित हैं।’

ऑनलाइन रूप से हुए इस पैनल डिस्कशन में रेड्डी के अलावा ‘एशियानेट न्यूज नेटवर्क’ (AsianetNews Network) के सीईओ अभिनव खरे, ‘कासाग्रांड’ (CASAGRAND) के सीएमओ ईश्वर एन, ‘द हिन्दू ग्रुप’ (The Hindu Group) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर सुरेश बालकृष्णा और ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी ने भी अपने विचार रखे। इस सेशन का नेतृत्व ‘वेवमेकर इंडिया’ (Wavemaker India) के वाइस प्रेजिडेंट किशन कुमार श्यामलन ने किया।  

इस मौके पर तेलुगू भाषी मार्केट के बारे में रेड्डी का कहना था, ‘हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में कुछ आशंकाएं थीं कि अखबार कोरोनावायरस के वाहक होते हैं, इसलिए इस आशंका को दूर करने की दिशा में अखबारों को कुछ काम करने की जरूरत थी। इस बात को समझाने में थोड़ा समय लगा, लेकिन अब हमने करीब 75-80 प्रतिशत वापसी कर ली है।’ रेड्डी के अनुसार, पहले की तुलना में अखबार अब अधिक सशक्त हो रहे हैं और महामारी से सबक लेते हुए पब्लिशर्स को इन चुनौतियों का और प्रभावी तरीके से सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि टियर-दो तीन और चार (tier two, three and four) शहर इस महामारी से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए साक्षी न्यूज इन शहरों और यहां के युवा पाठकों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। रेड्डी के अनुसार, ‘मुझे लगता है कि अब ये शहर अर्थव्यवस्था को चलाएंगे। इसके अलावा अब उल्टा पलायन (reverse migration) हो रहा है। यानी अब चीजें शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर लौट रही हैं, इसलिए हम इस पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’   

रेड्डी की बात से सहमति जताते हुए बालकृष्ण ने कहा, ‘छोटे शहरों में इस महामारी का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। मेट्रो आधारित अंग्रेजी अखबार होने के कारण डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर थोड़ा ज्यादा दबाव था।’ बालकृष्ण के अनुसार, बिजनेस के लिहाज से अप्रैल का महीना सबसे ज्यादा खराब था। बालकृष्ण ने कहा, ‘मई से चीजों ने फिर रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी, फिर चाहे वह डिस्ट्रीब्यूशन हो अथवा एडवर्टाइजिंग। सर्कुलेशन की बात करें तो यदि अप्रैल X था, मई 2 X और जून 80 प्रतिशत से भी ज्यादा था। तमिलनाडु में हमने 90-95 और केरल में 80 प्रतिशत तक वापसी कर ली है। आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में सर्कुलेशन 75 प्रतिशत तक वापस आ गया है। हालांकि, एडवर्टाइजिंग मनी की वापसी अभी थोड़ी दूर है, लेकिन जल्द ही यह वापस पुराने रूप में आ जाएगी।’

बालकृष्ण ने कहा कि महामारी के दौरान प्रासंगिक बने रहना प्रिंट मीडिया के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसने ब्रैंड्स को फुर्ती का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के तुरंत बाद ‘द हिन्दू’ ने अपनी मैगजींस स्पोर्ट्स स्टार और फ्रंटलाइन को पूरी तरह डिजिटल मैगजींस में परिवर्तित कर दिया और अपने ऑडियंस की ओर से ग्रुप को सबस्क्रिप्शन में बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल के रूप में परिवर्तन की जो प्रक्रिया थी, इस दौरान इसमें तेजी आ गई। बालकृष्ण के अनुसार, ‘लोगों के अंदर जागरूकता लाने के लिए हमने मार्च के आखिर में कोविड बुक भी पब्लिश की। हम एडिटोरियल में बदलाव लाए और पाठकों का विश्वास हासिल करने के लिए उनकी दिनचर्या पर फोकस किया।’

मलयाला मनोरमा के होम मार्केट केरल के बारे में चांडी ने कहा कि आपदा प्रबंधन का हमें अच्छा अभ्यास है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों से हम आपदाओं का सामना कर रहे हैं। पहले निपा वायरस आया, फिर बाढ़ आईं। कोविड का पहला केस केरल में मिला था। कहने का मतलब है कि आपदाओं से निपटने में हम काफी अच्छे हो गए हैं। सरकार की मदद से अखबार मालिक लोगों को यह स्पष्ट करने में सफल रहे कि अखबारों के कारण वायरस नहीं फैलेगा। हम कंटेंटमेंट क्षेत्रों में भी अखबार सर्कुलेट करने में सफल रहे। हमारा 99 प्रतिशत डिस्ट्रीब्यूशन पहले की तरह बना हुआ है। हमारे सर्कुलेशन रेवेन्यू ने हमें इस महामारी के दौरान सर्वाइव करने में मदद की।’

खरे ने भी इनसे सहमति जताते हुए कहा, ‘हम सौभाग्यशाली हैं कि केरल के अलावा हमारे द्वारा संचालित सभी मार्केट अच्छी तरह व्यवस्थित थे। कर्नाटक की सफलता की अलग ही कहानी है।’ खरे ने कहा कि asianetnews.com मीडिया आउटलेट की मुख्य प्रॉपर्टी है और टीवी, रेडियो व प्रिंट इसके पीछे हैं। उन्होंने कहा, ‘जनवरी में हमने अधिक परंपरावादी दृष्टिकोण अपनाया। इस तिमाही में भी हम अपना टार्गेट पूरा कर चुके हैं। लॉकडाउन के बाद से इन 100 से ज्यादा दिनों में हमारा ट्रैफिक दोगुना से ज्यादा हो गया है। देश में टॉप 10 में हम एकमात्र साउथ इंडियन प्लेयर हैं।’  

इसके साथ ही खरे ने कहा कि जागरूकता के बावजूद प्रिंट पर इस महामारी का थोड़ा असर पड़ा, लेकिन चैनल का फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहा। खरे के अनुसार, ‘रेवेन्यू की बात करें तो हमारा पारंपरिक क्लाइंट्स बिजनेस शून्य है। फरवरी और मार्च में ऑनलाइन एजुकेशन, ई-कॉमर्स और गेमिंग हमारे नए क्लाइंट्स थे।’

एडवर्टाइजर्स के परिप्रेक्ष्य में, ईश्वर ने कहा, ‘अप्रैल और मई में लॉकडाउन के दौरान हमने कुछ भी विज्ञापन नहीं किया। एक बार लॉकडाउन खुलने के बाद विज्ञापन देने वालों में हम सबसे पहले थे। हम वर्षों से लगातार विज्ञापनों पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में से एक हैं। हम प्रिंट के साथ बहुत विज्ञापन करते हैं क्योंकि कैटेगरी इसकी मांग करती है। वीकेंड पर हम ज्यादा विज्ञापन देते हैं, क्योंकि उस दौरान लोग प्रॉपर्टी देखने के लिए ज्यादा निकलते हैं। हम सभी भाषाओं के अखबारों में विज्ञापन दे रहे हैं। हमें उम्मीद नहीं थी कि यह काम करेगा, लेकिन इसने उद्योग में विश्वास जगाया और इसने वास्तव में हमारे लिए काम किया।’

प्रिंट इंडस्ट्री के बारे में श्यामलन का कहना है कि टाइम के साथ फॉर्मेट बदल रहा है। उन्होंने पैनलिस्ट से जानना चाहा कि प्रिंट के लिए इस महामारी को कैसे अवसर के रूप में बदला जा सकता है। इस पर बालकृष्णन ने कहा, ‘डिजिटल और प्रिंट फॉर्मेट्स को मिलकर काम करना होगा। लॉकडाउन ने प्राइसिंग गेम को पूरा बदल दिया है। इस महामारी से पहले से ही हमारी सभी प्रॉपर्टीज पेवॉल (pay wall) के पीछे थीं। कवर प्राइस की बात करें तो हम देश के सबसे महंगे अंग्रेजी अखबार हैं। यही सब चीजें हैं, जो इस मुश्किल समय में हमें बनाए रखे हुई हैं। बिजनेस का अर्थशास्त्र बदल गया है, लेकिन हमने इसकी परिकल्पना की है।‘ 

इस दौरान रेड्डी ने कहा कि  भविष्य में प्रिंट पनपेगा, क्योंकि लोग इसे एक विश्वसनीय माध्यम के रूप में देखते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मीडिया प्लेयर्स यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में भी निवेश करना चाहिए। वहीं चांडी और खरे ने कहा कि मीडियम का अधिक महत्व नहीं होगा और फोकस कंटेंट पर शिफ्ट हो जाएगा।

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अखबार के एडिटर के खिलाफ केस दर्ज, दी थी मुख्यमंत्री से जुड़ी ये खबर

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में COVID-19 को लेकर कथित तौर पर फर्जी खबर प्रकाशित करने के आरोप में तेलुगू अखबार के एक एडिटर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है

Last Modified:
Monday, 06 July, 2020
Editor

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में COVID-19 को लेकर कथित तौर पर फर्जी खबर प्रकाशित करने के आरोप में तेलुगू अखबार के एक एडिटर के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। दरअसल यह खबर तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य से जुड़ी थी।

मामला हैदराबाद के जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। आरोप में कहा गया कि तेलुगू अखबार ‘आदाब हैदराबाद’ ने मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को कोरोनोवायरस से प्रभावित होने की झूठी खबर दी थी।  

मामला जुबली हिल्स थाना क्षेत्र के रहमथनगर निवासी एक मोहम्मद इलियास द्वारा की गई शिकायत के बाद दर्ज किया गया था।

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जुबली हिल्स पुलिस ने आईपीसी की धारा 505 (2), 505 (बी) के तहत मामला दर्ज किया है और ‘आदाब हैदराबाद’ के एडिटर वेंकटेश्वर राव को गिरफ्तार किया है।

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अब इस समूह के हाथ में होगी ‘फॉर्च्यून इंडिया’ की कमान

इस बारे में समूह ने ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के पब्लिशर ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के साथ एक समझौते की घोषणा की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
Magazine

आरपी संजीव गोयनका समूह (RP-Sanjiv Goenka Group) प्रतिष्ठित बिजनेस मैगजीन ‘फॉर्च्यून’ (Fortune) के इंडिया एडिशन को पब्लिश करेगा। इस बारे में ग्रुप ने ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के पब्लिशर ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के साथ एक समझौते की घोषणा की है। इस बारे में आरपी संजीव गोयनका (RPSG) समूह के चेयरमैन संजीव गोयनका का कहना है कि वह इस पार्टनरशिप से बहुत खुश हैं।

संजीव गोयनका के अनुसार, ‘फॉर्च्यून विश्व के बड़े मीडिया ब्रैंड्स में शुमार है और ऐसे समय में जब सरकार देश की नई पीढ़ी और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, फॉर्च्यून इंडिया इस ग्रुप में एक नई पहचान शामिल करेगी। हमारे पास फॉर्च्यून इंडिया के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं।’   

वहीं, ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के सीईओ एलन मुरे (Alan Murray) का कहना है, ‘इस पार्टनरशिप के साथ दो बड़े संस्थान एक साथ आए हैं। हमारे लिए भारत प्रमुख मार्केट है और हमें विश्वास है कि आरपी संजीव गोयनका समूह के नेतृत्व में फॉर्च्यून इंडिया नई ऊंचाइयों को छुएगी।’ गौरतलब है कि भारत में पहले यह मैगजीन 'आनंद बाजार पत्रिका' (एबीपी) समूह द्वारा पब्लिश की गई थी। 

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अमर उजाला के ई-पेपर की PDF प्रसारित करने पर हुई शिकायत

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
PDF

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ (PDF) अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है और कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

बता दें कि हरियाणा के कई जिलों के कुछ वॉट्सऐप ग्रुप में अमर उजाला अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से नियमित तौर पर प्रसारित की जा रही थीं, जिसे देखते हुए अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई की तो कई ग्रुप एडमिन ने न सिर्फ ई-पेपर की पीडीएफ हटा ली, बल्कि भविष्य में ऐसा न करने का वादा भी किया। एडमिन ने अपने-अपने वॉट्सऐप ग्रुप में अखबारों की पीडीएफ शेयर न करने का निवेदन अपने सदस्यों से किया है।

आपको बता दें कि समाचार पत्र के ई-पेपर की पीडीएफ कॉपी डाउनलोड कर उसे वॉट्सऐप ग्रुप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रसारित करना किसी को भी भारी पड़ सकता है। ऐसा करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि कॉपीराइट कानून और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन भी है। 

अदालती निर्देशों और अन्य एडवाइजरी में भी ये कहा जा चुका है कि किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप में अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ या अन्य माध्यम से कॉपी प्रसारित करना गैरकानूनी और अनैतिक है। इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि जिस भी सोशल मीडिया ग्रुप में ऐसा किया जा रहा है उसका एडमिन इस गैरकानूनी कृत्य के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।    

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अब नए तेवर व कलेवर के साथ पाठकों को पढ़ने को मिलेगा यह अखबार

राजनगर डिस्ट्रिक सेंटर (आरडीसी) में पिछले दिनों अखबार के नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया।

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2020
Newspaper

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद से पब्लिश होने वाला हिंदी दैनिक ‘अथाह’ (Athah) अब नए तेवर व कलेवर के साथ पाठकों को पढ़ने के लिए मिलेगा। राजनगर डिस्ट्रिक सेंटर (आरडीसी) में शुक्रवार को अखबार के नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही अखबार ने डिजिटल की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं और अपनी वेबसाइट https://dainikathah.com/ लॉन्च की है। इस अखबार का ई-पेपर भी पाठकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

अखबार के प्रधान संपादक अशोक ओझा ने बताया कि हालांकि अखबार पिछले 33 सालों से प्रकाशित हो रहा है, लेकिन अब नए तेवर व कलेवर के साथ यह पाठकों के सामने पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि निष्पक्षता और पारदर्शिता अखबार की प्राथमिकता होगी।अखबार में सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक, खेलकूद, अध्यात्म और मनोरंजन से जुड़ी खबरों के साथ जनहित से जुड़ी सरकारी और गैरसरकारी योजनाओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अखबार में समाचारों के साथ विचार और विश्लेषण को भी महत्व दिया जाएगा और यही इसकी टैगलाइन भी रखी गई है। छह पेज के इस अखबार की कीमत दो रुपए रखी गई है। बता दें कि अशोक ओझा पूर्व में राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर गाजियाबाद में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह दैनिक जागरण, गाजियाबाद में लंबे समय तक ब्यूरो चीफ भी रहे हैं। वह दैनिक जागरण में जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर में चीफ रिपोर्टर भी रह चुके हैं।

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कुछ यूं छात्रों का करियर संवारने में मदद करेगा India Today का स्पेशल एडिशन

हर स्ट्रीम में बेस्ट कॉलेजों की लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कॉलेज जाने की तैयारी में जुटे विद्यार्थी जान सकें कि किस विषय की पढ़ाई के लिए कौन से कॉलेज अच्छे हैं।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
IndiaToday487

'इंडिया टुडे' (India Today) मैगजीन ने देश के टॉप कॉलेजों के सर्वे पर अपना बहुप्रतीक्षित 24वां एडिशन निकाला है। वैश्विक महामारी के बीच कॉलेज सितंबर में खुलने की उम्मीद है और प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू हो चुकी है, ऐसे में छात्रों ने भी बेस्ट कॉलेज और उनमें उपलब्ध कोर्स व प्रवेश प्रक्रिया की तलाश करनी शुरू कर दी है।

मार्केट रिसर्च एजेंसी ‘मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स’ (MDRA) के इस सर्वे में देश के बेहतरीन कॉलेजों की एक लिस्ट बनाई गई है। इसमें 14 स्ट्रीम्स (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, लॉ, मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट, बीबीए, बीसीए, सोशल वर्क और फैशन डिजाइन) को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि हर स्ट्रीम में बेस्ट कॉलेजों की लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कॉलेज जाने की तैयारी में जुटे विद्यार्थी और उनके अभिभावक जान सकें कि किस विषय की पढ़ाई के लिए कौन से कॉलेज अच्छे हैं।

इस महामारी को देखते हुए अगला शैक्षणिक सत्र डिजिटल इंफ्रॉस्ट्रक्चर पर ज्यादा केंद्रित होगा। मैगजीन के इस इश्यू में लोगों के दिमाग में उठने वाले तमाम सवालों को भी समाहित किया गया है जैसे- घर से दूर बड़े शहरों के कॉलेजों में प्रवेश लेने पर क्या हॉस्टल में रहना सेफ होगा अथवा पेइंग गेस्ट बनना ज्यादा ठीक रहेगा?, देश के छोटे शहरों के कॉलेज कितने अच्छे हैं? क्या इस साल ज्यादा गलाकाट प्रतियोगिता होगी? क्योंकि कोविड-19 के कारण विदेश जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट हो सकती है।  

हालांकि, सर्वे में 31 शहरों ने भाग लिया, लेकिन कला, विज्ञान और वाणिज्य में शीर्ष 25 कॉलेज केवल आठ शहरों तक ही सीमित हैं। ऐसे ही टॉप 25 इंजीनियरिंग और लॉ कॉलेज सिर्फ छह शहरों में हैं। मेडिकल की स्थिति थोड़ी बेहतर है और 25 टॉप मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो यह 11 शहरों में फैले हुए हैं।  

इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे विद्यार्थियों अथवा उनके अभिभावकों के लिए यह जानने में भी मदद करता है कि किन कॉलेजों में कोर्स फीस कम है और सबसे खास बात कि उनका प्लेसमेंट कैसा है। यही नहीं,पुराने कॉलेजों के साथ ही सर्वे में देश के उभरते कॉलेजों (वर्ष 2000 अथवा उसके बाद शुरू हुए) कॉलेजों को भी शामिल किया गया है। यह इश्यू 26 जून 2020 से स्टैंड्स पर उपलब्ध होगा।

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चुनौतीपूर्ण दौर का अखबारों ने कुछ यूं किया डटकर 'मुकाबला'

इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की चार तिमाहियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में तमाम अखबारों की ग्रोथ बढ़ी हुई दिखाई देती है।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
Newspapers

प्रिंट मीडिया के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन इन सबके बीच यदि हम इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की चार तिमाहियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में तमाम अखबारों की ग्रोथ बढ़ी हुई दिखाई देती है। फिर चाहे वह ‘कुल रीडरशिप’ (total readership) हो या ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ (average issue readership)।

उदाहरण के लिए, क्षेत्र के प्रमुख अखबार ‘पंजाब केसरी’ (Punjab Kesari) की ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही’ (IRS 2019 Q1) के अनुसार, जहां इस अखबार की ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ 936000 थी, वह तीसरी तिमाही (Q3) में बढ़कर 950000 हो गई। चौथी तिमाही (Q4) में कोविड-19 के बावजूद यह संख्या ज्यादा नहीं घटी और 872000 दर्ज की गई है।

इसी तरह की ग्रोथ स्टोरी ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की भी है। पहली तिमाही में इसकी टोटल रीडरशिप 1857000 थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1924000 और तीसरी तिमाही में 2167000 हो गई। यदि चौथी तिमाही की बात करें तो कोविड-19 के प्रभाव के कारण इस अखबार की टोटल रीडरशिप चौथी तिमाही में 2069000 दर्ज की गई है। इसी तरह इस अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप भी क्रमश: 493000, 500000, 596000 और चौथी तिमाही में बढ़कर 634000 हो गई है।  

वहीं, ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) की बात करें तो इस अखबार की टोटल रीडरशिप पहली तिमाही में 1819000 थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1922000 और तीसरी तिमाही में 1971000 हो गई। चौथी तिमाही में कोविड-19 के बावजूद इस अखबार की टोटल रीडरशिप 1721000 पर बनी हुई है। इस क्षेत्र में दैनिक जागरण के एवरेज इश्यू रीडरशिप पहली तिमाही में 446000 थी जो दूसरी तिमाही में थोड़ी घटकर 436000 हो गई, लेकिन तीसरी तिमाही में इसने तेजी से बढ़त बनाई और अब तक के सबसे उच्च स्तर 466000 पहुंच गई। चौथी तिमाही में कोविड-19 के वावजूद यह 446000 जैसे प्रभावशाली स्तर पर है।  

हालांकि, इन सबके बीच ‘दैनिक सवेरा’ (Dainik Savera) की ग्रोथ में कमी देखने को मिल रही है। पहली तिमाही में जहां इसकी टोटल रीडरशिप 858000 थी, वहीं, दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही में इसमें काफी बदलाव देखने को मिला। तीसरी तिमाही में इस अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप 381000 थी, जो चौथी तिमाही में घटकर 361000 पर आ गई।

यदि हम पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण को देखें तो उनकी महत्वपूर्ण ऑनलाइन मौजूदगी है। ऐसे में कोविड-19 के दौरान उनके आंकड़ों में आई क्षणिक कमी ने उनके कोर रीडरशिप बेस को प्रभावित नहीं किया है। तीनों अखबार नए परिदृश्य में पाठकों को अपने साथ फिर जोड़ने में सफल रहे हैं। इसके विपरीत दैनिक सवेरा पूर्ववत बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह मीडिया हाउस इस चुनौतीपूर्ण समय को एडजस्ट करने में विफल रहा है। नए रीडरशिप ट्रेंड को एडजस्ट करने में विफल रहने की वजह से दैनिक सवेरा अपने रीडरशिप बेस को खोने का जोखिम उठा रहा है।

इस बारे में दैनिक सवेरा के मुख्य संपादक शीतल विज ने माना कि अखबार की रीडरशिप में काफी कमी आई है और वे नई स्ट्रैटेजी लाने के साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। विज का कहना है, ‘हमारी रीडरशिप कोविड-19 के कारण प्रभावित हुई है और अब हम अपनी ऑनलाइन मौजूदगी की दिशा में काम कर रहे हैं।’ इंडियन रीडरशिप सर्वे की चौथी तिमाही में दैनिक सवेरा के कम आंकड़ों के बारे में उन्होंने आईआइएस डाटा को ही दोषी ठहराया और इसकी वैधानिकता व पारदर्शिता पर सवाल उठाया। इसके साथ ही उनका यह भी कहना था कि वह आईआरएस के कामकाज को पूरी तरह से नहीं समझते हैं। विज के अनुसार, ‘आईआरएस के कामकाज का अपना तरीका है, मुझे नहीं पता कि आईआरएस में किस तरह का काम हो रहा है।’  

इस बारे में आईआरएस की टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन विक्रम सखूजा का कहना है, ‘ आईआरएस 3.3 लाख उत्तरदाताओं (respondents) के नमूने पर आधारित है। हमारे पास एक सत्यापन समिति है जो हर दौर के आंकड़ों को जारी करने से पहले एक कड़ी जांच करती है। रिपोर्ट जारी होने के बाद कुछ पब्लिकेशंस इन आंकड़ों से खुश नहीं होते हैं। हम उन्हें प्रश्न उठाने का मौका देते हैं और जिनका अध्ययन के डिजाइन के मापदंडों के तहत उत्तर दिया जाता है।’

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42 साल पुरानी ये लोकप्रिय मैगजीन अब हो रही बंद, लोगों ने कहा- एक युग का अंत

कोरोना अब भारत की अर्थव्यवस्था पर तेजी से असर डाल रहा है। इसकी वजह से मीडिया इंडस्ट्री भी काफी प्रभावित हुई है, जिसके चलते कई मीडियाकर्मियों को अपनी जॉब से हाथ धोना पड़ा है

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2020
cricketSamrat

कोरोनावायरस अब भारत की अर्थव्यवस्था पर तेजी से असर डाल रहा है। इसकी वजह से मीडिया इंडस्ट्री भी काफी प्रभावित हुई है, जिसके चलते कई मीडियाकर्मियों को अपनी जॉब से हाथ धोना पड़ा है, तो कई कंपनियों को अपने एडिशन तक बंद करने पड़े हैं। ऐसे में क्रिकेट की खबरों के दीवानों के लिए बुरी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में 42 साल से क्रिकेट की हर खबर देने वाली लोकप्रिय मैगजीन ‘क्रिकेट सम्राट’ बंद होने जा रही है।

अंग्रेजी दैनिक ‘मिडडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेट सम्राट (Cricket Samrat) के प्रकाशक ने इसे बंद करने की घोषणा कर दी है। इससे खेलप्रेमी, खासकर क्रिकेट के दीवाने खासे दुखी हैं। कुछ ने तो इसे एक युग का अंत करार दिया है।

बता दें कि पहली बार ‘क्रिकेट सम्राट’ मैगजीन का प्रकाशन नवंबर 1978 में हुआ था। लेकिन कुछ ही वर्षों में यह क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय मैगजीन बन गई। लोग बेसब्री से इसका इंतजार करते थे। इस मैगजीन में खेल की खबरों के साथ-साथ प्रमुख खिलाड़ियों के इंटरव्यू भी छपते थे। इससे लोग अपने चहेते सितारों की निजी पसंद, नापसंद, संघर्ष से लेकर तमाम बातें जान पाते थे।

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अब कुछ इस तरह मुंबई मार्केट में अपनी सेवाएं देगा The Hindu

बताया जाता है कि अपने नेशनल एडिशन के जरिये वह यहां के मार्केट में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
The Hindu

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन का असर तमाम उद्योग-धंधों के साथ मीडिया पर भी पड़ रहा है। ्कई मैगजींस को तो अपने प्रिंट एडिशन को फिलहाल बंद करने का निर्णय भी लेना पड़ा है। इस बीच खबर है कि अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ (The Hindu) अपना मुंबई एडिशन बंद कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अखबार ने मुंबई में कार्यरत अपने 20 से ज्यादा पत्रकारों को इस्तीफा देने के लिए कहा है। अखबार का मुख्यालय चेन्नई में है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अखबार अब नेशनल एडिशन के तौर पर मुंबई के मार्केट में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा। यही नहीं, मुंबई के लिए डिजिटल के मामले में भी समान स्ट्रैटेजी अपनाई जाएगी। 

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