धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने जंतर-मंतर और देशभर की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि यह निर्णय जंतर-मंतर (Jantar Mantar) और देशभर में बनी स्थिति के मद्देनजर लिया गया है, ताकि राष्ट्र विरोधी तत्व इसका लाभ न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे।

अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह नहीं चाहते कि भारत के छात्र कानूनी जटिलताओं में उलझें और उनकी पढ़ाई तथा करियर प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है।

यह घटनाक्रम हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलनों और परीक्षा संबंधी विवादों के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों का असर छात्रों और देश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने अभी तक उनके उत्तराधिकारी या आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार के अगले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है।

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Gameskraft पर ED की बड़ी कार्रवाई, ₹1,906 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Gameskraft Technologies, उसके शेयरधारकों और संबंधित संस्थाओं की करीब ₹1,906 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी, उसके शेयरधारकों और उससे जुड़ी संस्थाओं की करीब 1,906 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर ली हैं। यह कार्रवाई ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स, खासकर RummyCulture, से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।

ED ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत यह अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी किया गया। एजेंसी के अनुसार, जांच इस आरोप पर केंद्रित है कि ऑनलाइन रियल मनी रमी खेलने वाले खिलाड़ियों से कथित धोखाधड़ी के जरिए अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) हासिल की गई और बाद में उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।

किन संपत्तियों को किया गया अटैच?

ED के मुताबिक, जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें बैंक खातों में जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयर, एक फार्महाउस और कई आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां कंपनी के शेयरधारकों, उनके परिवार के सदस्यों, फैमिली ट्रस्ट और अन्य संबंधित संस्थाओं के नाम पर हैं।

तेलंगाना में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

ED ने बताया कि यह जांच तेलंगाना में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। यही मामले PMLA के तहत अनुसूचित अपराध (Scheduled Offences) की श्रेणी में आते हैं।

मई और जून में हुई थी छापेमारी

जांच के दौरान ED ने 7 से 13 मई 2026 और फिर 20-21 जून 2026 को Gameskraft Technologies के दफ्तरों और कंपनी के निदेशकों व प्रमुख कर्मचारियों के घरों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने इस दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए, जिन्हें मामले में अहम सबूत बताया गया है।

3 करोड़ यूजर्स का दावा

ED के अनुसार, Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies ने RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे ब्रांड्स के जरिए ऑनलाइन रियल मनी रमी प्लेटफॉर्म संचालित किए। एजेंसी का दावा है कि इन प्लेटफॉर्म्स के देशभर में करीब 3 करोड़ यूजर्स थे।

ED ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में यूजर्स ऐसे राज्यों से थे, जहां ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है। इनमें तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।

'बॉट्स' इस्तेमाल करने का आरोप

ED का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर खिलाड़ियों के मुकाबले ऑटोमेटेड प्लेयर्स (Bots) उतारे जाते थे, जबकि यूजर्स को दावा किया जाता था कि गेम पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है। एजेंसी का कहना है कि बॉट्स के कारण खिलाड़ियों को नुकसान हुआ, जबकि कंपनियों ने इससे भारी कमाई की।

मार्केटिंग पर खर्च किए ₹1,035 करोड़

ED के मुताबिक, कंपनियों ने नए यूजर्स जोड़ने और पुराने खिलाड़ियों को बनाए रखने के लिए करीब 1,035 करोड़ रुपये मार्केटिंग और प्रमोशनल गतिविधियों पर खर्च किए। इसमें बोनस, रेफरल इंसेंटिव, फ्री टूर्नामेंट एंट्री और अन्य रिवॉर्ड शामिल थे।

एजेंसी का यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में निकासी (Withdrawal) पर 5 से 10 फीसदी तक शुल्क लिया गया और 'Super Booster' जैसे ऑफर्स के जरिए खिलाड़ियों को निकाली जा सकने वाली राशि को 'Game Cash' में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसे बाद में सीधे नहीं निकाला जा सकता था।

ED के अनुसार, जो खिलाड़ी नुकसान के बाद खेलना छोड़ चुके थे, उन्हें दोबारा प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, पुश नोटिफिकेशन, SMS और टेलीमार्केटिंग कॉल्स का सहारा लिया गया।

पहले भी जब्त हो चुकी हैं संपत्तियां

ED ने बताया कि इससे पहले की कार्रवाई में एजेंसी करीब 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां फ्रीज कर चुकी है। इसके अलावा 11 लाख रुपये नकद और करीब 2.3 किलोग्राम सोना, हीरे के आभूषण और बुलियन भी जब्त किए गए थे।

ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक अटैच, फ्रीज और जब्त की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 2,401 करोड़ रुपये हो गया है।

हालांकि, यह ED के आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे।

 

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पॉलीकैब इंडिया में नेहा शिंदे की वापसी : बनीं 'Head- Corporate Communications & PR'

पॉलीकैब इंडिया ने नेहा शिंदे को Head – Corporate Communications & PR नियुक्त किया है। वह कंपनी की प्रतिष्ठा प्रबंधन, रणनीतिक संचार और ब्रांड स्टोरीटेलिंग का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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नेहा शिंदे (Neha Shinde) ने दो वर्ष बाद एक बार फिर पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड (Polycab India Limited) में वापसी की है। कंपनी ने उन्हें हेड–कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस एंड पीआर (Head – Corporate Communications & PR) नियुक्त किया है।

इससे पहले वह एप्सिलॉन कार्बन प्राइवेट लिमिटेड (Epsilon Carbon Pvt. Ltd.) और एप्सिलॉन एडवांस्ड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड (Epsilon Advanced Materials Pvt. Ltd.) के साथ कार्यरत थीं।

अपनी नई भूमिका में नेहा शिंदे (Neha Shinde) कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Corporate Communications), पब्लिक रिलेशंस (Public Relations-PR), प्रतिष्ठा प्रबंधन (Reputation Management), रणनीतिक संचार (Strategic Communications) और ब्रांड स्टोरीटेलिंग (Brand Storytelling) का नेतृत्व करेंगी।

लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों का अनुभव उनके लिए सीख और बदलाव से भरा रहा। उन्होंने कहा कि अब Polycab India में वापसी उनके करियर का नया और महत्वपूर्ण अध्याय है।

नेहा शिंदे को पब्लिक रिलेशंस, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, मीडिया रिलेशंस, ब्रांड स्टोरीटेलिंग और कम्युनिकेशन रणनीति के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है। वह मई 2021 में मैनेजर–पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशन (Manager – PR & Corporate Communication) के रूप में Polycab India से जुड़ी थीं और अप्रैल 2023 में सीनियर मैनेजर (Senior Manager) पद पर पदोन्नत हुई थीं।

अब नई जिम्मेदारी में वह कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस और पीआर रणनीति का नेतृत्व करते हुए व्यवसाय, प्रतिष्ठा और विकास से जुड़ी ब्रांड कथाओं को नई दिशा देंगी।

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शुभम शुक्ला बने Wow! Momo के नए AVP – Brand

वॉव! मोमो (Wow! Momo) ने शुभम शुक्ला को Assistant Vice President – Brand नियुक्त किया है। वह कंपनी की ब्रांड रणनीति, मार्केटिंग अभियानों और ग्राहक जुड़ाव को मजबूत करेंगे।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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वॉव! मोमो (Wow! Momo) ने शुभम शुक्ला (Subham Shukla) को असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट–ब्रांड (Assistant Vice President – Brand) नियुक्त किया है। कंपनी ने उनकी नियुक्ति की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा एक पोस्ट के माध्यम से दी।

कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि वह शुभम शुक्ला का Wow! Momo परिवार में स्वागत करते हुए उत्साहित है। कंपनी को विश्वास है कि उनके नेतृत्व में ब्रांड को और मजबूत बनाया जाएगा, ग्राहकों के लिए बेहतर अनुभव तैयार किए जाएंगे और व्यवसाय के विकास को नई गति मिलेगी।

शुभम शुक्ला (Subham Shukla) ब्रांडिंग (Branding) और मार्केटिंग (Marketing) के क्षेत्र में व्यापक अनुभव लेकर कंपनी से जुड़े हैं। उन्हें ब्रांड रणनीति (Brand Strategy), क्रिएटिव कम्युनिकेशन (Creative Communication), कंज्यूमर एंगेजमेंट (Consumer Engagement) और इंटीग्रेटेड मार्केटिंग (Integrated Marketing) में विशेषज्ञता हासिल है।

कंपनी के अनुसार, अपने विस्तार की मौजूदा यात्रा के दौरान शुभम शुक्ला की विशेषज्ञता ब्रांड की बाजार में मौजूदगी मजबूत करने, प्रभावशाली मार्केटिंग अभियानों को आगे बढ़ाने और हर ग्राहक संपर्क बिंदु (Customer Touchpoint) पर यादगार ब्रांड अनुभव विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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केरल हाईकोर्ट ने टीवी रेटिंग पॉलिसी पर अंतरिम रोक हटाई

केरल हाईकोर्ट ने Television Ratings Policy 2026 के लैंडिंग पेज व्यूअरशिप संबंधी प्रावधान पर लगी अंतरिम रोक हटाते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को नीति लागू करने की अनुमति दे दी।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 (Television Ratings Policy 2026) के उस प्रावधान पर लगी अंतरिम रोक हटा दी, जिसके तहत लैंडिंग पेज (Landing Page) और बूट-अप स्क्रीन (Boot-up Screen) से मिलने वाली व्यूअरशिप को आधिकारिक टीवी रेटिंग्स में शामिल नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) के लिए नीति लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस (Justice Bechu Kurian Thomas) ने ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (All India Digital Cable Federation-AIDCF) और डेन नेटवर्क्स (DEN Networks) की याचिकाओं पर दी गई अंतरिम राहत समाप्त कर दी। दोनों संगठनों ने नई नीति के लैंडिंग पेज संबंधी प्रावधानों को चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान AIDCF ने दलील दी कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India-TRAI) से जुड़े लंबित विवाद जैसा ही है और केंद्र सरकार कार्यपालिका के माध्यम से वही व्यवस्था लागू करना चाहती है, जिसे पहले TRAI लागू नहीं कर सका था।

वहीं केंद्र सरकार ने कहा कि नई नीति टीवी ऑडियंस मापन प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए बनाई गई है तथा लैंडिंग पेज पर दिखाई देने वाला चैनल दर्शक की सक्रिय पसंद नहीं माना जा सकता।

इस विवाद के कारण ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (Broadcast Audience Research Council-BARC India) ने साप्ताहिक टीवी रेटिंग्स का प्रकाशन भी रोक दिया था, जिससे ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों को मीडिया प्लानिंग और विज्ञापन दर तय करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

अब अंतरिम रोक हटने के बाद MIB के नीति लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संभावना है, हालांकि मामले में उच्च अदालत से राहत मिलने की स्थिति में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

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टेलीकॉम फ्रॉड पर AI का वार, 88 लाख से ज्यादा मोबाइल नंबर बंद

दूरसंचार विभाग (DoT) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अपने ASTR प्लेटफॉर्म की मदद से पिछले कुछ समय में 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद कर दिए हैं।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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साइबर ठगी और फर्जी मोबाइल कनेक्शनों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अपने ASTR प्लेटफॉर्म की मदद से पिछले कुछ समय में 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद कर दिए हैं। ये सभी नंबर अनिवार्य दोबारा सत्यापन (Re-verification) में असफल पाए गए थे।

यह जानकारी संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी। उन्होंने बताया कि Artificial Intelligence and Big Data Analytics Tool (ASTR) को खास तौर पर संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान करने के लिए विकसित किया गया है। 15 जुलाई 2026 तक इस सिस्टम की मदद से 88 लाख से ज्यादा मोबाइल नंबर डिस्कनेक्ट किए जा चुके हैं।

'चक्षु' पोर्टल से जनता भी कर रही मदद

सरकार ने आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल पर 'चक्षु' (Chakshu) सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए नागरिक संदिग्ध कॉल, मैसेज या अन्य फर्जी संचार की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

सरकार ने बताया कि हर शिकायत पर अलग-अलग कार्रवाई करने के बजाय इन शिकायतों का AI और डेटा एनालिटिक्स के जरिए विश्लेषण किया जाता है, ताकि बड़े स्तर पर चल रहे फर्जी नेटवर्क की पहचान की जा सके।

15 जुलाई 2026 तक संचार साथी पोर्टल पर मिली 11.18 लाख शिकायतों के आधार पर 50.90 लाख मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं।

साइबर अपराध रोकने के लिए एजेंसियों के बीच बढ़ा तालमेल

सरकार ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय (MHA) की है, जबकि कानून-व्यवस्था राज्यों का विषय है। इसके बावजूद दूरसंचार विभाग तकनीक के जरिए विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

इसी उद्देश्य से विभाग ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा देता है। इसमें गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) भी शामिल है। इसका मकसद टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना और साइबर व वित्तीय धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई करना है।

SEBI से जुड़े संस्थान भी हुए प्लेटफॉर्म से जुड़े

दूरसंचार विभाग के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने नियंत्रण वाले संस्थानों को भी डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जुड़ने की सलाह दी है। विभाग ने इसके लिए कई जागरूकता सत्र आयोजित किए हैं और अब तक SEBI से जुड़े 50 से अधिक संस्थान इस प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन चुके हैं।

सरकार का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार डिजिटल संचार नेटवर्क का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिटिक्स और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए टेलीकॉम धोखाधड़ी पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जा रहा है।

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राघवेंद्र काले को 'Vertiv India' में मिली नई जिम्मेदारी

वर्टिव (Vertiv) ने राघवेंद्र काले (Raghavendra Kale) को भारत के लिए Channel Leader नियुक्त किया है। वह कंपनी की चैनल रणनीति, पार्टनर नेटवर्क और बाजार विस्तार का नेतृत्व करेंगे।

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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वर्टिव (Vertiv) ने राघवेंद्र काले (Raghavendra Kale) को प्रमोट करते हुए भारत (India) के लिए चैनल लीडर (Channel Leader) नियुक्त किया है। वह कंपनी की चैनल रणनीति, पार्टनर नेटवर्क और बाजार विस्तार को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

वर्टिव इंडिया (Vertiv India) में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स (Vice President-Sales) प्रशांत भाटिया (Prashant Bhatia) ने कहा कि राघवेंद्र काले का कंपनी के साथ सफर उनकी प्रतिबद्धता, मजबूत निष्पादन क्षमता और पार्टनर सफलता पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत में कंपनी के विस्तार के साथ चैनल नेटवर्क विकास का प्रमुख आधार बनेगा और काले का नेतृत्व पार्टनर एंगेजमेंट को मजबूत करने के साथ नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

करीब तीन दशकों के अनुभव वाले राघवेंद्र काले (Raghavendra Kale) ने उद्योग में गहरी विशेषज्ञता और मजबूत पार्टनर नेटवर्क विकसित किया है। अपनी नई नियुक्ति से पहले वह वर्टिव (Vertiv) में वेस्ट जोन (West Zone) के डायरेक्टर (Director) के रूप में कार्यरत थे।

नई जिम्मेदारी पर राघवेंद्र काले ने कहा कि भारत में मजबूत और स्केलेबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) की मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वह कंपनी के पार्टनर्स के साथ मिलकर नवाचार को बढ़ावा देने, बाजार में पहुंच का विस्तार करने और ग्राहकों के लिए अधिक मूल्य सृजित करने की दिशा में काम करेंगे।

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टीवी-रेडियो सेक्टर के लिए एक नियम : केंद्र लाएगा नया एकीकृत नियामक ढांचा

केंद्र सरकार ने प्रस्तावित दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 के तहत मौजूदा लाइसेंसधारकों को स्वैच्छिक माइग्रेशन का विकल्प देने की घोषणा की है।

Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2026
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केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित 'दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026' का उद्देश्य भारत के प्रसारण क्षेत्र के लिए एक एकीकृत और सरल नियामक ढांचा तैयार करना है। लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण मंत्री 'अश्विनी वैष्णव' ने बताया कि नए नियम लागू होने के बाद मौजूदा लाइसेंसधारकों को तुरंत नई व्यवस्था अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्हें स्वैच्छिक (Voluntary) आधार पर नई प्राधिकरण व्यवस्था में शामिल होने का विकल्प मिलेगा, जबकि वे चाहें तो अपने मौजूदा लाइसेंस के तहत भी काम जारी रख सकेंगे।

मंत्री ने कहा कि यह मसौदा नियम टेलीविजन और रेडियो प्रसारण से जुड़े विभिन्न नियमों और दिशानिर्देशों को एकीकृत कर एक समान नियामक प्रणाली तैयार करेगा। इसके तहत सैटेलाइट टीवी अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग, डायरेक्ट-टू-होम (DTH), हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS), निजी एफएम रेडियो, सामुदायिक रेडियो और इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) जैसी छह अलग-अलग व्यवस्थाओं को एक ही नियमावली के अंतर्गत लाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे अनुपालन प्रक्रिया आसान होगी और कारोबार करने में सुविधा बढ़ेगी।

सरकार ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य देशभर में, विशेषकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में, टेलीविजन और रेडियो सेवाओं की पहुंच का विस्तार करना है। मंत्री ने मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जैसे जिलों में भी प्रसारण सेवाओं में सुधार की संभावना जताई। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत तैयार किए गए इन नियमों पर सरकार ने 27 जुलाई तक उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि स्वैच्छिक माइग्रेशन की नीति अपनाकर सरकार प्रसारण उद्योग में बिना किसी बड़े व्यवधान के चरणबद्ध तरीके से नए नियामक ढांचे को लागू करना चाहती है।

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'Gems of India' चैलेंज शुरू, MIB ने YouTube व Meta को बनाया पार्टनर

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देशभर के उभरते डिजिटल क्रिएटर्स को मंच देने के लिए 'Gems of India' Challenge का पायलट चरण शुरू कर दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देशभर के उभरते डिजिटल क्रिएटर्स को मंच देने के लिए 'Gems of India' Challenge का पायलट चरण शुरू कर दिया है। इस पहल में YouTube और Meta को इकोसिस्टम पार्टनर बनाया गया है, जो अपने-अपने क्रिएटर नेटवर्क के जरिए इस अभियान को देशभर में पहुंचाने में सहयोग करेंगे।

यह कार्यक्रम Waves OTT प्लेटफॉर्म के MyWAVES सेक्शन के तहत चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं और डिजिटल क्रिएटर्स को अपने जिले की संस्कृति, विरासत, पर्यटन, परंपराओं, इतिहास और खास उपलब्धियों को छोटे वीडियो के जरिए दुनिया के सामने लाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा कि भारत के हर जिले की अपनी एक अलग कहानी है और 'Gems of India' उन कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का एक मंच है। उन्होंने कहा कि यह पहल न सिर्फ युवाओं की रचनात्मकता को बढ़ावा देगी, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को भी सामने लाएगी।

इस प्रतियोगिता के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त के बीच 1 से 3 मिनट की अवधि वाले वीडियो Waves OTT के MyWAVES प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा सकेंगे।

पायलट चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, गोवा और लद्दाख को शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम को प्रसार भारती, माय भारत (My Bharat) और संबंधित राज्य व जिला प्रशासन के सहयोग से लागू किया जाएगा। स्थानीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थान भी इसमें क्रिएटर्स को जोड़ने और कंटेंट तैयार करने में सहयोग करेंगे।

प्रतियोगिता में तीन स्तरों पर पुरस्कार दिए जाएंगे। जिला स्तर पर प्रत्येक जिले के 20 तक विजेताओं को 50-50 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। राज्य स्तर के विजेताओं को 2 लाख रुपये, जबकि राष्ट्रीय स्तर के विजेताओं को 5 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

जिला और राज्य प्रशासन इस कार्यक्रम के संचालन, क्रिएटर्स तक पहुंच बनाने और एंट्री के मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, संस्कृति, विरासत, पर्यटन, मीडिया और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों की जूरी विजेताओं का चयन करेगी।

मंत्रालय का कहना है कि पायलट चरण से मिले अनुभव के आधार पर इस पहल को आगे चलकर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा मजबूत डिजिटल क्रिएटर नेटवर्क तैयार करना है, जो भारत की स्थानीय कहानियों, संस्कृति और विरासत को दुनिया तक पहुंचा सके।

सरकार का मानना है कि यह पहल डिजिटल इंडिया और ऑरेंज इकोनॉमी के विजन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश की क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूत करने और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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ऑस्ट्रेलिया के 'Network Ten' में बड़े बदलाव की तैयारी

ऑस्ट्रेलिया के ब्रॉडकास्टर नेटवर्क टेन (Network Ten) न्यूज प्रोडक्शन और विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) को आउटसोर्स करने पर विचार कर रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2026
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ऑस्ट्रेलिया (Australia) के प्रमुख ब्रॉडकास्टर नेटवर्क टेन (Network Ten) अपने न्यूज प्रोडक्शन (News Production) और विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) को आउटसोर्स करने की संभावना पर विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी घटती दर्शक संख्या और बदलती मीडिया खपत की आदतों के बीच अपने परिचालन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेटवर्क टेन (Network Ten) अपने न्यूज बुलेटिन्स (News Bulletins) के प्रोडक्शन को किसी प्रतिद्वंद्वी टेलीविजन नेटवर्क (Television Network) को सौंपने के लिए बातचीत कर रहा है। इसके अलावा कंपनी अपने विभिन्न चैनलों की विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी भी किसी बाहरी एजेंसी या साझेदार को देने के विकल्प पर विचार कर रही है।

बताया जा रहा है कि युवा दर्शकों के तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) और अन्य ऑनलाइन समाचार स्रोतों की ओर रुख करने के कारण Network Ten की दर्शक संख्या लगातार प्रभावित हुई है। इसी बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए कंपनी अपने संचालन को अधिक प्रभावी और लागत-कुशल बनाने के विकल्प तलाश रही है।

हालांकि, प्रस्तावित बदलावों ने कंपनी के न्यूज, करंट अफेयर्स (Current Affairs) और एडवरटाइजिंग सेल्स (Advertising Sales) विभागों में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि आउटसोर्सिंग योजना लागू होती है तो इसका असर इन विभागों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की भूमिकाओं पर पड़ सकता है।

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शैव्य गुप्ता बने 'Procol' के नए CMO, संभालेंगे ग्लोबल मार्केटिंग

एजेंटिक एआई (Agentic AI) आधारित प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म प्रोकोल (Procol) ने शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) को Chief Marketing Officer (CMO) नियुक्त किया है।

Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2026
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एजेंटिक एआई (Agentic AI) आधारित प्रोक्योरमेंट और फाइनेंस प्लेटफॉर्म प्रोकोल (Procol) ने शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की वैश्विक मार्केटिंग, ब्रांड और कम्युनिकेशंस रणनीति का नेतृत्व करेंगे। साथ ही अमेरिका (United States) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी की मौजूदगी मजबूत करने पर भी उनका विशेष फोकस रहेगा।

शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) कंपनी की मार्केट पोजिशनिंग (Market Positioning) को मजबूत करने, प्रोक्योरमेंट टेक्नोलॉजी (Procurement Technology) क्षेत्र में Procol की नेतृत्वकारी पहचान स्थापित करने और वैश्विक विस्तार की रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अपनी नियुक्ति पर शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) ने कहा कि Procol ने Agentic AI प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोक्योरमेंट के काम करने के तरीके को नए सिरे से परिभाषित किया है और उनका लक्ष्य कंपनी की बाजार में मौजूदगी को मजबूत करना, एंटरप्राइज लीडर्स के साथ गहरा जुड़ाव बनाना और भारत (India) तथा वैश्विक बाजारों में AI-संचालित प्रोक्योरमेंट को लेकर Procol की नेतृत्वकारी भूमिका को स्थापित करना है।

नई जिम्मेदारी के तहत शैव्य गुप्ता (Shaivya Gupta) ग्राहक जुड़ाव (Customer Engagement) को मजबूत करने, ब्रांड और डिमांड जनरेशन (Demand Generation) अभियानों का विस्तार करने तथा प्रमुख एंटरप्राइज बाजारों में Procol की उपस्थिति बढ़ाने पर काम करेंगे। कंपनी का मानना है कि उनकी रणनीतिक नेतृत्व क्षमता उसके दीर्घकालिक वैश्विक विकास लक्ष्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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