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न्यूज रूम में AI और संस्थानिक पत्रकारिकता का भविष्य: सारंग उपाध्याय

बहरहाल चिंता की बात यह है कि रिपोर्ट कहती है कि कई न्यूज़रूम्स अब भी स्पष्ट एथिक्स गाइडलाइंस की कमी से जूझ रहे हैं। भारत के लिए रिपोर्ट चेतावनी और संभावना, दोनों साथ लेकर आती है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago

सारंग उपाध्याय, पत्रकार, लेखक।

2025 बीत रहा है और पूरी दुनिया में एआई टेक्नॉलॉजी के प्रभावों और लगातार बढ़ते हस्तक्षेप की खबरों के बीच 2026 की दस्तक है। एआई के चलते पूरी दुनिया के न्यूज रूम बदल रहे हैं। मीडिया प्लेटफॉर्म बदल रहे हैं। ऐसा कोई क्षेत्र और आयाम नहीं बचा है जो आज एआई से अछूता हो। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, वित्त से लेकर प्रबंधन हर जगह एआई ने कार्यशैली बदल दी है। खास बात यह है कि एआई का सबसे गहरा असर मीडिया और पत्रकारिता पर पड़ा है। अब तस्वीरें हों या ध्वनि, वीडियो हों या टेक्स्ट हर जगह एआई मौजूद है जो ना केवल खबरें लिख रहा है बल्कि रिकॉर्ड कर रहा है और एंकर के रूप में टीवी पर उपस्थित है।

वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ न्यूज़ पब्लिशर्स (WAN-IFRA) की 12 मई 2025 को आई अपडेटेड रिपोर्ट द एज ऑफ एआई इन द न्यूज रूम (The Age of AI in the Newsroom) मीडिया और न्यूज रूम में बदलाव की चौंकाने वाली कहानी कह रही है। 100 से अधिक वैश्विक मीडिया हाउसेज़ के केस स्टडीज़ पर आधारित यह रिपोर्ट ग्लोबल साउथ के मीडिया हाउसेज़ पर केंद्रित है जहां पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और उभरते डिजिटल स्टार्टअप्स दोनों के केस स्टडीज़ शामिल हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह एआई ने रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और न्यूज़रूम एफिशिएंसी की परिभाषा ही बदल दी है। कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने ट्रांसलेशन, से लेकर ऑटोमशन, चैट आधारित पाठक संवाद और पर्सनलाइज्ड न्यूज़ रेकमेंडेशन में एआई समाधान अपनाए हैं। हालांकि इनके प्रभाव का मूल्यांकन अभी शोध अवस्था में है। भारत के संदर्भ में रिपोर्ट इसे डिजिटल इंडिया पहल और 2024 के लोकसभा चुनावों से जोड़ा गया है, जब एआई ने डीपफेक की पहचान और उनकी रोकथाम में बड़ी भूमिका निभाई।

बहरहाल चिंता की बात यह है कि रिपोर्ट कहती है कि कई न्यूज़रूम्स अब भी स्पष्ट एथिक्स गाइडलाइंस की कमी से जूझ रहे हैं। भारत के लिए रिपोर्ट चेतावनी और संभावना, दोनों साथ लेकर आती है। रिपोर्ट बता रही है कि एआई मीडिया उद्योग को अधिक दक्ष और स्केलेबल बना सकता है, लेकिन यदि पारदर्शिता, जिम्मेदारी और संपादकीय संतुलन नहीं बनाए गए तो यह मीडिया विश्वास और लोकतांत्रिक सूचना व्यवस्था को कमजोर भी कर सकता है।

दरअसल, वैश्विक स्तर पर न्यूज रूम्स में एआई की घुसपैठ ने कार्यशैली को क्रांतिकारी रूप से बदला है, लेकिन इससे मीडिया की साख पर संकट मंडरा रहा है। 2025 तक, एआई से जनरेटेड कंटेंट, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और डेटा विश्लेषण ने समाचार उत्पादन को तेज किया है, मगर डिसइन्फॉर्मेशन, डीपफेक और पक्षपात की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फरवरी 2025 के एआई समिट में कहा था- एआई को समावेशी और सतत् बनाना चाहिए, ताकि यह लोगों और ग्रह के लिए काम करे। मीडिया में इसका उपयोग विविधता को मजबूत करेगा, न कि विभाजन पैदा करेगा।

आज के न्यूज़ रूम में रिपोर्टर और संपादक के साथ-साथ एल्गोरिद्म और डेटा मॉडल भी सक्रिय हैं। अमेरिका की एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस सालों से वित्तीय परिणामों और खेल स्कोर की ख़बरें एआई से तैयार कर रही है। रॉयटर्स ने भी यही कदम उठाया। परिणाम यह हुआ कि आंकड़े-आधारित ख़बरें पहले से कहीं तेज़ और अधिक सटीक रूप में आने लगीं। लेकिन साथ ही पत्रकारों में यह चिंता भी बढ़ी कि मशीनें उनके काम को धीरे-धीरे हाशिए पर न धकेल दें।

इस संदर्भ में 48 देशों में 97,000 से अधिक ऑनलाइन समाचार उपभोक्ताओं के सर्वे पर आधारित ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म की डिजिटल न्यूज रिपोर्ट 2025 महत्वपूर्ण है। यह रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के 65% से अधिक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अब किसी न किसी रूप में एआई निर्मित कंटेंट का उपयोग करते हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि चैटजीपीटी जैसे जनरेटिव चैटबॉट्स 35 वर्ष से कम आयु के लोगों के बीच खबर तक पहुंचने का नया माध्यम बन रहे हैं, यानी आने वाली पीढ़ी के लिए न्यूज़ वेबसाइट की बजाय एआई संवाद ज़्यादा स्वाभाविक स्रोत बन सकता है। यही नहीं इस रिपोर्ट में चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि केवल 9% लोग एआई चैटबॉट्स से खबरें लेते हैं, जबकि समाचार पर विश्वास दर 40 फीसदी पर ठहर गई है। यह स्थिति सोचने पर मजबूर करती है कि एआई अवसर है या खतरा?

एक तरह से भारतीय न्यूज इंडस्ट्री के साथ-साथ पूरी वैश्विक मीडिया में एआई एक चुनौती की तरह है। संस्थानिक पत्रकारिता के लिए यह चुनौती का समय है और 2026 में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उम्मीद पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की दुनिया अपने सामने खड़ी इस चुनौती से जूझने के लिए खुदको तैयार रखेगी। एआई और तकनीकी रूप से रुपांतरकारी इस समय के बीच आप सभी मीडिया के मित्रो साथियों को नए साल की बधाई और शुभकामनाएं।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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