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बिजनेस जर्नलिज्म में करियर बनाना है, तो सीखें नंबरों की भाषा व संदर्भ: ए.के. भट्टाचार्य
वरिष्ठ पत्रकार व बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटोरियल डायरेक्टर ए.के. भट्टाचार्य से संपादक पंकज शर्मा ने उनके अनुभवों, बिजनेस पत्रकारिता में आ रहे परिवर्तनों, चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
वरिष्ठ पत्रकार व बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटोरियल डायरेक्टर ए.के. भट्टाचार्य ने चार दशकों से अधिक के अपने पत्रकारिता अनुभव में भारतीय मीडिया, खासकर बिजनेस जर्नलिज्म में आए बड़े बदलावों को करीब से देखा और जिया है। समाचार4मीडिया के संपादक पंकज शर्मा ने उनके अनुभवों, बिजनेस पत्रकारिता में आ रहे परिवर्तनों, चुनौतियों और नए पत्रकारों के लिए जरूरी कौशल पर विस्तार से चर्चा की। यहां पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश
सबसे पहले आप अपने शुरुआती सफर के बारे में बताइए। पत्रकारिता में आने से पहले किन अनुभवों से आप गुजरे?
शुरुआत में मैंने एक साल अध्यापन का काम किया। उस समय 1977 के दशक में नौकरियों के विकल्प सीमित थे – या तो सिविल सर्विस, टीचिंग या फिर पत्रकारिता। चूंकि मेरी रुचि अध्यापन में ज्यादा नहीं थी, इसलिए मैंने इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप में पत्रकारिता शुरू की। फिर फाइनेंशियल एक्सप्रेस, इकोनॉमिक टाइम्स और पायनियर जैसे संस्थानों में काम किया और अब बिजनेस स्टैंडर्ड में हूं। इतने वर्षों में पत्रकारिता का आकर्षण कभी कम नहीं हुआ।
बिजनेस जर्नलिज्म में आपने इतने सालों में क्या बड़े बदलाव देखे हैं?
जब मैंने करियर शुरू किया था, बिजनेस पत्रकारों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। उनके लिए छोटे कॉलम होते थे। लेकिन उदारीकरण के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था खुली और बिजनेस जर्नलिज्म का दायरा तेजी से बढ़ा। अब स्टॉक मार्केट, कॉरपोरेट्स और पॉलिसी कवरेज का महत्व बहुत बढ़ चुका है। साथ ही, आज के बिजनेस जर्नलिस्ट को ज्यादा टेक्निकल स्किल्स और गहरी समझ की जरूरत है।
आज कंटेंट की भरमार है। ऐसे में हाई-क्वालिटी और विश्वसनीय बिजनेस कंटेंट तैयार करने की क्या चुनौतियां हैं?
आज सबसे बड़ी चुनौती है कि पाठकों को साधारण खबरों से अलग कुछ ऐसा दिया जाए जो उनकी समझ को बेहतर बनाए। कंटेंट तो हर जगह उपलब्ध है, फर्क हमारी एनालिटिकल क्षमता से पड़ता है। एक बिजनेस जर्नलिस्ट को डाटा को समझना और उसे संदर्भ के साथ सरल भाषा में पेश करना आना चाहिए।
ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से बिजनेस पत्रकारिता में क्या बदलाव आ रहे हैं?
मैं इसे चुनौती नहीं बल्कि अवसर मानता हूं। जैसे टाइपराइटर से कंप्यूटर आने पर मेंटल डिसिप्लिन बदली थी, वैसे ही एआई से एडिटिंग और बेसिक काम आसान होंगे। इसका सही इस्तेमाल कर हम और भी गुणवत्तापूर्ण एडिटिंग और एनालिसिस कर सकते हैं। हालांकि, चेक्स एंड बैलेंस बहुत जरूरी रहेंगे।
आप लंबे समय से "Raisina Hill" कॉलम लिख रहे हैं। इसके बारे में कुछ बताइए।
"Raisina Hill" कॉलम का मकसद सरकारी नीतियों और आर्थिक फैसलों का विश्लेषण करना है। इसकी शुरुआत मैंने करीब 1990 में की थी। तब से हर पखवाड़े मैं सरकार के निर्णयों और उनके असर पर लिखता हूं। इसका उद्देश्य नीतिगत फैसलों के पीछे के आर्थिक तर्क और उनके समाज पर प्रभाव को समझाना है।
आपने 'The Rise of the Goliath' और 'India’s Finance Ministers' जैसी किताबें लिखी हैं। इनके पीछे क्या प्रेरणा रही?
'The Rise of the Goliath' में मैंने 1947 से लेकर 2016 तक भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था पर बड़े-बड़े डिसरप्शन (जैसे डिमोनेटाइजेशन, टेलीकॉम रेवोल्यूशन) का असर दिखाने की कोशिश की है। वहीं 'India’s Finance Ministers' श्रृंखला में वित्त मंत्रियों के नजरिए से भारतीय आर्थिक नीतियों के विकास का अध्ययन किया है। तीसरा वॉल्यूम जल्द आने वाला है।
2025 में मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती और अवसर क्या हैं?
सबसे बड़ी चुनौती है तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी और दर्शकों के पास बढ़ते विकल्पों के बीच अपनी विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बनाए रखना। पत्रकारों को अब सिर्फ खबर देना नहीं बल्कि पाठकों की समझ को भी समृद्ध करना होगा।
बिजनेस जर्नलिज्म में करियर बनाना चाहने वाले युवाओं को किन स्किल्स पर फोकस करना चाहिए?
सबसे पहले करंट अफेयर्स पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए। इसके साथ ही, नंबरों से डरना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें संदर्भ के साथ पेश करना आना चाहिए। आंकड़ों को समझना, उनका विश्लेषण करना और सरल भाषा में सही संदर्भ में पेश करना एक सफल बिजनेस पत्रकार बनने की कुंजी है।
जैसा कि ए.के. भट्टाचार्य जी ने बताया, बिजनेस जर्नलिज्म आज चुनौतियों और अवसरों का संगम है। नई तकनीकों को अपनाते हुए नंबरों की गहरी समझ और संदर्भात्मक विश्लेषण ही इस क्षेत्र में सफलता दिला सकता है।
यहां देखें वीडियो:
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