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महामारी के बीच मैगजींस ने कुछ इस तरह लड़ी अपने अस्तित्व की ‘जंग’

महामारी ‘कोरोनावायरस’ (कोविड-19) और लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों के साथ ही प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

महामारी ‘कोरोनावायरस’ (कोविड-19) और लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों के साथ ही प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हालांकि, इस परेशानी के बीच डिजिटल फॉर्मेट की ओर रुख कर मैगजीन बिजनेस काफी हद तक इससे अलग रहने में कामयाब रहा है। जिन पाठकों को अपने वेंडर्स से मैगजींस नहीं मिलीं, उनमें से अधिकांश ने इन्हें ऑनलाइन पढ़ा है। यही नहीं, लॉकडाउन के बाद देश में पहले अनलॉक के बाद भी ज्यादातर मैगजींस द्वारा कम से कम तीन महीने तक और ‘डिजिटल ऑनली’ फॉर्मेट में ही उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है।

महामारी का यह दौर जहां इंडस्ट्री के लिए काफी मुश्किलों भरा रहा है, वहीं मैगजीन बिजनेस से जुड़े लोगों का कहना है कि डिजिटल कंटेंट में नए-नए प्रयोग और क्रिएटिव पैकेजिंग ने इस बिजनेस को बचाए रखा है। इसके अलावा, तिमाही, छमाही और वार्षिक सबस्क्रिप्शन ने यह सुनिश्चित किया है कि अधिकांश ब्रैंड्स के लिए मैगजीन का सर्कुलेशन रेवेन्यू बरकरार रहे। हालांकि, कुछ एडवर्टाइजर्स ने अभी अपने कदम पीछे खींच रखे हैं, लेकिन इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अधिकांश पाठकों द्वारा इस मीडियम को पसंद किए जाने के बाद मार्केटर्स के भी इस माध्यम के साथ कंफर्टेबल हो जाने की संभावना है।         

उदाहरण के लिए ‘अमर चित्र कथा’ (Amar Chitra Katha) के ऐप पर यूजर्स की संख्या में काफी ग्रोथ देखी गई है। इस बारे में ‘अमर चित्र कथा प्राइवेट लिमिटेड’ की प्रेजिडेंट और सीओओ प्रीति व्यास का कहना है, ‘हमने अपने ऐप को 30 दिनों के लिए फ्री कर दिया और हमें इसके काफी अभूतपूर्व परिणाम देखने को मिले। एक लाख यूजर्स से बढ़कर यह संख्या 5.5 लाख हो गई।’ ‘अमर चित्र कथा’ की ओर से ‘Tinkle comics’, ‘National Geographic’ मैगजीन और ‘National Geographic Traveller India’ भी पब्लिश की जाती है।  

ब्रैंड ने अपनी कंटेंट ऑफरिंग में किस तरह की नई पहल कीं और प्रिंट एडिशन से पाठकों तक ऑडियो और विजुअल भी उपलब्ध कराया, के बारे में व्यास का कहना है कि प्रिंटिंग भले ही महंगी हो लेकिन आइडियाज नहीं। यही नहीं, रीडर्स को अपने साथ जोड़े रखने के लिए पब्लिशर्स ने दो इश्यू के बीच अंतर को भी कम किया।  

व्यास का कहना है, ‘प्रिंटिंग और सर्कुलेशन को लेकर तमाम बाध्यताएं होती हैं, जबकि ऑनलाइन पब्लिशिंग में ऐसा नहीं है। इसलिए हम अपने पाठकों को 15 दिन तक का इंतजार नहीं कराना चाहते थे। दो हफ्ते में 48 पेज पाठकों को उपलब्ध कराने के बजाय हमने हर हफ्ते 20 पेज उपलब्ध कराए। इससे हमने पाठकों को जोड़े रखा।’

वहीं, नवाचारों (innovations) के बारे में केरल से पब्लिश होने वाली फैमिली एंटरटेनमेंट मैगजीन ‘मनोरमा वीकली’ (Manorama Weekly) ने पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रत्येक इश्यू के साथ सब्जी के बीच मुफ्त में बांटे। इस बारे में ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी का कहना है कि इस स्ट्रैटेजी की बदौलत मैगजीन की बिक्री में 30 प्रतिशत का इजाफा हो गया। चांडी के अनुसार, ‘यह बीज राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए थे, जिनका उद्देश्य स्थानीय उपज को बढ़ावा देना था, ताकि लोग अपनी छत पर या खाली जगह में सब्जियां उगा सकें। इसके साथ ही मैगजीन ने विभिन्न आर्टिकल्स के जरिये यह भी बताया कि कैसे इन बीजों को लगाना है और उनकी देखभाल करनी है। इस पहल की जबर्दस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली और पाठक हमसे जुड़े रहे।’  

‘इंडियन रीडरशिप सर्वे की चौथी तिमाही’ (IRS 2019 Q4 figures) के आंकड़ों के अनुसार, देश में टॉप 20 मैगजीन में से करीब आधी के पास रीडर्स बढ़े हैं। उदाहरण के लिए, पिछली चार तिमाहियों में ‘इंडिया टुडे’ (अंग्रेजी) की ग्रोथ में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। ‘The Sportstar’, ‘General Knowledge Today’, ‘Diamond Cricket Today’, ‘Ananda Vikatan’, ‘Champak (Hindi)’, ‘Filmfare’, ‘Balarama’ और ‘Kumudam’ आदि मैगजींस की ग्रोथ पिछली तिमाहियों में लगातार बढ़ी है। लेकिन बात जब अर्थव्यवस्था की हो तो अन्य तमाम बिजनेस की तरह कोविड-19 के प्रभाव से मैगजीन भी अछूती नहीं रही हैं। अमर चित्र कथा ने सिर्फ 10 प्रतिशत बिजनेस किया है, जैसा कि वे आमतौर पर करते हैं। इस बारे में व्यास का कहना है कि हमारी एडिटोरियल टीम द्वारा की गईं वर्कशॉप की काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। जिन लोगों ने इसे अटैंड किया उन्होंने एक सेशन के लिए 500 और पांच दिन के सेशन के लिए 1499 रुपए का भुगतान किया। 30-40 प्रतिभागियों के साथ ये वर्कशॉप्स अच्छी चल रही हैं और कुछ खर्चों को पूरा भी कर रही हैं। वहीं एडवर्टाइजर्स के बारे में व्यास ने उम्मीद जताई कि अगले तीन से छह महीनों में एडवर्टाइजर्स वापस आएंगे।

वहीं, केरल के बारे में चांडी का कहना है, ‘स्थानीय पाठकों ने मैगजींस पढ़ना कभी बंद नहीं किया है। चूंकि हमारे पास कंटेंट है, पाठक हैं और राज्य के समर्थन के साथ अच्छी पहुंच है, इसकी वजह से हम कोविड-19 का सामना अच्छी तरह से कर सके हैं। ब्रैंड्स को बेहतर रिटर्न के लिए इस तरफ देखना चाहिए। एजुकेशनल से लेकर ऑटोमोबाइल्स, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ सेक्टर्स मैगजींस में पहले विज्ञापन देंगे।’

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लग्जरी ब्रैंड्स भी मैगजींस पर अपने विज्ञापन देना जारी रखेंगे, क्योंकि अब बिजनेस दोबारा से शुरू होने लगेंगे। हालांकि, एडवर्टाइजर्स के इस वर्ग को लुभाने के लिए मैगजींस को अपनी पेशकश में तमाम नई पहल करनी होंगी।

रीडर्स और एडवर्टाइजर्स को लेकर कोविड-19 के बाद की स्ट्रैटेजी के बारे में ‘Dentsu One’ के प्रेजिडेंट हरजोत सिंह नारंग का कहना है, ‘कोविड-19 के बाद मार्केट में बने रहने के लिए मैगजींस को लगभग अल्ट्रा ग्लैमरस बुक्स की तरह होना पड़ेगा। अपने अपनी सोच और कंटेंट में और ज्यादा गहराई लानी पड़ेगी।’ उनका कहना है, ‘अल्ट्रा प्रीमियम और लग्जरी ब्रैंड्स चुनिंदा मैगजींस का इस्तेमाल करना और उन्हें विज्ञापन देना जारी रखेंगे।’


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