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ब्रैंड मार्केट व बिखरे कंटेंट इकोसिस्टम में ऐड सेल्स की बदलती भूमिका पर बड़ा विमर्श
क्या पारंपरिक ऐड सेल्स (ad sales) आज के बदलते प्लेटफॉर्म और बदलती ब्रैंड अपेक्षाओं के दौर में अब भी प्रासंगिक है? यही सवाल e4m रेवेन्यू लीडर्स कॉन्फ्रेंस में इंडस्ट्री के दिग्गजों ने उठाया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
क्या पारंपरिक ऐड सेल्स (ad sales) आज के बदलते प्लेटफॉर्म और बदलती ब्रैंड अपेक्षाओं के दौर में अब भी प्रासंगिक है? यही सवाल e4m रेवेन्यू लीडर्स कॉन्फ्रेंस में इंडस्ट्री के दिग्गजों ने उठाया। चर्चा का मुख्य बिंदु यह था कि किस तरह से आज के बिखरे हुए कंटेंट इकोसिस्टम और सलाहकार भूमिका की अपेक्षा करने वाले ब्रैंड्स के बीच ऐड सेल्स को खुद को कैसे बदलना होगा।
इस पैनल में HT मीडिया ग्रुप के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सत्यजीत सेनगुप्ता, ब्रैंडपल्स ग्लोबल की चीफ ग्रोथ ऑफिसर मोना जैन, Yaap के सीनियर पार्टनर मेनन कपूर और मोटोरोला मोबिलिटी (लेनोवो कंपनी) में इंडिया मार्केटिंग लीड (प्रीमियम और फ्लैगशिप फोन्स) लक्ष्य कात्याल शामिल थे। सेशन का संचालन स्नैप इंडिया की हेड ऑफ ऐडवरटाइजिंग सॉल्यूशंस नेहा जॉली सहनी ने किया।
सेशन की शुरुआत करते हुए मोना जैन ने यह स्पष्ट किया कि ऐड सेल्स का दौर खत्म होने की बात अतिशयोक्तिपूर्ण है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ऐड सेल्स खत्म हो गया है। सेल्स प्रोफेशनल वे लोग हैं जो ब्रॉडकास्टर या पब्लिशर का प्रस्ताव क्लाइंट तक पहुंचाते हैं।"
उन्होंने स्वीकार किया कि ब्रैंडेड कंटेंट की भूमिका काफी बढ़ गई है और अब सेल्स केवल एफसीटी बेचने या रेट नेगोशिएट करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "आज के मार्केटर अपेक्षा करते हैं कि आप केवल पहुंच और इंप्रेशंस से आगे बढ़कर उनके साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक स्तर पर जुड़ने वाले समाधान दें। सेल्स प्रोफेशनल को अपने आप को अपडेट करना होगा।"
मोना ने यह भी बताया कि किस तरह कंटेंट का इस्तेमाल कई प्लेटफॉर्म पर फैल चुका है, जिसमें टीवी, ओटीटी, यूट्यूब आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा, "आज का उपभोक्ता बेचैन है, उसे कुछ भी आसानी से नहीं बेचा जा सकता। प्रतियोगिता बहुत बढ़ गई है। ऐसे में ब्रैंड्स को इमोशनल कनेक्शन बनाना होगा।"
उन्होंने कहा कि इसके लिए सेल्स प्रोफेशनल्स को क्लाइंट के ब्रैंड, सेगमेंट, जियोग्राफी और ऑडियंस की गहरी समझ होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "आज क्लाइंट चाहता है कि सेल्सपर्सन उसके साथ इंटेलेक्चुअल बातचीत कर सके, नहीं तो वह किसी और को मौका देगा।"
सत्यजीत सेनगुप्ता ने भी इस बात से सहमति जताई कि ऐड सेल्स खत्म होने की बात जल्दबाजी है। उन्होंने कहा, "मैंने 90 के दशक से ऐड सेल्स में काम किया है और हमारी 90-95% कमाई अब भी सीधे विज्ञापन से ही होती है।"
उन्होंने माना कि प्रोफेशन में बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "20 साल पहले हम खुद को 'ब्रैंड सॉल्यूशन पार्टनर' कहने लगे थे, लेकिन असली फर्क टाइटल से नहीं, समझ से पड़ता है कि ब्रैंड सॉल्यूशन का असली मतलब क्या है।"
उन्होंने एक वाकया साझा किया, "हाल ही में मुंबई में एक नॉन-एडवरटाइजर से मिलने पर उसने सबसे पहले कहा, 'आपकी लैंग्वेज बदल गई है।' यही असल फर्क है। जब तक आप CMO से उसी भाषा में बात नहीं करेंगे, उसे मूल्य नहीं दिखेगा।"
उन्होंने निष्कर्ष में कहा, "तीन बातों का संतुलन बनाना जरूरी है- मार्केटर की समस्या, हमारे प्रोडक्ट्स और मार्केट इनसाइट्स। यदि आप इन्हें जोड़ देंगे, तो सही समाधान मिलेगा।"
बातचीत आगे बढ़ी तो चर्चा क्रिएटर-आधारित कैंपेन और विज्ञापनदाताओं व प्लेटफॉर्म के बीच बढ़ती दूरी की तरफ मुड़ी।
याॅप के मेनन कपूर ने कहा, "कंटेंट कंजम्प्शन का फॉर्मेट बदल गया है। पहले एक ad तीन से छह महीने तक चल जाती थी। आज 'तीन सेकंड रूल' लागू हो गया है। लोग सेकंडों में कंटेंट खा जाते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "10% लोग शायद इस वक्त भी reels देख रहे होंगे। भारत में हर तरह का कंटेंट देखा जाता है, यहां तक कि क्रिंज कंटेंट भी।"
उन्होंने यह भी कहा कि वाइरालिटी का पीछा करना गलत है। "अच्छा कंटेंट वही है जो आपके ब्रैंड के साथ लंबे समय तक जुड़ता है। केवल जो लोग देखना चाहें, वही कंटेंट मायने रखता है।"
मोना जैन ने छोटे बाजारों में राष्ट्रीय ब्रैंड्स की चुनौतियों की बात की। उन्होंने कहा, "कई ब्रैंड सोचते हैं कि स्थानीय भाषा या रीजनल इन्फ्लुएंसर से वे जुड़ जाएंगे, लेकिन हमारी स्टडी बताती है कि स्थानीय ब्रैंड्स का दशकों पुराना भावनात्मक जुड़ाव उन्हें आगे रखता है।"
उन्होंने कहा, "कई बार बड़े बजट होने के बावजूद राष्ट्रीय ब्रैंड स्थानीय ब्रैंड्स की बराबरी नहीं कर पाते, जब तक कि वे स्थानीय हीरो के साथ क्रिएटिव और नेचुरल स्टोरीटेलिंग नहीं करते।"
मोना जैन ने बताया कि अब ब्रैंड मुख्य रूप से प्रभाव को मापने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अधिकतर ब्रीफ अब ब्रैंड लिफ्ट स्टडी, ब्रैंड पर्सेप्शन और कंटेंट एसोसिएशन पर आधारित होते हैं।"
उन्होंने बताया, "यह डेटा अब sales टीम के लिए हथियार बन गया है। अब केवल impressions बेचने का जमाना नहीं रहा, बल्कि ब्रैंड सेंटिमेंट और इमोशनल कनेक्शन बनाना पड़ता है।"
मोना जैन ने कहा, "आज सेल्सपर्सन को डेटा को समझने और इंटरप्रेट करने में माहिर होना पड़ेगा और मार्केटर की भाषा बोलनी होगी। तभी असली एंगेजमेंट बनेगा।"
बातचीत आगे बढ़ी कि किस तरह ब्रैंड्स को युवा और बिखरी हुई ऑडियंस तक पहुंचने के लिए अपने प्लेटफॉर्म, फॉर्मेट और मैसेजिंग में बदलाव करने होंगे।
सत्यजीत सेनगुप्ता ने बताया, "एचटी मीडिया के पास चार मजबूत प्लेटफॉर्म हैं- प्रिंट, डिजिटल, ऑडियो और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन। हमारा रेडियो चैनल फीवर आज भारत का सबसे बड़ा पॉडकास्ट नेटवर्क है।"
उन्होंने ऑडियंस बिहेवियर का विश्लेषण करते हुए कहा, "लोगों की लाइफ स्टेज के अनुसार कंटेंट प्राथमिकता बदलती है। जैसे ही वे करियर में आते हैं, न्यूज और बिजनेस पढ़ना शुरू कर देते हैं।"
उन्होंने Mint जैसे ब्रैंड्स का उदाहरण दिया जो कॉलेजों में रेकमेंड किए जा रहे हैं।
उन्होंने युवा ऑडियंस को जोड़ने के लिए PACE और Hindustan Olympiad जैसी पहलों का जिक्र किया, जो हर साल 6 लाख से ज्यादा छात्रों तक पहुंचती है।
उन्होंने बताया, "हम '5C फ्रेमवर्क' का पालन करते हैं- Context, Connect, Create, Communicate और Calibrate। हर बार किसी भी ऑडियंस, खासकर युवा ऑडियंस तक जाने से पहले इन पांच स्टेप्स को फॉलो करते हैं।"
मेनन कपूर ने डिजिटल कैंपेन में क्रिएटिविटी और परफॉर्मेंस को संतुलित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "यदि आप क्रिएटिविटी और परफॉर्मेंस को अलग मानेंगे तो नतीजे नहीं मिलेंगे, लेकिन पार्टनर बनाकर काम करेंगे तो शानदार रिजल्ट मिलेंगे।"
उन्होंने कहा, "कंटेंट क्वालिटी सीधे ad revenue को प्रभावित करती है। यदि कंटेंट अच्छा नहीं है तो चाहे कितना भी बजट लगा लो, काम नहीं करेगा।"
उन्होंने क्रिएटिव इन्वेस्टमेंट को भी महत्वपूर्ण बताया। "कई बार क्लाइंट केवल मीडिया पर ध्यान देते हैं, लेकिन रिपोर्ट खराब आने पर वे प्लेटफॉर्म को दोषी ठहराते हैं, न कि क्रिएटिव को।"
लक्ष्य कात्याल ने प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए मार्केटिंग में ऑडियंस सेगमेंटेशन और स्टोरीटेलिंग की बात की। उन्होंने कहा, "जैसे Hyundai Creta और Creta N Line का एक जैसा ट्रीटमेंट नहीं हो सकता, वैसे ही Motorola H60 और H60 Ultra का भी नहीं हो सकता।"
लक्ष्य ने कहा, "प्रीमियम कंज्यूमर केवल फीचर्स नहीं, बल्कि स्टाइल और इमोशन खरीदता है।" उन्होंने कहा, "कंटेंट को शुरू से एंड-टू-एंड सोचना होगा। हाई-डेफिनिशन वर्टिकल फॉर्मेट, CTV, एयरपोर्ट टचप्वाइंट आदि का भी ध्यान रखना होगा।"
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर लक्ष्य ने कहा, "अब केवल स्क्रिप्ट देने का जमाना नहीं रहा, बल्कि ब्रैंड और इन्फ्लुएंसर मिलकर कंटेंट क्रिएट करें तो वह ज्यादा असरदार होता है।"
अंत में उन्होंने कहा, "प्रीमियम पोजिशनिंग के लिए कंटेंट एंगेजमेंट में भी बदलाव करना होगा। केवल टेक्नोलॉजी की बातें करते रहने से ऑडियंस बोर हो जाएगी। AI आधारित टूल्स, QR इंटीग्रेशन और CTV जैसे इंटरैक्टिव टूल्स से जुड़ाव और वैल्यू दोनों मिलती है।"
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