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'ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन' ने PUCL को भेजा कानूनी नोटिस, की ये मांग
मणिपुर के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (AMWJU) ने दिल्ली स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) को कानूनी नोटिस भेजा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
मणिपुर के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (AMWJU) ने दिल्ली स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस उस रिपोर्ट को लेकर भेजा गया है जिसमें मणिपुर के मैतेई-कुकी समुदायों के बीच हुए जातीय संघर्ष से जुड़ी पत्रकारों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
AMWJU ने PUCL से अपनी रिपोर्ट को 'बिना शर्त और तुरंत वापस लेने' और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि रिपोर्ट में कई बिना आधार और झूठे आरोप लगाए गए हैं, जो पत्रकारों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
पत्रकार संघ का आरोप है कि रिपोर्ट में यह कहा गया कि AMWJU की खबरों को चुनने या दबाने में 'पक्षपातपूर्ण भूमिका' रही है। इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी इशारा किया गया कि यूनियन का 'धमकी और दबाव' से कोई संबंध है। संघ का कहना है कि यह पूरी तरह झूठा और मानहानिकारक आरोप है।
AMWJU ने कहा कि पत्रकार संघ की सदस्यता का निर्धारण उसके संविधान और कानूनों के तहत होता है। इसमें वही पत्रकार शामिल हो सकते हैं जो आरएनआई (Registrar of Newspapers for India) से पंजीकृत मीडिया संस्थानों में कार्यरत हैं। संघ ने यह भी कहा कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले PUCL ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया, जो 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' का उल्लंघन है।
संघ की ओर से वकील हिजाम चंद्रकुमार ने बयान में कहा कि बिना जांचे-परखे ऐसे आरोप लगाना AMWJU की दशकों पुरानी साख और पत्रकारिता की नैतिकता को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अगर PUCL ने 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट वापस नहीं ली, तो यूनियन भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत मानहानि का आपराधिक मामला और हरजाने का दीवानी मुकदमा दायर करेगी।
PUCL की रिपोर्ट में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि हिंसा 'स्वतः नहीं भड़की' बल्कि इसे 'संगठित तरीके से अंजाम दिया गया', जिसमें कुछ मैतेई समूहों की भूमिका बताई गई।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए जो जातीय हिंसा और नफरत फैलाने वाले भाषणों के मामलों की जांच करे। PUCL की टीम ने राहत शिविरों में जाकर पीड़ितों से मुलाकात भी की थी।
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