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कंटेंट क्रिएटर्स के सामने हमेशा रहता है ये बड़ा मुद्दा, बोले अभिजीत सरकार

पॉलिटिकल कंटेंट में दोहराव और नीरसता ज्यादा होती है। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों ने फ्रेश कंटेंट तलाशना शुरू कर दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

तेजी से बदलते दौर में सूचनाओं का प्रवाह इतना ज्यादा हो गया है कि इसमें से अच्छा और अपने मतलब का कंटेंट तलाशना काफी कठिन काम होता जा रहा है। फेक न्यूज के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिसने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। इन सबके बीच मीडिया दिग्गज अभिजीत सरकार ने अपना कंटेंट प्लेटफॉर्म ‘सरकारनामा’ (Sarkarnama) लॉन्च किया है। यह एक ऐसा विडियो फॉर्मेट है, जिसका उद्देश्य कला से लेकर सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डालना है।  

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchnage4media) के साथ अभिजीत सरकार ने आज के समय में इस तरह के प्लेटफॉर्म्स की जरूरत और ‘सरकारनामा’ को लेकर अपने विजन के बारे में विस्तार से चर्चा की, पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:  

सरकारनामा की लॉन्चिंग के पीछे क्या वजह है और इसकी प्रेरणा कहां से मिली?

मैं अपने कॉलेज के दिनों से ही थियेटर, रेडियो और टेलिविजन से जुड़ा रहा हूं। मैं एक रेडियो जॉकी, टीवी एंकर भी रहा हूं। लेकिन कॉरपोरेट और स्पोर्ट्स सेक्टर्स में अपनी पेशेगत प्रतिबद्धता के कारण मुझे वह काम करने का समय नहीं मिल पा रहा था, जो मेरे दिल के काफी करीब है। ये चीजें हमेशा मेरे दिल और दिमाग में चलती रहती थीं। इसलिए वर्ष 2017 में मैंने इस बारे में आखिरी फैसला कर लिया और इस क्षेत्र में उतर गया। हमने अपनी शुरुआत कुछ एनिमेशंस के साथ की, इसके बाद हमने इसे स्टोरीटेलिंग के बड़े फॉर्मेट में बदल दिया, जिसे लोगों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिलना शुरू हो गया।

आपने इसके लिए डिजिटल-ऑनली मीडियम को ही क्यों चुना, जबकि इसमें काफी भीड़ और शोरशराबा है?

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शोरशराबे व अव्यवस्था के कारण ही हमनें कुछ ऐसा करने का निश्चय किया, जो बिल्कुल अलग और पॉजीटिव था। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगेटिविटी, नग्नता और फेक कंटेंट से मुझे सख्त नफरत है, इसलिए मैंने सोचा कि इस क्षेत्र में यदि लोगों को अच्छा और पॉजीटिव कंटेंट मिलेगा तो वे इसे काफी पसंद करेंगे। इसके लिए हमने एक गाना और स्टोरीटैलिंग एपिसोड तैयार किया, जिसमें हमने लोगों को काफी अच्छे और मजेदार तरीके से अपने मकसद के बारे में बता सकें। इसके अलावा, हमने रिसर्च पर भी काफी फोकस किया, जिससे हम अपने व्युअर्स को कुछ नया पेश करने में सफल रहे।

अब तक लोगों की कैसी प्रतिक्रिया रही है?

हमें लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलनी शुरू हो गई है। हालांकि शुरुआत में इसकी रफ्तार थोड़ी सुस्त थी। धीरे-धीरे लोगों ने हमारी खासियत को नोटिस करना शुरू कर दिया। अब तो हमें अपने व्युअर्स से यह सुझाव मिलने भी शुरू हो गए हैं कि वे ‘सरकारनामा’ के अगले एपिसोड में क्या देखना चाहते हैं। हालांकि, व्युअर्स हमारी आलोचना भी करते हैं, लेकिन यह सकारात्मक तरीके से होती है। अब लोगों की हमसे अपेक्षाएं बढ़ गई हैं और हमें हर बार अपनी अच्छी परफॉर्मेंस देनी होगी। यानी हम कह सकते हैं कि सही मायने में सफर की शुरुआत अब हुई है।

आज के समय में कंटेंट क्रिएटर्स के सामने तीन बड़ी चुनौतियां कौन सी हैं?

आज के समय में कंटेंट क्रिएटर्स के सामने सबसे बड़ा मुद्दा फंड का है। फंड की उचित व्यवस्था के बिना आप क्वालिटी प्रॉडक्ट देने की स्थिति में नहीं होते हैं। मैं हमेशा भाग्यशाली रहा हूं कि मुझे ऐसे दोस्त मिले हैं, जिन्होंने किसी तरह की परेशानी मुझ पर नहीं आने दी। वे हमेशा मुझे सुझाव देते रहते हैं कि अगले एपिसोड को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। इससे मुझे स्क्रिप्ट को तैयार करने के साथ ही प्रॉडक्शन में भी काफी मदद मिलती है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती कंटेंट की है। आपको अपने कंटेंट को लेकर सोच बिल्कुल स्पष्ट रखनी होगी। तुच्छ (Frivolous) कंटेंट आपको अच्छी शुरुआत तो दे सकता है, लेकिन इसे लेकर आप लंबे समय तक नहीं चल सकते हैं। लंबी दौड़ में बने रहने के लिए आपको ऐसा कंटेंट देना होगा, जिसमें गहराई और रिसर्च शामिल हो। यहां मेरे कॉलेज के दिनों का अनुभव मुझे काम आता है। 

क्या सरकारनामा सिर्फ डिजिटल फॉर्मेट में ही रहेगा या आप इसे ट्रेडिशनल मीडिया फॉर्मेट्स में लाने की योजना भी बना रहे हैं?

कुछ न्यूज चैनल्स ने मेरे कई एपिसोड्स अपने यहां दिखाए हैं। ये वो चैनल्स थे, जिन्होंने ये एपिसोड्स चलाने को मंजूरी के लिए मुझसे संपर्क किया था। हमारा मानना है कि हमारी प्रॉडक्शन वैल्यू काफी बेहतर होती है, इसलिए हमारे एपिसोड्स ब्रॉडकास्ट क्वालिटी के होते हैं। हम इस आयडिया को ‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर लाने की भी सोच रहे हैं। यदि कोई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स इसके लिए हमसे संपर्क करेगा तो हमें अपना प्रॉडक्ट उसके साथ शेयर करने को लेकर काफी खुशी होगी।      

आपके विडियोज में करीब 26 विभिन्न सब्जेक्ट दिखाई दिए हैं। ऐसे में क्या ‘सरकारनामा को जानकारी देने और जागरूकता फैलाने वाला प्लेटफॉर्म कहना उचित होगा’?

हम कोई भी सब्जेक्ट चुनें, लेकिन मेरा सबसे पहला उद्देश्य अपने व्युअर्स को अच्छा और ऑरिजिनल कंटेंट देना रहता है। हमारे द्वारा चुने गए सब्जेक्ट में बहुत सारे विचारों को शामिल किया जाता है। शुरुआत में हमने उन इश्यू को लिया जो पहले से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध थे। इसके बाद हमने काफी गहराई से रिसर्च की। उसमें कई अन्य चीजें शामिल कीं और विभिन्न मौके के लिए उसमें ऑरिजिनल गाने (जैसे-दुर्गा पूजा, स्वतंत्रता दिवस, फ्रेडशिप डे, वैलेंटाइन डे, होली आदि) शामिल किए। इसके बाद हमने रिलेशनशिप पर नए एपिसोड बनाए। ये सब्जेक्ट समाज से जुड़े हुए थे। (जैसे-पति-पत्नी का रिश्ता, आर्ट ऑफ लव, हंसी-मजाक)। हमने म्यूजिक जॉनर में भी कई नए प्रयोग करने का पयास किया। स्टोरटैलिंग के अपने स्टाइल को और बढ़ाने के लिए हमने मूल गीतों और कंपोजीशन का इस्तेमाल किया।  

आने वाले दो साल में कंटेंट उपभोग करने का ट्रेंड कैसा होगा, इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

मौटे तौर पर हम कंटेंट के उपभोग को दो भागों (पॉलिटिकल और नॉन पॉलिटिकल) में बांट सकते हैं। पिछले पांच सालों में पॉलिटिकल कंटेंट का उपभोग ज्यादा रहा है, लेकिन अब धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं। इसका कारण यह है कि पॉलिटिकल कंटेंट में दोहराव और नीरसता ज्यादा होती है। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों ने फ्रेश कंटेंट तलाशना शुरू कर दिया। इसलिए अगले पांच सालों में हमें बेहतर और नया कंटेंट देखने को मिलेगा। हिंदी और प्रादेशिक भाषाओं में क्लासिकल कंटेंट में भी बदलाव दिखाई देगा।

‘सरकारनामा’ को लेकर आपका अगले पांच साल के लिए क्या विजन है?

हमने पहले ही लंबे और छोटे एपिसोड को मिलाना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में हम मानवीय संबंधों और समाज से जुड़े अन्य विषयों पर काम करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन इनका अंदाज बिल्कुल ही अलग होगा। हम लोक संगीत और लोक रंगमंच का इस्तेमाल करेंगे, क्योंकि हम उन आर्ट फॉर्म्स को भी पुर्जीवित करने की योजना बना रहे हैं, जो या तो खत्म हो चुके हैं अथवा खत्म होने की कगार पर हैं। हम अपने एपिसोड में नाटकों के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। देखते हैं कि यह कैसा रूप लेता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हम इसमें बदलाव भी कर रहे हैं।


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