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प्रिया नायर की ताजपोशी से HUL में नेतृत्व का नया अध्याय, परंपरा से हटकर नई सोच की दस्तक
1 अगस्त से प्रिया नायर हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड की नई मैनेजिंग डायरेक्टर व चीफ एग्जिक्युटिव ऑफिसर बनेंगी। इस नियुक्ति के से HUL के इतिहास में पहली बार कोई महिला शीर्ष पद संभालने जा रही है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
नूर फातिमा वारसिया, ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर, बिजनेस वर्ल्ड ।।
1 अगस्त 2025 से प्रिया नायर हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) की नई मैनेजिंग डायरेक्टर व चीफ एग्जिक्युटिव ऑफिसर (CEO) बनेंगी। इस ऐतिहासिक नियुक्ति के साथ HUL के लंबे और प्रतिष्ठित इतिहास में पहली बार कोई महिला शीर्ष पद संभालने जा रही है। लेकिन यह केवल एक प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं है। यह भारत के कॉरपोरेट नेतृत्व की परिभाषा में एक गहरे बदलाव का संकेत भी देती है, जिसमें अब पारंपरिक योग्यताओं की बजाय वास्तविक अनुभव, रणनीतिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक समझ को प्राथमिकता दी जा रही है।
कंज्यूमर इनसाइट्स से कॉरपोरेट की कमान तक
परंपरागत रूप से HUL जैसे कंपनियों में CMD स्तर की नियुक्तियां फाइनेंस या ऑपरेशन्स पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों में सीमित रही हैं। लेकिन प्रिया नायर ने अपने करियर की शुरुआत उपभोक्ता व्यवहार की समझ (consumer insights) से की, जो उन्हें एक अलग दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व की भूमिका में लाता है, ऐसा दृष्टिकोण, जिसे अब तक आंकड़ों और प्रोसेस की गहराई में उलझे विशेषज्ञ नियंत्रित करते आए थे। प्रिया उन कुछ चुनिंदा प्रोफेशनल्स में से हैं जिन्होंने मार्केटिंग, ब्रैंड बिल्डिंग और लोगों की गहरी समझ के दम पर अपनी नेतृत्व यात्रा तय की है।
उनकी नियुक्ति यह भी दिखाती है कि अब कॉरपोरेट भारत पारंपरिक "मिडल-क्लास मेल एग्जिक्युटिव" प्रोफाइल से आगे बढ़कर ऐसे लीडर्स को जगह दे रहा है, जिनकी मौजूदगी अधिक समावेशी और बहुआयामी हो।
29 साल का सफर, 13 अरब यूरो की वैश्विक जिम्मेदारी
प्रिया नायर ने 1995 में HUL में कदम रखा और तब से लेकर अब तक उन्होंने होम केयर, पर्सनल केयर और ब्यूटी एंड वेलबीइंग जैसे प्रमुख डिविजनों में अहम भूमिकाएं निभाईं। इसके बाद उन्होंने यूनिलीवर के वैश्विक स्तर पर काम संभाला और अंततः €12–13 अरब यूरो के पोर्टफोलियो वाले ग्लोबल ब्यूटी एंड वेलबीइंग बिजनेस की प्रेसिडेंट बनीं। इस भूमिका में उन्होंने डव, संसिल्क और वैसलीन जैसे ब्रैंड्स को न केवल परफॉर्मेंस, बल्कि उद्देश्य आधारित कहानी कहने (purpose-led storytelling) से भी जोड़ा।
लीडरशिप की परंपराओं को तोड़ती एक नई कहानी
उनकी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा भी इस बदलाव की गवाही देती है। उन्होंने मुंबई के सिडेनहम कॉलेज से अकाउंट्स और स्टैटिस्टिक्स में बीकॉम किया, फिर पुणे के सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट से मार्केटिंग में MBA किया और आगे चलकर हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एक मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया।
जहां उनके पूर्ववर्ती CEOs जैसे रोहित जावा (सेंट स्टीफंस + FMS), संजीव मेहता (CA, ICAI) और नितिन परांजपे (COEP + JBIMS) जैसे टॉप संस्थानों से आते रहे हैं, वहीं प्रिया का यह सफर यह बताता है कि अब केवल आईआईएम-आईआईटी जैसी ब्रैंडेड डिग्रियों से ऊपर उठकर गहराई, विशेषज्ञता और वास्तविक लीडरशिप अनुभव को अहमियत दी जा रही है।
पारिवारिक विरासत, लेकिन निजी मुकाम
प्रिया नायर के पिता कैप्टन सुकुमार वी. नायर भारतीय नौसेना में 1961 में कमीशन हुए थे और 1990 के दशक के अंत में मजगांव डॉक लिमिटेड (MDL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। जबकि उनके पिता की सेवा संस्थागत नेतृत्व से जुड़ी थी, प्रिया का करियर पूरी तरह निजी क्षेत्र की मेहनत और उपलब्धियों पर आधारित रहा है।
आधुनिक भारत की नई नेतृत्व सोच
प्रिया नायर का नेतृत्व आधुनिक भारत के उस नए युग का प्रतीक है जो समावेशी, उपभोक्ता-केंद्रित और बहुआयामी होता जा रहा है। नवी नगर और जी.डी. समानी स्कूल जैसे सामान्य पृष्ठभूमियों से लेकर HUL जैसी दिग्गज कंपनी के शीर्ष तक का उनका सफर नेतृत्व की पहुंच को व्यापक बना रहा है। वे उस नई पीढ़ी की नेता हैं जो कंज्यूमर इनसाइट्स, स्टोरीटेलिंग, निष्पादन और वैश्विक दृष्टिकोण में निपुण हैं, और जिन्होंने भारत के प्रतिष्ठित लेकिन 'सेकंड-टियर' माने जाने वाले संस्थानों से शिक्षा ली है।
अब नेतृत्व की परिभाषा सिर्फ पारंपरिक योग्यताओं को पूरा करने से नहीं तय होती। सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति लोगों, प्रोडक्ट, उद्देश्य और मुनाफे के बीच तालमेल बिठा सकता है और वह भी बड़े पैमाने पर। प्रिया नायर की नियुक्ति के साथ हिन्दुस्तान यूनिलीवर, जो लगभग एक सदी से भारतीय घरों का हिस्सा रहा है, शायद यह तय कर रहा है कि अब नेतृत्व किसे सौंपा जाना चाहिए और क्यों।
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