फ्रंट पेज पर शीर्षक के मामले में आज इन दो अखबारों का पलड़ा रहा भारी

जैकेट विज्ञापन के कारण नवभारत टाइम्स में आज तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। दैनिक जागरण के पाठकों को आज दो फ्रंट पेज पढ़ने को मिले हैं।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 07 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 07 March, 2020
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एक तरफ कोरोना वायरस दहशत फैलाए हुए है तो दूसरी तरफ यस बैंक के खाताधारक भी दहशत में हैं। यह दोहरी ‘दहशत’ आज दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबारों में प्रमुखता से है। सबसे पहले बात करते हैं हिन्दुस्तान की, जहां फ्रंट पेज पर खबरों के लिए केवल आधा पेज ही जगह मिल सकी है। ‘खाताधारक खौफ में, सरकार सक्रिय’ शीर्षक के साथ यस बैंक के संकट को लीड लगाया गया है। इसके पास ही ‘सांसत’, ‘सख्ती’ और ‘सुनवाई’ टैग वाली तीन खबरों को दो-दो कॉलम में उतारा गया है। मसलन, कोरोना का एक और संक्रमित मिला, भ्रष्ट बाबुओं को नहीं मिलेगा पासपोर्ट और भड़काऊ भाषण के मामले 12 को सुनेगा कोर्ट।

केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया जाता है और उसके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाती है तो वह पासपोर्ट हासिल नहीं कर पाएगा। यह निश्चित तौर पर एक अच्छा फैसला है। मौसम की करवट को भी पेज पर बड़ा स्थान मिला है। दिल्ली-एनसीआर में बारिश से ठंड लौट आई है, हालांकि ये बारिश किसानों के आंसू निकालने वाली है। इसके अलावा, पेज पर चार सिंगल समाचार हैं। इनमें अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, निर्भया एवं पहलूखान मामला प्रमुख है।

अब अमर उजाला का रुख करें तो यहां फ्रंट पेज की शुरुआत टॉप बॉक्स से हुई है, जिसमें भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले को रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि मुआवजा ठुकराया तो भूमि अधिग्रहण को चुनौती नहीं दी जा सकती। लीड कोरोना की दहशत है, पीड़ितों की बढ़ती संख्या के बीच केंद्र सरकार ने लोगों से सामूहिक कार्यक्रमों से दूर रहने को कहा है। तीसरी बड़ी खबर के रूप में यस बैंक का संकट है।

सरकार खाताधारकों को भरोसा दिला रही है कि उनका पैसा सुरक्षित है। इंसान ही नहीं भगवान जगन्नाथ के भी 545 करोड़ रुपए बैंक में फंसे हुए हैं। ईडी ने कल बैंक के संस्थापक राणा कपूर के निवास पर छापेमारी की। वहीं, पहलूखान मामले में दो नाबालिग दोषी करार दिए गए हैं, इस खबर के साथ ही निर्भया कांड में दोषी मुकेश की नई पैंतरेबाजी को पाठकों तक पहुंचाया गया है। मुकेश ने फांसी से बचने के लिए सुधारात्मक याचिका की अनुमति मांगी है। एंकर में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पीएम मोदी के विपक्ष पर हमले को जगह मिली है।

नवभारत टाइम्स पर आज भी विज्ञापनों की ‘बरसात’ हुई है। जैकेट विज्ञापन के चलते तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है और वहां भी ज्यादा खबरों की गुंजाइश नहीं बन सकी है। पेज की शुरुआत यस बैंक संकट से हुई है। हालांकि, शीर्षक कुछ अटपटा दिखाई दे रहा है। खबर का शीर्षक कहता है ‘यस बैंक की ना से परेशानी’ अब यहां कौन सी ‘ना’ का जिक्र हो रहा है, समझना मुश्किल है।

लीड कोरोना की दहशत है। दिल्ली में हुई बारिश से वायरस के तेजी से फैलने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। वहीं, पीएम मोदी के बयान को भी प्रमुखता मिली है, जिनका कहना है कि अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना बड़ी चुनौती, मिलकर लड़ें। इसके अलावा सोशल मीडिया पर दोस्ती करने वालों को सावधान करती खबर भी पेज पर है।

इसके बाद चलते हैं दैनिक भास्कर पर, जहां आज फ्रंट पेज पर कोई बड़ा विज्ञापन नहीं है। लीड यस बैंक संकट है, जिसे बेहतरीन शीर्षक के साथ विस्तार से पाठकों के समक्ष रखा गया है। लीड के ऊपर पूरे सात कॉलम में रंगीन बॉक्स है, जिसमें बैंक संकट से बाजार में फैले ‘वायरस’ का जिक्र है। कोरोना की दहशत दूसरी बड़ी खबर है। वहीं, निर्भया के दोषी की पैंतरेबाजी, मौसम का बदला मिजाज और दिल्ली हिंसा पर संसद का हंगामा भी प्रमुखता के साथ पेज पर है।

इसके अलावा, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका और शाहीन बाग में मिले शवों के बारे में भी पाठकों को बताया गया है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया ने अयोध्या पर क्यूरेटिव याचिका दायर की है। वहीं, शाहीन बाग में अलग-अलग स्थानों पर तीन शव मिलने से हडकंप मच गया है। एंकर में टाइम मैगज़ीन को रखा गया है, जिसने अपना अंक उन महिलाओं के नाम समर्पित किया है, जिनकी उसके द्वारा अनदेखी की गई।   

वहीं, दैनिक जागरण की बात करें तो आज भी दो फ्रंट पेज बने हैं। पहला फ्रंट पेज यस बैंक संकट के नाम है जबकि दूसरे की शुरुआत भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले वाले टॉप बॉक्स से हुई है। लीड कोरोना की दहशत है।

पीएम मोदी के भाषण, मौसम की करवट के साथ ही भ्रष्ट कर्मियों पर लगाम कसने की सरकार की तैयारी को भी अखबार ने प्रमुखता के साथ पेज पर रखा है। इसके अलावा, संसद में हंगामा भी पेज पर है। एंकर में कोरोना वायरस के खौफ से बाजार के बिगड़ते हाल को रखा गया है।

सबसे आखिरी में रुख करते हैं राजस्थान पत्रिका का। लीड यस बैंक संकट और उसके बाजार पर हुए प्रभाव को लगाया गया है। खबर का शीर्षक ‘ग्राहक दिखे रोते, बाजार ने लगाये गोते’ भी इसी के अनुरूप है।

कोरोना की दहशत को अखबार ने बड़ी जगह दी है। इसके अलावा संसद में हंगामे सहित कुछ अन्य खबरें भी पेज पर हैं, लेकिन निर्भया के दोषी और भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तवज्जो नहीं दी गई है। एंकर में चांद की स्पेलिंग पर बहस को रखा गया है।   

आज का ‘किंग’ कौन?

1: लेआउट के मामले में आज दैनिक भास्कर अव्वल है। वहीं, दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका को छोड़कर बाकी अखबारों ने भी आकर्षक फ्रंट पेज तैयार किया है।

2: खबरों की प्रस्तुति की बात करें तो यहां भी बाजी दैनिक भास्कर के नाम रही है।

3: शीर्षक को कलात्मक बनाने के लिहाज से आज राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर संयुक्त रूप से विजेता रहे हैं। दैनिक भास्कर ने जहां ‘भगवान का भरोसा भी टूटा’ शीर्षक से कलात्मकता का बेहतरीन नमूना पेश किया है, वहीं राजस्थान पत्रिका ने तुकबंदी पर हेडलाइन बनाई है। प्रयास नवभारत टाइम्स ने भी किया है, लेकिन यस बैंक संकट का शीर्षक एक बार में समझना मुश्किल है।

4: खबरों की जहां तक बात है, तो राजस्थान पत्रिका फिर पीछे रह गया है।

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HT की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने संस्थान को कहा अलविदा, बताई ये वजह

अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी घोषणा की है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
Padma Rao

अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी घोषणा की है। इस पोस्ट में पद्मा राव ने स्पष्ट किया है कि उन्हें कंपनी द्वारा हटाया नहीं गया है।

सोशल मीडिया पर की गई अपनी पोस्ट में राव ने बताया है कि वह एक ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ दिल्ली में एक इंटरनेशनल एडिटोरियल असाइनमेंट संभालने जा रही हैं।

पद्मा राव की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के अनुसार, ‘एचटी ने कल कथित तौर पर कई लोगों को हटा दिया है (यदि यह सही है तो यह काफी बुरा है, लेकिन इस बारे में सिर्फ वॉट्सऐप पर उड़ती हुई खबरें आ रही है और मुझे इस बारे में कहीं से कोई पुष्टि नहीं हुई है)। हालांकि, मैं आपको बता दूं कि मुझे हटाया नहीं गया है। मैंने पिछले हफ्ते खुद ही एचटी से इस्तीफा दे दिया था और एक जून से मैं नई पारी शुरू करने जा रही हूं। मैं एक ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ दिल्ली में एक इंटरनेशनल एडिटोरियल असाइनमेंट संभालने जा रही हूं। यह नौकरी एक महीने पहले ही फाइनल हो गई थी और मैं अपना इस्तीफा सौंपने से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार कर रही थी। मैं एचटी को बहुत भारी मन से छोड़ रही हूं। मुझे अपनी नई नौकरी को काफी चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होने की उम्मीद है। आपको इस बारे में जल्द ही और जानकारी मिल जाएगी।’

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कोरोना ने छीन ली ‘नईदुनिया’ अखबार के प्रधान संपादक राजेन्द्र तिवारी की जिंदगी

हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि इस महामारी की चपेट में आकर अखबार के प्रधान संपादक राजेन्द्र तिवारी का निधन हो गया है

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
rajendra-tiwari

कोरोना की कवरेज में अहम भूमिका निभा रहे हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि इस महामारी की चपेट में आकर वरिष्ठ पत्रकार व अखबार के प्रधान संपादक राजेन्द्र तिवारी का निधन हो गया है। वे 82 वर्ष के थे। मिली जानकारी के मुताबिक, राजेन्द्र तिवारी भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे। कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे पिछले 4 दिनों से वेंटिलेटर पर थे।

बताया जा रहा है कि उनकी किडनी और लंग्स ने काम करना बंद कर दिया था, जिसके बाद आज (बुधवार) सुबह 8 बजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

बता दें कि ‘नईदुनिया’ इंदौर से बंटवारे के तहत भोपाल में दैनिक ‘नईदुनिया’ का मालिकाना हक नरेन्द्र तिवारी जी के बेटे राजेन्द्र तिवारी को मिला था। 1994 से वे लगातार भोपाल में दैनिक ‘नईदुनिया’ का प्रकाशन व संपादन कर रहे थे। वे अपने पीछे पुत्र अपूर्व तिवारी को छोड़ गए हैं। बुधवार दोपहर 12:30 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राजेन्द्र तिवारी के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पहले नईदुनिया इंदौर और बाद में वर्ष 1991 से भोपाल से दैनिक नईदुनिया के प्रकाशन में श्री राजेन्द्र तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मध्यप्रदेश की हिंदी पत्रकारिता में श्री राजेन्द्र तिवारी द्वारा दी गई सेवाएं स्मरणीय रहेंगी। वहीं मुख्यमंत्री ने स्व. राजेंद्र तिवारी की आत्मा की शांति और शोकाकुल तिवारी परिवार को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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इस अखबार के फ्रंट पेज पर न तो कोई खबर, न तस्वीर और न ही विज्ञापन, फिर भी आया चर्चाओं में

पूरी दुनिया में अपना कहर बरपा रहा कोरोना वायरस से संक्रमित होने के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका से हैं, जहां अभी तक करीब 16 लाख लोग इस वायरस की चपेट में चुके हैं

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Newspaper

पूरी दुनिया में अपना कहर बरपा रहा कोरोना वायरस से संक्रमित होने के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका से हैं, जहां अभी तक करीब 16 लाख लोग इस वायरस की चपेट में चुके हैं, जबकि मरने वालों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंच गई है। इस महामारी की गंभीरता को समझाने और जागरूक करने के लिए एक अखबार की अनूठी पहले दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।

दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स के फ्रंट पेज पर न तो कोई खबर छपी है, न तस्वीर और न विज्ञापन। अखबार का फ्रंट पेज पूरी तरह से इस महामारी से जान गवाने वाले अमेरिकियों को समर्पित कर दिया गया है। पृष्ठ पर कोरोना से मरने वाले लोगों के नाम छापे गए हैं, लिहाजा यह देखकर हर कोई हैरान रह गया।

अखबार ने फ्रंट पेज पर एक लाख मृतकों के नाम छापते हुए सिर्फ एक लाइन का संदेश लिखा है, करीब एक लाख मौतें, बेहिसाब क्षति। इसके बाद नीचे उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा गया है सूची में वो सिर्फ नाम नहीं थे, वो हम थे। 

अखबार ने फ्रंट पेज पर मृतकों के नाम क्यों प्रकाशित किए, इसपर उसने 'टाइम्स इनसाइडर' में एक लेख भी प्रकाशित किया है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादकों ने इस भयावह स्थिति को दर्शाने का फैसला किया। ग्राफिक्स डेस्क की असिस्टेंट एडिटर सिमोन लैंडन संख्याओं को इस रूप में रखना चाहती थीं जो यह तो दिखाए ही कि कितनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और यह भी किस वर्ग के लोगों की मौत हुई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के सभी विभाग के पत्रकार इस महामारी को कवर कर रहे हैं। सिमोन लैंडन कहती हैं, हमें पता था कि हम माइल स्टोन खड़ा करने जा रहे हैं। हमें पता था कि उन संख्याओं को रखने का कुछ तरीका होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक लाख डॉट या स्टिक फिगर पेज पर लगाने से आपको कुछ पता नहीं चलता कि वे कौन लोग थे और वे हमारे लिए क्या मायने रखते थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अखबार के पहले पन्ने पर जिन एक हजार लोगों के नाम छापे गए हैं, वे कुल मौतों का सिर्फ एक फीसदी हैं। अखबार का कहना है कि मृतकों की लिस्ट इतनी लंबी है कि यदि इसे छापा जाए तो अखबार के 12वें पेज तक सिर्फ मृतकों के नाम ही लिखे जा सकते हैं। अखबार ने इन लोगों का नाम, उम्र और पता लिखने के बाद उनके बारे में एक लाइन लिखकर उन्हें याद किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि इस वायरस से मरने वालों की संख्या के आधार पर अमेरिका पर इसके असर को नहीं समझा जा सकता। इस वायरस की अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

अखबार ने शनिवार की देर रात जैसे ही अपने फ्रंट पेज का स्क्रीनशॉट जारी किया, वह दुनिया भर में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। फेसबुक और ट्विटर पर काफी संख्या में लोगों ने इसे शेयर किया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मृतकों को याद करने के लिए इस अनूठे अंदाज पर अखबार को धन्यवाद ज्ञापित किया।  

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IRS: इन बड़ी वजहों से लगातार सफलता की इबारत लिख रहा दैनिक जागरण

पिछले दिनों 'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) द्वारा ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019’ की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4) के डाटा जारी किए गए हैं।

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
Dainik Jagran

पिछले दिनों 'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) द्वारा ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019’ की चौथी तिमाही (IRS 2019 Q4) के डाटा जारी किए गए हैं। यह रिपोर्ट इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पिछली तिमाही यानी पहली (Q1), दूसरी (Q2) और तीसरी तिमाही (Q3) के जारी किए गए डाटा पर आधारित है, जिसकी औसतन रिपोर्ट के बाद चौथी तिमाही के नतीजे तैयार किए गए हैं।

आइआरएस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देशभर के छह करोड़ 87 लाख पाठकों, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश के ही 3.9 करोड़ पाठक शामिल हैं, ने दैनिक जागरण को अपना पसंदीदा अखबार बताया है। सर्वे में दैनिक जागरण लगातार पूरे देश के समाचार पत्रों में शीर्ष पर बना हुआ है। देश में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अखबारों की लिस्ट में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से दैनिक जागरण की कुल रीडरशिप (total readership) 30 प्रतिशत ज्यादा बनी हुई है।  

‘आईपीजी मीडियाब्रैंड्स इंडिया’ (IPG Mediabrands India) के सीईओ शशि सिन्हा के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हिंदी मार्केट में दैनिक जागरण की काफी ग्रोथ हुई है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे मार्केट में जहां साक्षरता दर बढ़ी है और इसलिए वहां अखबार की रीडरशिप में भी इजाफा हुआ है।

सिन्हा का कहना है, ‘जागरण ने भी नए पाठकों पर काफी निवेश किया है। देश में अखबारों का कवर मूल्य इतना कम है कि कई बार अखबार सर्कुलेशन बंद हो जाता है, क्योंकि जब तक आपके पास स्थिर विज्ञापन रेवेन्यू नहीं होता है, तब आप जितनी बिक्री करते हैं, उतना ही आपको नुकसान होता है। दूसरों के विपरीत जागरण का सर्कुलेशन सिर्फ बढ़ा है,इसकी वजह से रीडरशिप भी बढ़ी है और उन्हें अपनी टॉप पोजीशन पर रहने में मदद मिली है।’

इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी, ब्रैंड और बिजनेस डेवलपमेंट) बसंत राठौड़ का कहना है, ‘पाठकों के लिए क्वालिटी कंटेंट तैयार करने पर किए गए मजबूत फोकस ने रीडरशिप की लिस्ट में नंबर वन रहने में मदद की है।’  उनका कहना है, ‘दैनिक जागरण के सात सरोकार इसकी एडिटोरियल पॉलिसी का हिस्सा है। ये सात सरोकार गरीबी उन्मूलन, स्वस्थ समाज, सुशिक्षित समाज, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और जनसंख्या नियोजन हैं। इन सरोकारों पर काम करने से लोगों से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।’

आईआरएस की चौथी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, दैनिक जागरण न सिर्फ टोटल रीडरशिप (Total Readership) बल्कि एवरेज इश्यू रीडरशिप (average issue readership) में भी नंबर वन है। चौथी तिमाही में इस अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप 16872000 पर पहुंच गई है। पिछले दो सर्वे (IRSs of 2017 और 2019) के दौरान अखबार की रीडरशिप लगातार 6.8 करोड़ और सात करोड़ रही है।

राठौड़ का कहना है, ‘दैनिक जागरण अपने सात सरकारों के साथ काफी बेहतर कंटेंट पाठकों को उपलब्ध कराता है। इसमें स्वास्थ्य से जुडे कॉलम के अलावा युवाओं पर केंद्रित सप्लीमेंट भी शामिल हैं, जिसमें रोजगार के अवसरों के बारे में भी बताया जाता है, इसके अलावा महिला पाठकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भी कंटेंट उपलब्ध कराया जाता है।’ विशेषज्ञों का कहना है कि अखबार की इतनी ज्यादा पाठक संख्या के कारण ही एडवर्टाइजर्स के लिए इसे नजरअंदाज करना काफी मुश्किल होता है। इसके अलावा कई अन्य कारक भी इसके पक्ष में काम करते हैं।

‘पीएचडी मुंबई’ (PHD Mumbai) के वाइस प्रेजिडेंट दिनेश व्यास के अनुसार, ‘दैनिक जागरण की रीडरशिप में लगातार वृद्धि इस तथ्य को दर्शती है कि लोकल कंटेंट ही किंग है, खासकर हिंदी भाषी मार्केट में। 11 राज्यों में 37 एडिशंस इसकी टोटल रीडरशिप में योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा यह उचित मूल्य पर उलब्ध है, जिसका लाभ भी पाठकों को मिल रहा है। दैनिक जागरण डिस्ट्रीब्यूटर्स के द्वारा अपने ग्राहकों के आवास या कार्यालयों से पुराने अखबारों को रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए इकट्ठा करने का काम भी करता है, जिसमें मासिक सब्सक्रिप्शन पर छूट मिलती है।’

व्यास का कहना है, ‘यह अखबार कई सालों से चल रहा है और पाठकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए यह सप्लीमेंट्स दे रहा है। पुरुष हो अथवा महिला, यह परिवार के सभी सदस्यों के लिए उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर कंटेंट उपलब्ध करा रहा है।’ विज्ञापन के मुद्दे पर व्यास ने कहा कि अखबार स्थानीय विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करता है, जिसमें छोटे एंटरप्रिन्योर्स से लेकर स्थानीय दुकानदार शामिल है, जो स्थानीय सप्लीमेंट्स में अपना विज्ञापन प्रकाशित करवाना चाहते हैं। इसके अलावा हिंदी भाषी मार्केट में इसकी ज्यादा रीडरशिप को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर के एडवर्टाइजर्स भी अपने विज्ञापन देते हैं।

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अखबारों की डोर-टू-डोर डिलीवरी के मामले में सरकार जल्द ले सकती है ये फैसला

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि अखबारों को घर-घर पहुंचाने पर रोक लगाने का फैसला कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लिया गया था।

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2020
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि मुंबई में अखबारों की घर-घर जाकर (डोर टू डोर) डिलीवरी पर लगाए गए प्रतिबंध को जल्द ही हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घर-घर अखबार पहुंचाने पर लगी रोक अस्थायी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में मौजूदा स्थिति का आकलन कर जल्द फैसला लिया जाएगा।

अखबार वितरकों के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि अखबारों को घर-घर पहुंचाने पर रोक लगाने का फैसला कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कई उद्योग, व्यवसाय, दुकानें और अन्य चीजें शुरू की गई हैं। अखबार हमारी दैनिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के चौथे चरण में रेड जोन तथा कोविड-19 कंटेनमेंट जोन पर ध्यान केंद्रित है। ठाकरे ने कहा कि महामारी को देखते हुए अखबार वितरण पर रोक है, लेकिन जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।

बैठक में अखबार वितरकों का कहना था कि आवासीय सोसायटियां अखबारों के घर पर वितरण की इजाजत नहीं दे रही हैं और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दुकानों पर अखबारों की बिक्री की जा रही है। इस पर ठाकरे ने कहा कि कोरोना स्वास्थ्य के लिए आपातकाल है। इसलिए अखबारों के वितरण पर प्रतिबंध लगाया है, फिर भी इसका जल्द से जल्द मार्ग निकाला जाएगा।

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समाचार पत्रों के प्रतिनिधिमंडल ने CM से की मुलाकात, रखी ये मांग

अंग्रेजी और तमिल के पांच प्रमुख पब्लिशर्स ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी से कैंप ऑफिस में मुलाकात की।

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2020
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अंग्रेजी और तमिल के पांच प्रमुख पब्लिशर्स ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी से कैंप ऑफिस में मुलाकात की। अंग्रेजी दैनिक ‘द हिन्दू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि इस दौरान सभी पब्लिशर्स ने सीएम की पार्टी एआईडीएमके के सांसदों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्यूजपेपर इंडस्ट्री को राहत पहुंचाने के लिए उनकी मांगों का समर्थन करें। दरअसल, COVID-19 महामारी के कारण न्यूजपेपर इंडस्ट्री को काफी नुकसान पहुंचा है।

बता दें कि पब्लिशर्स की ओर से, इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने पीएम से अखबारी कागज (न्यूज प्रिंट) पर सीमा शुल्क हटाने, बकाया विज्ञापन बिलों का तुरंत निपटान करने और विज्ञापन दरों में 100% की वृद्धि करने का आग्रह किया है। 

‘द हिन्दू पब्लिशिंग ग्रुप’ के डायरेक्टर एन. राम, ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप’ चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार सोंथालिया, ‘दिनमलार- कोयम्बटूर’ के पब्लिशर्स एल. आदिमूलम,  ‘डेली थांथी’ के डायरेक्टर एस. बालासुब्रमण्यम आदित्यन और ‘काल पब्लिकेशंस’ (दिनाकरन) के मैनेजिंग डायरेक्टर  आर.एम.आर. रमेश ने सीएम को एक मांग पत्र सौंपा। 

इस दौरान, समाचार पत्र के प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि न्यूजपेपर इंडस्ट्री ने ऐड रेवन्यू न होने की वजह से पिछले दो महीनों के दौरान लगभग 5,000 करोड़ का नुकसान उठाया है। उस इंडस्ट्री का, जो सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी के दरमियान आम जनता तक सही खबरें पहुंचा रहा है, उसका  कोविड-19 के प्रसार की वजह से दुनियाभर में भारी नुकसान हो रहा है।

समाचार पत्र के प्रतिनिधित्व मंडल ने चिंता जताते हुए कहा कि भविष्य में न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए इसे संचालन जारी रख पाना एक बड़ी चुनौती होगी। 

सोशल मीडिया के युग में, जहां गलत सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, वहां समाचार पत्रों ने विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों की सेवा की है। उन्होंने कहा कि अदालतों में केवल समाचार पत्रों की ही रिपोर्ट्स को सबूत के तौर पर लिया जा सकता है।

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अब मुफ्त में पढ़ने को नहीं मिलेगा टाइम्स ऑफ इंडिया का e-paper, चुकानी होगी यह कीमत

शुक्रवार से यह नई व्यवस्था लागू की गई है और कुछ ही घंटों में सैकड़ों लोगों ने इस सर्विस के लिए साइनअप (signing up) भी कर लिया

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2020
TOI

अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ (The Times of India) से एक बड़ी खबर है। खबर ये है कि अब इस अखबार का ई-पेपर पढ़ने के लिए पाठकों को इसे सबस्क्राइब करना होगा, जिसके लिए शुल्क भी चुकाना होगा। यानी बिना सबस्क्राइब किए आप इसे नहीं पढ़ सकेंगे। 15 मई से यह नई व्यवस्था लागू की गई है और कुछ ही घंटों में सैकड़ों लोगों ने इस सर्विस के लिए साइनअप (signing up) भी कर लिया।   

न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अखबार का ई-पेपर अभी तक देश में पाठकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध था, जिसके लिए अब हर महीने 199 रुपए (जीएसटी अलग से) चुकाने होंगे। इसके साथ ही ‘टाइम्स प्राइम’, जिसमें एक्सक्लूसिव स्टोरी होती हैं, वह भी सबस्क्राइबर्स के लिए उपलब्ध होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ का ई-पेपर तीन डॉलर प्रतिमाह अथवा 30 डॉलर सालाना के शुल्क पर सबस्क्राइब किया जा सकता है। बता दें कि हाल ही में इंडियन रीडरशिप सर्वे की चौथी तिमाही (IRS Q4 2019) के आंकड़ों के अनुसार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की कुल रीडरशिप 1.73 करोड़ है।

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न्यूजपेपर इंडस्ट्री की चुनौतियों पर HT Media की चेयरपर्सन शोभना भरतिया ने कही ये बात

कोरोनावायरस (कोविड-19) दुनियाभर में तमाम लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन किया हुआ है।

Last Modified:
Friday, 15 May, 2020
Shobhana Bhartia

कोरोनावायरस (कोविड-19) दुनियाभर में तमाम लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन किया हुआ है। इस लॉकडाउन को तकरीबन दो महीने होने जा रहे हैं। देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से तमाम उद्योग धंधे बंद पड़े हुए हैं। मीडिया इंडस्ट्री भी इससे काफी प्रभावित हो रही है। हालांकि इस दौरान न्यूज कंटेंट की खपत (consumption) में काफी इजाफा देखने को मिला है, लेकिन अखबारों के रेवेन्यू में नाटकीय रूप से गिरावट आई है।

कोरोनावायरस और लॉकडाउन की वजह से कई स्थानों खासकर दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख मार्केट्स में सर्कुलेशन बाधित हो गया है और विज्ञापन लगभग गायब हो गए हैं। हालांकि, स्थिति को सामान्य करने के लिए कुछ कदम उठाए भी गए हैं, लेकिन न्यूज पेपर बिजनेस को वापस ट्रैक पर आने में कुछ समय लगेगा।

वरिष्ठ पत्रकार और सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18) की एंकर अनुराधा सेनगुप्ता ने ‘THE MEDIA DIALOGUES-VISION 2020’ के तहत ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) की चेयरपर्सन और एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतिया से अखबार के बिजनेस पर कोविड-19 के प्रभाव और इस अखबारी बिजनेस के भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की।

 इस बातचीत के दौरान शोभना भरतिया का कहना था कि इस दौरान कंटेंट का इस्तेमाल (Consumption) काफी बढ़ा है, लेकिन अखबारों के रेवेन्यू का मुख्य आधार विज्ञापन काफी कम हो गया है। इस दौरान अखबार तमाम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस दौरान शोभना भरतिया का कहना था कि भारत में अखबार पूरी तरह से एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर निर्भर रहते हैं।

कार्यक्रम का पूरा विडियो आप यहां देख सकते हैं।

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सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व समझाने के लिए अखबार ने प्रकाशित किया ये अनूठा विज्ञापन

एक अखबार ने सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व को समझाने के लिए एक अलग तरह का विज्ञापन प्रकाशित किया है

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2020
newspaper

दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी का कहर जारी है। इस वायरस के कारण लाखों लोगों की जान जा चुकी है। वायरस के फैलने से रोकने के लिए जहां एक ओर लॉकडाउन लागू किया गया है, वहीं सोशल डिस्टेंसिंग का भी कड़ाई से पालन करवाया जा रहा है। वहीं इस बीच, यूरोपीय देश फिनलैंड के एक अखबार ने सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व को समझाने के लिए एक अलग तरह का विज्ञापन प्रकाशित किया है, जिसे सही ढंग से तभी पढ़ा जा सकता है जब इसे पढ़ने वाला इससे कम से कम 6 फीट की दूरी पर हो।

बता दें कि फिनलैंड (Finland) के अखबार ‘हेलसिंगिन सनोमैट’ (Helsingin Sanomat) ने एक अनोखा विज्ञापन प्रकाशित किया है, जिसे करीब से पढ़ना असंभव है। यानी इस विज्ञापन को प्रकाशित करने में अखबार प्रशासन ने ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया कि कोई भी इस पास से इसे नहीं पढ़ सकता है। हालांकि इसे 6 फीट की दूरी से ही पढ़ा जा सकता है, जिससे इसके शब्द स्पष्ट दिखाई देते हैं।

डिजिटल विज्ञापन एजेंसी 'द स्टेबल' के अनुसार फिनलैंड के अखबार ने पूरे पन्‍ने पर सोशल डिस्‍टेंसिंग के महत्‍व को समझाने के मकसद से इसे प्रकाशित किया है, जिसमें लोगों को एक-दूसरे से दूर रहने के लिए कहा गया है और बताया गया है कि एक-दूसरे से दूर रहने से ही सभी सुरक्षित रहेंगे।

वहीं, अमेरिकी कंपनी नेमन लैब ने भी अखबार की इस अनोखी पहल पर ट्वीट किया कि एक फिनलैंड के अखबार ने एक ऐसा प्रिंट ऐड प्रकाशित किया, जिसे केवल 6 फीट की दूरी से ही पढ़ जा सकता है।

इस पर अखबार के मैनेजमेंट टीम ने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करने की बात लगातार कह रहे हैं, जिसका पाललन फिनलैंड के अधिकांश लोग कर भी रहे हैं, लेकिन अब भी कई लोग ऐसे हैं, जो इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। लिहाजा ऐसे लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के लिए ही यह अनोखी पहल की गई है। फिलहाल अखबार के इस अनोखे तरीके को काफी सराहा जा रहा है। 

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हिन्दुस्तान से केके उपाध्याय का इस्तीफा, अब इनके हाथों में होगी बिहार की कमान

हिंदी अखबार ‘हिन्दुस्तान’ (Hindustan) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि बिहार के स्टेट हेड केके उपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2020
Hindustan

हिंदी अखबार ‘हिन्दुस्तान’ (Hindustan) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि बिहार के स्टेट हेड केके उपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल वे नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं। रेजिडेंट एडिटर के पद पर कार्यरत विनोद बंधु को अब यह जिम्मेदारी दी गई है। प्रिंट लाइन में भी स्थानीय संपादक के रूप में विनोद बंधु का नाम जा रहा है।

समाचार4मीडिया के साथ एक बातचीत में केके उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने पारिवारिक कारणों से अपना इस्तीफा दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में फिलहाल खुलासा नहीं किया है।

बता दें कि बिहार से पहले केके उपाध्याय हिन्दुस्तान, उत्तर प्रदेश के हेड थे। करीब एक साल पहले उनका तबादला यहां किया गया था। वे पटना से अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

वहीं, विनोद बंधु की बात करें तो उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 35 साल का अनुभव है। मूलरूप से बिहार में मधुबनी के रहने वाले विनोद बंधु की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वहीं पर हुई है। उन्होंने एक स्थानीय अखबार से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की थी। यहां करीब एक साल तक काम करने के बाद उन्होंने ‘नवभारत टाइम्स’ जॉइन कर लिया। इसके बाद तमाम जगह अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने वर्ष 2010 में हिन्दुस्तान अखबार का दामन थामा था।

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