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'रिपोर्टिंग के दौरान इन हालातों में अपने अस्तित्व को लेकर भी उठने लगते हैं सवाल'

कोविड-19 जैसी महामारी के बीच विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम कर रहे रिपोर्टर्स बहादुरी के साथ अपनी ड्यूटी में जुटे हुए हैं और अग्रिम मोर्चे (frontline) पर तैनात रहकर ऑनग्राउंड रिपोर्ट्स भेज रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

इन दिनों पूरी दुनिया में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप फैला हुआ है। अपने देश में भी कोरोना कई लोगों की जान ले चुका है और रोजाना इससे पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में तमाम जोखिमों के बीच विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम कर रहे रिपोर्टर्स बहादुरी के साथ अपनी ड्यूटी में जुटे हुए हैं। इस महामारी की शुरुआत से ही वे अग्रिम मोर्चे (frontline) पर तैनात रहकर अस्पतालों, मार्केट्स आदि स्थानों से ऑनग्राउंड रिपोर्ट्स भेज रहे हैं।

इन सबके बीच हमारी सहयोगी अंग्रेजी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ (First Responders) के नाम से एक सीरीज शुरू की है, जिसमें ऐसे रिपोर्टर्स को शामिल किया गया है, जो बहादुरी के साथ अपने मोर्चे पर तैनात हैं और दूसरों के लिए उदाहरण पेश कर रहे हैं। इस सीरीज के तहत हमने सबसे पहले ‘दिव्य भास्कर’ के न्यूज एडिटर देवेंद्र भटनागर से बातचीत की। इस बातचीत के प्रमुख अंश आप यहां पढ़ सकते हैं:  

आप कब से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। खासकर कोविड-19 की बात करें तो आप इसे कब से कवर कर रहे हैं?

मैं पत्रकारिता में करीब 22 साल से हूं लेकिन वर्तमान हालातों में पत्रकारिता की एक नई परिभाषा का अनुभव कर रहा हूं। हम लोग इस तरह की जोखिम भरे माहौल में काम कर रहे हैं कि काम खत्म करने के बाद जब हम घर पहुंचते हैं तो हमें नहीं पता होता कि हम कोविड-19 पॉजिटिव होंगे अथवा निगेटिव। हमारे परिवार डर के साये में जी रहे हैं। देश का प्रत्येक पत्रकार इन दिनों इसी तरह के दौर से गुजर रहा होगा। इसके बावजूद वे अपने पेशे के प्रति ईमानदार रहते हुए घर से बाहर जा रहे हैं और पूरी क्षमता से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

आपका अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण अनुभव क्या रहा है?

हम रिपोर्टर उन क्षेत्रों में भी जा रहे हैं, जहां लैब टेस्ट होते हैं, जिन जगहों को क्वॉरंटाइन किया गया है और संवेदनशील हॉटस्पॉट, जिन्हें सील कर दिया गया है। संयोगवश, एक रात मुझे खांसी शुरू हुई और यह लगभग 10-15 मिनट तक रही। उस रात मेरा परिवार सो नहीं सका और सभी लोग बहुत डरे हुए थे। आज हर पत्रकार इस डर का अनुभव कर रहा है। दूसरी ओर, किसी भी पत्रकार के लिए खुद को साबित करने और समाज में योगदान देने का यह सबसे अच्छा मौका है।

क्या आप इस दौरान हुए किसी विशेष अनुभव या घटना के बारे में कुछ बताना चाहेंगे, जिसने आपको झकझोर दिया हो?

जब कोरोना से संक्रमित किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो रिश्तेदार भी शव तक नहीं जा सकते हैं। यह बड़ी विडंबना है। जब आप इस तरह के दृश्य का सामना करते हैं, तो वह आपको झकझोर देता है और आप अपने स्वयं के अस्तित्व पर सवाल उठाने लग जाते हैं।

आप अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा का किस तरह ध्यान रखते हैं?

मैं जैसे ही घर पहुंचता हूं, मेरे छोटे बच्चे मुझे गले लगाना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें दूर कर देते हैं। मैं पहले स्नान करता हूं और फिर उनसे मिलता हूं।

COVID-19 जैसी महामारी की रिपोर्टिंग के दौरान आपको कंपनी की तरफ से किस तरह का समर्थन मिल रहा है?

हम सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रहे हैं। हम अपने कार्यालयों को हर दिन सैनेटाइज कर रहे हैं। यहां हर किसी के पास मास्क और दस्ताने हैं। प्रत्येक एम्प्लॉई का हर 5-6 दिनों में मेडिकल चेकअप किया जाता है, क्योंकि स्वास्थ्य पहले आता है और काम भी। यदि हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखेंगे, तो हम कुछ भी हासिल नहीं कर सकते हैं।

और अंत में, क्या आप कोई संदेश देना चाहते हैं?

मैं उम्मीद करता हूं कि मैं हर दिन कोरोना के संक्रमण से निगेटिव बना रहूं। मनुष्य ने प्रकृति के साथ खेला है और उसे बदला है। लेकिन अब कोरोनोवायरस ने मानव जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है।


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