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कोरोना संकट से निपटने की Network18 की क्या हैं तैयरियां, बताया CEO अविनाश कौल ने
‘नेटवर्क18’ के टेलिविजन न्यूज के सीईओ अविनाश कौल ने वर्तमान स्थिति के बारे में बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने कोरोना वायरस के प्रकोप व लॉकडाउन से आगे आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बात की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
टीवी दर्शकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है, लेकिन क्या इसका प्रभाव विज्ञापन बिलों पर दिखाई देता है? शायद नहीं। दर्शकों की संख्या में तेजी से हुई वृद्धि के बीच, टीवी न्यूज मीडिया एक तरफ कम वर्कफोर्स के बावजूद इस मोर्चे पर बहादुरी से काम रही है, वहीं दूसरी तरफ कम एडवर्टाइजमेंट का सामना भी कर रही है, क्योंकि लॉकडाउन के इस दौर में एडवर्टाइजर्स विज्ञापन देने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया की सीनियर कॉरेस्पोंडेंट तस्मयी रॉय से ‘नेटवर्क18’ (Network18) के टेलिविजन न्यूज के सीईओ अविनाश कौल ने वर्तमान स्थिति के बारे में बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने कोरोना वायरस के प्रकोप व लॉकडाउन के कारण आगे आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बात की।
जानिए क्या कुछ कहा-
न्यूज जॉनर की बात करें तो दर्शकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। ऐसे में क्या आपको लगता है कि यह वृद्धि आगे भी जारी रहेगी? दर्शकों की संख्या में किस तरह का उछाल आने की उम्मीद है?
देश में 25 मार्च से लॉकडाउन है। BARC इंडिया ने 12वें हफ्ते के जो आंकड़े जारी किए वह ‘जनता कर्फ्यू’ वाले दिन और लॉकडाउन के तीन दिन को कवर करते हैं। लॉकडाउन में हर दिन हुई वृद्धि को देखें तो टीवी के साप्ताहिक आंकड़े निश्चित रूप से बढ़ेंगे। अन्य जॉनर के मुकाबले यदि न्यूज जॉनर के दर्शकों की संख्या की बात करें तो इसमें तेजी से वृद्धि देखने को मिली है और वह इसलिए क्योंकि जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स पर फ्रेश कंटेंट का अकाल पड़ा हुआ है, जबकि इसके मुकाबले न्यूज जॉनर ने बहुत ही फ्रेश और लाइव कंटेंट उपलब्ध कराया है। इसलिए, हम उम्मीद करते हैं कि न्यूज जॉनर के साप्ताहिक आंकड़े आगे 10-15% तक और बढ़ेंगे। इसके साथ ही नेटवर्क18 के न्यूज चैनल्स का वृद्धि प्रतिशत अन्य चैनलों के मुकाबले काफी बेहतर होगा। हम नेटवर्क18 के न्यूज चैनल्स के साप्ताहिक आंकड़े 20-25% तक और बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। हम अपने दर्शकों को जोड़े रखने और कोरोना के संक्रमण के बारे में सूचित करने के लिए उन्हें अन्य न्यूज प्रोग्राम देने की योजना भी बना रहे हैं।
इस दौरान विशेष प्रोग्रामिंग योजनाओं के बारे में थोड़ा सा बताएं?
व्युअरशिप पैटर्न में आया बदलाव और जो बाहरी मौजूदा स्थिति है, वह प्रोग्रामिंग में कुछ नयापन का आह्वान करती है। चूंकि मरीजों की बढ़ती संख्याओं के बीच लोग COVID-19 से जुड़ी खबरों का अपडेट देख रहे हैं। दर्शकों को इसको लेकर पूरी जानकारी हो इसके लिए हम उन्हें हेल्पलाइन भी प्रदान कर रहे हैं। डॉक्टरों के जरिए हम उन्हें काउंसिलिंग की सुविधा भी दे रहे हैं। दर्शकों में जो गलत धारणाएं और डर है, हम उन्हें दूर कर उनकी मदद भी कर रहे हैं।
हमारे पास ऐसे स्पेशल प्रोग्राम्स हैं, जो हेल्थकेयर और फिटनेस टिप्स प्रदान करते हैं ताकि दर्शकों को लॉकडाउन से निपटने के लिए बेहतर तरीका सुझा सकें। वहीं हमारा CNBC क्लस्टर महामारी के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है। ऐसे समय पर फंड को बेहतर तरीके से कैसे मैनेज करें, इस पर हर दिन सर्वोत्तम तरीके से अपने विचार भी साझा कर रहा है। CNN-News18 ने विशेष कार्यक्रमों का एक सेट तैयार किया है, जिनमें ‘कोरोना वारियर्स’, ‘कोरोना फाइल्स’, ‘कोरोना कंट्रोल रूम’ और ‘डॉक्टर कॉल-इन’ शामिल हैं। ये कार्यक्रम सर्वाइवर की कहानियां बताते हैं, हर दिन मरीजों की संख्या की सही जानकारी देते हैं, क्या कुछ पॉजिटिव हो रहा है, इसके बारे में बताते हैं और इस महामारी को लेकर दुनिया में क्या कुछ चल रहा है, इसको लेकर भी नियमित अपडेट प्रदान करते हैं। हमने दर्शकों के लिए एक कोरोना नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है, जिससे दर्शकों को उन सवालों के जवाब मिल सकें, जो बीमारी के संबंध में हैं। इसलिए आप देख सकते हैं कि हमारा पूरा फोकस दर्शकों को बनाए रखने और लॉकडाउन से बचे रहने के लिए उन्हें सभी तरह की जानकारियां देने पर है। हमारा स्पेशल फोकस तो पॉजिटिव न्यूज और उपलब्धियों की कहानियां बताने पर है क्योंकि बाहर के वातावरण में बहुत ज्यादा निराशा बढ़ रही है।
News18 India ने उत्सव की भावना को बनाए रखने के लिए राम नवमी पर विशेष शो किया। 'खबर पक्की है' के माध्यम से चैनल ने इस महामारी से जुड़े तरह-तरह के मिथक को तोड़ने का प्रयास किया और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रही फेक न्यूज की सही जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है। इसलिए, हमारा फोकस तरह-तरह के मिथक को तोड़ना और लोगों को और शिक्षित करना है। 26 राज्यों में हमारे चैनल ज्यादा से ज्यादा लोकल खबरें प्रदान करने, निराशा और साहस की कहानियों को उजागर करने और स्थिति के बारे में संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने में सक्षम हैं।
न्यूजरूम के कुछ लोग घर से काम कर रहे हैं। कम वर्कफोर्स के बावजूद आप सिस्टम को कैसे बचाए हुए हैं? कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आप क्या कुछ कर रहे हैं?
हमने इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया है, क्योंकि हम जो भी करते हैं, लोगों को अपने दिल में रखकर करते हैं। हमें अपनी प्रतिभाशाली लोगों की टीम के लिए बहुत ज्यादा चिंता हैं और हम उनके साथ खड़े हैं। लेकिन 70 करोड़ दर्शकों के साथ भी हम कोई समझौता नहीं कर सकते, क्योंकि वह भी हमारी जिम्मेदारी है।
हम नया वर्किंग प्रोटोकॉल्स फॉलो कर रहे हैं। अपने कर्मचारियों को आराम से काम करने की छूट दी हुई है, ऐसे में भी हमारी संपादकीय टीम्स विभिन्न स्थानों से 24 घंटे काम कर रही है और COVID-19 से जुड़ी खबरों को सबसे तेजी से दर्शकों तक पहुंचा रहीं हैं। मुझे यह भी कहते हुए गर्व हो रहा है कि हमारे फ्रंटलाइन रिपोर्टर्स का साहस और उनका तप वाकई प्रशंसनीय है।
एक ऑर्गनाइजेशन के तौर पर, हम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर सबसे अधिक चिंतित हैं। हम नेटवर्क18 ग्रुप को कोविड-19 से मुक्त रखने और अपने सहयोगियों व उनके परिजनों को सभी तरह की सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इसे सुविधाजनक बनाने के लिए ऑर्गनाइजेशन के अंदर एक कोरोना रिस्पांस टीम बनाई गई है। हमारी एचआर और एडमिन टीम्स स्व-घोषित टूल के माध्यम से यानी जिसे सिम्प्टम ट्रैकर कहते हैं, उसके जरिए सभी कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर नजर बनाए रखने का काम कर रहीं हैं। मुझे एक बार फिर यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि हम अपने सभी चैनलों और डिजिटल संपत्तियों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं, जिसे हमने पहले से ही अच्छी तरह से बनाए रखा है। ऐसा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि हमने बिजनेस प्लान को पहले से ही इस तरह से तैयार किया हुआ है।
सामान्य परिस्थितियों में इस तरह की रेटिंग विज्ञापन बिलों के लिए खुशी की बात होती है, लेकिन मार्केट की परिस्थितियों को देखते हुए कई ब्रैंड्स विज्ञापन को लेकर उत्साहित नहीं हैं। आप उससे कैसे निपट रहे हैं? विज्ञापनदाताओं से आपकी क्या अपील है?
अप्रैल में विज्ञापन में निश्चित रूप से धीमी शुरुआत देखी गई है। लेकिन अर्थव्यवस्था में पहले से मौजूद मंदी, नए वित्तीय वर्ष की योजनाओं और ऑनलाइन ऐप्स के माध्यम से काम करने के विभिन्न तरीकों के साथ इसकी तुलना करनी होगी। चीजों को नए तरीके से काम करने में समय लगता है और हम पहले से ही विभिन्न विज्ञापनदाताओं की अधिक रुचि को देख रहे हैं, जो दर्शकों तक पहुंचने के विभिन्न रचनात्मक तरीके अपना रहे हैं।
क्लाइंट के नए क्रिएटिव आने वाले नहीं हैं और कुछ पुराने क्रिएटिव वर्तमान परिदृश्य में फिट नहीं बैठते हैं। इसलिए, नेटवर्क18 ने क्रिएटिव सॉल्यूशंस के जरिए ग्राहकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना शुरू कर दिया है, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा खबरों देखें और इससे ज्यादा से ज्यादा रेटिंग में इजाफा हो सके। वैसे आने वाले दिनों को लेकर हम आशावादी हैं।
टीवी रेटिंग सस्पेंड करने को लेकर बातें हो रही हैं। इसे लेकर आपके क्या विचार हैं?
कोविड-19 एक वैश्विक महामारी है, लेकिन दुनिया में कहीं भी रेटिंग्स डेटा को बंद नहीं किया गया है, सिवाय डायरी पद्धति के आधार पर। हमें BARC द्वारा आश्वासन दिया गया है कि उनके रेटिंग संग्रह तंत्र इलेक्ट्रॉनिक हैं और उन्हें मैन्युअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती है, तो ऐसे में इसमें स्वास्थ्य का जोखिम पैदा ही नहीं होता है। ऐसी परिस्थितियों में मेजरमेंट रोक देने का कोई मतलब नहीं है और वह भी इस माध्यम के लिए, जिसमें दर्शकों की संख्या सबसे अधिक है। डिजिटल और टीवी मेजरमेंट सुरक्षित है और इसमें स्वास्थ्य संबंधी कोई जोखिम नहीं है। इसलिए ऐडवर्टाइजर्स और प्रोग्रामर्स को यह जानने का अधिकार है कि क्या काम कर रहा है और क्या नहीं।
इस संकट से प्रभावित लोगों की मदद व सपोर्ट करने के लिए नेटवर्क ने कई मुहिम शुरू की हैं। इस बारे में कुछ बताएं?
हमने लॉकडाउन के दौरान देश में सबसे कमजोर वर्ग के लिए आर्थिक रूप से मदद करने का एक अभियान #IndiaGives शुरू किया है। अपने पहले कदम के तहत, नेटवर्क18 ग्रुप के 6,000 से अधिक एम्प्लॉयीज ने प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष में अपना एक दिन का वेतन देकर इस मुहिम की शुरुआत की है। इस मुहिम का उपयोग दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों के लिए किया जा रहा है, जिनकी आजीविका लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुई है। हमारे अभियान का एक मुख्य अंतर यह है कि इसका एक ऐसी एडिटोरियल टीम नेतृत्व कर रही है, जिसमें हमारे पत्रकारों को महारथ है और हमारी प्रोग्रमिंग में भी यह दिखाई दे रहा है। इससे इनमें विश्वसनीयता भी जुड़ जाती है। प्रतिदिन 19 करोड़ लोगों की पहुंच के साथ, यह जरूरी है कि हम सामाजिक भलाई के लिए एक साहसिक कदम उठाएं।
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