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ट्रेडिशनल व सिटीजन जर्नलिज्म साथ चल सकते हैं, पर चुनौती विश्वसनीयता की है: क्लेयर विलियम्स
‘बीबीसी’ में डिजिटल प्रोडक्शन की हेड क्लेयर विलियम्स ने ‘e4m’ से बातचीत में मीडिया में आए बदलावों और भारत को लेकर बीबीसी के भविष्य के प्लान समेत तमाम अहम मुद्दों पर अपने विचार शेयर किए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 year ago
‘बीबीसी’ में डिजिटल प्रोडक्शन की हेड क्लेयर विलियम्स (Claire Williams) ने हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (e4m) के ब्रिज पाहवा के साथ बातचीत में पिछले दो दशकों में मीडिया में आए बदलावों, फेक न्यूज और भारत में बीबीसी के भविष्य के प्लान समेत तमाम अहम मुद्दों पर अपने विचार शेयर किए। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:
आप पिछले दो दशकों से मीडिया इंडस्ट्री में हैं। इस दौरान आपने पत्रकारिता को कैसे बदलते देखा? व्यक्तिगत और व्यावसायिक दृष्टिकोण से नैरेटिव्स और प्रोडक्शन में क्या बदलाव आए हैं?
मैंने जब करियर की शुरुआत की थी, तब मैं रेडियो रिपोर्टर थी। उस समय हमें रिपोर्ट एडिट करने के लिए फिजिकल टेप काटकर जोड़ना पड़ता था। डिजिटल एडिटिंग का आना एक बहुत बड़ा बदलाव था। अब हम मल्टी-स्किल्ड पत्रकारों के साथ विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट तैयार और डिस्ट्रीब्यूट कर सकते हैं।
पहले एक रिपोर्टिंग टीम में साउंड इंजीनियर, कैमरामैन, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर शामिल होते थे। लेकिन आज, एक पत्रकार अकेले ही यह सब कर सकता है। डिजिटल टूल्स के कारण काम तेज और अधिक स्वतंत्रता से किया जा सकता है। अब पत्रकार सिर्फ एक कैमरा और ट्राइपॉड लेकर ब्रेकिंग न्यूज कवर कर सकते हैं और तुरंत शेयर कर सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर रिपोर्टिंग और मीडिया नैरेटिव्स कैसे बदले हैं, खासतौर पर दक्षिणपंथी विचारधाराओं की ओर राजनीतिक बदलाव को देखते हुए ट्रंप 2.0 जैसे दौर में रिपोर्टिंग में क्या बदलाव आते हैं?
बीबीसी की प्राथमिकता हमेशा एक ही रही है—विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरें देना, चाहे सत्ता में कोई भी हो। गलत सूचनाओं (misinformation) की चुनौती बढ़ी है, और हम इसे बीबीसी वेरिफाई जैसी पहलों (initiatives) से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। अब हम इस पर भी ध्यान देते हैं कि हम किन खबरों को कवर कर रहे हैं और दर्शकों को यह समझाते हैं कि हमारी पत्रकारिता की प्रक्रिया क्या है।
आज के दौर में जब गलत खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं, लोग ऑनलाइन खबरों की सच्चाई कैसे जांच सकते हैं?
किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले, लोगों को कई स्रोतों को देखना चाहिए। बीबीसी न्यूज एक भरोसेमंद स्रोत है, लेकिन मैं लोगों को सलाह दूंगी कि वे एक ही खबर को अलग-अलग मीडिया हाउस से पढ़ें। अगर खबरों में भिन्नता नजर आए, तो लोग खुद ही सही-गलत का अंदाजा लगा सकते हैं।
जब फेक न्यूज यानी फर्जी खबरें तेजी से फैलती हैं और सच्ची खबरें दब जाती हैं, तो बीबीसी इससे कैसे निपटती है?
बीबीसी ने फैक्ट-चेकिंग पर काफी निवेश किया है और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हमेशा तैयार रहती है। भारत में ही हमारे 80 मिलियन (8 करोड़) से ज्यादा दर्शक और यूजर्स हैं, जो विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर हमारी खबरों को फॉलो करते हैं।
अगर कभी गलती होती है, तो हम उसे हटाने के बजाय तुरंत सुधार प्रकाशित करते हैं। पारदर्शिता हमारे लिए बहुत जरूरी है। एक बार हमारे डायरेक्टर जनरल, टिम डेवी को तब दखल देना पड़ा जब किसी अन्य प्लेटफॉर्म ने हमारी हेडलाइंस को इस तरह बदल दिया कि वे कम निष्पक्ष लगने लगे। उन्होंने सही खबर के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए इसे हल करने के लिए तत्काल कार्रवाई की।
सेंसरशिप की बात करें तो बीबीसी इसे कैसे मैनेज करता है?
रूस में बीबीसी को ब्लॉक कर दिया गया है, लेकिन हमारी रूसी टीम ने वहां टेलीग्राम पर एक बेहद लोकप्रिय चैनल लॉन्च किया, जिससे हम खबरें शेयर कर पा रहे हैं। इसी तरह, अफगानिस्तान में जहां लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाया गया, हमने दारी भाषा में एक शैक्षिक प्रोग्राम शुरू किया।
बाद में इसे अरबी में भी लॉन्च किया गया ताकि गाजा और सूडान जैसे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जानकारी दी जा सके। हम हमेशा अपने दर्शकों तक पहुंचने का कोई न कोई तरीका ढूंढ लेते हैं, चाहे कितनी भी रुकावटें क्यों न आएं।
‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ (AI) ने पत्रकारिता में बड़ा बदलाव लाया है। बीबीसी इसे अपने काम में कैसे शामिल कर रही है?
‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ बेहतरीन टूल है, लेकिन हम इसे सावधानी से इस्तेमाल करते हैं। हमने अपनी 41 भाषा सेवाओं में एआई असिस्टेड ट्रांसलेशन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। लेकिन कोई भी एआई-जेनरेटेड कंटेंट प्रकाशित करने से पहले, हमारी टीम के ह्यूमन एडिटर्स उसे जरूर रिव्यू करते हैं। हम पारदर्शिता बनाए रखते हैं। अगर कोई लेख एआई की मदद से तैयार किया गया है, तो हम उसे स्पष्ट रूप से बताते हैं ताकि पाठकों को इसकी जानकारी हो।
बदलते न्यूज कंजम्पशन पैटर्न खासकर लोगों की घटते अटेंशन स्पैन (ध्यान देने की अवधि) के बीच बीबीसी कैसे बदलाव कर रहा है?
अच्छी स्टोरी का मूलभूत स्वरूप नहीं बदला है, बस इसे प्रस्तुत करने के तरीके बदल गए हैं। अब हम एक ही खबर को कई फॉर्मेट में पेश करते हैं—टेक्स्ट आर्टिकल्स, 90-सेकंड के वीडियो, यूट्यूब फीचर्स और सोशल मीडिया स्निपेट्स। इससे अलग-अलग ऑडियंस अपने पसंदीदा तरीके से खबरें देख/पढ़ सकती हैं।
आज सिटीजन जर्नलिज्म और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स-जैसे ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) न्यूज डिस्ट्रीब्यूशन को बदल रहे हैं। ऐसे में आपकी नजर में पत्रकारिता का भविष्य कैसा होगा?
पारंपरिक पत्रकारिता और सिटीजन रिपोर्टिंग एक साथ काम कर सकते हैं। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता की है। सिटिजन जर्नलिस्ट्स नए दृष्टिकोण लाते हैं, लेकिन मीडिया हाउस जैसे बीबीसी तथ्य-जांच (verification) और संदर्भ (context) देने का काम करते हैं। दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की पत्रकारिता को आकार देगा।
भारत को लेकर बीबीसी की भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
भारत हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार है। हम यहां अपने साझेदारों को और मजबूत करेंगे और अपनी भाषा सेवाओं में निवेश जारी रखेंगे। भारत में हमारे छह भाषा सेवा प्लेटफॉर्म हैं और हमारी पहुंच लगातार बढ़ रही है। मेरा यह दौरा शानदार रहा। काश! मैं और अधिक समय यहां बिता सकती! हम अपने ‘कलेक्टिव न्यूजरूम’ (collective newsroom) के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं और भारतीय दर्शकों को विश्वसनीय खबरें प्रदान करने में जुटे हुए हैं।
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