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मैं किसी भी मुद्दे को बातचीत से सुलझाने में विश्वास रखती हूं: शोभना जैन

महिला पत्रकारों के प्रमुख संगठन 'Indian women's Press Corps' (IWPC) की लगातार दूसरी बार प्रेजिडेंट चुनी गईं शोभना जैन ने समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

पंकज शर्मा 2 years ago

वरिष्ठ पत्रकार और महिला पत्रकारों के प्रमुख संगठन 'Indian women's Press Corps' (IWPC) की लगातार दूसरी बार निर्वाचित प्रेजिडेंट शोभना जैन से हाल ही में एक मुलाकात के दौरान IWPC चुनाव में उनके द्वारा पेश किए गए घोषणापत्र समेत मीडिया से जुड़े तमाम प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:  

सबसे पहले तो आप हमारे पाठकों को अपने बारे में बताएं। आपका अब तक का सफर क्या और कैसा रहा है?

मैंने अंग्रेजी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा जर्मन भाषा का कोर्स भी किया है। मीडिया में अपने करियर की शुरुआत मैंने न्यूज एजेंसी ‘यूनिवार्ता’ (Univarta) से बतौर इंटर्न की थी। इसके बाद मैं वहां ब्यूरो चीफ के पद तक पहुंची। यहां मैंने पीएमओ समेत तमाम प्रमुख बीट कवर कीं। इसके अलावा मैं सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर लिखती भी हूं। इन दिनों मैं एक कॉलमिस्ट के तौर पर अंतरराष्ट्रीय विषयों पर लिखती हूं और एक न्यूज सर्विस का संचालन कर रही हूं। मुझे सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दे उठाना भी अच्छा लगता है।    

'इंडियन वुमेंस प्रेस कॉर्प्स' के गठन का उद्देश्य, इसकी वर्तमान सदस्य संख्या और इसकी कार्यप्रणाली अथवा किस तरह के मुद्दों को यहां प्राथमिकता दी जाती है, इस बारे में कुछ बताएं?

वर्तमान में 'इंडियन वुमेंस प्रेस कॉर्प्स' के सदस्यों की संख्या 800 से अधिक है। यहां आम महिलाओं से जुड़े सरोकारों के साथ-साथ महिला पत्रकारों से जुड़े तमाम मुद्दे जैसे उनकी फ्रीडम और उनके कल्याण से जुड़े जैसे मुद्दों को हम प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा सामाजिक सरोकारों से जुड़े तमाम मुद्दों को भी हम उठाते हैं।    

आप पहले भी आईडब्यूपीसी की प्रेजिडेंट रही हैं। आईडब्ल्यूपीसी प्रेजिडेंट के तौर पर आपका यह कौन सा कार्यकाल है। क्या आपको लगता है कि आपके अभी तक बतौर प्रेजिडेंट जो कार्यकाल रहे हैं, उनमें यह अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल रहा है?

लगातार आईडब्यूपीसी की प्रेजिडेंट के तौर पर यह मेरा दूसरा और वैसे तीसरा कार्यकाल है। मैं वर्ष 2017-18 में भी यहां प्रेजिडेंट रही हूं। मुझे इस बात की संतुष्टि है कि अपने कार्यकाल के दौरान जितना भी संभव हो सका है, मैं अपने उद्देश्यों को पूरा कर पाने में सफल रही हूं। हमारी पूरी टीम की खासियत है कि हम अधिकतम जितना कर सकते हैं, वह करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद हम अपने स्टाफ के साथ मिलकर पूरी तन्मयता से अपने काम में जुटे रहते हैं। मेरा प्रयास रहता है कि सभी लोग मिल-जुलकर रहें और आपस में एक दूसरे के सहयोग से अच्छे ढंग से काम करें। 

आपके कार्यकाल में कोई ऐसी बड़ी घटना रही हो, जिसमें आईडब्ल्यूपीसी ने दखल दिया हो और उसे सफलता मिली हो। यानी प्रेजिडेंट के तौर पर आपकी बड़ी उपलब्धि क्या रही है? इस राह में किस तरह की चुनौतियां आई हैं, अथवा आ रही हैं, इस बारे में भी कुछ बताएं।

इस तरह की तमाम बड़ी घटनाएं होती रहती हैं, जिन्हें हम उठाते रहते हैं और उनमें से कई में ठोस कार्रवाई भी होती है। फिर चाहे वह महिलाओं के पर्सनल इश्यूज हों, महिलाओं के उत्पीड़न की बात हो अथवा घरेलू हिंसा जैसे मामले। हमारा मानना है कि महिलाओं की जिंदगी ऐसी हो, जिसमें वह घर-परिवार के साथ-साथ बाहर निकलकर भी सही और सुरक्षित ढंग से अच्छे माहौल में काम कर सकें। हालांकि, इस राह में तमाम चुनौतियां भी आती रहती हैं, लेकिन हम अपनी टीम के सहयोग से उन चुनौतियों का सामना करते रहते हैं।   

Indian Women Press Corps  की बिल्डिंग को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस बारे में काफी खबरें पढ़ने-सुनने को मिल रही हैं। आखिर ये पूरा मसला क्या है और दिक्कत कहां आ रही है। इस बारे में क्या कहना चाहेंगी?

अभी मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगी। हां, यह जरूर कहूंगी कि हमारे प्रयासों में कोई कमी नहीं है। कभी लगता है कि रास्ता काफी साफ है, तो कभी लगता है कि काफी कठिन रास्ता है। हम किसी भी मुद्दे को बातचीत से सुलझाने में विश्वास रखते हैं और मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा है कि यह मुद्दा भी बातचीत से जल्द ही हल हो जाएगा।  

इस बार के चुनाव में आपने अपने पैनल का जो मैनिफेस्टो घोषित किया था, क्या आपको लगता है कि आप उन सभी दावों पर खरी उतरेंगी? इसके लिए आपने किस तरह का रोडमैप तैयार किया है?

हमारा प्लान ऑफ एक्शन तो यही है कि सबसे पहले इस इमारत की लीज बढ़वाई जाए। हमें उम्मीद है कि अपने प्रयासों में सफल होंगे। इसके अलावा जैसा कि मैंने बताया कि हम तमाम समसामयिक मुद्दे उठाते ही रहते हैं।

इस बार इस चुनाव में काफी आंतरिक उथल-पुथल जैसे- व्यक्तिगत आक्षेप और ध्रुवीकरण भी देखने को मिला। IWPC की एक मेंबर ने हाई कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था। क्या था वह मामला। इस बारे में क्या कहेंगी? 

हालांकि, अब इस तरह की बातें करने का कोई औचित्य नहीं है, लेकिन वह सब कुछ गलतफहमियों के चलते हुआ। हालांकि, अब इस तरह का कोई मुद्दा नहीं है। मेरा मानना है कि आपस में किसी तरह की तल्खी नहीं होनी चाहिए।

जब आप किसी बड़ी भूमिका में होते हैं, तो आपके काम से अंसतुष्ट होने वाले लोगों की संख्या भी कई बार बड़ी होती है, ऐसे में आप उनकी अपेक्षाओं पर कैसे खरी उतरेंगी, ताकि ऐसे लोगों की नाराजगी दूर की जा सके?

हम इन अपेक्षाओं को पूरा करने की हरसंभव कोशिश करते हैं। मैं सभी लोगों को साथ लेकर चलने वालों में से हूं। मैं हर मुद्दे को बहुत ही शांतिपूर्ण ढंग से हैंडल करती हूं और चाहती हूं कि सभी लोग मिल-जुलकर आपस में शांति से काम करें। मेरा मानना है कि नाराजगी यदि है भी उसे आपस में बैठकर दूर किया जा सकता है।


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