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रूबिका लियाकत ने बताया, किस तरह मिली न्यूज एंकर बनने की प्रेरणा

ABP News की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने L&T Mutual Fund के सीईओ कैलाश कुलकर्णी के साथ एक बातचीत में तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

L&T Mutual Fund The Winner’s Circle  के वर्चुअल कॉन्क्लेव 2020 के सातवें एडिशन के तहत पत्रकारिता विषय पर ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने L&T Mutual Fund के सीईओ कैलाश कुलकर्णी के साथ एक बातचीत में तमाम पहलुओं पर अपने विचार रखे। 

‘CUT THROUGH THE NOISE’  विषय के तहत एक दिसंबर की दोपहर चार बजे से हुए इस आयोजन के दौरान रूबिका ने मीडिया इंडस्ट्री में अब तक के उनके सफर, इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा जैसे कई प्रमुख बिंदुओं पर भी बात की।

इस बातचीत के दौरान रूबिका का कहना था, ‘मेरे माता-पिता दोनों उदयपुर में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड में काम करते थे। मेरे पिता एक खिलाड़ी थे और वह हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड में स्पोर्ट्स कोटा के तहत गए थे। ग्रेजुएशन करने के बाद ही उनकी नौकरी लग गई थी। मेरी मां ने उस समय एमएससी तक की पढ़ाई की थी और वह भी वहीं नौकरी करती थीं। पिताजी मेरी मां की प्रतिभा को पहचानते थे और उन्होंने ही दबाव बनाया कि यदि मेरी मां और पढ़ाई करें तो उन्हें हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड में प्रमोशन मिल सकता है और जीवन पहले से बेहतर हो सकता है। उस समय मेरा और मेरी बहन का जन्म हो चुका था।’

रूबिका के अनुसार, ‘पिताजी ने मां को समझाया कि आपने एमएससी कर ली है और यदि पीएचडी कर ली तो प्रमोशन आसान हो जाएगा। यह सुनकर मेरी मां ने यह कहते हुए कि दो बेटियां हो चुकी हैं। परिवार की और ऑफिस की जिम्मेदारी के चलते आगे पढ़ाई करना मुश्किल होगा, इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में मेरे पिता ने कहा कि आप अपने पिता के यहां जाकर पीएचडी कर सकती हैं। लेकिन मेरी मां ने इससे इनकार कर दिया और अपने घर पर रहकर ही पीएचडी का निर्णय लिया। इसके बाद पिताजी ने ऑफिस के साथ-साथ हमारे ब्रेकफास्ट से लेकर स्कूल जाने तक की जिम्मेदारी संभाली और तब मेरी मां ने पीएचडी पूरी की। ऐसे में मैंने बचपन में ही मां की पीएचडी के लिए अपने पिता को जिस तरह कड़ी मेहनत करते हुए देखा और जिस तरह पिता ने हमें पढ़ाया, उसने बचपन से ही मेरे मन से लड़का-लड़की का अंतर खत्म कर दिया। मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मैं लड़की हूं तो यह नहीं कर सकती। खास बात यह रही कि मेरी मां ने अपनी पीएचडी पूरी की और वहां उन्हें प्रमोशन मिला। करीब 200 लोग उनके मातहत काम करते थे।’

रूबिका के अनुसार, माता-पिता ने हमें बचपन से यही सिखाया कि ऐसी कोई चीज नहीं है, जिसे आप नहीं कर सकते हैं। उनका कहना था कि आप महिला हैं या पुरुष इससे फर्क नहीं पड़ता, सफलता के लिए जुनून और पैशन होना चाहिए।

कैलाश कुलकर्णी द्वारा यह पूछे जाने पर कि आपने जर्नलिज्म को ही क्यों चुना, क्या इसकी प्रेरणा आपको अपने माता-पिता से मिली? रूबिका लियाकत ने बताया, ‘जैसा कि मैने बताया कि मेरे पिताजी रणजी प्लेयर्स सलेक्टर थे, मेरी मां साइंटिस्ट, मेरी दादी काफी धार्मिक महिला थीं, मेरे चाचाजी उस समय मॉडलिंग की दुनिया में काम की तलाश में थे। ये चारों अलग विचारधारा के थे, लेकिन रात को टीवी देखते समय सभी साथ होते थे। उस समय मैं सात-आठ साल की रही होंगी, जब मैंने देखा कि ये चारों लोग टीवी काफी ध्यान से देखते हैं। उस समय मैंने तय कर लिया था कि इन चारों में से मुझे कुछ नहीं बनना, मैं सलमा सुल्तान एंकर की तरह बनना चाहती थी, जिसे हमारे परिवार के चारों सदस्य एक साथ बैठकर गंभीरता से सुना करते थे। हालांकि, मुझे ये नहीं पता था कि जिसे हमारे परिवार के सभी लोग इतनी गंभीरता से सुनते हैं, उसे पत्रकार कहते हैं या न्यूज एंकर कहते हैं, लेकिन मैं उसी तरह बनना चाहती थी, जिसे पूरी दुनिया इतनी गंभीरता से सुनती है। कहते हैं कि जिस चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने में लग जाती है, लगता है कि मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।’ रूबिका का कहना था कि मेरी सलमा सुल्तान से कभी मुलाकात नहीं हो पाई, लेकिन कोविड का दौर गुजरने के बाद मैं उनसे जरूर मिलूंगी।

मीडिया के क्षेत्र में खासकर पिछले दस वर्षों (2010 से 2020) तक आए बड़े बदलावों के बारे में रूबिका का कहना था कि पहले के जो एंकर होते थे उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता था कि खबर कितनी खुशी वाली अथवा दुख वाली है, उन्हें अपने इमोशन न दिखाते हुए खबर पढ़ते समय सिर्फ अपनी बॉडी लैंग्वेज को मेंटेन करना होता था। मैंने पिछले दस सालों में खुद में जो बदलाव देखा है वह यह है कि यदि मैं किसी से नाराज होती हूं या किसी खबर से बहुत ज्यादा दुखी होती हूं तो मैं अपने इमोशन दिखा सकती हूं। यह बहुत महीन रेखा है, जिस पर मंथन हो रहा है। हमारे देश में लोगों के तमाम तरह के विचार हैं, आज के दौर में तमाम लोग अपने-अपने विचार रख रहे हैं। कुछ एक तरफ होते हैं, तो अन्य दूसरी तरफ। मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में हम एकमत होंगे।

वहीं जब उनसे बायस्ड होने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जब लोग आपसे प्यार और आप पर विश्वास करने लग जाते हैं, तो ये आपके के लिए सबसे बड़ा हथियार बन जाता है और कोई भी आपको छू नहीं पाता है। आज पत्रकारिता बदल गई है और समय भी बहुत ज्यादा बदल गया है। हर कोई क्रेडिबिलिटी इश्यू पर सवाल उठाता है। एक समय था जब आतंकवादी घटना होती थी, जिसमें कुछ लोग मारे जाते थे, तो खबर दे दी जाती थी कि आतंकवादी घटना हुई है...  इतने लोग मारे गए हैं... उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा रही है... एसआईटी बैठा दी गई है... लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। अब जब लोग कहते हैं कि आपको अनबायस्ड रहना होगा, तो मैं उनसे माफी मांगकर ये पूछना चाहती हूं कि मैं किसके लिए बायस्ड हूं। वैसे बायस्ड शब्द को मैं सही मानती हूं। मैं एक ही प्लेटफॉर्म पर बुरे और सही को कैसे रख सकती हूं। मैं चौथा स्तम्भ हूं लेकिन चौथे स्तम्भ की ये जिम्मेदारी है कि जो सही है उसको रखें और उसकी तारीफ करें। लेकिन जो गलत है उसे क्यों रखें। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने अंग्रेजों की लड़ाई और हिन्दुस्तान की लड़ाई को क्या एक प्लेटफॉर्म पर रखा था। महात्मा गांधी की जब पत्राकारिता शुरू हुई थी और जिस अंदाज से वे आगे बढ़े थे उसके पीछे एक मिशन था। इसलिए मेरा मिशन है कि मेरा हिन्दुस्तान उनका हिन्दुस्तान बने और ऐसा बने जिसका सपना हम सभी देखते हैं। वैसे यह किन लोगों के विचार हैं जो मुझे अनबायस्ड रहने की नसीहत देते हैं। मैं अपने देश का चौथा स्तम्भ हूं और अपने देश के प्रति वो तमाम चीजें रखूंगी। फिर चाहे वह बायस्ड तरीका ही क्यों न हो। मेरे हिन्दुस्तान के लिए जो बढ़िया है वो रखूंगी। मैं पत्रकार हूं और मानवता के लिए काम करती हूं। मानवता के लिए यदि कोई सबसे मजबूत स्तम्भ है, तो वह हमारा हिन्दुस्तान है और मैं हिन्दुस्तान की ओर से एक पत्रकार हूं और इससे पहले एक भारतीय हूं। इसलिए जिन्हें लेफ्ट या राइट विचारधारा में पड़ना हैं, वे पड़ें। मेरी विचारधारा साफतौर पर ये कहती है कि मुझे उस ट्रैक पर चलना है जो हमारे देश के लिए बेहतर हो। फिर चाहे लेफ्ट का कोई चंक हो, यदि वह मेरे हिन्दुस्तान के लिए बेहतर है तो मैं उनका स्वागत करती हूं।                 

‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) की जानी-मानी सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने पत्रकारिता की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अपने बेबाक शैली से रूबिका ने दर्शकों के दिलों पर अपनी खास छाप छोड़ी है। उदयपुर (राजस्थान) में जन्मीं रूबिका ने मुंबई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। रूबिका ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत उदयपुर में ‘चैनल24’ (Channel 24) के साथ की थी। पूर्व में वह ‘न्यूज24’ (News 24) और ‘जी न्यूज’ (Zee News) में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। रूबिका लियाकत उन गिने-चुने पत्रकारों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया है। उनके कार्यक्रम ‘मास्टरस्ट्रोक’ को काफी देखा जाता है। सोशल मीडिया पर भी उनके प्रशंसकों की बड़ी संख्या है।

पूरा इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं-


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