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न्यूज एंकरिंग को लेकर कुछ यूं बोले 'आजतक' के निशांत चतुर्वेदी
देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को नई दिशा देने और इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को नई दिशा देने और इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) दिए गए। इनबा के 11वें एडिशन के तहत नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में 16 फरवरी को आयोजित एक समारोह में ये अवॉर्ड्स दिए गए। कार्यक्रम से पहले आयोजित NewsNextConference के अंतगर्त कई पैनल डिस्कशन भी हुए, जिसके द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों को सुनने का मौका मिला।
कार्यक्रम में ऐसे ही एक पैनल डिस्कशन का टॉपिक ‘Anchoring is it an art or a science or is it just energy’ रखा गया था। इसमें ‘आजतक’ के एडिटर निशांत चतुर्वेदी, ‘इंडिया न्यूज़’ के डिप्टी एडिटर सुशांत सिन्हा,‘न्यूज एक्स’ की सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर प्रिया सहगल और ‘न्यूज24’ की सीनियर एंकर साक्षी जोशी ने शामिल होकर अपने विचार लोगों के सामने रखे। ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) में एडिटोरियल लीड के तौर पर कार्यरत रुहैल अमीन ने बतौर सेशन चेयर इस सेशन को मॉडरेट किया।
निशांत चतुर्वेदी का यह भी कहना था, ‘आजकल न्यूज एंकर्स के चिल्लाने और तेज आवाज में बात करने को लेकर चर्चा होती है, लेकिन हम सभी को इस बात को समझने की जरूरत है। यहां पर जितने भी लोग बैठे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि सड़क पर जब झगड़ा होता है, तो कितने लोग रुककर देखते हैं। उस झगड़े से आप घर में क्या लेकर जाते हैं? आप सिर्फ रुककर देखते हैं और कुछ नहीं करते। टेलिविजन शो पर भी जो एंकर्स करते हैं, वह भी पब्लिक ‘फाइट’ होती है। हमें यह समझने की जरूरत है कि टीवी पर हम जिस बारे में बात कर रहे हैं, कितने व्युअर्स हमारी बात को अपने घर लेकर जाते हैं। यह बहुत बड़ा सवाल है।'
निशांत चतुर्वेदी का कहना था, ‘जैसा कि हमें पहले सिखाया जाता था कि आप खबर कवर करने जा रहे हैं। खबर बनने नहीं जा रहे हैं। ये बहुत पुरानी बात थी। ऐसे में खबर में सभी तथ्य शामिल होने चाहिए और लोगों से इंटरैक्शन भी होना चाहिए। इसमें एनर्जी भी होनी चाहिए।
एंकर्स को कई बार लगता है कि यदि वे इस तरह नहीं शोर मचाएंगे तो वह चल पाएंगे अथवा नहीं, लेकिन मैं कल शाम से आज सुबह के बीच अपने साथ हुए एक वाक्ये से आपको उदाहरण देता हूं कि एक जनरल साहब हैं, जो चीखने-चिल्लाने के शौकीन हैं और इसके लिए काफी मशहूर भी हैं, वो कल हमारे शो पर आ गए। दूसरी तरफ पाकिस्तान के एक साहब बैठे थे। जब उनसे कोई सवाल पूछा जाता था तो वहां से कोई जवाब नहीं मिलता था। शो में अजहर मसूद को लेकर बात हो रही थी कि उसने कब-कब कहां अटैक कराए हैं। इस बीच न जाने जनरल साहब को क्या सूझा कि उन्होंने पाकिस्तान वाले गेस्ट को जानवर बोल दिया और फिर गीद़ड़ कह दिया। मैं इस तरह के शब्दों को बर्दास्त नहीं करता हूं। मैं अपने शो में उस बात की कतई इजाजत नहीं देता, जो गलत और असंसदीय हो। यही नहीं, हद से आगे बढ़ते हुए हमारी तरफ के जनरल साहब ने पाकिस्तानी साहब से कह दिया कि मैं तुम्हें जूते मारूंगा। इसके बाद मैंने कहा कि अब बहुत हो गया है और आप शांत हो जाइए। अब मैं आपको बर्दास्त नहीं करूंगा। पाकिस्तान वाले साहब जो अब तक चुप बैठे थे, उन्हें सपोर्ट मिल गया, जबकि अभी तक वो बगलें झाक रहे थे, उनके साथ ये दिक्कत हो गई कि वो हंसने लगे। हालांकि वो कुछ कह नहीं रहे थे, लेकिन हंस रहे थे और मुंह चिढ़ा रहे थे। अब मैं क्या बोलता, मैंने अपने जनरल साहब को किसी तरह शांत किया और पाकिस्तान वाले से सवाल पूछना बंद कर दिया।’
आखिर में यह पूछे जाने पर कि आने वाले दो-तीन सालों में न्यूज एंकरिंग का स्वरूप कैसा होगा? निशांत चतुर्वेदी ने कहा, ‘आप सभी घर जाकर अपने फोन में गूगल सर्च जरूर करना कि ग्लैन बैक का पतन (Decline of Glenn Beck)। ये फॉक्स न्यूज के बहुत बड़े एंकर हुआ करते थे। तीन-चार साल उनका सिक्का बहुत चला। आज शायद उनके पास नौकरी भी नहीं है।’
नीचे दिए गए विडियो पर क्लिक कर आप इस पूरी चर्चा को देख सकते हैं-
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