कोरोना के इस संकट काल में चारों ओर भय और निराशा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
कोरोना के इस संकट काल में चारों ओर भय और निराशा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। कष्ट की इस घड़ी में ताजा हवा के झोंके की तरह है वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल का नया भजन। भगवान कृष्ण की तरह खूबसूरत है यह भजन- 'तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं।' इस भजन को सुनकर आप अपने सारे गम भूल जाएंगे।
हरीश चंद्र बर्णवाल ने ना सिर्फ इस भजन को शब्दों की मोती से पिरोया है, बल्कि अपनी मखमली आवाज से भजन गायकी को एक नया आयाम भी दिया है। एक-एक शब्द हजारों अर्थ देने वाला है। इस भजन को सुनकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मन को सुकून देने वाला यह एक ऐसा भजन है जो वर्षों बाद लोगों को सुनने के लिए मिल रहा है।
लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल ने बड़ी खूबसूरती से इस भजन को लिखा है। इसका हर एक शब्द दिल को राहत देता है। मन को शांति प्रदान करता है। सबकुछ भूलकर मन प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है। भजन का संगीत बेहतरीन है। राहत देने वाला है। इस भजन को आप बार-बार सुनना तो पसंद करेंगे ही साथ ही खुद को गुनगुनाने से भी रोक नहीं पाएंगे।
इस भजन में गायक हरीश चंद्र बर्णवाल भगवान कृष्ण से खूबसूरत अंदाज में सवाल पूछते हैं। महाभारत की पूरी घटना को शब्दों से शानदार ढंग से सजा कर वे भगवान से पूछते हैं कि 'ना तो राधा हूं मैं, ना तो मीरा हूं मैं। तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं। सत्यभामा नहीं, न हूं मै रुक्मिणी। तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं। हरीश बर्णवाल ने इसे अपने यूट्यूब चैनल पर लॉन्च किया है।
इस भजन के साथ हरीश ने पत्रकारिता से भजन गायिकी की तरफ अपना कदम बढ़ाया है। हरीश चंद्र बर्णवाल एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार रहे हैं। ‘एबीपी न्यूज’, ‘न्यूज18 इंडिया’, ‘जी न्यूज’ और ‘डीडी न्यूज’ में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वो सात पुस्तकें भी लिख चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी पर चार पुस्तकें लिखने के अलावा हरीश ने कहानियों पर एक पुस्तक और टीवी पत्रकारिता की भाषा पर भी पुस्तक लिख चुके हैं। हरीश को भारत सरकार का भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार और हिन्दी अकादमी पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
भजन को आप यहां सुन सकते हैं-
मुंबई में होने वाले 19वें Mumbai International Film Festival के मौके पर इस बार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है।
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Samachar4media Bureau
मुंबई में होने वाले 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (Mumbai International Film Festival) के मौके पर इस बार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) ने ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ कार्यक्रम के तहत चुने गए प्रोजेक्ट्स की सूची जारी कर दी है, जिन्हें WAVES Doc Bazaar 2026 में प्रदर्शित किया जाएगा।
यह डॉक्यूमेंट्री बाजार 16 से 18 जून 2026 तक मुंबई में NFDC मुख्यालय में आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के फिल्ममेकर, प्रोड्यूसर, ब्रॉडकास्टर, डिस्ट्रीब्यूटर और फेस्टिवल से जुड़े लोग शामिल होंगे। इसका मकसद डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और एनिमेशन के क्षेत्र में सहयोग, नेटवर्किंग और नए बाजार के अवसर तैयार करना है।
इस बार 155 ग्लोबल एंट्रीज में से 19 देशों और 35 भाषाओं से आए प्रोजेक्ट्स में से कुल 12 प्रोजेक्ट्स को चुना गया है। इनमें से 4 प्रोजेक्ट Work-in-Progress (WIP) लैब के लिए चुने गए हैं, जहां फिल्ममेकर्स को अपनी अधूरी फिल्मों के रफ कट अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने दिखाने और फीडबैक लेने का मौका मिलेगा।
इसके अलावा 8 प्रोजेक्ट्स ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ श्रेणी में शामिल किए गए हैं, जो या तो पूरी हो चुकी हैं या पोस्ट-प्रोडक्शन के अंतिम चरण में हैं। इन फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, डिस्ट्रीब्यूटरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा।
NFDC ने इस बार एक नया कदम भी उठाया है। तीन बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को 3-3 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार उन फिल्मों को मिलेगा जिनमें मजबूत कहानी, बेहतरीन रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों से जुड़ने की क्षमता होगी।
सभी चयनित 12 प्रोजेक्ट्स को 16 जून 2026 को ओपन पिच सेशन में अपना प्रेजेंटेशन देने का मौका मिलेगा, जहां वे अपने विचार और फिल्मों की कहानी इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे।
इस आयोजन का एक खास हिस्सा ‘Viewing Room’ भी होगा, जो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगा। यहां 155 प्रोजेक्ट्स को 19 देशों और 35 भाषाओं में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के खरीदार और प्लेटफॉर्म्स इन फिल्मों को देख और समझ सकेंगे।
WIP लैब के लिए चुनी गई फिल्मों में ‘Adieu Dilli’, ‘It Takes A Village’, ‘Kunchok and His Many Moons’ और ‘On a Good Note’ शामिल हैं।
वहीं ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ श्रेणी में ‘By the Home’, ‘Do Chaar Din’, ‘Eche’, ‘Rasanishpathi’, ‘Rise’, ‘The Girl Beneath The Sun’, ‘Turu’ और ‘Tukro Tukro Prithibi’ जैसी फिल्में चुनी गई हैं।
NFDC का कहना है कि यह पहल उभरते फिल्ममेकर्स को सपोर्ट करने, उनकी कहानियों को वैश्विक मंच देने और डॉक्यूमेंट्री सिनेमा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इंदौर में आयोजित ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित कथाकार मालती जोशी को याद किया गया। कई प्रमुख हस्तियों ने उनकी रचनाओं का पाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
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Samachar4media Bureau
पद्मश्री सम्मानित और मालवा की मीरा के रूप में प्रसिद्ध कथाकार मालती जोशी की स्मृति में इंदौर के प्रीतम लाल दुआ सभागार में ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से साहित्य, रंगमंच और सिनेमा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं और मालती जोशी की रचनाओं को याद किया।
कार्यक्रम में दिल्ली से लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और मुंबई से अभिनेता एवं पटकथा लेखक अतुल तिवारी ने मालती जोशी की कहानियों का पाठ किया। वक्ताओं ने कहा कि मालती जोशी अपनी सहज, पारिवारिक और संवेदनशील कहानियों के कारण पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहीं और अपने समय की श्रेष्ठ कथाकारों में उनका विशेष स्थान था।
अतुल तिवारी ने कहा कि मालती जोशी ने महिला कथाकारों के लिए नए मानदंड स्थापित किए। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां फिल्मों और टेलीफिल्मों के लिए बेहद उपयुक्त थीं, जिसके चलते गुलजार और जया बच्चन जैसे फिल्मकारों ने भी उनकी रचनाओं पर काम किया।
लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने कहा कि मालती जोशी की कहानियों को युवाओं तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने उनकी चर्चित कहानी ‘इतिश्री’ का वाचन भी किया। कार्यक्रम में मंजूषा राजस जौहरी, अनीता सक्सेना, ज्योति जैन, मधुरा फड़के और रंजना चितले सहित कई वक्ताओं ने मालती जोशी के साहित्य, व्यक्तित्व और जीवन दृष्टि पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत मालती जोशी के बड़े पुत्र ऋषिकेश जोशी के स्वागत वक्तव्य से हुई, जबकि समापन उनके छोटे पुत्र सच्चिदानंद जोशी के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने मालती जोशी की रचनाओं के कॉपीराइट संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केंद्र सरकार ने सरकार ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत "राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों" की सूची का काफी विस्तार कर दिया है।
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केंद्र सरकार ने खेल प्रेमियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत "राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों" की सूची का काफी विस्तार कर दिया है। इसके बाद अब कई और अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खेल प्रतियोगितियों के लाइव प्रसारण सिग्नल प्रसार भारती के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।
दूरदर्शन और आकाशवाणी पर बढ़ेगी खेलों की पहुंच
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 11 जून को जारी एक राजपत्र (गजट) अधिसूचना के जरिए मई 2022 के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। नए आदेश के तहत उन खेल आयोजनों की सूची को संशोधित किया गया है, जिनके लाइव प्रसारण सिग्नल सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती के साथ साझा करना जरूरी होगा।
2007 के कानून के अनुसार, जिन प्रसारकों के पास किसी अधिसूचित खेल आयोजन के विशेष प्रसारण अधिकार (एक्सक्लूसिव मीडिया राइट्स) होते हैं, उन्हें उसके लाइव सिग्नल प्रसार भारती को उपलब्ध कराने होते हैं। इससे आम दर्शक दूरदर्शन और आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के माध्यम से इन मुकाबलों का आनंद ले सकते हैं।
ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेल बने रहेंगे सूची में
नई अधिसूचना में ओलंपिक खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों को राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों की सूची में बरकरार रखा गया है। इसके अलावा क्रिकेट, टेनिस, हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी और जमीनी स्तर की खेल प्रतियोगितियों को भी बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।
क्रिकेट को मिली खास जगह
संशोधित सूची में क्रिकेट को प्रमुखता दी गई है। इसमें भारतीय पुरुष और महिला टीमों के सभी आधिकारिक वनडे, टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट मैच शामिल किए गए हैं। इसके अलावा भारत से जुड़े ICC टेस्ट मैच भी इस सूची का हिस्सा होंगे।
इसके साथ ही निम्नलिखित टूर्नामेंटों के अहम मुकाबले भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजन माने जाएंगे—
टेनिस प्रशंसकों को भी मिला बड़ा तोहफा
टेनिस में भारत से जुड़े सभी डेविस कप मुकाबलों को सूची में शामिल किया गया है।
इसके अलावा—
भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजन माने जाएंगे।
हॉकी के लिए बड़ा विस्तार
हॉकी के क्षेत्र में भी सूची का काफी विस्तार किया गया है। इसमें शामिल हैं—
इसके अलावा, जब पुरुष जूनियर हॉकी विश्व कप का आयोजन भारत में होगा, तब उसे भी राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाएगा।
फुटबॉल को भी मिली बड़ी जगह
फुटबॉल के कई बड़े टूर्नामेंट भी अब इस सूची में शामिल किए गए हैं।
इनमें शामिल हैं—
इसके अलावा, भारत में आयोजित होने पर—
को भी राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाएगा।
वहीं, फीफा अंडर-17 विश्व कप के उद्घाटन मुकाबले और नॉकआउट चरण के मैच भी इस सूची में शामिल कर लिए गए हैं।
बैडमिंटन और कबड्डी को भी मिला स्थान
बैडमिंटन में अब—
के सभी भारतीय खिलाड़ियों वाले मुकाबले, साथ ही सेमीफाइनल और फाइनल मैच भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में शामिल होंगे।
कबड्डी में—
को भी इस सूची में जगह दी गई है।
खेलो इंडिया प्रतियोगितियां भी शामिल
सरकार ने खेलो इंडिया मिशन के तहत आयोजित होने वाली सभी प्रतियोगितियों और लीगों को भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों की सूची में शामिल कर लिया है।
इस फैसले के बाद देशभर के करोड़ों खेल प्रेमियों को दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए पहले से कहीं अधिक खेल प्रतियोगितियां देखने और सुनने का मौका मिलेगा। साथ ही, विभिन्न खेलों को देश के दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने में भी यह कदम अहम भूमिका निभाएगा।
भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के 20 छात्रों के लिए उपराष्ट्रपति आवास में समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश शामिल हुए।
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भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के 20 चयनित छात्रों द्वारा संसद टीवी में सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूरी करने के उपलक्ष्य में उपराष्ट्रपति आवास में एक विशेष समापन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) मौजूद रहे।
इस अवसर पर हरिवंश नारायण सिंह ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसद टीवी में इंटर्नशिप पूरी करने वाले छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल (Dr. Pragya Paliwal), संसद टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित खरे (Amit Khare) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। संसद टीवी में आयोजित इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत IIMC के 20 चयनित छात्रों को संसदीय पत्रकारिता, प्रसारण, कंटेंट निर्माण और मीडिया संचालन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
समारोह के दौरान छात्रों के अनुभवों को भी साझा किया गया और उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों को मीडिया उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं और उनके पेशेवर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
देशभर के पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स और फिल्म समीक्षकों की भारी मांग को देखते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF 2026) के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल को दोबारा खोला गया है।
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देशभर के पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स और फिल्म समीक्षकों की भारी मांग को देखते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF 2026) के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल को दोबारा खोला गया है, जोकि 10 जून और 11 जून 2026 तक वैलिड है, यानी इस हिसाब से मीडिया प्रतिनिधि के सिर्फ आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
आयोजकों के अनुसार, यह विशेष व्यवस्था उन मीडिया कर्मियों को ध्यान में रखकर की गई है जो पहले निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे। यह मीडिया प्रतिनिधियों के लिए MIFF 2026 में भाग लेने का अंतिम अवसर होगा। 11 जून 2026 के बाद रजिस्ट्रेशन की समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
19वां मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 15 से 21 जून 2026 तक मुंबई के गोपालराव देशमुख मार्ग स्थित NFDC परिसर में आयोजित किया जाएगा। एक सप्ताह तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव में फिल्म स्क्रीनिंग, चर्चाएं, मास्टरक्लास, इंडस्ट्री इंटरैक्शन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आयोजकों ने मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे दोबारा खोले गए रजिस्ट्रेशन विंडो के दौरान अपना पंजीकरण पूरा कर लें। एक्रिडिटेशन मिलने पर उन्हें फिल्म फेस्टिवल की स्क्रीनिंग, प्रेस इंटरैक्शन, विशेष मीडिया कार्यक्रमों और नेटवर्किंग के अवसरों तक पहुंच मिलेगी।
मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल केवल 11 जून 2026 तक ही खुला रहेगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन का कोई और मौका नहीं दिया जाएगा।
मीडिया प्रतिनिधि ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
मीडिया प्रतिनिधि आधिकारिक पोर्टल पर जाकर Media Delegate के रूप में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए वे एक्रिडिटेशन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं या जारी किए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं।
दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा नॉन-फीचर फिल्म फेस्टिवल
मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) को दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नॉन-फीचर सिनेमा फिल्म महोत्सव माना जाता है। यह फिल्म फेस्टिवल मुख्य रूप से डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है।
साल 1990 में शुरू हुए इस महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत किया जाता है। पिछले तीन दशकों में MIFF दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों के लिए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है।
47 देशों से आईं 1,459 फिल्में
MIFF 2026 का 19वां संस्करण दर्शकों को एक समृद्ध और यादगार सिनेमाई अनुभव देने का वादा करता है। इस बार प्रतियोगिता खंड के लिए भारत समेत 47 देशों से कुल 1,459 फिल्म प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं।
फेस्टिवल में भारत की 42 से अधिक भाषाओं और दुनिया के अन्य देशों की 30 से ज्यादा भाषाओं में बनी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह इसकी वैश्विक पहुंच और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
फेस्टिवल में दुनिया भर के चर्चित फिल्मकारों की डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन फिल्में, एनीमेशन फिल्में, डेब्यू डायरेक्टर फिल्मों और छात्र फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके अलावा फेस्टिवल के दौरान Doc Bazaar के दूसरे संस्करण का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विभिन्न मास्टरक्लास और IDPA Open Forum भी आयोजित होंगे, जो फिल्मकारों और सिनेमा प्रेमियों के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देंगे।
आयोजकों का कहना है कि MIFF 2026 कहानी कहने की कला, रचनात्मकता और सिनेमा के प्रति जुनून का एक अनोखा उत्सव होगा, जहां डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन और शॉर्ट फिक्शन फिल्म निर्माण से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को एक साझा मंच मिलेगा।
19वें MIFF की मीडिया एक्रिडिटेशन पॉलिसी भी आधिकारिक लिंक के माध्यम से देखी जा सकती है-
https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/may/doc2026522874701.pdf
एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगरा में आयोजित आमसभा में की घोषणा, दिल्ली में जल्द आयोजित होगी कार्यशाला
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इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) द्वारा स्थापित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को नियुक्त किया गया है। वहीं, जनसत्ता के संवाददाता प्रियरंजन को महासचिव चुना गया है।
यह घोषणा आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की आमसभा में की गई, जहां पदाधिकारियों एवं गवर्निंग काउंसिल का गठन किया गया।
एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने आमसभा को संबोधित करते हुए संस्था के नए संविधान की जानकारी दी तथा नवगठित पदाधिकारियों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल में भीष्म सिंह (जमशेदपुर) एवं अनीता चौधरी (दिल्ली) को उपाध्यक्ष, आलोक मोहन नायक को कोषाध्यक्ष तथा गौरव ललित (दिल्ली), विपुल कुमार (हरियाणा), भंवर सिंह (राजस्थान) और राहुल वर्मा (उत्तराखंड) को सचिव नियुक्त किया गया है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि संस्था का नया संविधान औपचारिक रूप से अंगीकृत कर लिया गया है। यह निर्णय 13 सितंबर 2025 को आयोजित कार्यकारी बैठक में लिया गया था। नए संविधान के निर्माण में हरिद्वार में आयोजित एनयूजे (आई) अधिवेशन के दौरान गठित समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में अनिल पांडेय, दधिबल यादव, मनोज वर्मा, राकेश थपलियाल और अमलेश राजू सहित अन्य सदस्य शामिल थे, जबकि एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पदेन सदस्य के रूप में समिति से जुड़े थे।
नए संविधान के अनुसार संस्था में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, चार संयुक्त/सह सचिव तथा 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का प्रावधान किया गया है। गवर्निंग काउंसिल के अन्य सदस्यों में रास बिहारी, प्रदीप तिवारी, राकेश थपलियाल, उषा पहवा, दधिबल यादव, प्रतिभा शुक्ल, सचिन बुधौलिया, डॉ. उमेश पाठक, डॉ. ऋतु दुबे, प्रमोद गोस्वामी (उत्तर प्रदेश) तथा राकेश कुमार सिंह (बिहार) शामिल हैं।
गौरतलब है कि एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की स्थापना पत्रकारों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल मीडिया और मीडिया जगत में हो रहे निरंतर परिवर्तनों की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। संस्था देशभर में समय-समय पर कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और मीडिया उन्नयन कार्यक्रमों का आयोजन करती है। इसी क्रम में शीघ्र ही दिल्ली में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने बताया कि 8 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 25 जुलाई तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं।
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इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एनयूजेआई के मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने बताया कि एक अध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, सात उपाध्यक्ष, सात सचिव और 31 कार्यकारिणी के सदस्य पदों के लिए नामांकन 7 जुलाई 2026 को शाम 5 बजे तक भरे जा सकते हैं।
मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने जारी बयान में बताया कि चुनाव के पूरे कार्यक्रम की घोषणा आगरा के डा.भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित एनयूजेआई के राष्ट्रीय अधिवेशन में की गई। उन्होंने बताया कि 8 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 25 जुलाई तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। सभी पदों के लिए मतदान जयपुर में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन होगा।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि एनयूजेआई की देश के 25 राज्यों में इकाइयां हैं। चुनाव में यूनियन काउंसिल सदस्य और डेलिगेट मतदाता होते हैं। सदस्यता सूची, काउंसिल सदस्य सूची, डेलिगेट सूची और कोटामनी का भुगतान करने वाली राज्य इकाइयों के सदस्य ही चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले पाएंगे।
नौ जून को मुंबई में होने वाले फाइनेंस लीडरशिप एंड स्ट्रैटेजी समिट में देश के प्रमुख वित्तीय विशेषज्ञ और CFO होंगे शामिल
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BW CFO World की ओर से 9 जून को मुंबई में ‘9वें फाइनेंस लीडरशिप एंड स्ट्रैटेजी समिट 2026’ और ‘BW CFO World Best CFO & Finance Strategy Excellence Awards 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम के दौरान आशीष शेलार विभिन्न श्रेणियों में देश के प्रमुख मुख्य वित्तीय अधिकारियों (CFOs) को सम्मानित करेंगे। यह आयोजन भारत के वित्तीय नेतृत्व और रणनीतिक प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ प्रोफेशनल्स के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।
BW CFO World Best CFO & Finance Strategy Excellence Awards 2026 के विजेताओं का चयन वित्त, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामकीय क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया जाएगा।
आशीष शेलार महाराष्ट्र सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री हैं। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता भी हैं और मुंबई भाजपा इकाई के अध्यक्ष होने के साथ-साथ बांद्रा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। राष्ट्रीय राजनीति और नीतिगत विषयों पर उनकी सक्रिय भागीदारी के अलावा खेलों, विशेष रूप से क्रिकेट प्रशासन, में भी उनकी रुचि है।
समिट में देश के कई प्रमुख वित्तीय विशेषज्ञ, CFO और कॉर्पोरेट रणनीतिकार हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों, व्यापारिक अनिश्चितताओं, टिकाऊ विकास के लिए CFO की रणनीतियों तथा वर्ष 2026 में CFO से जुड़ी बोर्डरूम अपेक्षाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
आयोजकों के अनुसार, आज के दौर में CFO की भूमिका केवल वित्तीय अनुशासन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे व्यवसायिक रणनीति तैयार करने, विकास को गति देने और संस्थानों के लिए दीर्घकालिक मूल्य निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया का दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक आगरा में संपन्न
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Samachar4media Bureau
मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। देश में लोकतंत्र के लिए मीडिया की निष्पक्षता होनी जरूरी है। तभी पत्रकारिता एवं पत्रकार समाज मजबूत हो सकेंगे। यह विचार रविवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया’ (NUJI) के दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के दूसरे दिन के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता का स्वरूप बदला है। नई पीढ़ी के लोग मोबाइल लेकर मैदान में आ रहे हैं। इनमें से तमाम लोग सिर्फ अपना एजेंडा चलाते हैं। उन्हें वास्तविक पत्रकारिता से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी पत्रकारिता करने वाले लोगों से बचना होगा।
उन्होंने इस बात की भी चिंता जताई कि अनेक मीडिया हाउस व्यापारिक घरानों के अधीन हैं। ऐसे में पत्रकारिता एवं पत्रकारों पर कई तरह की बंदिशें होने लगी हैं। फिर भी देश में पत्रकारिता सकारात्मक दिशा में है। पत्रकार के हितों एवं मीडिया की मजबूती के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने भी फर्जी पत्रकारों एवं फर्जी पत्रकार संगठनों को लेकर जो चिंता जताई है, उस पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। पत्रकार समाज की मांगों का समाधान करवाया जाएगा। मौर्य ने कहा कि आज दुनिया वैश्विक ऊर्जा के संकट से जूझ रही है लेकिन हमारा देश इसके सामने मजबूती से खड़ा हुआ है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल की बातें हो रही हैं। मीडिया में आपातकाल ज्यादा दिखाई दे रहा है। पत्रकारों की मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। रास बिहारी ने कहा कि पहले राजनीति पर सवाल उठते थे लेकिन अब पत्रकारों पर सवाल उठ रहे हैं जो चिंता का विषय है। सरकार फर्जी पत्रकार एवं फर्जी संगठनों की जांच करवाए।
इस दौरान एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप तिवारी ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद गोस्वामी, यूपी एनयूजेआई के अध्यक्ष सुरेंद्र दुबे ने दो दिवसीय सम्मेलन के बारे में बताया। राजस्थान, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड समेत देश के सभी राज्यों के पदाधिकारियों ने अपने राज्यों की गतिविधियों की जानकारी दी।
तबीयत बिगड़ने के बाद मंगलवार की रात गिरिजेश मिश्रा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के गाजीपुर श्मशान घाट में किया गया।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर गिरिजेश मिश्रा का सात जून को निधन हो गया है। जानकारी के अनुसार, करीब 49 वर्षीय गिरिजेश मिश्रा की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद मंगलवार की रात उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान रविवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
गिरिजेश मिश्रा का अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के गाजीपुर श्मशान घाट में किया गया। वह अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। गिरिजेश मिश्रा के निधन की खबर से पत्रकारिता जगत, सहयोगियों, मित्रों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर देशभर के पत्रकार, मीडिया प्रोफेशनल्स और उनके करीबी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
गोरखपुर से संबंध रखने वाले गिरिजेश मिश्रा ने पत्रकारिता की दुनिया में अपनी मेहनत, अध्ययनशीलता और शांत स्वभाव के दम पर अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में आजतक, जी न्यूज, इंडिया न्यूज और TV9 भारतवर्ष जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सहयोगियों के अनुसार, किसी भी विषय पर उनकी गहरी समझ और तथ्यों पर मजबूत पकड़ उन्हें भीड़ से अलग बनाती थी।
सोशल मीडिया पर उनके साथ काम कर चुके पत्रकारों और मित्रों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि गिरिजेश मिश्रा बेहद सरल, सहज और मददगार इंसान थे। वे हर विषय पर धैर्यपूर्वक चर्चा करते थे और अपने अनुभव से युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन करते रहते थे। कई साथियों ने उन्हें पत्रकारिता का चलता-फिरता ज्ञानकोष बताया।
पूर्व सहयोगियों ने भावुक शब्दों में लिखा कि गिरिजेश मिश्रा के साथ बिताए गए वर्षों की यादें हमेशा साथ रहेंगी। किसी ने उन्हें अपना छोटा भाई बताया तो किसी ने कहा कि उनके जाने से जिंदगी का एक अहम हिस्सा हमेशा के लिए खाली हो गया है। गिरिजेश मिश्रा के करीबी सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने संघर्षों के बीच अपनी पहचान बनाई और हमेशा परिवार तथा बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने देखे।
गिरिजेश मिश्रा सिर्फ एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि लेखन और कहानी कहने की कला में भी माहिर थे। पत्रकारिता के साथ-साथ उनकी रुचि फिल्म और टेलीविजन लेखन में भी थी। उनके साथ काम कर चुके लोगों का कहना है कि वह भविष्य में लेखन और रचनात्मक कार्यों को लेकर कई योजनाएं बना रहे थे, हालांकि, उनके असामयिक निधन ने उनके कई सपनों और योजनाओं को अधूरा छोड़ दिया।
उनके निधन पर मीडिया जगत से जुड़े अनेक वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और साथियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।