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डिजिटल पर 'पेड' या 'फ्री' IPL के प्रसारण का TV व्युअरशिप पर असर नहीं: अजीत वर्गीज

‘डिज्नी स्टार’ (Disney Star) में नेटवर्क की ऐडवरटाइजिंग सेल्स के हेड अजीत वर्गीज ने एक्सचेंज4मीडिया की एडिटर नाजिया अल्वी रहमान से खास बातचीत में तमाम पहलुओं पर रखी अपनी राय

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

‘इंडियन प्रीमियर लीग’ (IPL) 2023 अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। दर्शकों और विज्ञापन के पैसे के लिए ‘डिज्नी स्टार’ (Disney Star) और ‘रिलायंस जियो’ (Reliance Jio) के बीच टक्कर ने टीवी बनाम डिजिटल के बीच की बहस को और तेज कर दिया है। इस साल पहली बार इस लीग के लिए मीडिया अधिकार दो नेटवर्क्स के बीच बंट गए हैं। ऐसे में मार्केट दोनों माध्यमों पर दर्शकों की संख्या (व्युअरशिप) को लेकर दावों और प्रतिदावों से भरा हुआ है।

इस बारे में ‘डिज्नी स्टार’ (Disney Star) में नेटवर्क की ऐडवरटाइजिंग सेल्स के हेड अजीत वर्गीज को आईपीएल के मामले में डिजिटल के मुकाबले टीवी के दर्शकों की ज्यादा संख्या को लेकर कोई संदेह नहीं है। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) की एडिटर नाजिया अल्वी रहमान से खास बातचीत में वर्गीज ने जोर देकर कहा कि डिजिटल माध्यम पर आईपीएल फ्री है अथवा पेड है, इस बात का टीवी व्युअरशिप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वर्गीज के अनुसार, चूंकि इस लीग को बड़ा दर्शक वर्ग और परिवार देखते हैं, ऐसे में करीब 75 प्रतिशत रेवेन्यू टीवी को मिलेगा।   

प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

हमारे सूत्रों का कहना है कि आप पिछले वर्षों के विपरीत इस बार अपनी इन्वेंट्री रोक रहे हैं। जबकि पूर्व में आप सीजन की शुरुआत में पूरी तरह से इन्वेंट्री लगा देते थे। क्या यह जानबूझकर किया जा रहा है या यह मार्केट की स्थितियों के कारण हो रहा है? आपके लिए अब तक का आईपीएल कैसा रहा है?

इंडस्ट्री पिछले करीब छह महीनों से प्रतिकूल परिस्थितियों से गुजर रही है और इसका आईपीएल से कोई लेना-देना नहीं है। आप किसी भी क्षेत्र या बिजनेस को देख सकते हैं, चाहे वह स्टार्ट-अप हो या ई-कॉमर्स। यह विभिन्न माध्यमों और बिजनेस में आपको दिखाई देगा। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों से आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसके अलावा व्यापक तौर पर फैले मार्केट का भी असर पड़ता है और यह उस तरह के पूर्व निर्धारित नहीं है, जिस तरीके से कोई चाहता है। जैसे- जैसे हम आगे बढ़ते हैं और कुछ कहते हैं, तमाम निर्णय हो रहे हैं। मार्केटर्स भी इस दिशा में सोच रहे हैं और निवेश फैला रहे हैं। इसका किसी मीडियम यानी माध्यम से कोई लेना-देना नहीं है। यहां खास बात यह है कि जब डिजिटल बनाम टीवी की बात आती है तो हमने खर्च के मामले में मार्केट में कोई बदलाव नहीं देखा है।

इस बार के आईपीएल को लेकर मार्केट में काफी निगेटिव बातें भी चल रही हैं। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इससे मार्केटर्स भ्रमित हो गए हैं। ऐसे में उनमें से कुछ ने प्रतीक्षा करें और देखें (wait & watch policy) की पॉलिसी अपनाई हुई है। क्या आप इस बात से सहमत हैं?

हमारी ओर से नकारात्मक टिप्पणी कभी नहीं आई है। हमने केवल अपनी उपलब्धियों और अपनी मजबूती (strength) के बारे में बात की है। हम किसी तरह की नकारात्मक बात नहीं फैलाते हैं। हमारा मानना है कि कि प्रत्येक प्लेटफॉर्म का अपना महत्व होता है। हम ऐसे ईकोसिस्टम में भी काम कर रहे हैं जहां हम डिजिटल पर स्पोर्ट्स देते हैं। रही बात बाजार में कंफ्यूजन की तो यह बहुत सारे भ्रामक डाटा के कारण हो सकती है। हम मानते हैं कि किसी भी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए उसकी पुष्टि की जरूरत है। मुझे लगता है कि क्लाइंट्स स्पष्टता चाहते हैं। हम यहां अपनी टीवी स्टोरी को बेचने के लिए हैं, न कि किसी और की स्टोरी को झुठलाने अथवा नकारने के लिए।  

पिछले महीने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि स्टार इंडिया इस आईपीएल में अपना आधार खो सकता है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि विज्ञापन राजस्व (ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू) का बड़ा हिस्सा (60% तक) डिजिटल में जाने की उम्मीद है और आपको सिर्फ 40% ही मिल सकता है। आपका इस बारे में क्या कहना है?

हम आईपीएल को तीन एंगल्स से देखते हैं। पहला है- कंज्यूमर का अनुभव, दूसरा आईपीएल शुरू होने के बाद आने वाले आंकड़े और तीसरा विज्ञापनदाताओं का सपोर्ट। अगर मैं कंज्यूमर के अनुभव की बात डिजिटल बनाम डिजिटल ही करता हूं, तो हमने देखा है कि डिजिटल के मुफ्त होने का टीवी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और मैं आपको तीनों दावों को लेकर डेटा दे सकता हूं। हमने टीवी बनाम डिजिटल में कोई बदलाव नहीं देखा है और न ही बजट में कोई बदलाव हुआ है। हमेशा कुछ क्लाइंट्स ऐसे होते हैं जो डिजिटल अधिक करते हैं और कुछ ऐसे क्लाइंट होते हैं जो टीवी अधिक करते हैं और यह मिश्रण समान रहा है। आप जिस रिपोर्ट के बारे में बात कर रही हैं, वह मुझे पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई लगती है और उनके द्वारा जो दावे किए गए हैं, संभवत: उन पर पर्याप्त रिसर्च नहीं किया गया है।

टीवी और डिजिटल के बीच ऐड रेवेन्यू के विभाजन को लेकर आपका क्या अनुमान है?

हमारे वर्तमान विश्लेषण के अनुसार, यह रेंज लगभग 75% टीवी और 25% डिजिटल है। हमने यह विश्लेषण पिछले वर्षों के अपने डेटा के आधार पर और अपने एजेंसी पार्टनर्स और क्लाइंट्स से बात करने के बाद किया है, जो दोनों के साथ बिजनेस कर रहे हैं। हमने इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा है। अगर आप ‘बार्क’ (BARC) के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल की तुलना में पहले दिन ही टीवी की रेटिंग में 31% की बढ़ोतरी हुई है और टीवी देखने का समय 50% बढ़ गया है। टीवी देखने के समय में वृद्धि कंज्यूमर के बेहतर अनुभव का स्पष्ट संकेत है। यह उस माध्यम की ताकत को दर्शाता है, जहां लोग परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताते हैं और इस खेल को बड़ी स्क्रीन पर देखते हैं। हमने यह भी देखा है कि पहुंच दो अंकों में बढ़ रही है। ये आंकड़े हमारे विश्वास की पुष्टि करते हैं कि डिजिटल माध्यम पर आईपीएल के पेड या मुफ्त होने का टीवी दर्शकों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

आपके प्रतियोगी ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उनकी टक्कर में आपने एक मेलर में अपने 2019 के आंकड़ों रखे हैं, जब आईपीएल को हॉटस्टार पर भी मुफ्त में स्ट्रीम किया गया था। क्या आप मानते हैं कि इस तरह की बातों से मार्केटर्स और एजेंसियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है?

ऐप के डाउनलोड की संख्या के बारे में मार्केट में बहुत सारे दावे (claims) और प्रतिदावे (counterclaims) हैं। मैं यहां कुछ बातें स्पष्ट करना चाहूंगा कि हमें यह देखने की जरूरत है कि इन नंबरों की तुलना पिछले वर्ष के डेटा और वास्तविकता से कहां की गई है। यदि हम प्लेटफॉर्म रीच के बारे में बात करें तो भले ही मैं पहले सप्ताहांत में 10 करोड़ का दावा करने वाले सार्वजनिक डेटा को मानूं तो  यह वास्तव में हॉटस्टार के 2019 के नंबरों की तुलना में 26% कम है, जब हम इसे मुफ्त में दिखा रहे थे।

कुल मिलाकर देखा जाए तो दुनिया भर में डिजिटल तेजी से बढ़ रहा है। यह आईपीएल के लिए गिरावट कैसे दिखा सकता है?

हम डिजिटल के समग्र विकास पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। मैं जिस बिंदु के बारे में बात कर रहा हूं वह वर्तमान आईपीएल के बारे में है। मुझे इस बात का सटीक उत्तर नहीं पता लेकिन यह ऐप के बदलाव के कारण हो सकता है। हमने देखा है कि कंज्यूमर्स अभी भी हॉटस्टार पर आ रहे हैं। पहले दिन हमने हॉटस्टार ऐप के बड़ी संख्या में डाउनलोड देखे हैं, क्योंकि यह पिछले चार-पांच वर्षों के दौरान आईपीएल देखने के लिए पसंदीदा स्थान रहा है। हम टीवी देखने के समय के दावों की बात करें तो यह पिछले साल SVOD में हॉटस्टार की तुलना में 25-26% कम हैं।

इस बीच, डिजिटल का अनुभव सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है। इसमें ऐप क्रैश होने, बफ़रिंग और लॉगिंग समस्याओं की बात कही गई है। संभवत: पिछले वर्ष की संख्या की तुलना में इसकी संख्या में कमी आई है। इसके अलावा इसे फिर से एक नया ऐप मानते हुए, बहुत अधिक बदलाव नहीं हुआ है। लोग हॉटस्टार पर आईपीएल देखने के आदी हैं। तीसरा, इंस्टॉल और डाउनलोड होने वाले ऐप की संख्या में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है। यह दावा किया गया है कि 25 करोड़ लोगों ने ऐप (शुरुआती दिन) और सप्ताहांत में 50 करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया।

लेकिन हमने प्रकाशित स्रोतों और तीसरे पक्ष के डेटा को देखा है,। ये आंकड़े उन दावों के आस-पास भी नहीं हैं। यह सच हो सकता है कि बहुत सी चीजें रहीं, जिनके लिए उन्होंने योजना बनाई थी और जो नहीं हुई हैं।

डिज्नी स्टार ने आईपीएल के टीवी अधिकारों के लिए 23,575 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जिसका मतलब है कि आप प्रत्येक मैच के लिए 57.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे, आप इस पैसे को कैसे वसूलने की योजना बना रहे हैं?

मार्केट में परिवर्तन होता रहता है। दिन के अंत में हम यह तय नहीं करते हैं कि मंदी कब होगी, कब उछाल आएगा और उसके क्या निहितार्थ होंगे। यह पांच साल की प्रॉपर्टी है, जिसमें हमने निवेश किया है। हमें विश्वास है कि टीवी पर खर्च जारी रहेगा और यही कारण है कि हम इतने आशान्वित हैं। जब तक हम मार्केटर्स को टीवी की ताकत के बारे में समझा सकते हैं, मुझे भविष्य में भी चिंता करने का कोई कारण दिखाई नहीं देता है। हमारे लिए यह सबसे महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि कंज्यूमर्स को हमारे मीडियम पर आईपीएल का शानदार अनुभव मिले। इसी पर हमारा ध्यान केंद्रित है और पैसा इसके पीछे आएगा।


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