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‘चित्रलेखा’ के 75 वर्ष पूरे: अमित शाह बोले- समाज पर कई तरह से असर डालती है जागरूक पत्रिका
अमित शाह ने कहा कि साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाने और अंग्रेजी के प्रभाव वाले दौर में गुजराती साहित्य को जीवंत बनाए रखने के लिए आज ‘चित्रलेखा’ की जरूरत पहले से कहीं अधिक है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि केवल वही पत्रिका अपने पाठकों से मजबूत जुड़ाव बनाए रख सकती है, जो किसी पवित्र उद्देश्य, साहित्य के प्रति समर्पण और समाज की समस्याओं को हल करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित हो, जैसी कि लोकप्रिय गुजराती साप्ताहिक ‘चित्रलेखा’ है।
यह बात शाह ने पत्रिका की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि एक जागरूक पत्रिका समाज पर कई तरह से असर डालती है।
अमित शाह ने कहा कि साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाने और अंग्रेजी के प्रभाव वाले दौर में गुजराती साहित्य को जीवंत बनाए रखने के लिए आज ‘चित्रलेखा’ की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने याद दिलाया कि वाजू कोटक ने इसकी स्थापना 1950 में की थी।
उन्होंने कहा, ‘पाठकों से ऐसा जुड़ाव बहुत मुश्किल होता है। यह तभी संभव है जब किसी प्रकार का लाभ लेने की मंशा न हो, उद्देश्य की पवित्रता हो, साहित्य के प्रति समर्पण हो और समाज की समस्याओं को सुलझाने की सच्ची इच्छा हो और ये सभी बातें ‘चित्रलेखा’ में हैं।’’
शाह ने कहा कि पत्रिका ने अपने 75 वर्षों के सफर में गुजरात के साहित्य, सामाजिक जीवन और समस्याओं के साथ-साथ देश और समाज को भी प्रतिबिंबित किया है।
उन्होंने कहा, ‘समाज की सभी समस्याओं को निर्भीकता से दिखाना, केवल सवाल उठाना नहीं बल्कि समाधान भी सुझाना… मुझे अच्छी तरह याद है जब गुजरात में आरक्षण आंदोलन के दौरान समाज में भारी उथल-पुथल थी, तब ‘चित्रलेखा’ ने समाज को जोड़ने की मशाल थामी थी।’’
उन्होंने कहा, ‘समाज के सहयोग के बिना साहित्य कभी आगे नहीं बढ़ सकता। गुजराती पत्रिकाओं को जीवंत बनाए रखना गुजरात की जनता और लाखों पाठकों की जिम्मेदारी है।’’
शाह ने यह भी कहा कि उन्होंने समय के साथ कई बदलाव देखे हैं, लेकिन ‘चित्रलेखा’ की विश्वसनीयता हमेशा बनी रही है।
उन्होंने ‘बुद्धि प्रकाश’, ‘सत्य विहार’ और ‘नव जीवन’ जैसे प्रकाशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजराती पत्रिकाओं ने राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
चित्रलेखा के स्तंभकार, हास्य लेखक और नाटककार तारक मेहता की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि उनसे मिलने के बाद सबसे गंभीर व्यक्ति भी मुस्कुराने लगता था।
शाह ने कहा, ‘तारकभाई केवल चार पन्नों में पूरे गुजरातियों के दुख भुला देते थे। उन्होंने अपने जीवन से ऊपर उठकर काम किया ताकि समाज मुस्कुराता रहे। लंबे समय तक उन्होंने ‘चित्रलेखा’ के माध्यम से यह किया।’’
उन्होंने ‘चित्रलेखा’ के कई विशेष अंकों को भी याद किया, विशेषकर नर्मदा परियोजना, 26/11 मुंबई आतंकी हमले और अयोध्या में राम मंदिर पर आधारित संस्करणों को।
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