भारत का टेलीविजन रेटिंग्स सिस्टम सिर्फ सरकार की संशोधित Television Ratings Policy, 2026 के तहत रेटिंग्स की वापसी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें इससे कहीं बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत का टेलीविजन रेटिंग्स सिस्टम सिर्फ सरकार की संशोधित Television Ratings Policy, 2026 के तहत रेटिंग्स की वापसी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसमें इससे कहीं बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।जानकारों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने टेलीविजन मीजरमेंट कंपनियों TAM और Chrome DM से Connected TV (CTV) मीजरमेंट को लेकर उनके सहयोग और तकनीकी क्षमताओं के बारे में संपर्क किया है।
इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल सामने आया है कि क्या सरकार BARC India के लिए ज्यादा प्रतिस्पर्धा तैयार करना चाहती है या फिर ऐसा व्यापक मीजरमेंट सिस्टम बनाना चाहती है, जिसमें विशेषज्ञ टेक्नोलॉजी कंपनियां मौजूदा रेटिंग्स सिस्टम के साथ जुड़कर काम कर सकें?
Chrome DM पहले से ही एक ऑटोमेटेड CTV मीजरमेंट सिस्टम संचालित करता है। वहीं, TAM के CEO एलवी कृष्णन ने इससे पहले एक्सचेंज4मीडिया से कहा था, “BARC India के साथ JV के जरिए TAM, इंडस्ट्री की जरूरतों के आधार पर मीजरमेंट के अगले चरण में BARC की मदद करने के लिए तैयार है।”
TAM को डिजिटल और टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट का लंबे समय से अनुभव है। Chrome DM ने भी संकेत दिया है कि अगर उसकी टेक्नोलॉजी, डेटा या विशेषज्ञता किसी व्यापक इंडस्ट्री मीजरमेंट सिस्टम में योगदान दे सकती है, तो वह BARC या इंडस्ट्री के अन्य संबंधित पक्षों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि MIB की ओर से किया गया यह संपर्क सरकार की उस बड़ी कोशिश के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें टेलीविजन मीजरमेंट को ज्यादा टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल बनाया जाए और Linear Television, Smart TVs और Connected Devices पर बंट चुके व्यूइंग को भी मापा जा सके। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इंडस्ट्री संशोधित पॉलिसी के तहत टेलीविजन रेटिंग्स के पूरी तरह दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रही है।
सिर्फ टेक्नोलॉजी से रेटिंग एजेंसी नहीं बनती
सरकार ने टेलीविजन रेटिंग्स मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए इसे ज्यादा खुला बनाया है। संशोधित पॉलिसी के तहत तय नियमों को पूरा करने वाली कई रेटिंग एजेंसियां काम कर सकती हैं। वहीं, न्यूनतम नेट-वर्थ की जरूरत को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। कागज पर देखें तो इससे नई कंपनियों के लिए बाजार में प्रवेश की बाधा काफी कम हुई है।
लेकिन असल में इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि इस बिजनेस की लागत अभी भी बहुत ज्यादा है। एक वरिष्ठ ब्रॉडकास्टिंग एग्जिक्यूटिव ने कहा, “रेटिंग एजेंसी सिर्फ ऐसी कंपनी नहीं है जो टेलीविजन स्क्रीन की गिनती कर सके। इसके लिए एक प्रतिनिधि पैनल, फील्ड ऑपरेशंस, पीपल मीटर्स और दूसरी मीजरमेंट सुविधाएं, डेटा प्रोसेसिंग, स्टैटिस्टिकल मॉडलिंग, क्वालिटी कंट्रोल, गवर्नेंस सिस्टम और ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजर्स और एजेंसियों की जांच का सामना करने की क्षमता चाहिए।”
इसका मतलब है कि अत्याधुनिक CTV मीजरमेंट टेक्नोलॉजी रखने वाली कंपनी महत्वपूर्ण डेटा या टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर बन सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह खुद रेटिंग्स करेंसी प्रोवाइडर भी बन जाए।
एक इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने कहा कि यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े स्तर पर टीवी खपत को मीजरमेंटे की क्षमता अपने आप में स्वतंत्र रूप से ऑडिट की गई और देशभर के लिए प्रतिनिधि टेलीविजन करेंसी तैयार करने की क्षमता नहीं बन जाती।
एग्जिक्यूटिव ने कहा, “टेलीविजन की खपत को मीजरमेंटे की टेक्नोलॉजी होना एक बात है। राष्ट्रीय स्तर पर रेटिंग्स करेंसी चलाना बिल्कुल अलग बिजनेस है। पैनल, मेथडोलॉजी, गवर्नेंस, ऑडिटेबिलिटी और इंडस्ट्री की स्वीकार्यता आखिर में सबसे ज्यादा मायने रखती है।” इससे यह संकेत मिलता है कि सीधे मुकाबले की जगह सहयोग करना फिलहाल ज्यादा व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।
TAM, Chrome DM: CTV के लिए अहम बिल्डिंग ब्लॉक बन सकते हैं
TAM और Chrome DM को इस उभरते बाजार में एक खास फायदा हो सकता है, क्योंकि उन्हें CTV मीजरमेंट और मल्टी-स्क्रीन डिजिटल ऑडियंस मीजरमेंट सर्विस को बिल्कुल शुरुआत से तैयार नहीं करना पड़ेगा।
Chrome DM के पंकज कृष्णा ने कहा कि कंपनी ने बड़े स्तर पर ऑटोमेटेड CTV मीजरमेंट सिस्टम तैयार किया है, जो रियल टाइम में व्यूइंग को कैप्चर कर सकता है। कंपनी के मुताबिक, उसके डेटा का इस्तेमाल ब्रॉडकास्टर्स और एडवर्टाइजर्स कंटेंट और एडवर्टाइजिंग ऑप्टिमाइजेशन के लिए पहले से कर रहे हैं।
Chrome DM का कहना है कि टेलीविजन मीजरमेंट का भविष्य केवल एक मीजरमेंट स्रोत पर निर्भर नहीं रह सकता। कंपनी ने कहा, “रेटिंग्स का भविष्य किसी एक मीजरमेंट स्रोत पर निर्भर नहीं हो सकता। एक मजबूत सिस्टम में डेमोग्राफिक प्रोफाइलिंग के लिए प्रतिनिधि पैनल डेटा के साथ कई स्रोतों से मिले Census-level data को जोड़ा जाना चाहिए।”
टेलीविजन व्यूइंग के लगातार अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बंटने के साथ यह प्रस्ताव और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
Linear Television के लिए डेमोग्राफिक्स को समझने और एक कॉमन करेंसी तैयार करने के लिए प्रतिनिधि पैनल की जरूरत बनी रहेगी। वहीं, CTV बड़े स्तर पर डिवाइस-लेवल कंजम्पशन डेटा तैयार करता है, जिससे कहीं ज्यादा बारीकी से जानकारी मिल सकती है। दोनों तरह के मीजरमेंट अलग-अलग समस्याओं को हल करते हैं। पैनल इंडस्ट्री को बता सकता है कि कौन देख रहा है। ऑटोमेटेड CTV डेटा संभावित रूप से यह बता सकता है कि क्या देखा जा रहा है, कब देखा जा रहा है, कहां देखा जा रहा है और कितने बड़े स्तर पर देखा जा रहा है। रणनीतिक सवाल यह है कि क्या इन दोनों डेटा सेट को इस तरह जोड़ा जा सकता है कि रेटिंग्स करेंसी की विश्वसनीयता पर असर न पड़े।
पंकज कृष्णा ने कहा कि अगर Chrome DM की टेक्नोलॉजी, डेटा या विशेषज्ञता एक मजबूत इंडस्ट्री-वाइड मीजरमेंट सिस्टम तैयार करने में योगदान दे सकती है, तो कंपनी BARC या किसी अन्य संबंधित इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।
इससे संकेत मिलता है कि Chrome DM फिलहाल किसी नए BARC को बिल्कुल शुरुआत से तैयार करने के बजाय एक ऐसे सिस्टम में विशेषज्ञ मीजरमेंट टेक्नोलॉजी की भूमिका निभाने को ज्यादा महत्वपूर्ण अवसर मानता है, जिसमें अलग-अलग कंपनियां इस पूरी व्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में योगदान दें।
लेकिन क्या Chrome DM रेटिंग एजेंसी बन सकती है?
अगर कंपनी खुद एक रेटिंग एजेंसी बनना चाहती है, तो उसे लागू रेगुलेटरी नियमों को पूरा करना होगा और ऐसा ऑपरेटिंग मॉडल तैयार करना होगा, जो स्वतंत्र और प्रतिनिधि टेलीविजन करेंसी देने में सक्षम हो। इसके मुकाबले BARC के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप करने पर Chrome DM एक विशेषज्ञ मीजरमेंट प्रोवाइडर के रूप में काम कर सकती है।
यह अंतर आगे चलकर MIB के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर सकता है, जिसका मौजूदा टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल फ्रेमवर्क पूरी तरह जवाब नहीं देता: क्या किसी कंपनी को रेटिंग एजेंसी बनने के लिए पूरे मीजरमेंट सिस्टम का मालिक होना जरूरी है? अगर इसका जवाब हां है, तो विशेषज्ञ CTV कंपनियों पर जरूरत से ज्यादा बोझ पड़ सकता है।
उन्हें Linear Television को मीजरमेंटे के लिए जरूरी पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर फिर से तैयार करना पड़ेगा, सिर्फ इसलिए कि वे ऐसे रेटिंग्स सिस्टम में शामिल हो सकें, जहां उनकी मौजूदा CTV क्षमताएं पहले से ही काफी उपयोगी हो सकती हैं।
अगर जवाब नहीं है, तो इंडस्ट्री ज्यादा मॉड्यूलर मॉडल की तरफ बढ़ सकती है। ऐसे सिस्टम में एक प्रतिनिधि पैनल ऑपरेटर डेमोग्राफिक मीजरमेंट उपलब्ध करा सकता है, एक ऑटोमेटेड CTV कंपनी Census-level viewing data दे सकती है, कोई अन्य टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर Return-path या Set-top-box data दे सकता है और एक स्वतंत्र रेटिंग्स संस्था इन सभी डेटा सेट को मिलाकर अंतिम करेंसी तैयार कर सकती है। यह सिर्फ एक और रेटिंग एजेंसी जोड़ने से कहीं बड़ा बदलाव होगा।
TAM का सवाल
TAM का भारत में टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। इसके कारण उसके पास ऐसी संस्थागत जानकारी और पुराना अनुभव है, जो किसी नए खिलाड़ी के पास जरूरी नहीं होगा। हालांकि, फिलहाल TAM की ओर से इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि वह नई पॉलिसी के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने या एक पूरी रेटिंग एजेंसी के रूप में बाजार में लौटने की योजना बना रही है। TAM के CEO L.V. Krishnan ने इन घटनाक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
फिर भी TAM के लिए दोबारा बाजार में आने पर वही मूल चुनौती होगी, जो दूसरे संभावित प्रतिस्पर्धियों के सामने है: सिर्फ विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं है। एक भरोसेमंद राष्ट्रीय रेटिंग्स ऑपरेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, मेथडोलॉजी, पैनल मैनेजमेंट, गवर्नेंस, वित्तीय संसाधन और लंबे समय तक इंडस्ट्री का भरोसा जरूरी है। इसलिए MIB का TAM से बात करना महत्वपूर्ण है, भले ही इसका अंतिम नतीजा कोई नई रेटिंग्स सर्विस शुरू होने के रूप में सामने न आए। इससे संकेत मिलता है कि सरकार शायद अब सिर्फ BARC बनाम किसी नई रेटिंग कंपनी के पुराने मॉडल से आगे सोच रही है।
क्या MIB दो-स्तरीय मीजरमेंट सिस्टम बना सकता है?
एक संभावित नतीजा ऐसा रेगुलेटरी या इंडस्ट्री फ्रेमवर्क हो सकता है, जिसमें विशेषज्ञ मीजरमेंट प्रोवाइडर्स और फुल-सर्विस रेटिंग एजेंसियों के बीच अंतर किया जाए।
संशोधित पॉलिसी टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल तरीका अपनाती है और बदलते टेलीविजन कंजम्पशन पैटर्न, जिसमें Connected Television भी शामिल है, को जगह देने की कोशिश करती है। लेकिन बाजार में ज्यादा फंक्शनल अंतर की जरूरत हो सकती है।
एक रेटिंग एजेंसी के एग्जिक्यूटिव ने कहा, “एक विशेषज्ञ CTV मीजरमेंट कंपनी को देशभर का Linear-TV पैनल तैयार करने की जरूरत के बिना CTV कंजम्पशन डेटा उपलब्ध कराने के लिए मान्यता दी जा सकती है।”
एग्जिक्यूटिव ने कहा, “वहीं, एक Full-service ratings agency प्रतिनिधि राष्ट्रीय टेलीविजन करेंसी तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल सकती है। इस तरह की व्यवस्था इनोवेशन की व्यावहारिक बाधाओं को कम कर सकती है।”
इससे मीजरमेंट सिस्टम में ज्यादा कंपनियों के आने का रास्ता भी खुल सकता है, बिना इस मजबूरी के कि हर कंपनी उस इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा तैयार करने में बड़ी रकम खर्च करे, जो किसी दूसरी कंपनी के पास पहले से मौजूद है।
लेकिन गवर्नेंस से जुड़े सवाल काफी मुश्किल होंगे।
सवाल बने हुए हैं:
CTV डेटा को पैनल डेटा के मुकाबले किस तरह वेटेज दिया जाएगा?
मेथडोलॉजी कौन तय करेगा?
तैयार होने वाले आंकड़ों का ऑडिट कौन करेगा?
Connected TVs, Linear Television और कई स्क्रीन के बीच होने वाली डुप्लीकेशन को किस तरह दूर किया जाएगा?
डिवाइस-लेवल कंजम्पशन के साथ डेमोग्राफिक जानकारी कैसे जोड़ी जाएगी?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल, विज्ञापन बाजार जिस अंतिम आंकड़े के आधार पर लेन-देन करता है, उसका मालिक कौन होगा?
संशोधित पॉलिसी में मेथडोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी, इंडिपेंडेंस और ऑडिटिंग पर जोर दिया गया है। इसलिए किसी भी हाइब्रिड मीजरमेंट सिस्टम में जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करना होगा।
BARC को शायद एक और प्रतिद्वंद्वी नहीं, ज्यादा डेटा की जरूरत हो
इसलिए सबसे बड़ा बदलाव ऐसा सिस्टम हो सकता है जिसमें BARC को हटाने के बजाय उसे एक बहुत बड़े मीजरमेंट सिस्टम का हिस्सा बना दिया जाए।
BARC के पास प्रतिनिधि पैनल और इंडस्ट्री के साथ स्थापित रिश्ते हैं। वहीं TAM और Chrome DM के पास डिजिटल मीजरमेंट क्षमताएं हैं। हर कंपनी को पूरा रेटिंग्स सिस्टम तैयार करने के लिए मजबूर करने के बजाय इंडस्ट्री अलग-अलग कंपनियों की विशेषज्ञ क्षमताओं को जोड़ सकती है।
एडवर्टाइजर्स के लिए इससे भविष्य में टेलीविजन कंजम्पशन की ज्यादा व्यापक तस्वीर सामने आ सकती है। ब्रॉडकास्टर्स के लिए ऑडियंस और विज्ञापन एक्सपोजर का ज्यादा बारीक डेटा उपलब्ध हो सकता है।
सरकार के लिए इससे प्रतिस्पर्धा और टेक्नोलॉजिकल मजबूती बढ़ सकती है, बिना इस जरूरत के कि हर नई कंपनी पूरे राष्ट्रीय मीजरमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा तैयार करे।
1,000 करोड़ रुपये का सवाल
यहीं पर निवेश की अर्थव्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, एक भरोसेमंद राष्ट्रीय टेलीविजन मीजरमेंट ऑपरेशन तैयार करने में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश लग सकता है। इसमें पैनल का विस्तार, पीपल मीटर्स, फील्ड ऑपरेशंस, टेक्नोलॉजी, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की लागत शामिल है।
इतने बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर से प्रतिस्पर्धा का पूरा सवाल बदल जाता है।
सरकार ने औपचारिक नेट-वर्थ की सीमा 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दी है, लेकिन रेगुलेटरी न्यूनतम सीमा और एक भरोसेमंद रेटिंग्स ऑपरेशन तैयार करने के लिए जरूरी कमर्शियल कैपिटल एक ही चीज नहीं है।
एक इंडस्ट्री एग्जिक्यूटिव ने इसे सीधे शब्दों में कहा, “अगर आप किसी मीजरमेंट कंपनी को बनाने में 1,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आप इस बात पर करीब से नजर रखेंगे कि मौजूदा कंपनी के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। निवेशकों के लिए सबसे बड़े कारकों में से एक नियमों की स्थिरता है।”
एक अन्य एग्जिक्यूटिव ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ मौजूदा रेटिंग्स संकट तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा, “चिंता सिर्फ आज की रेटिंग्स ब्लैकआउट को लेकर नहीं है। चिंता इस बात को लेकर है कि क्या आगे भी इस तरह के हस्तक्षेप ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट का हिस्सा बन सकते हैं।”
संभावित नई कंपनियों के लिए यह शायद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि सरकार ने बाजार को औपचारिक रूप से खोल दिया है या नहीं। सवाल यह है कि क्या निवेशकों को भरोसा है कि नियम इतने लंबे समय तक स्थिर रहेंगे कि नई रेटिंग्स कंपनी अपने बड़े शुरुआती निवेश को वापस हासिल कर सके।
सिर्फ लाइसेंस देने से प्रतिस्पर्धा नहीं आएगी
सरकार ने कई रेटिंग एजेंसियों को अनुमति देकर एक बड़ी बाधा जरूर हटा दी है। लेकिन सिर्फ लाइसेंस देने से प्रतिस्पर्धा पैदा नहीं होगी। नई कंपनी को एक मजबूत बिजनेस मॉडल, पर्याप्त पूंजी, इंडस्ट्री की स्वीकार्यता और इस भरोसे की जरूरत होगी कि उसकी मेथडोलॉजी के साथ निष्पक्ष व्यवहार किया जाएगा।
इसलिए TAM और Chrome DM जैसे विशेषज्ञ खिलाड़ियों के लिए कमर्शियल रूप से ज्यादा तर्कसंगत रास्ता शायद CTV मीजरमेंट के जरिए बाजार में प्रवेश करना हो सकता है, बजाय इसके कि वे तुरंत BARC के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा तैयार करने की कोशिश करें।
TAM के लिए अवसर अलग होगा, अगर वह इसे आगे बढ़ाने का फैसला करता है। वह अपनी ऐतिहासिक विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए 2026 के फ्रेमवर्क के तहत जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा तैयार कर सकता है या किसी अन्य कंपनी के साथ साझेदारी कर सकता है।
वहीं BARC के लिए प्रतिस्पर्धी खतरा जरूरी नहीं कि ऐसी कंपनी से आए जो उसे सीधे बदलने की कोशिश कर रही हो। यह नई पीढ़ी की मीजरमेंट कंपनियों से भी आ सकता है, जो Single-source television currency के मॉडल को धीरे-धीरे बनाए रखना मुश्किल बना दें।
यही वजह है कि MIB का TAM और Chrome DM दोनों से संपर्क करना पहली नजर में जितना सामान्य लग सकता है, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। मंत्रालय शायद यह समझने की कोशिश कर रहा है कि भविष्य का रेटिंग्स सिस्टम आखिर कैसा होना चाहिए।
सरकार के सामने मूल रूप से दो विकल्प हैं- एक और BARC तैयार करना या फिर ऐसा इकोसिस्टम बनाना जिसमें किसी एक कंपनी को पूरी तरह BARC बनने की जरूरत ही न हो। दूसरा मॉडल टेलीविजन के भविष्य के लिहाज से टेक्नोलॉजी के स्तर पर ज्यादा प्रासंगिक हो सकता है। हालांकि, इसे रेगुलेट करना भी काफी ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
ब्रॉडकास्टर्स और एडवर्टाइजर्स के लिए दांव काफी बड़ा है। ज्यादा प्रतिस्पर्धी रेटिंग्स मार्केट से किसी एक मीजरमेंट प्रोवाइडर पर निर्भरता कम हो सकती है और ऑडियंस डेटा की बारीकी में सुधार हो सकता है। लेकिन अगर कई डेटा सोर्स सामने आते हैं और उनके बीच कोई कॉमन करेंसी नहीं होती, तो इंडस्ट्री को इसका उल्टा नतीजा भी मिल सकता है- ज्यादा डेटा, ज्यादा मीजरमेंट कंपनियां और इस बात को लेकर कम निश्चितता कि आखिर आंकड़ों का मतलब क्या है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या MIB का TAM और Chrome DM के साथ जुड़ाव वास्तव में एक प्रतिस्पर्धी रेटिंग्स मार्केट की शुरुआत है, या फिर यह भारतीय टेलीविजन ऑडियंस को मीजरमेंटे के बिल्कुल अलग मॉडल की दिशा में पहला कदम है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है। प्राधिकरण ने इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर, 2026 तय की गई है।
ट्राई ने यह मसौदा 9 अक्टूबर, 2026 को जारी किया। इसका पूरा नाम ‘टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज DRM-बेस्ड डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम्स ऑडिट मैनुअल, 2026’ है। इसका मकसद DRM आधारित सिस्टम के नियमों के पालन की जांच के लिए ऑडिट प्रक्रिया को विस्तार से बताना है।
टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं का सालाना ऑडिट जरूरी
ट्राई के मुताबिक, टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज इंटरकनेक्शन (एड्रेसेबल सिस्टम्स) रेगुलेशंस, 2017 के तहत टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशंस के डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) का सालाना ऑडिट जरूरी है। इसमें नियमों के प्रावधानों के अनुसार कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (CAS), सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), DRM और इनसे जुड़े अन्य सिस्टम शामिल हैं।
इन नियमों की अनुसूची-X (Schedule X) में DRM आधारित सिस्टम के लिए आवश्यक प्रावधान दिए गए हैं। ये प्रावधान मुख्य रूप से इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) आधारित डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं से जुड़े हैं।
पहले जारी हो चुका है डिजिटल सिस्टम के ऑडिट का मैनुअल
ट्राई ने 10 मार्च, 2026 को डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए एक मैनुअल जारी किया था। इसमें नियमों की अनुसूची-III के तहत आने वाले सिस्टम के लिए अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार ऑडिट प्रक्रिया बताई गई थी। इसमें CAS, SMS और सेट-टॉप बॉक्स (STB) आधारित सिस्टम शामिल हैं। हालांकि, DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए भी इसी तरह के विस्तृत मैनुअल की जरूरत महसूस की गई। IPTV ऑपरेटरों, प्रसारकों और ऑडिटरों सहित कई संबंधित पक्षों ने इस जरूरत को उठाया था।
इसी को ध्यान में रखते हुए ट्राई ने अब DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए अलग मैनुअल का मसौदा तैयार किया है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों को अनुसूची-X के प्रावधानों के पालन की जांच करने की प्रक्रिया समझाने में मदद करना है। इसे ऑडिट के दौरान मार्गदर्शन देने वाले दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है।
मसौदे में ऑडिट से जुड़े कई अहम प्रावधान
DRM ऑडिट मैनुअल के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल की गई हैं:
इन प्रावधानों का उद्देश्य DRM आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट को व्यवस्थित करना और संबंधित पक्षों को नियमों के पालन की जांच के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराना है।
30 अक्टूबर तक भेज सकते हैं सुझाव
ट्राई ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से लिखित सुझाव, टिप्पणियां और प्रस्ताव मांगे हैं। सुझावों के साथ उनके पीछे के कारण, औचित्य और संबंधित आंकड़े या सबूत देना भी जरूरी बताया गया है।
हितधारक अपने सुझाव 30 अक्टूबर, 2026 तक ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। इसके लिए advbcs2@trai.gov.in और jtadvbcs-3@trai.gov.in ईमेल पते दिए गए हैं। ट्राई ने सुझाव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने को प्राथमिकता देने की बात कही है।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है। इस नए अध्याय की नींव तीन बातों पर रखी गई है- नया ऑफिस, नया विजन और नए शोज।
कंपनी ने अपनी वर्षगांठ के संदेश में कहा, “एक नया अध्याय शुरू हो रहा है और हम इससे ज्यादा उत्साहित नहीं हो सकते।”
31 साल के सफर की विरासत
SPNI ने कहा कि तीन दशक से ज्यादा समय से वह भारत के मनोरंजन सफर का हिस्सा रहा है। कंपनी के मुताबिक, उसने यादगार कहानियों, लोगों के पसंदीदा शोज और खेलों के यादगार पलों के जरिए लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया है।
कंपनी की यह बात उसके अब तक के सफर को भी दिखाती है, जिसमें मनोरंजन और खेल, दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दर्शक जहां गए, कंपनी भी उसी दिशा में
SPNI का नया कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए है कि आज दर्शकों के मनोरंजन देखने का तरीका काफी बदल चुका है। दर्शक अब अलग-अलग स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं में मनोरंजन कंटेंट देख रहे हैं।
कंपनी ने कहा कि आज जब दर्शक नए स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं के जरिए मनोरंजन खोज रहे हैं, तो वह भी उनके साथ खुद को बदल रही है। कंपनी ने आगे कहा, “नए विजन, नई शुरुआत और आगे आने वाले नए अवसरों के साथ हम यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि हम मिलकर क्या बना सकते हैं।”
‘Chapter 31’ की तीन बड़ी बातें
SPNI की वर्षगांठ के लिए जारी किए गए क्रिएटिव में Sony Pictures का लोगो और “Happy 31st Anniversary!” लिखा गया है। इसमें ‘Chapter 31’ के तीन मुख्य स्तंभ भी बताए गए हैं।
पहला- नया ऑफिस: इसे “एक नया घर, एक नई शुरुआत” के तौर पर पेश किया गया है।
दूसरा- नया विजन: कंपनी ने अपने नए विजन को “कंटेंट-फर्स्ट, प्लेटफॉर्म एग्नॉस्टिक, मल्टी-लिंगुअल एंटरटेनमेंट” बताया है। यानी कंटेंट सबसे पहले होगा, उसे किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा और अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।
तीसरा- नए शोज: इसके तहत कंपनी ने “नई सोच और यादगार पलों” का वादा किया है।
इस क्रिएटिव के आखिर में उन सभी लोगों का धन्यवाद किया गया है, जिन्होंने SPNI के इस सफर को खास बनाने में योगदान दिया। इसके साथ ही “Here’s to writing the next one together” और “Tell stories beyond the ordinary” जैसे संदेश दिए गए हैं।
एम्प्लॉयीज और दर्शकों को भी धन्यवाद
कंपनी ने अपने लोगों और दर्शकों को भी खास तौर पर धन्यवाद दिया। SPNI ने कहा, “उन सभी लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने पिछले 31 वर्षों में SPNI को आकार देने में मदद की और हमारी कहानी का हिस्सा बने।”
कंपनी ने अपने संदेश का अंत “Here’s to Chapter 31 and the many possibilities it holds!” के साथ किया।
क्या है ‘Chapter 31’ के पीछे की सोच?
‘Chapter 31’ में इस्तेमाल किए गए तीन शब्द कंपनी की आगे की रणनीति की दिशा को समझने में मदद करते हैं। ‘Content-first’ का मतलब है कि कहानी और कंटेंट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, स्क्रीन या प्लेटफॉर्म बाद में आएगा।
‘Platform agnostic’ का मतलब है कि कहानी को किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा। दर्शक जिस जगह मौजूद हैं, कंटेंट वहां तक पहुंचने की कोशिश करेगा, चाहे वह टेलीविजन हो या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म।
वहीं ‘Multi-lingual’ इस बात को दर्शाता है कि भारत के दर्शक एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं में मनोरंजन की पसंद है और कंपनी कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
इन तीनों को साथ देखा जाए तो यह संकेत मिलता है कि SPNI खुद को केवल चैनल चलाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे स्टूडियो की तरह आगे बढ़ाना चाहती है, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म और भाषाओं के लिए कंटेंट तैयार करे। मनोरंजन कारोबार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। नया ऑफिस इस बदलाव का एक प्रतीक है, जबकि नए शोज यह साबित करेंगे कि बाजार और दर्शक इस नई दिशा को किस तरह स्वीकार करते हैं।
31 साल का सफर SPNI को एक मजबूत कंटेंट लाइब्रेरी, खेलों से जुड़ा अनुभव और एक स्थापित ब्रैंड देता है। अब ‘Chapter 31’ के जरिए कंपनी की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि आने वाला दशक भी उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण और मजबूत साबित हो।
भारत में 31 मार्च 2026 तक कुल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यह संख्या 2019-20 में दर्ज 918 चैनलों से सिर्फ एक ज्यादा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में 31 मार्च 2026 तक कुल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यह संख्या 2019-20 में दर्ज 918 चैनलों से सिर्फ एक ज्यादा है। हालांकि, इस छह साल की अवधि में सरकार ने 170 नए चैनलों को अनुमति दी। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की सांख्यिकी पुस्तिका 2025-26’ में दी गई है।
पुस्तिका में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 919 निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। यह आंकड़ों की श्रृंखला 2004-05 से शुरू होती है। इससे पहले सबसे ज्यादा 918 निजी सैटेलाइट चैनल 2019-20 में दर्ज किए गए थे।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार की ओर से नए चैनलों को लगातार अनुमति दिए जाने के बावजूद कुल चल रहे निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या लगभग एक जैसी बनी हुई है। यानी इस क्षेत्र में लगातार विस्तार के बजाय नए चैनलों के आने और कुछ चैनलों के बाहर होने का सिलसिला ज्यादा दिखाई देता है।
छह साल में चैनलों की संख्या में उतार-चढ़ाव
निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या 2020-21 में घटकर 914 रह गई। इसके बाद 2021-22 में यह और घटकर 898 हो गई। इसके बाद चैनलों की संख्या में धीरे-धीरे सुधार आया। 2022-23 में यह बढ़कर 905, 2023-24 में 912 और फिर 2024-25 में घटकर 908 हो गई। 2025-26 में चैनलों की संख्या में एक बार फिर 11 चैनलों का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 919 हो गई।
साल-दर-साल देखें तो 2020-21 में चार चैनल कम हुए, 2021-22 में 16 चैनल घटे। इसके बाद 2022-23 और 2023-24 में सात-सात चैनल बढ़े। 2024-25 में चार चैनल कम हुए और 2025-26 में 11 चैनलों का इजाफा हुआ। इन सभी बदलावों को मिलाकर देखें तो 2019-20 से 2025-26 के बीच निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में कुल मिलाकर सिर्फ एक चैनल की बढ़ोतरी हुई।
महामारी से पहले भी धीमी हो गई थी रफ्तार
निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में यह लगभग स्थिर स्थिति सिर्फ कोरोना महामारी के बाद की नहीं है। महामारी से पहले ही चैनलों की संख्या बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी।
2004-05 में निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या सिर्फ 130 थी। 2009-10 में यह बढ़कर 505 और 2011-12 में 822 हो गई। इसके बाद बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी हो गई। 2012-13 में चैनलों की संख्या 852 और 2013-14 में 859 रही। 2014-15 में यह घटकर 821 हो गई। इसके बाद 2015-16 में बढ़कर 847 और 2016-17 में 899 हो गई।
2016-17 में 899 चैनल होने के बाद अगले नौ साल में इनकी संख्या सिर्फ 20 चैनल, यानी करीब 2.2% बढ़ी है। वहीं, 2011-12 के 822 चैनलों की तुलना में 14 साल में यह बढ़ोतरी 97 चैनलों, यानी करीब 11.8% की रही है।
मीडिया इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आज के समय में एक लीनियर टीवी चैनल यानी पारंपरिक टीवी चैनल शुरू करना और उसे लगातार चलाते रहना काफी मुश्किल हो गया है। टीवी, डिजिटल और कनेक्टेड टीवी के बीच विज्ञापन से होने वाली कमाई बंट गई है। ऐसे में सवाल सिर्फ लाइसेंस मिलने का नहीं है, बल्कि यह है कि उस चैनल को चलाने के लिए व्यवहारिक कारोबारी मॉडल मौजूद है या नहीं।
2020-21 से छह साल में 170 नए चैनलों को अनुमति
सरकार के सालाना लाइसेंसिंग आंकड़ों से पता चलता है कि नए चैनलों को अनुमति देने का सिलसिला जारी रहा, लेकिन चल रहे चैनलों की कुल संख्या में इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा। 2020-21 में 36, 2021-22 में 34, 2022-23 में 29, 2023-24 में 23, 2024-25 में 19 और 2025-26 में 29 नए चैनलों को अनुमति दी गई। इस तरह छह साल में कुल 170 नए चैनलों को अनुमति मिली।
170 नई अनुमतियों और कुल चैनलों की संख्या में सिर्फ एक चैनल की बढ़ोतरी के बीच का अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि इस दौरान चैनल बेस में काफी बदलाव हुआ। दोनों तालिकाओं के आंकड़ों की गणितीय तुलना के आधार पर 2020-21 में करीब 40, 2021-22 में 50, 2022-23 में 22, 2023-24 में 16, 2024-25 में 23 और 2025-26 में 18 चैनलों के बाहर होने का अंतर बनता है।
हालांकि, मंत्रालय की पुस्तिका में चैनलों के बंद होने, लाइसेंस वापस करने या रद्द होने के आंकड़े अलग से नहीं दिए गए हैं। इसलिए ये संख्या सीधे तौर पर बंद हुए चैनलों की संख्या नहीं मानी जानी चाहिए। ये सिर्फ नए अनुमतियों और कुल चैनल संख्या में हुए बदलाव के बीच का गणितीय अंतर है।
इसके अलावा, किसी साल किसी चैनल को अनुमति मिलने का यह मतलब भी जरूरी नहीं है कि उसी साल वह चैनल वास्तव में चलना शुरू हो गया हो और सरकारी चैनल संख्या में शामिल हो गया हो।
फिर भी सालाना आंकड़ों से अनुमति और कुल चैनलों की संख्या में बदलाव के बीच एक मोटा संबंध दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, 2024-25 में नए चैनलों की सबसे कम 19 अनुमतियां दी गईं और उसी साल कुल चैनलों की संख्या चार कम हुई। इसके बाद 2025-26 में नई अनुमतियां बढ़कर 29 हुईं और चैनलों की कुल संख्या में 11 का इजाफा हुआ।
कुल चैनलों में करीब 45% न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल
2025-26 में भारत के कुल 919 निजी सैटेलाइट चैनलों में से 418 चैनल न्यूज और करेंट अफेयर्स से जुड़े थे। वहीं 501 चैनल नॉन-न्यूज कैटेगरी में थे। भारतीय चैनलों की संख्या 882 थी। इनमें 406 न्यूज चैनल और 476 नॉन-न्यूज चैनल शामिल थे। वहीं, विदेशी चैनलों की संख्या 37 थी। इनमें 12 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल और 25 नॉन-न्यूज चैनल शामिल थे।
मंत्रालय की पुस्तिका के मुताबिक, आज तक को भारत का पहला निजी सैटेलाइट चैनल माना गया है। इसे 4 दिसंबर 2000 को अनुमति मिली थी। सरकार ने 2005 में चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। 2011 में इनमें बदलाव किया गया और इसके बाद 9 नवंबर 2022 को फिर संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए। हालांकि, पुस्तिका में इन नियामकीय बदलावों और निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में हुए उतार-चढ़ाव के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
चैनल परमिशन से होने वाली कमाई में भी उतार-चढ़ाव
चैनलों को अनुमति देने से सरकार को मिलने वाली कमाई में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पुस्तिका के अनुसार, इस कमाई में टेलीपोर्ट की सालाना अनुमति फीस, अस्थायी अपलिंकिंग फीस और अनुमति मिलने के बाद किए गए बदलावों से जुड़ी फीस शामिल है।
2019-20 में यह कमाई 85 करोड़ रुपये थी। 2023-24 में घटकर 75.56 करोड़ रुपये रह गई। इसके बाद 2024-25 में इसमें तेज बढ़ोतरी हुई और यह 105.39 करोड़ रुपये पहुंच गई। 2016-17 से शुरू होने वाली इस आंकड़ा श्रृंखला में यह सबसे ज्यादा रकम थी। 2025-26 में यह कमाई 86.81 करोड़ रुपये रही। हालांकि, मंत्रालय की पुस्तिका में साफ किया गया है कि यह आंकड़ा सिर्फ तीन तिमाहियों का है।
खास बात यह है कि 2024-25 में चैनल परमिशन से कमाई बढ़कर 105.39 करोड़ रुपये हुई, जबकि इसी साल नए चैनलों की अनुमतियां घटकर 19 रह गई थीं और निजी सैटेलाइट चैनलों की कुल संख्या भी चार कम हुई थी।
टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चैनलों की संख्या में गिरावट उन हिस्सों में कारोबार के सिमटने और कुछ चैनलों के बाहर होने को दिखाती है, जहां कमाई करना मुश्किल हो गया है। दर्शक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा रहे हैं और कंटेंट देखने का तरीका अलग-अलग प्लेटफॉर्म में बंट गया है। ऐसे में छोटे और खास दर्शक वर्ग वाले चैनलों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन और विज्ञापन की लागत निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
डिजिटल के बढ़ने के बीच टीवी की कमाई में गिरावट
निजी सैटेलाइट चैनलों की यह स्थिति मीडिया बाजार में हो रहे बड़े बदलाव के बीच सामने आई है।
पुस्तिका में दिए गए क्षेत्र के अनुमानों के मुताबिक, जो EY-FICCI की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, टेलीविजन से होने वाली कमाई 2019 में 788 अरब रुपये थी, जो 2025 में घटकर 617 अरब रुपये रह गई। यानी इस अवधि में इसमें करीब 22% की गिरावट आई।
टेलीविजन से होने वाली कमाई 2023 में 711 अरब रुपये, 2024 में 679 अरब रुपये और 2025 में 617 अरब रुपये रही। ये आंकड़े कैलेंडर वर्ष के आधार पर हैं और इनमें टैक्स शामिल हैं। इसलिए इनकी सीधे तुलना वित्त वर्ष के आधार पर दिए गए चैनलों की संख्या से नहीं की जा सकती।
दूसरी ओर, 2025 में डिजिटल मीडिया से होने वाली कमाई 1,110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इस तरह आंकड़े बताते हैं कि एक तरफ निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है और टेलीविजन बाजार की कुल कमाई में गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल मीडिया लगातार बढ़ रहा है।
डीटीएच ऑपरेटरों की संख्या भी घटी
टेलीविजन के डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में भी बदलाव देखने को मिला है। मंत्रालय की लाइसेंस फीस वाली तालिका के अनुसार, 2025-26 में चार डीटीएच ऑपरेटर थे। वहीं 2017-18 तक इनकी संख्या छह थी।
सरकारी प्रसारक के फ्री-टू-एयर सैटेलाइट टीवी प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश पर 31 मार्च 2026 तक खाली स्लॉट में से 108 स्लॉट पर निजी चैनल मौजूद थे। इसके अलावा छह स्लॉट खाली बताए गए हैं। कुल मिलाकर ये आंकड़े दिखाते हैं कि सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए सरकार की ओर से नई अनुमतियां अभी भी जारी हैं, लेकिन इन अनुमतियों की तुलना में वास्तव में चल रहे चैनलों की संख्या में बढ़ोतरी काफी कम है।यानी टीवी चैनल शुरू करने के लिए अनुमति मिलना और उस चैनल को लंबे समय तक कारोबार के तौर पर सफलतापूर्वक चलाना, दोनों अब अलग-अलग चुनौतियां बन चुकी हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संसद की कार्यवाही और संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराए गए कार्यक्रमों व सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सलाह जारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संसद की कार्यवाही और संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराए गए कार्यक्रमों व सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सलाह जारी की है। मंत्रालय ने चैनलों से कहा है कि ऐसी सामग्री प्रसारित करते समय उसके स्रोत के तौर पर ‘Courtesy: Sansad TV’ कैप्शन प्रमुखता से दिखाया जाए।
मंत्रालय ने 7 अक्टूबर को जारी सलाह में कहा कि संसद टीवी राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही का लाइव और प्राथमिक टेलीविजन कवरेज उपलब्ध कराता है। इसके अलावा संसद और समसामयिक मामलों से जुड़े कई तरह के कार्यक्रम, चर्चाएं, साक्षात्कार, डॉक्यूमेंट्री और दूसरी सामग्री भी तैयार करता है।
सलाह के मुताबिक, संसद टीवी की कार्यवाही और उसके कार्यक्रमों का इस्तेमाल, दोबारा प्रसारण, कुछ हिस्सों का उपयोग और दूसरी सामग्री में शामिल किया जाना विभिन्न निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की ओर से बड़े स्तर पर किया जाता है। हालांकि, मंत्रालय के अनुसार, यह देखा गया है कि चैनल ऐसी फुटेज या सामग्री का इस्तेमाल या साझा करते समय उसके स्रोत का उल्लेख लगातार नहीं करते हैं।
इसी को देखते हुए मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को सलाह दी है कि जब भी वे संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही या संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराई गई किसी भी सामग्री को प्रसारित, दोबारा इस्तेमाल, साझा या अपनी सामग्री में शामिल करें, तो स्क्रीन पर ‘Courtesy: Sansad TV’ कैप्शन प्रमुखता से दिखाएं।
मंत्रालय ने कहा कि इस तरह एक समान तरीके से स्रोत का उल्लेख करने से टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल की जा रही संसद की फुटेज और कार्यक्रमों के स्रोत को लेकर ज्यादा स्पष्टता आएगी। यह सलाह सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी की गई है।
यह पत्र टीवी चैनलों के 2021 के केबल टेलीविजन (संशोधन) नियमों के तहत पंजीकृत स्व-नियामक निकायों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े संगठनों और निकायों, ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट को भी भेजा गया है।
इसकी एक प्रति सूचना के लिए संसद टेलीविजन के संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं कार्यक्रम) को भी भेजी गई है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने बताया है कि उसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से एक नोटिस मिला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने बताया है कि उसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से एक नोटिस मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह नोटिस 5 अक्टूबर 2026 को मिला है और इसमें कंपनी से कुछ जानकारियां मांगी गई हैं।
कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 210(1)(a) और (c) के तहत जारी किया गया है। यह कार्रवाई कंपनी के खिलाफ पहले से चल रही कंपनी अधिनियम की धारा 206(5) के तहत निरीक्षण की प्रक्रिया के आगे की कड़ी है।
MCA ने मांगी कंपनी से जानकारी
ZEEL ने बताया कि MCA के ऑफिस ऑफ द रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजन-II की ओर से यह नोटिस जारी किया गया है। इसमें कंपनी से कुछ जानकारियां उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कंपनी के अनुसार, वह मांगी गई जरूरी जानकारी पहले ही उपलब्ध करा चुकी है। इसके अलावा MCA की ओर से आगे जो भी जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, कंपनी उसे भी उपलब्ध कराएगी।
क्या है मामले में कंपनी का पक्ष?
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी सूचना में कहा है कि यह मामला फिलहाल जानकारी मांगे जाने से संबंधित है। कंपनी द्वारा दिए गए खुलासे में किसी खास उल्लंघन या गलती का आरोप अलग से नहीं बताया गया है। रेग्युलेशन 30 के तहत दिए गए विवरण में 'Details of the violation(s)/contravention(s) committed or alleged to be committed' के सामने 'Calling for information' लिखा गया है।
वित्तीय असर नहीं बताया गया
ZEEL ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का कंपनी की वित्तीय स्थिति, कामकाज या अन्य गतिविधियों पर कोई ऐसा प्रभाव नहीं है जिसे फिलहाल रुपये में मापा जा सके। कंपनी ने इस कॉलम में 'Not Applicable' लिखा है।
यह नोटिस मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के ऑफिस ऑफ द रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजन-II, मुंबई की ओर से जारी किया गया है। कंपनी ने कहा है कि वह मामले में मांगी गई जानकारी और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराती रहेगी।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रसार भारती ने बोलियां आमंत्रित की हैं। यह कदम डीडी फ्री डिश पर चैनल क्षमता के अगले चरण के आवंटन की तैयारियों का संकेत देता है।
दूरदर्शन की ओर से 1 अक्टूबर को जारी नोटिस के मुताबिक, प्रसार भारती इस काम के लिए भारतीय एजेंसी की तलाश कर रहा है। टेंडर की अनुमानित कीमत 32 लाख रुपये, टैक्स समेत रखी गई है। बोलियां 22 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे खोली जाएंगी। वहीं, अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) यानी बोली के साथ जमा की जाने वाली सुरक्षा राशि 64,000 रुपये तय की गई है।
DD Free Dish के साथ दूसरे प्लेटफॉर्म भी शामिल
चुनी गई एजेंसी की जिम्मेदारी सिर्फ डीडी फ्री डिश तक सीमित नहीं होगी। एजेंसी को डीडी फ्री डिश के साथ-साथ प्रसार भारती के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी भी करानी होगी। टेंडर को लेकर इच्छुक बोलीदाताओं के सवालों और स्पष्टीकरण के लिए 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे प्री-बिड मीटिंग रखी गई है। यह बैठक नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन भवन में होगी।
अगली नीलामी में कितने स्लॉट होंगे, जानकारी नहीं
डीडी फ्री डिश भारत में टीवी प्रसारकों के लिए एक अहम वितरण प्लेटफॉर्म बना हुआ है। यह प्लेटफॉर्म बिना पारंपरिक सब्सक्रिप्शन फीस के बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच उपलब्ध कराता है।
हालांकि, इस टेंडर दस्तावेज में यह नहीं बताया गया है कि प्रस्तावित अनुबंध के तहत कितने स्लॉट की नीलामी की जाएगी। साथ ही, अगली नीलामी का पूरा चक्र कब और कैसे होगा, इसकी जानकारी भी इसमें नहीं दी गई है।
तकनीकी और वित्तीय बोली देनी होगी
एजेंसी का चयन दो-बोली प्रणाली के जरिए होगा। इसमें तकनीकी बोली और वित्तीय बोली शामिल होगी। दोनों बोलियां डिजिटल तरीके से प्रसार भारती के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए जमा करनी होंगी। जो बोलीदाता तकनीकी योग्यता की शर्तें पूरी करेंगे, केवल उन्हीं की वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी।
ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी
प्रसार भारती ने बोलीदाताओं के लिए ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण और क्लास-III डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट होना जरूरी किया है।
पोर्टल पर सालाना पंजीकरण शुल्क 450 रुपये और जीएसटी है। वहीं, 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच कीमत वाले टेंडर के लिए टेंडर प्रोसेसिंग फीस 925 रुपये और जीएसटी है। जीएसटी मिलाकर यह रकम 1,091.50 रुपये होती है।
सफल एजेंसी को देनी होगी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी
टेंडर जीतने वाली एजेंसी को अनुबंध की कीमत के 3 फीसदी के बराबर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। यह राशि अनुबंध दिए जाने के 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।
यह टेंडर केवल भारतीय बोलीदाताओं के लिए रखा गया है। प्रसार भारती ने बताया है कि इस पर ग्लोबल टेंडर से जुड़ी सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) की लागू व्यवस्थाओं के मुताबिक शर्तें लागू होंगी। साथ ही, सरकार की मेक इन इंडिया खरीद नीति भी इस टेंडर पर लागू होगी।
गलत जानकारी देने पर कार्रवाई संभव
प्रसार भारती ने अपने पास किसी भी या सभी आवेदनों को बिना कारण बताए स्वीकार या खारिज करने का अधिकार रखा है। वह किसी भी चरण में टेंडर प्रक्रिया को रद्द भी कर सकता है।
प्रसार भारती बोलीदाताओं की ओर से जमा किए गए दस्तावेज और उनकी योग्यता की जांच अनुबंध दिए जाने से पहले या बाद में भी कर सकता है।
FIFA रणनीति से जी का स्पोर्ट्स कारोबार मजबूत, लेकिन IPL की बड़ी कीमत और मुश्किल अर्थशास्त्र बनेगी चुनौती
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के अगले मीडिया राइट्स ऑक्शन में एक जाना-पहचाना नाम फिर से बोली लगाता नजर आ सकता है। पुनीत गोयनका की अगुवाई वाली जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL), जो 2022 में हुए IPL मीडिया राइट्स ऑक्शन में बोली लगाने वालों में शामिल थी, 2028-32 के अगले चक्र के लिए मौजूदा राइट्स होल्डर जियोस्टार को चुनौती दे सकती है।
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, जी ने अभी सार्वजनिक तौर पर अपनी IPL रणनीति की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ग्रुप बोली में जरूर शामिल होना चाहता है। अब उसकी नजर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से अगले टेंडर का ढांचा तय किए जाने पर है।
जी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कंपनी ऐसे प्रीमियम स्पोर्ट्स में निवेश करने को तैयार है, जहां लंबे समय तक कारोबार खड़ा करने का मौका हो। उनके मुताबिक, IPL के टीवी और डिजिटल मीडिया राइट्स कंपनी के लिए विचाराधीन हैं।
जियोस्टार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि ZEEL संभावित बोलीदाता हो सकता है। उनके मुताबिक, जी ने हाल के समय में दिखाया है कि वह स्पोर्ट्स को लेकर गंभीर है और अगर BCCI राइट्स के पैकेज को ज्यादा छोटे और अलग-अलग हिस्सों में बांटता है तो ऑक्शन में और कंपनियां भी उतर सकती हैं।
FIFA से मजबूत हुआ जी का स्पोर्ट्स कारोबार
पिछले कुछ समय में जी ने अपने स्पोर्ट्स कारोबार को मजबूत करने की कोशिश की है। कंपनी ने 2026 फीफा वर्ल्ड कप समेत 2034 तक 39 ग्लोबल फुटबॉल इवेंट्स के लिए FIFA के साथ करार किया है। इन इवेंट्स को ZEE5 और Unite8 Sports चैनलों के जरिए दिखाया जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, वर्ल्ड कप के शुरुआती वीकेंड में उसके डिजिटल, टीवी और सोशल प्लेटफॉर्म पर 10 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बनी। ZEE5 पर करीब 60 लाख दर्शक आए।
जी ने FIFA के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान भी पेश किए। यानी कंपनी ने सिर्फ विज्ञापन के भरोसे रहने के बजाय सब्सक्रिप्शन, डिजिटल और टीवी से कमाई का मॉडल आजमाया।
इसके अलावा जुलाई में जी ने भारत में बुंडेसलीगा के पांच साल के एक्सक्लूसिव टीवी और डिजिटल राइट्स भी हासिल किए। मैच ZEE5 और Unite8 Sports पर उपलब्ध होंगे।
हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि FIFA और IPL की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। IPL भारत की सबसे बड़ी प्रीमियम स्पोर्ट्स प्रॉपर्टी है और इसके राइट्स की कीमत काफी ज्यादा है। इसलिए जी के सामने बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वह IPL के लिए जरूरी बड़े निवेश को सही ठहरा पाएगी।
IPL राइट्स की कीमत बनी सबसे बड़ी चुनौती
2023-27 के मौजूदा IPL मीडिया राइट्स चक्र से BCCI को 48,390 करोड़ रुपये मिले थे। यह पिछली अवधि के 16,347 करोड़ रुपये से करीब तीन गुना ज्यादा था। उस समय डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई थी।
इसके बाद मीडिया कारोबार का समीकरण काफी बदल गया है। डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के विलय से जियोस्टार बना है। ऐसे में टीवी और डिजिटल IPL राइट्स अब एक ही कंपनी के पास हैं और उसके पास पहले से ही टीवी, स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी का बड़ा नेटवर्क है।
IPL 2026 के दौरान जियोस्टार ने बताया था कि उसकी कुल पहुंच 1.06 अरब स्क्रीन से ज्यादा हो गई, जबकि औसत मैच पहुंच सालाना आधार पर 6% बढ़ी। कनेक्टेड टीवी की पहुंच में 26% और खपत में 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अगली नीलामी में पैकेजिंग अहम हो सकती है
मीडिया पार्टनर्स एशिया की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2028-32 के IPL राइट्स की कीमत करीब 5.4 अरब डॉलर रह सकती है। रिपोर्ट में 2028-32 के दौरान एक सीजन में मैचों की संख्या बढ़कर 94 होने की संभावना जताई गई है। इसके चलते प्रति मैच राइट्स की अनुमानित कीमत करीब 13% घट सकती है।
ऐसे में अगली नीलामी में सिर्फ राइट्स हासिल करना ही कंपनियों के लिए पर्याप्त नहीं होगा। विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और अलग-अलग स्क्रीन पर दर्शकों से कमाई का पूरा हिसाब महत्वपूर्ण होगा।
इसी वजह से BCCI की पैकेजिंग रणनीति भी काफी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अगले IPL टेंडर में राइट्स को और ज्यादा अलग-अलग पैकेज में बांटा जा सकता है। इसमें कनेक्टेड टीवी के लिए अलग पैकेज का विकल्प भी शामिल हो सकता है।
अगर ऐसा होता है तो अगले IPL मीडिया राइट्स ऑक्शन में जी एंटरटेनमेंट समेत ज्यादा कंपनियों के लिए बोली लगाने का रास्ता खुल सकता है।
टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फैजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) के बीच चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर चल रहा विवाद अब पारंपरिक डीटीएच से आगे बढ़ गया है। टाटा प्ले की स्मार्ट कनेक्टेड टीवी सर्विस में भी अब सोनी के चैनल उपलब्ध नहीं हैं। दोनों कंपनियों के बीच मामला टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) में चल रहा है और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होनी है।
यह विवाद शुरुआत में चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन और कमर्शियल शर्तों को लेकर था, लेकिन अब इसका असर टीवी देखने के नए तरीकों पर भी दिखाई दे रहा है। टाटा प्ले जैसे डिस्ट्रीब्यूटर कनेक्टेड टीवी की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं ब्रॉडकास्टर्स अलग-अलग स्क्रीन पर अपने कंटेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
टाटा प्ले स्मार्ट पर 500 से ज्यादा लाइव चैनल
टाटा प्ले ने Tata Play Smart के जरिए कनेक्टेड स्क्रीन पर अपनी टीवी सर्विस का विस्तार किया है। इसकी ऐप लिस्टिंग के मुताबिक, यहां स्पोर्ट्स, न्यूज, फिल्म और जनरल एंटरटेनमेंट समेत 500 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल उपलब्ध हैं।
इसमें स्टार प्लस, जी टीवी, कलर्स, स्टार स्पोर्ट्स, स्टार गोल्ड, जी सिनेमा, एमटीवी, स्टार मां, जी तेलुगु, सन टीवी और स्टार विजय जैसे प्रमुख चैनल शामिल हैं। हालांकि, सोनी के चैनल Tata Play Smart पर उपलब्ध नहीं हैं। इस तरह टाटा प्ले और सोनी के बीच चल रहे विवाद का असर अब एक और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहा है।
डीटीएच पर चुनिंदा पैक और ए ला कार्टे में मिल रहे सोनी चैनल
टाटा प्ले की डीटीएच सर्विस पर सोनी के चैनल पूरी तरह से बंद नहीं हैं। ये चैनल ए ला कार्टे विकल्प और कुछ प्रीमियम पैक के जरिए उपलब्ध हैं। हालांकि, वे अभी भी टाटा प्ले के बेस चैनल पैक्स का हिस्सा नहीं हैं।
टाटा प्ले और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने इस मामले पर औपचारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
कनेक्टेड टीवी की तरफ बढ़ रहे डिस्ट्रीब्यूटर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब डीटीएच कंपनियां सैटेलाइट आधारित टीवी से आगे बढ़कर कनेक्टेड टीवी में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
कनेक्टेड टीवी के जरिए लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक ही इंटरफेस पर उपलब्ध कराया जा सकता है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इससे दर्शकों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने का एक और रास्ता मिलता है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स को पारंपरिक पे-टीवी के अलावा नए प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है।
लेकिन टाटा प्ले स्मार्ट से सोनी चैनलों की गैर-मौजूदगी यह दिखाती है कि नए प्लेटफॉर्म आने के बावजूद पुराने कमर्शियल विवादों का असर इन नई टीवी सर्विसेज पर भी पड़ सकता है।
त्योहारों के सीजन में भी समाधान नहीं
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव गौरव बनर्जी ने पहले उम्मीद जताई थी कि त्योहारों के सीजन में यह लंबा चला आ रहा विवाद सुलझ सकता है। हालांकि, उनके बयान से किसी ठोस समाधान या समझौते की पुष्टि नहीं हुई थी।
जब उनसे पूछा गया कि क्या त्योहारों का समय कानूनी विवाद को खत्म कर सकता है, तो उन्होंने कहा था, “मुझे उम्मीद है।”
यह पूछे जाने पर कि सोनी के प्रमुख कंटेंट के साथ चैनल टाटा प्ले के बड़े चैनल पैक्स में वापस आ सकते हैं या नहीं, उन्होंने भी उम्मीद जताई थी। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया था कि दोनों कंपनियों के बीच बातचीत किस स्थिति में है या चैनलों की वापसी की कोई तय समयसीमा है।
उनका बयान टाटा प्ले पर ए ला कार्टे आधार पर सोनी चैनलों की उपलब्धता के संदर्भ में था। इससे किसी समझौते की पुष्टि नहीं हुई।
स्पोर्ट्स चैनलों की गैर-मौजूदगी भी अहम
सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल भी इस विवाद को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। लाइव स्पोर्ट्स टीवी दर्शकों को किसी खास समय पर टीवी देखने के लिए आकर्षित करता है और इससे चैनलों की मांग पर भी असर पड़ता है।
फिलहाल सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में वापस नहीं आए हैं। ऐसे में दोनों कंपनियां त्योहारों के महत्वपूर्ण टीवी सीजन में बिना किसी सार्वजनिक रूप से घोषित समाधान के आगे बढ़ रही हैं।
30 अक्टूबर को TDSAT में अगली सुनवाई
इस कमर्शियल विवाद के साथ कानूनी मामला भी जारी है। TDSAT ने 7 अगस्त को मामले की सुनवाई की थी और अगली सुनवाई 30 अक्टूबर के लिए तय की है।
TDSAT के पहले के एक आदेश में टाटा प्ले को दो सप्ताह के भीतर 40 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, सोनी समूह की टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनी Culver Max Entertainment की ओर से जारी 128.42 करोड़ रुपये के डिमांड नोटिस की वसूली पर रोक लगाई गई थी।
ट्रिब्यूनल ने विवादित डिमांड नोटिस पर कार्रवाई पर भी रोक लगाई थी और ब्रॉडकास्टर को विवाद से जुड़े स्थिर चित्र या स्क्रॉल प्रसारित नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद Culver Max ने TDSAT के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह मामला टाटा प्ले के डीटीएच पैक्स से सोनी चैनलों को हटाने के फैसले को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी पर रोक से जुड़ा था।
हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन सोनी को एक तय सोशल मीडिया संदेश साझा करने की अनुमति दी। इसमें बताया जा सकता था कि मामला अदालत में विचाराधीन है और सोनी के चैनल टाटा प्ले पर ए ला कार्टे सर्विस के जरिए उपलब्ध हैं।
टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का बदल रहा बाजार
यह विवाद ऐसे समय में चल रहा है जब टीवी डिस्ट्रीब्यूशन का पूरा बाजार बदल रहा है। ऑपरेटर अब कनेक्टेड टीवी और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी (FAST) की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं ब्रॉडकास्टर्स भी पे-टीवी, कनेक्टेड स्क्रीन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।
Vzy, Nelen और Sun Direct की Linear TV Streaming सर्विस जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सैकड़ों लाइव टीवी चैनल, ओटीटी प्लेटफॉर्म और मुफ्त कंटेंट को एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स पर JioStar, Sony Pictures Networks India, Warner Bros Discovery India और Zee Entertainment जैसे ब्रॉडकास्टर्स के चैनल भी शामिल हैं।
यहां एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिलती है। सोनी एक इंटीग्रेटेड कनेक्टेड टीवी सर्विस में शामिल है, जबकि टाटा प्ले के साथ उसका डिस्ट्रीब्यूशन विवाद टाटा प्ले की स्मार्ट सर्विस तक पहुंच गया है।
अभी भी समाधान का इंतजार
टाटा प्ले के लिए कनेक्टेड टीवी का विस्तार अपने चैनल एग्रीगेशन बिजनेस को डीटीएच कनेक्शन से आगे ले जाने का मौका है। वहीं सोनी के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूदगी दर्शकों तक पहुंच बढ़ाने का जरिया है।
लेकिन टाटा प्ले और सोनी का विवाद यह दिखाता है कि तकनीक और टीवी देखने के नए प्लेटफॉर्म आने भर से कंपनियों के बीच कमर्शियल शर्तों को लेकर विवाद अपने आप खत्म नहीं होते।
30 अक्टूबर की TDSAT सुनवाई के करीब आने के साथ अब मामला सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स में कब लौटेंगे। सवाल यह भी है कि कनेक्टेड टीवी का बाजार तेजी से बढ़ने और त्योहारों के सीजन में दोनों कंपनियां किसी समझौते तक पहुंच पाती हैं या नहीं।
फिलहाल गौरव बनर्जी की ओर से जताई गई उम्मीद के बावजूद किसी समझौते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। सोनी के चैनल टाटा प्ले के बेस पैक्स से बाहर हैं और Tata Play Smart की कनेक्टेड टीवी सर्विस पर भी उपलब्ध नहीं हैं।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड के सदस्यों ने भारती श्रीधर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दूसरी बार नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी कंपनी की 30 सितंबर 2026 को हुई 32वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में दी गई।
कंपनी के मुताबिक, भारती श्रीधर को 1 अप्रैल 2027 से पांच साल की दूसरी लगातार अवधि के लिए स्वतंत्र निदेशक के तौर पर फिर से नियुक्त किया गया है। उनका नया कार्यकाल 31 मार्च 2032 तक रहेगा। उनका मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। यह पुनर्नियुक्ति नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश और कंपनी के निदेशक मंडल की मंजूरी के आधार पर की गई है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर रोक नहीं है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारती श्रीधर ने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया है और उन्हें मीडिया व एंटरमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। टेलीविजन और प्रसारण क्षेत्र में विभिन्न मीडिया मंचों के साथ लंबे समय तक जुड़ाव के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव है।
कंपनी के अनुसार, मीडिया इंडस्ट्री में अपने प्रोफेशनल काम के अलावा वह ज्योतिष और अंक ज्योतिष की विशेषज्ञ और काउंसलर भी हैं। पिछले करीब 20 वर्षों में वह कई बड़े जनसंचार माध्यमों पर नजर आई हैं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों की पसंद, मीडिया संचार और टेलीविजन इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों को लेकर व्यापक समझ विकसित की है।
कंपनी ने कहा है कि उनका अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की समझ कंपनी के कामकाज और इंडस्ट्री से जुड़ाव के लिए उपयोगी नजरिया देती है।
कंपनी ने यह भी बताया है कि भारती श्रीधर फिलहाल किसी दूसरी कंपनी में निदेशक पद पर नहीं हैं। इसके अलावा, उनका कंपनी के किसी भी अन्य निदेशक के साथ कोई पारिवारिक संबंध नहीं है।
कंपनी ने यह भी पुष्टि की है कि भारती श्रीधर पर सेबी या किसी अन्य संबंधित प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 30 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और 11:45 बजे खत्म हुई। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए।
बैठक की शुरुआत कंपनी की कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने की। उन्होंने सदस्यों का स्वागत किया और कंपनी के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों का परिचय कराया। बैठक में कंपनी के ऑडिटर, कॉस्ट ऑडिटर, सेक्रेटेरियल ऑडिटर, इंटरनल ऑडिटर और स्क्रूटिनाइजर भी मौजूद रहे।
इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम. राजेंद्रन ने सदस्यों का स्वागत किया और जरूरी कोरम पूरा होने के बाद बैठक शुरू की। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के सफर, आर्थिक और मीडिया उद्योग की स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑडिटेड वित्तीय नतीजे, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट, अनक्वालिफाइड ऑडिटर्स रिपोर्ट और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स रिपोर्ट सदस्यों को पहले ही भेजी जा चुकी थी और इन्हें बैठक में पढ़ा हुआ माना गया।
AGM में इन प्रस्तावों को मंजूरी
AGM में कुल चार प्रस्ताव रखे गए। इनमें सामान्य और विशेष, दोनों तरह के प्रस्ताव शामिल थे।
शेयरधारकों ने सवाल भी पूछे
AGM में रजिस्टर्ड स्पीकर-शेयरहोल्डर्स अभिषेक जे. और महेश कुमार बोहरा ने अपने विचार रखे और कंपनी के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कुछ सवाल भी पूछे, जिनका जवाब कंपनी के मैनेजमेंट ने दिया। इसके बाद कोई और सवाल नहीं उठाया गया।
ई-वोटिंग के जरिए हुआ मतदान
कंपनी ने बताया कि रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 सुबह 9 बजे से 29 सितंबर 2026 शाम 5 बजे तक हुई। जिन सदस्यों ने रिमोट ई-वोटिंग के जरिए वोट नहीं किया था, उन्हें AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई। AGM खत्म होने के बाद भी 15 मिनट तक ई-वोटिंग खुली रखी गई, ताकि सदस्य अपना वोट दे सकें।
कंपनी के मुताबिक, सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए हैं। ई-वोटिंग के विस्तृत नतीजे और कंसोलिडेटेड स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट AGM खत्म होने के दो कार्यदिवस के भीतर जारी की जाएगी। इसे कंपनी की वेबसाइट, स्टॉक एक्सचेंजों और CDSL पर उपलब्ध कराया जाएगा।