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क्या लॉकडाउन सही है? बरखा दत्त ने इंटरव्यू में जाना इसका जवाब

कोरोना के खौफ के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लगाया गया जनता कर्फ्यू और अब लॉकडाउन क्या वायरस को कमजोर कर पाएगा? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

कोरोना के खौफ के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर लगाया गया जनता कर्फ्यू और अब लॉकडाउन क्या वायरस को कमजोर कर पाएगा? यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। कुछ लोग इस फैसले की आलोचना भी कर रहे हैं, उनकी नजर में कोरोना से लड़ाई का यह कारगर तरीका नहीं है, लेकिन सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स के निदेशक डॉ. रामानन लक्ष्मीनारायण इसकी हिमायत करते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्ता को दिए इंटरव्यू में उन्होंने लॉकडाउन को बेहद जरुरी बताया है। बरखा ने अपने वेंचर ‘मोजो’ मीडिया के लिए हाल ही में डॉक्टर लक्ष्मीनारायण का इंटरव्यू लिया था। कोरोना वायरस को लेकर देश में चल रहे माहौल में यह इंटरव्यू कई बातों को स्पष्ट करता है। एक तरफ जहां ये संभावित खतरे को रेखांकित करता है, वहीं समाधान भी बताता है। बरखा ने डॉक्टर लक्ष्मीनारायण से कई ऐसे सवाल पूछे जिनका जवाब देश बेसब्री से जानना चाहता है। मसलन, पहला तो यही कि क्या कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए हमारी तैयारी पर्याप्त है?

गौरतलब है कि इंडियन मेडिकल काउंसिल द्वारा कोरोना की टेस्टिंग से जुड़े प्रोटोकॉल में बदलाव किये गए हैं, जिसके तहत अब कोरोना की जांच निजी लैब में भी कराई जा सकती है। इस पर बरखा ने पूछा, ‘आप पहले से ही आगाह करते रहे हैं कि भारत में कोरोना के मामलों की सूनामी आ सकती है, तो क्या प्रोटोकॉल में बदलाव करना काफी है? डॉ. लक्ष्मीनारायण का जवाब था, ‘भारत में अब स्थिति पहले जैसी नहीं है, वायरस फैल रहा है। अब तक हम केवल उन्हीं लोगों की जांच करते आये हैं, जो या तो संक्रमित देशों से आये हैं या फिर जिनमें संक्रमण की पुष्टि हो गई है। लेकिन इस सब में हमने उन लोगों को छोड़ दिया, जो समुदाय में संक्रमण फैलाने के वाहक बने हुए हैं और ऐसा हो भी रहा है। हम यह नहीं कह सकते कि ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि हमने उन्हें टेस्ट ही नहीं किया। वायरस की प्रकृति ऐसी है कि यह तेजी से फैलता है। एक संक्रमित व्यक्ति कम से कम दो-तीन लोगों को पीड़ित बना सकता है। इसलिए इससे प्रभावितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जाता है। चीन, इटली, ईरान फ्रांस और अब यूके में हम यह देख रहे हैं।

बरखा दत्त ने यह भी जानने का प्रयास किया कि वायरस संक्रमित लोगों से जुड़े जो आधिकारिक आंकड़े बताये जा रहे हैं, क्या वे एकदम सटीक हैं। डॉ. लक्ष्मीनारायण ने इसके जवाब में कहा कि ‘मुझे नहीं लगता कि कोई भी यह मानेगा कि जो आंकड़े हमारे सामने हैं वह कदम सही हैं। भारत में अभी बहुत ही कम मामले सामने आए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों के टेस्ट कम किए गए हैं। आने वाले सप्ताह में जब ज्यादा लोगों के टेस्ट किए जाएंगे तो कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हो सकता है। भारत में कोरोना का ट्रांसमिशन बहुत आसान है क्योंकि इस देश की जनसंख्या काफी ज्यादा है’।

अमेरिका या ब्रिटेन में लागू गणितीय मॉडल भारत में लागू करने से जुड़े सवाल पर लक्ष्मीनारायण ने स्पष्ट किया कि भारत में किसी दूसरे देश का मॉडल लागू नहीं किया जा रहा है, बल्कि हम एक समान मापदंड अपना रहे हैं। जो मॉडल हम इस्तेमाल कर रहे हैं वह पूरी तरह से भारत को ध्यान में रखकर करीब 8 से 9 साल पहले बनाया गया था। इसलिए कृपया यह न समझें कि हम किसी दूसरे देश का मॉडल यहां अपना रहे हैं।

इंटरव्यू में कोरोना वायरस से हो रही मौतों पर भी बात हुई। बरखा ने पूछा, ‘मैं यह समझना चाहती हूं कि हर देश की अपनी जनसांख्यिकी होती है। इटली की बात करें तो वहां मृतकों का आंकड़ा इसलिए ज्यादा रहा क्योंकि वहां बुजुर्गों की संख्या अधिक है और वहां के लोग सामाजिक मेल-मिलाप में ज्यादा यकीन रखते हैं, लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं है। तो आप इसे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखते हुए क्या आंकड़ा बताएंगे’?

जिस पर डॉक्टर लक्ष्मीनारायण ने जवाब में कहा, ‘हमारा मानना है कि जुलाई से पहले 300 से 500 मिलियन मामले सामने आ सकते हैं। भारत में हर व्यक्ति को COVID-19 हो सकता है ठीक वैसे ही जैसे लोगों को सामान्य बुखार होता है। लेकिन फिर भी ज़रूरत से ज्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है। कृपया इसे बुखार के रूप में देखें, लेकिन अधिक खतरनाक रूप में, जो खासकर बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है’।

लॉकडाउन के सवाल पर डॉ. लक्ष्मीनारायण ने कहा कि सबसे पहले आपको वायरस के बारे में समझना होगा। कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं ये तुरंत पता नहीं चलता। इसमें कुछ वक़्त लगता है, इसलिए लॉकडाउन का आशय इस चेन को तोड़ना और वायरस की रफ़्तार को धीमा करना है। हम टेस्ट के मामले में पहले से ही पीछे चल रहे हैं। अगर हम ज्यादा लोगों का टेस्ट करते तो संभव है कि और अधिक मामले अब तक सामने आ चुके होते, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया और मैं नहीं जानता कि क्यों। अगर हमें लॉकडाउन करना है, तो अभी समय है। हम दो से तीन सप्ताह का लॉकडाउन कर सकते हैं। मेरा मानना है कि यह बेहद जरूरी है। अमेरिका भी ऐसा कर रहा है, क्योंकि उसने यह जान लिया है कि अगर हम आज लॉकडाउन करते हैं, तो हम दो-तीन हफ़्तों में वायरस के फैलाव के रफ़्तार को काफी धीमा कर देंगे। लेकिन यदि हम इंतजार करते हैं, तो फिर बहुत देरी हो जाएगी’।

कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद भारत ने अपनी सीमायें सील कर दी हैं। कई देशों से आने वालों को भारत में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। क्या इसका यह कदम सही है? इस पर डॉ. रामानन लक्ष्मीनारायण का मानना है कि अब इसका कोई फायदा नहीं है, क्योंकि संक्रमण पहले ही देश में प्रवेश कर चुका है। इस इंटरव्यू में यह भी सामने आया कि भारत वायरस के मामले में फेस-3 में प्रवेश कर गया है। हालांकि, सरकार की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है, लेकिन लक्ष्मीनारायण का कहना है कि हम फेस-3 में आ गए हैं। लिहाजा अब जो भी करना है जल्दी करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बच्चे पोषण के मामले में चीनी बच्चों से कमजोर हैं, इसलिए उनमें संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।

कोरोना के मुकाबले में अहम् कदम क्या होगा? इससे जुड़े सवाल के जवाब में डॉक्टर लक्ष्मीनारायण ने कहा कि व्यापक स्तर पर टेस्टिंग करनी होगी, ताकि यह साफ हो सके कि संक्रमितों का असल आंकड़ा कितना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राइवेट सेक्टर ज़िम्मेदार भूमिका निभाते हुए मुफ्त में टेस्ट करेगा या फिर इसके लिए बाजिब शुल्क ही वसूला जाएगा। अगर संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जैसी की आशंका जताई जा रही है, तो क्या हमारी स्वास्थ्य सेवाएं इतनी सक्षम हैं कि वो इतनी बड़ी तादाद में लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध करा पाएंगी? इस बारे में उन्होंने कहा ‘बड़ी तादाद में लोग बीमार होंगे, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि उनकी मौत न हो। इसके लिए हमें बड़े पैमाने पर अस्थायी अस्पताल बनाने होंगे। स्टेडियम को कुछ वक़्त के लिए अस्पताल में तब्दील किया जा सकता है, अधिक से अधिक वेंटिलेटर तैयार रखने होंगे। बड़े शहरों के अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं करनी होंगी। मौजूदा समय में इन अस्पतालों के हाल अच्छे नहीं हैं’।  

पूरा इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं:

  


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