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OTT प्लेटफॉर्म्स पर पर 'फेयर-शेयर' शुल्क की मांग तेज, टेलीकॉम कंपनियों की सरकार से अपील
रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं ने सरकार से एक नए रेगुलेटरी ढांचे की मांग की है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं ने सरकार से एक नए रेगुलेटरी ढांचे की मांग की है, जिसके तहत प्रमुख ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स को देश के टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत में हिस्सा देना अनिवार्य हो।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन टेलीकॉम कंपनियों ने दूरसंचार विभाग (DoT) से अनुरोध किया है कि नेटफ्लिक्स, वॉट्सऐप, एमेजॉन प्राइम, फेसबुक, इंस्टाग्राम और जूम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (USO) शुल्क की तर्ज पर एक विशेष शुल्क लगाया जाए।
टेलीकॉम ऑपरेटर्स का कहना है कि ये OTT प्लेटफॉर्म्स भारी मात्रा में इंटरनेट ट्रैफिक पैदा करते हैं और नेटवर्क संसाधनों पर गंभीर दबाव डालते हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और विस्तार देने में लगातार निवेश की जरूरत पड़ती है।
हालांकि OTT प्लेटफॉर्म्स देश के टेलीकॉम नेटवर्क पर भारी निर्भर हैं, फिर भी वे इन प्रणालियों के रखरखाव या उन्नयन की लागत में किसी प्रकार की भागीदारी नहीं करते।
इस असंतुलन को दूर करने के लिए ऑपरेटर्स ने सुझाव दिया है कि OTT कंपनियों की भारत में होने वाली कमाई का एक हिस्सा टैक्स या लेवी के रूप में वसूला जाए। यह राशि भारत के समेकित कोष (Consolidated Fund of India) या डिजिटल निधि जैसे किसी विशेष फंड में जमा की जा सकती है। इसके साथ ही, वे OTT प्लेटफॉर्म्स को कॉर्पोरेट टैक्स और वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने की भी मांग कर रहे हैं।
सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI), जो इन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, का कहना है कि OTT से "फेयर-शेयर" योगदान लेने से नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन नहीं होगा। बल्कि इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा गुणवत्ता मिलेगी क्योंकि यह मजबूत और विश्वसनीय नेटवर्क को सक्षम बनाएगा।
वहीं, इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) और ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (BIF) जैसे उद्योग संगठन इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के शुल्क नवाचार को बाधित कर सकते हैं, उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ बढ़ा सकते हैं और नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांतों का अतिक्रमण कर सकते हैं।
जैसे-जैसे देश में डेटा खपत तेजी से बढ़ रही है और टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क को बनाए रखने के रास्ते तलाश रही हैं, सरकार के सामने नवाचार, उपभोक्ता हित और इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए राजस्व-साझाकरण मॉडल पर बातचीत फिलहाल जारी है।
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