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न्यूज 24 के मैनेजिंग एडिटर दीप उपाध्याय बोले, कंटेंट-TRP संग अब ये शब्द भी बना मीडिया का हिस्सा
नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में 16 फरवरी को आयोजित एक समारोह में बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स ...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
बहुप्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 16 फरवरी को दिए गए। इनबा के 11वें एडिशन के तहत नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में एक समारोह में ये अवॉर्ड्स प्रदान किए गए। देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को नई दिशा देने और इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए यह आयोजन किया गया था।
कार्यक्रम से पहले आयोजित NewsNextConference के अंतगर्त कई पैनल डिस्कशन भी हुए, जिसके द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों को सुनने का मौका मिला। ‘Ratings, Propaganda& Perspective in front of editors while telling compelling stories’ विषय पर हुए ऐसे ही एक पैनल डिस्कशन को ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के पूर्व जनरल सेक्रेटरी और फिल्म प्रड्यूसर भुवन लाल ने बतौर सेशन चेयर मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘इंडिया न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया, बीबीसी (इंडिया) के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर, जी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी और ‘न्यूज 24’ के मैनेजिंग एडिटर दीप उपाध्याय शामिल हुए।
दीप उपाध्याय का कहना था, ‘हमें इस तरह की चीजों से बचना चाहिए। पहले हम घटना के बारे में समझें और फिर उसे दिखाएं। अभी तक तो हम कंटेंट और टीआरपी की बात करते थे, अब उसमें एक शब्द प्रोपेगेंडा भी जुड़ गया है। मेरी राय ये है कि जहां तक संभव हो, हमें इस प्रोपेगेंडा से बचने की कोशिश करनी चाहिए। पत्रकारों-संपादकों के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है, जिससे हमें निकलना होगा। जैसा कि कहा जाता है कि फलां चैनल उस पार्टी का है और उसकी विचारधारा पर चलता है तो मेरा यही कहना है कि ऐसा नहीं है कि पत्रकारिता में अलग-अलग विचारधाराओं को आगे नहीं बढ़ाया जाता है। हमेशा से ऐसा होता रहा है। शुरू में जब अखबार निकलते थे तो कोई लेफ्ट विंग को प्रमोट करता था तो कोई राइट विंग को प्रमोट करता था, लेकिन उस समय मामला आइडियोलॉजी पर हुआ करता था। उस समय की बात करें तो इकनॉमिक लिबरलाइजेशन जब हुआ तो एक पक्ष इसके खिलाफ था, जबकि दूसरा पक्ष इसके पक्ष में, लेकिन ये बात बहुत कम सामने आती थी कि आइडियोलॉजी पार्टी अथवा किसी खास नेता के लेवल पर आए। हालांकि लोगों की विचारधाराएं अलग हो सकती हैं और सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन मीडिया को अपनी विचारधारा को एक पार्टी अथवा एक व्यक्ति की तरफ नहीं ले जाना चाहिए। बड़ी बातों पर फोकस करने की जरूरत है।’
भुवन लाल द्वारा पत्रकारिता में अपने गौरवमयी पलों के बारे में पूछे जाने पर दीप उपाध्याय का कहना था, ‘मेरे लिए सुखद पल तब होते हैं, जब मेरी बात से देश के किसी न किसी व्यक्ति को कोई फायदा हो। एक नई सोच या आइडिया को दो-चार लोग समझें और उस पर चर्चा हो। मेरे लिए पत्रकारिता में हर दिन एक अच्छा पल हो सकता है और हर दिन एक खराब पल हो सकता है। मेरी नजर में मीडिया को लिए गौरवशाली पल वो था, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या मामले में फैसला दिया था, उस समय जिस संयम से मीडिया ने रिपोर्टिंग की चीजों को इस तरह दिखाया कि जिससे समाज में किसी तरह का वैमनस्य न फैले, यह पूरी भारतीय मीडिया खासकर हिंदी चैनलों के लिए गौरवशाली पल है और ऐसे गौरवशाली पल और आने चाहिए।’
मीडिया के बारे में उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया, ‘एयरफोर्स में तैनात मेरे एक मित्र का फोन आया और मैंने पूछा कि कश्मीर हमले के बाद अब क्या हो रहा है? तो उनका जवाब था कि हमें क्या करना है, सब कुछ मीडिया कर तो रहा है। मित्र का कहना था कि मीडिया ही हमें बता रहा है कि कैसे पाकिस्तान पर हमला करना है, कैसे सर्जिकल स्ट्राइक करनी है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सब कुछ मीडिया ही करेगा तो हम क्या करेंगे। इसके लिए सिर्फ मीडिया ही दोषी नहीं है, बल्कि राजनीतिक सिस्टम भी दोषी है। अलग कोई सेना को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है अथवा किया गया थी तो वह भी एक बड़ी समस्या है। मीडिया तो उसके दिखाएगा ही। लेकिन मेरा यही कहना है कि मीडिया को थोड़ा संयम बरतना चाहिए।’
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