नेशनल हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत24’ (Bharat24) ने मार्केट में 'दस्तक' दे दी है। 15 अगस्त से इसका प्रसारण शुरू हो गया है। जाने-माने पत्रकार और ‘ईटीवी न्यूज नेटवर्क’ (ETV News Network) व ‘जी मीडिया’ (Zee Media) के रीजनल क्लस्टर के पूर्व सीईओ जगदीश चंद्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-62 से लॉन्च हुए इस चैनल की टैगलाइन ‘विजन ऑफ न्यू इंडिया’ (Vision of new India) रखी गई है। नए चैनल के उद्देश्य और इसकी खासियत समेत तमाम मुद्दों पर ‘समाचार4मीडिया’ ने ‘भारत24’ के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ डॉ. जगदीश चंद्रा से खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:
नए चैनल की प्लानिंग कब और कैसे बनी, वहीं इसका नाम ‘भारत24’ क्यों रखा गया, सबसे पहले इस बारे में कुछ बताएं?
इसकी प्लानिंग की बात करूं तो एक कहावत है कि अगर तमन्ना अधूरी रहे और सांस खत्म हो जाए तो अधूरी मौत है, लेकिन तमन्ना पूरी हो जाए और सांस भी बाकी रहे तो मोक्ष कहलाता है। तो कह सकते हैं कि मैं इसी तरह के ‘मोक्ष’ की ओर बढ़ना चाहता हूं। मैंने सोचा कि कौन सी तमन्ना बाकी रही है जीवन में तो ध्यान आया कि हमने एक नेशनल चैनल ‘जी हिन्दुस्तान’ लॉन्च किया था। वहां करीब 14 महीने ही अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद मैं जयपुर आ गया था, तो नेशनल चैनल चलाने की तमन्ना अधूरी रह गई थी। इसी तमन्ना को पूरा करने के लिए नए चैनल की प्लानिंग की गई और अब इसकी लॉन्चिंग होने जा रही है। कह सकते हैं कि इस चैनल के पीछे पैशन का कॉन्सेप्ट है।
रही बात इस चैनल का नाम ‘भारत24’ रखे जाने की तो समय, काल, देश और परिस्थिति के अनुसार जो नाम अनुकूल होता है, वही नाम लेकर आदमी चलता है। काफी सोच विचार और मित्रों की राय के बाद इस चैनल का नाम ‘भारत24’ रखा गया। चूंकि इस नाम को काफी पसंद किया जा रहा है तो अब लग रहा है कि इस बारे में हमारा फैसला सही था।
नए चैनल का प्रसारण 15 अगस्त से ही किए जाने के पीछे क्या कोई खास वजह है?
नहीं, इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है। पहले हम इसे जुलाई के आखिरी हफ्ते में लॉन्च करने वाले थे। लेकिन कुछ काम बाकी रह गए थे। फिर इसे छह-सात अगस्त को लॉन्च करने की तैयारी थी, लेकिन फिर तभी मन में विचार आया कि क्यों न इसे 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस वाले दिन लॉन्च किया जाए। जैसा कि चैनल का नाम है ’भारत24 ’ तो इस हिसाब से लगा कि 15 अगस्त को लॉन्च करना ज्यादा सही रहेगा।
मार्केट में पहले से कई स्थापित चैनल हैं, ऐसे में नए चैनल को उनके बीच में स्थापित करने के लिए किस तरह की स्ट्रैटेजी पर फोकस करेंगे? यह दूसरे चैनल्स के मुकाबले किस तरह अलग होगा?
देखिए, एक स्थिति होती है कि सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट (Survival of the fittest) यानी हम संघर्ष करेंगे और अपना स्थान बनाएंगे। जीवन में चैनल लॉन्च करने और उन्हें चलाने का काफी अनुभव रहा है, ऐसे में हमारे पास काफी आत्मविश्वास है। किसी भी चैनल की सफलता उसकी टीम पर निर्भर करती है। हमें अपनी टीम पर पूरा भरोसा है और अपनी टीम के साथ मिलकर हम इसे सफलता की ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
यदि आर्थिक पक्ष की बात करें तो इसकी फंडिंग का क्या सोर्स है? यानी इसमें निवेशक कौन है, इसके अलावा डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल और रेवेन्यू मॉडल के बारे में भी कुछ बताएं?
मैं आपको बता दूं कि इसमें निवेशक के तौर पर गुजरात के एक बड़े कॉरपोरेट हाउस का पैसा लगा है। हम अभी उनके नाम के बारे में नहीं बता सकते हैं। हो सकता है कि वे खुद ही अपना सार्वजनिक करें। मैं आभारी हूं उन लोगों का कि उन्होंने हम पर भरोसा जताया और सोचा कि जगदीश चंद्रा पर यदि पैसा लगाएंगे तो पैसा बढ़ेगा ही। ऐसे में हमें फंडिंग की कोई समस्या नहीं है। अभी ये छोटा चैनल है। आप इसे स्टार्टअप चैनल भी मान सकते हैं। पूरे देश में मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े लोग इस बात को जानते हैं कि हम रेवेन्यू के मामले में हमेशा नंबर वन पर रहते हैं। हमारी टीम में शामिल मनोज जिज्ञासी एक तरह से देश के बेस्ट सेल्स हेड हैं। वो हमारे स्ट्रैटेजिक एडवाइजर भी हैं। हमने पहले भी साथ काम किया है और मैं जानता हूं कि वो जहां भी रहे हैं, रेवेन्यू को आगे बढ़ाया है।
रेवेन्यू हमारे लिए किसी तरह से चुनौती नहीं है। इसके दो पार्ट हैं। एक तो निवेश और दूसरा आगे चैनल को चलाना। निवेश के लिए हम उनका आभार मानते हैं, जिन्होंने हमारे ऊपर भरोसा जताया और हमें प्रोत्साहन देते हुए आगे बढ़ाया। रही बात आगे चैनल को चलाने की तो मनोज जिज्ञासी के नेतृत्व में सेल्स टीम और अजय कुमार के नेतृत्व में एडिटोरियल टीम के साथ मिलकर हम सभी इसे आगे ले जाएंगे। मेरा मानना है कि रेवेन्यू को लेकर हमारे सामने कभी कोई इश्यू नहीं आएगा। हम यहां सिर्फ बिजनेस करने नहीं बल्कि अच्छा चैनल चलाने के लिए आए हैं। बिजनेस अच्छा होता है तो बहुत अच्छी बात है। हम अपने स्टाफ का भी काफी ध्यान रखते हैं। मेरे कहने का मतलब है कि हम सभी मिलकर काम करेंगे और बिना रेवेन्यू की चिंता किए लोगों के बीच अच्छा चैनल लेकर जाएंगे।
रही बात डिस्ट्रीब्यूशन की तो हमने सेलेक्टिव डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस किया है। इसके अलावा मेरा तो यह मानना है कि आखिर में आपकी खबरें ही काम आती है। खबरें ही जीवन है। यदि आपकी खबरों में दम है तो चैनल अपने आप दमदार होगा और यदि खबरों में दम नहीं है तो कितनी ही ब्रैंडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन कर लें, उससे कुछ होना नहीं है। देश भर में हमारी दमदार मौजूदगी दिखाई देगी। डिस्ट्रीब्यूशन और रेवेन्यू हमारे लिए किसी तरह की चुनौती नहीं है।
आजकल तमाम चैनल्स हैं और लगभग सभी एक जैसे दिख रहे हैं। ऐसे में आपका एडिटोरियल स्टैंड कैसा रहेगा। टीवी पर आजकल जो हंगामा दिखाई देता है, आप इसे किस रूप में देखते हैं और कैसे चैनल को नई पहचान दिलाएंगे?
हमारी एक ही स्ट्रैटेजी है कि ‘States make the Nation’ यानी राज्यों से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। यह पहला ऐसा चैनल होगा, जिसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवरेज मिलेगी। आजकल तमाम चैनल्स का फोकस दिल्ली-एनसीआर पर रह गया है। आज के दौर में न्यूज पिछड़ गई है। अगर न्यूज हैं भी तो तमाम चैनल्स दिन भर चुनिंदा चार-पांच खबरों को ही दिखाते रहते हैं, लेकिन हमारे चैनल पर ऐसा नहीं होगा और कश्मीर से कन्याकुमारी तक यानी देशभर की खबरों को हम अपने चैनल पर कवर करेंगे। रोजाना किसी न किसी राज्य का बेहतर कवरेज आपको हमारे चैनल पर मिलेगा। देश के 4000 विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकतर क्षेत्रों में हमारे इनफॉर्मर/स्ट्रिंगर/रिपोर्टर होंगे जो देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को पूरी कवरेज देंगे। इसलिए हमने कहा भी है कि ‘भारत24‘ वहां तक होगा, जहां तक भारत है।
लगभग सभी चैनल्स डिजिटल पर फोकस कर रहे हैं, उनकी अपनी न्यूज वेबसाइट्स भी हैं। इस बारे में आपकी क्या प्लानिंग है? क्या चैनल की वेबसाइट भी शुरू करेंगे? क्या उसका कंटेंट अलग से क्रिएट करेंगे या चैनल के कंटेंट को ही उस पर चलाएंगे?
मेरा मानना है कि वेबसाइट को चलाने के लिए चैनल का भी कंटेंट दिया जाना चाहिए। सोशल मीडिया वैसे तो काफी लोकप्रिय है, लेकिन रेवेन्यू के मामले में जीरो है या लॉस मेकिंग है। हम चैनल का कंटेंट भी चलाएंगे और अन्य एजेंसियों से भी वेबसाइट के लिए कंटेंट हासिल करेंगे। हमारा फोकस जितना टीवी पर है, उतना ही डिजिटल पर भी है।
आपका ‘द जेसी शो’ (The JC Show) काफी लोकप्रिय रहा है। क्या उस शो को दोबारा शुरू करेंगे अथवा अपना कोई और शो लेकर आएंगे?
लगभग हर तीन महीने में मैं एक ‘द जेसी शो‘ करता हूं, यह कई मायनों में देश का सबसे बड़ा शो रहा है। क्योंकि हम 18 चैनल चलाते थे और यह शो सबमें चलता था। पिछली बार भी जब मैंने यह शो किया था, तो उसे करीब एक करोड़ लोगों ने देखा था। यहां भी ‘द जेसी शो‘ करेंगे। यह चैनल को चलाने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ पैशन के लिए होगा। चैनल को चलाने वाले शो हमारे एडिटोरियल के लोग करेंगे।
चैनल की मार्केटिंग को लेकर किस तरह की स्ट्रैटेजी बनाई गई है?
मेरा मानना है कि मीडिया में मार्केटिंग एक लग्जरी है। लोगों को चैनल के बारे में जानकारी देने के लिए मार्केटिंग जरूरी है लेकिन असली मार्केटिंग तो खबर से होती है। खबर में यदि दम है तो उसे लोग पाताल से ढूंढ लाएंगे।
ज्यादातर चैनल्स टीआरपी के पीछे भागते हैं, जिसे लेकर कई बार विवाद भी होता है और आरोप-प्रत्यारोप भी लगते हैं। क्या आप भी टीआरपी में यकीन करते हैं और आप भी नंबरों की इस दौड़ में शामिल होंगे?
टीआरपी में मेरी कभी भी मान्यता नहीं रही। हमारा चैनल देश का पहला टीआरपी फ्री चैनल होगा। यानी हमारे न्यूज रूम में टीआरपी को लेकर कोई दबाव नहीं होगा। टीआरपी यदि आती है तो अच्छी बात है उसका स्वागत है, लेकिन यदि नहीं आती है तो भी हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम तो ये चाहते हैं कि हमारा कंटेंट अच्छा हो और हमारी टीम पूरे मन से अपना बेस्ट काम करे। हमारी खबरों में पूरी ताकत है रेवेन्यू लाने की और एडवर्टाइजर्स भी जानते हैं कि हमारी क्या वैल्यू है। मेरा मानना है कि अब टीआरपी वाली क्रेडिबिलिटी खत्म हो गई है, बस एक सिस्टम है जो चल रहा है। लेकिन एक दिक्कत ये है कि नेशनल चैनल का सारा बिजनेस टीआरपी से आता है, लेकिन रीजनल चैनल में टीआरपी का कोई रोल नहीं है। मैं आपको बता दूं कि लॉन्चिंग के पहले साल में ही मैं बिना टीआरपी के 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू लेकर आऊंगा। हालांकि, टीआरपी आ जाए तो बहुत अच्छी बात है, उसका स्वागत है, पर हम टीआरपी के मोहताज नहीं हैं। मैं फिर कहता हूं कि हमारी खबर हमारी ब्रैंडिंग करेगी और हमारा शो हमारी ब्रैंडिंग करेगा। हमारे लिए रेवेन्यू, ब्रैंडिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का कोई चैलेंज नहीं है। हमारे लिए एक ही चैलेंज है कि हमारे रिपोर्टर्स खबर कहां से लाएंगे।
आपने पत्रकारिता में लंबा वक्त बिताया है और इसके तमाम चरण देखे हैं। आजकल पहले के मुकाबले पत्रकारिता थोड़ी बदल गई है और तमाम चैनल्स पर हल्ला-गुल्ला ज्यादा होता है। ऐसे में आप समय के साथ किस तरह इस चैनल को प्रासंगिक रखेंगे?
यह मैंने अभी कहा कि आदमी समय, काल, देश और परिस्थिति के अनुसार फैसले लेता है। एडिटोरियल पॉलिसी भी उसी से बनती है। हम भी शोरगुल करेंगे लेकिन दूसरों के मुकाबले थोड़ा कम करेंगे। हम कोशिश करेंगे कि आज के माहौल में यह चैनल मार्केट में ताजा हवा के झोंके की तरह आए। लोगों को सुकून मिले। उन्हें पता चले कि इस चैनल पर 24 घंटे लड़ाई-झगड़ा और शोरगुल वाले कार्यक्रम ही नहीं दिखाए जाते हैं। हमारे डिबेट शो अन्य चैनल्स के मुकाबले शालीन होंगे और कम हंगामेदार रहेंगे, इसके लिए हमारी पूरी कोशिश रहेगी। बाकी समय आने पर पता चलेगा कि हम कितना इस दिशा में कर पाते हैं और कितना नहीं। लेकिन मैं विश्वास दिलाता हूं कि यह चैनल अन्य चैनल्स से अलग होगा।
कोई भी चीज जब हम शुरू करते हैं तो उसके भविष्य के बारे में भी सोचते हैं। ऐसे में आपने अगले पांच साल के लिए इस चैनल का क्या रोडमैप तैयार किया है? अगले पांच साल के सफर में इस चैनल को आप कहां व किस रूप में देखते हैं?
इसे हम इस रूप में देखते हैं कि आने वाले समय में कोई भी राजनीतिक पार्टी इस चैनल को ध्यान में रखे बिना अपनी रणनीति नहीं बना पाएगी। ईटीवी में हम ऐसा कर चुके हैं, जब बिना ईटीवी को ध्यान में रखे हुए कोई भी पॉलिटिकल पार्टी अपनी रणनीति नहीं बनाती थी। हमारा पूरा विश्वास है कि यह चैनल अपनी मजबूत पकड़ बनाएगा। हम कॉरपोरेट के लोग नहीं हैं, जो टार्गेट के पीछे भागें। मेरा मानना है कि टार्गेट इस तरह का होना चाहिए, जिसे अपने बेहतर प्रयासों से हासिल किया जा सके। टार्गेट काल्पनिक नहीं होना चाहिए। हम पहले यह देखते हैं कि टार्गेट ऐसा है कि नहीं, जिसे प्राप्त किया जा सके।
कई चैनल्स अपनी सेल्स टीम के सामने इतना टार्गेट रख देते हैं कि उसे सामान्य तौर पर हासिल करना नामुमकिन होता है, लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं हैं। हम उतना ही टार्गेट रखते हैं, जो वास्तविक हो न कि इतना काल्पनिक कि उसे हासिल करना नामुमकिन हो। हम रेवेन्यू के लिए अपने पूरे प्रयास करते हैं, लेकिन हमारा फोकस टार्गेट हासिल करने पर नहीं होता है। हालांकि, अपने प्रयासों की बदौलत आमतौर पर आखिर में हमें बहुत अच्छा रेवेन्यू हासिल होता है। मैं सिर्फ इस बात को जानता हूं कि हमारा चैनल आज के दौर में सभी के लिए प्रासंगिक होगा और लोग इसे देखेंगे व पसंद करेंगे।
आपका चैनल किन बड़े प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगा?
हमारा यह चैनल सभी प्रमुख डीटीएच प्लेटफॉर्म्स जैसे- टाटा स्काई, एयरटेल, डिश टीवी और वीडियोकॉन आदि पर उपलब्ध होगा।
हाल ही में चीफ जस्टिस एनवी रमना ने टीवी मीडिया की विश्वसनीयता पर कटाक्ष करते हुए इसे कंगारू कोर्ट तक की संज्ञा दी थी। आपका इस बारे में क्या कहना है?
उनकी राय अपनी जगह सही हो सकती है, मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन इस बारे में मैं चीफ जस्टिस को लिखूंगा कि आप ‘भारत24’ देखना शुरू कीजिए, फिर मैं आपसे इस बारे में आपकी राय जानूंगा।
तमाम लोग सफल होने के बाद लाइफ को एंज्वॉय करते हैं, लेकिन आप इतनी सफलता मिलने के बाद और इस उम्र में एक नया चैनल लेकर आ रहे हैं। ऐसे में इस चैनल को लेकर मार्केट में काफी हलचल है। इस बारे में आपका क्या कहना है?
इसे मैं सिर्फ पैशन ही कहूंगा। मैं इस समय 72 साल का हूं, लेकिन मैं अपनी सेहत को लेकर काफी सजग हूं और मुझे अभी काफी काम करना है। बाकी तो सब ईश्वर के हाथों में है। मेरा मानना है कि दो ही चीज जीवन हैं। पहला खबर और दूसरा स्वाद। मैं इन दोनों चीजों पर पूरा ध्यान देता हूं और वर्कआउट भी करता हूं, ताकि लंबे समय तक हम खाने का स्वाद ले सकें और फिट रहकर काम कर सकें। मेरा मानना है कि लाइफ में एंज्वॉय करने के लिए आपको पॉवर में होना चाहिए, तभी आपकी पूछ होगी। मैं आज भी रोजाना 11 किलोमीटर चलता हूं और देश-विदेश के कई अखबार पढ़ता हूं।
आजकल के पत्रकारों के लिए आप क्या कहना चाहेंगे?
उनसे मेरा यही कहना है कि खबर लेकर आओ बस। आजकल तमाम पत्रकार सिर्फ इवेंट में सिमटकर रह गए हैं और खबर करना भूल गए हैं। उन्हें एक्सक्लूसिव कंटेंट पर फोकस करना चाहिए और खबर के अंदर की खबर निकालकर लानी चाहिए।
आप अपनी टीम किस तरह तैयार कर रहे हैं। इसमें किस तरह के लोग आपके साथ जुड़ रहे हैं। उनकी भर्ती में आप किन बातों पर फोकस रखते हैं, इस बारे में कुछ बताएं?
हमारे यहां भर्ती से पहले तमाम तरह की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और आवेदकों को तमाम मानकों पर परखने के बाद ही नियुक्ति दी जाती है। ऐसा नहीं है कि आज किसी को भर्ती कर लिया, कुछ दिनों बाद उसे जाने के लिए कह दिया। भर्ती ही तय मानकों के हिसाब से होती है तो उनकी परफॉर्मेंस पर हमें पूरा भरोसा होता है।