रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ को लेकर निवेशकों में काफी दिलचस्पी देखने को मिल रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ को लेकर निवेशकों में काफी दिलचस्पी देखने को मिल रही है। कंपनी ने शेयर बाजार में आम निवेशकों के लिए आईपीओ खुलने से पहले ही एंकर निवेशकों से 8,110 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं। इस निवेश में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) सबसे आगे रहा है। एलआईसी ने कंपनी के शेयरों में करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
नियामकीय जानकारी के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स की आईपीओ समिति और बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स ने एंकर निवेशकों को कुल 7,24,74,066 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। इन शेयरों का आवंटन 1,119 रुपये प्रति शेयर की दर से किया गया है, जो तय मूल्य दायरे का ऊपरी स्तर है। हर शेयर का मूल मूल्य 10 रुपये है, जबकि इसमें 1,109 रुपये का प्रीमियम शामिल है।
LIC ने लगाए करीब 500 करोड़ रुपये
एंकर निवेशकों में एलआईसी को सबसे बड़ा आवंटन मिला है। कंपनी को 44,68,128 शेयर आवंटित किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 499.98 करोड़ रुपये है। एंकर निवेशकों को किए गए कुल शेयर आवंटन में एलआईसी की हिस्सेदारी 6.17 प्रतिशत रही।
एलआईसी के अलावा कई बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और संस्थानों ने भी जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में निवेश किया है। न्यू वर्ल्ड फंड इंक ने करीब 486.27 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि सिंगापुर सरकार को 340.93 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए गए। वहीं, बीएनपी पारिबा फाइनेंशियल मार्केट्स को 303.25 करोड़ रुपये के शेयर मिले।
कई बड़े वैश्विक निवेशकों ने दिखाई दिलचस्पी
जियो प्लेटफॉर्म्स के एंकर निवेशकों की सूची में दुनिया के कई बड़े निवेश संस्थान शामिल हैं। इनमें कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, ब्लैकरॉक, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट और श्रोडर्स जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े सरकारी निवेश संस्थानों ने भी इसमें हिस्सा लिया है। घरेलू म्यूचुअल फंड और बीमा क्षेत्र से जुड़े निवेश संस्थानों ने भी शेयरों के लिए निवेश किया है।
एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें आईपीओ खुलने से पहले शेयर आवंटित किए जाते हैं। इनके निवेश को बाजार में कंपनी के प्रति संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी के संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, इससे आईपीओ की सफलता या शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं मिलती।
21 अक्टूबर से आम निवेशकों के लिए खुलेगा IPO
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर से आम निवेशकों के लिए खुलेगा और शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है।
एंकर निवेशकों को शेयरों का आवंटन इसी मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर यानी 1,119 रुपये प्रति शेयर पर किया गया है। अब आम निवेशक तय अवधि के दौरान इस आईपीओ में आवेदन कर सकेंगे।
एंकर निवेशकों से जुटाई गई 8,110 करोड़ रुपये की रकम और वैश्विक निवेश संस्थानों की भागीदारी ने इस आईपीओ को लेकर बाजार की दिलचस्पी बढ़ा दी है। हालांकि, आम निवेशकों की प्रतिक्रिया और शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन की तस्वीर आईपीओ की सदस्यता और लिस्टिंग के बाद ही स्पष्ट होगी।
भारत में OTT बाजार का विस्तार जारी है, लेकिन अब इस कारोबार के सामने एक अहम सवाल है कि दर्शक मनोरंजन के लिए पैसे खर्च करना चाहते हैं या विज्ञापन देखकर मुफ्त कंटेंट देखना पसंद करते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में OTT बाजार का विस्तार जारी है, लेकिन अब इस कारोबार के सामने एक अहम सवाल है कि दर्शक मनोरंजन के लिए पैसे खर्च करना चाहते हैं या विज्ञापन देखकर मुफ्त कंटेंट देखना पसंद करते हैं। OTT कंपनियों के लिए यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी कमाई का आधार केवल सब्सक्रिप्शन नहीं, बल्कि विज्ञापन और दर्शकों को लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखना भी है।
सितंबर 2026 में जारी ऑरमैक्स मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सक्रिय पेड OTT सब्सक्रिप्शन की संख्या 2026 में 17.26 करोड़ रहने का अनुमान है। यह 2025 के 14.82 करोड़ के मुकाबले 16 फीसदी अधिक है। इन सब्सक्रिप्शन में टेलीकॉम कंपनियों के बंडल और एग्रीगेटर के जरिये मिलने वाली सेवाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट का सर्वेक्षण जून-जुलाई 2026 में 15,000 लोगों के बीच किया गया था।
यह आंकड़ा बताता है कि पेड OTT की पहुंच बढ़ रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में 17.26 करोड़ अलग-अलग लोग सब्सक्रिप्शन के लिए भुगतान कर रहे हैं। एक ही व्यक्ति के पास कई सेवाओं की सदस्यता हो सकती है और कुछ सेवाएं टेलीकॉम पैकेज में भी मिलती हैं।
66.49 करोड़ लोगों तक पहुंचा ऑनलाइन वीडियो
ऑरमैक्स मीडिया की इसी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने वाले दर्शकों की संख्या 2026 में 66.49 करोड़ पहुंच गई है। 2025 में यह संख्या 60.12 करोड़ थी। इस तरह दर्शकों के आधार में करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट में उस व्यक्ति को OTT दर्शक माना गया है, जिसने पिछले एक महीने में कम से कम एक ऑनलाइन वीडियो देखा हो। इसमें मुफ्त और पेड, दोनों तरह का कंटेंट शामिल है। इसलिए 66.49 करोड़ दर्शकों को पेड OTT सब्सक्राइबर्स कहना सही नहीं होगा।
यह अंतर बाजार को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन वीडियो देखने वालों का बड़ा वर्ग मुफ्त वीडियो से भी जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर, पेड सेवाओं के सब्सक्राइबर खास फिल्मों, वेब सीरीज, खेलों और दूसरे प्रीमियम कंटेंट के लिए भुगतान कर सकते हैं। इससे पता चलता है कि OTT कंपनियों के सामने केवल दर्शकों की संख्या बढ़ाने की चुनौती नहीं है। उन्हें यह भी तय करना है कि कितने दर्शकों को मुफ्त कंटेंट के जरिये विज्ञापन दिखाए जाएं और कितने दर्शक पेड सेवाओं के लिए भुगतान करने को तैयार हैं।
मुफ्त मॉडल में विज्ञापन से कमाई का मौका
मुफ्त OTT मॉडल को एवीओडी (AVOD) कहा जाता है। इसमें दर्शक वीडियो देखने के लिए सीधे सब्सक्रिप्शन फीस नहीं देता। इसके बदले प्लेटफॉर्म कंटेंट के पहले, बीच में या उसके आसपास विज्ञापन दिखाकर कमाई करता है। इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्लेटफॉर्म उन दर्शकों तक भी पहुंच सकता है, जो हर महीने सब्सक्रिप्शन का खर्च नहीं उठाना चाहते या भुगतान नहीं करना चाहते। हालांकि, दर्शकों की संख्या बढ़ने से विज्ञापन की कमाई अपने आप नहीं बढ़ती। इसके लिए विज्ञापनदाताओं की मांग, विज्ञापन की कीमत और दर्शकों की भागीदारी भी जरूरी है।
सितंबर 2026 में रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट ने भारत में माइक्रोड्रामा बाजार के जरिये इस अवसर को समझाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोड्रामा के लिए संभावित दर्शक वर्ग 25 से 28 करोड़ लोगों का है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में औसतन 1.5 से 1.7 करोड़ लोग हर महीने इसके लिए भुगतान कर रहे थे।
रेडसीर का अनुमान है कि माइक्रोड्रामा से विज्ञापन की कमाई वित्त वर्ष 2026 के करीब 24 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2032 तक 5,000 से 5,500 करोड़ रुपये हो सकती है। यह भविष्य का अनुमान है, सितंबर-अक्टूबर 2026 की वास्तविक विज्ञापन आय नहीं। यह आंकड़ा पूरे OTT बाजार का भी नहीं, बल्कि माइक्रोड्रामा श्रेणी का है।
इससे संकेत मिलता है कि विज्ञापन आधारित मॉडल छोटे वीडियो और धारावाहिक कहानियों वाले कंटेंट में कमाई का नया रास्ता बन सकता है।
पेड सब्सक्रिप्शन की कीमत भी है अहम
पेड OTT मॉडल में दर्शक हर महीने या साल के हिसाब से भुगतान करता है। इसके बदले उसे प्लेटफॉर्म के प्लान के अनुसार फिल्में, वेब सीरीज, खेल और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन दर्शक किसी सेवा के लिए कितना खर्च करेगा, यह उसकी जरूरत, बजट और कंटेंट की पसंद पर निर्भर करता है।
12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित कीमतों की तुलना के अनुसार, जियोहॉटस्टार मोबाइल का शुरुआती प्लान 79 रुपये प्रति माह, नेटफ्लिक्स मोबाइल का 149 रुपये, एमेजॉन प्राइम का 299 रुपये और सोनीलिव प्रीमियम का 399 रुपये प्रति माह है। ये शुरुआती प्लान की कीमतें हैं और सुविधाओं में अंतर हो सकता है।
मसलन, जियोहॉटस्टार के सबसे सस्ते मोबाइल प्लान में विज्ञापन आते हैं और यह मोबाइल डिवाइस तक सीमित है। नेटफ्लिक्स के भारतीय प्लान विज्ञापन रहित हैं। एमेजॉन प्राइम वीडियो में विज्ञापन आते हैं, जबकि विज्ञापन रहित देखने के लिए अतिरिक्त भुगतान का विकल्प उपलब्ध है। सोनीलिव के प्रीमियम प्लान में भी कुछ तरह के कंटेंट पर विज्ञापन दिख सकते हैं।
इसलिए केवल कीमत देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सा प्लान सबसे बेहतर है। दर्शक को यह भी देखना होगा कि वह किस डिवाइस पर कंटेंट देखना चाहता है, उसे कितनी स्क्रीन की जरूरत है और क्या उसके पसंदीदा कार्यक्रम उस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
हाइब्रिड मॉडल से बढ़ सकती है कमाई
OTT बाजार में विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन को साथ लेकर चलने वाला मॉडल भी महत्वपूर्ण हो रहा है। इसे हाइब्रिड मॉडल कहा जा सकता है। इसमें प्लेटफॉर्म मुफ्त विज्ञापन आधारित कंटेंट के साथ पेड प्लान भी उपलब्ध कराता है।
इसका फायदा यह है कि कम खर्च करना चाहने वाले दर्शक विज्ञापन देखकर वीडियो देख सकते हैं, जबकि खास कंटेंट या अधिक सुविधाएं चाहने वाले दर्शक सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं।
रेडसीर की अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत के माइक्रोड्रामा कारोबार की हर 100 रुपये की कमाई में करीब 99 रुपये सब्सक्रिप्शन से और एक रुपये से भी कम विज्ञापन से आया। रिपोर्ट का अनुमान है कि विज्ञापन की कमाई आगे चलकर इस श्रेणी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस आंकड़े को पूरे OTT उद्योग पर लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन यह दिखाता है कि माइक्रोड्रामा जैसे बाजार में विज्ञापन की कमाई बढ़ाने की गुंजाइश है। इसके लिए प्लेटफॉर्म को दर्शकों की संख्या के साथ विज्ञापनदाताओं का भरोसा भी बढ़ाना होगा।
बड़ी स्क्रीन पर बढ़ रही ऑनलाइन वीडियो की पहुंच
OTT बाजार में एक और बदलाव कनेक्टेड टीवी के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ा है। ऑरमैक्स मीडिया की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कनेक्टेड टीवी पर ऑनलाइन वीडियो देखने वाले दर्शकों की संख्या 20.69 करोड़ पहुंच गई है। 2025 में यह संख्या 12.92 करोड़ थी। यानी एक साल में करीब 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
यह बदलाव विज्ञापनदाताओं और स्ट्रीमिंग कंपनियों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। बड़ी स्क्रीन पर फिल्में, वेब सीरीज और दूसरे कार्यक्रम देखने वाले दर्शकों तक विज्ञापन पहुंचाने के नए अवसर बन सकते हैं। हालांकि, कनेक्टेड टीवी पर वीडियो देखने वाले सभी लोग पेड सब्सक्राइबर नहीं हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में फास्ट (FAST) चैनलों का अनुमानित दर्शक वर्ग 3.52 करोड़ है। इन चैनलों पर इंटरनेट के जरिये लगातार कंटेंट दिखाया जाता है और कमाई मुख्य रूप से विज्ञापन से होती है। यह मॉडल उन दर्शकों के लिए एक विकल्प है, जो पारंपरिक टीवी की तरह लगातार कार्यक्रम देखना चाहते हैं, लेकिन इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
सब्सक्राइबर को बनाए रखना भी बड़ी चुनौती
OTT प्लेटफॉर्म के लिए नए सब्सक्राइबर जोड़ने के साथ पुराने सब्सक्राइबरों को बनाए रखना भी जरूरी है। कारोबार में इसे चर्न कहा जाता है, यानी वे सब्सक्राइबर जो सब्सक्रिप्शन बंद कर देते हैं या सेवा का इस्तेमाल छोड़ देते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई दर्शक किसी खास फिल्म या क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए एक महीने का सब्सक्रिप्शन ले सकता है। कंटेंट देखने के बाद अगर उसे आगे कुछ खास नहीं मिलता, तो वह अगली अवधि में भुगतान बंद कर सकता है।
ऐसे में प्लेटफॉर्म को बार-बार नए सब्सक्राइबर जोड़ने पर खर्च करना पड़ता है। दूसरी ओर, मुफ्त सेवाओं में भी चुनौती है कि विज्ञापन बहुत ज्यादा होने पर दर्शक वीडियो देखना बंद कर सकते हैं।
सितंबर-अक्टूबर 2026 के उपलब्ध स्रोतों में पूरे भारतीय OTT बाजार के लिए सब्सक्राइबरों के सब्सक्रिप्शन छोड़ने की कोई एक समान, सत्यापित दर नहीं मिली है। इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि बाजार में एक निश्चित प्रतिशत सब्सक्राइबर हर महीने सेवा छोड़ रहे हैं।
दोनों मॉडलों की अपनी जगह
सितंबर और अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों से पता चलता है कि भारत में मुफ्त और पेड, दोनों तरह के OTT मॉडल के लिए अवसर मौजूद हैं। सक्रिय पेड सब्सक्रिप्शन में 16 फीसदी की अनुमानित वृद्धि भुगतान आधारित सेवाओं की पहुंच बढ़ने का संकेत देती है। वहीं, माइक्रोड्रामा के लिए रेडसीर के अनुमान बताते हैं कि विज्ञापन आधारित मॉडल भविष्य में अतिरिक्त कमाई का स्रोत बन सकता है।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़े यह साबित नहीं करते कि दर्शक मुफ्त मॉडल को पेड मॉडल से ज्यादा पसंद कर रहे हैं या इसका उलटा सच है। इसके लिए दोनों मॉडलों के इस्तेमाल, भुगतान की इच्छा और दर्शकों की पसंद पर तुलनात्मक सर्वेक्षण की जरूरत होगी।
OTT कंपनियों के लिए असली चुनौती यही है कि वे दर्शकों को पसंद का कंटेंट दें, कीमत को उनकी क्षमता के अनुसार रखें और विज्ञापनों से होने वाली कमाई को बढ़ाते हुए देखने का अनुभव खराब न होने दें। आने वाले समय में मुफ्त, पेड और हाइब्रिड मॉडल का साथ-साथ इस्तेमाल ही भारतीय स्ट्रीमिंग बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
एक-दो मिनट के वर्टिकल एपिसोड वाले माइक्रोड्रामा अब स्टार्टअप का प्रयोग भर नहीं रहे। जी, बालाजी टेलीफिल्म्स और यशराज फिल्म्स जैसे पुराने खिलाड़ी इसमें उतर चुके हैं
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक-दो मिनट के वर्टिकल एपिसोड वाले माइक्रोड्रामा अब स्टार्टअप का प्रयोग भर नहीं रहे। जी, बालाजी टेलीफिल्म्स और यशराज फिल्म्स जैसे पुराने खिलाड़ी इसमें उतर चुके हैं और रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के भी उतरने की रिपोर्ट्स हैं। दूसरी ओर पॉकेट FM ने अपना माइक्रोड्रामा ऐप पॉकेट TV बंद कर दिया। यह लेख सितंबर-अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स के आधार पर देखता है कि कंपनियां क्या खोज रही हैं और स्टूडियो व ऐप की रणनीतियां कैसे अलग हैं।
मार्केट: आंकड़े कितने भरोसेमंद
माइक्रोड्रामा के मार्केट को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के अनुमान काफी बिखरे हुए हैं। रेडसीर के अनुसार भारत का माइक्रोड्रामा मार्केट FY26 में करीब 275-280 मिलियन डॉलर था और FY32 तक 2.8 से 3 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। व्हेल्सबुक की 1 अक्टूबर की रिपोर्ट इससे मिलता-जुलता चित्र देती है: FY26 में राजस्व लगभग ₹2,300 करोड़ और यूजर आधार 4 करोड़ रहा, जबकि FY32 तक ₹25,500 करोड़ का लक्ष्य बताया गया है।
तुलना के लिए 2025 की तस्वीर देखें तो मार्केट का विस्तार बहुत तेज रहा। रेडसीर के अनुसार वार्षिक आवर्ती राजस्व सितंबर 2025 के करीब 125 मिलियन डॉलर से नवंबर 2025 तक लगभग 260 मिलियन डॉलर हो गया, यानी करीब दोगुना। वहीं लुमिकाई का आकलन है कि 2025 में मार्केट करीब 300 मिलियन डॉलर के पार गया। इसके उलट EY-FICCI ने 2025 के लिए मार्केट का आकार ₹6.5 अरब (₹650 करोड़) आंका था और 2028 तक ₹23.2 अरब का अनुमान दिया था।
सबसे ऊंचा आंकड़ा खुद एक कंपनी का है। Story TV के संस्थापक ने FICCI FRAMES 2026 में कहा कि मार्केट पहले ही 600-700 मिलियन डॉलर का है। लेकिन यह कंपनी का अनुमान है, ऑडिट किया गया इंडस्ट्री-स्तरीय आंकड़ा नहीं।
इन सबको साथ रखें तो 2025 के आंकड़े ₹650 करोड़ से लेकर 300 मिलियन डॉलर तक बिखरे हैं, इसलिए किसी एक संख्या को अंतिम मानना ठीक नहीं होगा। फिर भी सभी अनुमानों का रुझान एक है: मार्केट तेजी से बढ़ा है।
बड़ी कंपनियां आखिर क्या खोज रही हैं
स्टूडियो बनाम ऐप: कारोबार का फर्क
स्टूडियो के पास कहानी, ब्रैंड और प्रतिभा है। उन्हें डिस्ट्रीब्यूशन और उपयोगकर्ता-डेटा की कमी है, इसलिए वे साझेदारी चुन रहे हैं। यशराज का उदाहरण देखें: YRF ने रस्क मीडिया में रणनीतिक निवेश किया, जिसके तहत वह मौलिक एनिमेशन और वर्टिकल माइक्रोड्रामा IP की रचनात्मक दिशा संभालेगा और रस्क अपने Alright! TV प्लेटफॉर्म पर निर्माण व वितरण करेगा। निवेश की राशि सार्वजनिक नहीं की गई है और शुरुआत में फोकस YRF की मौजूदा फिल्म फ्रेंचाइजी को ढालने के बजाय नई प्रॉपर्टी बनाने पर है। रेड चिलीज के बारे में रिपोर्ट्स के अनुसार वह "शून्य" नाम से प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, पर कंपनी की ओर से पुष्टि नहीं मिल पाई। इसे अभी रिपोर्ट के स्तर पर ही देखना चाहिए।
जी का दोहरा दांव: BULLET और लाइसेंसिंग।
जी ने खुद को सिर्फ अपने IP बाहर देने तक सीमित नहीं रखा। जून 2025 में जी ने स्टार्टअप BULLET के साथ रणनीतिक इक्विटी साझेदारी की घोषणा की, जिसमें वह हिस्सेदारी लेगा और ऐप ZEE5 के भीतर चलाया जाना था। हिस्सेदारी की राशि का खुलासा नहीं किया गया। दूसरी तरफ वह Story TV को IP लाइसेंस भी देता है, यानी अपना प्लेटफॉर्म भी और तीसरे पक्ष के ऐप पर लाइसेंसिंग भी। BULLET अब पहला साल पूरा कर रहा है और उसकी माइक्रोड्रामा "डेडलाइन" को एशियन एकेडमी क्रिएटिव अवॉर्ड्स 2026 में भारत की सर्वश्रेष्ठ माइक्रो-ड्रामा चुना गया, जो इस श्रेणी का पहला संस्करण था। प्लेटफॉर्म अपनी Trinetra AI तकनीक से 100 से ज्यादा AI-संचालित शीर्षकों की स्लेट बना रहा है। ब्रैंड-फंडेड कंटेंट भी यहां आ रहा है: JK Super Cement की 53-एपिसोड सीरीज "तेरा घर मेरा घर" 21 अगस्त 2026 को BULLET और ZEE5 ऐप पर आई और टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स ने सितंबर में BULLET के साथ "अपना सुपरस्टार" सीरीज की।
अब फोकस विदेश पर है: 15 अक्टूबर को BULLET ने वैश्विक मार्केट तलाशने के लिए Vitrina से साझेदारी की और वह अपनी AI-आधारित डबिंग व लोकलाइजेशन तकनीक विदेशी ग्राहकों तक भी ले जाना चाहता है। यानी जी माइक्रोड्रामा को घरेलू फॉर्मेट के साथ-साथ निर्यात योग्य तकनीक और कंटेंट के रूप में भी देख रहा है।
ऐप्स का कारोबार अलग है। उनकी ताकत है उत्पादन की रफ्तार और दर्शकों का डेटा। Story TV रोज पांच-छह नए शो जारी करता है और उसकी लाइब्रेरी में 5,000 से ज्यादा माइक्रोड्रामा हैं। लेकिन कमजोरी भी साफ है। ज्यादातर प्लेटफॉर्म अपने लगभग 99% राजस्व के लिए सब्सक्रिप्शन और एपिसोड-पेवॉल पर निर्भर हैं और 89% यूजर सोशल मीडिया फीड से कंटेंट खोजते हैं, इसलिए मार्केटिंग का खर्च भारी पड़ता है। इसी वजह से 40 मिलियन यूजर के बावजूद प्लेटफॉर्म मुनाफे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पॉकेट TV: एक बंद प्रयोग और उसका सबक
पॉकेट TV एक बीटा प्रोडक्ट था जो करीब पांच महीने चला। कंपनी ने 25 जून 2026 को इसे बंद करने की पुष्टि की और कहा कि यह उसके कारोबार में महत्वपूर्ण योगदान नहीं देता था। फोर्ब्स के अनुसार सीईओ रोहन नायक ने कम यूजर रिटेंशन और महंगे प्रोडक्शन को वजह बताया। फोर्ब्स का अनुमान है कि पिछले 12 महीनों में पॉकेट का कुल राजस्व करीब 40 करोड़ डॉलर रहा। कंपनी के अनुसार उसके कारोबार का बड़ा हिस्सा ऑडियो से आता है।
कहानी यहीं नहीं रुकती। कंपनी करीब दो महीने बाद "पॉकेट सागा" नाम के नए ऐप के साथ माइक्रोड्रामा में लौट आई। नायक का दावा है कि यह ऐप हर महीने 10 लाख डॉलर से ज्यादा कमा रहा है। यह कंपनी का अपना दावा है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। निष्कर्ष यह निकलता है कि पॉकेट FM ने फॉर्मेट को नहीं, बल्कि लाइव-एक्शन वीडियो वाले अपने मॉडल की अर्थव्यवस्था को खारिज किया।
कंटेंट अधिकार: असली लड़ाई यहां है
सवाल अब यह है कि माइक्रोड्रामा कौन बना सकता है, इससे आगे बढ़कर यह कि उन कहानियों पर नियंत्रण किसका है जिन्हें बार-बार ढाला, बांटा और भुनाया जा सके। इसके उदाहरण:
यानी लाइसेंस की अवधि, व्युत्पन्न (derivative) अधिकार और राजस्व-बंटवारा तय करने वाले अनुबंध ही यह तय करेंगे कि फायदा स्टूडियो को मिलेगा या प्लेटफॉर्म को। यह मेरा विश्लेषण है। सौदों की शर्तें अक्सर सार्वजनिक नहीं होतीं।
कब सफल होगा यह निवेश
कुल मिलाकर, बड़े स्टूडियो माइक्रोड्रामा को अंतिम मंजिल नहीं, IP की सस्ती प्रयोगशाला के रूप में देख रहे हैं। ऐप्स के लिए यह दर्शक जोड़ने और टिकाए रखने की दौड़ है। इनमें से जो भी पक्ष स्वामित्व वाली कहानियों और टिकाऊ कमाई को जोड़ पाएगा, उसकी स्थिति मजबूत होगी।
नेटफ्लिक्स ने वॉल्ट डिज्नी के पूर्व अधिकारी पीटर राइस को अपना नया चीफ कंटेंट ऑफिसर नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नेटफ्लिक्स ने वॉल्ट डिज्नी के पूर्व अधिकारी पीटर राइस को अपना नया चीफ कंटेंट ऑफिसर नियुक्त किया है। वह बेला बजेरिया की जगह लेंगे, जो करीब एक दशक तक कंपनी से जुड़ी रहने के बाद नेटफ्लिक्स छोड़ रही हैं। राइस 26 अक्टूबर से अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस भूमिका में राइस नेटफ्लिक्स के वैश्विक कंटेंट कारोबार की कमान संभालेंगे। उनके जिम्मे अलग-अलग देशों में बनने वाली स्क्रिप्टेड और अनस्क्रिप्टेड सीरीज, फिल्मों और लाइव इवेंट्स की देखरेख होगी। स्क्रिप्टेड कंटेंट में तय कहानी और पटकथा के आधार पर बनने वाले कार्यक्रम शामिल होते हैं, जबकि अनस्क्रिप्टेड कंटेंट में रियलिटी शो और दूसरे ऐसे कार्यक्रम आते हैं, जिनकी कहानी पहले से तय नहीं होती।
डिज्नी और फॉक्स में काम करने का अनुभव
राइस इससे पहले वॉल्ट डिज्नी टेलीविजन के चेयरमैन और वॉल्ट डिज्नी कंपनी में जनरल एंटरटेनमेंट के चेयरमैन रह चुके हैं। डिज्नी में उनकी जिम्मेदारी के दायरे में एबीसी, एफएक्स, हुलु, नेशनल ज्योग्राफिक और कंपनी के टेलीविजन स्टूडियो शामिल थे।
डिज्नी से पहले राइस ने 21st सेंचुरी फॉक्स में वरिष्ठ पदों पर काम किया था। वह फॉक्स सर्चलाइट पिक्चर्स का नेतृत्व भी कर चुके हैं। उनके कार्यकाल में इस स्टूडियो की कई चर्चित फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें स्लमडॉग मिलियनेयर, जूनो और लिटिल मिस सनशाइन शामिल हैं।
बेला बजेरिया के कार्यकाल में बढ़ा अंतरराष्ट्रीय कंटेंट
बेला बजेरिया 2016 में नेटफ्लिक्स से जुड़ी थीं और जनवरी 2023 में उन्हें चीफ कंटेंट ऑफिसर बनाया गया था। उनके कार्यकाल में कंपनी ने अलग-अलग देशों की कहानियों और कार्यक्रमों पर अपना ध्यान बढ़ाया। इस दौरान स्क्विड गेम और ब्रिजर्टन जैसी सीरीज दुनियाभर में लोकप्रिय हुईं।
नेटफ्लिक्स ने इस दौरान लाइव कार्यक्रमों के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई। इसके लिए कंपनी ने डब्ल्यूडब्ल्यूई और एनएफएल के साथ साझेदारी की। इन कदमों के जरिए नेटफ्लिक्स पारंपरिक फिल्मों और सीरीज से आगे बढ़कर लाइव मनोरंजन और खेलों के प्रसारण में भी अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
करीब 1,000 एम्प्लॉयीज की छंटनी के बीच बदलाव
राइस की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब नेटफ्लिक्स अपने कारोबार में बड़े बदलाव कर रहा है। बेला बजेरिया के कंपनी छोड़ने की घोषणा से एक दिन पहले नेटफ्लिक्स ने एम्प्लॉयीज को करीब 1,000 नौकरियों में कटौती करने की जानकारी दी थी। यह कंपनी के कुल एम्प्लॉयीज का लगभग 6 प्रतिशत है। 2022 के बाद कंपनी की यह सबसे बड़ी छंटनी बताई गई है।
YouTube और TikTok से बढ़ रही चुनौती
नेटफ्लिक्स के सामने अब दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए यूट्यूब और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म से भी कड़ी चुनौती है। इन प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में यूजर खुद वीडियो और दूसरे तरह का कंटेंट बनाते हैं। इस वजह से इनके कारोबार का खर्च उठाने का तरीका नेटफ्लिक्स से काफी अलग है।
ऐसे में नेटफ्लिक्स के लिए केवल नए सब्सक्राइबर जोड़ना ही काफी नहीं रह गया है। कंपनी इस बात पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है कि दर्शक उसके प्लेटफॉर्म पर कितना समय बिताते हैं और कितनी नियमितता से कंटेंट देखते हैं। इसे एंगेजमेंट कहा जाता है।
कंपनी की विकास रणनीति में विज्ञापन, लाइव इवेंट्स और खेलों की भूमिका भी बढ़ रही है। नेटफ्लिक्स इन क्षेत्रों के जरिए दर्शकों को लंबे समय तक अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने और कमाई के नए रास्ते बनाने की कोशिश कर रहा है।
कंटेंट रणनीति के लिए अहम होगी नई जिम्मेदारी
पीटर राइस की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब नेटफ्लिक्स के लिए कंटेंट का मतलब केवल फिल्में और सीरीज बनाना नहीं रह गया है। कंपनी खेलों, लाइव मनोरंजन और ऐसे कार्यक्रमों पर भी ध्यान दे रही है, जिन्हें दर्शक तय समय पर देखना पसंद करते हैं।
राइस के सामने एक ओर अलग-अलग देशों के दर्शकों के लिए लोकप्रिय कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी होगी, तो दूसरी ओर कारोबार की लागत पर भी ध्यान देना होगा। कंपनी में छंटनी और कंटेंट के बदलते स्वरूप के बीच उनकी भूमिका नेटफ्लिक्स की आगे की रणनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के समर्थन वाले शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म BULLET Microdrama ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के समर्थन वाले शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म BULLET Microdrama ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है। भारत में अपना पहला साल पूरा करने के मौके पर कंपनी ने मीडिया क्षेत्र की जानकारी और विश्लेषण देने वाली कंपनी Vitrina के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद दूसरे देशों में कंटेंट, वितरण और संयुक्त निर्माण के अवसर तलाशना है।
इस समझौते के तहत BULLET को Vitrina के 100 से अधिक देशों में फैले उद्योग नेटवर्क और उसके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मंच VIQI का इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। इसके जरिए कंपनी अलग-अलग देशों में रचनाकारों, निर्माताओं, वितरकों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश करेगी।
BULLET की योजना केवल भारत में तैयार किए गए अपने कंटेंट को दूसरे देशों में दिखाने तक सीमित नहीं है। कंपनी यह भी समझना चाहती है कि अलग-अलग देशों के दर्शकों की पसंद और वहां के कारोबारी तरीकों के हिसाब से अपने कंटेंट, तकनीक और निर्माण क्षमता में किस तरह बदलाव किया जा सकता है।
इस साझेदारी से BULLET के AI आधारित फिल्म निर्माण मंच Trinetra AI को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए ग्राहक और अपनी तकनीक के इस्तेमाल के अवसर तलाशने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारतीय अनुभव के आधार पर वैश्विक कारोबार की तैयारी
BULLET Microdrama और Trinetra AI के सह-संस्थापक एवं मुख्य कारोबार अधिकारी अजीम ललानी ने कहा कि भारत में पहले साल के दौरान कंपनी ने यह समझने का अनुभव हासिल किया है कि कम अवधि की वर्टिकल कहानियों को अलग-अलग दर्शकों के लिए किस तरह तैयार, निर्मित और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक ढाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि Vitrina की उद्योग संबंधी जानकारी और उसका अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क उन बाजारों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जहां BULLET के कंटेंट और तकनीकी क्षमताओं की मांग हो सकती है।
ललानी के मुताबिक, कंपनी का लक्ष्य भारत में मिले अनुभव के आधार पर सही कहानियों, साझेदारियों और वितरण के तरीकों के जरिए वैश्विक माइक्रोड्रामा कारोबार खड़ा करना है।
अलग-अलग देशों के दर्शकों के हिसाब से बनेगा कंटेंट
इस विस्तार योजना में AI की मदद से फिल्म निर्माण को भी अहमियत दी जा रही है। BULLET Microdrama और Trinetra AI के सह-संस्थापक एवं मुख्य उत्पाद और तकनीक अधिकारी (CPTO) सौरभ कुशवाह ने कहा कि मनोरंजन सामग्री को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने में सांस्कृतिक जुड़ाव बेहद जरूरी है।
उनके मुताबिक, किसी कहानी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफल बनाने के लिए केवल उसका वितरण करना काफी नहीं है। कहानी वहां के दर्शकों को अपनी और उनके माहौल से जुड़ी हुई लगनी चाहिए।
कुशवाह ने कहा कि Vitrina के साथ साझेदारी से दुनिया भर के स्टूडियो, निर्माताओं, वितरकों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के साथ संबंध बनाने में मदद मिल सकती है।
Vitrina के मुताबिक, तेजी से बढ़ रहा है माइक्रोड्रामा
Vitrina के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अतुल फडनीस ने कहा कि माइक्रोड्रामा मनोरंजन के उन प्रारूपों में शामिल है, जिनका विस्तार तेजी से हो रहा है। उनके मुताबिक, इस क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले मंच वे होंगे, जो सही साझेदारों के साथ समय रहते काम शुरू करेंगे।
माइक्रोड्रामा ऐसे छोटे एपिसोड वाली कहानियों को कहा जाता है, जिन्हें आमतौर पर मोबाइल फोन पर देखने के लिए बनाया जाता है। इनका वीडियो अक्सर वर्टिकल यानी मोबाइल स्क्रीन के अनुरूप होता है। कम अवधि और तेजी से आगे बढ़ती कहानी के कारण यह प्रारूप मोबाइल दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।
अभी बाजार और विस्तार की समयसीमा तय नहीं
BULLET Microdrama और Vitrina के बीच हुए समझौते में अभी उन देशों के नाम नहीं बताए गए हैं, जहां कंपनी सबसे पहले विस्तार करेगी। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय शुरुआत की समयसीमा और इस साझेदारी के लिए तय वित्तीय निवेश की जानकारी भी साझा नहीं की गई है।
फिलहाल दोनों कंपनियों का ध्यान सही कारोबारी साझेदारों और नए अवसरों की पहचान करने पर है। BULLET Microdrama भारत में अपने पहले साल से मिले अनुभव को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार बढ़ाने की नींव बनाना चाहता है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (JPL) का शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) 21 अक्टूबर से निवेश के लिए खुलेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (JPL) का शुरुआती सार्वजनिक निर्गम (IPO) 21 अक्टूबर से निवेश के लिए खुलेगा। कंपनी ने इसके लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह आईपीओ 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। वहीं, बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए एंकर निवेशक बोली की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 14 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने इसी दिन आईपीओ से जुड़ा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) अहमदाबाद में गुजरात के कंपनी रजिस्ट्रार के पास दाखिल कर दिया है। इससे पहले कंपनी ने 19 जून 2026 को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल करने और 28 अगस्त 2026 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से इस पर ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने की जानकारी दी थी।
27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना
जून में दाखिल ड्राफ्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में 10 रुपये अंकित मूल्य के अधिकतम 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना है। कंपनी की ओर से जारी ताजा जानकारी में बताया गया है कि आईपीओ के लिए कीमत की सीमा, एम्प्लॉयीज को मिलने वाली छूट और न्यूनतम बोली की मात्रा को मंजूरी दे दी गई है।
₹1,065 से ₹1,119 होगा एक शेयर का भाव
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति इक्विटी शेयर रखा गया है। इसका मतलब है कि बोली लगाने वाले निवेशक इस तय सीमा के भीतर शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे। 1,065 रुपये प्रति शेयर फ्लोर प्राइस यानी न्यूनतम कीमत है, जबकि 1,119 रुपये प्रति शेयर कैप प्राइस यानी अधिकतम कीमत है।
आईपीओ में न्यूनतम बोली 12 शेयरों की होगी। इसके बाद निवेशक 12-12 शेयरों के गुणक में बोली लगा सकेंगे। प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है।
एम्प्लॉयीज को ₹54 प्रति शेयर की छूट
कंपनी ने पात्र एम्प्लॉयीज के लिए प्रति शेयर 54 रुपये की छूट तय की है। यह छूट एम्प्लॉयी आरक्षण हिस्से के तहत बोली लगाने वाले पात्र एम्प्लॉयीज को मिलेगी।
एम्प्लॉयीज और रिलायंस के शेयरधारकों के लिए भी आरक्षण
आईपीओ में पात्र एम्प्लॉयीज के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित रखने का प्रावधान है। इसके अलावा, पात्र रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित रखने का प्रावधान है।
इस शेयरधारक आरक्षण के लिए वे व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) पात्र होंगे, जो 14 अक्टूबर 2026 को यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किए जाने की तारीख पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के सार्वजनिक इक्विटी शेयरधारक थे। एचयूएफ के मामले में शेयर कर्ता के नाम पर भी हो सकते हैं। हालांकि, लागू कानूनों, नियमों और दिशानिर्देशों के तहत आईपीओ में निवेश के लिए अपात्र लोग इस आरक्षण का लाभ नहीं ले सकेंगे।
19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों की बोली
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को होगी। इसके बाद आम निवेशकों के लिए आईपीओ 21 अक्टूबर, बुधवार को खुलेगा और 23 अक्टूबर, शुक्रवार को बंद होगा।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स अपने एम्प्लॉयीज की संख्या में करीब 5 फीसदी की कटौती करने की तैयारी कर रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स अपने एम्प्लॉयीज की संख्या में करीब 5 फीसदी की कटौती करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अगले सप्ताह इस बारे में घोषणा कर सकती है। अगर यह योजना लागू होती है, तो करीब 800 एम्प्लॉयीज की नौकरी पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक छंटनी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक नेटफ्लिक्स में करीब 16,000 पूर्णकालिक एम्प्लॉयीज काम कर रहे थे। इस संख्या के आधार पर 5 फीसदी एम्प्लॉयीज की कटौती का मतलब लगभग 800 नौकरियों में कमी हो सकता है। अभी यह साफ नहीं है कि कंपनी के किन विभागों में छंटनी की जाएगी। Variety की रिपोर्ट के मुताबिक, नेटफ्लिक्स के एक प्रवक्ता ने इस संभावित योजना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कारोबार बढ़ाने की कोशिश में कंपनी
संभावित छंटनी ऐसे समय में सामने आई है, जब नेटफ्लिक्स बदलती दर्शक पसंद और नए तरह के कार्यक्रमों पर बढ़ते निवेश के बीच अपने कारोबार की रफ्तार तेज करना चाहता है।
नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Co-CEO) टेड सारंडोस ने हाल ही में कहा था कि कंपनी अपनी वृद्धि को और तेज करना चाहती है। यह बात ऐसे समय कही गई, जब कंपनी ने 2026 की दूसरी तिमाही में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में दोहरे अंकों में राजस्व वृद्धि दर्ज की थी।
दर्शकों की भागीदारी बढ़ाना बनी चुनौती
टेड सारंडोस ने दर्शकों की भागीदारी यानी प्लेटफॉर्म पर उनके देखने के समय और गतिविधियों से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। 2026 की पहली छमाही में नेटफ्लिक्स पर दर्शकों की देखने की भागीदारी सालाना आधार पर 2 फीसदी बढ़ी।
उन्होंने बताया कि लाइव कार्यक्रमों पर कंपनी के कुल कंटेंट बजट का करीब 5 फीसदी खर्च होता है, लेकिन इन कार्यक्रमों से कुल देखने के समय में लगभग 1 फीसदी का योगदान मिलता है। इससे दर्शकों की कुल भागीदारी बढ़ाने के मामले में कंपनी के सामने चुनौती बनी हुई है।
दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीदों के करीब, तीसरी तिमाही के अनुमान कमजोर
नेटफ्लिक्स के 2026 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे मोटे तौर पर वॉल स्ट्रीट के विश्लेषकों की उम्मीदों के अनुरूप रहे। हालांकि, तीसरी तिमाही के लिए कंपनी ने राजस्व का जो अनुमान दिया, वह विश्लेषकों की उम्मीदों से कम था। इसके चलते कंपनी के शेयर की कीमत पर दबाव पड़ा।
2022 में भी हुई थी बड़ी छंटनी
नेटफ्लिक्स ने इससे पहले 2022 में बड़े स्तर पर एम्प्लॉयीज की छंटनी की थी। उस समय कंपनी ने करीब 450 पद खत्म किए थे। यह कदम सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट के बाद उठाया गया था। इसके बाद भी कंपनी ने छोटे स्तर पर एम्प्लॉयीज की संख्या घटाई है। 2026 की शुरुआत में कंपनी की वैश्विक प्रोडक्ट टीम के कई दर्जन एम्प्लॉयीज पर भी छंटनी का असर पड़ा था।
अमेरिका और कनाडा में हैं करीब 68% एम्प्लॉयीज
2025 के अंत तक नेटफ्लिक्स में करीब 16,000 पूर्णकालिक एम्प्लॉयीज थे। इनमें से लगभग 68 फीसदी एम्प्लॉयीज अमेरिका और कनाडा में काम करते थे। ऐसे में अगर कंपनी अपने एम्प्लॉयीज की संख्या में 5 फीसदी की कटौती करती है, तो यह उसके कामकाज के ढांचे में बड़ा बदलाव होगा। हालांकि, छंटनी से प्रभावित होने वाले एम्प्लॉयीज की अंतिम संख्या और इसकी घोषणा की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
नेटफ्लिक्स 20 अक्टूबर 2026 को 2026 की तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित करने वाला है। ऐसे में कंपनी की संभावित छंटनी और कारोबार से जुड़े अगले कदमों पर बाजार की नजर रहेगी।
मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है। लोग घरों में बंद हुए और OTT प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाई। Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar, सब एकसाथ भारतीय दर्शकों के ड्रॉइंग रूम में घुस आए। जब थिएटर खुले, तो सवाल यह था कि क्या दर्शक वापस आएंगे? आंकड़े कहते हैं, हां, लेकिन पुरानी शर्तों पर नहीं।
थिएटर की वापसी: रिकॉर्ड तोड़ा, पर खाली कुर्सियां अभी भी बोल रही हैं
Ormax Media की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 भारतीय बॉक्स ऑफिस का अब तक का सबसे बड़ा साल रहा। कुल ग्रॉस बॉक्स ऑफिस ₹13,395 करोड़ रहा, यह इतिहास में पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस ₹13,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया और 2023 के ₹12,226 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 37 फिल्में ₹100 करोड़ का क्लब पार कर गईं, जो 2024 की 22 फिल्मों से काफी ज्यादा थीं। 2026 में यह गति जारी है, जनवरी-मार्च 2026 में ₹3,440 करोड़ का बॉक्स ऑफिस दर्ज हुआ, जो 2025 की समान अवधि से 17% अधिक है।
तुलना के लिए देखें: 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस ₹11,833 करोड़ था, जो 2023 (₹12,226 करोड़) के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल था। 2019 (कोविड-पूर्व) में यह आंकड़ा ₹10,948 करोड़ था।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। संख्याएं बड़ी दिखती हैं क्योंकि टिकट की कीमतें बढ़ी हैं। 2019 में औसत टिकट मूल्य (ATP) ₹106 था, 2024 में ₹134 और 2025 में यह ₹161 हो गया, यानी 2019 के मुकाबले 52% की बढ़ोतरी। लेकिन दर्शकों की संख्या (फुटफॉल) उलटी दिशा में गई। 2019 में 103 करोड़ दर्शक थिएटर पहुंचे थे, जो 2024 में 88.3 करोड़ और 2025 में घटकर 83.2 करोड़ रह गए, 2019 की तुलना में 19% की गिरावट।
भारत में कुल 10,033 स्क्रीन हैं (2025)। PVR INOX, देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन, 111 शहरों में 1,749 स्क्रीन संचालित करती है। सिंगल स्क्रीन थिएटर की हालत ज्यादा चिंताजनक है, हर साल करीब 150 सिंगल स्क्रीन बंद होते हैं, जबकि नए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन जुड़ते रहते हैं।
OTT: उछाल के बाद परिपक्वता का दौर
कोविड के दौरान जो OTT क्रांति आई, वह 2025-26 में एक नए चरण में है, तेज ग्रोथ की जगह अब रणनीतिक विस्तार ने ली है।
JioHotstar, फरवरी 2025 में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय से बना यह प्लेटफॉर्म, IPL 2025 तक 30 करोड़ सब्सक्राइबर तक पहुंचा और मार्च 2026 तक MAU 55 करोड़ (550 मिलियन) हो गए। IPL 2026 ने नए रिकॉर्ड बनाए, ओपनिंग वीकेंड में ही 51.5 करोड़ दर्शकों तक रीच (reach) बनी, वॉच-टाइम 2025 के मुकाबले 26% बढ़ा, और लीग स्टेज के दौरान cumulative रीच 1.1 अरब पार कर गई (IPL 2025 की फाइनल रीच 1.19 अरब थी)। डिजिटल रीच 15%, CTV रीच 25% और रीजनल लैंग्वेज वॉच-टाइम 42% बढ़ा। JioHotstar का FY26 में परिचालन राजस्व ₹31,048 करोड़ और PBT ₹3,228 करोड़ रहा।
Amazon Prime Video के भारत में करीब 2.5-3 करोड़ पेड सब्सक्राइबर हैं। Netflix के भारत में 2 करोड़ (20 मिलियन) पेड सब्सक्राइबर हो गए हैं, जो 2021 के महज 55 लाख से काफी वृद्धि है। Netflix का भारत में राजस्व 2025 में $905 मिलियन (लगभग ₹7,600 करोड़) तक पहुंचने का HSBC का अनुमान था।
OTT का मुद्रीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार कुल OTT यूजर्स 60.1 करोड़ के पार हैं, लेकिन active paid subscriptions केवल 14.82 करोड़ हैं, बाकी बड़ी संख्या मुफ्त या विज्ञापन-सहित कंटेंट पर निर्भर है।
AVOD बनाम SVOD का संघर्ष अब और स्पष्ट है। Amazon Prime Video ने 2025 में भारत में विज्ञापन-सहित बेस प्लान शुरू किया। Statista के अनुसार भारत का OTT वीडियो बाजार 2026 में $4.96 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक $6.76 अरब होने की संभावना है।
बड़ी फिल्में: थिएटर की असली लाइफलाइन
थिएटर बिजनेस का एक कड़वा सच यह है कि वह अब कुछ बड़ी इवेंट फिल्मों पर टिका है।
2024 की टॉप फिल्में: 'पुष्पा 2: द रूल' ₹1,403 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) के साथ सबसे बड़ी हिट रही। 'कल्कि 2898 AD' लगभग ₹758 करोड़ और 'स्त्री 2' ₹740 करोड़ डोमेस्टिक ग्रॉस पर रहीं।
2025 की टॉप फिल्में: 'धुरंधर' (₹950 करोड़) ने अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, 'स्त्री 2' के ₹698 करोड़ के आंकड़े को पार करते हुए। 'कांतारा: ए लेजेंड चैप्टर 1' और 'छावा' भी ₹500 करोड़+ क्लब में रहीं। 'सैयारा', 'कूली' और एनिमेटेड फिल्म 'महावतार नरसिम्हा' ₹300 करोड़+ पर रहीं।
2026 की शुरुआत: 'धुरंधर: द रिवेंज' (मार्च 2026) ने ₹1,375 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) कमाकर हिंदी फिल्मों का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्डवाइड यह ₹1,813 करोड़ ($200 मिलियन+) तक पहुंची।
हिंदी सिनेमा के लिए उल्लेखनीय बात: 2025 में 93% हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मूल हिंदी फिल्मों से आया, डब दक्षिण भारतीय फिल्मों पर निर्भरता 31% (2024) से घटकर मात्र 7% रह गई।
मिड-बजट सिनेमा: OTT ने छीना, OTT ने दिया
20-80 करोड़ बजट वाली फिल्मों की कहानी सबसे दिलचस्प है। कोविड के बाद के कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स ने इन फिल्मों के लिए "गारंटीड डील" दी, रिलीज से पहले ही पैसे मिल जाते थे। इससे निर्माता थिएटर रिलीज का जोखिम उठाने से बचने लगे।
लेकिन 2025 में पासा पलटा। OTT प्लेटफॉर्म्स अब ज्यादा सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। उन्होंने थिएटर-अप्रूव्ड फिल्मों को तरजीह देनी शुरू की है, जिसका मतलब है कि अच्छा थिएटरी प्रदर्शन OTT डील की कीमत बढ़ाता है। 'धुरंधर: द रिवेंज' जैसी फिल्म के डिजिटल अधिकार JioHotstar ने ₹150 करोड़ में खरीदे, जो पहली फिल्म से लगभग दोगुना था। यह बदलाव मिड-बजट फिल्मों को एक बार फिर थिएटर रिलीज की ओर धकेल रहा है।
थिएटरी विंडो: अदृश्य युद्ध जारी है
पहले फिल्में थिएटर में 8-12 हफ्ते रहती थीं। कोविड के बाद यह खिड़की सिकुड़ी। आज स्थिति यह है:
हिंदी फिल्में आम तौर पर 6-8 हफ्ते बाद OTT पर आती हैं, लेकिन कमजोर फिल्में कभी-कभी 4 हफ्ते में ही चली जाती हैं। तेलुगु और तमिल इंडस्ट्री में 3-4 हफ्ते की विंडो सामान्य हो चुकी है।
मल्टीप्लेक्स चेन्स इसका विरोध कर रही हैं। कई बड़े मल्टीप्लेक्स ने 8 हफ्ते से कम विंडो वाली फिल्मों को स्क्रीन देने से मना कर दिया। 'धुरंधर: द रिवेंज' IPL 2026 की समाप्ति के बाद (मई-जून 2026) JioHotstar पर आने का अनुमान है, यानी करीब 10 हफ्ते की थिएटरी विंडो।
थिएटर अब 'अनुभव' बेच रहे हैं
जब कंटेंट OTT पर मिलने लगा, तो थिएटर ने रणनीति बदली, वे अब सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अनुभव बेचते हैं। IMAX ने भारत में फरवरी 2025 तक 31 स्क्रीन स्थापित किए हैं और 14 और आने वाले हैं। 4DX, रिक्लाइनर स्क्रीन, Premium Large Format (PLF), ये सब प्रीमियम टिकट के साथ F&B राजस्व बढ़ाने का तरीका हैं। PVR INOX अब फिल्म रिलीज से ज्यादा F&B और प्रीमियम फॉर्मेट से कमाई करने की ओर बढ़ रही है।
रीजनल सिनेमा: असली विजेता
अगर कोई सबसे ज्यादा फायदे में रहा, तो वह है रीजनल सिनेमा। 2024 में मलयालम सिनेमा ने पहली बार ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया और बाजार हिस्सेदारी 5% से दोगुनी होकर 10% हो गई; 2025 में यह गति बनी रही। कन्नड़ सिनेमा 2025 की एकमात्र दक्षिण भारतीय भाषा रही जिसने फुटफॉल में वृद्धि दर्ज की। गुजराती सिनेमा ने 2025 में 189% की वृद्धि के साथ ₹242 करोड़ का आंकड़ा छुआ।
OTT पर भी रीजनल कंटेंट की मांग बढ़ी है। JioHotstar और Netflix दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं में ओरिजिनल कंटेंट पर जोर दे रहे हैं। 'मंजुम्मेल बॉयज' (मलयालम), 'कांतारा', 'RRR' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि भाषा अब बाधा नहीं है।
विज्ञापन बाजार: डिजिटल का बोलबाला
Ipsos के अनुसार, FY2025 में भारत का कुल विज्ञापन बाजार ₹1,11,000 करोड़ पार कर गया, जिसमें डिजिटल का हिस्सा ₹49,000 करोड़ (44% share) रहा, 20% की वार्षिक वृद्धि के साथ। FY2026 में यह 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ (कुल खर्च का 46%) तक पहुंचने का अनुमान है। CTV विज्ञापन खर्च 2022 के ₹450 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2024 में ₹1,500 करोड़ हो गया, और 2025 में ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था, 2027 तक ₹3,500 करोड़ का लक्ष्य है।
थिएटर विज्ञापन भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन डिजिटल की तुलना में उनका हिस्सा अभी बहुत कम है।
अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, साथ काम करने का दौर
2025-26 के आंकड़े एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं, OTT और थिएटर अब एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि एक ही इकोसिस्टम के दो हिस्से हैं। बड़ी स्पेक्टेकल फिल्में थिएटर के लिए हैं, वहां बड़ा पर्दा, IMAX, 4DX, और सामूहिक अनुभव का कोई विकल्प नहीं। मिड-बजट और सीरीज कंटेंट OTT का प्राकृतिक घर बन रहा है।
लेकिन चुनौतियां असली हैं। फुटफॉल 2019 से 19% नीचे है और गिरावट जारी है। टिकटों की बढ़ती कीमतों के दम पर ग्रोथ हासिल करने की भी एक सीमा है। OTT प्लेटफॉर्म्स के पास 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14.82 करोड़ लोग ही पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेते हैं। वहीं, दूसरी तरफ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या लगातार घट रही है और कई थिएटर बंद हो रहे हैं।
अगले पांच साल में जो इंडस्ट्री उभरेगा, वह न पुराना थिएटर-प्रधान होगा, न पूरी तरह OTT-केंद्रित। यह होगा एक हाइब्रिड एंटरटेनमेंट अर्थव्यवस्था, जिसमें सिनेमाघर प्रीमियम अनुभव केंद्र होंगे, और OTT रोज़ की कहानियों का घर।
जियोहॉटस्टार (JioHotstar) ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका यानी MENA (Middle East and North Africa) क्षेत्र में भी अपनी शुरुआत कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जियोहॉटस्टार (JioHotstar) ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका यानी MENA (Middle East and North Africa) क्षेत्र में भी अपनी शुरुआत कर दी है। इसके लिए प्लेटफॉर्म ने स्थानीय स्ट्रीमिंग सेवा Starzplay के साथ साझेदारी की है। इससे पहले JioHotstar ब्रिटेन, कनाडा और सिंगापुर में भी अपना अंतरराष्ट्रीय विस्तार कर चुका है।
इस साझेदारी के तहत JioHotstar को Starzplay के मौजूदा ऐप और वेबसाइट में एक अलग सेक्शन के तौर पर उपलब्ध कराया जाएगा। यानी MENA क्षेत्र के दर्शक Starzplay के ऐप और वेबसाइट के जरिए JioHotstar का कंटेंट देख सकेंगे।
10 भाषाओं में मिलेगा कंटेंट
इस साझेदारी के बाद MENA क्षेत्र के दर्शकों को JioStar के चैनलों की ओरिजिनल सीरीज, फिल्में और टेलीविजन कंटेंट देखने को मिलेगा। इसके अलावा ‘बिग बॉस’ और ‘कॉफी विद करण’ जैसे लोकप्रिय रियलिटी शो भी उपलब्ध होंगे।
JioHotstar का कंटेंट कुल 10 भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें हिंदी, मलयालम, तमिल, तेलुगु और बांग्ला समेत कई भाषाएं शामिल हैं। इस विस्तार का खास फोकस MENA क्षेत्र में रहने वाले दक्षिण एशियाई लोगों पर है। इस क्षेत्र में दक्षिण एशियाई समुदाय की बड़ी आबादी है और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में मनोरंजन की मांग भी है।
‘MENA हमारे लिए अगला अहम मार्केट’
JioStar के इंटरनेशनल बिजनेस हेड अमित मल्होत्रा ने कहा कि MENA कंपनी के लिए अगला अहम मार्केट है। उनके मुताबिक, इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े दक्षिण एशियाई प्रवासी समुदायों में से एक रहता है और यहां अलग-अलग भाषाओं में मनोरंजन की काफी मांग है।
उन्होंने कहा कि Starzplay के साथ साझेदारी से JioHotstar को इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर प्रवेश करने में मदद मिलेगी।
Starzplay ने बताया रणनीतिक निवेश
Starzplay के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) माज शेख ने कहा कि Starzplay पर JioHotstar को लाना कंपनी का एक रणनीतिक निवेश है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी में भारत की मजबूत कहानी कहने की क्षमता को Starzplay की क्षेत्रीय मार्केट और दर्शकों की समझ के साथ जोड़ा गया है।
JioHotstar का MENA में प्रवेश ऐसे समय हुआ है जब प्लेटफॉर्म अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार को लगातार बढ़ा रहा है। ब्रिटेन, कनाडा और सिंगापुर के बाद MENA क्षेत्र में एंट्री के साथ कंपनी की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और बढ़ गई है।
JioStar ने ओडिशा में अपने टीवी चैनलों की कथित तौर पर बिना अनुमति दोबारा प्रसारित किए जाने के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
JioStar ने ओडिशा में अपने टीवी चैनलों की कथित तौर पर बिना अनुमति दोबारा प्रसारित किए जाने के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। कंपनी की शिकायतों के बाद स्थानीय केबल ऑपरेटर्स के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
ताजा मामले भद्रक और कंधमाल में दर्ज हुए हैं। इससे पहले गंजाम, पुरी, जाजपुर और क्योंझर में भी केबल ऑपरेटर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी।
भद्रक में केबल ऑपरेटर के खिलाफ FIR
भद्रक के बोंथ पुलिस स्टेशन में 2 सितंबर 2026 को टिल्लो गांव के एक केबल ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) और कॉपीराइट एक्ट की धारा 63 के तहत कार्रवाई की गई है।
शिकायत के मुताबिक, टिल्लो, जिरिना और आसपास के इलाकों में चल रहे केबल नेटवर्क के जरिए JioStar के चैनलों को बिना अनुमति हासिल कर दोबारा प्रसारित किया जा रहा था।
JioStar ने 28 अगस्त को रिकॉर्ड किए गए वीडियो सबूत भी पुलिस को दिए। कंपनी के मुताबिक, वीडियो में Star Kiran, Colors, Star Plus, Star Gold, Star Sports 1 Hindi और Colors Cineplex Bollywood जैसे चैनलों का दोबारा प्रसारण दिखाया गया। इन चैनलों के साथ DTH प्लेटफॉर्म के लोगो भी दिखाई देने का दावा किया गया है।
कंधमाल में भी मामला दर्ज
कंधमाल में दारिंगबाड़ी पुलिस स्टेशन ने 10 सितंबर को M/s Star Cable Network के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस नेटवर्क के जरिए JioStar के चैनलों को बिना अनुमति दोबारा प्रसारित किया जा रहा था। इसमें उपभोक्ताओं के DTH सेट-टॉप बॉक्स का इस्तेमाल चैनल प्राप्त करने और फिर उन्हें दोबारा प्रसारित करने के लिए किए जाने का भी आरोप है। कंपनी ने 9 सितंबर को रिकॉर्ड किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी पुलिस को सौंपे हैं।
कई जिलों में कार्रवाई
ये मामले JioStar की Anti-Piracy Legal and Enforcement Team की ओडिशा में चल रही बड़ी कार्रवाई का हिस्सा हैं। टीम राज्य में बिना अनुमति चल रहे केबल नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।इससे पहले गंजाम, पुरी, जाजपुर और क्योंझर में हुई कार्रवाई से पता चलता है कि कंपनी की पायरेसी विरोधी मुहिम ओडिशा के कई जिलों तक पहुंच चुकी है।
इन मामलों से यह भी पता चलता है कि Digital Addressable System (DAS) लागू होने के बाद भी बिना अनुमति एनालॉग तरीके से चैनलों के प्रसारण के मामले सामने आ रहे हैं। इस कार्रवाई के जरिए JioStar अपने कंटेंट और वितरण अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल केबल टीवी व्यवस्था के नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।
भारतीय दर्शक अब एक नई तरह की थकान महसूस कर रहा है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे “Subscrption Fatigue” कहा जाता है, यानी OTT खर्चों से थकता दर्शक।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मान लीजिए आप एक सामान्य शहरी परिवार हैं। महीने के अंत में बिजली का बिल, किराया और राशन जैसे जरूरी खर्चों के साथ अब एक नई जिम्मेदारी भी जुड़ गई है- OTT सब्सक्रिप्शंस। Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar, Sony LIV, Zee5 जैसे प्लेटफॉर्म्स, और अगर घर में क्रिकेट देखने वाले हैं तो अलग से स्पोर्ट्स पैक। ऐसे में यह खर्च आसानी से ₹1,500 प्रति महीने के पार पहुंच जाता है।
कोरोना काल के दौरान OTT प्लेटफॉर्म्स भारत में मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। हर प्लेटफॉर्म अलग सब्सक्रिप्शन मांग रहा है, हर बड़ा कंटेंट किसी एक ही ऐप पर “एक्सक्लूसिव” हो गया है और हर साल कीमतें भी बढ़ रही हैं। इसका असर यह है कि भारतीय दर्शक अब एक नई तरह की थकान महसूस कर रहा है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे “Subscrption Fatigue” कहा जाता है, यानी OTT खर्चों से थकता दर्शक।
पहले एक बिल था, अब एक दर्जन ऐप्स
केबल टीवी के दौर में मामला काफी आसान था- एक DTH कनेक्शन, एक मंथली रिचार्ज और सैकड़ों चैनल्स। लेकिन OTT के दौर में यह पूरा फॉर्मूला बदल गया है। अब हर प्लेटफॉर्म का अपना कंटेंट किला है और अपनी अलग दीवारें हैं।
Ormax Media की ताजा रिपोर्ट (2025) के मुताबिक भारत में OTT दर्शकों की संख्या 60.12 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यानी देश की 41% आबादी किसी न किसी रूप में ऑनलाइन वीडियो देखती है। इनमें से पेड सब्सक्रिप्शंस की संख्या 14.82 करोड़ है। भारत का OTT मार्केट 2025 में $5.4 बिलियन का हो चुका है और 2034 तक इसके $28.1 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
हालांकि इन चमकदार आंकड़ों के पीछे एक असुविधाजनक सच भी छिपा है। भारतीय दर्शक अब प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ती कीमतों से ऊबने लगा है।
Subscrption Fatigue क्या है?
Subscrption Fatigue वह मनोवैज्ञानिक थकान है, जो तब पैदा होती है जब दर्शकों को लगने लगता है कि OTT प्लेटफॉर्म्स की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है। लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि कौन-सा कंटेंट किस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
इसके साथ ही हर प्लेटफॉर्म अलग से पेमेंट मांग रहा है। किसी एक शो के लिए एक ऐप, तो दूसरी फिल्म के लिए दूसरा ऐप लेना पड़ता है। कंटेंट पूरी तरह बिखर गया है- एक शो यहां, दूसरा वहां।
दर्शकों की परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। हर महीने OTT पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन कई लोगों को उसके मुकाबले उतनी “वैल्यू” महसूस नहीं होती। यही वजह है कि लोग अब OTT सब्सक्रिप्शंस से थकान महसूस करने लगे हैं।
यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है। अमेरिका जैसे मैच्योर OTT मार्केट्स में भी लोग अब अपने सब्सक्रिप्शंस को रोटेट करने लगे हैं। यानी एक महीने Netflix लिया, अगले महीने Disney+, फिर जरूरत खत्म होने पर कैंसल कर दिया। भारत में भी यही पैटर्न धीरे-धीरे उभरता दिखाई दे रहा है।
भारतीय घर का मंथली OTT बिल: असली हिसाब
आइए एक सामान्य शहरी परिवार का हिसाब देखते हैं, जो सभी मुख्य OTT प्लेटफॉर्म्स सब्सक्राइब करती है:
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प्लेटफॉर्म |
प्लान (2026) |
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Netflix (Standard) |
₹499/माह |
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Amazon Prime Video |
₹299/माह |
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JioHotstar (Premium) |
₹299/माह |
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Sony LIV (Premium monthly) |
₹399/माह |
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Zee5 (All Languages + KidZ) |
₹299/माह |
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कुल मासिक खर्च (approx.) |
~₹1,795/माह |
यानी सिर्फ इन पांच OTT प्लेटफॉर्म्स पर ही अगर सालाना पैकेज लिया जाए, तो दर्शकों का खर्च लगभग ₹8,000 से ₹10,000 तक पहुंच जाता है। इसमें अगर Crunchyroll (anime), Lionsgate Play या कोई रीजनल OTT प्लेटफॉर्म भी जोड़ दिया जाए, तो यह खर्च और ज्यादा बढ़ जाता है।
MiQ की Advanced TV Report India के अनुसार भारतीय दर्शक औसतन 3 स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स subscribe करते हैं और इस पर करीब ₹1,360 प्रति माह खर्च करते हैं। यह आंकड़ा भारत के मध्यम वर्ग के लिए किसी बड़े बोझ से कम नहीं है, क्योंकि जरूरी खर्चों के बाद बचने वाली कमाई पर पहले से ही कई जिम्मेदारियां होती हैं।
Netflix ने मार्च 2026 में अमेरिका में अपने प्लान्स की कीमत एक बार फिर बढ़ाई। पिछले 6 साल में यह 5वीं बार है, जब कंपनी ने कीमतों में इजाफा किया है। हालांकि भारत में Netflix के प्लान्स फिलहाल नहीं बदले गए हैं- Mobile ₹149, Standard ₹499 और Premium ₹649- लेकिन पिछले ट्रेंड बताते हैं कि अमेरिका में कीमतें बढ़ने के 6-12 महीने बाद उसका असर भारत में भी देखने को मिलता है।
वहीं, JioHotstar ने जनवरी 2026 से अपने प्रीमियम सालाना प्लान की कीमत ₹1,499 से बढ़ाकर ₹2,199 कर दी। यानी इसमें करीब 47% की बढ़ोतरी हुई है।
Amazon Prime Video ने June 2025 से अपने स्टैंडर्ड प्लान में विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए हैं। अब विज्ञापन मुक्त कंटेंट देखने के लिए यूजर्स को ₹699 प्रति वर्ष या ₹129 प्रति माह अलग से चुकाने पड़ रहे हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या कीमत को लेकर संवेदनशील भारतीय बाजार यह बढ़ता OTT खर्च लंबे समय तक झेल पाएगा?
Telecom Bundling: थकान का अस्थायी इलाज
OTT इंडस्ट्री की असली लाइफलाइन फिलहाल Telecom Bundling बनती जा रही है।
Reliance Jio का ₹749 वाला पोस्टपेड प्लान Netflix Basic, Amazon Prime Lite और JioHotstar तीनों का एक्सेस एक साथ देता है। वहीं Airtel के Xstream bundles में भी कई OTT सर्विसेज शामिल हैं। यानी बड़ी संख्या में यूजर्स को OTT का डायरेक्ट बिल अलग से नहीं भरना पड़ता, क्योंकि उसका खर्च उनके मोबाइल रिचार्ज में ही जुड़ा होता है।
यह मॉडल इसलिए कारगर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें यूज़र्स को अलग-अलग पेमेंट करने का झंझट नहीं रहता। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों की सब्सक्राइबर रिटेंशन बेहतर होती है और OTT प्लेटफॉर्म्स को एक भरोसेमंद सब्सक्राइबर बेस मिल जाता है।
हालांकि यह समाधान पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। Bundled प्लान्स में अक्सर सिर्फ बेसिक टियर ही मिलता है। HD या 4K क्वॉलिटी और प्रीमियम प्लान्स के लिए यूज़र्स को अलग से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा जैसे-जैसे टेलीकॉम प्लान्स महंगे हो रहे हैं, वैसे-वैसे यह “फ्री” OTT भी लोगों को महंगा पड़ने लगा है।
पॉसवर्ड शेयरिंग: OTT का साइलेंट क्राइसेस
भारत में एक OTT सब्सक्रिप्शन को घर के कई लोग, दोस्त और रिश्तेदार मिलकर इस्तेमाल करते हैं। यह कोई सिक्रेट नहीं, बल्कि एक आम सामाजिक प्रैक्टिस बन चुकी है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर OTT प्लेटफॉर्म्स पॉसवर्ड शेयरिंग को प्रभावी तरीके से रोक दें, तो वे अपने पेड सब्सक्राइबर बेस को दोगुना तक बढ़ा सकते हैं।
Netflix ने पॉसवर्ड शेयरिंग रोकने के लिए दुनियाभर में सख्ती शुरू की थी। इसका फायदा कंपनी को तुरंत मिला। सिर्फ Q2 2023 में ही Netflix को 59 लाख नए सब्सक्राइबर्स मिले, जबकि इससे एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने 10 लाख सब्सक्राइबर्स खो दिए थे।
लेकिन भारत में यह तरीका उतना आसान नहीं है। यहां सबसे बड़ी समस्या एफोर्डबिलिटी (affordability) यानी लोगों की खर्च करने की क्षमता है। अगर कोई परिवार अब तक एक ही Netflix अकाउंट मिल-बांटकर चला रहा था और अब सभी को अलग सब्सक्रिप्शन लेना पड़े, तो कई लोग सीधा कहेंगे- “Netflix बंद कर दो।”
इसी वजह से भारत में पॉसवर्ड शेयरिंग को पायरेसी का एक “सॉफ्ट वर्जन” माना जाने लगा है। लोग पैसे कम खर्च करना चाहते हैं, लेकिन अपने पसंदीदा कंटेंट को छोड़ना भी नहीं चाहते।
Ad-Supported OTT: फ्री का जादू वापस आ रहा है
OTT इंडस्ट्री इस समय एक बड़ा U-turn लेती दिखाई दे रही है। जिन प्लेटफॉर्म्स ने शुरुआत में सिर्फ सब्सक्रिप्शन मॉडल के दम पर अपनी पहचान बनाई थी, वे अब तेजी से ऐडवर्टाइजिंग की तरफ लौट रहे हैं।
SVOD यानी Subscription Video On Demand- यह Netflix-style पेड मॉडल है, जहां दर्शकों को कंटेंट देखने के लिए हर महीने या सालाना शुल्क देना पड़ता है। वहीं AVOD यानी ऐडवर्टाइजिंग Video On Demand- YouTube-style मॉडल है, जिसमें कंटेंट मुफ्त होता है, लेकिन बीच-बीच में विज्ञापन दिखाए जाते हैं।
अब OTT इंडस्ट्री का झुकाव तेजी से AVOD मॉडल की तरफ बढ़ रहा है।
Amazon Prime Video ने जून 2025 में अपने स्टैंडर्ड प्लान को AVOD मॉडल में बदल दिया। इसका मतलब यह है कि अब रेगुलर प्राइम मेंबर्स को भी कंटेंट देखते समय विज्ञापन दिखाई देते हैं। अगर कोई यूज़र विज्ञापन-मुक्त अनुभव चाहता है, तो उसे इसके लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं।
वहीं Netflix का ad-supported tier भी तेजी से नए सब्सक्राइबर्स जोड़ रहा है। FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक AVOD अब OTT रेवेन्यू ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनता जा रहा है और इसकी रफ्तार SVOD मॉडल से भी ज्यादा तेज है।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत मूल रूप से फ्री कंटेंट का बाजार माना जाता है। YouTube, MX Player और JioCinema के फ्री cricket स्ट्रीमिंग एक्सपेरिमेंट्स ने यह बात साफ कर दी है।
IPL 2023 में जब JioCinema ने फ्री स्ट्रीमिंग शुरू की, तो टूर्नामेंट के पहले 17 मैचेस में ही 550 करोड़ cumulative video views दर्ज किए गए। वहीं फाइनल मुकाबले के दौरान एक साथ 3.2 करोड़ concurrent व्युअर्स जुड़े, जो एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड था। यह वह स्केल है, जहां तक किसी भी पेड OTT प्लेटफॉर्म का पहुंचना बेहद मुश्किल माना जाता है।
Sports राइट्स: सबसे बड़ी Fragmentation की जड़
आज OTT की दुनिया में दर्शकों को अपनी पसंद के कंटेंट के हिसाब से अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ रहा है।
अगर आप क्रिकेट फैन हैं, तो JioHotstar जरूरी है, क्योंकि IPL राइट्स उसी के पास हैं। अगर आप फुटबॉल देखना पसंद करते हैं, तो उसके लिए अलग प्लेटफॉर्म चाहिए। WWE देखने वालों को Sony LIV लेना पड़ता है। Anime पसंद करने वाले दर्शकों के लिए Crunchyroll जरूरी हो जाता है। वहीं Hollywood का लेटेस्ट कंटेंट देखने के लिए Netflix या Prime का सहारा लेना पड़ता है।
यानी अब दर्शकों को कंटेंट के हिसाब से अलग-अलग OTT सब्सक्रिप्शंस लेने पड़ रहे हैं।
केबल टीवी के दौर में स्थिति काफी अलग थी। उस समय “one pack, many channels” का मॉडल चलता था। लेकिन OTT के दौर में अब “many ऐप्स, many bills” नई रियलटी बनती जा रही है।
स्पोर्ट्स राइट्स को लेकर प्लेटफॉर्म्स के बीच होड़ ने यह समस्या और बढ़ा दी है। अब लगभग हर बड़ी स्पोर्ट्स लीग किसी एक OTT प्लेटफॉर्म पर ही देखने को मिलती है। ऐसे में दर्शकों के पास दो ही रास्ते बचते हैं- या तो उस प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लें, या फिर अपना पसंदीदा मैच और कंटेंट छोड़ दें।
रीजनल OTT: दिल जीता, जेब नहीं
Regional OTT: दिल जीता, जेब नहीं
भारत कई भाषाओं वाला देश है और रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स ने इस बात को अच्छी तरह समझा है।
Hoichoi (बंगाली), ManoramaMAX (मलयालम), Sun NXT (तमिल, तेलुगु) और Chaupal (पंजाबी) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी-अपनी भाषाओं के दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है।
Market Research Future के मुताबिक 2025 में रीजनल language content में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह trend साफ दिखाता है कि दर्शक अपनी भाषा में कंटेंट देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
लेकिन यहां भी सबसे बड़ी समस्या वही है- हर रीजनल ऐप का अलग subscription।
उदाहरण के तौर पर, अगर मुंबई में रहने वाला कोई मराठी परिवार Bengali content भी देखना चाहता है, तो उसे national OTT प्लेटफॉर्म्स के अलावा दो रीजनल ऐप्स का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स अपने survival के लिए telecom bundling या national aggregation का रास्ता अपनाएंगे? 2026 में यह OTT इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा strategic सवाल माना जा रहा है।
Aggregator ऐप्स: Cable Operator की वापसी?
OTT इंडस्ट्री में अब एक नई संभावना भी दिखाई दे रही है। जैसे पहले cable operators एक ही subscription में सैकड़ों चैनल्स उपलब्ध कराते थे, वैसे ही अब OTT aggregator ऐप्स का चलन बढ़ सकता है।
Tata Play Binge पहले से इस मॉडल पर काम कर रही है। इसमें users को एक ही app में कई OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस और एक ही billing system मिलता है।
Smart TV ecosystems और broadband bundles में भी यह trend तेजी से दिखाई देने लगा है।
अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हो जाता है, तो यह subscription fatigue का सबसे practical समाधान बन सकता है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि OTT प्लेटफॉर्म्स आपस में revenue share करने के लिए कितने तैयार होते हैं।
Connected TV: Big Screen पर Big Business
सब्सक्रिप्शन fatigue के बीच एक बड़ा बदलाव Connected TV यानी CTV के रूप में भी देखने को मिल रहा है।
Ormax की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में active CTV users की संख्या 12.92 करोड़ तक पहुंच गई है। यह 2024 के मुकाबले 87% की बड़ी छलांग है।
FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के अनुसार यह करीब 6.8 करोड़ CTV households तक फैल चुका है, जिनमें से 4 करोड़ weekly active हैं।
इसी रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में CTV ऐडवर्टाइजिंग revenues 42% बढ़कर ₹9,900 करोड़ तक पहुंच गए।
वहीं WPP की TYNY 2026 report का अनुमान है कि 2026 में CTV ऐडवर्टाइजिंग में 22% की growth देखने को मिलेगी।
यह advertisers के लिए एक नई opportunity बनकर उभर रहा है। जैसे-जैसे लोग पेड सब्सक्रिप्शंस से हटकर फ्री और ad-supported प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ब्रैंड्स को बड़े स्क्रीन पर टार्गेटेड ऐडवर्टाइजिंग का मौका मिल रहा है।
अनुमान है कि CTV ऐडवर्टाइजिंग 2026 तक ₹8,000 करोड़ तक पहुंच सकती है।
Consumer Psychology: “कुछ देखने को नहीं” का Paradox
OTT इंडस्ट्री में एक दिलचस्प स्थिति भी देखने को मिलती है। आज 600 करोड़ वीडियोज, हजारों शोज और दर्जनों प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय दर्शक अक्सर शिकायत करता है- “कुछ देखने को नहीं।”
यह स्थिति जरूरत से ज्यादा कंटेंट होने की वजह से बनती है। जब देखने के लिए बहुत ज्यादा विकल्प होते हैं, तो लोग समझ नहीं पाते कि आखिर क्या देखें।
Auto-debit frustration, मंथली सब्सक्रिप्शन रिमाइंडर्स और अलग-अलग ऐप्स में कंटेंट ढूंढने की परेशानी- यह सब मिलकर व्युअर्स को मानसिक रूप से थका देता है।
MiQ की रिपोर्ट के मुताबिक 67% भारतीय व्युअर्स आने वाले समय में अपने streaming सब्सक्रिप्शंस बढ़ाने की सोच रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ वही दर्शक प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती कीमतों से नाराज भी हैं।
Advertisers के लिए क्या मायने?
अगर दर्शक पेड सब्सक्रिप्शंस कम करते हैं और फ्री या ad-supported प्लेटफॉर्म्स की तरफ जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है।
FICCI-EY की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग 2025 में 26% बढ़कर ₹94,700 करोड़ ($11.4 बिलियन) तक पहुंच गई। अनुमान है कि 2028 तक यह आंकड़ा ₹1,39,000 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
YouTube अकेले 2030 तक भारत में $3.05 बिलियन का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू जनरेट करेगा।
OTT प्लेटफॉर्म्स पर ऐड इन्वेंट्री बढ़ने से ब्रैंड्स को टार्गेटेड और डेटा संचालित वीडियो ऐडवर्टाइजिंग का बेहतर मौका मिलेगा। वहीं Connected TV पर प्रीमियम ऐप प्लेसमेंट्स की वैल्यू भी लगातार बढ़ेगी।
OTT का Next Phase: क्या होगा आगे?
2026 और उसके बाद भारत का OTT landscape कई बड़े बदलावों से गुजर सकता है।
Consolidation: छोटे OTT प्लेटफॉर्म्स या तो बड़े प्लेटफॉर्म्स में merge हो सकते हैं या फिर बाजार से बाहर हो सकते हैं। बढ़ते competitive pressure में survival आसान नहीं रहेगा।
Flexible Pricing: भविष्य में वीकली प्लान्स, event-based सब्सक्रिप्शंस (जैसे सिर्फ IPL सीजन के लिए) और माइक्रो-पेमेंट्स जैसे एक्सपेरिमेंट्स बढ़ सकते हैं।
Hybrid Models का विस्तार: फ्री + विज्ञापन वाला टियर लगभग हर प्लेटफॉर्म पर स्टैंडर्ड बन सकता है। वहीं सिर्फ पेड मॉडल धीरे-धीरे लग्जरी सेगमेंट तक सीमित हो सकता है।
AI-Powered Personalization: आने वाले समय में OTT प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट सुझाव इतनी बेहतर हो सकती है कि लोगों को अलग-अलग ऐप्स पर जाकर कंटेंट ढूंढने की जरूरत न पड़े। उन्हें एक ही जगह अपनी पसंद का ज्यादा कंटेंट आसानी से मिल सकता है।
बैलेंस ही असली जवाब
भारत में OTT की कहानी अब सिर्फ technology और entertainment तक सीमित नहीं रह गई है। यह लोगों की बदलती आदतों और डिजिटल मनोरंजन के बदलते कारोबार की कहानी बन चुकी है।
एक तरफ देश में 60 करोड़ से ज्यादा OTT व्युअर्स हैं, Connected TV की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा SVOD मार्केट बनने की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन दूसरी तरफ OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती कीमतें, अलग-अलग ऐप्स में बंटा कंटेंट, पॉसवर्ड शेयरिंग की समस्या और बढ़ता खर्च लोगों को परेशान भी कर रहा है।
मिडिल क्लास दर्शक हर महीने यही सोचता है- “इस बार कौन सा OTT बंद करूं?”
यही वजह है कि भारत में OTT का भविष्य सिर्फ महंगे सब्सक्रिप्शंस पर नहीं टिका होगा। आने वाले समय में वही प्लेटफॉर्म ज्यादा सफल होंगे, जो कम कीमत, अच्छे कंटेंट, विज्ञापन और आसान एक्सेस के बीच सही संतुलन बना पाएंगे।
जो प्लेटफॉर्म दर्शकों की जरूरत और उनकी जेब- दोनों को समझेगा, वही सबसे आगे निकलेगा।