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इस साल कैसे नई ऊंचाइयां छुएगा ABP न्यूज नेटवर्क, CEO ने बताई स्ट्रैटेजी
एक्सचेंज4मीडिया के साथ बातचीत में अविनाश पांडे ने कहा- इस साल ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री की ग्रोथ में रीजनल और डिजिटल अहम भूमिका निभाएंगे
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
दर्शकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी और नए साल पर मजबूत रोडमैप के साथ ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ ने वर्ष 2020 में नई ऊंचाइयां छूने की पूरी तैयारी कर ली है। इस बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ANN) के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है कि आने वाला समय डिजिटल और रीजनल का होगा और वर्ष 2020 में यह दोनों ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ग्रुप का फोकस भी इन्हीं पर है।
हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) के साथ एक बातचीत के दौरान अविनाश पांडे ने इस साल ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में पिछले साल के साथ ही इस साल होने वाले संभावित प्रमुख बदलावों के बारे में विस्तार से बताया। डिजिटल माध्यम में नेटवर्क की ग्रोथ से उत्साहित अविनाश पांडे ने इस माध्यम की पहुंच के साथ ही इस बात पर भी चर्चा की कि इस साल सबसे बड़े ट्रेंडसैटर्स में किसकी अहम भूमिका होगी। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:
चाहे नए टैरिफ ऑर्डर की बात हो, लैंडिंग पेज को लेकर ट्राई के रेगुलेशंस का मुद्दा हो अथवा बार्क की नई लीडरशिप की बात ही क्यों न हो, पिछला साल ब्रॉडकास्टर्स के लिए कई घटनाओं का गवाह रहा है। ऐसे में आपकी नजर में इंडस्ट्री में क्या अहम बदलाव हुए हैं?
देश में टेलिविजन के लिए पिछले साल लागू हुआ न्यू टैरिफ ऑर्डर सबसे बड़े बदलावों में से एक रहा है। ‘ट्राई’ (TRAI) और उसके नियमों ने ‘डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स’ (DPO) और ब्रॉडकास्टर्स के बीच काम करने के तरीके को परिभाषित करने के साथ ही कॉल नेटवर्क कैपेसिटी फीस और फ्री टू एयर चैनल्स की संख्या को लेकर 2019 में ब्रॉडकास्टिंग का परिदृश्य पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि शुरुआती स्तर पर कुछ कंज्यूमर्स को कुछ असुविधा हुई, लेकिन इससे सभी को फायदा होता भी देखा गया। ट्राई द्वारा कैरिज फीस तय करने और क्षेत्रों को परिभाषित करने से ब्रॉडकास्टर्स और डीपीओ के बीच पारदर्शिता बनी है। लैंडिंग पेज को लेकर जो चिंता थी, उसे बार्क और इंडस्ट्री से जुड़ी इकाइयों ने सुलझा लिया।
कई ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि न्यूज चैनल्स को फ्री टू एयर नहीं होना चाहिए, इस बारे में आपका क्या मानना है?
यदि मैं अपनी बात करूं तो मैं ब्रॉडकास्टिंग की तरफ से किसी फ्री टू एयर चैनल के पक्ष में नहीं हूं, क्योंकि केबल चैनल्स के लिए कंज्यूमर 130 रुपए और टैक्स का भुगतान तो कर ही रहा है। ऐसे में कंज्यूमर के लिए तो कुछ भी फ्री नहीं है। यह तो ‘डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स’ के लिए है कि चैनल फ्री हो जाता है और जो फ्री टू एयर चैनल के लिए भी कैरिज फीस ले रहे हैं। ऐसे में यह पूरा सिस्टम ‘डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स’ के लिए एकतरफा रूप से फायदेमंद होता है। इसलिए, भुगतान करना न्यूज इंडस्ट्री के हित में है। हालांकि, अभी इंडस्ट्री में काम करने का जो तरीका है, उसमें किसी एक चैनल अथवा छोटे नेटवर्क के लिए भुगतान करना काफी मुश्किल अथवा लगभग असंभव ही है। इसलिए न्यूज इंडस्टी को आपस में मिलकर इस तरह के रास्ते तलाशने चाहिए, जिससे कंज्यूमर को डिलीवर किए जाने वाले कंटेंट के लिए उचित फीस ली जा सके।
पिछले कुछ महीनों में ‘एबीपी’ के रेटिंग में काफी सुधार देखने को मिला है। व्युअरशिप में हुई इस ग्रोथ का श्रेय आप किसे देते हैं? क्या बार्क की लीडरशिप में बदलाव की मांग ब्रॉडकास्टर्स की ओर से की गई थी? इससे कितनी मदद मिली?
एबीपी न्यूज नेटवर्क की बात करें तो हम ज्यादा नाटकीयता में भरोसा नहीं रखते हैं। हम हमेशा रोचक अंदाज में आपको सच्चाई बताएंगे। हम कभी भी किसी का पक्ष नहीं लेंगे। फिर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कौन है और क्या है। किसी भी मामले में हम हमेशा सिर्फ तथ्यों की बात करेंगे। पिछला साल खबरों से भरपूर रहा, जिसकी शुरुआत लोकसभा चुनाव के साथ ही हो गई थी। निष्पक्ष कवरेज और अवॉर्ड विजेता रिपोर्टर्स के कारण हमारे नेटवर्क को इसका काफी फायदा मिला। यही नहीं, खबर जुटाने के काम में हमारी डिजिटल टीम भी पूरी तरह से जुटी हुई है, इसका परिणाम ही रहा कि पूरे नेटवर्क की व्युअरशिप में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। बार्क के नेतृत्व में हुए परिवर्तन से इसका कोई लेना-देना नहीं है। एक्सक्लूसिव कंटेंट से व्युअरशिप आती है। बदलते ट्रेंड्स और व्युअर्स की पसंद का अनुमान लगाने में दूरदर्शिता और सक्रियता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और इसी के अनुसार, चैनल को अपना कंटेंट उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। इन्हीं सिद्धांतों का पालन करते हुए हम जमीन से जुड़े रहते हैं।
आजकल सभी ब्रॉडकास्टर विभिन्न भाषाओं के चैनल्स पर पैसा लगा रहे हैं। रीजनल न्यूज के मोर्चे पर आपका नेटवर्क ज्यादा मजबूत है। नए साल को लेकर इस सेगमेंट में आपका क्या प्लान है? आप इस ग्रोथ को आर्थिक रूप से कैसे भुनाएंगे? क्या आप हिंदी और अंग्रेजी की तुलना में विज्ञापन से रीजनल में ज्यादा कमाई देखते हैं?
मैं दूसरे ब्रॉडकास्टर्स के बारे में नहीं बता सकता हूं, लेकिन एबीपी न्यूज नेटवर्क में हमने रीजनल चैनल के मॉडल को रीजनल स्वायत्ता के साथ हमेशा बिजनेस मॉडल के रूप में देखा है। कहने का मतलब है कि बेशक हमारे पास कॉरपोरेट ऑफिस है, लेकिन हमारे सभी रीजनल चैनल्स निष्पक्ष खबरें दिखाने के हमारे मूल सिद्धांत पर चलते हुए सभी मायनों में पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। इसलिए, हमारे रीजनल न्यूज चैनल्स जैसे-‘एबीपी आनंदा’ (ABP Ananda), ‘एबीपी माझा’ (ABP Majha), ‘एबीपी अस्मिता’ (ABP Asmita) और ‘एबीपी गंगा’ (ABP Ganga) ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। वास्तव में ‘एबीपी सांझा’ (ABP Sanjha) पंजाबी दर्शकों के लिए काफी अच्छा कर रहा है। वर्तमान की बात करें तो हमारे पूरे रेवेन्यू में रीजनल चैनल्स का योगदान 40 प्रतिशत से ज्यादा है और जल्द ही यह बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। मेरा मानना है कि रीजनल्स निश्चित रूप से सभी प्लेटफॉर्म्स से बेहतर करेंगे और किसी भी हिंदी अथवा अंग्रेजी न्यूज चैनल से बेहतर होंगे।
डिजिटल की ग्रोथ के बारे में कुछ बताएं। क्या डिजिटल से आ रहा एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू अभी भी शुरुआती दौर में है? एबीपी में इसकी ग्रोथ को आप किस तरह से देखते हैं?
डिजिटल की बात करें तो एबीपी नेटवर्क काफी अच्छा कर रहा है। हमारे 250 मिलियन से ज्यादा पेज व्यूज हैं और 58 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं। विडियो की बात करें तो 60 मिलियन से ज्यादा यूनिक विजिटर्स के साथ हम तीसरे नंबर पर हैं। डिजिटल के मोर्चे पर हमारे रेवेन्यू में 50 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही है। हम विडियो फर्स्ट फॉर्मेट पर काम कर रहहे हैं और जल्द ही आपको ‘एबीपी लाइव’ (ABP Live) एक नए रूप में दिखाई देगा, जहां से आप अपनी पसंद के अनुसार किसी भी भाषा में कोई भी न्यूज चुन सकते हैं। हमने इस पर काफी निवेश किया है और आने वाले दो वर्षों में हम इसमें 50 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी देख रहे हैं।
वर्ष 2019 खबरों से भरपूर रहा है। लोकसभा चुनाव के साथ ही इसकी शुरुआत हो गई थी, इसके बाद क्रिकेट वर्ल्ड कप भी था। ऐसे में एडवर्टाइजर्स ने विज्ञापनों पर काफी खर्च किया। दूसरी तरफ इस वित्तीय वर्ष में आर्थिक मंदी का सामना भी करना पड़ा। क्या आपको लगता है कि पहली दो तिमाही के मुकाबले आखिरी की दो तिमाही की चाल काफी सुस्त रही है? इस बारे में आपका क्या मानना है?
आमतौर पर एक के बाद एक चुनाव से व्युअरशिप बढ़ती है। ऐसे में चुनाव के दौरान एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू का प्रतिशत भी बढ़ जाता है। 2019 भी इससे अलग नहीं था, सिवाय इसके कि मौद्रिक स्थिति को देखते हुए कुछ एडवर्टाइजर्स ने अपने बजट घटा दिए। लेकिन आर्थिक मोर्चे पर विपरीत परिस्थितियों और मार्केट में अनिश्चितता के कारण उम्मीद है कि पिछले वर्षों की तुलना में अब यह खर्च कम होगा।
साल की शुरुआत नए टैरिफ ऑर्डर (NTO 2.0) से हुई है। आपकी नजर में ब्रॉडकास्टर्स के लिए इसके क्या मायने हो सकते हैं?
न्यूज जॉनर में हम फ्री टू एयर ब्रॉडकास्टर हैं और नए टैरिफ ऑर्डर (NTO 2.0) ने डीपीओ के साथ हमारी बिजनेस डीलिंग को और स्पष्ट किया है। हमारे लिए, यह सही दिशा में उठाया गया बेहतर कदम है।
वर्ष 2020 में ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री में आपकी नजर में तीन कौन से बड़े बदलाव हो सकते हैं?
मेरी नजर में 2020 में डिजिटल और रीजनल इस इंडस्ट्री की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन चैनलों के पास काफी साधन हैं और पूरे देश में जिन्होंने अपने पैर पसार रखे हैं, उन्हें काफी फायदा होगा। हालांकि, डिजिटल की ओर से चुनौती मिलेगी, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूज और एंटरटेनमेंट के द्वारा ब्रॉडकास्टर इसकी बढ़त को बरकरार रखेंगे। कुल मिलाकर रीजनल न्यूज और हिंदी न्यूज की ग्रोथ में काफी इजाफा होगा। 2020 में लाइव अथवा विडियो ऑन डिमांड (VOD) की स्थिति भी मजबूत होगी। जहां तक मुझे लगता है कि वर्ष 2020 की आखिरी छमाही में टीवी और डिजिटल टीवी (ऐप, वेबसाइट और यूट्यूब) की ग्रोथ दोहरे अंकों में होगी। पहली छमाही में अभी भी आर्थिक मंदी, जीएसटी और इंडस्ट्री से जुड़े अन्य मुद्दों का प्रभाव देखने को मिलेगा।
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