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OTT पर सख्ती को इंडस्ट्री का समर्थन, कहा– रचनात्मकता की आड़ में अश्लीलता नहीं चलेगी

जहां कुछ लोग इसे क्रिएटिव फ्रीडम (रचनात्मक स्वतंत्रता) पर हमला मान रहे हैं, वहीं एंटरटेनमेंट जगत का एक बड़ा वर्ग इस कार्रवाई का समर्थन कर रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने हाल ही में हाल ही में सरकार ने IT एक्ट की धारा 69A का इस्तेमाल करते हुए 25 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है, जिनमें ALTT, Ullu और कुछ अन्य कम चर्चित स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं। इसका कारण यह बताया गया कि ये प्लेटफॉर्म्स अश्लील कंटेंट का प्रसारण कर रहे थे। इस फैसले ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहस और आत्ममंथन शुरू कर दिया है।

जहां कुछ लोग इसे क्रिएटिव फ्रीडम (रचनात्मक स्वतंत्रता) पर हमला मान रहे हैं, वहीं एंटरटेनमेंट जगत का एक बड़ा वर्ग इस कार्रवाई का समर्थन कर रहा है।

रेडिफ्यूजन के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप गोयल कहते हैं, "दो गलत चीजें मिलकर कभी सही नहीं हो जातीं। ये प्लेटफॉर्म्स जिस तरह से बिना रोक-टोक के चल रहे थे, वो शुरू से ही एक समस्या थी। लेकिन यदि इन्हें ऐसे ही आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने दिया जाता, तो स्थिति और भी खराब होती। इसलिए भले ही ये बैन देर से आया हो, लेकिन यह एक सही दिशा में उठाया गया कदम है।"

डॉ. संदीप गोयल ने आगे कहा, "जब आत्म-नियमन विफल हो जाता है, तो सरकार के पास कार्यकारी कार्रवाई का सहारा लेने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। रचनात्मक स्वतंत्रता भले ही एक व्यक्तिगत विचार हो, लेकिन अश्लीलता नहीं। यदि पोर्न की आसान उपलब्धता पर रोक को नकारात्मक माना जाए, तो भी ऐसा ही सही।"

OTT की स्वतंत्रता बनाम जिम्मेदारी

डॉ. गोयल की बातें उस व्यापक सोच को उजागर करती हैं जो लंबे समय से ओटीटी इंडस्ट्री में भीतर-ही-भीतर उबल रही थी। जहां कुछ लोगों को यह प्रतिबंध कठोर लग सकता है, वहीं इंडस्ट्री के कई जानकार मानते हैं कि यह वही बात है जिसे जिम्मेदार लोग सालों से कह रहे थे कि बिना कंटेंट स्टैंडर्ड्स और उम्र सीमा की व्यवस्था के कुछ ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने अपनी राह भटका ली थी।

एक सीनियर प्रड्यूसर और ALT बालाजी के पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "ओटीटी पर कुछ तो रेगुलेशन होना चाहिए। फिल्मों के लिए CBFC है, टीवी पर आत्म-नियमन होता है, लेकिन ओटीटी तो बिल्कुल बेकाबू है। यदि पोर्न बनाना है तो साफ-साफ पोर्न बनाइए, लेकिन सॉफ्ट पोर्न बनाकर उसे 'कंटेंट' कहना कहां तक सही है?"

सस्ती डेटा दरें और मोबाइल पर आसान पहुंच बनीं समस्या

वह आगे जोड़ते हैं, "मैं एडल्ट कंटेंट के खिलाफ नहीं हूं, जब तक उसे साफ तौर पर लेबल किया जाए और उचित उम्र सत्यापन के बाद ही एक्सेस दिया जाए। लेकिन हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि दो चीजों का बड़ा सामाजिक प्रभाव पड़ा है- बहुत सस्ते डेटा प्लान और मोबाइल पर पोर्न या सॉफ्ट पोर्न की आसान उपलब्धता। रचनात्मक स्वतंत्रता की आड़ में इसे जायज ठहराना सही नहीं है। सिर्फ दृश्य ही नहीं, इन शोज में प्रयोग की जाने वाली भाषा और संवाद भी कई दर्शकों के लिए असहज हैं।"

“OTT को सिर्फ उत्तेजना तक सीमित करना दुर्भाग्यपूर्ण”

PTPL इंडिया के COO और SonyLIV के पूर्व अधिकारी पेप फिगेरेडो ने भी इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा, "डिजिटल कंटेंट सिर्फ अश्लीलता, नग्नता या सनसनीखेज चीजों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें रचनात्मकता, संस्कृति और मजबूत कहानी होनी चाहिए। माध्यम की क्षमता बहुत अधिक है, उसे सिर्फ उत्तेजना तक सीमित कर देना इसके मूल उद्देश्य को ही नुकसान पहुंचाता है।"

MIB ने IT Act की धारा 69A का किया इस्तेमाल

मंत्रालय ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत इन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी किए हैं, जिनमें ALTT, उल्लू और कई अन्य क्षेत्रीय व लघु स्तर के ओटीटी शामिल हैं।

70 से अधिक ओटीटी, अधिकतर लघु और हाइपरलोकल

भारत में लगभग 70 वीडियो ओटीटी प्लेटफॉर्म्स हैं। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर एक दर्जन बड़े नामों को छोड़ दें, तो बाकी ज्यादातर छोटे और हाइपरलोकल हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है, "जहां बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अपने कंटेंट को लेकर सावधान रहते हैं, वहीं छोटे खिलाड़ी बिना किसी जवाबदेही के सिर्फ सब्सक्रिप्शन और व्युरशिप के पीछे भाग रहे हैं।"

मार्केट का भविष्य गुणवत्ता के साथ संतुलन पर निर्भर

PwC की रिपोर्ट ‘ग्लोबल एंटरटेनमेंट एंड मीडिया आउटलुक 2023–2027: इंडिया परस्पेक्टिव’ के अनुसार, भारत का वीडियो ओटीटी बाजार, जिसका नेतृत्व Amazon Prime Video, Netflix और Disney+ Hotstar (अब JioCinema) कर रहे हैं, 2027 तक $3.5 बिलियन का राजस्व पार कर सकता है। एक सीनियर एग्जिक्यूटिव कहते हैं, "बाजार जैसे-जैसे परिपक्व होगा, इन खिलाड़ियों को पहुंच और जिम्मेदारी के बीच संतुलन साधना होगा, नहीं तो वे अधिक रेगुलेटेड और गुणवत्ता-संवेदनशील डिजिटल भविष्य में पीछे छूट जाएंगे।"

ALTT: एक मिसाल जो भटक गई

ALTT का सफर इस बदलाव का बड़ा उदाहरण है। कभी भारत में ओटीटी का पायनियर रहा यह प्लेटफॉर्म ‘गंदी बात’ जैसे हिट्स के बाद एडल्ट कंटेंट की ओर झुक गया। शुरुआती प्रयोग ही इसकी पहचान बन गया, जिससे यह एक ऐसी दिशा में चला गया जहाँ से न तो वह विस्तार कर सका और न ही सम्मानजनक रूप से कमाई।

सरकारी कार्रवाई के बाद एकता कपूर ने स्पष्ट किया कि वह और उनकी मां शोभा कपूर 2021 से ALTT से किसी भी रूप में जुड़ी नहीं हैं।

फिगेरेडो सवाल उठाते हैं, "आज सभी फाउंडर कहते हैं कि अब उनका संबंध प्लेटफॉर्म से नहीं है, लेकिन क्या उन्होंने ही शुरुआत में इसकी दिशा तय नहीं की थी?"

प्रतिबंध ही हल नहीं है

हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बैन लगाना समाधान नहीं है। यह दर्शकों को टॉरेंट या वीपीएन जैसे अवैध विकल्पों की ओर मोड़ सकता है। एक ओटीटी विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं, "प्रतिबंध रुचि को कम नहीं करते, बल्कि उसे भूमिगत ले जाते हैं, जिससे निगरानी और नियंत्रण और मुश्किल हो जाता है।"

संतुलन की जरूरत

इसीलिए कई इंडस्ट्री लीडर्स एक संतुलित दृष्टिकोण की वकालत कर रहे हैं, जिसमें कंटेंट की पहुंच, यूजर एजुकेशन और रेगुलेशन साथ चले। सीधे प्रतिबंध की बजाय ऐसी रणनीति ज्यादा असरदार हो सकती है, जो रचनात्मकता को सुरक्षित रखते हुए समाज के हितों की रक्षा भी करे।


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