मुंबई की अर्बन मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी साइनपोस्ट इंडिया लिमिटेड (Signpost India Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मुंबई की अर्बन मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी साइनपोस्ट इंडिया लिमिटेड (Signpost India Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 11.3% बढ़कर ₹34.5 करोड़ हो गया। इस दौरान कंपनी की आय भी 5.6% बढ़कर ₹286.8 करोड़ पहुंच गई। कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह एक साल पहले के ₹20.1 करोड़ से तीन गुना से ज्यादा बढ़कर ₹61.4 करोड़ हो गया।
हालांकि, जुलाई-सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में कंपनी की आय लगभग स्थिर रही। इस दौरान आय 0.4% की मामूली बढ़त के साथ ₹134.5 करोड़ रही, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹134 करोड़ थी। कंपनी के मुताबिक, इस बार नवरात्रि पिछले साल के मुकाबले करीब तीन सप्ताह देर से शुरू हुई। इसके चलते कई त्योहारों से जुड़े विज्ञापन अभियान दूसरी तिमाही के बजाय तीसरी तिमाही में चले गए। बड़े कॉरपोरेट विज्ञापनदाताओं ने भी दूसरी तिमाही के बजट में कटौती की, जिसका असर खास तौर पर एजेंसी के जरिए मिलने वाले कारोबार पर पड़ा।
कंपनी ने 3 नवंबर को जारी अपने नतीजों में बताया कि ये आंकड़े 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड कंसॉलिडेटेड नतीजे हैं।
डिजिटल कारोबार से बढ़ी कमाई
Signpost India के कारोबार में डिजिटल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। दूसरी तिमाही में कंपनी की डिजिटल आय सालाना आधार पर 38% बढ़ी। वहीं, सीधे ग्राहकों से मिलने वाली आय (Direct Client Revenue) में 44% की बढ़ोतरी हुई। अब डिजिटल कारोबार कंपनी की तिमाही आय का 34% और सीधे ग्राहकों से मिलने वाला कारोबार 73% है।
कंपनी के मुताबिक, इससे उसकी आय की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और कारोबार विज्ञापन एजेंसियों जैसे बिचौलियों पर कम निर्भर हो रहा है।
दूसरी तिमाही में मुनाफा लगभग स्थिर
दूसरी तिमाही में कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) ₹15.8 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹15.7 करोड़ से 0.6% ज्यादा है। इस दौरान PAT मार्जिन 11.7% पर स्थिर रहा।
हालांकि, कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA 17.4% घटकर ₹28.4 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹34.4 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी 25.7% से घटकर 21.1% पर आ गया। कंपनी का ग्रॉस प्रॉफिट 7% घटकर ₹51.6 करोड़ रहा और ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन 41.4% से घटकर 38.3% हो गया।
कंपनी ने बताया कि नई ट्रांजिट मीडिया संपत्तियां जोड़ने के कारण सर्विस कॉस्ट 6% बढ़कर ₹83 करोड़ हो गई। वहीं, कर्मचारियों पर खर्च सालाना बढ़ोतरी और नई नियुक्तियों के चलते ₹11.2 करोड़ से बढ़कर ₹13.9 करोड़ हो गया। दूसरी ओर, अन्य खर्चों में 7% की कमी आई और यह ₹9.2 करोड़ रहा।
कैश फ्लो में तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी
पहली छमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो ₹61.4 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹20.1 करोड़ था। कंपनी के मुताबिक, इस बढ़ोतरी में ट्रेड रिसीवेबल्स यानी ग्राहकों से मिलने वाली बकाया रकम में ₹44.2 करोड़ की कमी की भी भूमिका रही। 30 सितंबर 2026 को ट्रेड रिसीवेबल्स ₹273.1 करोड़ थे।
कंपनी ने पहली छमाही में ₹48 करोड़ का निवेश किया, जिसका बड़ा हिस्सा नए ट्रांजिट मीडिया एसेट्स पर खर्च हुआ। इस दौरान कैश और बैंक बैलेंस बढ़कर ₹35.3 करोड़ हो गया, जो 31 मार्च 2026 को ₹24 करोड़ था।
कंपनी का फंड आधारित कर्ज लगभग स्थिर रहा। 30 सितंबर को यह ₹195 करोड़ था, जबकि 31 मार्च 2026 को ₹196.1 करोड़ था। इस दौरान डेट-टू-इक्विटी अनुपात 0.68 गुना से सुधरकर 0.61 गुना हो गया। कंपनी की नेटवर्थ 30 सितंबर 2026 को ₹321.7 करोड़ रही, जो एक साल पहले ₹250.9 करोड़ थी।
बेंगलुरु मेट्रो में नया डिजिटल प्रोजेक्शन प्रोजेक्ट
कंपनी ने दूसरी छमाही के लिए अपने ट्रांजिट मीडिया कारोबार के विस्तार की जानकारी भी दी है। Signpost ने बेंगलुरु के नादप्रभु केम्पेगौड़ा (मैजेस्टिक) मेट्रो स्टेशन पर 16,000 वर्ग फुट का प्रोजेक्शन इंस्टॉलेशन 'Majestic Canvas' शुरू किया है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इसी प्लेटफॉर्म पर प्रोजेक्शन विज्ञापन की अनुमति भी दे दी है। कंपनी के मुताबिक, इससे उसके मेट्रो कन्सेशन के तहत एक नया प्रीमियम विज्ञापन फॉर्मेट जुड़ा है। यह कन्सेशन 2034 तक है।
इसके अलावा, बेंगलुरु मेट्रो नेटवर्क और मुंबई की प्रीमियम बसों के बेड़े में भी कारोबार बढ़ रहा है। कोलकाता में कंपनी के Streetscape मीडिया का 40-45% हिस्सा चालू होकर कमाई करने लगा है। दुर्गा पूजा के दौरान यहां अच्छी बुकिंग मिली। इस प्रोजेक्ट को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
कंपनी ने मुंबई और लंदन में महाराष्ट्र पर्यटन के लिए अभियान भी चलाए। उसे OOH Advertising Awards 2026 में टेक-लेड इनोवेशन के लिए एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज पुरस्कार मिले। इसके अलावा, IOAA Media Owners Awards 2026 और FICCI BAF Awards 2026 में भी उसे पहचान मिली।
दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
Signpost India के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीपद अश्तेकर ने कहा कि दूसरी तिमाही का प्रदर्शन मुख्य रूप से त्योहारों के कैलेंडर में बदलाव से प्रभावित हुआ। नवरात्रि पिछले साल के मुकाबले करीब तीन सप्ताह देर से शुरू हुई, जिससे त्योहारों से जुड़े कई विज्ञापन अभियान तीसरी तिमाही में चले गए। इसके बावजूद पहली छमाही में कंपनी ने मुनाफे में 11% की बढ़ोतरी और ऑपरेटिंग कैश फ्लो में तीन गुना से ज्यादा वृद्धि दर्ज की।
उन्होंने कहा कि दूसरी छमाही में पूरे त्योहारों के सीजन, बेंगलुरु मेट्रो, मुंबई की प्रीमियम बसों और कोलकाता Streetscape प्रोजेक्ट के विस्तार से कारोबार को सहारा मिलने की उम्मीद है। फरवरी से नासिक में बड़े आयोजन से जुड़े प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे, जिनका असर वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही तक रहेगा।
अश्तेकर ने वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनी की आय में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी का भरोसा जताया है। उनका कहना है कि दूसरी छमाही में आय और मुनाफे, दोनों के बेहतर रहने की उम्मीद है।
क्या करती है Signpost India?
Signpost India शहरी मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी बस शेल्टर, मेट्रो स्टेशन, ट्रांजिट फ्लीट और डिजिटल स्क्रीन के जरिए विज्ञापन की सुविधा देती है। कंपनी के मुताबिक, उसके पास 32 शहरों में करीब 10,850 मीडिया नोड्स और 31 लाख वर्ग फुट का डिस्प्ले एरिया है। इसके माध्यम से हर महीने करीब 7 करोड़ लोगों तक पहुंचने का दावा किया गया है।
कंपनी का अपना एडटेक प्लेटफॉर्म Captura भी है, जिसके जरिए विज्ञापन अभियान की योजना, शेड्यूलिंग और विज्ञापन चलने के प्रमाण (Proof-of-Play) की रिपोर्टिंग की जाती है।
यह याचिका अधिवक्ता और लीगल-टेक्नोलॉजी उद्यमी श्रीरूपा चौधरी (Sreerupa Chowdhury) ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और निजता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेटा (Meta) के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका अधिवक्ता और लीगल-टेक्नोलॉजी उद्यमी श्रीरूपा चौधरी (Sreerupa Chowdhury) ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि Meta के एल्गोरिदम आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों को लंबे समय तक ऑनलाइन बनाए रखने के लिए कई तरह के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें लगातार स्क्रॉल करने की सुविधा (Infinite Scrolling), अपने आप चलने वाली रील्स (Autoplay Reels), व्यक्तिगत पसंद के आधार पर कंटेंट दिखाना (Personalised Recommendations) और यूजर्स के व्यवहार की प्रोफाइलिंग (Behavioural Profiling) जैसे तरीके शामिल हैं। याचिका के मुताबिक, इन तरीकों का उद्देश्य यूजर्स की भागीदारी और स्क्रीन टाइम बढ़ाना है।
याचिका में कहा गया है कि इस तरह के तरीकों का बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे व्यवहार संबंधी लत, चिंता, अवसाद, नींद की कमी और शरीर की छवि को लेकर असंतोष जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा बच्चों के ऑनलाइन ग्रूमिंग और बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) के संपर्क में आने का खतरा भी उठाया गया है।
याचिका में भारत में फेसबुक और इंस्टाग्राम के बड़े यूजर बेस का भी उल्लेख किया गया है। DataReportal की रिपोर्ट 'Digital 2026: India' के अनुसार, भारत में Instagram के करीब 48.05 करोड़ और Facebook के लगभग 40.3 करोड़ यूजर्स हैं। इस आधार पर भारत Meta का दुनिया में सबसे बड़ा राष्ट्रीय बाजार है। याचिका में दावा किया गया है कि इन दोनों प्लेटफॉर्म पर भारत के यूजर्स की संख्या अमेरिका की तुलना में लगभग 2 से 2.6 गुना है। ऐसे में भारतीय बच्चों को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिमों से बचाने के लिए पश्चिमी देशों के बच्चों के समान सुरक्षा मिलनी चाहिए।
याचिका में की गईं ये प्रमुख मांगें: याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कई अहम कदम उठाने की मांग की है। इनमें अदालत की निगरानी में राष्ट्रीय बाल ऑनलाइन सुरक्षा एवं कल्याण कोष (National Child Online Safety and Welfare Fund) बनाने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा नाबालिग यूजर्स और बच्चों की सुरक्षा के लिए अपनाए गए उपायों को लेकर भारत-विशेष जानकारी सार्वजनिक करने, सरकार की ओर से पर्याप्त दिशा-निर्देश जारी करने और सुरक्षा के बेहतर डिफॉल्ट विकल्पों के साथ एल्गोरिदम से जुड़े सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है।
याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से स्वतंत्र जांच कराने और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर भारत-विशेष शोध कराने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही Meta से कथित नुकसान के पैमाने के अनुरूप मुआवजा देने की मांग रखी गई है।
याचिकाकर्ता ने अदालत की निगरानी में प्रस्तावित राष्ट्रीय बाल ऑनलाइन सुरक्षा एवं कल्याण कोष के लिए Meta से ऐसी राशि देने की मांग की है, जो दूसरे देशों में इसी तरह के मामलों में हुए वैश्विक समझौतों के बराबर या उससे अधिक हो। इसमें अमेरिका में इस साल अगस्त में हुए कम से कम 18 अरब अमेरिकी डॉलर के बहु-राज्यीय समझौते का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि भारत में Facebook और Instagram का यूजर बेस अमेरिका से 2 से 2.6 गुना अधिक है, इसलिए भारतीय बच्चों को हुए कथित नुकसान और भारतीय बाजार से Meta को मिलने वाले व्यावसायिक लाभ के अनुपात में मुआवजा तय किया जाना चाहिए।
शिमोना दरगन ने ब्रांड टॉक इंडिया में बिजनेस ग्रोथ और पीआर हेड की जिम्मेदारी संभाली है। वह जुलाई 2026 से इस पद पर हैं और 2023 में कंपनी से इंटर्न के रूप में जुड़ी थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शिमोना दरगन (Shimona Dargan) ने ब्रांड टॉक इंडिया (Brand Talk India) में बिजनेस ग्रोथ एंड पीआर हेड (Business Growth & PR Head) की जिम्मेदारी संभाली है। वह जुलाई 2026 से इस पद पर कार्यरत हैं और हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
दरगन 2023 में ब्रांड टॉक इंडिया से पीआर एंड ब्रांड स्ट्रैटेजी इंटर्न (PR and Brand Strategy Intern) के तौर पर जुड़ी थीं। इसके बाद उन्होंने संगठन के भीतर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हुए यह जिम्मेदारी संभाली है।
इससे पहले वह रस्क मीडिया (Rusk Media) और पॉलिसीबाजार डॉट कॉम (PolicyBazaar.com) के साथ भी काम कर चुकी हैं।
Skydance से जुड़ने से पहले नितिन चावला Warner Bros. Discovery में कार्यरत थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Skydance ने नितिन चावला को ग्लोबल कंटेंट सेल्स का एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (EVP) और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इस भूमिका में वह कंपनी के ग्लोबल कंटेंट लाइसेंसिंग और होम एंटरटेनमेंट कारोबार से जुड़े वित्तीय कामकाज और रणनीतिक योजना की जिम्मेदारी संभालेंगे।
नितिन चावला ने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका मुख्य फोकस टेक्नोलॉजी आधारित रणनीतियों के जरिए दुनियाभर में दर्शकों तक पहुंच बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्टूडियो के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।
अपनी नई जिम्मेदारी में चावला SVOD, AVOD और FAST जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ-साथ पारंपरिक टेलीविजन और AR-वीआर जैसे नए फॉर्मेट से होने वाली कमाई की रणनीति भी संभालेंगे। वह Skydance की एग्जिक्यूटिव फाइनेंस टीम का हिस्सा होंगे। वह कंपनी के CFO डेनिस चिनेली और संबंधित बिजनेस यूनिट के प्रमुखों को रिपोर्ट करेंगे।
कंपनी का वित्त विभाग संगठन के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने में भी सहयोग करेगा। इस लक्ष्य के तहत कंपनी सालाना आधार पर 6 अरब डॉलर की लागत बचत हासिल करना चाहती है।
Warner Bros. Discovery से Skydance पहुंचे चावला
Skydance से जुड़ने से पहले नितिन चावला Warner Bros. Discovery में कार्यरत थे। साल 2024 में कंपनी से जुड़ने के बाद उन्होंने मोशन पिक्चर्स ग्रुप और ग्लोबल कंटेंट लाइसेंसिंग/होम एंटरटेनमेंट के CFO के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।
इससे पहले वह The Walt Disney Company में एक दशक से ज्यादा समय तक रहे। उन्होंने 2008 से 2019 तक डिज्नी में काम किया और अपनी आखिरी भूमिका में डिजिटल मीडिया के बिजनेस ऑपरेशंस प्रमुख रहे।
उनके करियर में Deloitte Consulting, Tenfold Communications, Johnson & Johnson और J. Walter Thompson जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव भी शामिल है।
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर और अवैध सट्टेबाजी के मामलों में प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर और अवैध सट्टेबाजी के मामलों में प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ओमान से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भारत वापस लाया है। चंद्राकर को भारतीय कानून के तहत आगे की कार्रवाई के लिए जांच एजेंसी के हवाले किया गया है।
CBI की एक टीम ओमान गई थी और वहां की एजेंसियों के साथ तालमेल बनाकर चंद्राकर को भारत लेकर आई। भारत पहुंचने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद CBI ट्रांजिट रिमांड हासिल कर उसे रायपुर ले जाएगी। उसे सोमवार को रायपुर की CBI विशेष अदालत में पेश किया जाना है।
चंद्राकर के खिलाफ CBI के दो मामलों में जांच चल रही है और इन दोनों मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उसके खिलाफ एक अलग मामले की जांच कर रहा है, जिसमें अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है।
सट्टेबाजी से जुटाई गई रकम को विदेश भेजने का आरोप
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध के बाद CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच में सामने आया कि यह देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और दूसरे आयोजनों पर सट्टा लगाया जाता था। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था। इन केंद्रों के जरिए लोगों को जोड़ा जाता था और उनसे सट्टे की रकम जमा कराई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि सट्टेबाजी से जुटाई गई रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। इसके लिए ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, जिनका उपयोग कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम पर किया जा रहा था। कई लेन-देन के बाद इस रकम को हवाला नेटवर्क के जरिए विदेश भेजे जाने का आरोप है।
CBI के मुताबिक, इस रकम का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को कथित तौर पर रिश्वत और संरक्षण राशि देने में भी इस्तेमाल किया गया, ताकि सट्टेबाजी का यह नेटवर्क बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। इन आरोपपत्रों में सौरभ चंद्राकर का नाम भी प्रमुख आरोपियों में शामिल है। वहीं, ED ने इस मामले में भारत और विदेशों में स्थित कई संपत्तियों को भी कुर्क किया है।
इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान में पकड़ा गया
सौरभ चंद्राकर का पता इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद चला था। इसके बाद ओमान की रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।
चंद्राकर के खिलाफ भारत में दर्ज मामलों को देखते हुए CBI और ED ने ओमान के अधिकारियों के सामने उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक अनुरोध पेश किए थे। इन अनुरोधों के साथ जांच में जुटाए गए सबूत भी दिए गए थे। इस पूरी प्रक्रिया में दूसरी केंद्रीय एजेंसियों, इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो और ओमान के संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बनाया गया।
ओमान से प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद CBI ने उसे भारत लाने के लिए मस्कट में अपनी टीम भेजी। एजेंसी ने इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है।
CBI ने इसे उन आरोपियों को भारत वापस लाने की दिशा में अहम कदम बताया है, जिन पर सीमा पार से आपराधिक नेटवर्क चलाने के आरोप हैं। एजेंसी का कहना है कि ऐसे आरोपियों को भारत लाकर यहां के कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
GTPL हैथवे ने DL GTPL Cabnet Private Limited में बाकी 74 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की समयसीमा 30 दिन बढ़ा दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
GTPL हैथवे ने DL GTPL Cabnet Private Limited में बाकी 74 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की समयसीमा 30 दिन बढ़ा दी है। अब इस अधिग्रहण के 30 नवंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। कंपनी ने 31 अक्टूबर को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।
कंपनी ने अपनी ओर से जारी जानकारी में बताया कि दोनों पक्षों की आपसी सहमति से अधिग्रहण पूरा करने की समयसीमा को 30 दिन और बढ़ाने का फैसला किया गया है। इससे पहले कंपनी ने 13 अक्टूबर 2026 को इस अधिग्रहण को लेकर शेयर बाजार को जानकारी दी थी।
GTPL Hathway ने साफ किया है कि समयसीमा बढ़ाने के अलावा अधिग्रहण से जुड़ी बाकी सभी शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी। कंपनी ने यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के रेगुलेशन 30 के तहत दी है।
प्रेस क्लब ने सियांग बांध परियोजना के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को डराने और परेशान करने की राज्य अधिकारियों की कोशिशों की भी निंदा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ (Press Club Of India) ने अरुणाचल प्रदेश पुलिस की ओर से सर्च वारंट के लिए किए गए अनुरोधों में वरिष्ठ पत्रकार और ‘द अरुणाचल टाइम्स’ की डिप्टी एडिटर टोंगम रीना का नाम शामिल किए जाने पर हैरानी जताई है। यह मामला 23 अक्टूबर को पासीघाट में हुई हिंसा से जुड़ा है। प्रेस क्लब ने सियांग बांध परियोजना के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को डराने और परेशान करने की राज्य अधिकारियों की कोशिशों की भी निंदा की है।
इस संबंध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने 30 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में कहा गया है कि हिंसा और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच किसी आंदोलन को कवर कर रहे पत्रकारों को डराने का बहाना नहीं बन सकती। प्रेस क्लब ने अरुणाचल प्रदेश पुलिस से तत्काल यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि टोंगम रीना समेत अन्य पत्रकारों को केवल अपना पेशेवर काम करने के लिए इस तरह परेशान न किया जाए।
बयान में टोंगम रीना के पत्रकारिता अनुभव का भी उल्लेख किया गया है। प्रेस क्लब के मुताबिक, रीना का राज्य में पर्यावरण, राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करने का प्रभावशाली रिकॉर्ड रहा है। ऐसे में हिंसा से किसी तरह का औचित्य या संबंध बताए बिना सर्च वारंट के अनुरोधों की सूची में उनका नाम शामिल किया जाना प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है, जिसे भारत जैसे लोकतंत्र में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
The Press Club of India is shocked by the Arunachal Pradesh Police including the name of senior journalist and deputy editor of The Arunachal Times, Tongam Rina in their requests for search warrants in connection with the October 23 violence in Pasighat. PCI also condemns all attempts by state authorities to intimidate and harass journalists who are reporting on the ongoing protests against the Siang dam project. @ArunachalPolice @PemaKhanduBJP
— Press Club of India (@PCITweets) October 30, 2026
वरोक कनेक्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षित ड्राइविंग पहल के लिए स्पॉन्सरशिप और आईपी मोनेटाइजेशन एजेंसी की तलाश शुरू की है। कंपनी 1 करोड़ प्रतिभागियों को जोड़ने की तैयारी कर रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरोक कनेक्ट (Varroc Connect), वाहन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things) तकनीक से जुड़ा प्लेटफॉर्म, ने स्पॉन्सरशिप और आईपी मोनेटाइजेशन एजेंसी (Sponsorship and IP Monetisation Agency) की तलाश शुरू की है।
कंपनी ऐसी एजेंसी चाहती है, जो संभावित प्रायोजकों की पहचान से लेकर साझेदारी तैयार करने और स्पॉन्सरशिप सौदे पूरे कराने तक की जिम्मेदारी संभाल सके। वरोक कनेक्ट के लीड-मार्केटिंग एंड ब्रांड आशीष धंडार (Ashish Dhandar) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की है।
कंपनी एक राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षित ड्राइविंग पहल की तैयारी कर रही है। इसके जरिए 1 करोड़ प्रतिभागियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ऐसी एजेंसी की तलाश है, जिसे बड़े स्तर के आयोजनों और उद्देश्य आधारित अभियानों के लिए बड़े मूल्य वाली स्पॉन्सरशिप और ब्रांड साझेदारियां हासिल करने का साबित अनुभव हो।
एजेंसी की जिम्मेदारी संभावित प्रायोजकों की पहचान करना, साझेदारी के प्रस्ताव तैयार करना और अलग-अलग स्तरों पर स्पॉन्सरशिप सौदों को पूरा कराना होगी।
आशीष धंडार ने अपनी पोस्ट में कहा कि अगर किसी एजेंसी के पास इस तरह का अनुभव है या वह ऐसी किसी एजेंसी को जानता है, जो इस जरूरत के अनुरूप है, तो वह उनसे संपर्क कर सकता है या अपनी सिफारिश साझा कर सकता है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और SIS ग्रुप के संस्थापक रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और SIS ग्रुप के संस्थापक रविन्द्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह पत्रकार, उद्यमी और राजनेता के रूप में अपनी अलग पहचान रखते थे। उनके निधन से राजनीतिक, कारोबारी और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर राजनीतिक नेताओं, कारोबारी सहयोगियों और शुभचिंतकों ने शोक व्यक्त किया है।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, आरके सिन्हा का पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना लाया जाएगा। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
आरके सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान और कानून की पढ़ाई की थी। पत्रकारिता के दौरान वह अपराध और राजनीतिक खबरों की रिपोर्टिंग करते थे। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान युद्ध संवाददाता के रूप में उनके काम की काफी सराहना हुई थी। इसी दौर में उन्होंने ‘जन आंदोलन’ नामक पुस्तक भी लिखी थी। इसे 1970 से 1975 के बीच जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन पर आधारित पहली प्रामाणिक शोध पुस्तक माना जाता है।
दो लोगों के साथ शुरू किया था SIS ग्रुप: युद्ध के बाद सेवानिवृत्त सैनिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की सोच के साथ उन्होंने वर्ष 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (SIS) की स्थापना की। उन्होंने पूर्वी भारत में एक छोटे से किराये के कार्यालय से महज दो लोगों की टीम के साथ इसकी शुरुआत की थी। पहली पीढ़ी के उद्यमी के रूप में उन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से इस कारोबार को आगे बढ़ाया।
देखते ही देखते SIS ग्रुप एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा सेवा कंपनियों में शामिल हो गया। कंपनी में 36,000 से अधिक स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं और इसके 3,000 कॉरपोरेट ग्राहक हैं। इसका कारोबार 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का है। निजी सुरक्षा उद्योग में उनके योगदान के लिए उन्हें इस क्षेत्र का अग्रणी उद्यमी माना जाता था। वह सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े विधायी और नियामक मुद्दों पर विभिन्न सरकारी संस्थाओं के समक्ष उद्योग का प्रतिनिधित्व भी करते थे। वर्ष 1999 से 2004 तक उन्होंने भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सलाहकार के रूप में भी काम किया।
सुरक्षा, नुकसान की रोकथाम, प्रशिक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर भी आरके सिन्हा की विशेष पहचान थी। उन्होंने भारत और अमेरिका के विश्वविद्यालयों में नियमित फैकल्टी के रूप में पढ़ाया और दुनिया भर के उद्योग मंचों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वर्ष 2006 में सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ सिंगापुर ने उद्योग में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘लॉस प्रिवेंशन प्रमोटर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।
जनसंघ के दिनों से भाजपा से जुड़े थे आरके सिन्हा: आरके सिन्हा का भाजपा से जुड़ाव जनसंघ के समय से था। उन्होंने पार्टी में राज्य और केंद्रीय स्तर पर कई संगठनात्मक पदों पर काम किया। वह बिहार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी रहे। उनकी अध्यक्षता वाली समिति ने बिहार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को उल्लेखनीय सफलता दिलाई। वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया था और वह निर्वाचित हुए थे। उनका कार्यकाल 2014 से 2020 तक रहा। संसद में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई समितियों में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इनमें गृह मामलों और विदेश मामलों से संबंधित स्थायी समितियां, श्रम एवं रोजगार संबंधी परामर्श समिति और राज्यसभा की याचिका समिति शामिल थीं।
राजनीतिक जगत में शोक की लहर: आरके सिन्हा के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया। उन्होंने इसे अत्यंत हृदयविदारक बताते हुए कहा कि पत्रकारिता, समाजसेवा और संगठन के क्षेत्र में सिन्हा का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन राजनीतिक और सामाजिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। जनता दल (यूनाइटेड) ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पार्टी परिवार की ओर से श्रद्धांजलि दी। वहीं, बिहार भाजपा ने उनके आकस्मिक निधन को भाजपा परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
वित्त वर्ष 2026-27 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का बजट 193.56 करोड़ रुपये बढ़कर 4,551.94 करोड़ रुपये हुआ। केंद्रीय योजनाओं और स्थापना खर्च के आवंटन में वृद्धि हुई है.
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting) के बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 193.56 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में मंत्रालय का बजट अनुमान 4,358.38 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 4,551.94 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह करीब 4.44 प्रतिशत की वृद्धि है।
मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में बजट से जुड़ी जानकारी दी गई है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के मूल बजट अनुमान, संशोधित अनुमान और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान शामिल हैं।
केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं (Central Sector Schemes) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 1,118.49 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा गया था। वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 1,361.79 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस मद में 243.30 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
मंत्रालय के स्थापना व्यय (Establishment Expenditure) के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 582.50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 599.08 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यानी स्थापना खर्च के बजट में 16.58 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
वहीं, अन्य केंद्रीय खर्च के बजट में कटौती की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस मद के लिए 2,657.39 करोड़ रुपये का बजट अनुमान था, जिसे वित्त वर्ष 2026-27 में घटाकर 2,591.07 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस मद में 66.32 करोड़ रुपये की कमी हुई है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को 4,551.94 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह पिछले वित्त वर्ष के 4,358.38 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से 193.56 करोड़ रुपये अधिक है। केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं और स्थापना खर्च के आवंटन में बढ़ोतरी हुई है, जबकि अन्य केंद्रीय खर्च कम किया गया है।
पंक्ति सिधपुरा जियोस्टार से रिसर्च मैनेजर-स्पोर्ट्स के तौर पर जुड़ी हैं। इससे पहले वह द थर्ड आई इंटीग्रेटेड सर्विसेज में रिसर्च मैनेजर थीं और कई रिसर्च कंपनियों में काम कर चुकी हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पंक्ति सिधपुरा (Pankti Sidhpura) जियोस्टार (JioStar) से रिसर्च मैनेजर-स्पोर्ट्स (Research Manager, Sports) के तौर पर जुड़ी हैं। उन्होंने हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पर इस बदलाव की जानकारी दी। उनकी प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने सितंबर 2026 में यह जिम्मेदारी संभाली।
जियोस्टार से जुड़ने से पहले सिधपुरा करीब तीन साल तक द थर्ड आई इंटीग्रेटेड सर्विसेज (The Third Eye Integrated Services) से जुड़ी रही थीं। यहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी रिसर्च मैनेजर की थी।
इससे पहले वह कांटर (Kantar), मार्केटविस्टास कंज्यूमर इनसाइट्स (MarketVistas Consumer Insights), इप्सोस (Ipsos) और पायनियर पब्लिसिटी कॉरपोरेशन (Pioneer Publicity Corporation) में भी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं।