होम / साक्षात्कार / आज के दौर में दुनिया में नई संचार व्यवस्था की आवश्यकता है: उमेश उपाध्याय

आज के दौर में दुनिया में नई संचार व्यवस्था की आवश्यकता है: उमेश उपाध्याय

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उमेश उपाध्याय ने अपनी किताब ‘वेस्टर्न मीडिया नरेटिव्स ऑन इंडिया फ्रॉम गांधी टू मोदी’ से जुड़े तमाम पहलुओं को लेकर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

पंकज शर्मा 1 year ago

‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’, ‘ऑल इंडिया रेडियो’, ‘दूरदर्शन’, ‘नेटवर्क18’ और ‘जी न्यूज’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में प्रमुख पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उमेश उपाध्याय ने एक किताब ‘वेस्टर्न मीडिया नरेटिव्स ऑन इंडिया फ्रॉम गांधी टू मोदी’ (WESTERN MEDIA NARRATIVES ON INDIA FROM GANDHI TO MODI) लिखी है। इस किताब ने पिछले दिनों मार्केट में अपनी ‘दस्तक’ दे दी है। अंग्रेजी भाषा में लिखी गई इस किताब को ‘रूपा पब्लिकेशंस’ ने प्रकाशित किया है। इस किताब से जुड़े तमाम पहलुओं को लेकर उमेश उपाध्याय ने समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

सबसे पहले तो आप अपने बारे में बताएं कि आपका पत्रकार बनने और फिर लेखक बनने का अब तक का सफर कैसा रहा है?

देखिए, यात्रा पहले से तय नहीं होती है। मैंने अपनी पढ़ाई ‘जेएनयू’ से की। इसके बाद कुछ समय तक ‘दिल्ली विश्वविद्यालय‘ में पढ़ाया। फिर पत्रकारिता शुरू कर दी। पहले ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया‘ (PTI) और फिर टीवी मीडिया में आ गए। जिस टॉपिक पर मैंने किताब लिखी है कि पश्चिमी मीडिया भारत को किस नजरिये से देखता है, यह मेरे मन में तब से था, जब मैं एम.फिल कर रहा था। इसके बाद तमाम ऐसी घटनाएं हुईं, जिसके बाद मुझे लगा कि यह सही समय है, जब इस पर पूरा शोध किया जाए और देखा जाए कि असल में स्थिति क्या है। तो यह पुस्तक उसी का परिणाम है। 

अपनी इस किताब के बारे में बताएं कि पब्लिशर कौन है और कितने चैप्टर अथवा खंड हैं? इसके अलावा यह किताब पाठकों के लिए कहां उपलब्ध है?

फिलहाल यह किताब अंग्रेजी भाषा में है। इसे रूपा पब्लिकेशंस ने पब्लिश किया है। इसमें एक ही खंड है। इस किताब को बुक स्टोर से खरीदने के अलावा ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘एमेजॉन’ (Amazon) से भी ऑर्डर करके मंगाया जा सकता है।  

आपकी किताब में वेस्टर्न मीडिया के किस प्रकार के नरेटिव्स के बारे में बात की गई है और इन नरेटिव्स का भारतीय समाज और राजनीति पर क्या प्रभाव है?

यदि मैं अपनी किताब के बारे में एक वाक्य में बताना चाहूं तो यह colonization Of Minds यानी मानसिक दासता के बारे में है। इस किताब में बताया गया है कि भारत अथवा इस जैसे जो देश हैं, जिन्हें तीसरी दुनिया अथवा विकासशील समाज/देश कहा जाता है, उनमें साम्राज्यवाद के समाप्त होने के बावजूद किस तरह से मानसिक गुलामी लगातार जारी है। इस मानसिक गुलामी को आगे बढ़ाता है या यू कहें कि पल्लवित और पोषित करता है पश्चिम का मीडिया। दरसअल, पश्चिम के समाज में हमारे समाज को लेकर बराबरी का दर्जा देने की बात ही नहीं है। वो खुद को हमसे श्रेष्ठ समझते हैं, इसलिए इस तरह की स्थिति है। पश्चिम की इसी सोच को आगे बढ़ाने का एक टूल अथवा नरेटिव है पश्चिमी मीडिया। भारत के संदर्भ में मैं कह सकता हूं कि यह करीब दो शताब्दियों से ज्यादा समय से चला आ रहा है। यही इस किताब का सार है।   

जैसा कि किताब का शीर्षक है कि वेस्टर्न मीडिया नरेटिव्स ऑन इंडिया फ्रॉम गांधी टू मोदी। तो क्या आपका लगता है कि मोदी के शासन काल में भारत के प्रति वेस्टर्न मीडिया के नरेटिव्स में कुछ बदलाव आया है या सामान्य से शब्दों में कहें तो कुछ अंकुश लगा है?

मेरी नजर में कुछ बदलाव नहीं आया है। वेस्टर्न मीडिया का जैसा नरेटिव भारत को लेकर पहले था, वही अब भी है। इस किताब को लिखने में मुझे ढाई-तीन साल लगे हैं और मैंने तमाम शोध के बाद यह किताब लिखी है। इस आधार पर मैं अपनी बात को दावे के साथ कह सकता हूं। आप देखेंगे कि तब से लेकर अब तक प्रकरण बदल जाएंगे, घटनाएं बदल जाएंगी और वृतांत बदल जाएंगे, लेकिन भारत के प्रति पश्चिमी मीडिया के नरेटिव्स में किसी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

जहां तक हम सभी ने देखा कि कोरोना काल के दौरान पश्चिमी मीडिया ने भारत की छवि धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भारत को लेकर तमाम भ्रामक व नकारात्मक खबरें फैलाई गईं, जिसकी काफी आलोचना भी हुई थी, क्या उस तरह की बातों को भी इस किताब में जगह दी गई है?

बिल्कुल जगह दी गई है। यदि आप कोरोना की टाइमलाइन को देखेंगे तो जनवरी 2020 से कोविड के मामले आने शुरू हो गए थे। भारत में कोविड के आते-आते मार्च हो गया था। कोविड के कारण भारत में 24 मार्च 2020 में पहला लॉकडाउन लगा था, लेकिन जनवरी-फरवरी और मार्च के शुरुआती दौर की बात करें तो यूरोप के तमाम हिस्सों, खासकर इटली से बेतहाशा मौत की खबरें आने लगी थीं। वहां अस्पतालों के बाहर मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लगी थीं। भारत में उस समय कुछ सौ लोग ही कोविड से संक्रमित थे।

लेकिन, यदि आप मार्च के अंत के पश्चिमी मीडिया के नरेटिव को देखना शुरू करें तो 24 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद 27-28 मार्च को ही खबरें प्रकाशित होने लगती हैं कि भारत का डेटा सही नहीं है। उसी समय भारत में कोविड की स्थिति में क्या हो सकता है, ये भी लिखा जाने लगा। पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए पश्चिमी मीडिया द्वारा यह कहा जाने लगा कि भारत में यदि कोविड ने पैर पसारे तो इतने लोग मारे जाएंगे। यानी, पहले दिन से ही पश्चिमी मीडिया ने भारत के बारे में तमाम भ्रामक और अनुमानों के आधार पर खबरें चलानी शुरू कर दीं। इस किताब में पश्चिमी मीडिया के विभिन्न संस्थानों द्वारा प्रकाशित उन तमाम खबरों का सबूतों के साथ जिक्र किया गया है।

आपको क्या लगता है, क्या आने वाले समय में भारत को लेकर पश्चिमी मीडिया के नरेट्विस में सकारात्मक बदलाव आएगा? इसे लेकर किस तरह के कदम उठाए जाने की जरूरत है?

मुझे नहीं लगता कि भारत को लेकर पश्चिमी मीडिया अपने नरेटिव में बदलाव लाएगा, क्योंकि वो नहीं चाहते हैं कि दुनिया का पावर बैलेंस यानी शक्ति संतुलन गड़बड़ाए। हां, आप जितने सक्षम और सशक्त होते जाएंगे, ये नरेटिव और ज्यादा जोरदार होता जाएगा। भारत का और विरोध होता जाएगा। यदि उन्हें आपकी जरूरत पड़ेगी तो जरूर वो (पश्चिमी मीडिया) आपके सामने अच्छी-अच्छी बातें कर देंगे। अन्यथा मुझे लगता है कि यह नरेटिव और प्रखर होगा।

रही बात कि इसमें हम क्या कर सकते हैं, तो हमारा सिर्फ ये काम है कि पश्चिम के मीडिया से आने वाली प्रत्येक बात को ये न मानें कि ये अंतिम सत्य है। दूसरा, अपने आप पर विश्वास रखें। अपने स्रोतों को खोजें और देखें। पश्चिम के लोग हमारे बारे में क्या बताएंगे। उनके संस्थानों के दो-दो, चार-चार लोग ही यहां नियुक्त हैं। कोई ग्राउंड रिपोर्टिंग भी नहीं होती। ऐसे में जो लोग ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं, हमें उन पर भरोसा करना होगा। इस किताब के अंत में मेरा कहना है कि दुनिया में एक नई संचार व्यवस्था की आवश्यकता है। न्यू वर्ल्ड इंफॉर्मेशन ऑर्डर (NWIO) की आवश्यकता है, जिसमें सभी चीजें सिर्फ पश्चिम मीडिया से न आएं। हम भी अपना कंटेंट क्रिएट करें। 

समाचार4मीडिया के साथ उमेश उपाध्याय की इस पूरी बातचीत का वीडियो आप यहां देख सकते हैं।


टैग्स किताब इंटरव्यू उमेश उपाध्याय साक्षात्कार बुक वरिष्ठ पत्रकार पुस्तक रूपा पब्लिकेशंस वेस्टर्न मीडिया नरेटिव्स ऑन इंडिया फ्रॉम गांधी टू मोदी
सम्बंधित खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 week ago

पत्रकारिता में इन बातों पर फोकस जरूरी, बाकी सब अपने आप संभल जाएगा: संकेत उपाध्याय

समाचार4मीडिया से बातचीत में जाने-माने पत्रकार संकेत उपाध्याय का कहना था- ईको सिस्टम बंटोरने के इस सिस्टम में जागरूक हो जाना ही एक ईको सिस्टम है।

1 week ago

अब ‘मैड मेन’ नहीं, ‘मशीन माइंड्स’ का है जमाना: सर मार्टिन सोरेल

S4 Capital के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने डॉ. अनुराग बत्रा से बातचीत में बताया कि एआई के दौर में विज्ञापन जगत में कैसे आगे बढ़ें और कौन-सी बड़ी कंपनियां पिछड़ रही हैं।

1 week ago

टीवी व डिजिटल में मुकाबले की बहस गलत, प्लेटफॉर्म की सीमाओं से आगे बढ़ें: आशीष सहगल

टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क के नए CEO और मीडिया व एंटरटेनमेंट के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल ने कहा कि टीवी और डिजिटल के बीच मुकाबले की चर्चा एक गलत धारा है।

18-December-2025

सफलता के लिए बदलाव की रफ्तार पकड़नी होगी: उदय शंकर

जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने CII बिग पिक्चर समिट में भारतीय मीडिया के भविष्य पर SPNI के एमडी व सीईओ गौरव बनर्जी से बातचीत की।

03-December-2025


बड़ी खबरें

TV से सोशल मीडिया व AI तक बदला दौर, पर पत्रकारिता की असली आत्मा आज भी कायम: सुधीर चौधरी

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में गुरुवार को दिग्गज पत्रकार और न्यूज एंकर सुधीर चौधरी ने टीवी पत्रकारिता से लेकर डिजिटल और AI के दौर तक के सफर पर खुलकर बात की।

16 hours ago

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन–CCI मामले की सुनवाई 11 मई तक टाली

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच चल रहे मामले की सुनवाई अब 11 मई 2026 तक टाल दी है।

16 hours ago

AI, टेक्नोलॉजी और भरोसे की कसौटी पर खड़ी न्यूज इंडस्ट्री, DNPA कॉन्क्लेव में मंथन

नई दिल्ली में आयोजित डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में मीडिया, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी से जुड़े बड़े लीडर्स ने इस पर विस्तार से चर्चा की।

15 hours ago

DNPA Conclave 2026: तस्वीरों में देखें कार्यक्रम की झलकियां

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की ओर से नई दिल्ली के Shangri-La Eros होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में डिजिटल मीडिया की बदलती दुनिया पर खुलकर चर्चा हुई।

17 hours ago

राणा यशवंत विवाद पर न्यूज इंडिया मैनेजमेंट की सफाई, चेयरमैन ने रखा अपना पक्ष

हिंदी न्यूज चैनल न्यूज इंडिया में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ रहे राणा यशवंत की ओर से सोशल मीडिया पर सामने आए बयान के बाद अब चैनल मैनेजमेंट की तरफ से भी इस पूरे मामले पर विस्तार से अपना पक्ष रखा गया है।

18 hours ago