दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने सोशल मीडिया और क्रिएटिव एजेंसी की नियुक्ति के लिए 2.20 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तसमयी लाहा रॉय, एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने सोशल मीडिया और क्रिएटिव एजेंसी की नियुक्ति के लिए 2.20 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर एक साल के लिए होगा, जिसे एजेंसी के प्रदर्शन के आधार पर एक और साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
exchange4media को मिली रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) के अनुसार, चुनी गई एजेंसी DSIIDC की विभिन्न संस्थागत गतिविधियों के लिए एकीकृत कम्युनिकेशन सपोर्ट उपलब्ध कराएगी। इसमें औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विकास, MSME को बढ़ावा देना, उद्यमिता से जुड़ी पहल, स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद, प्रदर्शनियां, वर्कशॉप, कार्यक्रम और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत एजेंसी को सोशल मीडिया मैनेजमेंट, डिजिटल आउटरीच, क्रिएटिव सर्विसेज, ऑडियो-वीडियो कंटेंट तैयार करने और अन्य कम्युनिकेशन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी निभानी होगी।
एजेंसी DSIIDC के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का संचालन करेगी। इसके अलावा उसे रील्स, एनिमेशन, एक्सप्लेनर वीडियो और कैंपेन फिल्म जैसे डिजिटल कंटेंट तैयार करने होंगे। संगठन की वेबसाइट का रखरखाव, कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में सहयोग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी, प्रेस रिलीज, भाषण, ब्रोशर और वार्षिक रिपोर्ट जैसे कॉरपोरेट कम्युनिकेशन मैटेरियल तैयार करना, साथ ही मीडिया मॉनिटरिंग और रिसर्च का काम भी एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।
RFP में हर महीने किए जाने वाले कार्यों का भी अनुमान दिया गया है। इसके अनुसार एजेंसी को हर महीने 50 से 70 सोशल मीडिया पोस्ट या क्रिएटिव, 10 से 15 शॉर्ट वीडियो, 4 से 6 मोशन ग्राफिक्स, 10 से 15 क्रिएटिव डिजाइन, 10 तक कार्यक्रमों या साइट विजिट्स की कवरेज और 2 से 3 डिजिटल कैंपेन तैयार करने होंगे।
वहीं सालभर में एजेंसी को एक कॉरपोरेट रिपोर्ट, चार तक संस्थागत फिल्में, 12 न्यूजलेटर और बड़े कार्यक्रमों व स्टेकहोल्डर आउटरीच गतिविधियों के लिए कम्युनिकेशन सपोर्ट भी देना होगा।
DSIIDC ने सोशल मीडिया प्रदर्शन को लेकर भी लक्ष्य तय किए हैं। एजेंसी से उम्मीद की गई है कि वह हर सक्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर महीने कम-से-कम 5 प्रतिशत फॉलोअर्स या सब्सक्राइबर्स की वृद्धि दर्ज कराने का प्रयास करेगी। इसके साथ ही रीच, इम्प्रेशन, व्यूज, लाइक्स, शेयर और वॉच टाइम जैसे एंगेजमेंट मेट्रिक्स में भी लगातार सुधार दिखाना होगा।
टेंडर में हिस्सा लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें भी तय की गई हैं। बोली लगाने वाली एजेंसी का सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) में पंजीकृत (Empanelled) होना जरूरी है। इसके अलावा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में एजेंसी का औसत वार्षिक कारोबार कम-से-कम 10 करोड़ रुपये होना चाहिए।
एजेंसी के पास कम-से-कम 50 फुल-टाइम प्रोफेशनल्स होने चाहिए और उसका संचालन एक से अधिक शहरों में होना चाहिए। साथ ही पिछले पांच वर्षों में एजेंसी ने सरकारी विभागों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए कम-से-कम तीन ऐसे कम्युनिकेशन प्रोजेक्ट पूरे किए हों, जिनमें प्रत्येक की कीमत 1.5 करोड़ रुपये या उससे अधिक रही हो।
एजेंसी का चयन क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन (QCBS) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसमें 70 प्रतिशत वेटेज तकनीकी मूल्यांकन और 30 प्रतिशत वेटेज वित्तीय बोली को दिया जाएगा।
तकनीकी मूल्यांकन के दौरान एजेंसी के कारोबार, सरकारी परियोजनाओं का अनुभव, प्रस्तावित कोर टीम और DSIIDC की कम्युनिकेशन रणनीति एवं कैंपेन अप्रोच पर आधारित प्रस्तुति (Presentation) का आकलन किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, राहुल जोशी ने बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण यह फैसला लिया है। हालांकि, वह नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘नेटवर्क18’ (Network18) के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल जोशी ने ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन’ (NBDA) में अपनी भूमिका से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, राहुल जोशी ने बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण यह फैसला लिया है। व्यस्त कार्यक्रम के चलते वह NBDA की बैठकों और अन्य गतिविधियों में नियमित रूप से शामिल नहीं हो पा रहे थे। बताया जा रहा है कि यह निर्णय किसी रणनीतिक या नीतिगत मतभेद के कारण नहीं, बल्कि प्रशासनिक बदलाव के तहत लिया गया है।
मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि समय की कमी के कारण राहुल जोशी कई बैठकों में शामिल नहीं हो पा रहे थे। ऐसे में एसोसिएशन का मानना है कि कंपनी की ओर से ऐसा वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधित्व करे, जो संगठन की गतिविधियों के लिए अधिक समय दे सके।
सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क18 अब NBDA में अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को नामित करेगा। माना जा रहा है कि कंपनी का कोई शीर्ष अधिकारी एसोसिएशन की नीतिगत चर्चाओं, गवर्नेंस बैठकों और नियामकीय मामलों में सक्रिय रूप से भागीदारी करेगा।
बताया गया है कि राहुल जोशी आगे भी नेटवर्क18 के मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे और समूह के ब्रॉडकास्ट तथा डिजिटल न्यूज कारोबार का नेतृत्व करते रहेंगे।
बता दें कि NBDA इस समय प्रसारण और डिजिटल समाचार क्षेत्र से जुड़े विभिन्न नीतिगत एवं नियामकीय मुद्दों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रहा है। एसोसिएशन प्रसारण नियमों, कंटेंट मानकों, डिजिटल न्यूज नीति, स्व-नियमन और मीडिया से जुड़े बदलते विधायी ढांचे जैसे विषयों पर इंडस्ट्री का पक्ष रखता रहा है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि विभिन्न मंत्रालयों और नियामकीय संस्थाओं के साथ बढ़ती बैठकों और परामर्श प्रक्रियाओं के कारण सदस्य कंपनियों के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में कंपनियां ऐसे अधिकारियों को नामित कर रही हैं, जो एसोसिएशन के कार्यों में पर्याप्त समय दे सकें।
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल जोशी के इस्तीफे का अर्थ यह नहीं है कि NBDA से नेटवर्क18 दूरी बना रहा है। कंपनी एसोसिएशन में अपनी सक्रिय भागीदारी जारी रखेगी और जल्द ही नए वरिष्ठ प्रतिनिधि का नाम घोषित करेगी।
पिछले कुछ समय में मीडिया इंडस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ा है। टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट में सुधार, प्रसारण नीति, डिजिटल कंटेंट नियम, विज्ञापन मानकों और वितरण से जुड़े कई विषयों पर इंडस्ट्री लगातार नियामकीय स्तर पर संवाद कर रही है।
गौरतलब है कि NBDA देश के प्रमुख टेलीविजन न्यूज ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख इंडस्ट्री निकाय है। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समेत विभिन्न सरकारी विभागों और नियामकीय संस्थाओं के साथ न्यूज ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर इंडस्ट्री की ओर से संवाद करता है। संगठन की विभिन्न समितियां संपादकीय मानकों, स्व-नियमन, कानूनी मामलों और नीतिगत सुझावों पर विचार-विमर्श करती हैं।
हालांकि खबर लिखे जाने तक नेटवर्क18 या NBDA की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया द्वारा भेजे गए सवालों का भी दोनों पक्षों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।
पुणे टाइम्स मिरर से जुड़ने से पहले निर्मल शाह ‘जी मीडिया’ (Zee Media) में रेवेन्यू हेड (डिजिटल) के पद पर कार्यरत थे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘पुणे टाइम्स मिरर’ समाचार पत्र ने मीडिया इंडस्ट्री के अनुभवी प्रोफेशनल निर्मल शाह को चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) के पद पर नियुक्त किया है। अपनी नई जिम्मेदारी में वह प्रिंट, डिजिटल, इवेंट्स और ब्रैंडेड कंटेंट से जुड़ी रेवेन्यू स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे। साथ ही विज्ञापन से होने वाली आय बढ़ाने और राष्ट्रीय स्तर पर ब्रैंड पार्टनरशिप के विस्तार पर उनका विशेष फोकस रहेगा।
निर्मल शाह के पास मीडिया सेल्स और रेवेन्यू लीडरशिप का 22 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में इंटीग्रेटेड एडवरटाइजिंग, स्पॉन्सरशिप, ब्रैंडेड कंटेंट, प्रोग्रामेटिक और डिजिटल मोनेटाइजेशन जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इसके अलावा उन्होंने कई प्रमुख डिजिटल पब्लिशर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्पोर्ट्स और मीडिया संगठनों के साथ मिलकर रेवेन्यू बिजनेस को आगे बढ़ाने और लंबे समय तक क्लाइंट्स के साथ मजबूत संबंध बनाने का काम किया है।
पुणे टाइम्स मिरर से जुड़ने से पहले निर्मल शाह ‘जी मीडिया’ (Zee Media) में रेवेन्यू हेड (डिजिटल) के पद पर कार्यरत थे। वहां वह कंपनी के डिजिटल पोर्टफोलियो की मोनेटाइजेशन और रेवेन्यू स्ट्रेटजी के लिए जिम्मेदार थे। उनके कार्यक्षेत्र में डिस्प्ले, कनेक्टेड टीवी (CTV), प्रोग्रामेटिक रेवेन्यू, ब्रैंडेड कंटेंट और इवेंट मोनेटाइजेशन शामिल थे।
इससे पहले वह फैनकोड में स्पॉन्सरशिप और एडवरटाइजिंग सेल्स का नेतृत्व कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने क्रिकेट (इंटरनेशनल बाइलेटरल), फुटबॉल, फॉर्मूला-1, गोल्फ, रग्बी, हॉकी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और बेसबॉल समेत कई खेलों से जुड़े विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप कारोबार को संभाला तथा विज्ञापनदाताओं के लिए इंटीग्रेटेड ब्रैंड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराए।
निर्मल शाह 'सोनीलिव' (SonyLIV) में नेशनल सेल्स हेड के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वहां उन्होंने प्लेटफॉर्म के विज्ञापन कारोबार को मजबूत बनाने के साथ-साथ 'कौन बनेगा करोड़पति', 'शार्क टैंक इंडिया', 'इंडियन आइडल', फीफा, यूईएफए यूरो, ला लीगा, ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स और एमिरेट्स एफए कप जैसी प्रमुख प्रॉपर्टीज के लिए स्पॉन्सरशिप हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने करियर के दौरान वह नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स, सिफी टेक्नोलॉजीज और हिंदुस्तानटाइम्स डॉट कॉम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने स्ट्रैटेजिक क्लाइंट पार्टनरशिप, नए रेवेन्यू मॉडल और मजबूत सेल्स टीम तैयार करने में अहम योगदान दिया।
अपनी नियुक्ति पर निर्मल शाह ने कहा कि आज का मीडिया परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और ब्रैंड अब अलग-अलग विज्ञापन माध्यमों के बजाय एकीकृत समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुणे टाइम्स मिरर प्रिंट, डिजिटल, इवेंट्स, ब्रैंडेड कंटेंट, परफॉर्मेंस और ऑडियंस एंगेजमेंट को एक मंच पर लाकर ऐसी जरूरतों को पूरा करने की मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि वह टीम के साथ मिलकर ऐसे प्रभावी और परिणाम आधारित मार्केटिंग सॉल्यूशंस तैयार करने की दिशा में काम करेंगे, जो विज्ञापनदाताओं के लिए मूल्य पैदा करें और संस्थान की मौजूदगी को हर स्तर पर मजबूत करें।
कंपनी के अनुसार, निर्मल शाह मीडिया इंडस्ट्री में अपनी व्यापक विशेषज्ञता और मजबूत साख के साथ जुड़े हैं। ऐसे समय में जब पुणे टाइम्स मिरर खुद को एक मल्टी-सिटी और इंटीग्रेटेड मीडिया कंपनी के रूप में विकसित कर रहा है, उनकी नियुक्ति कंपनी की विकास रणनीति में अहम भूमिका निभाएगी।
द लेक्सिकॉन ग्रुप और पुणे टाइम्स मिरर के सीएमडी पंकज शर्मा ने कहा कि मीडिया इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और आज ब्रैंड केवल मीडिया स्पेस नहीं, बल्कि इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस चाहते हैं। प्रिंट, डिजिटल, ओटीटी, इवेंट्स, ब्रैंडेड कंटेंट और स्पॉन्सरशिप जैसे क्षेत्रों में निर्मल शाह का अनुभव उन्हें इस दिशा में सबसे उपयुक्त नेतृत्वकर्ता बनाता है। उनका अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण पुणे टाइम्स मिरर को देश के सबसे प्रगतिशील इंटीग्रेटेड मीडिया ब्रैंड्स में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
WPP Media ने भारत में अपने एडवांस्ड टीवी कारोबार को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजीव राजगोपाल को एडवांस्ड टीवी (Advanced TV) का सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नियुक्त किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
WPP Media ने भारत में अपने एडवांस्ड टीवी कारोबार को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजीव राजगोपाल को एडवांस्ड टीवी (Advanced TV) का सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नियुक्त किया है। इस नई भूमिका में वह भारत में कंपनी के एडवांस्ड टीवी बिजनेस का नेतृत्व करेंगे और इसे WPP Media की मीडिया सॉल्यूशंस रणनीति का अहम हिस्सा बनाने पर काम करेंगे।
राजीव राजगोपाल ने अपनी LinkedIn पोस्ट के जरिए इस नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी भूमिका भारत के लिए WPP Media की एडवांस्ड टीवी रणनीति तैयार करने और उसे लागू करने की होगी। इसके तहत वह कनेक्टेड टीवी (CTV) के लिए ऑडियंस प्लानिंग, एड्रेसेबिलिटी, मेजरमेंट और अकाउंटेबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर ध्यान देंगे।
इसके अलावा वह विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं के साथ मिलकर नए और प्रभावी समाधान विकसित करेंगे। साथ ही रिसर्च आधारित थॉट लीडरशिप को भी बढ़ावा देंगे, ताकि एडवांस्ड टीवी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाया जा सके।
राजीव राजगोपाल को मीडिया इंडस्ट्री में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने रेडियो, ब्रॉडकास्ट टेलीविजन और डिजिटल मीडिया जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है।
उन्होंने वर्ष 2016 में WPP Media (तत्कालीन GroupM) में बिजनेस ग्रुप हेड के रूप में अपनी शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया और अब उन्हें सीनियर वाइस प्रेजिडेंट, एडवांस्ड टीवी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
WPP Media से जुड़ने से पहले राजीव राजगोपाल Star India, Red FM और Radio Mirchi (टाइम्स ग्रुप) जैसी प्रमुख मीडिया कंपनियों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) लंबे समय से चर्चा में रहे टेलीविजन विज्ञापनों की अवधि (Ad Duration) से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) लंबे समय से चर्चा में रहे टेलीविजन विज्ञापनों की अवधि (Ad Duration) से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इस मुद्दे पर मंत्रालय ने ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन एजेंसियों के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा पूरी कर ली है। अब मंत्रालय सभी पक्षों से मिले सुझावों को एक विस्तृत आंतरिक रिपोर्ट में शामिल कर रहा है, जिसके आधार पर अंतिम नीतिगत फैसला लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले कई लोगों ने यह जानकारी दी है।
प्रस्तावित संशोधनों से टेलीविजन उद्योग को लंबे समय से अपेक्षित नियामकीय राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, सरकार पूरी तरह से नियमों को खत्म करने (Complete Deregulation) के पक्ष में नहीं दिख रही है। इसके बजाय अधिकारी मौजूदा विज्ञापन सीमा (Ad Cap) में संतुलित बदलाव पर विचार कर रहे हैं, ताकि एक ओर ब्रॉडकास्टर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और दूसरी ओर दर्शकों के हित भी सुरक्षित रहें।
इस मामले से जुड़े विचार-विमर्श की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने e4m को बताया, "परामर्श प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। मंत्रालय अब सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर रहा है। इन्हीं सिफारिशों के आधार पर विज्ञापन अवधि से जुड़े नियमों में संशोधन पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है।"
टीवी विज्ञापन सीमा पर ISA के समर्थन को लेकर e4m की रिपोर्ट भी पढ़ें।
परामर्श प्रक्रिया में सीधे शामिल एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि मंत्रालय केवल विज्ञापनों की अधिकतम सीमा (Numerical Cap) की ही समीक्षा नहीं कर रहा, बल्कि यह भी देख रहा है कि बदलते मीडिया परिदृश्य में मौजूदा व्यवस्था आज भी कितनी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, "पिछले दो दशकों में टेलीविजन का पूरा इकोसिस्टम काफी बदल चुका है। उपभोक्ताओं की आदतें, विज्ञापन का आर्थिक मॉडल और प्रतिस्पर्धा—तीनों में बड़ा बदलाव आया है। मंत्रालय यह मूल्यांकन कर रहा है कि मौजूदा नियम आज के समय में कितने प्रासंगिक हैं।"
संतुलित राहत देने पर विचार
चर्चा से जुड़े लोगों के अनुसार सरकार ऐसे बदलावों पर विचार कर रही है, जिनसे ब्रॉडकास्टर्स को कुछ अतिरिक्त लचीलापन मिल सके, लेकिन दर्शकों का देखने का अनुभव प्रभावित न हो।
अधिकारियों का कहना है कि जिस प्रस्ताव पर विचार हो रहा है, उसके तहत ब्रॉडकास्टर्स को कुछ अतिरिक्त विज्ञापन स्लॉट (Advertising Inventory) मिल सकते हैं। हालांकि, उद्योग कई वर्षों से जिस तरह की पूरी नियामकीय छूट (Complete Regulatory Forbearance) की मांग करता रहा है, उसकी संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
विज्ञापन सीमा को लेकर ब्रॉडकास्टर्स और MIB की बैठक पर e4m की रिपोर्ट पढ़ें।
इस विषय पर जानकारी रखने वाले एक उद्योग प्रतिनिधि ने कहा, "यदि पूरी छूट नहीं भी मिलती है, तब भी प्रस्तावित संशोधन से उद्योग को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ब्रॉडकास्टर्स की वित्तीय चुनौतियों को समझती है, लेकिन वह यह भी चाहती है कि दर्शकों को संतुलित देखने का अनुभव मिलता रहे।"
नीति समीक्षा से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ब्रॉडकास्टिंग इकोसिस्टम से जुड़े सभी पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का सुझाव है कि अंतिम फैसला लागू करने से पहले सरकार मसौदा (Draft) सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करे।
उन्होंने कहा, "मकसद असीमित विज्ञापन दिखाने की अनुमति देना नहीं है। उद्देश्य यह है कि नियमों को आधुनिक बनाया जाए, ताकि ब्रॉडकास्टर्स अपनी कमाई बढ़ा सकें और साथ ही दर्शकों को जरूरत से ज्यादा विज्ञापनों का सामना भी न करना पड़े।"
विज्ञापन सीमा नियम पर पुनर्विचार की ब्रॉडकास्टर्स की मांग पर e4m की रिपोर्ट पढ़ें।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, सभी हितधारकों के सुझावों की समीक्षा पूरी होने के बाद मंत्रालय अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देगा और फिर केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों (Cable Television Networks Rules) में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उद्योग की राय बंटी हुई
मंत्रालय की परामर्श प्रक्रिया में उद्योग के सभी प्रमुख पक्ष शामिल हुए, लेकिन उनके सुझावों में काफी मतभेद देखने को मिले।
इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (ISA) ने मौजूदा विज्ञापन सीमा को हर एक घंटे में 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया। इसका मतलब होगा कि ब्रॉडकास्टर्स को हर घंटे 15 मिनट तक विज्ञापन दिखाने की अनुमति मिल सकेगी। चर्चा से जुड़े लोगों के अनुसार ISA का मानना है कि इससे ब्रॉडकास्टर्स की आय बढ़ेगी और दर्शकों पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
वहीं एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने पूरी तरह बाजार आधारित व्यवस्था (Market-Driven Framework) की वकालत की। एसोसिएशन का कहना है कि विज्ञापनों की अवधि तय करना सरकार का काम नहीं होना चाहिए।
AAAI ने मंत्रालय से कहा कि आज टेलीविजन की सीधी प्रतिस्पर्धा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से है, जहां विज्ञापनों की अवधि पर कोई कानूनी सीमा नहीं है। ऐसे में टेलीविजन पर प्रतिबंध और डिजिटल पर पूरी छूट, प्रतिस्पर्धा के लिहाज से असमान स्थिति पैदा करती है।
इसके अलावा AAAI ने सरकार से जल्द से जल्द टीवी ऑडियंस रेटिंग्स (Television Audience Ratings) बहाल करने की भी मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि मीडिया प्लानिंग और विज्ञापन निवेश के लिए विज्ञापनदाताओं को विश्वसनीय ऑडियंस मापन व्यवस्था की जरूरत होती है।
ब्रॉडकास्टर्स की मांग- पूरी नियामकीय छूट
परामर्श के दौरान ब्रॉडकास्टर्स ने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए विज्ञापन सीमा से पूरी तरह राहत (Complete Regulatory Forbearance) देने की मांग की।
इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) का कहना था कि यदि किसी चैनल पर जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दिखाए जाते हैं, तो दर्शक खुद ही दूसरा चैनल देखना शुरू कर देते हैं। ऐसे में बाजार अपने आप संतुलन बना लेता है और सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ती।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फाउंडेशन का कहना था कि दर्शकों का व्यवहार ही सबसे बड़ा नियंत्रण तंत्र है।
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने भी नियामकीय छूट की मांग का समर्थन किया, लेकिन साथ ही न्यूज चैनलों की अलग आर्थिक परिस्थितियों पर भी जोर दिया।
चर्चा में मौजूद लोगों के अनुसार एसोसिएशन ने कहा कि न्यूज चैनलों को लगातार लाइव रिपोर्टिंग और ताजा कंटेंट पर निवेश करना पड़ता है, जबकि मनोरंजन चैनल पुराने कार्यक्रमों को दोबारा दिखाकर भी कमाई कर सकते हैं। इसके अलावा चुनाव, प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान न्यूज चैनल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा भी प्रदान करते हैं।
एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी ने कहा, "उद्योग का लगातार यही कहना रहा है कि जहां लागत पूरी तरह बाजार तय करता है, वहीं राजस्व पर अब भी नियामकीय नियंत्रण बना हुआ है। इससे संरचनात्मक असंतुलन पैदा होता है, खासकर तब जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।"
डिजिटल प्रतिस्पर्धा ने बदली तस्वीर
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मीडिया के तेज विस्तार ने टेलीविजन उद्योग की आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है।
जहां टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापन अवधि को लेकर कानूनी सीमा लागू है, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी कोई सीमा नहीं है, जबकि दोनों एक ही विज्ञापन बाजार के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "मंत्रालय यह समझता है कि प्रतिस्पर्धा का पूरा परिदृश्य बदल चुका है। इसलिए किसी भी नए नीति संशोधन में इन संरचनात्मक बदलावों को ध्यान में रखना होगा, साथ ही उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करनी होगी।"
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार मंत्रालय द्वारा तैयार की जा रही आंतरिक रिपोर्ट ही आगे की नीतिगत चर्चा का आधार बनेगी।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, "सरकार चाहती है कि किसी भी संशोधन का आधार ठोस तथ्यों और मजबूत कानूनी प्रक्रिया पर हो। इसलिए सभी हितधारकों के सुझावों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जा रहा है, उसके बाद ही अंतिम ढांचा तैयार किया जाएगा।"
पृष्ठभूमि
टेलीविजन विज्ञापनों की समय-सीमा को लेकर विवाद की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब ट्राई (TRAI) ने टीवी चैनलों पर एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट तक ही विज्ञापन दिखाने की सीमा तय की थी। TRAI का तर्क था कि यह कदम दर्शकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
ब्रॉडकास्टर्स ने इस नियम को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि विज्ञापन स्लॉट पूरी तरह व्यावसायिक निर्णय का विषय है और नियामक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह फैसला लिया है।
इस साल की शुरुआत में यह मामला फिर चर्चा में आया, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने TRAI के विज्ञापन सीमा तय करने के अधिकार को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि यह नियम व्यापक जनहित में है।
अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ताजा समीक्षा यह तय करेगी कि भारत के बदलते मीडिया और विज्ञापन इकोसिस्टम को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था में किस तरह का बदलाव किया जाए।
यदि मौजूदा नियमों में थोड़ी भी ढील दी जाती है, तो यह कई वर्षों में टीवी विज्ञापन अवधि से जुड़ा पहला बड़ा नीतिगत बदलाव होगा। इससे विज्ञापन बाजार की धीमी रफ्तार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ब्रॉडकास्टर्स को अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने में मदद मिल सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि AI का इस्तेमाल खबरों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा पत्रकार और संपादक की समझ का होना चाहिए।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पत्रकारिता के लिए एक बेहतरीन टूल है, लेकिन इसे कभी भी संपादक नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI का इस्तेमाल खबरों को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा पत्रकार और संपादक की समझ का होना चाहिए।
समाचार4मीडिया के 'मीडिया संवाद 2026' कार्यक्रम में 'मीडिया: कल, आज और कल' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए सुमित अवस्थी ने कहा कि '40 अंडर 40' जैसी पहल उन युवा पत्रकारों को पहचान देने का काम कर रही है, जो अपने काम के दम पर अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जूरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि देशभर से आए प्रतिभाशाली पत्रकारों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन किया जाए।
उन्होंने कहा कि वह उस पीढ़ी से हैं, जिसने पत्रकारिता में कई बड़े बदलाव देखे हैं। एक समय था जब दूरदर्शन और आकाशवाणी के समाचार वाचकों को देखकर लोग पत्रकार बनने का सपना देखते थे। बाद में उन्हें उन्हीं लोगों के साथ काम करने का अवसर भी मिला।
सुमित अवस्थी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को कमतर आंकना सही नहीं है। अगर युवाओं को देश, संविधान या राजनीति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो इसके लिए केवल उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता। यह जिम्मेदारी वरिष्ठ पीढ़ी की भी है कि वह उन्हें सही दिशा दिखाए और बेहतर तरीके से तैयार करे।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी वाई-फाई, सोशल मीडिया और ओटीटी के दौर में बड़ी हुई है। इसलिए उनकी सोच और दुनिया को देखने का नजरिया पहले से अलग है। ऐसे में नई पीढ़ी को समझने की जरूरत है, न कि उसकी आलोचना करने की।
पत्रकारिता में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मीडिया युवा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करता रहा, लेकिन इस दौरान अपने पुराने और भरोसेमंद दर्शकों को भी खो दिया। आज का युवा वहां है, जहां उसकी पसंद का कंटेंट उपलब्ध है, इसलिए मीडिया को भी समय के साथ खुद को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ ही न्यूज चैनल होते थे और उनकी टीआरपी 60 प्रतिशत तक पहुंच जाती थी। आज चैनलों की संख्या बढ़ गई है और प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। ऐसे में मीडिया के सामने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए सुमित अवस्थी ने कहा कि आज यह दुनिया में विचारों को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे समय में संवाद की परंपरा को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यहां हर विचार को सामने रखने की आजादी है और यही लोकतंत्र की असली ताकत भी है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने AI के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता और उम्मीद, दोनों जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि AI कई काम आसान कर सकता है और पत्रकारों के लिए एक उपयोगी टूल है, लेकिन उसे संपादक की भूमिका नहीं निभानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर AI किसी नेता की फर्जी बाइट बना दे, तो असली पत्रकार वही होगा जो सवाल पूछे और तथ्यों की जांच करे। इसलिए पत्रकारिता में तकनीक का इस्तेमाल जरूर होना चाहिए, लेकिन संपादकीय निर्णय हमेशा इंसान के हाथ में ही रहने चाहिए।
यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि पत्रकार समाज और देश के हित में काम करते हैं। वे सम्मान या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि पत्रकार समाज और देश के हित में काम करते हैं। वे सम्मान या पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हर परिस्थिति में डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकार युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का काम करते हैं।
ब्रजेश पाठक मंगलवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित समाचार4मीडिया के '40 अंडर 40' सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित 40 वर्ष से कम आयु के युवा पत्रकारों को पत्रकारिता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस वर्ष भी प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों को यह सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने सभी विजेता पत्रकारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर भी मौजूद रहे।
अपने संबोधन में ब्रजेश पाठक ने युवा पत्रकारों को पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ हैं और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। मीडिया का दायित्व निष्पक्ष और तथ्यात्मक जानकारी लोगों तक पहुंचाना है और पत्रकार इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं।
समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति और विभिन्न रोजगार योजनाओं के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश, रोजगार और विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और राज्य तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम से पहले पूरे दिन 'मीडिया संवाद 2026' का आयोजन भी किया गया। 'मीडिया: कल, आज और कल' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और मीडिया विशेषज्ञों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मीडिया के भविष्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नई तकनीकों और डिजिटल दौर में पत्रकारिता की चुनौतियों एवं अवसरों पर भी विचार साझा किए गए।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि '40 अंडर 40' सम्मान का उद्देश्य देशभर के उन युवा पत्रकारों को प्रोत्साहित करना है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और उत्कृष्ट पत्रकारिता के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों से पत्रकारों का चयन उनके कार्य, उपलब्धियों और पेशेवर योगदान के आधार पर किया गया।
कार्यक्रम में मीडिया जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने युवा पत्रकारों से निष्पक्ष, जिम्मेदार और जनहित की पत्रकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया और कहा कि बदलते तकनीकी दौर में भी पत्रकारिता की विश्वसनीयता और मूल्यों को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इससे पहले वह ब्लूमबर्गक्विंट (BloombergQuint) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘एनडीटीवी इंटरनेशनल’ (NDTV International) ने विशाल श्रीवास्तव को अपना नया बिजनेस हेड नियुक्त किया है। इससे पहले वह ब्लूमबर्गक्विंट (BloombergQuint) में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।
ब्लूमबर्गक्विंट से पहले विशाल श्रीवास्तव CNBC TV18 में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट एवं हेड ऑफ ग्लोबल बिजनेस की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह हिंदुस्तान टाइम्स के साथ भी काम कर चुके हैं।
विशाल श्रीवास्तव के पास ब्रॉडकास्ट और प्रिंट मीडिया से जुड़े ब्रैंड्स के साथ काम करने का 21 वर्षों का अनुभव है।
सरकार और निजी निवेशकों के सहयोग से Electronics Development Fund (EDF) ने अब तक 128 स्टार्टअप्स और कंपनियों में 1,335.77 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया है
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। सरकार और निजी निवेशकों के सहयोग से Electronics Development Fund (EDF) ने अब तक 128 स्टार्टअप्स और कंपनियों में 1,335.77 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के क्षेत्र में नवाचार (इनोवेशन) को बड़ा बढ़ावा मिला है।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी।
आठ वेंचर फंड्स के जरिए स्टार्टअप्स तक पहुंचा निवेश
सरकार समर्थित Electronics Development Fund (EDF) ने 257.77 करोड़ रुपये का निवेश आठ पेशेवर तरीके से संचालित वेंचर कैपिटल फंड्स में किया है। इन्हें 'डॉटर फंड्स' (Daughter Funds) कहा जाता है।
इन डॉटर फंड्स ने आगे बढ़कर 128 स्टार्टअप्स और कंपनियों में कुल 1,335.77 करोड़ रुपये का निवेश किया है। ये कंपनियां स्वदेशी तकनीक, नए उत्पाद और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विकसित करने का काम कर रही हैं।
स्टार्टअप्स में सीधे निवेश नहीं करता EDF
EDF की खास बात यह है कि यह सीधे किसी स्टार्टअप में निवेश नहीं करता। यह 'फंड ऑफ फंड्स' (Fund of Funds) मॉडल पर काम करता है। यानी यह SEBI में पंजीकृत वेंचर कैपिटल फंड्स को पूंजी उपलब्ध कराता है। इसके बाद ये फंड्स इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे संभावनाशील स्टार्टअप्स की पहचान कर उनमें निवेश करते हैं।
इस मॉडल का उद्देश्य सरकारी सहयोग और निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता को साथ लाकर देश में एक मजबूत और टिकाऊ इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार करना है।
किन आधारों पर चुने जाते हैं स्टार्टअप्स?
निवेश पाने वाले स्टार्टअप्स का चयन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इनमें नवाचार की क्षमता, स्वदेशी तकनीक का विकास, बौद्धिक संपदा (आईपी) तैयार करना, संस्थापकों की तकनीकी विशेषज्ञता और कारोबार को बड़े स्तर तक ले जाने की क्षमता शामिल है।
बेंगलुरु सबसे आगे
निवेश के मामले में कर्नाटक, खासकर बेंगलुरु, सबसे आगे रहा। यहां 128 में से 89 कंपनियों को 854.54 करोड़ रुपये का निवेश मिला। इसके बाद तेलंगाना का स्थान रहा, जहां हैदराबाद की 7 कंपनियों को 129.97 करोड़ रुपये मिले।
वहीं महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे की 8 कंपनियों को कुल 142.48 करोड़ रुपये का निवेश मिला। इसके अलावा तमिलनाडु, दिल्ली, केरल, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को भी इस योजना का लाभ मिला।
कुल मिलाकर 77 कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) क्षेत्र से हैं, जबकि 51 कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर में काम कर रही हैं।
सरकारी निवेश से कई गुना ज्यादा जुटाई निजी पूंजी
सरकार के मुताबिक, EDF की इस पहल ने निजी निवेश आकर्षित करने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। डॉटर फंड्स ने EDF से मिले निवेश के आधार पर बाजार से करीब पांच गुना ज्यादा पूंजी जुटाई। इन स्टार्टअप्स ने अब तक सामूहिक रूप से करीब 22,553.82 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने 373 बौद्धिक संपदा (IP) परिसंपत्तियां तैयार की हैं या उनका अधिग्रहण किया है।
Canbank Venture Capital Funds कर रहा है संचालन
इस फंड का संचालन Canbank Venture Capital Funds Ltd. कर रही है, जबकि Ministry of Electronics and Information Technology इसमें एंकर निवेशक (Anchor Investor) की भूमिका निभा रहा है।
फंड मैनेजर नियमित रूप से डॉटर फंड्स के प्रदर्शन की समीक्षा करता है। वहीं, डॉटर फंड्स अपने पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों की तकनीकी प्रगति, कारोबारी प्रदर्शन और बाजार में उनकी वृद्धि पर लगातार नजर रखते हैं।
अब निवेश नहीं, निकासी के चरण में EDF
EDF ने फरवरी 2024 में अपना निवेश चरण (Investment Phase) पूरा कर लिया था और अब यह डाइवेस्टमेंट (Divestment) चरण में पहुंच चुका है।
हालांकि, अब तक के आंकड़े बताते हैं कि EDF की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ निवेश की राशि नहीं है। इस पहल ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार किया है, जिससे देश की नई कंपनियों को भविष्य की तकनीकों के विकास, स्वदेशी उत्पाद बनाने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूत आधार मिला है।
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के शानदार नतीजे पेश किए हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी की कमाई में सालाना आधार पर 28% की बढ़ोतरी हुई है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी वजह कंपनी का AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित विज्ञापन कारोबार रहा, जिसने Meta की आय को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
हालांकि, AI और नई तकनीकों पर भारी निवेश के चलते कंपनी के मुनाफे और ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव भी देखने को मिला। 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में Meta का कुल राजस्व (Revenue) बढ़कर 60.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 47.5 अरब डॉलर था।
कंपनी की सबसे बड़ी आय विज्ञापनों से हुई। विज्ञापन से मिलने वाला राजस्व बढ़कर 59.36 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 46.56 अरब डॉलर था। यानी विज्ञापन कारोबार में करीब 27% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे एक बार फिर साफ हो गया कि Meta की कमाई का सबसे बड़ा आधार उसका विज्ञापन कारोबार ही है।
Meta के मुताबिक, AI आधारित तकनीक ने विज्ञापनों को पहले से ज्यादा प्रभावी बनाया है। कंपनी के Family of Apps (Facebook, Instagram, WhatsApp और अन्य ऐप्स) पर दिखाए गए विज्ञापनों (Ad Impressions) की संख्या में 14% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, प्रति विज्ञापन औसत कीमत (Average Price per Ad) भी 12% बढ़ गई।
कंपनी का कहना है कि AI आधारित विज्ञापन ऑप्टिमाइजेशन और बेहतर रिकमेंडेशन सिस्टम की वजह से विज्ञापनदाताओं की मांग बढ़ी है, जिसका सीधा फायदा कारोबार को मिला।
हालांकि, AI और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से बढ़ रहे निवेश का असर कंपनी की कमाई पर भी पड़ा। तिमाही के दौरान Meta की ऑपरेटिंग इनकम घटकर 18.78 अरब डॉलर रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 20.44 अरब डॉलर थी।
इसी तरह कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी घटकर 31% रह गया, जो एक साल पहले 43% था। वहीं, कंपनी का शुद्ध मुनाफा (Net Income) भी 14% घटकर 15.85 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल यह 18.34 अरब डॉलर था।
Meta के कुल खर्च और व्यय (Total Costs & Expenses) में 55% की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 42.03 अरब डॉलर हो गया। इसकी बड़ी वजह कंपनी पर लगा 2.40 अरब डॉलर का कानूनी खर्च (Legal Charge) और मई 2026 में कर्मचारियों की छंटनी (Layoffs) के बाद 1.8 अरब डॉलर का सेवरेंस खर्च रहा।
कंपनी ने मार्केटिंग और बिक्री (Marketing & Sales) पर भी खर्च बढ़ाया। इस मद में खर्च बढ़कर 3.43 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 2.98 अरब डॉलर था। यानी इसमें करीब 15% की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि, यह कंपनी के कुल खर्च का छोटा हिस्सा है, लेकिन इससे संकेत मिलता है कि Meta AI के साथ-साथ अपने प्रोडक्ट्स के विस्तार और ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने पर भी लगातार निवेश कर रही है।
इस तिमाही की सबसे बड़ी खासियत Meta का AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश रहा। कंपनी ने सिर्फ तीन महीनों में 31.08 अरब डॉलर का पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) किया। यह पैसा मुख्य रूप से AI डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी की तकनीकों के विकास पर खर्च किया गया।
इससे साफ है कि Meta फिलहाल अल्पकालिक मुनाफे के बजाय AI को लेकर अपनी लंबी अवधि की रणनीति पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
अगर पूरे साल की पहली छह महीने की अवधि पर नजर डालें तो तस्वीर और बेहतर दिखाई देती है। जनवरी से जून 2026 के दौरान Meta का कुल राजस्व बढ़कर 117.11 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 89.83 अरब डॉलर था।
इसी अवधि में विज्ञापन से आय बढ़कर 114.39 अरब डॉलर पहुंच गई, जो पिछले साल 87.96 अरब डॉलर थी। मार्केटिंग और सेल्स पर खर्च बढ़कर 6.34 अरब डॉलर हो गया, जबकि ऑपरेटिंग इनकम बढ़कर 41.65 अरब डॉलर और शुद्ध मुनाफा 42.62 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह क्रमशः 37.99 अरब डॉलर और 34.98 अरब डॉलर था।
इससे साफ है कि तिमाही स्तर पर दबाव के बावजूद लंबी अवधि में Meta की कमाई लगातार मजबूत बनी हुई है। Meta के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि AI न केवल कंपनी के मौजूदा कारोबार को तेज गति दे रहा है, बल्कि नए व्यावसायिक अवसर भी पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि AI की मदद से Meta का विज्ञापन कारोबार पहले से ज्यादा प्रभावी हुआ है। इससे विज्ञापनों की कीमत और ग्राहकों की भागीदारी (Engagement) दोनों बढ़ी हैं। साथ ही कंपनी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े स्तर पर निवेश जारी रखे हुए है।
Meta के ताजा नतीजे यह साफ संकेत देते हैं कि अब AI सिर्फ विज्ञापन अभियानों (Ad Campaigns) को बेहतर बनाने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल ऐड इंडस्ट्री में कमाई बढ़ाने का सबसे बड़ा आधार बनता जा रहा है।
हालांकि, आने वाले समय में Meta के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह AI पर भारी निवेश जारी रखते हुए अपने शेयरधारकों की लगातार बेहतर मुनाफे की उम्मीदों को भी पूरा कर सके।
भारत में Publicis Groupe के विज्ञापन कारोबार का संचालन करने वाली प्रमुख कानूनी इकाई TLG India Private Limited ने एक बार फिर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में Publicis Groupe के विज्ञापन कारोबार का संचालन करने वाली प्रमुख कानूनी इकाई TLG India Private Limited ने एक बार फिर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने अपनी नई याचिका में CCI के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे विज्ञापन उद्योग में कथित कार्टेलाइजेशन (मिलीभगत) की जांच में औपचारिक रूप से "Opposite Party" (विपक्षी पक्ष) के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया गया था।
यह नई रिट याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है, जब कुछ महीने पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। उस समय अदालत ने TLG India को पहले अपनी शिकायत लेकर CCI के पास जाने की सलाह दी थी। कंपनी का कहना था कि जांच में जिस इकाई की पहचान की गई है, उसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
एक्सचेंज4मीडिया ने मार्च में सबसे पहले यह खबर प्रकाशित की थी कि Publicis Groupe हाई कोर्ट के पहले आदेश को चुनौती देने और आगे की कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले उसकी पहली रिट याचिका का निपटारा हो चुका था।
22 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वराणा कांता शर्मा ने CCI को नोटिस जारी किया। अदालत ने आयोग की उस मांग को स्वीकार कर लिया, जिसमें उसने TLG India को मामले में "Opposite Party" के रूप में शामिल किए जाने के मुद्दे पर निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा था। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब या लिखित पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 तय की।
कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला उस समय शुरू हुआ था, जब CCI ने 9 अगस्त 2024 को विज्ञापन उद्योग में कथित प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों की जांच के लिए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए जांच के आदेश जारी किए थे। इस आदेश में "Publicis Groupe" को भी एक "Opposite Party" के रूप में नामित किया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहले दायर अपनी याचिका में TLG India ने कहा था कि "Publicis Groupe" केवल एक वैश्विक ब्रांड का नाम है, न कि भारत या फ्रांस में कोई कानूनी (Juridical) इकाई। इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कंपनी का यह भी कहना था कि जांच आदेश में केवल ब्रांड का नाम दर्ज है, लेकिन CCI के Director General (DG) लगातार TLG India और उसके कर्मचारियों को समन भेज रहे हैं। यानी व्यवहार में जांच TLG India के खिलाफ की जा रही है, जबकि उसे औपचारिक रूप से जांच में पक्षकार नहीं बनाया गया है।
TLG India की दलील
पिछली सुनवाई के दौरान TLG India की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रितिन राय ने अदालत में कहा था कि Competition Act के तहत किसी जांच का लक्ष्य किसी कानूनी रूप से मान्य "Enterprise" होना चाहिए, न कि केवल किसी ब्रांड का नाम।
उन्होंने अदालत से Publicis Groupe के नाम पर जारी समन रद्द करने, CCI द्वारा इस्तेमाल किए गए रिकॉर्ड देखने की अनुमति देने और TLG India को इस मामले में सही पक्षकार के रूप में शामिल करने की मांग की थी।
CCI का पक्ष
CCI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने इस याचिका का विरोध किया था। उनका कहना था कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई है, क्योंकि TLG India को सीधे कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।
आयोग ने यह भी दलील दी थी कि Competition Act में "Persons" शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिसका दायरा इतना व्यापक है कि उसमें किसी कॉरपोरेट समूह का हिस्सा बनने वाली संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं।
पहले हाई कोर्ट ने क्या कहा था
इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने उस समय TLG India की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभी तक कंपनी को कोई कानूनी नुकसान (Legal Injury) नहीं हुआ है और वह अपनी शिकायत लेकर पहले CCI के पास जा सकती है।
हालांकि, हाई कोर्ट ने कंपनी के सभी कानूनी अधिकार और दलीलें सुरक्षित रखी थीं।
CCI ने नाम बदलने की मांग ठुकराई
हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद TLG India ने 19 मार्च 2026 को CCI के समक्ष Rectification और/या Substitution Application दाखिल की। इसमें कंपनी ने अनुरोध किया कि जांच में "Publicis Groupe" की जगह TLG India Private Limited का नाम दर्ज किया जाए।
लेकिन CCI ने 22 अप्रैल 2026 के अपने आदेश में इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसी फैसले को चुनौती देते हुए कंपनी ने एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
नई याचिका में क्या मांग की गई है
अपनी नई याचिका में TLG India ने अदालत से CCI के 22 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करने की मांग की है। साथ ही कंपनी चाहती है कि CCI अपने 9 अगस्त 2024 के मूल जांच आदेश में संशोधन करते हुए "Publicis Groupe" की जगह TLG India Private Limited को आधिकारिक "Opposite Party" घोषित करे।
कंपनी ने 9 मार्च 2026 को जारी समन और 9 जुलाई 2025 को Director General द्वारा जारी नोटिस को भी रद्द करने की मांग की है।
हाई कोर्ट से अन्य राहत की भी मांग
CCI के आदेशों को चुनौती देने के अलावा TLG India ने अदालत से कई अन्य निर्देश भी मांगे हैं।
कंपनी ने अनुरोध किया है कि जब तक उसे औपचारिक रूप से जांच में "Opposite Party" नहीं बनाया जाता, तब तक Director General उसके परिसरों से जब्त किए गए किसी भी दस्तावेज, डेटा या अन्य सामग्री का इस्तेमाल न करें।
इसके अलावा कंपनी ने मांग की है कि उसे भी जांच में शामिल अन्य "Opposite Parties" के समान सभी प्रक्रियात्मक और कानूनी अधिकार दिए जाएं, ताकि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का पालन हो सके।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत CCI को निर्देश दे कि जांच के दायरे को सभी संबंधित पक्षों के लिए समान रखा जाए और जब तक TLG India को आधिकारिक रूप से "Opposite Party" नहीं बनाया जाता, तब तक उसके या उसके कर्मचारियों के खिलाफ समन, नोटिस या किसी अन्य प्रकार की सख्त कार्रवाई न की जाए।
हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका पर CCI को नोटिस जारी किया, जिसे आयोग की ओर से पेश वकील ने स्वीकार कर लिया।
आयोग के वरिष्ठ वकील ने अदालत से यह कहते हुए समय मांगा कि उन्हें TLG India को "Opposite Party" के रूप में शामिल किए जाने के मुद्दे पर आयोग से निर्देश लेने हैं।
इसके बाद अदालत ने सभी प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब या संक्षिप्त लिखित पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ता के वकील को देने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को होगी।
मामले का महत्व
ताजा घटनाक्रम से साफ है कि अब यह कानूनी विवाद केवल TLG India की पहली रिट याचिका की ग्राह्यता (Maintainability) तक सीमित नहीं रह गया है। अब मुख्य सवाल यह है कि क्या CCI अपनी जांच में सही कानूनी इकाई को "Opposite Party" के रूप में शामिल करने से इनकार कर सकती है। इस मुद्दे पर अदालत का फैसला भारत के विज्ञापन उद्योग में चल रही प्रतिस्पर्धा-विरोधी जांच (Antitrust Probe) की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।