कोरोना के इस संकट काल में चारों ओर भय और निराशा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
कोरोना के इस संकट काल में चारों ओर भय और निराशा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। कष्ट की इस घड़ी में ताजा हवा के झोंके की तरह है वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल का नया भजन। भगवान कृष्ण की तरह खूबसूरत है यह भजन- 'तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं।' इस भजन को सुनकर आप अपने सारे गम भूल जाएंगे।
हरीश चंद्र बर्णवाल ने ना सिर्फ इस भजन को शब्दों की मोती से पिरोया है, बल्कि अपनी मखमली आवाज से भजन गायकी को एक नया आयाम भी दिया है। एक-एक शब्द हजारों अर्थ देने वाला है। इस भजन को सुनकर आपका दिल खुश हो जाएगा। मन को सुकून देने वाला यह एक ऐसा भजन है जो वर्षों बाद लोगों को सुनने के लिए मिल रहा है।
लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल ने बड़ी खूबसूरती से इस भजन को लिखा है। इसका हर एक शब्द दिल को राहत देता है। मन को शांति प्रदान करता है। सबकुछ भूलकर मन प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है। भजन का संगीत बेहतरीन है। राहत देने वाला है। इस भजन को आप बार-बार सुनना तो पसंद करेंगे ही साथ ही खुद को गुनगुनाने से भी रोक नहीं पाएंगे।
इस भजन में गायक हरीश चंद्र बर्णवाल भगवान कृष्ण से खूबसूरत अंदाज में सवाल पूछते हैं। महाभारत की पूरी घटना को शब्दों से शानदार ढंग से सजा कर वे भगवान से पूछते हैं कि 'ना तो राधा हूं मैं, ना तो मीरा हूं मैं। तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं। सत्यभामा नहीं, न हूं मै रुक्मिणी। तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं। हरीश बर्णवाल ने इसे अपने यूट्यूब चैनल पर लॉन्च किया है।
इस भजन के साथ हरीश ने पत्रकारिता से भजन गायिकी की तरफ अपना कदम बढ़ाया है। हरीश चंद्र बर्णवाल एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार रहे हैं। ‘एबीपी न्यूज’, ‘न्यूज18 इंडिया’, ‘जी न्यूज’ और ‘डीडी न्यूज’ में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वो सात पुस्तकें भी लिख चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी पर चार पुस्तकें लिखने के अलावा हरीश ने कहानियों पर एक पुस्तक और टीवी पत्रकारिता की भाषा पर भी पुस्तक लिख चुके हैं। हरीश को भारत सरकार का भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार और हिन्दी अकादमी पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।
भजन को आप यहां सुन सकते हैं-
‘आईटीवी फाउंडेशन’ (ITV Foundation) की चेयरपर्सन डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा का आज जन्मदिन है।
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Samachar4media Bureau
‘आईटीवी फाउंडेशन’ (ITV Foundation) की चेयरपर्सन डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा का आज जन्मदिन है। डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा केवल एक शिक्षाविद् या मीडिया की आवाज नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनका काम इतिहास से जुड़ा है, सच्चाई में टिके हुए विचारों पर खड़ा है और जिनका मकसद समाज में बेहतर संवाद की दिशा बनाना है।
डॉ. शर्मा का ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के काम आ रहा है। वे बदलाव लाने के मकसद से काम करती हैं। उन्होंने ऐसा सफर तय किया है जो किसी एक पेशे या खांचे में समाया नहीं जा सकता। वे उन चंद लोगों में से हैं जो मानते हैं कि ज्ञान तब तक अधूरा है, जब तक उसे लोगों के साथ साझा न किया जाए और उसका इस्तेमाल समाज को बेहतर बनाने में न किया जाए।
डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस इतिहास में फर्स्ट क्लास ऑनर्स के साथ स्नातक किया। इसके बाद वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स गईं और फिर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी पहुंचीं, जहां उन्होंने ‘From United Provinces to Uttar Pradesh: Heartland Politics, 1947–1970’ विषय पर पीएचडी की। यह रिसर्च सिर्फ डिग्री के लिए नहीं था, बल्कि सत्ता, पहचान और भारतीय लोकतंत्र के बदलते रूपों पर एक गहन अध्ययन था।
लेकिन डॉ. शर्मा केवल शोध पत्रों और लाइब्रेरी तक सिमटी नहीं रहीं। उनके लिए ज्ञान का मतलब है जमीनी स्तर पर प्रासंगिक होना। इसी सोच के साथ वे कैम्ब्रिज से निकलकर पहले जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल की कक्षाओं तक पहुंचीं और फिर जन सरोकार के कामों में जुट गईं।
‘आईटीवी फाउंडेशन’ की चेयरपर्सन के रूप में उन्होंने मीडिया में नेतृत्व को एक नया रूप दिया है। आज जब मीडिया में अक्सर शोर और दिखावा हावी है, उन्होंने ठहराव, गहराई और गरिमा के साथ काम करने की परंपरा कायम की है। उनके नेतृत्व में फाउंडेशन ने ऐसे प्लेटफॉर्म्स तैयार किए हैं जहां इतिहास को केवल अतीत की बात मानकर छोड़ नहीं दिया जाता, बल्कि वर्तमान को समझने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
उनका पॉडकास्ट ‘Historically Speaking’ इसी सोच का शानदार उदाहरण है। इसमें वे भारत के इतिहास को आज के दौर के जटिल सवालों से जोड़ती हैं। चाहे वह आपातकाल की विरासत हो या भारत में राजनीतिक सोच की दिशा। वो न सिर्फ गहराई से शोध करती हैं, बल्कि इन बातों को निजी अनुभव और सरल भाषा में सामने लाती हैं।
उनका काम सिर्फ स्टूडियो या शिक्षण तक सीमित नहीं है। ‘आईटीवी फाउंडेशन’ के जरिये उन्होंने गोरखपुर, हरियाणा और पंजाब जैसे इलाकों में महिलाओं के स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराए। डेटॉल के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान चलाए और ‘We Women Want’ जैसे प्रोग्राम तैयार किए, जहां घरेलू हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य, और बांझपन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात होती है। उनके लिए ये शब्द सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि जमीनी जरूरतें हैं।
उन्होंने ‘शक्ति अवॉर्ड्स’ की शुरुआत भी की है, जो हर साल उन महिलाओं को सम्मानित करता है जो बिना किसी शोहरत या मंच के, रोज़ाना जिंदगी की चुनौतियों से जूझती हैं और कामयाबी हासिल कर समाज के सामने उदाहरण पेश करती हैं। डॉ. शर्मा को यकीन है कि असली नेतृत्व अक्सर चुपचाप काम करने वालों में होता है।
उनके न्यूजरूम में ऐसा माहौल होता है, जहां हर आवाज की अहमियत होती है, चाहे वह पत्रकार हो या तकनीकी स्टाफ। वे पद और ओहदे से ज्यादा विचार और संवाद को महत्व देती हैं।
डॉ. शर्मा की सोच की सबसे खास बात है कि वे ज्ञान और संवेदना, दोनों को साथ लेकर चलती हैं। वे बातें थोपती नहीं, बातचीत करती हैं। दिखावा नहीं करतीं, बल्कि गहराई से सोचती हैं। आज के तेज रफ्तार, सतही दौर में वे यह याद दिलाती हैं कि इतिहास का नज़रिया रखना केवल पुरानी बातों में उलझना नहीं, बल्कि आगे का रास्ता समझने का तरीका है।
इस साल उन्होंने एक और अहम भूमिका निभाई है। वे हाल ही में आई किताब ‘Indian Renaissance: The Modi Decade’ की संपादक हैं। इस संकलन में उन्होंने ऐसे विचारों और लेखों को जगह दी है, जो केवल राजनीतिक घटनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा पर सोचने का नजरिया हैं।
डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा मानती हैं कि कहानी सुनाने यानी स्टोरीटैलिंग का असली मकसद समाज को समझाना और बदलना है। वे एक ऐसी लीडर हैं जो जल्दीबाज़ी में नहीं, सोच-समझकर आगे बढ़ती हैं और सबसे बढ़कर, वे एक ऐसी महिला हैं जो इतिहास को अपने साथ आत्मविश्वास से लेकर चलती हैं।
'एस्सेल ग्रुप' के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका की रस्म पगड़ी के बाद एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
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Samachar4media Bureau
'एस्सेल ग्रुप' (Essel Group) के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता एवं वरिष्ठ उद्योगपति व समाजसेवी स्वर्गीय नंद किशोर गोयनका की रस्म पगड़ी के बाद एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की देह यात्रा भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन उसके संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्य हमेशा जीवित रहते हैं और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 26 जुलाई 2026 को संपन्न हुई रस्म पगड़ी केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं थी, बल्कि उस उत्तरदायित्व को स्वीकार करने का क्षण थी, जो एक पिता अपने जीवन के बाद अपने परिवार को सौंप जाता है। उन्होंने कहा कि बाबूजी का जीवन अब केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संस्कार परिवार के आचरण, निर्णयों और आने वाली पीढ़ियों के माध्यम से आगे बढ़ते रहेंगे।
उन्होंने आगे लिखा, "जीवन का एक शाश्वत सत्य है कि एक दिन व्यक्ति दृश्य संसार से विदा हो जाता है, लेकिन उसके संस्कार, उसका अनुशासन और उसके द्वारा दिखाया गया मार्ग समय से परे हो जाता है।" डॉ. चंद्रा ने कहा कि उनके पिता का जीवन और उनके आदर्श परिवार के लिए सदैव प्रेरणा बने रहेंगे।
अपने संदेश में उन्होंने इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि जिन लोगों ने अपनी उपस्थिति, प्रार्थनाओं और स्नेह के माध्यम से परिवार को संबल दिया, उनके प्रति वे हृदय से कृतज्ञ हैं।
पोस्ट के अंत में डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, "बाबूजी, आपकी देह यात्रा पूर्ण हो गई है, लेकिन आपके दिए संस्कारों की यात्रा निरंतर चलती रहेगी। ॐ शांति।"
गौरतलब है कि डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता एवं वरिष्ठ उद्योगपति और समाजसेवी नंद किशोर गोयनका का 13 जुलाई 2026 को मुंबई में 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के अग्रोहा धाम स्थित गोयनका उद्यान में किया गया था। हाल ही में डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए हरियाणा के अग्रोहा में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से 'नंद किशोर गोयनका यूनिवर्सिटी' स्थापित करने की घोषणा भी की है। प्रस्तावित विश्वविद्यालय का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के साथ-साथ समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना होगा।
राज्य सरकार ने 24 घंटे और सातों दिन (24x7) काम करने वाला 'वॉर रूम' बनाने का फैसला किया है, जो सोशल मीडिया समेत सभी मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगा और गलत खबरों का तुरंत तथ्यात्मक जवाब देगा।
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Samachar4media Bureau
फेक न्यूज और भ्रामक जानकारी पर रोक लगाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 24 घंटे और सातों दिन (24x7) काम करने वाला 'वॉर रूम' बनाने का फैसला किया है, जो सोशल मीडिया समेत सभी मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगा और गलत खबरों का तुरंत तथ्यात्मक जवाब देगा।
राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग (Information and Cultural Affairs Department) ने शुक्रवार को जारी अधिसूचना में कहा कि हाल के दिनों में बढ़ती मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन और फेक न्यूज की चुनौती को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि ऐसी गलत सूचनाएं कानून-व्यवस्था, सरकारी कामकाज और राज्य की छवि पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
नई व्यवस्था के तहत यह 'वॉर रूम' प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया, साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाली खबरों और पोस्ट की निगरानी करेगा। इसके अलावा यह जिला प्रशासन और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ समन्वय बनाकर सही और सत्यापित जानकारी लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचाने का काम करेगा।
इस वॉर रूम की कमान सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव के हाथ में होगी। इसमें गृह विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और राज्य प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहेंगे।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, वॉर रूम की जिम्मेदारी सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं होगी। यह सोशल मीडिया और समाचारों में फैलाई जा रही भ्रामक या गलत जानकारी की पहचान करेगा, उसके जवाब में तथ्य आधारित प्रतिक्रिया तैयार करेगा और जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन व संबंधित विभागों के साथ मिलकर समन्वित कार्रवाई भी करेगा।
इसके अलावा वॉर रूम मीडिया संस्थानों और फैक्ट-चेकिंग एजेंसियों के साथ भी लगातार संपर्क में रहेगा। साथ ही राज्य सरकार को समय-समय पर स्थिति की रिपोर्ट भी भेजेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों तक सही और सत्यापित जानकारी बिना देरी के पहुंचे, ताकि अफवाहों और गलत खबरों को फैलने का मौका न मिले। उनका कहना है कि मकसद केवल सोशल मीडिया की निगरानी करना नहीं, बल्कि आधिकारिक माध्यमों से तेजी से सही जानकारी साझा करना भी है।
राज्य सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों, जिलाधिकारियों (DM), पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों (SP) को भी निर्देश दिए हैं कि वे वॉर रूम के साथ समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करें और इसके सुचारु संचालन में हर संभव सहयोग दें।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फेक न्यूज और अफवाहों पर तेजी से रोक लगाने में मदद मिलेगी और किसी भी संवेदनशील स्थिति में लोगों तक समय पर सही जानकारी पहुंचाई जा सकेगी।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को Air Suvidha 2.0 के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट्स से सावधान रहने की सलाह दी है।
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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को Air Suvidha 2.0 के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट्स से सावधान रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा है कि कुछ नकली पोर्टल खुद को आधिकारिक Air Suvidha 2.0 वेबसाइट बताकर यात्रियों से पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, उसके संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें फर्जी वेबसाइटें यात्रियों को पेमेंट गेटवे पर भेजकर Air Suvidha 2.0 की सेवा देने का दावा कर रही हैं। मंत्रालय ने साफ किया है कि Air Suvidha 2.0 की सेल्फ-डिक्लेरेशन (Self-Declaration) फॉर्म भरने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता। यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है।
मंत्रालय ने बताया कि Air Suvidha 2.0 के लिए केवल एक ही आधिकारिक पोर्टल मान्य है और यात्रियों को उसी का इस्तेमाल करना चाहिए।
यात्रियों से अपील की गई है कि वे किसी भी वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत या यात्रा से जुड़ी जानकारी भरने से पहले उसका वेब एड्रेस ध्यान से जांच लें। साथ ही Air Suvidha 2.0 के नाम पर किसी भी अनधिकृत वेबसाइट पर कोई भुगतान न करें।
मंत्रालय ने यह भी कहा है कि Air Suvidha 2.0 से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल सरकारी आधिकारिक पोर्टल और सरकार की ओर से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। यह सलाह यात्रियों की सुरक्षा और जागरूकता को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जून 2026 में Air Suvidha 2.0 लॉन्च किया था। यह अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए तैयार किया गया नया डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए भारत आने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन से पहले अनिवार्य ऑनलाइन हेल्थ सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होता है। यह व्यवस्था इबोला वायरस के प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
यात्री भारत पहुंचने से 24 घंटे पहले तक यह फॉर्म ऑनलाइन भर सकते हैं। मंत्रालय ने दोहराया है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है और किसी भी तरह के भुगतान की आवश्यकता नहीं है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने जंतर-मंतर और देशभर की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि यह निर्णय जंतर-मंतर (Jantar Mantar) और देशभर में बनी स्थिति के मद्देनजर लिया गया है, ताकि राष्ट्र विरोधी तत्व इसका लाभ न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे।
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह नहीं चाहते कि भारत के छात्र कानूनी जटिलताओं में उलझें और उनकी पढ़ाई तथा करियर प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है।
यह घटनाक्रम हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों और परीक्षा संबंधी विवादों के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों का असर छात्रों और देश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने अभी तक उनके उत्तराधिकारी या आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार के अगले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Gameskraft Technologies, उसके शेयरधारकों और संबंधित संस्थाओं की करीब ₹1,906 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी, उसके शेयरधारकों और उससे जुड़ी संस्थाओं की करीब 1,906 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर ली हैं। यह कार्रवाई ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स, खासकर RummyCulture, से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।
ED ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत यह अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी किया गया। एजेंसी के अनुसार, जांच इस आरोप पर केंद्रित है कि ऑनलाइन रियल मनी रमी खेलने वाले खिलाड़ियों से कथित धोखाधड़ी के जरिए अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) हासिल की गई और बाद में उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।
किन संपत्तियों को किया गया अटैच?
ED के मुताबिक, जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें बैंक खातों में जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयर, एक फार्महाउस और कई आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां कंपनी के शेयरधारकों, उनके परिवार के सदस्यों, फैमिली ट्रस्ट और अन्य संबंधित संस्थाओं के नाम पर हैं।
तेलंगाना में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
ED ने बताया कि यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। यही मामले PMLA के तहत अनुसूचित अपराध (Scheduled Offences) की श्रेणी में आते हैं।
मई और जून में हुई थी छापेमारी
जांच के दौरान ED ने 7 से 13 मई 2026 और फिर 20-21 जून 2026 को Gameskraft Technologies के दफ्तरों और कंपनी के निदेशकों व प्रमुख कर्मचारियों के घरों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने इस दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए, जिन्हें मामले में अहम सबूत बताया गया है।
3 करोड़ यूजर्स का दावा
ED के अनुसार, Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies ने RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे ब्रांड्स के जरिए ऑनलाइन रियल मनी रमी प्लेटफॉर्म संचालित किए। एजेंसी का दावा है कि इन प्लेटफॉर्म्स के देशभर में करीब 3 करोड़ यूजर्स थे।
ED ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में यूजर्स ऐसे राज्यों से थे, जहां ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है। इनमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
'बॉट्स' इस्तेमाल करने का आरोप
ED का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर खिलाड़ियों के मुकाबले ऑटोमेटेड प्लेयर्स (Bots) उतारे जाते थे, जबकि यूजर्स को दावा किया जाता था कि गेम पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है। एजेंसी का कहना है कि बॉट्स के कारण खिलाड़ियों को नुकसान हुआ, जबकि कंपनियों ने इससे भारी कमाई की।
मार्केटिंग पर खर्च किए ₹1,035 करोड़
ED के मुताबिक, कंपनियों ने नए यूजर्स जोड़ने और पुराने खिलाड़ियों को बनाए रखने के लिए करीब 1,035 करोड़ रुपये मार्केटिंग और प्रमोशनल गतिविधियों पर खर्च किए। इसमें बोनस, रेफरल इंसेंटिव, फ्री टूर्नामेंट एंट्री और अन्य रिवॉर्ड शामिल थे।
एजेंसी का यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में निकासी (Withdrawal) पर 5 से 10 फीसदी तक शुल्क लिया गया और 'Super Booster' जैसे ऑफर्स के जरिए खिलाड़ियों को निकाली जा सकने वाली राशि को 'Game Cash' में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसे बाद में सीधे नहीं निकाला जा सकता था।
ED के अनुसार, जो खिलाड़ी नुकसान के बाद खेलना छोड़ चुके थे, उन्हें दोबारा प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, पुश नोटिफिकेशन, SMS और टेलीमार्केटिंग कॉल्स का सहारा लिया गया।
पहले भी जब्त हो चुकी हैं संपत्तियां
ED ने बताया कि इससे पहले की कार्रवाई में एजेंसी करीब 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां फ्रीज कर चुकी है। इसके अलावा 11 लाख रुपये नकद और करीब 2.3 किलोग्राम सोना, हीरे के आभूषण और बुलियन भी जब्त किए गए थे।
ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक अटैच, फ्रीज और जब्त की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 2,401 करोड़ रुपये हो गया है।
हालांकि, यह ED के आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।
पॉलीकैब इंडिया ने नेहा शिंदे को Head – Corporate Communications & PR नियुक्त किया है। वह कंपनी की प्रतिष्ठा प्रबंधन, रणनीतिक संचार और ब्रांड स्टोरीटेलिंग का नेतृत्व करेंगी।
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नेहा शिंदे (Neha Shinde) ने दो वर्ष बाद एक बार फिर पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड (Polycab India Limited) में वापसी की है। कंपनी ने उन्हें हेड–कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस एंड पीआर (Head – Corporate Communications & PR) नियुक्त किया है।
इससे पहले वह एप्सिलॉन कार्बन प्राइवेट लिमिटेड (Epsilon Carbon Pvt. Ltd.) और एप्सिलॉन एडवांस्ड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड (Epsilon Advanced Materials Pvt. Ltd.) के साथ कार्यरत थीं।
अपनी नई भूमिका में नेहा शिंदे (Neha Shinde) कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Corporate Communications), पब्लिक रिलेशंस (Public Relations-PR), प्रतिष्ठा प्रबंधन (Reputation Management), रणनीतिक संचार (Strategic Communications) और ब्रांड स्टोरीटेलिंग (Brand Storytelling) का नेतृत्व करेंगी।
लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों का अनुभव उनके लिए सीख और बदलाव से भरा रहा। उन्होंने कहा कि अब Polycab India में वापसी उनके करियर का नया और महत्वपूर्ण अध्याय है।
नेहा शिंदे को पब्लिक रिलेशंस, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, मीडिया रिलेशंस, ब्रांड स्टोरीटेलिंग और कम्युनिकेशन रणनीति के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। वह मई 2021 में मैनेजर–पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशन (Manager – PR & Corporate Communication) के रूप में Polycab India से जुड़ी थीं और अप्रैल 2023 में सीनियर मैनेजर (Senior Manager) पद पर पदोन्नत हुई थीं।
अब नई जिम्मेदारी में वह कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस और पीआर रणनीति का नेतृत्व करते हुए व्यवसाय, प्रतिष्ठा और विकास से जुड़ी ब्रांड कथाओं को नई दिशा देंगी।
वॉव! मोमो (Wow! Momo) ने शुभम शुक्ला को Assistant Vice President – Brand नियुक्त किया है। वह कंपनी की ब्रांड रणनीति, मार्केटिंग अभियानों और ग्राहक जुड़ाव को मजबूत करेंगे।
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वॉव! मोमो (Wow! Momo) ने शुभम शुक्ला (Subham Shukla) को असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट–ब्रांड (Assistant Vice President – Brand) नियुक्त किया है। कंपनी ने उनकी नियुक्ति की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा एक पोस्ट के माध्यम से दी।
कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि वह शुभम शुक्ला का Wow! Momo परिवार में स्वागत करते हुए उत्साहित है। कंपनी को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में ब्रांड को और मजबूत बनाया जाएगा, ग्राहकों के लिए बेहतर अनुभव तैयार किए जाएंगे और व्यवसाय के विकास को नई गति मिलेगी।
शुभम शुक्ला (Subham Shukla) ब्रांडिंग (Branding) और मार्केटिंग (Marketing) के क्षेत्र में व्यापक अनुभव लेकर कंपनी से जुड़े हैं। उन्हें ब्रांड रणनीति (Brand Strategy), क्रिएटिव कम्युनिकेशन (Creative Communication), कंज्यूमर एंगेजमेंट (Consumer Engagement) और इंटीग्रेटेड मार्केटिंग (Integrated Marketing) में विशेषज्ञता हासिल है।
कंपनी के अनुसार, अपने विस्तार की मौजूदा यात्रा के दौरान शुभम शुक्ला की विशेषज्ञता ब्रांड की बाजार में मौजूदगी मजबूत करने, प्रभावशाली मार्केटिंग अभियानों को आगे बढ़ाने और हर ग्राहक संपर्क बिंदु (Customer Touchpoint) पर यादगार ब्रांड अनुभव विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
केरल हाईकोर्ट ने Television Ratings Policy 2026 के लैंडिंग पेज व्यूअरशिप संबंधी प्रावधान पर लगी अंतरिम रोक हटाते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को नीति लागू करने की अनुमति दे दी।
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Samachar4media Bureau
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 (Television Ratings Policy 2026) के उस प्रावधान पर लगी अंतरिम रोक हटा दी, जिसके तहत लैंडिंग पेज (Landing Page) और बूट-अप स्क्रीन (Boot-up Screen) से मिलने वाली व्यूअरशिप को आधिकारिक टीवी रेटिंग्स में शामिल नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) के लिए नीति लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस (Justice Bechu Kurian Thomas) ने ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (All India Digital Cable Federation-AIDCF) और डेन नेटवर्क्स (DEN Networks) की याचिकाओं पर दी गई अंतरिम राहत समाप्त कर दी। दोनों संगठनों ने नई नीति के लैंडिंग पेज संबंधी प्रावधानों को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान AIDCF ने दलील दी कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India-TRAI) से जुड़े लंबित विवाद जैसा ही है और केंद्र सरकार कार्यपालिका के माध्यम से वही व्यवस्था लागू करना चाहती है, जिसे पहले TRAI लागू नहीं कर सका था।
वहीं केंद्र सरकार ने कहा कि नई नीति टीवी ऑडियंस मापन प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए बनाई गई है तथा लैंडिंग पेज पर दिखाई देने वाला चैनल दर्शक की सक्रिय पसंद नहीं माना जा सकता।
इस विवाद के कारण ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (Broadcast Audience Research Council-BARC India) ने साप्ताहिक टीवी रेटिंग्स का प्रकाशन भी रोक दिया था, जिससे ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों को मीडिया प्लानिंग और विज्ञापन दर तय करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
अब अंतरिम रोक हटने के बाद MIB के नीति लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संभावना है, हालांकि मामले में उच्च अदालत से राहत मिलने की स्थिति में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अपने ASTR प्लेटफॉर्म की मदद से पिछले कुछ समय में 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद कर दिए हैं।
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Samachar4media Bureau
साइबर ठगी और फर्जी मोबाइल कनेक्शनों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अपने ASTR प्लेटफॉर्म की मदद से पिछले कुछ समय में 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद कर दिए हैं। ये सभी नंबर अनिवार्य दोबारा सत्यापन (Re-verification) में असफल पाए गए थे।
यह जानकारी संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी। उन्होंने बताया कि Artificial Intelligence and Big Data Analytics Tool (ASTR) को खास तौर पर संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान करने के लिए विकसित किया गया है। 15 जुलाई 2026 तक इस सिस्टम की मदद से 88 लाख से ज्यादा मोबाइल नंबर डिस्कनेक्ट किए जा चुके हैं।
'चक्षु' पोर्टल से जनता भी कर रही मदद
सरकार ने आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल पर 'चक्षु' (Chakshu) सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए नागरिक संदिग्ध कॉल, मैसेज या अन्य फर्जी संचार की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
सरकार ने बताया कि हर शिकायत पर अलग-अलग कार्रवाई करने के बजाय इन शिकायतों का AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए विश्लेषण किया जाता है, ताकि बड़े स्तर पर चल रहे फर्जी नेटवर्क की पहचान की जा सके।
15 जुलाई 2026 तक संचार साथी पोर्टल पर मिली 11.18 लाख शिकायतों के आधार पर 50.90 लाख मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं।
साइबर अपराध रोकने के लिए एजेंसियों के बीच बढ़ा तालमेल
सरकार ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय (MHA) की है, जबकि कानून-व्यवस्था राज्यों का विषय है। इसके बावजूद दूरसंचार विभाग तकनीक के जरिए विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इसी उद्देश्य से विभाग ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा देता है। इसमें गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) भी शामिल है। इसका मकसद टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना और साइबर व वित्तीय धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई करना है।
SEBI से जुड़े संस्थान भी हुए प्लेटफॉर्म से जुड़े
दूरसंचार विभाग के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने नियंत्रण वाले संस्थानों को भी डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जुड़ने की सलाह दी है। विभाग ने इसके लिए कई जागरूकता सत्र आयोजित किए हैं और अब तक SEBI से जुड़े 50 से अधिक संस्थान इस प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन चुके हैं।
सरकार का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार डिजिटल संचार नेटवर्क का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिटिक्स और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए टेलीकॉम धोखाधड़ी पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जा रहा है।