उत्तराखंड में लॉन्च हुआ दैनिक भास्कर App : सीएम धामी ने किया शुभारंभ

यही इसे लोगों के बीच अलग पहचान देती है। सूचना की तेज गति और वायरल होने वाले फेक न्यूज के समय में सच्चाई और प्रमाणिकता बनाए रखना मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती है।

Last Modified:
Thursday, 16 October, 2025
dainikbhaskar


उत्तराखंड में मंगलवार को दैनिक भास्कर एप का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योगगुरु बाबा रामदेव और परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों ने बटन दबाकर एप को लॉन्च किया। सीएम धामी ने भास्कर को प्रदेश में इस नई शुरुआत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा- दैनिक भास्कर ने सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के दम पर मुकाम हासिल किया है।

उन्होंने बताया, दैनिक भास्कर एप के जरिए अब लोग रियल टाइम में खबरें पढ़ सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा- दैनिक भास्कर जापान के समाचार पत्र के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार है, ये जानकर उन्हें काफी खुशी हुई है।

सीएम धामी ने कहा कि कई बार सोशल मीडिया का दुरुपयोग भी होता है। लेकिन उन्होंने दैनिक भास्कर की पारदर्शिता और विश्वसनीयता की सराहना की। उन्होंने कहा- यही इसे लोगों के बीच अलग पहचान देती है। उन्होंने कहा कि सूचना की तेज गति और वायरल होने वाले फेक न्यूज के समय में सच्चाई और प्रमाणिकता बनाए रखना मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

न्यूजरूम से विधानसभा तक: शलभ मणि त्रिपाठी के सफर की कहानी

हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है।

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2026
ShalabhManiTripathi12

हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है। यह सफर सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के व्यस्त न्यूजरूम से शुरू हुआ था, जहां हर दिन डेडलाइन का दबाव होता था, खबरें तेजी से तैयार की जाती थीं और देश की नब्ज अक्सर सुर्खियां बनने से पहले ही महसूस कर ली जाती थी।

1 दिसंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के देवरिया में जन्मे शलभ मणि त्रिपाठी एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। ऐसे माहौल में उनका पालन-पोषण हुआ, जहां शिक्षा, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा को बहुत महत्व दिया जाता था। पढ़ाई में उनका विषय गणित था, लेकिन आगे चलकर कहानी कहने और लोगों तक उनकी बात पहुंचाने का हुनर ही उनकी असली पहचान बना।

साल 1998 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। इसके साथ ही शुरू हुआ लगभग दो दशक लंबा करियर, जिसने उन्हें जिलों, कस्बों और राजनीतिक मैदानों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने देश को बदलते हुए बहुत करीब से देखा। चाहे स्थानीय मुद्दों की रिपोर्टिंग हो या राष्ट्रीय घटनाक्रम की कवरेज, उन्होंने आम लोगों की उम्मीदों और चिंताओं को समझने की एक अलग पहचान बनाई। उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं थी, बल्कि तेजी से बदलते भारत की हकीकत को समझने का एक माध्यम थी।

दैनिक जागरण, अमर उजाला और कई टीवी न्यूज नेटवर्क जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उनका सफर आधुनिक भारत के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का गवाह बना। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने सवाल पूछना, जवाबदेही तय करना और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखना सीखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की सोच और कार्यशैली का आधार बने। फिर उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया।

साल 2016 में राजनीति, प्रशासन और जननीतियों पर वर्षों तक रिपोर्टिंग करने के बाद शलभ मणि त्रिपाठी ने खुद राजनीति में उतरने का फैसला किया। यह ऐसा बदलाव था, जिसे बहुत कम लोग सफलतापूर्वक कर पाते हैं। सत्ता को बाहर से देखने और फिर खुद जिम्मेदारी संभालने के लिए अलग तरह के विश्वास और संकल्प की जरूरत होती है। लेकिन यह फैसला उन मुद्दों पर सीधे काम करने की उनकी इच्छा को दर्शाता था, जिन पर वह वर्षों तक रिपोर्टिंग करते रहे थे।

उनकी इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय साल 2022 में सामने आया, जब वे देवरिया से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। कई लोगों के लिए यह उस लंबे करियर की उपलब्धि थी, जो जनता से जुड़ाव और जमीनी समझ पर आधारित था। वहीं शलभ मणि त्रिपाठी के लिए यह उन लोगों के प्रति एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत थी, जिनकी कहानियां वह कभी पत्रकार के रूप में दुनिया तक पहुंचाते थे।

उनकी कहानी को खास बनाती है सिर्फ उनके पद नहीं, बल्कि वह बदलाव जो उनकी यात्रा में दिखाई देता है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन को अलग-अलग नजरियों से देखा है। एक तरफ वह पत्रकार रहे, जिन्होंने बदलावों को दर्ज किया और दूसरी तरफ विधायक बने, जो उन बदलावों का हिस्सा हैं।

आज जब शलभ मणि त्रिपाठी अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो उनका सफर यह याद दिलाता है कि करियर हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। कई बार जीवन के एक अध्याय में सीखे गए कौशल ही अगले और बड़े उद्देश्य की नींव बनते हैं। न्यूजरूम की चर्चाओं से लेकर विधानसभा की बहसों तक, उनकी कहानी खुद को नए रूप में ढालने, लगातार प्रयास करते रहने और सार्वजनिक जीवन से गहरे जुड़ाव की कहानी है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'McCann' से अलग हुए संबित मोहंती

संबित मोहंती (Sambit Mohanty) ने ‘मैककैन’ (McCann) छोड़ दिया है। वह कंपनी के बेंगलुरु ऑफिस में बिजनेस लीडर और क्रिएटिव हेड की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2026
sambit

संबित मोहंती (Sambit Mohanty) ने ‘मैककैन’ (McCann) छोड़ दिया है। मई 2025 में उन्हें ‘मैककैन बेंगलुरु’ (McCann Bangalore) में विस्तारित भूमिका दी गई थी। इसके तहत वह बेंगलुरु ऑफिस में बिजनेस लीडर और क्रिएटिव हेड की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

संबित मोहंती को विज्ञापन इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वह अपनी मजबूत ब्रांड की समझ और कम्युनिकेशन स्किल्स के लिए जाने जाते हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़े ब्रांड्स और कैम्पेन पर काम किया है। इंडस्ट्री में उन्हें क्रिएटिव और बिजनेस दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रोफेशनल के तौर पर देखा जाता है। हालांकि फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम का खुलासा नहीं किया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

हैप्पी बर्थडे अनिल सिंघवी: बिजनेस पत्रकारिता में विश्वसनीयता और विश्लेषण का पर्याय हैं आप

बिजनेस न्यूज चैनल ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर और देश के प्रमुख शेयर बाजार विश्लेषकों में से एक अनिल सिंघवी का आज जन्मदिन है।

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
Anil Singhvi

बिजनेस न्यूज चैनल ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर और देश के प्रमुख शेयर बाजार विश्लेषकों में से एक अनिल सिंघवी का आज जन्मदिन है। अपनी गहन विश्लेषण क्षमता, जटिल बाजार अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने की कला और निवेशकों को सटीक सलाह देने के लिए मशहूर अनिल सिंघवी ने न केवल बिजनेस पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई, बल्कि लाखों निवेशकों के दिलों में भी खास जगह बनाई है।

राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले अनिल सिंघवी ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी और कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई पूरी की और शेयर बाजार में अपने करियर की शुरुआत की। पत्रकारिता में उनका प्रवेश संयोगवश हुआ, जब 35 साल की उम्र में उन्हें सीएनबीसी आवाज के लिए चुना गया।

अपने जुनून और मेहनत से उन्होंने बिजनेस पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका लोकप्रिय शो DNA ऑफ मार्केट आज लाखों निवेशकों की सुबह का अभिन्न हिस्सा है, जो उनकी सादगी और स्पष्ट संवाद शैली को दर्शाता है।

अनिल सिंघवी ने साबित किया है कि शेयर बाजार केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और भावनाओं का संगम है। उनकी सलाह ने अनगिनत निवेशकों को वित्तीय स्वतंत्रता की राह पर आगे बढ़ाया है। जी बिजनेस के अनुसार, आज अपने जन्मदिन पर भी उन्होंने लोगों को निवेश करने के तमाम टिप्स दिए हैं, जिससे उनकी निवेशकों के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण झलकता है।

सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही उन्हें शुभकामनाओं का तांता लगा हुआ है। सहयोगी, इंडस्ट्री के साथी और लाखों प्रशंसक उन्हें ‘मार्केट गुरु’, ‘निवेशकों का साथी’ और ‘आर्थिक शिक्षक’ जैसे शब्दों से सम्मानित कर रहे हैं। उनकी सहजता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों का चहेता बनाया है।

वित्तीय जागरूकता के दौर में अनिल सिंघवी का नाम उस बदलाव का प्रतीक है, जिसने बिजनेस पत्रकारिता को क्लासरूम से निकालकर हर घर तक पहुंचाया। हम उन्हें उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और कामना करते हैं कि वे यूं ही निवेशकों का मार्गदर्शन करते रहें और देश की आर्थिक समझ को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'ज़ी एंटरटेनमेंट' ने राज कुमार अग्रवाल को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

राज कुमार अग्रवाल ने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) जॉइन किया है। उन्हें 'ज़ी टीवी' (Zee TV), 'ज़ी अनमोल' (Zee Anmol) और '&TV' के मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है।

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2026
rajkumar

राज कुमार अग्रवाल (Rahj Kumar Agarwal) ने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Zee Entertainment Enterprises Limited) जॉइन किया है। उन्हें 'ज़ी टीवी' (Zee TV), 'ज़ी अनमोल' (Zee Anmol) और '&TV' के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उन्होंने अपने LinkedIn पोस्ट के जरिए इस नई भूमिका की जानकारी साझा की। राज कुमार अग्रवाल ने लिखा, “नई भूमिका, नई ऊर्जा और नई शुरुआत। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) में नई जिम्मेदारी संभाली है।”

उन्होंने अपने करियर के दौरान साथ देने वाले सहयोगियों और टीम का भी आभार जताया। साथ ही कहा कि वह आने वाले समय में नई चीजें सीखने, टीम के साथ काम करने और कंपनी की तरक्की में योगदान देने को लेकर उत्साहित हैं। राज कुमार अग्रवाल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब 'ज़ी एंटरटेनमेंट' (ZEEL) अपने टेलीविजन नेटवर्क में content और audience engagement strategy को और मजबूत करने पर फोकस कर रहा है।

इससे पहले वह करीब सात वर्षों तक 'जियोस्टार' (JioStar) के साथ जुड़े रहे। वहां वह आखिरी बार सीनियर डायरेक्टर - मार्केटिंग, 'कलर्स' (Colors) की भूमिका निभा रहे थे।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सकारात्मक खबरों को जगह दे मीडिया, वरना युवा ‘कॉकरोच’ के पीछे चल पड़ेंगे: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि मीडिया को समाज में हो रहे अच्छे और सकारात्मक कामों को ज्यादा प्रमुखता से दिखाना चाहिए।

Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
CPRadhakrishnan541

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि मीडिया को समाज में हो रहे अच्छे और सकारात्मक कामों को ज्यादा प्रमुखता से दिखाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर सकारात्मक गतिविधियों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं होगी, तो युवाओं तक सही जानकारी नहीं पहुंचेगी और वे गलत दिशा में जा सकते हैं।

रविवार को मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ के 140वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि रचनात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता समाज को सही दिशा देने और लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी रिपोर्टिंग होनी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी। अन्यथा वे रुचि खो देंगे और ‘कॉकरोच’ का अनुसरण करने लगेंगे।”

उपराष्ट्रपति का यह बयान हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चर्चा में आए व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें अचानक चर्चा में आ जाती हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता। अगर कोई काम वास्तव में अच्छा है तो लोग एक सप्ताह, दस दिन या एक महीने बाद भी उसकी सराहना करेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब समाज का हर वर्ग इसमें योगदान दे। उन्होंने कहा कि देश का विकास किसी एक व्यक्ति, पार्टी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

राधाकृष्णन ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म है कि वह अच्छे कामों की सराहना करे और गलत कामों की निडर होकर आलोचना भी करे। हालांकि, समाचारों की रिपोर्टिंग तथ्यात्मक और निष्पक्ष होनी चाहिए, जबकि राय और विचारों के लिए संपादकीय पृष्ठ उचित स्थान है।

उन्होंने मीडिया के सामने बढ़ती चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक आज गलत सूचनाएं, जनता का घटता भरोसा, व्यावसायिक दबाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेजी से बढ़ता प्रभाव मीडिया के लिए बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं।

उपराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि आज लोग किसी मुद्दे को गहराई से समझने के बजाय सिर्फ हेडलाइन और कैप्शन देखकर ही राय बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया को समाज में करुणा, वैज्ञानिक सोच, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों जैसी सकारात्मक कहानियों को आगे लाना चाहिए, ताकि पत्रकारिता सामाजिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सके।

इस मौके पर उन्होंने ‘दीपिका’ अखबार की भी सराहना की और कहा कि इसने सामाजिक सौहार्द, शिक्षा के प्रसार, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सकारात्मक जनचर्चा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

वरिष्ठ पत्रकार अमित तिवारी का निधन, पत्रकारिता जगत में शोक की लहर

अपनी प्रभावशाली एंकरिंग, भाषा पर मजबूत पकड़ और सहज व्यक्तित्व के कारण वे सहकर्मियों और दर्शकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2026
Amit Tiwari

वरिष्ठ पत्रकार और 'एमपी तक' में एंकर रहे अमित तिवारी का कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया है। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। अमित तिवारी के असामयिक निधन की खबर से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। सहयोगियों, राजनीतिक हस्तियों, पत्रकारों और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर जिले के जैसीनगर क्षेत्र स्थित देवलचौरी गांव के निवासी अमित तिवारी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने 'एमपी तक' सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं। अपनी प्रभावशाली एंकरिंग, भाषा पर मजबूत पकड़ और सहज व्यक्तित्व के कारण वे सहकर्मियों और दर्शकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अमित तिवारी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने भी अमित तिवारी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से बुंदेलखंड और पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि अमित तिवारी का असमय जाना बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाला है।

पत्रकारिता जगत से जुड़े कई वरिष्ठ पत्रकारों और सहयोगियों ने भी उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। सहकर्मियों ने उन्हें सरल, सहज, मिलनसार और पेशे के प्रति समर्पित पत्रकार बताया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

बशीर बद्र को याद कर भावुक हुए प्रसून जोशी, बोले- उनकी शायरी पीढ़ियों तक जिंदा रहेगी

कवि और लेखक प्रसून जोशी ने भी बशीर बद्र के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक कविता साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
PrasoonJoshi512

पद्मश्री से सम्मानित मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र का गुरुवार को भोपाल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। डिमेंशिया की बीमारी के बाद उन्होंने कई साल पहले सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। उनके निधन से साहित्य और शायरी की दुनिया में शोक की लहर है।

‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ जैसे कालजयी शेर लिखने वाले बशीर बद्र अपनी सादगी भरी लेकिन दिल को छू लेने वाली शायरी के लिए जाने जाते थे। उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी और बातचीत का हिस्सा बन गईं।

15 फरवरी 1935 को फैजाबाद, अब अयोध्या, में जन्मे बशीर बद्र ने बहुत छोटी उम्र से शायरी लिखना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने महज सात साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। उनका मशहूर शेर ‘उजाले अपनी यादों के…’ भी उन्होंने किशोरावस्था में लिखा था।

बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी खासियत उसकी सरल भाषा और गहरी भावनाएं थीं। उन्होंने उर्दू शायरी को ऐसी बोलचाल की भाषा दी, जिसे हर वर्ग के लोग आसानी से महसूस कर सकें। उनकी रचनाओं में मोहब्बत, अकेलापन, जुदाई और इंसानी रिश्तों की गर्माहट साफ दिखाई देती थी।

उनके बेटे सैयद बद्र ने कहा कि ‘उजाले अपनी यादों के…’ सिर्फ एक शेर नहीं, बल्कि उनके पिता की पहचान है। उन्होंने कहा कि लोग उनकी शायरी को हमेशा याद रखें, क्योंकि वह जिंदगी और मोहब्बत की शायरी थी।

कवि और लेखक प्रसून जोशी ने भी बशीर बद्र के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक कविता साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।  

अधूरी है तेरी रचना ज़रा तू पूरा करने दे 

यहाँ एक चोट रखने दे वहाँ एक घाव भरने दे

यहीं काग़ज़ पे ये अल्फ़ाज़ सारे सूख जाएँगे

ज़रा सा फैल जाने दे ज़रा बूँदें बिखरने दे 

अभी अंगूर में हूँ और मुझे ख़ामोश रहना है 

सुराही में ज़रा शीशों में तू मुझको उतरने दे 

कहाँ बुझने का डर मुझको मैं कोई शमा थोड़े हूँ 

ज़रा सी ज़ुल्फ़ हूँ मुझको तू झोंकों से सँवरने दे

सुनी हैं धड़कनें उसकी कई चुपचाप कानों से 

यही उम्मीद है शायद मुझे बाँहों में मरने दे 

सुने तू बैठ कर मुझको नहीं ऐसी तमन्ना है 

मैं हूँ ट्रक पर लिखा एक शेर तू मुझको गुज़रने दे 

बशीर बद्र ने अपनी शायरी में जिंदगी के छोटे-छोटे एहसासों को बेहद खूबसूरती से शब्द दिए। यही वजह रही कि उनकी पंक्तियां संसद से लेकर कॉलेज कैंटीन तक हर जगह सुनाई देती थीं। उनके जाने से उर्दू अदब की दुनिया ने एक बड़ा नाम खो दिया है, लेकिन उनकी शायरी हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहेगी।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

ज्ञान परंपरा और साहित्य लेखन को नया आयाम दे रहा ‘हिंदी हैं हम’ अभियान: हरिवंश नारायण सिंह

दैनिक जागरण की ओर से ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘ज्ञानवृत्ति सम्मान’ और ‘कृति सम्मान’ समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह शामिल हुए।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
Harivansh Narayan Singh Dainik Jagran

हिंदी दैनिक ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) की ओर से ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में ‘ज्ञानवृत्ति सम्मान’ और ‘कृति सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने हिस्सा लिया और इस पहल की सराहना की।

हरिवंश नारायण सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम को लेकर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ज्ञान परंपरा, शोध परंपरा और साहित्य-लेखन को नया आयाम देने के उद्देश्य से आयोजित यह पहल सार्थक और सराहनीय है। उन्होंने कार्यक्रम के लिए जागरण परिवार का आभार भी जताया।

उन्होंने अपने एक अन्य पोस्ट में बताया कि इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस समारोह में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी पत्रकारिता के वर्तमान और भविष्य को लेकर चर्चा हुई।

गौरतलब है कि ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के जरिए ‘दैनिक जागरण’ लगातार हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े विषयों को मंच देने और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

‘कृषि जागरण’ को बड़ी राहत, कोर्ट ने जागरण प्रकाशन का ट्रेडमार्क मुकदमा किया खारिज

‘कृषि जागरण’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण पत्रकारिता के लिए लगभग तीन दशक से किए जा रहे कार्यों की मान्यता है।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2026
Krishi Jagran

 

दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने ‘जागरण प्रकाशन लिमिटेड’ (Jagran Prakashan Limited) द्वारा कृषि आधारित मैगजीन ‘कृषि जागरण’ (Krishi Jagran) के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ से जुड़ा मुकदमा खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में ‘कृषि जागरण’ को वर्ष 1996 से संबंधित नाम का पूर्व और वैध उपयोगकर्ता माना है।

जिला न्यायाधीश अरुल वर्मा की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी द्वारा दायर मुकदमा अनावश्यक और लंबी कानूनी लड़ाई साबित हुआ, जिससे प्रतिवादियों को सार्वजनिक अपमान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अदालत ने जागरण प्रकाशन लिमिटेड को ‘कृषि जागरण’ को 10 लाख रुपये बतौर जुर्माना देने का निर्देश भी दिया।

इसके साथ ही अदालत ने 29 सितंबर 2020 को जारी अंतरिम इंजंक्शन आदेश को भी निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ‘कृषि जागरण’ को पूर्व उपयोगकर्ता होने के बावजूद इस आदेश के कारण नुकसान उठाना पड़ा।

यह मामला सितंबर 2019 में शुरू हुआ था, जब जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने अदालत में दावा किया था कि ‘जागरण’ शब्द और उससे जुड़े ट्रेडमार्क पर उसका विशेष अधिकार है। कंपनी ने आरोप लगाया था कि ‘कृषि जागरण’ अपने प्रिंट प्रकाशनों, वेबसाइट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ‘जागरण’ शब्द का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा कर रहा है और ‘दैनिक जागरण’ समूह की प्रतिष्ठा का लाभ उठा रहा है।

वहीं, ‘कृषि जागरण’ ने अदालत में कहा कि वह सितंबर 1996 से लगातार प्रकाशित हो रही कृषि क्षेत्र की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका है और वर्षों से स्वतंत्र पहचान के साथ कार्य कर रही है। प्रतिवादियों की ओर से शुरुआती संस्करणों, आरएनआई पंजीकरण, ट्रेडमार्क दस्तावेजों और विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित संस्करणों समेत कई दस्तावेज अदालत में पेश किए गए।

अदालत ने अपने फैसले में माना कि ‘कृषि जागरण’ लंबे समय से कृषि पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय है और उसे पूर्व उपयोगकर्ता का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जागरण प्रकाशन यह साबित नहीं कर पाया कि ‘कृषि जागरण’ की वजह से पाठकों या बाजार में वास्तविक भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

फैसले में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ‘कृषि जागरण’ एक कृषि विषयक मासिक पत्रिका है, जबकि ‘दैनिक जागरण’ सामान्य समाचार पत्र है। दोनों की प्रकृति, पाठक वर्ग और प्रकाशन शैली अलग-अलग हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि किसी पूर्व उपयोगकर्ता के खिलाफ बाद में ट्रेडमार्क अधिकार के आधार पर रोक लगाने की कोशिश न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे मुकदमे प्रतिस्पर्धा को सीमित करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने जैसे प्रतीत होते हैं।

‘कृषि जागरण’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण पत्रकारिता के लिए लगभग तीन दशक से किए जा रहे कार्यों की मान्यता है। ‘कृषि जागरण’ के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ एम.सी. डॉमिनिक ने कहा कि कठिन कानूनी लड़ाई के बावजूद उसने अपने पेशेवर मूल्यों और कृषि समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता को बनाए रखा। संस्था ने मीडिया जगत, कृषि क्षेत्र और शुभचिंतकों का आभार जताते हुए कहा कि ‘कृषि जागरण’ आगे भी भारतीय कृषि और ग्रामीण भारत की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जन्मदिन विशेष: मीडिया और डिजिटल इनोवेशन का मजबूत चेहरा हैं कैलाशनाथ अधिकारी

वर्तमान में वह श्री अधिकारी ब्रदर्स नेटवर्क के पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म ‘गवर्नेंस नाउ’ का नेतृत्व कर रहे हैं, साथ ही कंपनी के ब्रॉडकास्टिंग और कंटेंट डिवीजन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2026
Kailashnath Adhikari

श्री अधिकारी ब्रदर्स नेटवर्क (Sri Adhikari Brothers Network) के मैनेजिंग डायरेक्टर कैलाशनाथ अधिकारी का नाम आज मीडिया, पब्लिक पॉलिसी और डिजिटल कंटेंट की दुनिया में एक मजबूत पहचान बन चुका है। 26 मई को उनके जन्मदिन पर कैलाशनाथ अधिकारी को मीडिया और कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों ने उनकी बहुआयामी उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता के लिए शुभकामनाएं दीं।

कैलाशनाथ अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (London School of Economics) से अकाउंटिंग में डबल पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में योजना आयोग (Planning Commission) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर काम किया। उस दौर में उनकी कार्यशैली और पॉलिसी समझ को लेकर ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ ने भी उन्हें युवा पॉलिसी प्रोफेशनल्स में प्रमुखता से जगह दी।

समय के साथ कैलाशनाथ अधिकारी ने पब्लिक पॉलिसी से मीडिया और बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और श्री अधिकारी ब्रदर्स नेटवर्क की विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में वह समूह के पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) का नेतृत्व कर रहे हैं, साथ ही कंपनी के ब्रॉडकास्टिंग और कंटेंट डिवीजन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

उनके नेतृत्व में ‘गवर्नेंस नाउ’ ने 12 साल पूरे किए हैं और यह प्लेटफॉर्म देश के पॉलिसी, प्रशासन और गवर्नेंस क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। इस मंच ने नीति निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।

कैलाशनाथ अधिकारी की महत्वपूर्ण पहलों में ‘Governance Now PSU IT Casebook’ भी शामिल है, जिसका विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके अलावा उनकी ‘Visionary Talk’ सीरीज को भी काफी सराहना मिली, जिसमें गवर्नेंस, बिजनेस और पब्लिक अफेयर्स से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों ने हिस्सा लिया।

मीडिया और पॉलिसी के अलावा कैलाशनाथ अधिकारी साहित्य और रचनात्मक लेखन से भी गहरा जुड़ाव रखते हैं। वह एक लेखक और कवि के रूप में भी पहचान रखते हैं और छात्र जीवन में साहित्यिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित हो चुके हैं।

मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें Happii Digital की ग्रोथ और समूह की डिजिटल कंटेंट रणनीति को नई दिशा देने के लिए भी जाना जाता है। ऐसे समय में जब मीडिया इंडस्ट्री तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रही है, कैलाशनाथ अधिकारी ने आधुनिक मीडिया सोच और संस्थागत अनुभव का संतुलित उदाहरण पेश किया है।

उनके काम और नेतृत्व को देखते हुए उन्हें Exchange4Media Content 40 Under 40 जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। मीडिया, गवर्नेंस, उद्यमिता और डिजिटल इनोवेशन के संगम पर काम करने वाले कैलाशनाथ अधिकारी को आज इंडस्ट्री में दूरदर्शी मीडिया लीडर के तौर पर देखा जाता है। समाचार4मीडिया की ओर से कैलाशनाथ अधिकारी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए