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टीवी न्यूज की दुनिया में भारत विश्व मंच का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है: भूपेन्द्र चौबे

वरिष्ठ टीवी पत्रकार भूपेन्द्र चौबे ने साझा किया कि उन्हें भी 2018 में उद्यमशीलता (entrepreneurial) के कीड़े ने काट लिया था और वह अपना खुद का वेंचर शुरू करना चाहते थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

पहले समय न्यूज रिपोर्टिंग दो लोगों का काम होता था। एक जिसके हाथ में भारी भरकम वीडियो कैमरा रहता था और दूसरा, एक रिपोर्टर जिसके हाथ में माइक रहता था। इसके अलावा, खबरों को प्रसारित करना कठिन था, क्योंकि दूरदर्शन ही इसके लिए एकमात्र स्थान था। यह कहना है कि लेखक व उद्यमी डॉ. भुवन लाल का।

डॉ. भुवन लाल ने 'न्यूजनेक्स्ट समिट 2022' (NewsNext Summit 2022) के दौरान वरिष्ठ टीवी पत्रकार भूपेन्द्र चौबे के साथ गहन बातचीत में यह बात कही। उन्होंने भूपेन्द्र चौबे के साथ चर्चा की कि आज भारत में टीवी समाचारों की क्या समस्या है।

चर्चा के दौरान डॉ. भुवन लाल ने कहा कि आज चीजें कैसे बदल गई हैं और मीडिया बिरादरी में हर कोई एक लंबा सफर तय कर चुका है। इस पर वरिष्ठ टीवी पत्रकार भूपेंद्र चौबे ने कहा कि टीवी न्यूज विभिन्न चरणों से गुजरा है और अब यह तेजी से विकसित हो रहा है। यह अब एक ऐसी स्थिति में है कि भारत विश्व मंच पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गया है। उन्होंने कहा, जो कुछ भारतीय टीवी न्यूज पर देखा जाता है उसे विश्व स्तर पर भी देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों की आबादी वाले देश को, जिसकी आबादी 2047 तक 1.73 अरब होने की संभावना है, पत्रकारिता के दो तत्वों - 'क्रेडिबिलिटी' (Credibility ) और 'कंट्री' (Country) की सख्त जरूरत है।"

इसके बाद वरिष्ठ टीवी पत्रकार भूपेन्द्र चौबे ने कहा कि वह पिछले सात-आठ साल से शिखर सम्मेलन में आ रहे हैं और लगभग सभी टॉप मीडिया प्रोफेशनल के साथ पत्रकारिता के संकट पर चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सभी पत्रकार ढोंगी (hypocrites) हैं, जिसमें मैं भी शामिल हूं।

चौबे ने साझा किया कि उन्हें भी 2018 में उद्यमशीलता (entrepreneurial) के कीड़े ने काट लिया था और वह अपना खुद का वेंचर शुरू करना चाहते थे, क्योंकि न्यूज मीडिया टूट चुका था।  

लेकिन फिर समस्या खड़ी हुई- पैसा कहां से आएगा? दुर्भाग्य से टीवी न्यूजरूम पर न्यूज मैनेजर्स ने कब्जा कर लिया है। इन न्यूज मैनेजर्स का पर्सनल, प्रोफेशनल या पॉलिटिकल चाहे जो भी कारण रहा हो, पत्रकारिता के मानकों को ऊपर उठाने के बजाय इसे नीचे गिराते गए। 

उन्होंने आगे कहा कि अब यह निचले स्तर पर पहुंच गया है, कि जहां आपके पास अपनी पहचान बनाने के लिए नए रास्ते खोजने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई पत्रकार पैसा चाहता है, तो एक निश्चित व्यवसाय मॉडल मौजूद है। और अगर वे उस बिजनेस मॉडल को चुनौती देने के लिए तैयार हैं, तो उन्हें पैसे के मोर्चे पर समझौता करने के लिए तैयार रहना होगा”, चौबे ने हस्ताक्षर करते हुए कहा।

जैसा न्यूज टीवी पर कंटेंट को लेकर कुछ दशक पहले कल्पना की गई थी, गुण और परिभाषा के अनुसार बदल गई है। आज सभी चीजें  कॉमर्स और टेक्नोलॉजी के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने तर्क दिया कि मैं यह बिल्कुल भी नहीं मानता कि पत्रकारों का कॉमर्स से कोई संबंध नहीं है। पत्रकारिता की सभी अपेक्षाएं  कॉमर्स से ही पूरी होंगी।

इसलिए यदि कोई पत्रकार पैसा चाहता है, तो उसके लिए एक बिजनेस मॉडल पहले से ही मौजूद है और यदि वे उस बिजनेस मॉडल को चुनौती देने के लिए तैयार हैं, तो उन्हें पैसे के मोर्चे पर समझौता करने के लिए तैयार रहना होगा। निश्चित तौर जैसे-जैसे कई नए रास्ते खुल रहे हैं, इसके साथ ही बड़े पैमाने पर अपॉर्चुनिटीज भी मौजूद हैं। टेक्नोलॉजी ही मीडिया बिरादरी में सभी को सही राह दिखाएगी।

चर्चा के अंत में, चौबे ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उन्होंने ‘whataboutery’ नाम से एक नया शब्द देखा है, जो पत्रकारिता में विश्वसनीयता की वर्तमान स्थिति के साथ बिल्कुल फिट बैठता है।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है और मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि दशकों से अधिक अनुभव वाला कोई भी पत्रकार नहीं है, जिसे किसी न किसी स्तर पर दबाव में झुकना नहीं पड़ा हो और न ही विशेष पक्ष लेना पड़ा हो।'

इसलिए, भुपेंद्र चौबे का मानना है कि उनके पास अन्य पत्रकारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। यहां तक कि 99 प्रतिशत पत्रकारों के पास भी वह अधिकार नहीं है।


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