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OTT प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतों में 944% की उछाल, FY25 में कुल 1,086 शिकायतें: MIB रिपोर्ट
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के मुताबिक OTT प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया से जुड़ी शिकायतों में पिछले साल के मुकाबले भारी बढ़ोतरी हुई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के मुताबिक OTT प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया से जुड़ी शिकायतों में पिछले साल के मुकाबले भारी बढ़ोतरी हुई है। यह दर्शाता है कि ऑनलाइन कंटेंट पर उपभोक्ताओं की नजर अब पहले से ज्यादा सख्त हो गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कुल 1,086 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि 2023-24 में यह संख्या सिर्फ 104 थी। यानी साल-दर-साल शिकायतों में 944% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के खिलाफ शिकायतें भी बढ़ीं और 196 से बढ़कर 859 हो गईं, जो करीब 338% की बढ़ोतरी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये शिकायतें या तो सीधे MIB को मिलीं या केंद्रीय सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (CPGRAMS) के जरिए आईं। इन शिकायतों का जवाब या तो सीधे दिया गया या संबंधित प्लेटफॉर्म्स को IT नियमों के तहत समाधान के लिए भेजा गया।
सरकार ने 25 वेबसाइट्स और ऐप्स पर भी बैन लगाया, जिनमें ALTT, ULLU, Big Shots App, Desiflix, Boomex, Navarasa Lite, Gulab App, Kangan App, Bull App, Jalva App, Wow Entertainment, Look Entertainment, Hitprime, Feneo, ShowX, Sol Talkies, Adda TV, HotX VIP, Hulchul App, MoodX, NeonX VIP, Fugi, Mojflix, Triflicks शामिल हैं। ये सभी प्लेटफॉर्म्स IT एक्ट 2000 और अन्य कानूनों का उल्लंघन कर रहे थे।
MIB ने कहा कि इंटरमीडियरीज यानी प्लेटफॉर्म्स और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स जिम्मेदार हैं कि वे अवैध सामग्री को हटाएं या भारत में इसकी पहुंच बंद करें। OTT प्लेटफॉर्म्स को अपनी आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली के जरिए निर्धारित समय में शिकायतों का समाधान करना होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक OTT प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतों में इतनी तेज बढ़ोतरी के पीछे OTT का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल, क्षेत्रीय बाजारों में पैठ, कंटेंट की संवेदनशीलता, आयु वर्ग और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व जैसे कारण हैं। साथ ही प्लेटफॉर्म्स द्वारा नई और जोखिम भरी सामग्री पेश करना भी इसका एक बड़ा कारण है।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के खिलाफ शिकायतों में वृद्धि में संपादकीय नीतियों, राजनीतिक कवरेज, गलत जानकारी और हेडलाइन की सटीकता को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंता अहम भूमिका निभा रही है।
मंत्रालय का रुख साफ है कि शिकायतों का समाधान मुख्य रूप से प्लेटफॉर्म या पब्लिशर स्तर पर होना चाहिए, और MIB केवल पर्यवेक्षण करता है। इस नीति का मकसद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिकायतों में इतनी बढ़ोतरी सीधे कड़े नियमों की ओर संकेत नहीं करती, लेकिन अगर शिकायतों का समाधान समय पर न हुआ या एक ही प्लेटफॉर्म पर बार-बार शिकायतें आईं, तो भविष्य में नियमों में बदलाव हो सकता है।
भारत के डिजिटल मीडिया बाजार के तेजी से बढ़ने के साथ, शिकायत निवारण अब एक अहम अनुपालन मापदंड बन गया है, जो भविष्य में नीति, प्लेटफॉर्म के व्यवहार और निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है।
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