एनडीटीवी (NDTV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर–आउटरीच के पद पर कार्यरत मोहित रॉय शर्मा का आज जन्मदिन है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टेलीविजन पत्रकारिता की दुनिया में अक्सर चर्चा एंकरों, संपादकों और बड़ी खबरों की होती है, लेकिन कई महत्वपूर्ण काम कैमरे के पीछे भी होते हैं। सही लोगों को जोड़ना, संस्थानों और स्टेकहोल्डर्स का विश्वास जीतना तथा किसी संपादकीय विचार को एक प्रभावशाली मंच में बदलना ऐसे ही कार्यों में शामिल हैं। इसी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मोहित रॉय शर्मा का आज जन्मदिन है।
वर्तमान में एनडीटीवी (NDTV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर–आउटरीच के पद पर कार्यरत मोहित रॉय शर्मा का करियर लगभग तीन दशक लंबा रहा है। इस दौरान उन्होंने पब्लिक रिलेशंस, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी पेशेवर यात्रा का सबसे मजबूत पक्ष संपादकीय उद्देश्यों को उन लोगों और संस्थानों से जोड़ना रहा है, जो उन्हें आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।
मोहित रॉय शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1998 में इंटीग्रल पीआर सर्विसेज से की थी। यहां उन्होंने क्लाइंट सर्विसिंग और मीडिया रिलेशंस की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उनके पोर्टफोलियो में कोका-कोला, बकार्डी-मार्टिनी, जनरल मोटर्स और टेट्रा पैक जैसे प्रमुख ब्रैंड शामिल रहे। शुरुआती वर्षों में उन्होंने कारोबारी उद्देश्यों को विश्वसनीय सार्वजनिक संदेशों में बदलने की कला सीखी, जो आगे चलकर न्यूज मीडिया में उनके काम की महत्वपूर्ण ताकत बनी।
उनके करियर का सबसे लंबा अध्याय इंडिया टुडे समूह के साथ जुड़ा रहा, जहां उन्होंने दो कार्यकालों में करीब 15 वर्ष बिताए। समूह में एडिटर–आउटरीच और बाद में सीनियर एडिटर के रूप में उन्होंने संपादकीय, कम्युनिकेशन और रिलेशंस निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान वह एजेंडा आजतक, साहित्य आजतक, सलाम क्रिकेट, इंडिया टुडे कॉन्क्लेव और इंडिया टुडे @ दावोस जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों से जुड़े रहे।
ये मंच केवल टेलीविजन कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने न्यूज ब्रैंड्स को दर्शकों से सीधे जोड़ने और राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा कारोबारी जगत के प्रमुख चेहरों को एक मंच पर लाने का काम किया। इन आयोजनों में मोहित रॉय शर्मा की भूमिका सही प्रतिभागियों को जोड़ने और हर आमंत्रण के पीछे भरोसे को मजबूत बनाने की रही।
वर्ष 2013 में उन्होंने अपने करियर में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कुछ समय के लिए काम से विराम लिया और शिक्षा की ओर लौटे। उन्होंने कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ विनिपेग से पब्लिक रिलेशंस, मार्केटिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई की। अपने क्षेत्र में स्थापित पेशेवर होने के बावजूद दोबारा पढ़ाई करने का यह फैसला उनके सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
वर्ष 2019 में उन्होंने BARC इंडिया में वाइस प्रेजिडेंट के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली। यहां उन्होंने भारत के टेलीविजन मेजरमेंट इकोसिस्टम के केंद्र में रहकर ब्रॉडकास्टर्स और उद्योग जगत के वरिष्ठ स्टेकहोल्डर्स के साथ काम किया। इसके बाद वे वेव ग्रुप में ग्रुप वाइस प्रेजिडेंट–कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस बने, जहां उन्हें विविध कारोबारी वातावरण में संस्थागत प्रतिष्ठा और हितधारक प्रबंधन का अनुभव मिला।
साल 2021 में मोहित रॉय शर्मा ABP नेटवर्क से एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में जुड़े और 2024 में उन्हें सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर बनाया गया। इस दौरान उन्होंने कम्युनिकेशन और आउटरीच का नेतृत्व किया तथा ‘आइडियाज ऑफ इंडिया’, ‘द सदर्न राइजिंग’ और ‘रूट्स एंड रिदम्स’ जैसे प्रमुख मंचों से जुड़े रहे। इन आयोजनों में उनकी संपादकीय समझ, रणनीतिक संचार क्षमता और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के सफल संचालन की योग्यता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इसके बाद वर्ष 2025 में उन्होंने कुछ समय के लिए इंडिया टीवी में कम्युनिकेशन और आउटरीच प्रमुख के रूप में कार्य किया। जुलाई 2025 में वह NDTV से जुड़े और सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर–आउटरीच की जिम्मेदारी संभाली। ऐसे समय में जब मीडिया संस्थान विस्तार और बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं, आउटरीच की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होती, बल्कि यह तय करती है कि संस्थान विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली लोगों से किस तरह जुड़ता है और अपनी प्रतिष्ठा को कैसे मजबूत बनाए रखता है।
आज अपने जन्मदिन पर मोहित रॉय शर्मा की पेशेवर यात्रा इस बात का उदाहरण है कि मीडिया संस्थानों की मजबूती केवल स्क्रीन पर दिखने वाले चेहरों से नहीं, बल्कि उन लोगों से भी बनती है जो पर्दे के पीछे रहकर संस्थान, विचार और समाज के बीच मजबूत संबंध स्थापित करते हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से मोहित रॉय शर्मा को उनके जन्मदिन की ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल के प्रमोटर कुमार मंगत पाठक ने निजी उधारी के लिए कंपनी के 60 लाख इक्विटी शेयर गिरवी रखे हैं। यह जानकारी कंपनी ने शेयर बाजार को दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल के प्रमोटर कुमार मंगत पाठक ने निजी उधारी के लिए कंपनी के 60 लाख इक्विटी शेयर गिरवी रखे हैं। यह जानकारी कंपनी ने शेयर बाजार को दी है। इन शेयरों पर गिरवी का अधिकार 24 अगस्त 2026 को बनाया गया।
कंपनी ने 27 अगस्त 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह खुलासा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी के नियमों के तहत किया गया है।
अब 3.35 करोड़ से ज्यादा शेयर गिरवी
नए 60 लाख शेयर गिरवी रखने के बाद कुमार मंगत पाठक के कुल गिरवी शेयरों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 35 लाख 75 हजार हो गई है। यह कंपनी की कुल शेयर पूंजी का 12.89 प्रतिशत हिस्सा है। इससे पहले उनके 2 करोड़ 75 लाख 75 हजार शेयर पहले से ही गिरवी रखे हुए थे, जो कंपनी की कुल शेयर पूंजी का 10.58 प्रतिशत थे।
मोतीलाल ओसवाल के पक्ष में रखे गए शेयर
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ये 60 लाख शेयर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के पक्ष में गिरवी रखे गए हैं। इसका उद्देश्य निजी उधारी बताया गया है।
प्रमोटर के पास कितनी हिस्सेदारी है?
कुमार मंगत पाठक के पास कंपनी के कुल 9 करोड़ 18 लाख 83 हजार 774 शेयर हैं। कंपनी में उनकी कुल हिस्सेदारी 35.27 प्रतिशत है। नए गिरवी के बाद उनकी कुल हिस्सेदारी का करीब 36.5 प्रतिशत हिस्सा अब गिरवी रखा जा चुका है। यानी प्रमोटर के पास मौजूद शेयरों का एक बड़ा भाग उधारी के लिए सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
इन आंकड़ों का क्या मतलब है?
शेयर गिरवी रखना अपने आप में किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं होता। कई बार प्रमोटर निजी या कारोबारी जरूरतों के लिए अपने शेयर गिरवी रखकर वित्त जुटाते हैं। हालांकि, निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होता है कि प्रमोटर की कितनी हिस्सेदारी गिरवी रखी गई है, क्योंकि ज्यादा गिरवी शेयर होने पर कंपनी के शेयर से जुड़े वित्तीय जोखिम पर बाजार की नजर बनी रहती है।
पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अपने बारे में फैल रही विभिन्न बातों के बीच ‘जी’ ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने एक वीडियो मैसेज के जरिये अपनी बात रखी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अपने बारे में फैल रही विभिन्न बातों के बीच ‘जी’ ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी बात रखी है। एनसीएलटी (NCLT) में चल रहे मामले, ग्रुप की देनदारियों, कर्ज के भुगतान और अपनी निजी संपत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रुप पर कभी करीब 45,000 करोड़ रुपये की देनदारी थी, जिसमें से लगभग 43,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बारे में सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बातों पर विश्वास करने के बजाय उनकी सत्यता की जांच की जानी चाहिए।
अपने वीडियो संदेश में डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, नमस्कार। पिछले दो दिनों से मुझे, यानी डॉ. सुभाष चंद्रा को भी कुछ लोग इस देश के ऐसे लोगों से जोड़कर देख रहे हैं या दिखा रहे हैं, जिन्होंने अपने देश के वित्तीय तंत्र को किसी न किसी प्रकार से निचोड़ा है। किसी न किसी प्रकार से उनके पैसे लेकर के स्वयं के लिए महल, जहाज, सब कुछ खरीदे हैं।
लेकिन मुझे पता है और मुझे विश्वास है कि जो प्यार, जो शुभेच्छा आप सब लोगों ने मुझे दी है, उसके कारण से हमारे ग्रुप पर जो मुसीबत 24 जनवरी 2019 को आई, एसेट और लायबिलिटी मिसमैच होने के कारण, और उस दिन मैंने अपने मन से, मेरे लोगों के कहने के बावजूद भी, मैंने एक खुला पत्र आप सब लोगों को लिखा, देश के सिस्टम को लिखा, बैंकिंग सिस्टम को भी लिखा और उसमें कहा कि मैंने कुछ गलतियां की हैं।
शायद मैं पहला ही व्यक्ति था, जिसने अपनी गलतियां मानीं। मुझे नहीं लगता, और शायद आखिरी अब तक के इतिहास में मैं ही अकेला व्यक्ति हूं, जिसने अपनी गलतियां मानी हैं। दूसरा कोई कॉरपोरेट वाला व्यक्ति, मैंने तो नहीं देखा कि किसी ने गलती मानी हो।
और मैंने कहा कि भाई, मैं आपका, मैं सिस्टम का पूरा पैसा चुकाऊंगा। मेरे ग्रुप की जितनी उधार लेने वाली संस्थाएं हैं, वो भी चुकाएंगी। और वो किया हम लोगों ने। वो मैंने सभी उधार लेने वाली संस्थाओं को मजबूर करके करवाया। परिवार के भी एसेट्स बेचे, अपने एसेट्स बेचे, कंपनी जी बेच दी थी लगभग। कुछ हमने रखा नहीं। अपने घर तक को गिरवी किया, लेकिन सबका पैसा चुकाया।
बहुत से लोगों को ये अच्छा नहीं लग रहा, क्योंकि एक उदाहरण बन जाएगा कि एस्सेल ग्रुप ने, डॉ. सुभाष चंद्रा और उसके परिवार ने सब कुछ, सबका चुकाया, अपना बेचकर भी चुकाया। उन लोगों को अच्छा नहीं लग रहा, जिन्होंने नहीं चुकाया।
तो तब से ही ये बातें चली आ रही हैं। और ये केवल अभी जो एनसीएलटी में हुआ, उसके बारे में मैं अभी बताऊंगा आपको एक ही मिनट में। वो सच्चाई सही से नहीं बता रहे हैं आप लोगों को। हमने कल एक प्रेस रिलीज जारी की, उसमें कुछ तथ्य सामने रखे हैं। लेकिन मैं सोचता था कि आपसे सीधी बात भी मैं करूं, आपको सीधा बताऊं, जिससे कि आप सबका जो प्रेम मेरे प्रति है, वो बना रहे।
और मुझे विश्वास है, मुझे कोई परेशानी नहीं है कि मेरी जो प्रतिष्ठा है, उसको जो लोग बिगाड़ना चाहते हैं, वो इतनी आसानी से बिगड़ेगी, क्योंकि सच्चाई, दोस्तों, आखिरकार कायम रहती है। भले ही आज के युग में, कलयुग में, दुनिया धन के पीछे, धन के बीच में, धन के एक ढेर में सच्चाई को दबा देती है, प्रयास करती है, लेकिन आखिरकार वो सच्चाई छुप नहीं सकती है।
आखिरकार तो मनुष्य को अपना चेहरा खुद सवेरे शीशे में देखना होता है। मुझे पता होता है कि मैंने क्या गलत किया और क्या सही किया। तो उस दिन लगभग 45,000 करोड़ की देनदारी हमारे पूरे ग्रुप पर थी। उसमें से लगभग 43,000 करोड़ हमने चुकाया है। बाकी जो 2,000 करोड़ कहीं कंपनियों के हैं, जिनके एसेट और लायबिलिटी में गड़बड़ थी, उस वजह से वो रुका है।
ये जो विषय एनसीएलटी में हुआ, तो वो केवल और केवल इसलिए हुआ कि मैंने कुछ लेंडर्स को पर्सनल गारंटी साइन करके दी थी। और मुझे नहीं पता क्यों, पर कुछ लेंडर्स के पूरे पैसे भी चुका दिए गए थे, लेकिन उन्होंने भी एनसीएलटी में अपने क्लेम दाखिल किए। किसी कारण से किए होंगे, होने नहीं चाहिए थे।
बहुत से केस ऐसे हैं। ये जो कुल दावा 22,000 करोड़ रुपये लोग बोलते हैं, वो केवल 3,900 करोड़ के लगभग था। और जब हमारे ग्रुप की कुल देनदारी 45,000 करोड़ की है, उसमें से 43,000 करोड़ दे दिया गया, 2,000 करोड़ बचा, तो बाकी 3,900 करोड़ कहां से आ गया?
चलो, खैर, जो भी है, वो आया भी। इसमें से करीब 2,000 करोड़ ऐसे लोगों के हैं, जिन्होंने कभी पर्सनल गारंटी इनवोक भी नहीं की। उन्होंने भी क्लेम दाखिल किया। जो रेजोल्यूशन प्रोफेशनल कोर्ट ने लगाए थे, उन्होंने सबका क्लेम स्वीकार कर लिया।
और दोस्तों, उसमें से भी 620 करोड़ का क्लेम हमने सेटल किया है। जो उधार लेने वाली संस्थाएं हैं, उन्होंने कुछ 1,100 करोड़ के लगभग अभी भी लेंडर्स के पास ऑफर कर रखे हैं। तो हमारे ग्रुप की एंटिटीज सभी लोग कमिटेड हैं, हर एक का एक-एक पैसा चुकाने में।
मुझे, मेरा ये मानना है और यही बुजुर्गों ने सिखाया है कि जिसका देना है, उसको दिया जाए। हमने बहुत से पैसे लेने भी हैं, कई जगह पर फंसे हुए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के पैसे राज्य सरकार से लेने के लिए पड़े हुए हैं। उसके पीछे लगे हैं हम।
कुछ एक-दो प्रॉपर्टी और हैं, जो बेची जानी हैं। उस वजह से ही आज जी वापस हमने 20 प्रतिशत के लिए एक फैमिली ने अपने पैसे इकट्ठे करके लिया है। जहां तक मेरा निजी प्रश्न है, ये भी एक लांछन लगाया गया कि मेरे पास बहुत ज्यादा वेल्थ थी, जब हमने लोन लिया, लेकिन बाद में हमने कुल 31 करोड़ रुपये की दिखाई। अब ये भी एक मिथ है, जो किसी ने चला के रखा है।
कहीं किसी ने रिकॉर्ड पर लिख दिया, ग्रुप की जितनी मार्केट कैपिटलाइजेशन थी, उसको ले लिया और उसको मेरी निजी संपत्ति के रूप में दिखा दिया। 45,000 करोड़ रुपये नेटवर्थ है डॉ. सुभाष चंद्रा की, ऐसा 2017 में बताया गया। जबकि मैं 2016 में जब राज्यसभा का सदस्य बना, तो उसमें वहां पर डिक्लेरेशन देना होता है और मैंने डिक्लेयर किया। उसमें मेरी नेटवर्थ थी 39 करोड़, 60-70 लाख या कुछ ऐसा।
जब 2016 में मैं 39 करोड़, 60-70 लाख डिक्लेयर कर रहा हूं, तो 2017 में वो 45,000 करोड़ कैसे बन जाएंगे? तो ये सारी चीजें कुछ लोगों को ठीक नहीं लग रही हैं, लेकिन आखिरकार सच्चाई जो है, वो कायम रहेगी। मैं बल्कि आपके माध्यम से बैंकिंग सिस्टम को, आज इस देश के वित्त मंत्री को और बैंकिंग सचिव इत्यादि को भी ये कहना चाहूंगा कि आप किसी स्वतंत्र ऑडिटर को लगाइए। उनको इतना ही सवाल पूछिए कि भाई, इस ग्रुप का जब इन्होंने पहली बार वित्तीय बाजार में डिफॉल्ट किया, उस समय इनकी कितनी उधारी थी और कितना इन्होंने अब तक भुगतान किया।
आज मैं आपसे ठीक हंसकर साधारण रूप से बात कर रहा हूं। एक ऐसे व्यक्ति की तरह से बात नहीं कर रहा, जिसका सब कुछ चला गया हो। जो आखिरी साढ़े छह करोड़ रुपया बचा है मेरे पास, वो भी अब इस प्लान के अनुसार भुगतान करना पड़ेगा। एक मेरा छोटा रेजिडेंशियल मकान है, उसको मैंने आंशिक रूप से किराये पर दिया है, उसकी आय से मैं अपना खर्चा चला रहा हूं। मुझे कोई अफसोस नहीं है, दोस्तों। और फिर कमाऊंगा। पायनियर हूं, अच्छे काम, नए काम करना जानता हूं, आगे भी करूंगा।
अभी तो फिलहाल तो... स्विट्जरलैंड में मेरे एक मित्र हैं, जो निवेश का काम करते हैं। उनके यहां कुछ करने का मैंने एक प्लान किया है। डिटेल मैं दूंगा आपको आने वाले एक-दो हफ्ते में। उनकी इन्वेस्टमेंट भारत में और कहीं पर भी कुछ भी होगी, तो वो देखूंगा, जिससे कि अपने आपको दोबारा स्थापित कर सकूं।
और आवश्यक ये भी है कि कहीं न कहीं परिवार से दो-चार करोड़ रुपया उधार लेकर उसको भी अपने किसी न किसी स्टार्टअप में और में लगाऊंगा, जो आगे बढ़ सकें। आगे वापस अपना जो खोया हुआ अतीत है, एक सफल पायनियर और जिसने नए-नए बिजनेस इस देश में शुरू किए, 8,000 परिवारों को रोजगार दिया, इस देश की इकोनॉमी में योगदान किया।
मुझे ध्यान में आता है कि इन 50-52 साल के मेरे वर्किंग लाइफ में मैंने कम से कम वित्तीय तंत्र को 60-70,000 करोड़ का ब्याज दिया होगा, लेकिन कमाया भी, आगे भी बढ़े। जो व्यक्ति 17 रुपये लेकर निकला, एक समय में इस देश के टॉप-10 सबसे अमीर लोगों में भी नाम आया और आज सब कुछ चला गया, उसका कोई दुख नहीं है।
तो मैं केवल और केवल आपसे यही रिक्वेस्ट करूंगा कि आप किसी के बहकावे में मत आइए। गलत वॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर दुनिया भर की बातें मेरे बारे में जो कही जा रही हैं, उनको वेरिफाई करिए। और मैं आपको अधिकार देता हूं कि आप मुझे... मेरा तो सब कुछ ओपन है। मुझे मेल करिए, आपके प्रश्नों को मुझसे पूछिए, सीधा। मैं आपको जवाब दूंगा।
इसके साथ ही आपने अपना अटेंशन मुझे दिया, मेरी इस वीडियो को, इस स्टेटमेंट को दिया, उसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। आपका प्यार ऐसे ही बना रहे। धन्यवाद। जय हिंद।
डॉ. सुभाष चंद्रा का पूरा वीडियो मैसेज आप यहां देख सकते हैं।
भारत के अगली पीढ़ी के स्टोरीटेलर्स यानी कहानीकारों को तैयार करने के लिए Indian Institute of Creative Technologies (IICT) और Netflix ने एक नई पहल की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत के अगली पीढ़ी के स्टोरीटेलर्स यानी कहानीकारों को तैयार करने के लिए Indian Institute of Creative Technologies (IICT) और Netflix ने एक नई पहल की घोषणा की है। इसके तहत देशभर के 100 छात्रों और कामकाजी प्रोफेशनल्स को स्कॉलरशिप दी जाएगी। इस स्कॉलरशिप के जरिए छह प्रोफेशनल प्रोग्राम में 80% तक की आर्थिक सहायता मिलेगी।
इस पहल के तहत कुल छह प्रोग्राम शामिल किए गए हैं। इनमें दो एक साल के डिप्लोमा प्रोग्राम और चार छह महीने के सर्टिफिकेट प्रोग्राम हैं।
इन छह प्रोग्राम में मिलेगी स्कॉलरशिप
स्कॉलरशिप के तहत Interactive Comics & Sequential Arts और Visual Effects Mastery में डिप्लोमा प्रोग्राम शामिल हैं। वहीं, छह महीने के सर्टिफिकेट प्रोग्राम में Virtual Art Department Content Creation, Media Tech Workflow, Art of Character Animation और E-Sports & Gaming Management शामिल हैं। यह स्कॉलरशिप पूरे भारत के छात्रों के साथ-साथ कामकाजी प्रोफेशनल्स के लिए भी उपलब्ध होगी।
पीएम मोदी और नेटफ्लिक्स के CEO की मुलाकात के बाद हुई घोषणा
इस स्कॉलरशिप पहल की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस के बीच 5 अगस्त 2026 को हुई मुलाकात के बाद की गई है।
उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत की कहानी कहने की परंपरा काफी समृद्ध है और देश में क्रिएटिव टैलेंट की भी कोई कमी नहीं है। इस प्रतिभा का इस्तेमाल भारत को कंटेंट क्रिएशन के ग्लोबल हब के रूप में मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
इसी सोच के तहत Netflix India Storytelling Initiative की शुरुआत की गई थी। इसका मकसद भारत की क्रिएटिव टैलेंट पाइपलाइन में निवेश करना और अगली पीढ़ी के कहानीकारों को इंडस्ट्री के हिसाब से जरूरी स्किल्स उपलब्ध कराना है।
यह पहल Animation, Visual Effects, Gaming and Comics (AVGC) इकोसिस्टम पर केंद्रित है, जिसे भारत की Orange Economy का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
Netflix के इनपुट से तैयार हुआ पाठ्यक्रम
IICT के Visual Effects Mastery और Media Tech Workflow प्रोग्राम का पाठ्यक्रम मौजूदा इंडस्ट्री वर्कफ्लो और ग्लोबल मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें Netflix की ओर से भी जरूरी इनपुट दिए गए हैं।
इसका मकसद छात्रों को सिर्फ किताबी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें उस तरह की प्रोफेशनल स्किल्स देना है, जिनकी जरूरत आज की क्रिएटिव इंडस्ट्री में है।
भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी बड़े बदलाव के दौर में: चंचल कुमार
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव और IICT बोर्ड के चेयरमैन चंचल कुमार ने कहा कि भारत की क्रिएटिव इकोनॉमी इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। टेक्नोलॉजी के कारण कहानियां बनाने का तरीका तेजी से बदल रहा है और ऐसे में नई पीढ़ी के टैलेंट को तैयार करने वाले संस्थानों को भी इसके साथ बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि IICT की परिकल्पना भारत के बड़े क्रिएटिव टैलेंट पूल और तेजी से बदलती ग्लोबल AVGC-XR इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच एक पुल के रूप में की गई है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर पर काम करने वाले प्रमुख संस्थानों के साथ साझेदारी इस पुल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसी साझेदारियों से इंडस्ट्री का अनुभव सीधे क्लासरूम तक पहुंचता है और भारत की प्रतिभाओं को भविष्य की क्रिएटिव वर्कफोर्स के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।
स्किल्स को इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक रखने पर जोर
IICT के CEO डॉ. विश्वास देवस्कर ने कहा कि IICT जैसे संस्थान का उद्देश्य सिर्फ छात्रों को स्किल्स देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ये स्किल्स इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के साथ प्रासंगिक बनी रहें।
उन्होंने कहा कि Netflix के साथ यह सहयोग इंडस्ट्री के अनुभव को सीधे IICT के अकादमिक ढांचे में लाने में मदद करेगा। इसमें पाठ्यक्रम तैयार करने से लेकर प्रोफेशनल वर्कफ्लो और छात्रों से अपेक्षित मानकों तक कई पहलू शामिल हैं। उनके मुताबिक, शिक्षा के साथ सीधे इंडस्ट्री इनपुट और आर्थिक सहायता को जोड़कर भारत की बढ़ती क्रिएटिव इकोनॉमी के लिए एक मजबूत टैलेंट पाइपलाइन तैयार करने का लक्ष्य है।
AVGC-XR सेक्टर के लिए तैयार होगी नई वर्कफोर्स
FICCI AVGC-XR Forum के चेयरमैन मुंजाल श्रॉफ ने कहा कि FICCI-IICT-Netflix की यह साझेदारी इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप टैलेंट तैयार करने की दिशा में बदलाव को दिखाती है। इससे भारत के AVGC-XR सेक्टर के लिए भविष्य की जरूरतों के मुताबिक वर्कफोर्स तैयार करने में मदद मिलेगी।
क्या है IICT?
Indian Institute of Creative Technologies (IICT) भारत में Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality (AVGC-XR) सेक्टर के लिए राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्टता केंद्र है। इसे भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार, FICCI और CII के साथ साझेदारी में स्थापित किया है। फिलहाल IICT मुंबई के NFDC Complex, Pedder Road से संचालित हो रहा है। वहीं, इसका स्थायी 10 एकड़ का कैंपस गोरेगांव की Film City में विकसित किया जा रहा है।
स्कॉलरशिप और इन प्रोग्राम से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए IICT की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी ली जा सकती है।
Amagi Media Labs ने बताया है कि Law&Crime ने अपने Court TV चैनल के लाइव ब्रॉडकास्ट और Free Ad-supported Streaming TV (FAST) ऑपरेशन को Amagi CLOUDPORT पर शिफ्ट कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Amagi Media Labs ने बताया है कि Law&Crime ने अपने Court TV चैनल के लाइव ब्रॉडकास्ट और Free Ad-supported Streaming TV (FAST) ऑपरेशन को Amagi CLOUDPORT पर शिफ्ट कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, इस बदलाव से Court TV के ब्रॉडकास्ट, स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी ऑपरेशन को एक ही क्लाउड प्लेटफॉर्म पर लाने में मदद मिली है।
Law&Crime ने Court TV का अधिग्रहण करने के बाद इसके ऑपरेशन को अपने स्तर पर लाने की प्रक्रिया शुरू की थी। कंपनी के पास इस पूरी व्यवस्था को बिना लाइव प्रोग्रामिंग में किसी रुकावट के बदलने के लिए सिर्फ पांच महीने का समय था। Amagi के क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म ने इस बदलाव को तेजी से पूरा करने में मदद की।
Amagi के अनुसार, पहले Court TV के अलग-अलग ऑपरेशनल सिस्टम और मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भरता थी। CLOUDPORT के जरिए इन कामों को एक ही ऑटोमेटेड क्लाउड प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। इसके अलावा, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव कवरेज के दौरान जरूरी वर्कफ्लो को बेहतर तरीके से संभालने के लिए कस्टम ऑटोमेशन भी तैयार किया गया। अब Court TV के लाइव ऑपरेशन Amagi की AI आधारित मैनेज्ड सर्विस प्लेटफॉर्म Amagi Intella के जरिए मैनेज किए जा रहे हैं।
Court TV हर सप्ताह के दिनों में करीब 10 घंटे का लाइव प्रोग्रामिंग कंटेंट प्रसारित करता है। इस लाइव कंटेंट को बाद में वीकेंड सिंडिकेशन के लिए अपने आप दोबारा तैयार किया जाता है। कंपनी के मुताबिक, इसके लिए अब मैनुअल तरीके से कंटेंट को दोबारा तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती।
नए प्लेटफॉर्म पर चैनल लाइव करने से पहले Amagi ने Court TV की प्लेलिस्ट, मेटाडेटा फीड और डिस्ट्रीब्यूशन एंडपॉइंट्स की पुराने सिस्टम के साथ टेस्टिंग की। आखिरी चरण में कुछ तैयारियों को लेकर चिंता सामने आने पर Amagi ने अतिरिक्त सपोर्ट दिया। कंपनी ने 10 दिनों तक विशेष तकनीकी सहायता दी और पहले सप्ताह के लिए एक ऑनबोर्डिंग विशेषज्ञ को साइट पर भी तैनात किया।
Amagi का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद Court TV को उसके सभी डाउनस्ट्रीम प्लेटफॉर्म पर लाइव सर्विस में किसी रुकावट के बिना नए सिस्टम पर माइग्रेट कर दिया गया।
Law&Crime के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर Debasish Mishra ने कहा कि Court TV को संभालने के लिए कंपनी के पास पांच महीने का समय था और इसमें किसी तरह के डाउनटाइम की गुंजाइश नहीं थी। उनके मुताबिक, Amagi ने जरूरत के हिसाब से अपनी योजना में बदलाव किया और पूरी माइग्रेशन प्रक्रिया के दौरान टीम के साथ मिलकर काम किया। इससे अब Law&Crime को ब्रॉडकास्ट, FAST और स्ट्रीमिंग में अपने विस्तार के साथ ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा स्केलेबल इंफ्रास्ट्रक्चर मिला है।
वहीं, Amagi के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट-ग्लोबल बिजनेस Srinivasan KA ने कहा कि लाइव ऑपरेशन को बिना किसी रुकावट के माइग्रेट करने के लिए काफी सटीक योजना और क्रियान्वयन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि CLOUDPORT पर ब्रॉडकास्ट और FAST को एक साथ लाने और रोजमर्रा के शेड्यूलिंग व प्लेआउट को ऑटोमेट करने से Court TV की टीम को ऑपरेशनल काम के बजाय प्रोग्रामिंग पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिलेगी।
Amagi का ग्लोबल कारोबार
2008 में स्थापित Amagi Media Labs एक क्लाउड आधारित SaaS प्लेटफॉर्म है, जो मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों के लिए ब्रॉडकास्टिंग, स्ट्रीमिंग और कंटेंट मोनेटाइजेशन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराता है। कंपनी का प्लेटफॉर्म मीडिया कंपनियों को पारंपरिक ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश किए बिना केबल, OTT और FAST प्लेटफॉर्म पर लाइव, लीनियर और ऑन-डिमांड कंटेंट लॉन्च, मैनेज, डिस्ट्रीब्यूट और मोनेटाइज करने में मदद करता है।
कंपनी के मुताबिक, Amagi 40 से ज्यादा देशों में 300 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए 9,000 से ज्यादा चैनल डिलीवरी मैनेज करती है।
Law&Crime और Court TV
Law&Crime ट्रू क्राइम और कानूनी मामलों से जुड़ा मल्टी-प्लेटफॉर्म कंटेंट ब्रैंड है, जिसकी स्थापना ABC News के चीफ लीगल एनालिस्ट डैन एब्राम्स ने की थी। Court TV के अधिग्रहण के बाद Law&Crime के प्लेटफॉर्म पर लाइव कोर्टरूम कवरेज, कानूनी विश्लेषण, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग, डॉक्यूमेंट्री और ओरिजिनल प्रोग्रामिंग को शामिल किया गया है।
दोनों ब्रैंड ब्रॉडकास्ट, FAST, स्ट्रीमिंग, डिजिटल और सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी न्याय व्यवस्था से जुड़ा कंटेंट दर्शकों तक पहुंचाते हैं। कंपनी के अनुसार, Law&Crime और Court TV की वैश्विक पहुंच लाखों दर्शकों तक है, जबकि इनके YouTube चैनलों पर 1.2 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।
भारतीय पत्रकारिता के जाने-माने नाम शेखर गुप्ता का आज जन्मदिन है। करीब पांच दशक के उनके पत्रकारिता करियर में रिपोर्टिंग, संपादन और मीडिया संस्थान खड़ा करने के कई अहम पड़ाव रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय पत्रकारिता के जाने-माने नाम शेखर गुप्ता आज 69 साल के हो गए हैं। करीब पांच दशक के उनके पत्रकारिता करियर में रिपोर्टिंग, संपादन और मीडिया संस्थान खड़ा करने के कई अहम पड़ाव रहे हैं। प्रिंट पत्रकारिता से शुरू हुआ उनका सफर टेलीविजन और फिर डिजिटल मीडिया तक पहुंचा। बदलते मीडिया दौर के साथ खुद को ढालते हुए उन्होंने पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बनाई।
शेखर गुप्ता का जन्म 1957 में हुआ। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की और 1977 में द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) के चंडीगढ़ संस्करण में बतौर जूनियर रिपोर्टर अपने करियर की शुरुआत की। महज तीन साल बाद, 23 साल की उम्र में उन्हें पूर्वोत्तर भारत भेजा गया। उस समय यह इलाका जातीय संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा था।
असम में उनकी रिपोर्टिंग, जिसमें नेल्ली नरसंहार भी शामिल था, ने उनके पत्रकारिता के नजरिए को गहराई से प्रभावित किया। इसी दौर की रिपोर्टिंग आगे चलकर उनकी पहली किताब ‘Assam: A Valley Divided’ का आधार बनी, जो 1984 में प्रकाशित हुई।
शुरुआती दौर में ही शेखर गुप्ता ने कठिन और चुनौतीपूर्ण असाइनमेंट करने वाले रिपोर्टर के रूप में पहचान बनाई। राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी विशेष रुचि रही और वह घटनाओं को केवल सरकारी बयानों के आधार पर समझने के बजाय जमीन पर जाकर देखने और समझने पर जोर देते रहे।
दुनिया की बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग: इंडिया टुडे (India Today) में रिपोर्टर और संपादक के तौर पर शेखर गुप्ता ने 20वीं सदी के आखिरी दशकों की कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया। इनमें ऑपरेशन ब्लू स्टार, श्रीलंका के तमिल उत्तर में उग्रवाद, तियानमेन स्क्वायर का छात्र विद्रोह, बर्लिन की दीवार का गिरना, पहला खाड़ी युद्ध और अफगानिस्तान का संघर्ष शामिल रहे।
उन्होंने पाकिस्तान से भी बड़े पैमाने पर रिपोर्टिंग की और भारत में LTTE के प्रशिक्षण शिविरों का पता लगाया। उस दौर में 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल और सोशल मीडिया नहीं थे। ऐसे समय में किसी संघर्ष क्षेत्र तक पहुंचना, प्रत्यक्ष जानकारी जुटाना और भरोसेमंद सूत्र विकसित करना पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी।
द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) में लंबी पारी: संघर्ष और फील्ड रिपोर्टिंग से आगे शेखर गुप्ता ने खुद को एक मजबूत संपादकीय नेतृत्वकर्ता के तौर पर भी स्थापित किया। वह दोबारा द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) से जुड़े और करीब 19 वर्षों तक इसके एडिटर-इन-चीफ रहे। इसके साथ ही उन्होंने 13 वर्षों तक चीफ एग्जिक्यूटिव की जिम्मेदारी भी संभाली।
द इंडियन एक्सप्रेस में उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय मीडिया तेजी से बदल रहा था। टेलीविजन न्यूज का विस्तार हो रहा था, निजी पूंजी का प्रवेश बढ़ रहा था और इंटरनेट पारंपरिक मीडिया के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रहा था। इस दौर में शेखर गुप्ता की पहचान ऐसे संपादक के रूप में बनी, जो रिपोर्टिंग की ताकत और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को खास महत्व देते थे।
‘National Interest’ से बनी अलग पहचान: उनका साप्ताहिक कॉलम ‘National Interest’ भी उनकी पत्रकारिता का अहम हिस्सा रहा। इसमें उन्होंने राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और समाज से जुड़े मुद्दों को एक साथ देखने की कोशिश की। उनके लेखों के चयन को बाद में ‘Anticipating India’ नाम से किताब के रूप में प्रकाशित किया गया। यह कॉलम शेखर गुप्ता की पहचान का एक स्थायी हिस्सा बन गया। इसमें उनका अंदाज विश्लेषणात्मक और स्पष्ट रहा और कई बार उनके विचारों पर असहमति भी देखने को मिली।
‘Walk the Talk’ ने टेलीविजन पर बनाई पहचान: टेलीविजन के दौर में शेखर गुप्ता को एक नई पहचान NDTV 24x7 के कार्यक्रम ‘Walk the Talk’ से मिली। 2003 से 2017 के बीच उन्होंने इस कार्यक्रम में राजनीति, कारोबार, सिनेमा, खेल और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी 600 से अधिक हस्तियों से बातचीत की।
कार्यक्रम का अंदाज भी अपने आप में अलग था। मेहमान के साथ चलते हुए बातचीत करने का यह फॉर्मेट सरल दिखाई देता था, लेकिन इसकी खासियत तैयारी, सवालों के बाद किए जाने वाले फॉलो-अप और मेहमानों से सहज तरीके से बातचीत निकालने में थी। बाद में इन बातचीत का एक संग्रह ‘Walk the Talk: Decoding Politicians’ नाम से प्रकाशित हुआ।
संपादक से मीडिया उद्यमी तक: 2014 में द इंडियन एक्सप्रेस से अलग होने के बाद शेखर गुप्ता कुछ समय के लिए India Today Group से वाइस चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ के तौर पर जुड़े। लेकिन उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कुछ वर्षों बाद आया, जब उन्होंने एक बड़े पारंपरिक न्यूज संस्थान का नेतृत्व करने के बाद डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा।
2017 में द प्रिंट (ThePrint) की शुरुआत के साथ शेखर गुप्ता ने खुद को मीडिया उद्यमी के रूप में भी स्थापित किया। यह वह समय था जब डिजिटल मीडिया तेजी से विस्तार कर रहा था और न्यूज की पहुंच, वीडियो की खपत तथा दर्शकों की पसंद तेजी से बदल रही थी। ThePrint को राजनीति, नीति, शासन और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित किया गया। शेखर गुप्ता ने इस मंच के जरिए डिजिटल दौर में भी पत्रकारिता के मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया।
‘Cut the Clutter’ से डिजिटल दर्शकों तक पहुंचे: ThePrint के साथ शेखर गुप्ता ने खुद भी नए डिजिटल फॉर्मेट अपनाए। उनका नियमित एक्सप्लेनेशन वीडियो शो ‘Cut the Clutter’ डिजिटल दर्शकों के बीच उनकी विश्लेषणात्मक शैली का प्रमुख माध्यम बना। इस कार्यक्रम में नक्शों, ऐतिहासिक संदर्भों, आंकड़ों, रिपोर्टिंग और टिप्पणी के जरिए मौजूदा घटनाओं को समझाने की कोशिश की जाती है। वहीं ‘Off the Cuff’ ने उनकी लंबे इंटरव्यू वाली शैली को डिजिटल दौर में आगे बढ़ाया। आज शेखर गुप्ता ThePrint के Founder, Editor-in-Chief और Chairman हैं। प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया—तीनों दौर में उनकी मौजूदगी उन्हें भारतीय पत्रकारिता के उन चुनिंदा संपादकों में शामिल करती है, जिन्होंने मीडिया के बदलते स्वरूप के साथ खुद को लगातार बदला है।
मिल चुके हैं कई सम्मान: शेखर गुप्ता को पत्रकारिता के क्षेत्र में कई सम्मान मिल चुके हैं। इनमें Inlaks Young Journalist of the Year Award, G.K. Reddy Award for Journalism, Fakhruddin Ali Ahmed Memorial Award for National Integration और वर्ष 2009 में मिला पद्म भूषण शामिल हैं।
वह एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) के प्रेजिडेंट के तौर पर भी दो कार्यकाल, 2018 से 2020 के बीच, अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। करीब पांच दशक तक सार्वजनिक जीवन और पत्रकारिता में सक्रिय रहने वाले किसी भी संपादक की तरह शेखर गुप्ता के विचारों और संपादकीय फैसलों पर प्रशंसा के साथ आलोचना भी हुई है। इसके बावजूद वह सार्वजनिक बहस का लगातार हिस्सा बने रहे हैं।
उनके पूरे करियर में एक चीज लगातार दिखाई देती है-रिपोर्टर का नजरिया। अखबारों का दौर बदला, टेलीविजन आया, डिजिटल प्लेटफॉर्म ने न्यूज के वितरण का तरीका बदल दिया और पत्रकार खुद मीडिया ब्रांड बनने लगे। शेखर गुप्ता ने इन सभी बदलावों के बीच अपने पत्रकारिता के मूल को बनाए रखा।
पढ़ना, सूत्रों से संपर्क बनाए रखना, घटनाओं के पीछे का संदर्भ समझना और खबर को बड़े ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखना उनकी पत्रकारिता की खासियतों में शामिल रहा है। जन्मदिन के मौके पर शेखर गुप्ता का यह सफर सिर्फ उनके पदों या उनके द्वारा बनाए गए संस्थानों की वजह से ही उल्लेखनीय नहीं है, बल्कि उस जिज्ञासा और खुद को लगातार नए रूप में ढालने की क्षमता के लिए भी खास है, जिसने उनके भीतर के रिपोर्टर को आज तक जीवित रखा है।
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket के फूड लाइसेंस को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धतूरे (Datura) के फल और बीजों को इंसानों के खाने के लिए खाद्य उत्पाद के तौर पर लिस्ट किए जाने के बाद की गई है।
विभाग ने मामले की जांच के बाद यह कदम उठाया। अधिकारियों के मुताबिक, धतूरे के फल और बीज जहरीले होते हैं और इनका सेवन लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
ऑनलाइन बिक रहे थे धतूरे के फल और बीज
नियामक आदेश के मुताबिक, जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि तीनों प्लेटफॉर्म पर धतूरे के फल और बीज बिक्री के लिए उपलब्ध थे। इनमें से कुछ पैकेट पर FSSAI के फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर भी दर्ज थे। जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ गोदामों में धतूरे के फल और बीजों से भरे पैकेट भी मिले। इन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बिक्री और वितरण के लिए रखा गया था।
तुरंत लिस्टिंग हटाने का आदेश
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग ने तीनों कंपनियों को धतूरे को इंसानों के खाने के लिए बेचने वाली सभी लिस्टिंग और विज्ञापन तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कंपनियों को धतूरे के फल और बीजों को खाद्य उत्पाद के तौर पर दिखाने, बेचने या वितरित करने पर रोक लगा दी गई है।
विक्रेताओं और सप्लायर्स पर भी कार्रवाई
यह कार्रवाई केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है। विभाग ने इन उत्पादों से जुड़े विक्रेताओं और सप्लायर्स के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को भी सस्पेंड करने का आदेश दिया है। संबंधित राज्य और केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भी इन विक्रेताओं और प्रतिष्ठानों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंपनियों को दिया गया जवाब देने का मौका
जांच के दौरान कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया गया था। आदेश के मुताबिक, Amazon ने कोई जवाब दाखिल नहीं किया, जबकि Swiggy Instamart ने नोटिस के बाद की गई कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
वहीं, BigBasket ने बताया कि उसने धतूरे के फल बेचना बंद कर दिया है। कंपनी ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे उत्पादों की लेबलिंग में साफ तौर पर 'मानव सेवन के लिए नहीं' (Not for human consumption) लिखा जाएगा। हालांकि, खाद्य सुरक्षा विभाग ने कंपनियों की ओर से दिए गए जवाब और स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना।
अगले आदेश तक जारी रहेगा सस्पेंशन
तीनों प्लेटफॉर्म के फूड लाइसेंस का सस्पेंशन अगले आदेश तक लागू रहेगा। कंपनियों को विभाग के निर्देशों का पालन करने की रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसके बाद अलग से सुनवाई और आदेश की प्रक्रिया पूरी होने पर ही सस्पेंड किए गए लाइसेंस को बहाल करने पर विचार किया जाएगा।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
कर्नाटक की इस कार्रवाई से ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य उत्पादों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। खासकर ऐसे मामलों में यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां उत्पाद थर्ड-पार्टी विक्रेताओं के जरिए प्लेटफॉर्म पर बेचे जाते हैं और उनके स्टोरेज या डिलीवरी के लिए प्लेटफॉर्म से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियां उसके निर्देशों का उल्लंघन करती हैं तो Food Safety and Standards Act, 2006 और संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बढ़ते ऑनलाइन ग्रॉसरी बाजार के बीच कार्रवाई
भारत में ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म अब सिर्फ पैकेज्ड फूड ही नहीं, बल्कि कई तरह के खाद्य और घरेलू उत्पाद भी ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। कर्नाटक की यह कार्रवाई दिखाती है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियामक अब डिजिटल मार्केटप्लेस पर मौजूद लिस्टिंग और उनके पीछे काम करने वाली सप्लाई चेन पर भी नजर रख रहे हैं।
टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में करीब दो दशक से सक्रिय सरवेश बागला (Sarvesh Bagla) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने 2006 में टेकमैग्नेट (Techmagnate) की शुरुआत की थी और समय के साथ इसे भारत की जानी-मानी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में शामिल किया।
टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है। बागला के नेतृत्व में एजेंसी को विभिन्न इंडस्ट्री ट्रैकर्स ने भारत की प्रमुख SEO और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में जगह दी है।
बागला की शैक्षणिक पृष्ठभूमि गणित और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट से मास्टर्स ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम्स और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ साइंस इन इंफॉर्मेशन नेटवर्किंग की पढ़ाई की।
उद्यमिता की दुनिया में आने से पहले वह अमेरिका में वेरिजॉन (Verizon) के साथ सॉफ्टवेयर और सिस्टम्स आर्किटेक्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने WFM India की सह-स्थापना की और ब्लॉगर्स व कंटेंट क्रिएटर्स के लिए BlogX भी शुरू किया।
उनके करियर की खास उपलब्धियों में बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) के साथ किया गया काम भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, टेकमैग्नेट की टीम ने कैंपेन शुरू होने के करीब 18 महीनों के भीतर ‘पर्सनल लोन’ जैसे प्रतिस्पर्धी कीवर्ड पर ब्रांड को शीर्ष रैंकिंग तक पहुंचाने में मदद की।
आज टेकमैग्नेट BFSI, हेल्थकेयर, ऑटोमोटिव और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों के लिए डिजिटल मार्केटिंग समाधान उपलब्ध करा रही है। एक सिस्टम आर्किटेक्ट से डिजिटल मार्केटिंग उद्यमी तक बागला का सफर एजेंसी इंडस्ट्री में उनकी अलग पहचान को दर्शाता है।
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इसके अलावा दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने घी उत्पादों की बिक्री करने से रोक दिया गया है।
FSSAI ने रविवार को बताया कि Marche Retail के परिसर में निरीक्षण और उसके बाद की जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े कई मामलों में कमियां पाई गईं।
कई स्तरों पर मिली कमियां
नियामक के मुताबिक, Marche Retail के यहां मिली कमियां सिर्फ किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं थीं। जांच में प्रतिष्ठान के डिजाइन और संचालन से जुड़े नियमों, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर्स की ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने से जुड़े नियमों में भी खामियां सामने आईं।
FSSAI ने इन कमियों को खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़ी गंभीर चूक के तौर पर देखा और इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को 30 दिनों के लिए निलंबित करने की कार्रवाई की।
SDP Industries के घी की बिक्री पर रोक
इसके साथ ही FSSAI ने SDP Industries Pvt Ltd, जो दमन में स्थित है, के घी उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई प्रवर्तन कार्रवाई का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में SDP Industries के मामले में उल्लंघन की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
FSSAI की ताजा कार्रवाई से साफ है कि खाद्य नियामक अब सिर्फ उत्पादों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, व्यक्तिगत स्वच्छता और जरूरी रिकॉर्ड रखने जैसे नियमों के पालन पर भी सख्ती से नजर रख रहा है।
Dream11 अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म Dream11 अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करता नजर आ रहा है। कंपनी ने यूजर्स को बताया है कि वह अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी। हालांकि, प्लेटफॉर्म पर फ्री कंटेस्ट जारी रहेंगे।
Dream11 ने यूजर्स को भेजे एक नोटिफिकेशन में कहा है कि वह नए फोकस के साथ खुद को स्पोर्ट्स फैंस के लिए 'सिंगल डेस्टिनेशन' के तौर पर तैयार कर रहा है। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यूजर्स फ्री कंटेस्ट में हिस्सा लेना जारी रख सकते हैं। इसके साथ ही Dream11 ने बताया कि जिन यूजर्स की एक्टिव सब्सक्रिप्शन फीस है, उसे 72 घंटे के भीतर रिफंड कर दिया जाएगा।
क्या Dream11 बंद हो रहा है?
Dream11 के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या कंपनी अपना पेड गेमिंग बिजनेस पूरी तरह बंद करने जा रही है या फिर प्लेटफॉर्म का नया वर्जन तैयार किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी के नोटिफिकेशन में प्लेटफॉर्म को बंद करने की बात नहीं कही गई है।
फिलहाल कंपनी के संदेश से इतना साफ है कि उसके पुराने मॉडल में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। पेड कंटेस्ट और सब्सक्रिप्शन को पीछे किया जा रहा है, जबकि फ्री कंटेस्ट, स्पोर्ट्स कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
Online Gaming Act के बीच आया बदलाव
Dream11 का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर रेगुलेटरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। Online Gaming Act, 2025 के बाद रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग को लेकर देश में नियम काफी सख्त हुए हैं।
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ रही है। इन मामलों में यह तय होना है कि स्किल और चांस दोनों तरह के पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर लागू प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा या नहीं। ऐसे माहौल में Dream11 का अपने पुराने रियल-मनी मॉडल से फोकस हटाना इंडस्ट्री के लिए अहम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
Dream11 के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि कंपनी अपने पुराने बिजनेस मॉडल को छोड़ रही है, जबकि कुछ का कहना है कि Dream11 अब खुद को सोशल गेमिंग और स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर नए सिरे से पेश कर सकता है।
इस बदलाव का असर पूरे फैंटेसी स्पोर्ट्स सेक्टर पर पड़ने को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर भारत में रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का कारोबार काफी कम होता है, तो खिलाड़ी विदेशी या ऑफशोर गेमिंग सेवाओं की तरफ जा सकते हैं। वहीं, कुछ लोग पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय स्पष्ट रेगुलेशन की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक प्रतिक्रिया में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह Dream11 के पुराने मॉडल के अंत की शुरुआत है। फैंटेसी स्पोर्ट्स में मनोरंजन और मुकाबले के साथ पैसे जीतने का मौका भी होता था, लेकिन रेगुलेटरी बहस के दौरान इसे लेकर जुए से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।
फिलहाल बंद नहीं, लेकिन दिशा जरूर बदली
फिलहाल Dream11 की तरफ से आया संदेश कंपनी के बंद होने के बजाय बिजनेस मॉडल में बदलाव की ओर इशारा करता है। सब्सक्रिप्शन फीस को 72 घंटे के भीतर रिफंड करने और फ्री कंटेस्ट जारी रखने की बात के साथ कंपनी अब स्पोर्ट्स फैंस को जोड़ने, कंटेंट और सोशल गेमिंग पर ज्यादा ध्यान देती नजर आ रही है। यानी Dream11 के अगले दौर में फोकस रियल-मनी दांव के बजाय स्पोर्ट्स फैनडम और एंगेजमेंट पर रहने वाला है।
एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। कविता संग्रह का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग व मार्केटिंग जगत के दिग्गज मौजूद रहे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। उन्होंने अपना पहला कविता संग्रह ‘An Empty Heart Is a Loaded Gun’ लॉन्च किया है।
पुस्तक का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग जगत के प्रमुख लोग मौजूद रहे। यह पुस्तक कविता के जरिए भावनाओं, रिश्तों, पहचान और मानवीय अनुभवों जैसे विषयों को सामने लाती है।
भारत और अमेरिका में एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में काम कर चुके बॉबी पवार ने अपने करियर की शुरुआत Ogilvy India से की थी। इसके बाद उन्होंने DDB Mudra, JWT और Publicis जैसी प्रमुख एजेंसियों में वरिष्ठ क्रिएटिव लीडरशिप भूमिकाएं निभाईं।
बॉबी पवार ने नवंबर 2023 तक हवास (Havas) में चेयरमैन और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने एक स्वतंत्र क्रिएटिव के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की और अब अपना कविता संग्रह लॉन्च किया है।