इस साझेदारी के तहत अक्साना एस्टेट्स एलएलपी (Axana Estates LLP) की ओर से 495 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
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नजारा टेक्नोलॉजीज में बड़ा निवेश, गेमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट में होगा नया अध्याय
प्लूटस वेल्थ मैनेजमेंट एलएलपी (Plutus Wealth Management LLP) के फाउंडर व मैनेजिंग पार्टनर अर्पित खंडेलवाल और कैरेटलेन (Caratlane) के फाउंडर मिथुन सचेटी ने नजारा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Nazara Technologies Limited) और इसके प्रमोटर्स विकास मित्रसेन और नितीश मित्रसेन के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत अक्साना एस्टेट्स एलएलपी (Axana Estates LLP) की ओर से 495 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे नजारा की हिस्सेदारी में वृद्धि होगी और कंपनी के वैश्विक गेमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट में अग्रणी बनने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
लेनदेन के प्रमुख विवरण:
प्रिफरेंशियल इश्यू: अक्साना एस्टेट्स एलएलपी, जिसके पार्टनर अर्पित खंडेलवाल और मिथुन सचेटी हैं, कंपनी में 5.40% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 495 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। यह निवेश 990 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर किया जाएगा। इस प्रस्ताव को कंपनी के बोर्ड से मंजूरी मिल गई है और यह शेयरधारकों व नियामकीय मंजूरियों के अधीन है। शेयर सेबी (आईसीडीआर) रेगुलेशंस, 2018 के तहत जारी किए जाएंगे।
ओपन ऑफर: प्लूटस वेल्थ मैनेजमेंट एलएलपी और अक्साना एस्टेट्स एलएलपी अन्य पार्टियों के साथ मिलकर नजारा में 26% अतिरिक्त हिस्सेदारी के लिए ओपन ऑफर लॉन्च करेंगे। यह ऑफर सेबी (एसएएसटी) रेगुलेशंस, 2011 के तहत होगा।
लेनदेन के बाद शेयरधारिता: यदि ओपन ऑफर पूरी तरह से स्वीकार किया जाता है, तो अधिग्रहणकर्ता और मौजूदा प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी लगभग 61.5% हो जाएगी।
रणनीतिक लाभ और नेतृत्व में निरंतरता:
यह साझेदारी नजारा को नए बाजारों तक पहुंचने, अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ उठाने और संचालन में दक्षता बढ़ाने में मदद करेगी।
नजारा के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर विकास मित्रसेन और ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ नितीश मित्रसेन के नेतृत्व में कंपनी स्वतंत्र रूप से कार्य करना जारी रखेगी।
यह निवेश कंपनी की ऑर्गेनिक ग्रोथ, रणनीतिक अधिग्रहण और नए बाजारों में विस्तार पर केंद्रित होगा।
नेताओं के विचार:
नजारा टेक्नोलॉजीज के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नितीश मित्रसेन ने कहा, "नजारा वैश्विक विकास के लिए तैयार है और अर्पित और मिथुन जैसे साझेदारों के साथ काम करने को लेकर हम उत्साहित हैं। उनकी विशेषज्ञता और विश्वास हमें नए आयामों तक पहुंचाने में मदद करेगा।"
अर्पित खंडेलवाल ने कहा, "नजारा में हमारा निवेश बढ़ाना हमारे लिए गर्व की बात है। यह साझेदारी कंपनी के प्रमोटर्स और टीम को विश्वस्तरीय गेमिंग और एंटरटेनमेंट ब्रैंड बनाने में मदद करेगी।"
मिथुन सचेटी ने कहा, "गेमिंग अब उपभोक्ता जुड़ाव का नया जरिया बन चुका है। नजारा के साथ साझेदारी कर हमें इसकी अपार संभावनाओं को खोलने और वैश्विक विकास को गति देने का अवसर मिला है।"
नजारा द्वारा ज़ेप्टो लैब के दो गेम्स का अधिग्रहण: इस साझेदारी के अलावा, नजारा ने बार्सिलोना स्थित गेम डेवलपर ज़ेप्टो लैब से ‘CATS: Crash Arena’ और ‘King of Thieves’ के अधिकार 7.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (~67 करोड़ रुपये) में खरीदने की घोषणा की है।
यह अधिग्रहण नजारा की वैश्विक मोबाइल गेमिंग बाजार में स्थिति को और मजबूत करेगा। कंपनी इन गेम्स को "नजारा पब्लिशिंग" ब्रैंड के तहत प्रकाशित करेगी।
नजारा टेक्नोलॉजीज का यह कदम भारत को वैश्विक गेमिंग मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने में सहायक होगा।
दोनों कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि इंटरनेट आधारित ऑडियो-विजुअल कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
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भारत में इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं को रेगुलेट करने को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट (Culver Max Entertainment) और जियोस्टार (JioStar) ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) और Application-based Linear Television Distribution (ALTD) सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।
दोनों कंपनियों ने TRAI को दिए अपने विस्तृत जवाब में कहा कि इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म पारंपरिक केबल, DTH या IPTV सेवाओं से पूरी तरह अलग हैं और उन्हें टेलीकॉम या ब्रॉडकास्टिंग डिस्ट्रीब्यूशन नियमों के तहत नहीं लाया जा सकता।
TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के संदर्भ के बाद यह कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इसमें पूछा गया है कि क्या इंटरनेट के जरिए टीवी जैसी सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स पर भी DTH और केबल ऑपरेटर्स जैसी लाइसेंसिंग और रेगुलेशन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
जियोस्टार और कल्वर मैक्स ने अपने जवाब में “एप्लिकेशन लेयर” और “नेटवर्क लेयर” के बीच अंतर पर जोर दिया। कंपनियों का कहना है कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म केवल इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हैं, जबकि वास्तविक नेटवर्क और डेटा ट्रांसमिशन टेलीकॉम कंपनियां करती हैं। इसलिए OTT सेवाओं को टेलीकॉम सेवा प्रदाता नहीं माना जा सकता।
दोनों कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि इंटरनेट आधारित ऑडियो-विजुअल कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ऐसे में OTT प्लेटफॉर्म्स पर टेलीकॉम जैसी लाइसेंसिंग शर्तें लागू करना संवैधानिक रूप से गलत होगा।
कंपनियों ने चेतावनी दी कि अगर FAST प्लेटफॉर्म्स पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और अनिवार्य नियम लागू किए गए तो इससे भारत के डिजिटल टीवी इकोसिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ेगा। जियोस्टार ने कहा कि FAST सेवाएं अभी शुरुआती और प्रयोगात्मक चरण में हैं, ऐसे में अत्यधिक रेगुलेशन निवेश और इनोवेशन दोनों को प्रभावित कर सकता है।
दोनों कंपनियों ने प्रसार भारती के साथ स्पोर्ट्स सिग्नल शेयरिंग और अनिवार्य चैनल कैरिज जैसे नियमों का भी विरोध किया। उनका कहना है कि ये नियम पारंपरिक प्रसारण व्यवस्था के लिए बने थे और इन्हें इंटरनेट आधारित सेवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता। मामले को भारत में तेजी से बदलते टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम के बीच पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स की बड़ी टकराहट के रूप में देखा जा रहा है।
एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने AI आधारित विज्ञापनों के लिए नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं। विज्ञापनों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है।
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एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (Advertising Standards Council of India - ASCI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार विज्ञापनों को लेकर नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं। मंगलवार को जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को भ्रमित होने से बचाना है।
ASCI ने इन नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम 2026 के अनुरूप तैयार किया है। फिलहाल यह ड्राफ्ट सुझावों के लिए सार्वजनिक किया गया है और लोग 13 जून तक अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
प्रस्तावित गाइडलाइंस के तहत AI आधारित विज्ञापनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी “हाई रिस्क” विज्ञापनों की है, जिन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया गया है। दूसरी श्रेणी “मीडियम रिस्क” विज्ञापनों की है, जिनमें यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य होगा कि कंटेंट AI की मदद से तैयार किया गया है। तीसरी श्रेणी “लो रिस्क” विज्ञापनों की है, जहां किसी लेबल की आवश्यकता नहीं होगी।
ASCI के अनुसार, AI का इस्तेमाल तब भ्रामक माना जाएगा जब वह लोगों को अवास्तविक उम्मीदें दिखाए, कमजोर वर्गों का शोषण करे या बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान, आवाज या चेहरे का उपयोग करे।
हालांकि केवल बैकग्राउंड म्यूजिक, सजावटी विजुअल्स या सामान्य डिजिटल इफेक्ट्स के लिए लेबल जरूरी नहीं होगा। ASCI का कहना है कि इन नियमों का मकसद संतुलन बनाना है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक चेतावनियों का बोझ भी न पड़े।
'ब्राइट आउटडोर मीडिया' (Bright Outdoor Media Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।
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V360 ग्रुप ने खुद को भारत की पहली लिस्टेड कम्युनिकेशन फर्म बताया है। कंपनी का कहना है कि यह भारतीय PR और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा पड़ाव है।
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V360 ग्रुप ने खुद को भारत की पहली लिस्टेड कम्युनिकेशन फर्म बताया है। कंपनी का कहना है कि यह भारतीय PR और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा पड़ाव है।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब कंपनी के ₹41.69 करोड़ के IPO से निवेशकों को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग से पहले कंपनी के 1.19 गुना सब्सक्राइब हो गए थे। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारत में स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन और ब्रैंड स्टोरीटेलिंग सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
कंपनी में ग्रोथ व स्ट्रैटजी की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट नैना भल्ला ने LinkedIn पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर अपने क्रेडेंशियल्स अपडेट कर दिए हैं।
नैना भल्ला ने इसे टीम के लिए गर्व का पल बताते हुए कहा कि यह रणनीतिक स्टोरीटेलिंग, बड़े विजन और लंबे समय तक मजबूत संस्थान बनाने की सोच का नतीजा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कंपनी की लीडरशिप टीम को भी दिया, जिसमें कुणाल किशोर, मनीषा चौधरी, गौरव पात्रा और वसुंधरा सिंह समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के कम्युनिकेशन सेक्टर के तेजी से प्रोफेशनल और संगठित होने का संकेत है। अब PR और कम्युनिकेशन एजेंसियां सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि बड़े और संस्थागत बिजनेस मॉडल के रूप में भी उभर रही हैं, जहां ग्रोथ, स्ट्रैटेजी और इंटीग्रेटेड ब्रैंड सॉल्यूशंस पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
पीआर और कम्युनिकेशन एजेंसी Kommune Brand Communications को टेक कंपनी 'इनमोबी' (InMobi) का देश में पब्लिक रिलेशंस और कम्युनिकेशन का नया जिम्मा मिला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पीआर और कम्युनिकेशन एजेंसी Kommune Brand Communications को टेक कंपनी 'इनमोबी' (InMobi) का देश में पब्लिक रिलेशंस और कम्युनिकेशन का नया जिम्मा मिला है। इस मामले से जुड़े लोगों ने 'एक्सचेंज4मीडिया' को इसकी पुष्टि की है।
इस साझेदारी के तहत Kommune, InMobi की भारत में सभी PR और कम्युनिकेशन गतिविधियों को संभालेगी। इसमें मीडिया रिलेशंस, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और ब्रैंड स्टोरीटेलिंग जैसे काम शामिल होंगे।
यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब InMobi विज्ञापन तकनीक, AI आधारित कंज्यूमर एंगेजमेंट और डिजिटल इनोवेशन पर तेजी से फोकस बढ़ा रही है। कंपनी भारतीय टेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपनी मजबूत पहचान और लीडरशिप पोजिशन को और मजबूत करना चाहती है।
बताया जा रहा है कि Kommune, InMobi के लिए ऐसी इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी तैयार करेगी, जिससे कंपनी की ब्रैंड विजिबिलिटी बढ़े और उसकी बिजनेस कहानी ज्यादा प्रभावी तरीके से सामने आए।
यह डील इस बात को भी दिखाती है कि भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और टेक बाजार में टेक कंपनियां अब सिर्फ मार्केटिंग ही नहीं, बल्कि अपनी साख और मजबूत ब्रैंड नैरेटिव बनाने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।
टियर-2, टियर-3 शहरों से उठ रही है उपभोक्ता क्रांति- वर्नाकुलर कंटेंट और रीजनल एड स्पेंड में ऐतिहासिक उछाल,
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कुछ साल पहले तक अगर कोई बड़ा ब्रैंड अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी बनाता था, तो नक्शे पर सिर्फ मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई के इर्द-गिर्द ही घेरा खिंचता था। बाकी भारत- जयपुर, इंदौर, पटना, सूरत, कोयंबटूर, मेरठ जैसे शहर और कस्बे महज एक 'अगली बड़ी संभावना' बनकर एजेंडे के आखिरी पन्ने पर पड़े रहते थे, लेकिन अप्रैल 2026 में जब हम यह आर्टिकल लिख रहे हैं, तब यह तस्वीर पूरी तरह पलट चुकी है।
टियर-2 और टियर-3 शहर अब केवल 'उभरते बाजार' नहीं रहे- वे भारत की मार्केटिंग, उपभोग और डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई धुरी बन चुके हैं। IAMAI-Kantar की 'Internet in India Report 2025' से लेकर ResearchAndMarkets की फरवरी 2026 की डिजिटल एड स्पेंड रिपोर्ट और Nielsen के ताजा विश्लेषण तक- हर बड़ी रिसर्च एजेंसी एक ही बात दोहरा रही है: भारत की ग्रोथ स्टोरी अब मेट्रो में नहीं, 'भारत' में लिखी जा रही है।
IAMAI-Kantar रिपोर्ट: 958 मिलियन इंटरनेट यूजर्स, ग्रामीण भारत की अगुवाई
जनवरी 2026 में जारी IAMAI और Kantar की 'Internet in India Report 2025' ने देश के डिजिटल परिदृश्य की एक नई और बेहद अहम तस्वीर पेश की।
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 958 मिलियन सक्रिय इंटरनेट यूजर्स (AIU) हैं, जो साल-दर-साल करीब 8% की वृद्धि है। ग्रामीण भारत इस विस्तार में अगुवाई कर रहा है- देश के कुल सक्रिय इंटरनेट यूजर्स में से 57% यानी लगभग 548 मिलियन लोग ग्रामीण इलाकों से हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट अपनाने की दर शहरी भारत से लगभग चार गुना तेज है- जो इस बात का सबूत है कि डिजिटल भारत की नींव अब गांवों और छोटे शहरों में रखी जा रही है।
शॉर्ट-वीडियो कंटेंट इस बदलाव का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। 588 मिलियन यूजर्स यानी भारत की कुल इंटरनेट आबादी का 61% अब शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कंटेंट देखता है। इसमें ग्रामीण यूजर्स की संख्या शहरी यूजर्स से थोड़ी ज्यादा हो गई है, और यह रुझान युवा दर्शकों में सबसे मजबूत है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी अब ग्रामीण उपभोक्ताओं की दुनिया में दस्तक दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि 44% यूजर्स वॉइस सर्च, इमेज-बेस्ड सर्च, चैटबॉट और AI फिल्टर जैसी AI-एनेबल्ड सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वर्नाकुलर कंटेंट: भाषा में है असली ताकत
IAMAI-Kantar की यही रिपोर्ट एक और बड़ा सच बताती है- भारत का नया डिजिटल उपभोक्ता अपनी मातृभाषा में सोचता है, समझता है और खरीदता है। अंग्रेजी अब उसकी पहली भाषा नहीं है।
73% से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स अब क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट देखते हैं- यह रुझान टियर-2 और टियर-3 शहरों में सबसे ज्यादा मजबूत है।
ShareChat- जो 15 भारतीय भाषाओं में संचालित होता है- के 350 मिलियन से ज्यादा सक्रिय यूजर्स हैं और इस प्लेटफॉर्म पर स्थानीय भाषाओं में कंटेंट की बेहद मजबूत पकड़ है। Dailyhunt, ShareChat, Moj जैसे वर्नाकुलर कंटेंट प्लेटफॉर्म अब कई इलाकों में उपभोक्ताओं का डिफॉल्ट डिजिटल अनुभव बन चुके हैं।
ब्रैंड्स ने इस बदलाव को पहचाना और तेजी से कदम उठाए। Meesho ने 11 भारतीय भाषाओं में समर्पित कंटेंट बनाकर छोटे शहरों में गहरी पैठ बनाई। Zomato के ऐप को रीजनल भाषाओं में उपलब्ध कराने के बाद टियर-2 शहरों से ऑर्डर फ्रीक्वेंसी में मापनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई- क्योंकि उपभोक्ता अपनी भाषा में मेनू पढ़, रिव्यू देख और आसानी से चेकआउट कर पाए।
टियर-2, टियर-3 का उपभोक्ता उभार: आंकड़े बोलते हैं
ई-कॉमर्स और उपभोक्ता खर्च के आंकड़े भी इसी बड़े बदलाव की पुष्टि करते हैं। भारत में अभी लगभग 220-230 मिलियन सक्रिय ऑनलाइन शॉपर्स हैं और हर साल 25-30 मिलियन नए खरीदार जुड़ रहे हैं। इनमें से 60% नए ऑनलाइन शॉपर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं।
Bain के अनुमान के अनुसार, 2020 के बाद से जुड़े नए ऑनलाइन शॉपर्स में से करीब दो-तिहाई टियर-3 या उससे छोटे शहरों से हैं। इन्हीं के दम पर भारत का ई-रिटेल बाजार 2030 तक 170-190 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
विशेषज्ञों ने कहा है कि 'टियर-2 और टियर-3 बाजार अब उभरते नहीं रहे- वे राष्ट्रीय उपभोग के पैटर्न को तेजी से आकार दे रहे हैं।'
इन उपभोक्ता बदलावों के साथ-साथ विज्ञापन खर्च का तराजू भी तेजी से रीजनल कंटेंट की तरफ झुक रहा है।
ResearchAndMarkets रिपोर्ट (फरवरी 2026)
फरवरी 2026 में जारी ResearchAndMarkets की India Digital Ad Spend रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल एड स्पेंड बाजार 2025 में 13.22 अरब डॉलर था। 2026 में यह 10.1% सालाना वृद्धि के साथ 14.56 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 2026-2029 के बीच 12% CAGR की दर से बढ़ते हुए यह बाजार 2029 तक 20.46 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इसी रिपोर्ट में वर्नाकुलर और रीजनल कंटेंट पर ब्रैंड्स के बढ़ते निवेश को मुख्य ट्रेंड के रूप में चिन्हित किया गया है। ShareChat (और इसका वीडियो प्लेटफॉर्म Moj), Dailyhunt (Josh के जरिए) और InMobi जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म रीजनल कंटेंट स्ट्रैटेजी के दम पर विज्ञापन बाजार में तेजी से हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
Sensor Tower रिपोर्ट 2026
Sensor Tower की 'State of Digital Advertising in India 2026' रिपोर्ट (जो Facebook, Instagram सहित प्रमुख सोशल प्लेटफॉर्म्स पर आधारित है) के मुताबिक, इन प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर 2025 में भारत का डिजिटल विज्ञापन खर्च 4.2 अरब डॉलर के नए मुकाम पर पहुंचा और 2026 में यह 5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
ई-कॉमर्स, फिनटेक और कंज्यूमर गुड्स कंपनियां अपने क्रिएटिव एसेट और मीडिया प्लान को भाषाई विविधता के हिसाब से ढाल रही हैं। FMCG, रिटेल, ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल और BFSI (बैंकिंग, वित्त, बीमा) विज्ञापन वॉल्यूम में सबसे बड़े योगदानकर्ता बने हुए हैं।
OOH (आउट-ऑफ-होम) यानी होर्डिंग और आउटडोर विज्ञापन के मोर्चे पर भी टियर-2/3 शहरों की खींचतान दिखती है। इन शहरों में CPM (कॉस्ट पर थाउजेंड इंप्रेशन) महानगरों की तुलना में 30-50% कम है, जिससे ब्रैंड्स अपने विज्ञापन बजट का कहीं बेहतर उपयोग कर पाते हैं।
ब्रैंड्स की रणनीति बदली: रीजनल इन्फ्लुएंसर्स और हाइपरलोकल कैम्पेन
भारत की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स (10,000-1,00,000 फॉलोअर्स) की एंगेजमेंट रेट 3-5% और नैनो-इन्फ्लुएंसर्स (1,000-10,000 फॉलोअर्स) की एंगेजमेंट रेट 8% तक होती है- जो बड़े मैक्रो-इन्फ्लुएंसर्स की 1.2% एंगेजमेंट रेट से कई गुना ज्यादा है। इसीलिए 47% ब्रैंड्स अब माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Flipkart ने अपनी 'India Ka Fashion Capital' कैम्पेन में टियर-2/3 शहरों को केंद्र में रखा, जो यूजर्स तक तेजी से पहुंची।
Fortune ब्रैंड ने अक्टूबर 2025 में अपना '17% Less Oil Absorption' कैम्पेन कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए विशेष रूप से स्थानीय भाषाओं में लॉन्च किया और यह ब्रैंड को राष्ट्रीय स्तर पर पुनः स्थापित करने में सफल रहा।
Accenture Strategy के MD आदित्य प्रियदर्शन ने 2025 को 'भारत सर्ज' का साल करार दिया- जहां टियर-2 और टियर-3 शहर विकास में महज भागीदार नहीं थे, बल्कि वे उसका नेतृत्व कर रहे थे।
आगे क्या: 2026 में रीजनल मार्केटिंग का भविष्य
2026 में भारत की विज्ञापन इंडस्ट्री डिजिटल सेगमेंट की अगुवाई में आगे बढ़ेगी। TV और आउटडोर एडवर्टाइजिंग के पारंपरिक माध्यम रीजनल पहुंच और बड़े आयोजनों की वजह से मजबूत बने रहेंगे। E-commerce का विस्तार जारी रहेगा, जबकि क्विक कॉमर्स खोज और रूपांतरण का सबसे तेज इंजन बनेगा।
प्रोग्रामेटिक एडवर्टाइजिंग में भी रीजनल फोकस बढ़ेगा। भारत में प्रोग्रामेटिक खरीद पहले से कुल डिजिटल एड स्पेंड का बड़ा हिस्सा बन चुकी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है।
भारत में डिजिटल ग्रोथ की अगली लहर महानगरों से नहीं, टियर-2 और टियर-3 बाजारों से आ रही है। ये दर्शक तेजी से ऑनलाइन आ रहे हैं, हर रोज कंटेंट देख रहे हैं और ऑनलाइन जो कुछ देखते हैं उसी के आधार पर खरीदारी के फैसले कर रहे हैं।
ब्रैंड्स के सामने अब एक स्पष्ट सबक है- या तो रीजनल मार्केटिंग को पूरी गंभीरता से अपनाएं, या प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएं। जो ब्रैंड्स स्थानीय भाषा में बात करते हैं, क्षेत्रीय संस्कृति को समझते हैं, माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स के जरिए भरोसा बनाते हैं और अपने कैम्पेन को मेट्रो से परे ले जाते हैं- वही आने वाले वर्षों में भारत के उपभोक्ता बाजार के असली विजेता बनेंगे।
जैसा कि IAMAI-Kantar, ResearchAndMarkets और Sensor Tower के 2025-26 के आंकड़े एकसुर में कह रहे हैं: भारत की मार्केटिंग क्रांति की भाषा अब हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी और भोजपुरी है- सिर्फ अंग्रेजी नहीं।
मार्केटिंग इंडस्ट्री के सबसे चर्चित अवॉर्ड्स में से एक इम्पैक्ट 40अंडर40 मार्केटिंग अवॉर्ड्स (IMPACT 40Under40 Marketing Awards) का आयोजन 5 जून को नई दिल्ली में होने जा रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मार्केटिंग इंडस्ट्री के सबसे चर्चित अवॉर्ड्स में से एक इम्पैक्ट 40अंडर40 मार्केटिंग अवॉर्ड्स (IMPACT 40Under40 Marketing Awards) का आयोजन 5 जून को नई दिल्ली में होने जा रहा है। इस खास इवेंट में इंडस्ट्री के बड़े एक्सपर्ट्स, बिजनेस हेड्स और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स शामिल होंगे।
इस अवॉर्ड का मकसद उन युवा प्रोफेशनल्स को पहचान देना है, जो कम उम्र में ही अपनी लीडरशिप, इनोवेशन और काम के दम पर इंडस्ट्री में बड़ा असर डाल रहे हैं। खास बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म मार्केटिंग की अगली पीढ़ी के लीडर्स को सामने लाने और उनके काम को सेलिब्रेट करने के लिए बनाया गया है।
अभी इन अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन शुरू हो चुके हैं। अलग-अलग सेक्टर से ऐसे प्रोफेशनल्स आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने अपने काम से अलग पहचान बनाई है और लगातार ग्रोथ, नई सोच और डेटा-बेस्ड स्ट्रैटेजी के जरिए मार्केटिंग को नए तरीके से परिभाषित किया है।
नियमों के मुताबिक, आवेदन करने वाले की उम्र 31 दिसंबर 2025 तक 40 साल से कम होनी चाहिए। यानी 1 जनवरी 1986 या उसके बाद जन्मे लोग इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आपका काम अलग है और आपने इंडस्ट्री में कुछ नया किया है, तो यह आपके लिए बड़ा मौका है।
यह अवॉर्ड खास तौर पर उन लोगों पर फोकस करेगा, जो अभी लीडरशिप रोल में हैं और अपने काम से इंडस्ट्री में मजबूत योगदान दे रहे हैं। तेजी से बदल रही मार्केटिंग दुनिया में यह लिस्ट ऐसे प्रोफेशनल्स को सामने लाएगी, जो आने वाले समय में भारत के मार्केटिंग फ्यूचर को दिशा देने वाले हैं।
इंडस्ट्री में यह अवॉर्ड एक बेंचमार्क की तरह देखा जाता है, जहां ऐसे लीडर्स को पहचान मिलती है जो ट्रेंड सेट कर रहे हैं, मजबूत ब्रांड बना रहे हैं और एक्सीलेंस के नए मानक तय कर रहे हैं।
अगर आप इस मौके को नहीं छोड़ना चाहते, तो अभी अपना बेस्ट काम दिखाइए और नॉमिनेशन भेज दीजिए।
अधिक जानकारी या नॉमिनेशन फॉर्म भरने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-
https://e4mevents.com/impact-CMO-40-under-40-2026/nomination
इससे पहले अय्यर यहां पर सीनियर जनरल मैनेजर (Marketing & Strategy) के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।
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गोल्ड लोन समेत विभिन्न फाइनेंशियल सेवाएं प्रदान करने वाले देश के एक प्रमुख वित्तीय सेवा समूह मुथूट ग्रुप ने अभिनव अय्यर को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उन्हें चीफ जनरल मैनेजर (मार्केटिंग एंड स्ट्रैटेजी) के पद पर पदोन्नत किया है। इस बारे में अभिनव अय्यर ने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की है।
अभिनव अय्यर इससे पहले यहां जनरल मैनेजर-मार्केटिंग एंड स्ट्रैटेजी के पद पर कार्यरत थे, जहां वे अप्रैल 2019 से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। अब नई भूमिका में वे कंपनी की मार्केटिंग और स्ट्रैटेजिक पहलों को और मजबूती देंगे।
अपनी लिंक्डइन पोस्ट में अय्यर ने इस उपलब्धि को अपने 12 साल के सफर का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने लिखा कि 2014 में मुथूट फाइनेंस और मुथूट ग्रुप के साथ सीनियर चीफ मैनेजर के रूप में शुरुआत करने के बाद उनका यह सफर सीख, चुनौतियों और नए अवसरों से भरा रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय भगवान, परिवार और करीबी दोस्तों के समर्थन को दिया।
अभिनव अय्यर पिछले 12 वर्षों से मुथूट ग्रुप के साथ जुड़े हुए हैं और इस दौरान उन्होंने कंपनी में कई अहम भूमिकाएं निभाईं। अपनी मौजूदा जिम्मेदारी से पहले वे मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को लीड कर चुके हैं।
मुथूट ग्रुप से पहले अय्यर बैंक ऑफ बड़ौदा के यूके ऑपरेशंस (लंदन) में हेड ऑफ मार्केटिंग के तौर पर भी काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग रणनीतियों को मजबूत किया।
PR और कम्युनिकेशन सेक्टर की कंपनी Value 360 Communications अब शेयर बाजार में एंट्री करने जा रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और कंटेंट कंपनी 'मैक्सपोजर लिमिटेड' (Maxposure Limited) ने बताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियम लागू नहीं होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और कंटेंट कंपनी 'मैक्सपोजर लिमिटेड' (Maxposure Limited) ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियम लागू नहीं होंगे। कंपनी ने 30 अप्रैल 2026 को NSE को यह जानकारी दी और साफ किया कि वह SEBI के तय नियमों के तहत इस छूट के लिए पात्र है।
कंपनी ने बताया कि यह फैसला SEBI के 30 जनवरी 2026 के सर्कुलर और LODR नियमों के तहत लिया गया है। इन नियमों के मुताबिक कुछ छोटी कंपनियों को कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सख्त प्रावधानों से राहत दी जाती है, ताकि उनके ऊपर अनुपालन का बोझ कम हो सके।
Maxposure Limited ने कहा कि वह NSE के SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड है और तय शर्तों को पूरा करती है। नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों की पेड-अप कैपिटल 10 करोड़ रुपये से कम और नेटवर्थ 25 करोड़ रुपये से कम होती है, या जो सिर्फ SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड हैं, उन्हें यह छूट मिलती है।
SEBI के नए सर्कुलर में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। पहले इस छूट के लिए प्रैक्टिसिंग कंपनी सेक्रेटरी (PCS) का सर्टिफिकेट देना जरूरी होता था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है। अब कंपनियां खुद ही सेल्फ-डिक्लेरेशन देकर इस छूट का फायदा ले सकती हैं।
इसी के तहत Maxposure Limited ने घोषणा की है कि FY 2026-27 में उस पर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियम लागू नहीं होंगे। इसका मतलब है कि कंपनी को इस अवधि के लिए कॉर्पोरेट गवर्नेंस रिपोर्ट भी जमा नहीं करनी होगी।
Maxposure Limited एक नई पीढ़ी की मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी है, जो कंटेंट मार्केटिंग, इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट, विज्ञापन और टेक्नोलॉजी जैसी सेवाएं देती है। कंपनी खास तौर पर एविएशन सेक्टर पर फोकस करती है और एयरलाइंस व ट्रैवल इंडस्ट्री के लिए कंटेंट और डिजिटल सॉल्यूशंस तैयार करती है।
यह कंपनी 360-डिग्री मीडिया सेवाएं देती है और भारत के साथ-साथ ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ काम करती है, जिसमें एयर इंडिया, इंडिगो और अन्य बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
कुल मिलाकर, Maxposure Limited कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विज्ञापन के मेल से काम करने वाली एक तेजी से उभरती मीडिया कंपनी है, जिसे SME सेगमेंट में नियमों के तहत राहत मिली है।