होम / मीडिया फोरम / पुलिस अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखने के लिए कोर्ट ने संपादक को ठहराया दोषी, सजा तय
पुलिस अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक लेख लिखने के लिए कोर्ट ने संपादक को ठहराया दोषी, सजा तय
न्यायमूर्ति एस. रचैया ने अपने आदेश में कहा कि गुरुराज ने अपने अखबार में ऐसे शब्द और बयान प्रकाशित किए, जिनसे अधिकारी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अखबार के संपादक टी. गुरुराज को दोषी ठहराया है। उन पर आरोप था कि उन्होंने मैसूरु के K.R. पुलिस स्टेशन के सर्किल इंस्पेक्टर एस. एन. सुरेश बाबू के खिलाफ अपमानजनक लेख प्रकाशित किए थे।
न्यायमूर्ति एस. रचैया ने अपने आदेश में कहा कि गुरुराज ने अपने अखबार में ऐसे शब्द और बयान प्रकाशित किए, जिनसे अधिकारी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। कोर्ट ने कहा, “बिना आधार के किसी व्यक्ति की गरिमा को नीचा दिखाने वाले आरोप लगाना मानहानि के अंतर्गत आता है।”
बता दे कि सर्किल इंस्पेक्टर सुरेश बाबू ने पहले एक मामले में गुरुराज को गिरफ्तार किया और संबंधित कोर्ट में भेजा। आरोप है कि गिरफ्तारी से नाराज गुरुराज ने बदला लेने के लिए अखबार में बाबू के खिलाफ अपमानजनक लेख प्रकाशित किए। इन लेखों में यह दावा किया गया कि बाबू घूस ले रहे थे, सिंगल नंबर लॉटरी की अनुमति दे रहे थे, चामुंडी हिल के पास पार्किंग एजेंटों से अवैध राशि ले रहे थे, और साथ ही क्लब चलाना, जुए और मिलावटी केरोसिन बेचने जैसी गतिविधियों की अनुमति देना शामिल था।
बाबू ने गुरुराज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने सबूतों पर विचार करने के बाद गुरुराज को बरी कर दिया। बरी किए जाने के फैसले से असंतुष्ट होकर बाबू ने हाई कोर्ट में अपील दायर की।
हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों को ठीक से नहीं देखा और गुरुराज के बेबुनियाद और अपमानजनक आरोपों को नजरअंदाज किया। गुरुराज की ओर से यह दलील दी गई थी कि कुछ बयान सार्वजनिक हित में थे और इसलिए मानहानि नहीं मानी जा सकती। लेकिन हाई कोर्ट ने नोट किया कि प्रकाशित लेखों में ऐसे आरोप थे जो बाबू की प्रतिष्ठा को सीधे नुकसान पहुंचाते थे।
अंततः हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए टी. गुरुराज को धारा 500 और 501 के तहत दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की साधारण जेल और जुर्माना की सजा सुनाई।
टैग्स