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टाइम्स नेटवर्क के राहुल शिवशंकर ने बताया, TRP की ‘दौड़’ में क्यों आते हैं आगे

गोवाफेस्ट 2022 में ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) के एडिटोरियल डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर ने एक्सचेंज4मीडिया से तमाम मुद्दों पर की बातचीत

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) के एडिटोरियल डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर ने हाल ही में गोवा में आयोजित ‘गोवाफेस्ट 2022’ (Goafest 2022) में बतौर स्पीकर शिरकत की। इस दौरान हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने डेनियल मैकएडम्स (Daniel McAdams) वाली वाकये समेत तमाम मुद्दों पर उनसे विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:  

जब आपने पत्रकारिता की शुरुआत की थी, तब क्या न्यूज कुछ अलग थी? इतने वर्षों में चीजें कैसे बदल गई हैं?

उन दिनों न्यूज काफी कम हुआ करती थी और उनका ज्यादा फोकस क्रिकेट, राजनीति और एंटरटेनमेंट पर होता था। उस समय अखबार, दूरदर्शन और राज्यों द्वारा नियंत्रित रेडियो होते थे। इसके बाद निजी टीवी चैनल्स आए। उस समय हमारे पास विज्ञान, पर्यावरण, यूनिवर्स और टेक्नोलॉजी जैसी आला दर्जे की पत्रकारिता नहीं थी। चीजें अब बिल्कुल अलग हैं।

एक टीवी पत्रकार के रूप में आप किस चीज को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं?

इसमें मैं ईमानदारी और विश्वसनीयत कहूंगा। मैं न्यूज में किसी भी तरह का समझौता नहीं करता और इसके अलावा मेरे पास और कुछ नहीं है।

न्यूज रेटिंग्स की बात करें तो टाइम्स नाउ टॉप चैनल्स में से एक है। आपको क्या लगता है, वो कौन सी चीज है जो इसे दूसरों से आगे रखती है?

टीआरपी के मामले में हम हमेशा दूसरों से आगे रहे हैं। अभी जो ताजा रेटिंग आई है उसमें हम सभी कैटेगरी में टॉप पर हैं। आप तमाम शहरों को देखें, हमने हर आयु वर्ग और अन्य श्रेणियों में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह सब कुशल नेतृत्व और दृढ़ विश्वास के कारण है। हम दृढ़ निर्णय लेते हैं। उदाहरण के लिए, हमने महामारी के दौरान चुनावों का बहिष्कार किया था। ऐसा इसलिए नहीं था कि हम कुछ और करना चाहते थे, बल्कि हमने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि उस समय लोग गैर-राजनीतिक कंटेंट चाहते थे। यही कारण है कि हम टीआरपी में आगे रहते हैं।

कोविड-19 और लॉकडाउन के कारण तमाम मीडिया संस्थानों के लिए पिछले दो साल काफी मुश्किलों भरे रहे। एडिटोरियल लीडर के रूप में आपके लिए यह समय कितना चुनौतीपूर्ण था? इसके अलावा पिछले दिनों चर्चा का विषय बने मैकएडम्स वाकये के बारे में भी कुछ बताएं?

महामारी के चरम पर लोगों को ऑफिस में काम पर आने के लिए कहना काफी मुश्किल था। हमने अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और दवाओं की उपलब्धता पर व्यापक कवरेज के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। हमने इसके लिए काफी प्रयास किया।

मैकएडम्स वाकये की बात करें तो यह अचानक हुआ। लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा नहीं किया गया। मैं किसी भी तरह की पब्लिसिटी नहीं चाहता हूं। किसी का नाम गलत लेने के लिए मुझे इस तरह नहीं घसीटा जाना चाहिए था। लोगों ने मुझे अपशब्द कहे और यहां तक ​​कि अन्य तमाम मीडियाकर्मियों ने भी सोशल मीडिया पर हमले शुरू कर दिए।

एक चैनल के रूप में हमने सोचा कि यह बताने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है कि यह घटना कभी नहीं हुई, जबकि हमारा ब्रैंड कितना बड़ा है। हमने अपनी गलती पर चर्चा करने के लिए एक और शो चलाया। दूसरा शो भी हिट रहा, हालांकि इसे पहले वाले जितने व्यूज नहीं मिले, जिसे 20 मिलियन लोगों ने देखा। अन्य मीडिया संस्थानों ने इसे लेकर खबरें चलाईं।

न्यूज चैनल्स पर अक्सर आरोप लगते हैं कि टीआरपी के लिए डिबेट शो पर गरमागरम बहस की जाती हैं, जबकि समाज के वास्तविक मुद्दों को पीछे छोड़ दिया जाता है, जबकि उन पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। इस तरह के आरोपों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

क्या हमें टीवी डिबेट्स बंद कर देनी चाहिए? क्या विभिन्न सत्रों के दौरान हो रहे हंगामे के कारण देश की संसद को बंद कर देना चाहिए? कुछ ऐसे एंकर्स और चैनल्स हैं जो डिबेट में एक दर्जन मेहमानों को आमंत्रित कर लेते हैं। हम ऐसा कभी नहीं करते। कुछ ऐसे लोग हैं जो चैनल्स पर आते हैं और डिबेट को बाधित करते हैं। वे अपनी आवाज ऊंची रखने के लिए डिबेट शो में चिल्लाते हैं और यदि आप उन्हें म्यूट करते हैं तो वे आप पर उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनने का आरोप लगाते हैं। जहां तक समाज के वास्तविक मुद्दों की बात है तो मैं यह बताना चाहता हूं कि टाइम्स नाउ बेरोजगारी और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बारे में बात करता है।

वैसे न्यूज चैनल्स पर ये आरोप कौन लगा रहा है? जो अभी मार्केट में आए हैं। मीडिया स्टार्ट-अप मुख्यधारा के मीडिया को बदनाम करना चाहते हैं, ताकि वे आगे बढ़ सकें। वैकल्पिक मीडिया खुद को बढ़ावा देने के लिए मुख्यधारा को बदनाम करना चाहता है। मैं कहना चाहता हूं कि वे ध्यान आकर्षित करने के लिए न्यूज चैनल्स के खिलाफ नकारात्मकता फैलाने के बजाय अच्छी पत्रकारिता कर सकते हैं।

कई न्यूज चैनल्स ने खुद को राजनीतिक स्पेक्ट्रम के बायें अथवा दायें पक्ष की ओर कर लिया है। आप अपने चैनल की स्थिति कैसे देखते हैं?

अमेरिका में, कई बड़े मीडिया घराने राष्ट्रपति पद की दौड़ में राजनीतिक पक्ष लेते हैं। जैसे कि वे जो बाइडेन या डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन करते हैं। हम कभी भी चुनाव में उम्मीदवारों का समर्थन नहीं करते हैं। हर पत्रकार को अपनी विचारधारा रखने का अधिकार है, जब तक कि वे किसी राजनीतिक पार्टी के पीछे नहीं भाग रहे हैं। मैं खुद को एक प्रगतिशील रूढ़िवादी पत्रकार के रूप में वर्णित करता हूं। मेरा अपना एक दृष्टिकोण है और मैं तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखता हूं। 


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