जी एंटरटेनमेंट ने जारी की BRSR रिपोर्ट, इन छह बड़े मुद्दों को माना अहम

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) जारी कर दी है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 26 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 26 August, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEE) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (BRSR) जारी कर दी है। कंपनी ने यह रिपोर्ट 25 अगस्त 2026 को शेयर बाजारों के सामने दाखिल की। यह रिपोर्ट कंपनी की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट का हिस्सा है। रिपोर्ट के साथ तीसरी पक्ष की संस्था TÜV SÜD South Asia Pvt. Ltd. की स्वतंत्र उचित आश्वासन रिपोर्ट भी दी गई है। कंपनी की ओर से यह दस्तावेज नियामकीय नियमों के तहत दाखिल किया गया है। 

इस रिपोर्ट में कंपनी ने अपने कारोबार, एम्प्लॉयीज, ग्राहकों, मानवाधिकार, सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण, ऊर्जा और पानी की खपत, कार्बन उत्सर्जन, कचरा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, कंटेंट की चोरी रोकने और सामाजिक योजनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी है।

1982 में शुरू हुई कंपनी, 190 से ज्यादा देशों तक पहुंच

रिपोर्ट के मुताबिक जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज की स्थापना साल 1982 में हुई थी। कंपनी का पंजीकृत और कॉरपोरेट कार्यालय मुंबई के लोअर परेल में है। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों पर सूचीबद्ध हैं। कंपनी ने बताया कि उसके कारोबार का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कंटेंट और प्रसारण कारोबार से आता है। इसमें सैटेलाइट टीवी चैनलों और डिजिटल माध्यमों का प्रसारण, दूसरे टीवी चैनलों के लिए विज्ञापन और प्रसारण स्थान की बिक्री, कार्यक्रमों, फिल्मों, संगीत और दूसरे मीडिया अधिकारों की बिक्री तथा फिल्मों का निर्माण और वितरण शामिल है।

31 मार्च 2026 तक कंपनी की भारत में 1 संयंत्र और 14 कार्यालय समेत कुल 15 जगहों पर मौजूदगी थी। विदेशों में 8 कार्यालय थे। कंपनी के मुताबिक उसका कारोबार भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा 190 से ज्यादा देशों तक पहुंचता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंपनी के कुल कारोबार में निर्यात की हिस्सेदारी 8 फीसदी रही।

कंपनी में 3,007 एम्प्लॉयी, महिलाओं की हिस्सेदारी 18.7 फीसदी

31 मार्च 2026 तक ZEE में कुल 3,007 एम्प्लॉयी थे। इनमें:

  • 2,159 स्थायी एम्प्लॉयी
  • 848 गैर-स्थायी एम्प्लॉयी शामिल थे।

कुल एम्प्लॉयीज में 2,446 पुरुष और 561 महिलाएं थीं। इस तरह कंपनी के कुल एम्प्लॉयीज में महिलाओं की हिस्सेदारी 18.7 फीसदी रही। कंपनी के निदेशक मंडल में कुल 7 सदस्य हैं, जिनमें 2 महिलाएं, यानी 28.6 फीसदी महिलाएं हैं। वहीं प्रमुख प्रबंधकीय एम्प्लॉयीज के 3 सदस्यों में कोई महिला नहीं है। कंपनी ने 6 दिव्यांग स्थायी एम्प्लॉयीज की जानकारी भी दी है।

एम्प्लॉयीज को स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा का 100 फीसदी कवरेज

रिपोर्ट के मुताबिक स्थायी और गैर-स्थायी दोनों तरह के एम्प्लॉयीज को स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा का 100 फीसदी कवरेज मिला हुआ है। स्थायी महिला एम्प्लॉयीज के लिए मातृत्व लाभ की कवरेज 100 फीसदी है। स्थायी पुरुष एम्प्लॉयीज के लिए पितृत्व लाभ की कवरेज भी 100 फीसदी बताई गई है।

कंपनी के अनुसार सभी पात्र एम्प्लॉयीज को भविष्य निधि और ग्रेच्युटी का लाभ दिया गया और संबंधित राशि जमा की गई। राष्ट्रीय पेंशन योजना की कवरेज वित्त वर्ष 2025-26 में एम्प्लॉयीज की 9.3 फीसदी रही, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 8 फीसदी थी।

करीब 98.6 फीसदी एम्प्लॉयीज का प्रदर्शन और करियर मूल्यांकन

कंपनी ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक पात्र एम्प्लॉयीज में से 98.6 फीसदी का प्रदर्शन और करियर विकास मूल्यांकन किया गया। पुरुष एम्प्लॉयीज के मामले में यह आंकड़ा 98.9 फीसदी और महिला एम्प्लॉयीज के मामले में 97.4 फीसदी रहा।

मानवाधिकार से जुड़े प्रशिक्षण की बात करें तो कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने 3,007 यानी 100 फीसदी एम्प्लॉयीज को इस तरह की ट्रेनिंग दी।

साइबर सुरक्षा और निजी जानकारी की सुरक्षा को बड़ा जोखिम माना

ZEE ने आंकड़ों की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को अपने छह प्रमुख महत्वपूर्ण कारोबारी मुद्दों में शामिल किया है। कंपनी के मुताबिक उसका Z5 डिजिटल मंच कई भौगोलिक क्षेत्रों में उपलब्ध है। ऐसे में अलग-अलग देशों और क्षेत्रों के निजी जानकारी से जुड़े नियमों का पालन महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में डिजिटल व्यक्तिगत जानकारी संरक्षण कानून और दूसरे क्षेत्रीय गोपनीयता कानूनों से जुड़े संभावित जोखिमों का उल्लेख किया गया है। 

कंपनी ने बताया कि उसने आईएसओ 27701 मानक और यूरोपीय सामान्य डेटा संरक्षण नियमों के आधार पर निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था लागू की है। इसके तहत नियमित रूप से गोपनीयता प्रभाव आकलन, गोपनीयता को ध्यान में रखकर व्यवस्था तैयार करना और किसी भी गोपनीयता संबंधी घटना से निपटने की व्यवस्था की जाती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर भी सावधानी

कंपनी ने बताया कि कार्यालयी कामकाज में जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी जनरेटिव एआई के इस्तेमाल से भी कुछ जोखिम पैदा हो सकते हैं। इनमें गलत जानकारी, पक्षपात, गलत व्याख्या, जानबूझकर गलत इस्तेमाल और कानूनी या नैतिक समस्याएं शामिल हैं।

इसी वजह से एम्प्लॉयीज को एआई उपकरणों के जिम्मेदार और सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया जा रहा है। कंपनी ने बिना अनुमति वाले एआई उपकरणों और वेबसाइटों की पहचान तथा उन्हें रोकने के उपाय भी किए हैं।

साइबर सुरक्षा के लिए आईएसओ प्रमाणन बरकरार

ZEE के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में कंपनी ने ISO/IEC 27001:2022 सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन का नवीनीकरण कराया। कंपनी एम्प्लॉयीज को फर्जी ई-मेल और धोखाधड़ी वाले संदेशों की पहचान करने के लिए समय-समय पर अभ्यास भी कराती है।

रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने सूचना सुरक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई है जिसमें संभावित खतरे की पहचान, सुरक्षा, निगरानी, जवाब और व्यवस्था बहाल करने की प्रक्रिया शामिल है।

कंटेंट की चोरी से कारोबार को नुकसान का खतरा

मीडिया और मनोरंजन कारोबार में फिल्मों, टीवी कार्यक्रमों, संगीत, पटकथाओं और प्रसारण अधिकारों की अहम भूमिका होती है। ZEE ने बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और कंटेंट की चोरी रोकना भी अपने महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया है।

कंपनी के मुताबिक गैरकानूनी तरीके से कंटेंट की नकल और प्रसारण से फिल्मों, डिजिटल कार्यक्रमों, सदस्यता, विज्ञापन और कंटेंट अधिकारों से होने वाली कमाई प्रभावित हो सकती है। इससे निपटने के लिए कंपनी ने डिजिटल अधिकार प्रबंधन प्रणाली और वॉटरमार्किंग तकनीक का इस्तेमाल किया है।

कंपनी के अनुसार उसने प्रसारण और Z5 डिजिटल मंच के लिए कंटेंट चोरी से जुड़ी शिकायतों और गैरकानूनी कंटेंट हटाने के काम के लिए दो सर्विस पार्टनर भी जोड़े हैं। कंपनी ने कंटेंट की चोरी रोकने के लिए क्षेत्र के हिसाब से पहुंच सीमित करने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और चोरी की गई कंटेंट को हटाने के लिए कानूनी कार्रवाई जैसे कदमों की भी जानकारी दी है।

ग्राहकों का अनुभव भी कंपनी की प्राथमिकता

ZEE ने ग्राहक अनुभव और जिम्मेदार कंटेंट को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। कंपनी के मुताबिक अगर दर्शकों को खराब अनुभव मिलता है तो इससे देखने का समय कम हो सकता है, ग्राहक कंपनी से दूर हो सकते हैं और कंपनी की छवि पर भी असर पड़ सकता है। इसके लिए कंपनी दर्शकों की प्रतिक्रिया, सामाजिक माध्यमों पर लोगों की प्रतिक्रिया और दूसरे तरीकों से दर्शकों की पसंद समझने की कोशिश करती है।

कंपनी ने बताया कि टीवी और डिजिटल मंचों पर प्रसारित होने वाली कंटेंट की जांच मानक और व्यवहार संबंधी टीम करती है। संवेदनशील कंटेंट के मामले में कानूनी और नियामकीय पहलुओं की भी जांच की जाती है।

दर्शकों की शिकायतों का जवाब 48 घंटे में देने की व्यवस्था

कंपनी के अनुसार दर्शक अपने सवाल, सुझाव और शिकायतें ई-मेल तथा ऑनलाइन माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं। कंपनी ने बताया कि दर्शकों की प्रतिक्रियाओं का जवाब 48 घंटे के भीतर देने की व्यवस्था है। कंटेंट से जुड़ी शिकायतों के लिए कंपनी की वेबसाइट पर अलग शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंटेंट से जुड़ी शिकायतों समेत अन्य श्रेणी में 4,159 शिकायतें मिलीं। रिपोर्ट के अनुसार साल के अंत में इनमें कोई शिकायत लंबित नहीं थी। वहीं निजी जानकारी, विज्ञापन, साइबर सुरक्षा, जरूरी सेवाओं की आपूर्ति, प्रतिबंधित व्यापार व्यवहार और अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़ी उपभोक्ता शिकायतों की संख्या रिपोर्ट में शून्य बताई गई है।

वित्त वर्ष में कोई आंकड़ा चोरी होने की घटना नहीं

ZEE ने रिपोर्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में आंकड़ों की चोरी या बड़ी जानकारी के उल्लंघन की कोई घटना नहीं हुई। कंपनी ने ग्राहकों की निजी पहचान वाली जानकारी से जुड़े किसी आंकड़ा उल्लंघन का मामला भी रिपोर्ट नहीं किया।

कंपनी ने जलवायु परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना

ZEE ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को अपने छह प्रमुख महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया है। कंपनी के मुताबिक उसने जलवायु परिवर्तन की रणनीति और कार्बन उत्सर्जन कम करने की योजना तैयार की है। कंपनी ने यह काम विज्ञान आधारित लक्ष्य पहल के वैश्विक मानकों के अनुरूप करने की बात कही है। इसके अलावा जलवायु जोखिम का आकलन भी शुरू किया गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने देशभर में अपने संचालन स्थलों पर ऊर्जा जांच कराई। कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी एक जगह पर नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल की संभावना का भी आकलन कर रही है।

कुल कार्बन उत्सर्जन 71,799.71 टन

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन यानी स्कोप-1 उत्सर्जन 6,724.21 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 6,065.1 टन था। वहीं बिजली आदि के इस्तेमाल से जुड़ा स्कोप-2 उत्सर्जन 7,890.79 टन रहा। पिछले वित्त वर्ष में यह 8,340.66 टन था। इस तरह स्कोप-1 और स्कोप-2 को मिलाकर कुल उत्सर्जन 14,615 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रहा।

दूसरी अप्रत्यक्ष गतिविधियों से जुड़ा स्कोप-3 उत्सर्जन 57,184.71 टन रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 55,102.88 टन था। तीनों को मिलाकर कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 71,799.71 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य रहा। इन आंकड़ों की स्वतंत्र जांच TÜV SÜD South Asia Pvt. Ltd. ने की है।

ऊर्जा की खपत बढ़कर 1,39,448.9 गीगाजूल हुई

कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऊर्जा खपत 1,39,448.9 गीगाजूल रही। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 1,36,024.8 गीगाजूल थी। रिपोर्ट में नवीकरणीय स्रोतों से ऊर्जा खपत शून्य बताई गई है।

कंपनी ने ऊर्जा बचाने के लिए ऊर्जा जांच, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का इस्तेमाल और कार्बन उत्सर्जन घटाने की रणनीति तैयार करने जैसे कदमों की जानकारी दी है।

पानी की खपत 1,59,713.9 किलोलीटर

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने कुल 1,59,713.9 किलोलीटर पानी लिया और इस्तेमाल किया।

इसमें:

  • 99,243.6 किलोलीटर भूजल
  • 60,470.3 किलोलीटर तीसरे पक्ष से प्राप्त पानी शामिल था।

वित्त वर्ष 2024-25 में कुल पानी की खपत 1,46,855.2 किलोलीटर थी। कंपनी ने बताया कि उसके चार कार्यालय पानी की कमी वाले क्षेत्रों में आते हैं। इनमें बेंगलुरु शहर के 2, जयपुर शहरी क्षेत्र का 1 और चेन्नई के गिंडी का 1 कार्यालय शामिल है। इन चार स्थानों पर वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 12,756 किलोलीटर पानी की खपत हुई।

कुल कचरा 97.1 टन

कंपनी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 97.1 टन कचरा पैदा हुआ। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 90.6 टन था।

वित्त वर्ष 2025-26 में:

  • प्लास्टिक कचरा – 1.8 टन
  • इलेक्ट्रॉनिक कचरा – 2.43 टन
  • बैटरी कचरा – 6.91 टन
  • अन्य गैर-खतरनाक कचरा – 87.8 टन रहा।

कंपनी ने कुल 66.7 टन कचरे को दोबारा इस्तेमाल या पुनर्चक्रण के लिए भेजा। 30.4 टन कचरे को दूसरे निपटान तरीकों से हटाया गया। कंपनी के अनुसार कचरे को शुरुआत में ही अलग-अलग किया जाता है और इलेक्ट्रॉनिक कचरे, बैटरी तथा दूसरे खतरनाक कचरे को अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं के जरिए संभाला जाता है।

एम्प्लॉयीज की सुरक्षा पर भी रिपोर्ट में जानकारी

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसके 63.6 फीसदी संयंत्रों और कार्यालयों में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा तथा काम करने की परिस्थितियों का आकलन किया गया।

एम्प्लॉयीज के लिए काम के दौरान चोट लगने की दर यानी एलटीआईएफआर 1.5 रही, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 1.1 थी।

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एम्प्लॉयीज के बीच 8 काम से जुड़ी दर्ज चोटों की जानकारी दी गई है।

किसी एम्प्लॉयी की काम के दौरान मौत और गंभीर श्रेणी की काम से जुड़ी चोट के मामले में आंकड़ा शून्य बताया गया है।

कंपनी ने नियमित सुरक्षा जांच, जोखिम आकलन, सुरक्षा प्रशिक्षण और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की जानकारी दी है।

रिश्वत और भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता

ZEE ने कारोबारी नैतिकता को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना है।

कंपनी ने बताया कि रिश्वत और भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी शून्य सहनशीलता की नीति है। एम्प्लॉयीज के लिए आचार संहिता का पालन जरूरी है।

वित्त वर्ष 2025-26 में निदेशकों, प्रमुख प्रबंधकीय एम्प्लॉयीज, एम्प्लॉयीज या कामगारों के खिलाफ रिश्वत या भ्रष्टाचार के मामले में किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई।

नियामक संस्थाओं या अदालतों की ओर से जुर्माना, दंड, समझौता राशि, सजा या अन्य कार्रवाई के मामले में भी रिपोर्ट में कोई राशि या मामला नहीं बताया गया है।

कंपनी के सामाजिक कामों में महिलाओं और कमजोर वर्गों पर जोर

ZEE ने सामाजिक जिम्मेदारी के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने, कला-संस्कृति और राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण, आपदा राहत, ग्रामीण विकास और रोजगार से जुड़े कई कार्यक्रम चलाए। कंपनी ने झारखंड के आकांक्षी जिलों में अत्यधिक गरीबी कम करने के लिए महिलाओं के नेतृत्व वाले परिवारों के लिए भी कार्यक्रम चलाया। इसमें बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, गोड्डा, गुमला, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम शामिल थे।

कंपनी के मुताबिक इन परिवारों को बिना ब्याज के कर्ज, खेती और पशुपालन की जानकारी, स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और सरकारी योजनाओं तक पहुंच दिलाने जैसी सहायता दी गई।

कई सामाजिक योजनाओं से हजारों लोगों को लाभ

रिपोर्ट में कंपनी ने कई सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों का विवरण दिया है।

-  सक्षम योजना के तहत गौतम बुद्ध नगर में 155 लोगों को लाभ मिला। यह योजना कई तरह की दिव्यांगता और दृष्टिबाधित बच्चों तथा युवाओं के लिए थी।

-  मैजिक बस इंडिया फाउंडेशन की आजीविका योजना से 1,841 युवाओं को लाभ मिला।

-  बाल रक्षा भारत की युवा कौशल और रोजगार योजना से 678 युवाओं को लाभ मिला।

-  स्नेहा – बिल्डिंग ब्रिजेज योजना के तहत 18,966 लोगों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

-  ऑस्कर फाउंडेशन की फुटबॉल और जीवन कौशल योजना से 411 बच्चों को लाभ मिला।

-  पब्लिक कंसर्न इंटरनेशनल – उद्यमिता कार्यक्रम के तहत 351 महिला उद्यमियों को सहायता मिली।

-  पब्लिक कंसर्न इंटरनेशनल – सार्वजनिक खरीद कार्यक्रम के तहत 2,380 लोगों को लाभ मिला।

-  वहीं द नज इंस्टीट्यूट – एंड अल्ट्रा पॉवर्टी योजना के तहत झारखंड में 5,400 महिलाओं के नेतृत्व वाले परिवारों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया।

इन योजनाओं में रिपोर्ट के अनुसार लाभार्थियों में 100 फीसदी हिस्सा कमजोर और वंचित वर्गों का था।

छोटे और मध्यम कारोबार से खरीद में बढ़ोतरी

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसके इनपुट की 21 फीसदी खरीद सीधे छोटे और मध्यम कारोबारों या छोटे उत्पादकों से हुई। वित्त वर्ष 2024-25 में यह हिस्सा 8 फीसदी था। भारत के भीतर से सीधे खरीदे गए इनपुट का हिस्सा 98 फीसदी रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 97 फीसदी था।

छह बड़े मुद्दों को कंपनी ने माना अहम

ZEE ने अपनी दोहरी महत्वपूर्णता जांच के आधार पर छह प्रमुख मुद्दों की पहचान की है। ये हैं:

  1. कारोबारी नैतिकता
  2. आंकड़ों की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा
  3. बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और कंटेंट की चोरी रोकना
  4. ग्राहक अनुभव और जिम्मेदार कंटेंट
  5. प्रतिभा को आकर्षित करना और एम्प्लॉयीज को बनाए रखना
  6. जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता

कंपनी ने बताया कि इन मुद्दों की पहचान कारोबार और हितधारकों पर इनके संभावित प्रभाव, जोखिम, अवसर और आर्थिक असर को ध्यान में रखते हुए की गई है।

एम्प्लॉयीज को बनाए रखना भी चुनौती

कंपनी ने एम्प्लॉयीज के नौकरी छोड़ने की दर को भी महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024-25 की स्वैच्छिक एम्प्लॉयी नौकरी छोड़ने की दर 17.5 फीसदी बताई गई है, जबकि कंपनी ने बाजार का औसत 17.2 फीसदी बताया।

कंपनी के मुताबिक मीडिया व एंटरटेनमेंट सेक्टर में प्रतिभाशाली एम्प्लॉयीज की भूमिका काफी अहम है। एम्प्लॉयीज के जाने से नई भर्ती, प्रशिक्षण, काम की गति, परियोजनाओं और पुराने अनुभव का नुकसान हो सकता है। इसी वजह से कंपनी आंतरिक नौकरी के अवसर, करियर विकास, कौशल बढ़ाने, मार्गदर्शन, एम्प्लॉयी कल्याण और कंपनी की बेहतर कार्य संस्कृति जैसे उपायों पर काम कर रही है।

कंपनी के साथ शेयरधारकों और दूसरे हितधारकों की लगातार बातचीत

कंपनी ने शेयरधारकों, निवेशकों, ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, एम्प्लॉयीज, सरकारी और नियामकीय संस्थाओं, समुदायों, कारोबार पार्टनर्स और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रमुख हितधारक बताया है। इनके साथ ई-मेल, मीटिंग, फोन, व्यक्तिगत बातचीत, एम्प्लॉयी मीटिंग, सर्वेक्षण और वेबसाइट समेत कई माध्यमों से संपर्क किया जाता है।

कंपनी के मुताबिक पर्यावरण, सामाजिक और शासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की निगरानी विभिन्न बोर्ड समितियां करती हैं। इनमें लेखा परीक्षा समिति, सामाजिक जिम्मेदारी समिति, नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति, हितधारक संबंध समिति और जोखिम प्रबंधन समिति शामिल हैं। 

TÜV SÜD ने की स्वतंत्र जांच

ZEE की रिपोर्ट के साथ TÜV SÜD South Asia Pvt. Ltd. की स्वतंत्र उचित आश्वासन रिपोर्ट भी दी गई है। TÜV SÜD ने BRSR के 9 मुख्य मानकों से जुड़ी जानकारी की उचित स्तर पर जांच की। जांच के दौरान कंपनी के अलग-अलग कार्यालयों और स्थानों से जुड़े आंकड़ों, प्रक्रियाओं और नियंत्रण व्यवस्था को देखा गया।

TÜV SÜD ने अपने निष्कर्ष में कहा कि किए गए आकलन और उपलब्ध कराए गए प्रमाणों के आधार पर ऐसा कुछ सामने नहीं आया जिससे यह माना जाए कि वित्त वर्ष 2025-26 के 9 मुख्य मानकों से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण स्तर पर रिपोर्टिंग आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नहीं की गई है। कंपनी के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जुड़े आंकड़ों की भी TÜV SÜD ने अलग से उचित स्तर पर जांच की। इसमें स्कोप-1, स्कोप-2 और स्कोप-3 उत्सर्जन शामिल रहे।

ZEE Entertainment की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में कंपनी ने कारोबार के साथ-साथ एम्प्लॉयीज, ग्राहकों, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी दी है। कंपनी ने साइबर सुरक्षा, ग्राहकों की निजी जानकारी की सुरक्षा, कंटेंट की चोरी, एम्प्लॉयीज को बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन को अपने कारोबार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम और अवसर के तौर पर पहचाना है। वहीं एम्प्लॉयीज के लिए बीमा, मानवाधिकार प्रशिक्षण, सामाजिक योजनाओं, कंटेंट सुरक्षा, ऊर्जा जांच, कचरा पुनर्चक्रण और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में दिए गए प्रमुख आंकड़ों की स्वतंत्र जांच TÜV SÜD की ओर से की गई है। कंपनी ने कहा है कि इन प्रयासों का उद्देश्य जिम्मेदार कारोबारी व्यवस्था को मजबूत करना और लंबे समय के लिए टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ना है।

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DRM आधारित टीवी सेवाओं के ऑडिट मैनुअल का मसौदा जारी, TRAI ने 30 अक्टूबर तक मांगे सुझाव

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 10 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है। प्राधिकरण ने इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर, 2026 तय की गई है।

ट्राई ने यह मसौदा 9 अक्टूबर, 2026 को जारी किया। इसका पूरा नाम ‘टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज DRM-बेस्ड डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम्स ऑडिट मैनुअल, 2026’ है। इसका मकसद DRM आधारित सिस्टम के नियमों के पालन की जांच के लिए ऑडिट प्रक्रिया को विस्तार से बताना है।

टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं का सालाना ऑडिट जरूरी

ट्राई के मुताबिक, टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज इंटरकनेक्शन (एड्रेसेबल सिस्टम्स) रेगुलेशंस, 2017 के तहत टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशंस के डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) का सालाना ऑडिट जरूरी है। इसमें नियमों के प्रावधानों के अनुसार कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (CAS), सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), DRM और इनसे जुड़े अन्य सिस्टम शामिल हैं।

इन नियमों की अनुसूची-X (Schedule X) में DRM आधारित सिस्टम के लिए आवश्यक प्रावधान दिए गए हैं। ये प्रावधान मुख्य रूप से इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) आधारित डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं से जुड़े हैं।

पहले जारी हो चुका है डिजिटल सिस्टम के ऑडिट का मैनुअल

ट्राई ने 10 मार्च, 2026 को डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए एक मैनुअल जारी किया था। इसमें नियमों की अनुसूची-III के तहत आने वाले सिस्टम के लिए अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार ऑडिट प्रक्रिया बताई गई थी। इसमें CAS, SMS और सेट-टॉप बॉक्स (STB) आधारित सिस्टम शामिल हैं। हालांकि, DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए भी इसी तरह के विस्तृत मैनुअल की जरूरत महसूस की गई। IPTV ऑपरेटरों, प्रसारकों और ऑडिटरों सहित कई संबंधित पक्षों ने इस जरूरत को उठाया था।

इसी को ध्यान में रखते हुए ट्राई ने अब DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए अलग मैनुअल का मसौदा तैयार किया है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों को अनुसूची-X के प्रावधानों के पालन की जांच करने की प्रक्रिया समझाने में मदद करना है। इसे ऑडिट के दौरान मार्गदर्शन देने वाले दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है।

मसौदे में ऑडिट से जुड़े कई अहम प्रावधान

DRM ऑडिट मैनुअल के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल की गई हैं:

  • नियमों के पालन की जांच: अनुसूची-X के प्रत्येक प्रावधान के अनुसार जांच की प्रक्रिया बताई गई है। इसमें SMS, कंडीशनल एक्सेस और एन्क्रिप्शन, फिंगरप्रिंटिंग तथा सेट-टॉप बॉक्स और सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन से जुड़ी जरूरतें शामिल हैं।
  • ऑडिट का दायरा और दस्तावेज: प्री-सिग्नल/अनुपालन ऑडिट और सालाना सब्सक्रिप्शन ऑडिट के लिए काम का दायरा, जरूरी दस्तावेज और जांच की प्रक्रिया बताई गई है।
  • ऑडिट पूरा करने की समयसीमा: ऑडिट को पूरा करने के लिए तय समयसीमा का प्रावधान किया गया है।
  • जिम्मेदारियां तय: ऑडिट प्रक्रिया के दौरान डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर (DPO), प्रसारक और ऑडिटर की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है।
  • मानक प्रारूप: विक्रेता के घोषणापत्र, ऑडिट फॉर्म और ऑडिट रिपोर्ट के लिए तय प्रारूप शामिल किए गए हैं।

इन प्रावधानों का उद्देश्य DRM आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट को व्यवस्थित करना और संबंधित पक्षों को नियमों के पालन की जांच के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराना है।

30 अक्टूबर तक भेज सकते हैं सुझाव

ट्राई ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से लिखित सुझाव, टिप्पणियां और प्रस्ताव मांगे हैं। सुझावों के साथ उनके पीछे के कारण, औचित्य और संबंधित आंकड़े या सबूत देना भी जरूरी बताया गया है।

हितधारक अपने सुझाव 30 अक्टूबर, 2026 तक ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। इसके लिए advbcs2@trai.gov.in और jtadvbcs-3@trai.gov.in ईमेल पते दिए गए हैं। ट्राई ने सुझाव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने को प्राथमिकता देने की बात कही है।

 

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Sony Pictures Networks India की 31वीं वर्षगांठ: नए ऑफिस, नए विजन और नए शोज का ऐलान

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 09 October, 2026
Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
Sony31Chapter

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है। इस नए अध्याय की नींव तीन बातों पर रखी गई है- नया ऑफिस, नया विजन और नए शोज।

कंपनी ने अपनी वर्षगांठ के संदेश में कहा, “एक नया अध्याय शुरू हो रहा है और हम इससे ज्यादा उत्साहित नहीं हो सकते।”

31 साल के सफर की विरासत

SPNI ने कहा कि तीन दशक से ज्यादा समय से वह भारत के मनोरंजन सफर का हिस्सा रहा है। कंपनी के मुताबिक, उसने यादगार कहानियों, लोगों के पसंदीदा शोज और खेलों के यादगार पलों के जरिए लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया है।

कंपनी की यह बात उसके अब तक के सफर को भी दिखाती है, जिसमें मनोरंजन और खेल, दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दर्शक जहां गए, कंपनी भी उसी दिशा में

SPNI का नया कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए है कि आज दर्शकों के मनोरंजन देखने का तरीका काफी बदल चुका है। दर्शक अब अलग-अलग स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं में मनोरंजन कंटेंट देख रहे हैं।

कंपनी ने कहा कि आज जब दर्शक नए स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं के जरिए मनोरंजन खोज रहे हैं, तो वह भी उनके साथ खुद को बदल रही है। कंपनी ने आगे कहा, “नए विजन, नई शुरुआत और आगे आने वाले नए अवसरों के साथ हम यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि हम मिलकर क्या बना सकते हैं।”

‘Chapter 31’ की तीन बड़ी बातें

SPNI की वर्षगांठ के लिए जारी किए गए क्रिएटिव में Sony Pictures का लोगो और “Happy 31st Anniversary!” लिखा गया है। इसमें ‘Chapter 31’ के तीन मुख्य स्तंभ भी बताए गए हैं।

पहला- नया ऑफिस:  इसे “एक नया घर, एक नई शुरुआत” के तौर पर पेश किया गया है।

दूसरा- नया विजन:  कंपनी ने अपने नए विजन को “कंटेंट-फर्स्ट, प्लेटफॉर्म एग्नॉस्टिक, मल्टी-लिंगुअल एंटरटेनमेंट” बताया है। यानी कंटेंट सबसे पहले होगा, उसे किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा और अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।

तीसरा- नए शोज:  इसके तहत कंपनी ने “नई सोच और यादगार पलों” का वादा किया है।

इस क्रिएटिव के आखिर में उन सभी लोगों का धन्यवाद किया गया है, जिन्होंने SPNI के इस सफर को खास बनाने में योगदान दिया। इसके साथ ही “Here’s to writing the next one together” और “Tell stories beyond the ordinary” जैसे संदेश दिए गए हैं।

एम्प्लॉयीज और दर्शकों को भी धन्यवाद

कंपनी ने अपने लोगों और दर्शकों को भी खास तौर पर धन्यवाद दिया। SPNI ने कहा, “उन सभी लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने पिछले 31 वर्षों में SPNI को आकार देने में मदद की और हमारी कहानी का हिस्सा बने।” 

कंपनी ने अपने संदेश का अंत “Here’s to Chapter 31 and the many possibilities it holds!” के साथ किया।

क्या है ‘Chapter 31’ के पीछे की सोच?

‘Chapter 31’ में इस्तेमाल किए गए तीन शब्द कंपनी की आगे की रणनीति की दिशा को समझने में मदद करते हैं। ‘Content-first’ का मतलब है कि कहानी और कंटेंट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, स्क्रीन या प्लेटफॉर्म बाद में आएगा।

‘Platform agnostic’ का मतलब है कि कहानी को किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा। दर्शक जिस जगह मौजूद हैं, कंटेंट वहां तक पहुंचने की कोशिश करेगा, चाहे वह टेलीविजन हो या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म।

वहीं ‘Multi-lingual’ इस बात को दर्शाता है कि भारत के दर्शक एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं में मनोरंजन की पसंद है और कंपनी कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।

इन तीनों को साथ देखा जाए तो यह संकेत मिलता है कि SPNI खुद को केवल चैनल चलाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे स्टूडियो की तरह आगे बढ़ाना चाहती है, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म और भाषाओं के लिए कंटेंट तैयार करे। मनोरंजन कारोबार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। नया ऑफिस इस बदलाव का एक प्रतीक है, जबकि नए शोज यह साबित करेंगे कि बाजार और दर्शक इस नई दिशा को किस तरह स्वीकार करते हैं।

31 साल का सफर SPNI को एक मजबूत कंटेंट लाइब्रेरी, खेलों से जुड़ा अनुभव और एक स्थापित ब्रैंड देता है। अब ‘Chapter 31’ के जरिए कंपनी की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि आने वाला दशक भी उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण और मजबूत साबित हो।

 

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170 नए टीवी चैनलों को मिली मंजूरी, लेकिन छह साल में बढ़ा सिर्फ एक निजी चैनल

भारत में 31 मार्च 2026 तक कुल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यह संख्या 2019-20 में दर्ज 918 चैनलों से सिर्फ एक ज्यादा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 08 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 08 October, 2026
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इमरान फजल, असिटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत में 31 मार्च 2026 तक कुल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यह संख्या 2019-20 में दर्ज 918 चैनलों से सिर्फ एक ज्यादा है। हालांकि, इस छह साल की अवधि में सरकार ने 170 नए चैनलों को अनुमति दी। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की सांख्यिकी पुस्तिका 2025-26’ में दी गई है।

पुस्तिका में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 919 निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। यह आंकड़ों की श्रृंखला 2004-05 से शुरू होती है। इससे पहले सबसे ज्यादा 918 निजी सैटेलाइट चैनल 2019-20 में दर्ज किए गए थे।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार की ओर से नए चैनलों को लगातार अनुमति दिए जाने के बावजूद कुल चल रहे निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या लगभग एक जैसी बनी हुई है। यानी इस क्षेत्र में लगातार विस्तार के बजाय नए चैनलों के आने और कुछ चैनलों के बाहर होने का सिलसिला ज्यादा दिखाई देता है।

छह साल में चैनलों की संख्या में उतार-चढ़ाव

निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या 2020-21 में घटकर 914 रह गई। इसके बाद 2021-22 में यह और घटकर 898 हो गई। इसके बाद चैनलों की संख्या में धीरे-धीरे सुधार आया। 2022-23 में यह बढ़कर 905, 2023-24 में 912 और फिर 2024-25 में घटकर 908 हो गई। 2025-26 में चैनलों की संख्या में एक बार फिर 11 चैनलों का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 919 हो गई।

साल-दर-साल देखें तो 2020-21 में चार चैनल कम हुए, 2021-22 में 16 चैनल घटे। इसके बाद 2022-23 और 2023-24 में सात-सात चैनल बढ़े। 2024-25 में चार चैनल कम हुए और 2025-26 में 11 चैनलों का इजाफा हुआ। इन सभी बदलावों को मिलाकर देखें तो 2019-20 से 2025-26 के बीच निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में कुल मिलाकर सिर्फ एक चैनल की बढ़ोतरी हुई।

महामारी से पहले भी धीमी हो गई थी रफ्तार

निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में यह लगभग स्थिर स्थिति सिर्फ कोरोना महामारी के बाद की नहीं है। महामारी से पहले ही चैनलों की संख्या बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी।

2004-05 में निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या सिर्फ 130 थी। 2009-10 में यह बढ़कर 505 और 2011-12 में 822 हो गई। इसके बाद बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी हो गई। 2012-13 में चैनलों की संख्या 852 और 2013-14 में 859 रही। 2014-15 में यह घटकर 821 हो गई। इसके बाद 2015-16 में बढ़कर 847 और 2016-17 में 899 हो गई।

2016-17 में 899 चैनल होने के बाद अगले नौ साल में इनकी संख्या सिर्फ 20 चैनल, यानी करीब 2.2% बढ़ी है। वहीं, 2011-12 के 822 चैनलों की तुलना में 14 साल में यह बढ़ोतरी 97 चैनलों, यानी करीब 11.8% की रही है।

मीडिया इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आज के समय में एक लीनियर टीवी चैनल यानी पारंपरिक टीवी चैनल शुरू करना और उसे लगातार चलाते रहना काफी मुश्किल हो गया है। टीवी, डिजिटल और कनेक्टेड टीवी के बीच विज्ञापन से होने वाली कमाई बंट गई है। ऐसे में सवाल सिर्फ लाइसेंस मिलने का नहीं है, बल्कि यह है कि उस चैनल को चलाने के लिए व्यवहारिक कारोबारी मॉडल मौजूद है या नहीं।

2020-21 से छह साल में 170 नए चैनलों को अनुमति

सरकार के सालाना लाइसेंसिंग आंकड़ों से पता चलता है कि नए चैनलों को अनुमति देने का सिलसिला जारी रहा, लेकिन चल रहे चैनलों की कुल संख्या में इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा। 2020-21 में 36, 2021-22 में 34, 2022-23 में 29, 2023-24 में 23, 2024-25 में 19 और 2025-26 में 29 नए चैनलों को अनुमति दी गई। इस तरह छह साल में कुल 170 नए चैनलों को अनुमति मिली।

170 नई अनुमतियों और कुल चैनलों की संख्या में सिर्फ एक चैनल की बढ़ोतरी के बीच का अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि इस दौरान चैनल बेस में काफी बदलाव हुआ। दोनों तालिकाओं के आंकड़ों की गणितीय तुलना के आधार पर 2020-21 में करीब 40, 2021-22 में 50, 2022-23 में 22, 2023-24 में 16, 2024-25 में 23 और 2025-26 में 18 चैनलों के बाहर होने का अंतर बनता है।

हालांकि, मंत्रालय की पुस्तिका में चैनलों के बंद होने, लाइसेंस वापस करने या रद्द होने के आंकड़े अलग से नहीं दिए गए हैं। इसलिए ये संख्या सीधे तौर पर बंद हुए चैनलों की संख्या नहीं मानी जानी चाहिए। ये सिर्फ नए अनुमतियों और कुल चैनल संख्या में हुए बदलाव के बीच का गणितीय अंतर है।

इसके अलावा, किसी साल किसी चैनल को अनुमति मिलने का यह मतलब भी जरूरी नहीं है कि उसी साल वह चैनल वास्तव में चलना शुरू हो गया हो और सरकारी चैनल संख्या में शामिल हो गया हो।

फिर भी सालाना आंकड़ों से अनुमति और कुल चैनलों की संख्या में बदलाव के बीच एक मोटा संबंध दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, 2024-25 में नए चैनलों की सबसे कम 19 अनुमतियां दी गईं और उसी साल कुल चैनलों की संख्या चार कम हुई। इसके बाद 2025-26 में नई अनुमतियां बढ़कर 29 हुईं और चैनलों की कुल संख्या में 11 का इजाफा हुआ।

कुल चैनलों में करीब 45% न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल

2025-26 में भारत के कुल 919 निजी सैटेलाइट चैनलों में से 418 चैनल न्यूज और करेंट अफेयर्स से जुड़े थे। वहीं 501 चैनल नॉन-न्यूज कैटेगरी में थे। भारतीय चैनलों की संख्या 882 थी। इनमें 406 न्यूज चैनल और 476 नॉन-न्यूज चैनल शामिल थे। वहीं, विदेशी चैनलों की संख्या 37 थी। इनमें 12 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल और 25 नॉन-न्यूज चैनल शामिल थे।

मंत्रालय की पुस्तिका के मुताबिक, आज तक को भारत का पहला निजी सैटेलाइट चैनल माना गया है। इसे 4 दिसंबर 2000 को अनुमति मिली थी। सरकार ने 2005 में चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। 2011 में इनमें बदलाव किया गया और इसके बाद 9 नवंबर 2022 को फिर संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए। हालांकि, पुस्तिका में इन नियामकीय बदलावों और निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में हुए उतार-चढ़ाव के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है।

चैनल परमिशन से होने वाली कमाई में भी उतार-चढ़ाव

चैनलों को अनुमति देने से सरकार को मिलने वाली कमाई में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पुस्तिका के अनुसार, इस कमाई में टेलीपोर्ट की सालाना अनुमति फीस, अस्थायी अपलिंकिंग फीस और अनुमति मिलने के बाद किए गए बदलावों से जुड़ी फीस शामिल है।

2019-20 में यह कमाई 85 करोड़ रुपये थी। 2023-24 में घटकर 75.56 करोड़ रुपये रह गई। इसके बाद 2024-25 में इसमें तेज बढ़ोतरी हुई और यह 105.39 करोड़ रुपये पहुंच गई। 2016-17 से शुरू होने वाली इस आंकड़ा श्रृंखला में यह सबसे ज्यादा रकम थी। 2025-26 में यह कमाई 86.81 करोड़ रुपये रही। हालांकि, मंत्रालय की पुस्तिका में साफ किया गया है कि यह आंकड़ा सिर्फ तीन तिमाहियों का है।

खास बात यह है कि 2024-25 में चैनल परमिशन से कमाई बढ़कर 105.39 करोड़ रुपये हुई, जबकि इसी साल नए चैनलों की अनुमतियां घटकर 19 रह गई थीं और निजी सैटेलाइट चैनलों की कुल संख्या भी चार कम हुई थी।

टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चैनलों की संख्या में गिरावट उन हिस्सों में कारोबार के सिमटने और कुछ चैनलों के बाहर होने को दिखाती है, जहां कमाई करना मुश्किल हो गया है। दर्शक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा रहे हैं और कंटेंट देखने का तरीका अलग-अलग प्लेटफॉर्म में बंट गया है। ऐसे में छोटे और खास दर्शक वर्ग वाले चैनलों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन और विज्ञापन की लागत निकालना मुश्किल होता जा रहा है।

डिजिटल के बढ़ने के बीच टीवी की कमाई में गिरावट

निजी सैटेलाइट चैनलों की यह स्थिति मीडिया बाजार में हो रहे बड़े बदलाव के बीच सामने आई है।

पुस्तिका में दिए गए क्षेत्र के अनुमानों के मुताबिक, जो EY-FICCI की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, टेलीविजन से होने वाली कमाई 2019 में 788 अरब रुपये थी, जो 2025 में घटकर 617 अरब रुपये रह गई। यानी इस अवधि में इसमें करीब 22% की गिरावट आई।

टेलीविजन से होने वाली कमाई 2023 में 711 अरब रुपये, 2024 में 679 अरब रुपये और 2025 में 617 अरब रुपये रही। ये आंकड़े कैलेंडर वर्ष के आधार पर हैं और इनमें टैक्स शामिल हैं। इसलिए इनकी सीधे तुलना वित्त वर्ष के आधार पर दिए गए चैनलों की संख्या से नहीं की जा सकती। 

दूसरी ओर, 2025 में डिजिटल मीडिया से होने वाली कमाई 1,110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इस तरह आंकड़े बताते हैं कि एक तरफ निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है और टेलीविजन बाजार की कुल कमाई में गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल मीडिया लगातार बढ़ रहा है।

डीटीएच ऑपरेटरों की संख्या भी घटी

टेलीविजन के डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में भी बदलाव देखने को मिला है। मंत्रालय की लाइसेंस फीस वाली तालिका के अनुसार, 2025-26 में चार डीटीएच ऑपरेटर थे। वहीं 2017-18 तक इनकी संख्या छह थी। 

सरकारी प्रसारक के फ्री-टू-एयर सैटेलाइट टीवी प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश पर 31 मार्च 2026 तक खाली स्लॉट में से 108 स्लॉट पर निजी चैनल मौजूद थे। इसके अलावा छह स्लॉट खाली बताए गए हैं। कुल मिलाकर ये आंकड़े दिखाते हैं कि सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए सरकार की ओर से नई अनुमतियां अभी भी जारी हैं, लेकिन इन अनुमतियों की तुलना में वास्तव में चल रहे चैनलों की संख्या में बढ़ोतरी काफी कम है।यानी टीवी चैनल शुरू करने के लिए अनुमति मिलना और उस चैनल को लंबे समय तक कारोबार के तौर पर सफलतापूर्वक चलाना, दोनों अब अलग-अलग चुनौतियां बन चुकी हैं। 

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निजी टीवी चैनलों को संसद की फुटेज पर ‘Courtesy: Sansad TV’ दिखाने की सलाह

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संसद की कार्यवाही और संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराए गए कार्यक्रमों व सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सलाह जारी की है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 08 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 08 October, 2026
SansadTV421

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संसद की कार्यवाही और संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराए गए कार्यक्रमों व सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सलाह जारी की है। मंत्रालय ने चैनलों से कहा है कि ऐसी सामग्री प्रसारित करते समय उसके स्रोत के तौर पर ‘Courtesy: Sansad TV’ कैप्शन प्रमुखता से दिखाया जाए।

मंत्रालय ने 7 अक्टूबर को जारी सलाह में कहा कि संसद टीवी राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही का लाइव और प्राथमिक टेलीविजन कवरेज उपलब्ध कराता है। इसके अलावा संसद और समसामयिक मामलों से जुड़े कई तरह के कार्यक्रम, चर्चाएं, साक्षात्कार, डॉक्यूमेंट्री और दूसरी सामग्री भी तैयार करता है।

सलाह के मुताबिक, संसद टीवी की कार्यवाही और उसके कार्यक्रमों का इस्तेमाल, दोबारा प्रसारण, कुछ हिस्सों का उपयोग और दूसरी सामग्री में शामिल किया जाना विभिन्न निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की ओर से बड़े स्तर पर किया जाता है। हालांकि, मंत्रालय के अनुसार, यह देखा गया है कि चैनल ऐसी फुटेज या सामग्री का इस्तेमाल या साझा करते समय उसके स्रोत का उल्लेख लगातार नहीं करते हैं।

इसी को देखते हुए मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को सलाह दी है कि जब भी वे संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही या संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराई गई किसी भी सामग्री को प्रसारित, दोबारा इस्तेमाल, साझा या अपनी सामग्री में शामिल करें, तो स्क्रीन पर ‘Courtesy: Sansad TV’ कैप्शन प्रमुखता से दिखाएं।

मंत्रालय ने कहा कि इस तरह एक समान तरीके से स्रोत का उल्लेख करने से टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल की जा रही संसद की फुटेज और कार्यक्रमों के स्रोत को लेकर ज्यादा स्पष्टता आएगी। यह सलाह सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी की गई है।

यह पत्र टीवी चैनलों के 2021 के केबल टेलीविजन (संशोधन) नियमों के तहत पंजीकृत स्व-नियामक निकायों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े संगठनों और निकायों, ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट को भी भेजा गया है।

इसकी एक प्रति सूचना के लिए संसद टेलीविजन के संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं कार्यक्रम) को भी भेजी गई है।

 

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Z एंटरटेनमेंट को MCA का नोटिस, कंपनी से मांगी गईं अहम जानकारियां

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने बताया है कि उसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से एक नोटिस मिला है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने बताया है कि उसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से एक नोटिस मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह नोटिस 5 अक्टूबर 2026 को मिला है और इसमें कंपनी से कुछ जानकारियां मांगी गई हैं।

कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 210(1)(a) और (c) के तहत जारी किया गया है। यह कार्रवाई कंपनी के खिलाफ पहले से चल रही कंपनी अधिनियम की धारा 206(5) के तहत निरीक्षण की प्रक्रिया के आगे की कड़ी है।

MCA ने मांगी कंपनी से जानकारी

ZEEL ने बताया कि MCA के ऑफिस ऑफ द रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजन-II की ओर से यह नोटिस जारी किया गया है। इसमें कंपनी से कुछ जानकारियां उपलब्ध कराने को कहा गया है।

कंपनी के अनुसार, वह मांगी गई जरूरी जानकारी पहले ही उपलब्ध करा चुकी है। इसके अलावा MCA की ओर से आगे जो भी जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, कंपनी उसे भी उपलब्ध कराएगी।

क्या है मामले में कंपनी का पक्ष?

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी सूचना में कहा है कि यह मामला फिलहाल जानकारी मांगे जाने से संबंधित है। कंपनी द्वारा दिए गए खुलासे में किसी खास उल्लंघन या गलती का आरोप अलग से नहीं बताया गया है। रेग्युलेशन 30 के तहत दिए गए विवरण में 'Details of the violation(s)/contravention(s) committed or alleged to be committed' के सामने 'Calling for information' लिखा गया है।

वित्तीय असर नहीं बताया गया

ZEEL ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का कंपनी की वित्तीय स्थिति, कामकाज या अन्य गतिविधियों पर कोई ऐसा प्रभाव नहीं है जिसे फिलहाल रुपये में मापा जा सके। कंपनी ने इस कॉलम में 'Not Applicable' लिखा है।

यह नोटिस मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के ऑफिस ऑफ द रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजन-II, मुंबई की ओर से जारी किया गया है। कंपनी ने कहा है कि वह मामले में मांगी गई जानकारी और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराती रहेगी। 

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'डीडी फ्री डिश' पर स्लॉट की ई-नीलामी के लिए एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू

प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रसार भारती ने बोलियां आमंत्रित की हैं। यह कदम डीडी फ्री डिश पर चैनल क्षमता के अगले चरण के आवंटन की तैयारियों का संकेत देता है।

दूरदर्शन की ओर से 1 अक्टूबर को जारी नोटिस के मुताबिक, प्रसार भारती इस काम के लिए भारतीय एजेंसी की तलाश कर रहा है। टेंडर की अनुमानित कीमत 32 लाख रुपये, टैक्स समेत रखी गई है। बोलियां 22 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे खोली जाएंगी। वहीं, अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) यानी बोली के साथ जमा की जाने वाली सुरक्षा राशि 64,000 रुपये तय की गई है।

DD Free Dish के साथ दूसरे प्लेटफॉर्म भी शामिल

चुनी गई एजेंसी की जिम्मेदारी सिर्फ डीडी फ्री डिश तक सीमित नहीं होगी। एजेंसी को डीडी फ्री डिश के साथ-साथ प्रसार भारती के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी भी करानी होगी। टेंडर को लेकर इच्छुक बोलीदाताओं के सवालों और स्पष्टीकरण के लिए 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे प्री-बिड मीटिंग रखी गई है। यह बैठक नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन भवन में होगी।

अगली नीलामी में कितने स्लॉट होंगे, जानकारी नहीं

डीडी फ्री डिश भारत में टीवी प्रसारकों के लिए एक अहम वितरण प्लेटफॉर्म बना हुआ है। यह प्लेटफॉर्म बिना पारंपरिक सब्सक्रिप्शन फीस के बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच उपलब्ध कराता है।

हालांकि, इस टेंडर दस्तावेज में यह नहीं बताया गया है कि प्रस्तावित अनुबंध के तहत कितने स्लॉट की नीलामी की जाएगी। साथ ही, अगली नीलामी का पूरा चक्र कब और कैसे होगा, इसकी जानकारी भी इसमें नहीं दी गई है।

तकनीकी और वित्तीय बोली देनी होगी

एजेंसी का चयन दो-बोली प्रणाली के जरिए होगा। इसमें तकनीकी बोली और वित्तीय बोली शामिल होगी। दोनों बोलियां डिजिटल तरीके से प्रसार भारती के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए जमा करनी होंगी। जो बोलीदाता तकनीकी योग्यता की शर्तें पूरी करेंगे, केवल उन्हीं की वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी।

ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी

प्रसार भारती ने बोलीदाताओं के लिए ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण और क्लास-III डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट होना जरूरी किया है।

पोर्टल पर सालाना पंजीकरण शुल्क 450 रुपये और जीएसटी है। वहीं, 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच कीमत वाले टेंडर के लिए टेंडर प्रोसेसिंग फीस 925 रुपये और जीएसटी है। जीएसटी मिलाकर यह रकम 1,091.50 रुपये होती है।

सफल एजेंसी को देनी होगी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी

टेंडर जीतने वाली एजेंसी को अनुबंध की कीमत के 3 फीसदी के बराबर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। यह राशि अनुबंध दिए जाने के 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।

यह टेंडर केवल भारतीय बोलीदाताओं के लिए रखा गया है। प्रसार भारती ने बताया है कि इस पर ग्लोबल टेंडर से जुड़ी सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) की लागू व्यवस्थाओं के मुताबिक शर्तें लागू होंगी। साथ ही, सरकार की मेक इन इंडिया खरीद नीति भी इस टेंडर पर लागू होगी।

गलत जानकारी देने पर कार्रवाई संभव

प्रसार भारती ने अपने पास किसी भी या सभी आवेदनों को बिना कारण बताए स्वीकार या खारिज करने का अधिकार रखा है। वह किसी भी चरण में टेंडर प्रक्रिया को रद्द भी कर सकता है।

प्रसार भारती बोलीदाताओं की ओर से जमा किए गए दस्तावेज और उनकी योग्यता की जांच अनुबंध दिए जाने से पहले या बाद में भी कर सकता है।

 

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अगले IPL मीडिया राइट्स में Z की FIFA रणनीति क्या जियोस्टार को दे पाएगी चुनौती?

FIFA रणनीति से जी का स्पोर्ट्स कारोबार मजबूत, लेकिन IPL की बड़ी कीमत और मुश्किल अर्थशास्त्र बनेगी चुनौती

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 03 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 03 October, 2026
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कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के अगले मीडिया राइट्स ऑक्शन में एक जाना-पहचाना नाम फिर से बोली लगाता नजर आ सकता है। पुनीत गोयनका की अगुवाई वाली जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL), जो 2022 में हुए IPL मीडिया राइट्स ऑक्शन में बोली लगाने वालों में शामिल थी, 2028-32 के अगले चक्र के लिए मौजूदा राइट्स होल्डर जियोस्टार को चुनौती दे सकती है।

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, जी ने अभी सार्वजनिक तौर पर अपनी IPL रणनीति की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ग्रुप बोली में जरूर शामिल होना चाहता है। अब उसकी नजर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से अगले टेंडर का ढांचा तय किए जाने पर है।

जी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कंपनी ऐसे प्रीमियम स्पोर्ट्स में निवेश करने को तैयार है, जहां लंबे समय तक कारोबार खड़ा करने का मौका हो। उनके मुताबिक, IPL के टीवी और डिजिटल मीडिया राइट्स कंपनी के लिए विचाराधीन हैं।

जियोस्टार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि ZEEL संभावित बोलीदाता हो सकता है। उनके मुताबिक, जी ने हाल के समय में दिखाया है कि वह स्पोर्ट्स को लेकर गंभीर है और अगर BCCI राइट्स के पैकेज को ज्यादा छोटे और अलग-अलग हिस्सों में बांटता है तो ऑक्शन में और कंपनियां भी उतर सकती हैं।

FIFA से मजबूत हुआ जी का स्पोर्ट्स कारोबार

पिछले कुछ समय में जी ने अपने स्पोर्ट्स कारोबार को मजबूत करने की कोशिश की है। कंपनी ने 2026 फीफा वर्ल्ड कप समेत 2034 तक 39 ग्लोबल फुटबॉल इवेंट्स के लिए FIFA के साथ करार किया है। इन इवेंट्स को ZEE5 और Unite8 Sports चैनलों के जरिए दिखाया जा रहा है।

कंपनी के मुताबिक, वर्ल्ड कप के शुरुआती वीकेंड में उसके डिजिटल, टीवी और सोशल प्लेटफॉर्म पर 10 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बनी। ZEE5 पर करीब 60 लाख दर्शक आए।

जी ने FIFA के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान भी पेश किए। यानी कंपनी ने सिर्फ विज्ञापन के भरोसे रहने के बजाय सब्सक्रिप्शन, डिजिटल और टीवी से कमाई का मॉडल आजमाया।

इसके अलावा जुलाई में जी ने भारत में बुंडेसलीगा के पांच साल के एक्सक्लूसिव टीवी और डिजिटल राइट्स भी हासिल किए। मैच ZEE5 और Unite8 Sports पर उपलब्ध होंगे।

हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि FIFA और IPL की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। IPL भारत की सबसे बड़ी प्रीमियम स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी है और इसके राइट्स की कीमत काफी ज्यादा है। इसलिए जी के सामने बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वह IPL के लिए जरूरी बड़े निवेश को सही ठहरा पाएगी।

IPL राइट्स की कीमत बनी सबसे बड़ी चुनौती

2023-27 के मौजूदा IPL मीडिया राइट्स चक्र से BCCI को 48,390 करोड़ रुपये मिले थे। यह पिछली अवधि के 16,347 करोड़ रुपये से करीब तीन गुना ज्यादा था। उस समय डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई थी।

इसके बाद मीडिया कारोबार का समीकरण काफी बदल गया है। डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के विलय से जियोस्टार बना है। ऐसे में टीवी और डिजिटल IPL राइट्स अब एक ही कंपनी के पास हैं और उसके पास पहले से ही टीवी, स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी का बड़ा नेटवर्क है।

IPL 2026 के दौरान जियोस्टार ने बताया था कि उसकी कुल पहुंच 1.06 अरब स्क्रीन से ज्यादा हो गई, जबकि औसत मैच पहुंच सालाना आधार पर 6% बढ़ी। कनेक्टेड टीवी की पहुंच में 26% और खपत में 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अगली नीलामी में पैकेजिंग अहम हो सकती है

मीडिया पार्टनर्स एशिया की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2028-32 के IPL राइट्स की कीमत करीब 5.4 अरब डॉलर रह सकती है। रिपोर्ट में 2028-32 के दौरान एक सीजन में मैचों की संख्या बढ़कर 94 होने की संभावना जताई गई है। इसके चलते प्रति मैच राइट्स की अनुमानित कीमत करीब 13% घट सकती है।

ऐसे में अगली नीलामी में सिर्फ राइट्स हासिल करना ही कंपनियों के लिए पर्याप्त नहीं होगा। विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों से कमाई का पूरा हिसाब महत्वपूर्ण होगा।

इसी वजह से BCCI की पैकेजिंग रणनीति भी काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अगले IPL टेंडर में राइट्स को और ज्यादा अलग-अलग पैकेज में बांटा जा सकता है। इसमें कनेक्टेड टीवी के लिए अलग पैकेज का विकल्प भी शामिल हो सकता है।

अगर ऐसा होता है तो अगले IPL मीडिया राइट्स ऑक्शन में जी एंटरटेनमेंट समेत ज्यादा कंपनियों के लिए बोली लगाने का रास्ता खुल सकता है।

 

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त्योहारी सीजन में भी टाटा प्ले-सोनी के बीच सुलह नहीं, कनेक्टेड टीवी तक पहुंचा विवाद

टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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इमरान फैजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है। टाटा प्ले की स्मार्ट कनेक्टेड टीवी सर्विस में भी अब सोनी के चैनल उपलब्ध नहीं हैं। दोनों कंपनियों के बीच मामला टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) में चल रहा है और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है।

यह विवाद शुरुआत में चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन और कमर्शियल शर्तों को लेकर था, लेकिन अब इसका असर टीवी देखने के नए तरीकों पर भी दिखाई दे रहा है। टाटा प्ले जैसे डिस्ट्रीब्यूटर कनेक्टेड टीवी की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं ब्रॉडकास्टर्स अलग-अलग स्क्रीन पर अपने कंटेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

टाटा प्ले स्मार्ट पर 500 से ज्यादा लाइव चैनल

टाटा प्ले ने Tata Play Smart के जरिए कनेक्टेड स्क्रीन पर अपनी टीवी सर्विस का विस्तार किया है। इसकी ऐप लिस्टिंग के मुताबिक, यहां स्पोर्ट्स, न्यूज, फिल्म और जनरल एंटरटेनमेंट समेत 500 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल उपलब्ध हैं।

इसमें स्टार प्लस, जी टीवी, कलर्स, स्टार स्पोर्ट्स, स्टार गोल्ड, जी सिनेमा, एमटीवी, स्टार मां, जी तेलुगु, सन टीवी और स्टार विजय जैसे प्रमुख चैनल शामिल हैं। हालांकि, सोनी के चैनल Tata Play Smart पर उपलब्ध नहीं हैं। इस तरह टाटा प्ले और सोनी के बीच चल रहे विवाद का असर अब एक और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है।

डीटीएच पर चुनिंदा पैक और ए ला कार्टे में मिल रहे सोनी चैनल

टाटा प्ले की डीटीएच सर्विस पर सोनी के चैनल पूरी तरह से बंद नहीं हैं। ये चैनल ए ला कार्टे विकल्प और कुछ प्रीमियम पैक के जरिए उपलब्ध हैं। हालांकि, वे अभी भी टाटा प्ले के बेस चैनल पैक्स का हिस्सा नहीं हैं।

टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने इस मामले पर औपचारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

कनेक्टेड टीवी की तरफ बढ़ रहे डिस्ट्रीब्यूटर

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब डीटीएच कंपनियां सैटेलाइट आधारित टीवी से आगे बढ़कर कनेक्टेड टीवी में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

कनेक्टेड टीवी के जरिए लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक ही इंटरफेस पर उपलब्ध कराया जा सकता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इससे दर्शकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने का एक और रास्ता मिलता है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स को पारंपरिक पे-टीवी के अलावा नए प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है।

लेकिन टाटा प्ले स्मार्ट से सोनी चैनलों की गैर-मौजूदगी यह दिखाती है कि नए प्लेटफॉर्म आने के बावजूद पुराने कमर्शियल विवादों का असर इन नई टीवी सर्विसेज पर भी पड़ सकता है।

त्योहारों के सीजन में भी समाधान नहीं

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव गौरव बनर्जी ने पहले उम्मीद जताई थी कि त्योहारों के सीजन में यह लंबा चला आ रहा विवाद सुलझ सकता है। हालांकि, उनके बयान से किसी ठोस समाधान या समझौते की पुष्टि नहीं हुई थी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या त्योहारों का समय कानूनी विवाद को खत्म कर सकता है, तो उन्होंने कहा था, “मुझे उम्मीद है।”

यह पूछे जाने पर कि सोनी के प्रमुख कंटेंट के साथ चैनल टाटा प्ले के बड़े चैनल पैक्स में वापस आ सकते हैं या नहीं, उन्होंने भी उम्मीद जताई थी। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया था कि दोनों कंपनियों के बीच बातचीत किस स्थिति में है या चैनलों की वापसी की कोई तय समयसीमा है।

उनका बयान टाटा प्ले पर ए ला कार्टे आधार पर सोनी चैनलों की उपलब्धता के संदर्भ में था। इससे किसी समझौते की पुष्टि नहीं हुई।

स्पोर्ट्स चैनलों की गैर-मौजूदगी भी अहम

सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल भी इस विवाद को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। लाइव स्पोर्ट्स टीवी दर्शकों को किसी खास समय पर टीवी देखने के लिए आकर्षित करता है और इससे चैनलों की मांग पर भी असर पड़ता है।

फिलहाल सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में वापस नहीं आए हैं। ऐसे में दोनों कंपनियां त्योहारों के महत्वपूर्ण टीवी सीजन में बिना किसी सार्वजनिक रूप से घोषित समाधान के आगे बढ़ रही हैं।

30 अक्टूबर को TDSAT में अगली सुनवाई

इस कमर्शियल विवाद के साथ कानूनी मामला भी जारी है। TDSAT ने 7 अगस्त को मामले की सुनवाई की थी और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर के लिए तय की है।

TDSAT के पहले के एक आदेश में टाटा प्ले को दो सप्ताह के भीतर 40 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, सोनी समूह की टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनी Culver Max Entertainment की ओर से जारी 128.42 करोड़ रुपये के डिमांड नोटिस की वसूली पर रोक लगाई गई थी।

ट्रिब्यूनल ने विवादित डिमांड नोटिस पर कार्रवाई पर भी रोक लगाई थी और ब्रॉडकास्टर को विवाद से जुड़े स्थिर चित्र या स्क्रॉल प्रसारित नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद Culver Max ने TDSAT के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह मामला टाटा प्ले के डीटीएच पैक्स से सोनी चैनलों को हटाने के फैसले को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी पर रोक से जुड़ा था।

हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन सोनी को एक तय सोशल मीडिया संदेश साझा करने की अनुमति दी। इसमें बताया जा सकता था कि मामला अदालत में विचाराधीन है और सोनी के चैनल टाटा प्ले पर ए ला कार्टे सर्विस के जरिए उपलब्ध हैं।

टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का बदल रहा बाजार

यह विवाद ऐसे समय में चल रहा है जब टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा बाजार बदल रहा है। ऑपरेटर अब कनेक्टेड टीवी और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं ब्रॉडकास्टर्स भी पे-टीवी, कनेक्टेड स्क्रीन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

Vzy, Nelen और Sun Direct की Linear TV Streaming सर्विस जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सैकड़ों लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर JioStar, Sony Pictures Networks India, Warner Bros Discovery India और Zee Entertainment जैसे ब्रॉडकास्टर्स के चैनल भी शामिल हैं।

यहां एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिलती है। सोनी एक इंटीग्रेटेड कनेक्टेड टीवी सर्विस में शामिल है, जबकि टाटा प्ले के साथ उसका डिस्ट्रीब्यूशन विवाद टाटा प्ले की स्मार्ट सर्विस तक पहुंच गया है।

अभी भी समाधान का इंतजार

टाटा प्ले के लिए कनेक्टेड टीवी का विस्तार अपने चैनल एग्रीगेशन बिजनेस को डीटीएच कनेक्शन से आगे ले जाने का मौका है। वहीं सोनी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी दर्शकों तक पहुंच बढ़ाने का जरिया है।

लेकिन टाटा प्ले और सोनी का विवाद यह दिखाता है कि तकनीक और टीवी देखने के नए प्लेटफॉर्म आने भर से कंपनियों के बीच कमर्शियल शर्तों को लेकर विवाद अपने आप खत्म नहीं होते।

30 अक्टूबर की TDSAT सुनवाई के करीब आने के साथ अब मामला सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में कब लौटेंगे। सवाल यह भी है कि कनेक्टेड टीवी का बाजार तेजी से बढ़ने और त्योहारों के सीजन में दोनों कंपनियां किसी समझौते तक पहुंच पाती हैं या नहीं।

फिलहाल गौरव बनर्जी की ओर से जताई गई उम्मीद के बावजूद किसी समझौते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स से बाहर हैं और Tata Play Smart की कनेक्टेड टीवी सर्विस पर भी उपलब्ध नहीं हैं।

 

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राज टेलीविजन नेटवर्क की स्वतंत्र निदेशक भारती श्रीधर फिर 5 साल के लिए नियुक्त

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी कंपनी की 30 सितंबर 2026 को हुई 32वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में दी गई।

कंपनी के मुताबिक, भारती श्रीधर को 1 अप्रैल 2027 से पांच साल की दूसरी लगातार अवधि के लिए स्वतंत्र निदेशक के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है। उनका नया कार्यकाल 31 मार्च 2032 तक रहेगा। उनका मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। यह पुनर्नियुक्ति नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश और कंपनी के निदेशक मंडल की मंजूरी के आधार पर की गई है। 

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर रोक नहीं है।

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारती श्रीधर ने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया है और उन्हें मीडिया व एंटरमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। टेलीविजन और प्रसारण क्षेत्र में विभिन्न मीडिया मंचों के साथ लंबे समय तक जुड़ाव के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव है।

कंपनी के अनुसार, मीडिया इंडस्ट्री  में अपने प्रोफेशनल काम के अलावा वह ज्योतिष और अंक ज्योतिष की विशेषज्ञ और काउंसलर भी हैं। पिछले करीब 20 वर्षों में वह कई बड़े जनसंचार माध्यमों पर नजर आई हैं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों की पसंद, मीडिया संचार और टेलीविजन इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों को लेकर व्यापक समझ विकसित की है।

कंपनी ने कहा है कि उनका अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की समझ कंपनी के कामकाज और इंडस्ट्री से जुड़ाव के लिए उपयोगी नजरिया देती है।

कंपनी ने यह भी बताया है कि भारती श्रीधर फिलहाल किसी दूसरी कंपनी में निदेशक पद पर नहीं हैं। इसके अलावा, उनका कंपनी के किसी भी अन्य निदेशक के साथ कोई पारिवारिक संबंध नहीं है।

कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।

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राज टेलीविजन नेटवर्क की आम बैठक में इन दो निदेशकों की पुनर्नियुक्ति, सभी प्रस्ताव मंजूर

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
RajTelevision874

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और 11:45 बजे खत्म हुई। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए।

बैठक की शुरुआत कंपनी की कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने की। उन्होंने सदस्यों का स्वागत किया और कंपनी के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों का परिचय कराया। बैठक में कंपनी के ऑडिटर, कॉस्ट ऑडिटर, सेक्रेटेरियल ऑडिटर, इंटरनल ऑडिटर और स्क्रूटिनाइजर भी मौजूद रहे।

इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम. राजेंद्रन ने सदस्यों का स्वागत किया और जरूरी कोरम पूरा होने के बाद बैठक शुरू की। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के सफर, आर्थिक और मीडिया उद्योग की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑडिटेड वित्तीय नतीजे, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट, अनक्वालिफाइड ऑडिटर्स रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स रिपोर्ट सदस्यों को पहले ही भेजी जा चुकी थी और इन्हें बैठक में पढ़ा हुआ माना गया।

AGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी

AGM में कुल चार प्रस्ताव रखे गए। इनमें सामान्य और विशेष, दोनों तरह के प्रस्ताव शामिल थे।

  1. 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड वित्तीय विवरण और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई।
  2. एम. रघुनाथन को रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। वह रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने अपना नाम पेश किया था।
  3. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक को मंजूरी/रैटिफाई किया गया।
  4. भारती श्रीधर को कंपनी की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरे कार्यकाल के लिए लगातार 5 साल के लिए दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।

शेयरधारकों ने सवाल भी पूछे

AGM में रजिस्टर्ड स्पीकर-शेयरहोल्डर्स अभिषेक जे. और महेश कुमार बोहरा ने अपने विचार रखे और कंपनी के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कुछ सवाल भी पूछे, जिनका जवाब कंपनी के मैनेजमेंट ने दिया। इसके बाद कोई और सवाल नहीं उठाया गया।

ई-वोटिंग के जरिए हुआ मतदान

कंपनी ने बताया कि रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 सुबह 9 बजे से 29 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक हुई। जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई। AGM खत्म होने के बाद भी 15 मिनट तक ई-वोटिंग खुली रखी गई, ताकि सदस्य अपना वोट दे सकें।

कंपनी के मुताबिक, सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए हैं। ई-वोटिंग के विस्तृत नतीजे और कंसोलिडेटेड स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर जारी की जाएगी। इसे कंपनी की वेबसाइट, स्टॉक एक्सचेंजों और CDSL पर उपलब्ध कराया जाएगा।

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