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ऐडवर्टाइजर्स के लिए CTV बनता जा रहा है एक पसंदीदा माध्यम: रितु धवन

इंटरनेट की ताकत और इसकी पहुंच की वजह से कनेक्टेड टीवी का तेजी से विकास हुआ है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

इंटरनेट की ताकत और इसकी पहुंच की वजह से कनेक्टेड टीवी (CTV) का तेजी से विकास हुआ है और इस वजह से अब बेहतर गुणवत्ता व व्यक्तिगत वाले कंटेंट प्रदान किए जा सकते हैं। यह कहना है इंडिया टीवी की मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ रितु धवन का। हमारी सहयोगी वेबसाइट 'एक्सचेंज4मीडिया' से विशेष बातचीत में उन्होंने यह बात कही। धवन ने बताया कि कैसे सीटीवी ने मीडिया में रेवेन्यू के लिए तमाम रास्ते खोल दिए हैं और अब यह अधिक से अधिक घरों में अपनी पहुंच बनाने के लिए तैयार है। आप यहां पढ़ सकते हैं बातचीत के प्रमुख अंश:

भारत में लगभग 20 से 22 मिलियन घरों में इंटरनेट से जुड़े टीवी हैं। ऐडवर्टाइजर्स के लिए यह संख्या कितनी बड़ी है?

पहले बड़े स्क्रीन का अनुभव डीटीएच/केबल और चैनल सब्सक्रिप्शन तक ही सीमित था। अब इंटरनेट की ताकत और इसकी पहुंच की वजह से कनेक्टेड टीवी (CTV) का तेजी से विकास हुआ है। इस वजह से अब बेहतर गुणवत्ता वाले व व्यक्तिगत कंटेंट प्रदान किए जा सकते हैं, जिस तक अब आसानी से पहुंचा भी जा सकता है। इसकी लोकप्रियता कंटेंट के अनुभव पर भी आधारित है। ऐडवर्टाइजर्स सीटीवी पर ऐड एक्सपोजर और अधिक कर सकते हैं। लगभग 22 मिलियन डिवाइसेज के साथ, सीटीवी 90 मिलियन से अधिक दर्शकों तक अपनी पहुंच रखता है, जिसमें लीनियर टीवी की तुलना में औसत टाइम स्पेंट पर व्यूअर अधिक होता है। इंडिया टीवी के लिए लीनियर टीवी पर औसतन टाइम स्पेंट बाई व्यूअर पर वीक (एक हफ्ते में दर्शकों द्वारा लीनियर टीवी पर बिताया जाने वाला औसत समय) 35 मिनट है, जबकि स्मार्ट टीवी ऐप पर यह 41 मिनट है। 

ऐसे में अब, ऐडवर्टाइजर्स को मीडिया व्हिकल से दो प्रमुख जरूरतें नजर आती हैं, जिनमें पहली यह कि मीडिया व्हिकल का झुकाव कहां है और दूसरा कि उसका आकार क्या है? और ये दोनों जरूरतों ही इंटरनेट-सक्षम कनेक्टेड टीवी से अच्छी तरह से पूरी हो जाती हैं।  

आप सीटीवी की बढ़ती संख्या को किस तरह से भुनाने जा रही हैं, और इसे लेकर आपकी रणनीति क्या रही है?

हां, रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक 50 मिलियन से अधिक घरों की सीटीवी तक पहुंच हो जाएगी और दर्शकों की संख्या 300 मिलियन तक पहुंच जाएगी। यानी बाजार में 100 फीसदी ग्रोथ देखने को मिलेगी। लिहाजा इस तीव्र वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, हमारे लिए सीटीवी स्पेस में अपनी कंटेंट विंडो का विस्तार करना जरूरी हो गया है। इंडिया टीवी जल्द ही ऑडियंस-ओरिएंटेड कंटेंट पेश करेगा, खासकर सीटीवी के लिए। हमें यकीन है कि अपने कंटेंट प्लानिंग और निष्पादन के साथ हम सीटीवी यूजर्स के बीच एक मजबूत प्रभाव बना पाने में सक्षम होंगे। 5 साल में यह संख्या और बढ़ जाएगी, क्योंकि पुराने टीवी सेट की जगह नए स्मार्ट टीवी ले लेंगे। इस तरह से सीटीवी इकोसिस्टम से जुड़ना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

कनेक्टेड टीवी प्लेटफॉर्म पर ऐड की गतिशीलता कैसे विकसित हो रही है? सीटीवी पर आप किस तरह के ब्रैंड रीच को देखती हैं?

जिस तरह से डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग ने ऐड इंडस्ट्री और ऐडवर्टाइजर वर्टिकल में अपनी पैठ जमायी है, ऐडवर्टाइजर्स के लिए सीटीवी एक पसंदीदा माध्यम बनता जा रहा है। चूंकि सीटीवी इंटरनेट की ताकत से सक्षम है, इसलिए ऐडवर्टाइजर्स के लिए ऐड के अवसर और ऐड के फॉर्मेट दोनों ही बढ़ गए हैं। वे सीटीवी पर अधिक खर्च करने को तैयार हैं, क्योंकि कई ऐड फॉर्मेट अधिक प्रभावशाली मीजरमेंट, ऐड के प्रभाव और तत्काल कॉल टू एक्शन प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, NCCS A मार्केट में सीटीवी की पैठ 39 प्रतिशत है, जो उन ऐडवर्टाइजर्स के लिए एक बड़ा अवसर है, जो दर्शकों के इस वर्ग को लक्षित करना चाहते हैं। उक्त मार्केट में लीनियर टीवी की पैठ 27% है।

क्या पारंपरिक माध्यमों की तुलना में निवेश बड़ा है?

दिखने में सीटीवी इको-सिस्टम लीनियर टीवी से अलग है और इसमें सही दर्शकों को जोड़े रखने के लिए बहुत अधिक निवेश की आवश्यकता होती है। जब नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और डिज्नी हॉटस्टार जैसे बड़े खिलाड़ी रिमोट के साथ-साथ सीटीवी की पहली स्क्रीन पर सुविधाएं प्रदान करने के लिए काफी निवेश करते हैं, तो आपको भी कुछ पूंजी लगाने की भी जरूरत पड़ती है। हालांकि, हमें लगता है कि यदि आप प्रीमियम और क्रेडिबल न्यूज कंटेंट देते हैं तो आप सीटीवी दर्शकों पर राज कर सकते हैं।

सीटीवी के वजह से रेवेन्यू के कौन से विभिन्न रास्ते खुले हैं?

ऐड परफॉर्मिंग के लीनियर टीवी क्षमताओं के अलावा, CTV ने जियो-टार्गेटिंग (Geo-targeting), इन-स्ट्रीम ऐड्स (In-Streams ads), प्री-रोल्स ( Pre-rolls),और मिड-रोल्स (Mid-rolls) जैसे डिजिटल लाभ भी प्रदान किए हैं। इसके अतिरिक्त, रेवेन्यू जनरेट करने के लिए अन्य प्रभावशाली सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ऐड फॉर्मेट्स में स्पॉन्सर्ड कंटेंटट और प्रभावशाली फीचर ऐडवर्टाइजर्स के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे वे कनेक्टेड ऑडियंस को अलग से टार्गेट कर सकते हैं।

कनेक्टेड टीवी टियर 2 और 3 ऑडियंस के कंटेंट पैटर्न को कैसे बदल रहा है?

सीटीवी के मार्केट का आकार उसी ट्रेंड लाइन पर बन रहा है, जैसाकि अतीत में स्मार्टफोन की पैठ थी। इंटरनेट की उपलब्धता और कम लागत वाले सीटीवी डिवाइसेज टियर-II और टियर-III मार्केट को आकार दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने भी घोषणा की हुई है कि सरकार देश के उन ग्रामीण हिस्सों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जहां बिजली अभी पहुंची है और इससे भी बहुत मदद मिलेगी। भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की बढ़ती संख्या भी स्मार्ट टीवी की आवश्यकताओं को बढ़ा रही है, क्योंकि यूजर्स घर पर रहते हुए ही बड़ी स्क्रीन पर कंटेंट का लाभ उठाना चाहते हैं। 

 


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