होम / साक्षात्कार / पत्रकारिता के इन्हीं अटूट सिद्धांतों पर रहेगा 'Collective Newsroom' का फोकस: रूपा झा

पत्रकारिता के इन्हीं अटूट सिद्धांतों पर रहेगा 'Collective Newsroom' का फोकस: रूपा झा

समाचार4मीडिया से बातचीत में 'कलेक्टिव न्यूजरूम' की सीईओ और को-फाउंडर रूपा झा ने इसकी शुरुआत, आज के मीडिया परिदृश्य में विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौतियों और भविष्य के विजन पर चर्चा की।

पंकज शर्मा 1 year ago

भारत में ‘ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ यानी कि 'बीबीसी' (BBC) के चार सीनियर एंप्लॉयीज द्वारा इसी साल अप्रैल में नई और इंडिपेंडेंट कंपनी 'कलेक्टिव न्यूजरूम' (Collective Newsroom) लॉन्च की गई है। जानी-मानी पत्रकार और 'बीबीसी इंडिया' की हेड रहीं रूपा झा इस कंपनी में सीईओ और को-फाउंडर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। रूपा झा स्वतंत्र पत्रकारिता को लेकर गहरी प्रतिबद्धता रखती हैं और उनकी यात्रा साहस, दूरदर्शिता और पत्रकारिता की सच्चाई को बनाए रखने के प्रति समर्पण का उदाहरण है।

समाचार4मीडिया से बातचीत में रूपा झा ने 'कलेक्टिव न्यूजरूम' की शुरुआत, आज के मीडिया परिदृश्य में विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौतियों और इसके भविष्य के विजन पर चर्चा की। इस बातचीत में रूपा झा ने 'कलेक्टिव न्यूजरूम' के माध्यम से पत्रकारिता में उनकी सोच और मीडिया में विश्वसनीयता बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाया। उनका मानना है कि चाहे परिदृश्य कितना भी बदल जाए, सच्चाई, सटीकता और निष्पक्षता पत्रकारिता के अटूट सिद्धांत हैं और यही 'कलेक्टिव न्यूजरूम' का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश: 

'बीबीसी' में करीब 20 साल बिताने के बाद आपने 'कलेक्टिव न्यूजरूम' शुरू करने का फैसला क्यों किया, आपको इसके लिए किस बात ने प्रेरित किया?

बीबीसी में काम करना बेहद सकारात्मक अनुभव था, लेकिन भारत में विदेशी मीडिया के लिए परिदृश्य बदलने लगा। भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के नियमों में सख्ती के कारण बीबीसी के कामकाज पर असर पड़ा। ऐसे में मैंने और मेरे तीन सहयोगियों, जो 20 साल से अधिक समय से बीबीसी के साथ थे ने सोचा कि अब कुछ स्वतंत्र रूप से करने का समय आ गया है। बीबीसी का मंच और इसके मूल्य हमें बहुत प्रिय थे, लेकिन यह सही समय था कुछ नया और स्वतंत्र करने का। इसी विचार से 'कलेक्टिव न्यूजरूम' की शुरुआत हुई, ताकि हम भारतीय और वैश्विक दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और विश्वसनीय कंटेंट को तैयार कर सकें, साथ ही अधिक लचीले ढंग से काम कर सकें।

'कलेक्टिव न्यूजरूम' का दृष्टिकोण बीबीसी से किस तरह अलग है?

मूल सिद्धांत वही हैं: स्वतंत्रता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता। लेकिन 'कलेक्टिव न्यूजरूम' हमें अधिक रचनात्मक स्वतंत्रता और तेजी से कार्य करने की क्षमता देता है। बीबीसी में हमें कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब हम तेजी से निर्णय ले सकते हैं और मीडिया के वातावरण में आने वाले बदलावों के प्रति अधिक तत्पर हो सकते हैं। हम अब भी निष्पक्ष और तथ्य आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं, लेकिन छोटे और अधिक लचीली टीम के साथ।

क्या स्वतंत्र रूप से काम करने में कुछ चुनौतियां भी आई हैं? 

बिल्कुल। सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि हम बीबीसी की तरह ही विश्वसनीयता और भरोसा बनाए रखें, खासकर ऐसे समय में जब मीडिया पर भारी दबाव है। मीडिया में बहुत शोर है और तथ्यात्मक और अच्छी तरह से तैयार स्टोरीज के साथ आगे आना अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसके अलावा, एक नई संस्था के रूप में स्थायी मॉडल तैयार करना और अपने मूल्यों पर कायम रहना चुनौतीपूर्ण रहा है। साथ ही, इस माहौल में नई प्रतिभाओं को पोषित करना भी एक चुनौती है।

इस बदलते मीडिया परिदृश्य में आप नई प्रतिभाओं को कैसे तैयार करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाते हैं?

'कलेक्टिव न्यूजरूम' में हम मेंटरशिप पर जोर देते हैं और नई प्रतिभाओं को विकसित करते हैं। पत्रकारिता न केवल प्रशिक्षण पर आधारित है, बल्कि यह एक अंतर्निहित स्वभाव भी है। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि युवा पत्रकार अनुभवी पेशेवरों से सीख सकें। हमारी टीम सहयोगात्मक है, जहां हर किसी की राय की कद्र होती है। साथ ही, अलग-अलग भाषाओं में काम करने वाले पत्रकारों की चुनौतियों को समझना और उन्हें सही समर्थन देना भी जरूरी है।

'कलेक्टिव न्यूजरूम' के कंटेंट को आप आज के मीडिया परिदृश्य में किस तरह से अलग मानते हैं? 

हम तथ्य-आधारित और निष्पक्ष पत्रकारिता पर जोर देते हैं। आज के मीडिया माहौल में, जहां अक्सर राय तथ्यों पर हावी हो जाती है, हम सच्चाई की रिपोर्टिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हम कई भारतीय भाषाओं में कंटेंट तैयार करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारी पत्रकारिता हर क्षेत्र के लिए प्रासंगिक और विश्वसनीय हो। साथ ही, हम डिजिटल और सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों का उपयोग करके विभिन्न प्लेटफार्म्स के माध्यम से अपने दर्शकों तक पहुंचते हैं।

बहुभाषी कंटेंट तैयार करने की राह में आने वाली जटिलताओं को आप कैसे संभालती हैं? 

यह एक चुनौती जरूर है, लेकिन हमारी ताकत भी। भारत एक विविधतापूर्ण देश है, और हर भाषा समूह की अपनी प्राथमिकताएं और संवेदनशीलताएं होती हैं। हमारे पास प्रत्येक भाषा के लिए अलग-अलग टीमें हैं, लेकिन हम यह सुनिश्चित करते हैं कि मुख्य संदेश सभी कंटेंट में समान हो। इसमें काफी समन्वय की आवश्यकता होती है, लेकिन इसी के परिणामस्वरूप हम विभिन्न भाषाओं में प्रासंगिक और उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट तैयार कर पाते हैं। 


टैग्स बीबीसी इंटरव्यू रूपा झा कलेक्टिव न्यूज
सम्बंधित खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 week ago

पत्रकारिता में इन बातों पर फोकस जरूरी, बाकी सब अपने आप संभल जाएगा: संकेत उपाध्याय

समाचार4मीडिया से बातचीत में जाने-माने पत्रकार संकेत उपाध्याय का कहना था- ईको सिस्टम बंटोरने के इस सिस्टम में जागरूक हो जाना ही एक ईको सिस्टम है।

1 week ago

अब ‘मैड मेन’ नहीं, ‘मशीन माइंड्स’ का है जमाना: सर मार्टिन सोरेल

S4 Capital के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने डॉ. अनुराग बत्रा से बातचीत में बताया कि एआई के दौर में विज्ञापन जगत में कैसे आगे बढ़ें और कौन-सी बड़ी कंपनियां पिछड़ रही हैं।

1 week ago

टीवी व डिजिटल में मुकाबले की बहस गलत, प्लेटफॉर्म की सीमाओं से आगे बढ़ें: आशीष सहगल

टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क के नए CEO और मीडिया व एंटरटेनमेंट के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल ने कहा कि टीवी और डिजिटल के बीच मुकाबले की चर्चा एक गलत धारा है।

18-December-2025

सफलता के लिए बदलाव की रफ्तार पकड़नी होगी: उदय शंकर

जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने CII बिग पिक्चर समिट में भारतीय मीडिया के भविष्य पर SPNI के एमडी व सीईओ गौरव बनर्जी से बातचीत की।

03-December-2025


बड़ी खबरें

TV से सोशल मीडिया व AI तक बदला दौर, पर पत्रकारिता की असली आत्मा आज भी कायम: सुधीर चौधरी

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में गुरुवार को दिग्गज पत्रकार और न्यूज एंकर सुधीर चौधरी ने टीवी पत्रकारिता से लेकर डिजिटल और AI के दौर तक के सफर पर खुलकर बात की।

16 hours ago

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन–CCI मामले की सुनवाई 11 मई तक टाली

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच चल रहे मामले की सुनवाई अब 11 मई 2026 तक टाल दी है।

16 hours ago

AI, टेक्नोलॉजी और भरोसे की कसौटी पर खड़ी न्यूज इंडस्ट्री, DNPA कॉन्क्लेव में मंथन

नई दिल्ली में आयोजित डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में मीडिया, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी से जुड़े बड़े लीडर्स ने इस पर विस्तार से चर्चा की।

15 hours ago

DNPA Conclave 2026: तस्वीरों में देखें कार्यक्रम की झलकियां

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की ओर से नई दिल्ली के Shangri-La Eros होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में डिजिटल मीडिया की बदलती दुनिया पर खुलकर चर्चा हुई।

17 hours ago

राणा यशवंत विवाद पर न्यूज इंडिया मैनेजमेंट की सफाई, चेयरमैन ने रखा अपना पक्ष

हिंदी न्यूज चैनल न्यूज इंडिया में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ रहे राणा यशवंत की ओर से सोशल मीडिया पर सामने आए बयान के बाद अब चैनल मैनेजमेंट की तरफ से भी इस पूरे मामले पर विस्तार से अपना पक्ष रखा गया है।

18 hours ago