होम / साक्षात्कार / डैन रोथ ने खास बातचीत में साझा की LinkedIn की एडिटोरियल दुनिया की अंदरूनी कहानी
डैन रोथ ने खास बातचीत में साझा की LinkedIn की एडिटोरियल दुनिया की अंदरूनी कहानी
ग्लोबल प्रोफेशनल दुनिया में कंटेंट, संवाद और प्रभाव की दिशा किस ओर जा रही है? इस सवाल का उत्तर तलाशने के लिए हमें झांकना पड़ता है लिंक्डइन के एडिटर-इन-चीफ डेनियल रोथ की सोच में
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
ग्लोबल प्रोफेशनल दुनिया में कंटेंट, संवाद और प्रभाव की दिशा किस ओर जा रही है? इस सवाल का उत्तर तलाशने के लिए हमें झांकना पड़ता है लिंक्डइन के एडिटर-इन-चीफ डेनियल रोथ की सोच में, जो इस प्लेटफॉर्म को केवल एक नेटवर्किंग साइट नहीं, बल्कि एक जीवंत और सतत विकसित होती एडिटोरियल इकोसिस्टम में तब्दील कर रहे हैं।
एक्सचेंज4मीडिया में मार्टेक (MarTech) प्लेटफॉर्म के एडिटोरियल लीड बृज पहवा के साथ डेनियल रोथ ने विशेष बातचीत में विस्तार से बताया कि एल्गोरिदम आधारित इस दौर में एडिटोरियल जिम्मेदारी का क्या मतलब है, कैसे लिंक्डइन वैश्विक बिजनेस और वर्क ट्रेंड्स को दिशा दे रहा है और क्यों आज के CMO को कंटेंट का अगुआ भी बनना पड़ेगा। वह यह भी साझा करते हैं कि जनरेटिव AI के बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारों और संपादकों की भूमिका कैसे बदल रही है, और लिंक्डइन किस तरह अपनी न्यूज टीम के जरिए न केवल प्रोफेशनल्स को जोड़ रहा है, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखा रहा है।
डेनियल रोथ का यह इंटरव्यू, आज की बदलती कार्य-संस्कृति, थॉट लीडरशिप की नई परिभाषा और डिजिटल संवाद के भविष्य की गहराई से पड़ताल करता है।
यहां पढ़िए पूरा इंटरव्यू-
आप एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के एडिटर-इन-चीफ़ हैं जो सोशल मीडिया, प्रोफेशनल नेटवर्किंग और पत्रकारिता तीनों का मेल है। ऐसे में आज के एल्गोरिदम-आधारित (algorithm-driven) दौर में आप 'संपादकीय जिम्मेदारी' को कैसे परिभाषित करते हैं?
हमारी संपादकीय टीम का लक्ष्य प्रोफेशनल खबरें और जानकारियों पर होने वाली चर्चाओं को दिशा देना है और अपने सदस्यों को ऐसे उपकरण उपलब्ध कराना है जिससे वे दुनियाभर में विशेषज्ञता को खोज और साझा कर सकें। मेरी टीम के काम का एक बड़ा हिस्सा यह है कि हम अपने सदस्यों को ऐसा मौलिक कंटेंट तैयार करने के लिए प्रेरित करें जो पूरी कम्युनिटी के लिए अर्थपूर्ण और आकर्षक हो।
दिन के अंत में, संपादकीय जिम्मेदारी भरोसे से जुड़ी होती है। यह केवल लोगों तक खबर पहुंचाने का काम नहीं है। यह लोगों को ऐसे विचारों, प्रेरणा और जानकारी से जोड़ने का माध्यम है जो उनके प्रोफेशनल जीवन में उन्हें सफलता दिला सके। हमारा मानना है कि दुनियाभर का प्रोफेशनल ज्ञान लोगों के भीतर है — हमें केवल यह करना है कि उन्हें अपनी बात बाहर लाने और साझा करने में मदद करें। हमारी टीम दुनियाभर में काम कर रही है ताकि ऐसे इनसाइट्स सामने ला सकें जो लोगों को अपने कौशल बढ़ाने, अपडेटेड रहने और महत्वपूर्ण चर्चाओं में अपनी आवाज जोड़ने में मदद करें।
LinkedIn आज की वैश्विक कार्य-संस्कृति (global work culture) का एक अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में आप कैसे तय करते हैं कि कौन-सी व्यावसायिक, आर्थिक और सामाजिक कहानियां वैश्विक स्तर पर संपादकीय ध्यान पाने लायक हैं? और जब किसी खबर को कवर करने या LinkedIn के ग्रोथ व प्रोडक्ट से जुड़ी सामग्री को प्राथमिकता देने की बात आती है, तो उसके बीच संतुलन कैसे बनाते हैं? आपके संपादकीय निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या है?"
हमारी रणनीति सुनने और साझेदारी की है। ‘सुनने’ की बात करें तो हमें यह सौभाग्य प्राप्त है कि हम देख सकते हैं कि किस तरह की बातचीत चल रही है- लोग किन विषयों पर कमेंट कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं, कौन से टॉपिक किस देश या शहर में लोगों के साथ गूंज रहे हैं। फिर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि इन विषयों पर सही आवाजें सामने आएं। इसका मतलब है कि हम क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के साथ मिलकर काम करते हैं, उन्हें बताते हैं कि क्या ट्रेंड कर रहा है और उनकी बात कहां सबसे ज्यादा असर करेगी। यह सब हर दिन बदलता रहता है, इसलिए लगातार Teams, ईमेल, फोन, और आमने-सामने बातचीत होती रहती है। हम विषय विशेषज्ञों को वहां ले जाने की कोशिश करते हैं जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि हमारी टीम की किसी भी भूमिका के बिना ज्यादातर चर्चाएं अपने आप होती हैं। प्रोफेशनल लोग कामकाज की दुनिया में जो बदलाव देख रहे हैं, उस पर व्यापक और विशिष्ट चर्चाएं करते हैं। हमारा काम बस इतना है कि हम नई आवाजें जोड़ते रहें और चर्चाओं को आगे बढ़ाते रहें।
जहां तक न्यूज कवरेज का सवाल है: कुछ ऐसे विषय होते हैं जो हर प्रोफेशनल को जानने चाहिए, चाहे वे किसी भी इंडस्ट्री में हों। हम उन पर ध्यान देते हैं: जैसे प्रमुख ट्रेंड्स या अधिग्रहण, अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव, नौकरी में अहम फेरबदल — कोई भी ऐसी बात जो कंपनियों या अर्थव्यवस्थाओं की प्रतिक्रिया को बदल सकती है। उदाहरण के लिए, अदानी एंटरप्राइजेज द्वारा अपने ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी साइबरसिक्योरिटी बिजनेस के लिए बर्गेस कूपर की सीईओ के रूप में नियुक्ति या लार्सन एंड टुब्रो द्वारा गुजरात में अपनी इंजीनियरिंग सुविधाओं का विस्तार। हम उन इंडस्ट्रीज को भी कवर करते हैं जो किसी देश की जीडीपी में बड़ी भूमिका निभाती हैं या कई क्षेत्रों पर अधिक प्रभाव डालती हैं। हम अपने सदस्यों को यह दिखाकर अपडेटेड रखना चाहते हैं कि इंडस्ट्री का मूवमेंट कहां है और अगला अवसर कहां पैदा हो सकता है।
हमारा संपादकीय इकोसिस्टम भी अब इस तरह विकसित हुआ है कि हम अपने सदस्यों को वहीं मिलते हैं जहां वे हैं — न्यूज को फ़ीड में दिखाने से लेकर मूल पॉडकास्ट, लाइव कार्यक्रम, और The Path या This is Working जैसी सीरीज तैयार करने तक। हम नेतृत्व और व्यापार से जुड़ी खबरों पर भी नजर रखते हैं जो इनोवेशन, कार्यबल प्राथमिकताओं और आर्थिक परिवर्तन जैसे व्यापक संकेतों को दर्शाती हैं और हमारे सदस्यों को श्रम बाजार के बदलावों से जोड़े रखती हैं।
जब आपकी एडिटोरियल टीम किसी विचारशील लीडर की बातों को आगे बढ़ाती है या उन्हें प्रमुखता देती है, तो आप यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि इसमें निष्पक्षता और संतुलन बना रहे?
हम शीर्षक पर नहीं, इनसाइट पर ध्यान देते हैं। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई व्यक्ति ऐसा दृष्टिकोण दे रहा है या नहीं जो प्रोफेशनल समुदाय की मदद कर सके, न कि वह किस कंपनी से है या उसके कितने फॉलोअर्स हैं।
एक दिलचस्प ट्रेंड जो हम देख रहे हैं वह यह है कि लीडर्स अब लिंक्डइन पर वास्तविक कहानियां साझा कर रहे हैं — यह बताते हुए कि उन्होंने कौन-से फैसले क्यों लिए और कैसे लिए। चाहे वह कोई सीईओ हो जो नेतृत्व में किए बदलाव को समझा रहा हो, या कोई जनरेशन Z का कर्मचारी जो अपने काम का दिन दिखा रहा हो — जो बात लोगों तक पहुंचती है वह है ईमानदारी, विशेषज्ञता और प्रासंगिकता।
क्या LinkedIn की संपादकीय नेतृत्व (editorial leadership) वास्तव में असली दुनिया की आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती है- जैसे कि नौकरियों के ट्रेंड्स बनाना, हायरिंग की नीतियों को दिशा देना या छंटनी को लेकर लोगों की सोच को प्रभावित करना? और आप LinkedIn News की क्या भूमिका देखते हैं वैश्विक वर्क कल्चर के भविष्य में, खासकर तब जब बड़े बदलाव हो रहे हैं जैसे कि रिमोट वर्क का चलन, फ्रीलांस इकॉनॉमी का बढ़ना, और जनरेटिव AI जैसे तकनीकी टूल्स का असर?
काम करने का तरीका बहुत तेजी से बदल रहा है। कहां से काम किया जा रहा है, कैसे किया जा रहा है और AI कैसे हमारी नौकरियों को बदल रहा है। कंपनियां तेजी से इनोवेशन और ग्रोथ के लिए आगे बढ़ रही हैं — और प्रोफेशनलों को भी उतनी ही तेजी से खुद को ढालना पड़ रहा है। ऐसे बदलावों के दौर में, भरोसेमंद मार्गदर्शन ही सबसे बड़ा अंतर लाएगा।
यह बात हमारे डेटा में भी दिखाई देती है — 90% प्रोफेशनलों को पहले से कहीं ज्यादा मार्गदर्शन की जरूरत है ताकि वे अपने करियर में आगे बने रह सकें, और लगभग 80% पहले ही लीडर्स और सहकर्मियों से सलाह ले रहे हैं। भारत में C-सूट एग्जीक्यूटिव्स अब AI लिटरेसी से जुड़ी स्किल्स जैसे कि प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और जेनरेटिव AI को अपने प्रोफाइल में शामिल करने की संभावना दो साल पहले की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है। वे व्यापक कार्यबल की तुलना में 1.2 गुना अधिक AI fluency भी प्रदर्शित कर रहे हैं, हालांकि कई लोग इन टूल्स के साथ आत्मविश्वास अभी भी बना रहे हैं।
यहीं हमारी भूमिका सबसे खास बनती है। हम अपने प्लेटफॉर्म को एक ऐसे वर्कप्लेस की गलियारों की तरह देखते हैं — जहां ईमानदार, वास्तविक और प्रासंगिक प्रोफेशनल बातचीत होती है। आज जो कुछ भी कामकाज की दुनिया में घट रहा है, उसकी शुरुआत या तो लिंक्डइन पर होती है या वह यहां तक पहुंचता है। इस प्रोफेशनल इकोसिस्टम को ज्ञान साझा करने के लिए केंद्र में रखकर, हम लोगों को अधिक उत्पादक, सफल और प्रेरित बनने में मदद कर सकते हैं — और इसी के जरिए अधिक अवसरों के द्वार भी खुल सकते हैं।
क्या आपको लगता है कि आने वाले वक्त में मार्केटिंग प्रमुख (CMO) को अपने साथ कंटेंट की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ेगी, यानी उन्हें एक ‘चीफ कंटेंट ऑफिसर’ की भूमिका भी निभानी होगी? क्योंकि LinkedIn पर थॉट लीडरशिप का रास्ता साफ दिख रहा है, ऐसे में मार्केटिंग का काम और कैसे बदल रहा है?
हमें केवल CMO के ग्रोथ की बात नहीं करनी चाहिए — इससे कहीं बड़ी एक रचनात्मक और रणनीतिक बदलाव की लहर चल रही है कि C-सूट अब संवाद कैसे करता है। लिंक्डइन अब नेताओं के लिए सबसे पसंदीदा चैनल बन गया है — वे यहीं पर खबरें ब्रेक कर रहे हैं, फैसलों को समझा रहे हैं और सीधे तौर पर कर्मचारियों, ग्राहकों और निवेशकों से जुड़ रहे हैं।
हमने देखा है कि बीते दो वर्षों में लिंक्डइन पर मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (chief executives) के पोस्ट्स में 52% की बढ़ोतरी हुई है। हमारे डेटा के मुताबिक, CEO द्वारा किए गए पोस्ट्स को 7 गुना ज्यादा इंप्रेशंस और 4 गुना ज्यादा एंगेजमेंट मिलता है — यह साबित करता है कि वास्तविक और प्रामाणिक विचार-नेतृत्व की जबरदस्त मांग है। यह ट्रेंड अब बाकी विभागों में भी फैल रहा है, और कई C-सूट लीडर्स अपने दर्शकों और उद्योग के साथ सीधे जुड़ रहे हैं।
CMOs इस बदलाव में निर्णायक और अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभाएंगे, अपने संगठनों के लिए विचार नेतृत्व की रणनीति को आकार देने में।
आज के समय में एक LinkedIn न्यूजलेटर को सफल क्या बनाता है? जब इतने सारे ब्रैंड इस न्यूजलेटर स्पेस में आ गए हैं, तो अब भी कौन सी चीज सबसे ज्यादा असर छोड़ती है?
न्यूजलेटर्स आज भी एक मूल्यवान माध्यम हैं, खासकर उनके लिए जो समुदाय बनाना चाहते हैं और लगातार मूल्यवान जानकारी साझा करना चाहते हैं। सदस्यों और लीडर्स द्वारा लिखी गई न्यूजलेटर्स के अलावा, हमारे कई एडिटर्स भी अपनी न्यूजलेटर्स से सब्सक्राइबर्स को लगातार जोड़कर रखते हैं। उदाहरण के लिए, LinkedIn एडिटर तान्या दुआ द्वारा लिखी गई Tech Stack नॉन-टेक्निकल पाठकों के लिए AI और टेक ट्रेंड्स को सरल बनाती है, वहीं Get Hired न्यूजलेटर (एंड्रयू सीमैन द्वारा) लोगों को अपनी अगली नौकरी पाने में मदद करता है।
हमारे प्लेटफॉर्म पर अब तक कुल 938 मिलियन से ज्यादा न्यूजलेटर सब्सक्रिप्शन हो चुके हैं।
आप हमारी Newsletter best practices को देख सकते हैं, जहां आपको स्वरूप और सुझावों से जुड़ी और जानकारी मिलेगी।
जब ChatGPT जैसे AI टूल बड़ी मात्रा में कंटेंट लिख पा रहे हैं, तो ऐसे में आप संपादकों और पत्रकारों की भूमिका को आगे कैसे बदलते हुए देखते हैं?
हम काम के हर क्षेत्र में AI के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं, और हमने इसे अपनी संपादकीय प्रक्रिया में भी शामिल किया है — फिलहाल इसका इस्तेमाल मुख्यतः टीम के कामकाज को और कुशल बनाने के लिए हो रहा है। AI के एक शक्तिशाली सक्षमकर्ता के रूप में उभरने के साथ, अब एडिटर्स और पत्रकार प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स की भूमिका निभा रहे हैं। हम AI का उपयोग इनसाइट्स खोजने, डेटा की पुष्टि करने और नए विचार उत्पन्न करने के लिए कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए, हमारे LinkedIn Lists तैयार करने के लिए पहले 500 घंटे का रिसर्च करना पड़ता था, लेकिन अब AI की मदद से यही काम केवल 2 घंटे में हो जाता है। इसके बावजूद, मानवीय निर्णय, कहानी कहने की क्षमता और पत्रकारिता की सूझबूझ अभी भी हमारी प्रक्रिया में केंद्र में हैं और भविष्य में पत्रकारिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।
टैग्स