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श्रीवर्धन त्रिवेदी ने बताया विचार का महत्व, सिखाए पत्रकारिता में सफल होने के गुर
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘एंकरिंग कला’ पर विशेष व्याखान का हुआ आयोजन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है विचार। इसमें भी महत्वपूर्ण है सही विचार। विचार ही हमारे व्यवहार को तय करता है। व्यवहार हमारे कार्य को प्रभावित करता है और ये कर्म ही हमारे जीवन को तय करते हैं। यानी हमारा जीवन हमारे हाथ में होता है। हमारे विचार अच्छे हैं तो जीवन भी सफल होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपने मन–विचारों पर संकल्प रखना चाहिए। हम देखें कि हमारी विचार प्रक्रिया सही दिशा में हो। यह विचार जाने-माने टीवी न्यूज एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में ‘एंकरिंग कला’ पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि टीवी पत्रकारिता में लोग एंकर्स से प्रभावित होकर आते हैं लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि इस क्षेत्र में काम के अन्य अवसर भी हैं। रिपोर्टिंग से लेकर शोध तक में अच्छे लोगों की आवश्यकता है। एंकरिंग में उच्चारण का बड़ा महत्व है। हमारी प्रस्तुति पर हमारी मातृभाषा का प्रभाव रहता है। शुद्ध उच्चारण के लिए बहुत अभ्यास करना होता है। इसके अलावा नामों का उच्चारण भी महत्व रखता है। एक एंकर को इसलिए हटाना पड़ गया क्योंकि उसने चीन के राष्ट्रपति के नाम को गलत ढंग से बता दिया। उन्होंने कहा कि एंकरिंग सिर्फ प्रस्तुति नहीं है, बल्कि उसके पीछे बहुत मेहनत रहती है। कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि आज पत्रकार को कम से कम एक विषय में पारंगत होना चाहिए। इससे पत्रकार को पहचान मिलती है। यह समय विशेषज्ञता का है।
वहीं, मुख्य वक्ता श्रीवर्धन त्रिवेदी ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हमें हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपने काम से प्रेम करना चाहिए। जब हम अपने काम से प्रेम करना सीख लेते हैं तो हमें भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग करें या एंकरिंग करें या फिर कोई और काम करें, हमें अपने काम पर विश्वास रखना चाहिए। यह विश्वास ही हमें सफलता दिलाता है। उन्होंने कहा कि हम पत्रकारिता में भले ही किसी से प्रेरित होकर आते हैं लेकिन समय के साथ हम स्वयं का मूल्यांकन कर लेते हैं और यह समझ लेते हैं कि हम किस काम के लिए बने हैं। सफलता का एक और मंत्र है–फोकस रहना। हमें अपने काम और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।
त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को एंकरिंग के गुर सिखाते हुए कहा कि पत्रकारिता प्रोफेशन नहीं है, यह जीवन शैली है। यानी आपको पत्रकारिता को जीना पड़ता है। एंकर के लिए जरूरी है कि उसकी पकड़ कथ्य और तथ्य के साथ सत्य पर हो। अच्छा एंकर बनने के लिए आपको बहुत पढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रस्तावना जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष जोशी ने रखी। उन्होंने कहा कि एंकर बनने के लिए सिर्फ अच्छा दिखाना और अच्छी आवाज ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विविध विषयों का ज्ञान–समझ होना सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं, संचालन विद्यार्थी अमृत प्रकाश ने और आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक डॉ. उर्वशी परमार ने किया। इस अवसर पर सभी विभागों के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। ऑनलाइन माध्यम से खंडवा, रीवा और दतिया परिसर के विद्यार्थी भी आयोजन में शामिल हुए।
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