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Zee बिजनेस के संपादक अनिल सिंघवी बोले, ऐसे पा सकते हैं चैनल अच्छी रेटिंग- रेवेन्यू
‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) के मौके पर आयोजित एक समारोह में ‘Zee बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में 16 फरवरी को ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) दिए गए। देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को नई दिशा देने और इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ये अवॉर्ड्स दिए गए। इनबा का यह 11वां एडिशन था।
इस अवसर पर मीडिया क्षेत्र की हस्तियों ने विभिन्न पैनल डिस्कशन के जरिये अपने विचार भी व्यक्त किए। इसी के तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के पूर्व जनरल सेक्रेटरी और फिल्म प्रड्यूसर भुवन लाल ने बतौर सेशन चेयर ‘Ratings, Propaganda& Perspective in front of editors while telling compelling stories’ विषय पर हुए एक पैनल डिस्कशन को मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘इंडिया न्यूज’ के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया, ‘बीबीसी (इंडिया)’ के डिजिटल एडिटर मिलिंद खांडेकर, ‘Zee बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी और ‘न्यूज 24’ के मैनेजिंग एडिटर दीप उपाध्याय शामिल हुए।
अनिल सिंघवी का कहना था, ‘उस समय इस घटना को लेकर कई चैनल तरह-तरह की खबरें दिखा रहे थे। कोई शहीद जवानों की संख्या कुछ बता रहा था, तो कोई कुछ, लेकिन हमारा मानना था कि खबर की पुष्टि होने के बाद ही हम कोई खबर चलाएंगे। हमारा मानना था कि यदि हम कम खबर भी दिखाते हैं, तो कोई बात नहीं, क्योंकि आज नहीं तो कल सब सामने आ ही जाना है। एंकर के तौर पर हमारे लिए सबसे ज्यादा ये महत्वपूर्ण है कि किस खबर को कम करके दिखाना है और किस खबर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना है। जहां तक देशहित की बात है तो यदि हमें ये लगता है कि थोड़ी सी खबर दिखाने पर भी देश का नुकसान होगा तो हमें सबसे पहले देशहित का ध्यान रखना है, फिर चाहे खबर हम कम भी दिखाएं तो कोई बात नहीं। उस दिन भी हमने यह तय कर लिया था कि चाहे हम दूसरों से थोड़ा पीछे रहें लेकिन खबर को पुष्टि करने के बाद ही दिखाएंगे। गलत खबर दिखाने के बजाय ऐसे संवेदनशील मामले जो हमारे सम्मान और भावना के साथ जुड़े हों,देश के साथ जुड़े हो, वहां पर बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी।’
भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि अक्सर देखा गया है कि इस तरह की कोई घटना होने पर हमारे देश में कुछ ऐसे तत्व हैं, जो मौके का फायदा उठाना चाहते हैं। ये लोग कश्मीर घाटी को लोगों का साथ देते हैं और अक्सर वो टीवी पर देखे जाते हैं, लेकिन पुलवामा की घटना के बाद दो-तीन दिनों में वो नहीं देखे जा रहे हैं, इस बारे में क्या चैनलों ने मिलकर कोई निर्णय लिया है, अथवा ये अपने आप हो रहा है?
यह पूछे जाने पर कि सोशल मीडिया पर तमाम तरह की खबर चलती हैं, इनसे न्यूज रूम के संपादक कैसे जूझते हैं, अनिल सिंघवी का कहना था,‘एक बिजनेस चैनल का संपादक होने के नाते आमतौर पर हमारे साथ ऐसी स्थिति नहीं होती है। हालांकि यदि किसी वॉट्सऐप ग्रुप पर कोई गलत खबर चलती है और हम उसे सही मान लेते हैं तो उससे लोगों की भावनाएं प्रभावित होती हैं, लेकिन यदि किसी बिजनेस चैनल के वॉट्सऐप ग्रुप पर कोई इस तरह की खबर चली जिसकी वजह से कोई स्टॉक दस-बीस प्रतिशत ऊपर-नीचे हो गया तो लोग आर्थिक रूप से प्रभावित होते हैं। इसलिए हमारे लिए जरूरी होता है कि यदि हम कोई खबर चलाएं तो बहुत सोच-समझकर चलाएं, क्योंकि हर खबर के साथ स्टॉक ऊपर-नीचे होते हैं और लोगों के आर्थिक हित प्रभावित होते हैं। जहां तक रेटिंग और प्रोपेगेंडा की बात आती है तो हम तीन चीजें समझते हैं कि एक एडिटर के तौर पर मुझे ये पहचानना है कि मेरे चैनल और व्युअर्स के बीच का रिश्ता क्या है। क्या मैं एक शॉपकीपर हूं और वो हमारा ग्राहक है, या वह हमसे ज्ञान लेने आ रहा है अथवा हम दोनों दोस्त हैं, वो रिश्ता मुझे डिफाइन करना है, जो मेरे कंटेंट से होता है। अगर मेरा कंटेंट सही है तो मेरा व्युअर मेरे पास आएगा। इसलिए हम अपने चैनल और कंटेंट को अच्छा प्रॉडक्ट बनाने की कोशिश करते हैं।’
अनिल सिंघवी के अनुसार,’प्रॉडक्ट बनाने पर हमें रेटिंग और रेवेन्यू दोनों मिलेंगे। अगर मेरा फोकस इन दोनों पर रहेगा तो जो मुझे करना है, वह मैं नहीं कर पाऊंग, लेकिन अगर मेरा फोकस अच्छा प्रॉडक्ट बनाने पर है तो मुझे ये दोनों अपने आप मिल जाएंगे। उसके लिए हमें अपने व्युअर्स के साथ रिश्ता मजबूत करना होगा।’
पत्रकारिता में अपने गौरवशाली पलों के बारे में पूछे जाने पर अनिल सिंघवी का कहना था कि यह अभी आना बाकी है। उन्होंने कहा, ‘कुछ समय पहले ऐसा एक क्षण जरूर आया, जिस पर थोड़ा गर्व जरूर कर सकता हूं या यूं कहें कि काम करने की संतुष्टि मिली। दरअसल, बजट वाले दिन मैं सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक बिना किसी ब्रेक के एंकरिंग कर रहा था। हम अपने चैनल पर बिजनेस, इकनॉमी जैसे गंभीर मुद्दों को इस तरह दिखाते हैं कि व्युअर्स हमसे जुड़े रहें। इसके लिए हम सामान्य शब्दों और भाषा का इस्तेमाल करते हैं। इस बार बजट पर भी हमने ये कोशिश की कि लोगों को बजट को आसान भाषा में समझाया जाए। इसका परिणाम भी हमें देखने को मिला, जब पिछले साल के मुकाबले बजट के दिन हमारी व्युअरशिप छह गुना बढ़ गई। यदि रांची, पटना में बैठे लोगों को ये लगे कि कोई उनका ख्याल रखने वाला है और उन्हें आसान भाषा में समझाएगा तो ये हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।’
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