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अरुण पुरी ने खोला India Today की सफलता का ‘राज’, बताई भविष्य की प्लानिंग
आईआरएस डाटा के अनुसार आज के डिजिटल दौर में भी बढ़ रही है प्रिट के पाठकों की संख्या
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) द्वारा पिछले दिनों जारी किए गए इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही (IRS Q1 2019) के डाटा ने यह साबित कर दिया है कि आज के डिजिटल युग में प्रिंट के पाठकों की भी कोई कमी नहीं है।
इंडियन रीडरशिप सर्वे 2017 (IRS 2017) के आंकड़ों के साथ तुलना करें तो पता चलता है कि मैगजींस के पाठकों की संख्या में इस बार 0.9 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। यदि रीडरशिप की बात करें तो इस लिस्ट में इंडिया टुडे (India Today) सबसे टॉप पर बनी हुई है।
इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही (IRS Q1 2019) के डाटा के अनुसार इंडिया टुडे (अंग्रेजी) की रीडरशिप में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वर्ष 2017 में जहां इस मैगजीन के पाठकों की संख्या 7.9 मिलियन थी, वह इस बार बढ़कर 9.1 मिलियन हो गई है। मैगजीन की इस ग्रोथ और आगे की प्लानिंग के बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के चुनिंदा अंश-
आईआरएस 2019 की पहली तिमाही के अनुसार पिछली बार की तुलना में इंडिया टुडे (अंग्रेजी) मैगजीन की रीडरशिप में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। आखिर इस मैगजीन की रीडरशिप में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी का क्या राज है?
दरअसल, पहले के मुकाबले आज के दौर का रीडर चीजों को ज्यादा पारदर्शिता से देखता है। वह स्टोरी में ज्यादा से ज्यादा फैक्ट के साथ ही उसे अच्छी तरह की गई रिसर्च के नजरिये से भी देखता है। पाठकों के बीच में इंडिया टुडे की सफलता का यही राज है कि यह बेहतर कंटेंट देती है। इस कंटेंट को तमाम रिसर्च के बाद तैयार किया जाता है और इसमें तथ्यों के साथ गहराई से विश्लेषण भी शामिल होता है। यही कारण है कि पाठक इस मैगजीन को काफी पसंद करते हैं और इससे मैगजीन की रीडरशिप बढ़ती है।
क्या इंडिया टुडे (हिंदी) की ग्रोथ भी इसी तरह की हुई है?
इंडिया टुडे (हिंदी) की ग्रोथ में भी निश्चित दर से इजाफा हुआ है और यह नंबर वन हिंदी अखबार से डेढ़ गुना ज्यादा है।
भविष्य में हिंदी और अंग्रेजी दोनों कैटेगरी में रीडरशिप बढ़ाने के लिए आपने किस तरह की प्लानिंग की है?
हम हमेशा अपनी बात को स्पष्टता, गंभीरता और विश्वसनीयता के साथ रखते हैं। आज के डिजिटल दौर के युग में पाठक हमारी मैगजीन को सूचना के भरोसेमेंद स्रोत के रूप में पाएंगे। सिर्फ पाठक ही नहीं, आप देख सकते हैं कि बड़े-बड़े नेता भी इस चुनाव में इंडिया टुडे की स्टोरी का हवाला दे रहे हैं। ये सब इस बात का संकेत हैं कि यह ब्रैंड दूसरे किसी भी ब्रैंड के मुकाबले देश के लोगों से ज्यादा कनेक्ट कर रहा है और इसी वजह से इसकी यह ग्रोथ हो रही है।
क्या आप हमें बता सकते हैं कि आज के डिजिटल युग में मैगजींस को कैसे अपने आपको और पाठक संख्या को बनाए रखना चाहिए, जहां पर सभी मैगजींस का अपना सबस्क्रिप्शन मॉडल भी है। डिजिटल सबस्क्रिप्शन के मामले में इंडिया टुडे कैसा प्रदर्शन कर रही है? क्या आगे भी यह स्थिति रहेगी?
डिजटल को चुनौती और अवसर दोनों रूप में देखा जा सकता है। जहां तक इंडिया टुडे ग्रुप की बात है, तो हम इसे अवसर के रूप में देखते हैं।
क्या आईआरएस के डाटा में डिजिटल के पाठकों की संख्या भी शामिल है?
डिजिटल पर मैगजीन की रीडरशिप को आईआरएस में पब्लिकेशन के स्तर पर शामिल नहीं किया गया है। आईआरएस की ओर से कहा गया है कि इसमें डिजिटल रीडरशिप शामिल नहीं है। हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि डिजिटल ने प्रिंट को आगे बढ़ाने में मदद नहीं की है। दोनों एक-दूसरे के सहायक रहे हैं।
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