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सच्ची पत्रकारिता को वापस लाने का प्रयास करने वाला मूवमेंट है ‘द रेड माइक’: संकेत उपाध्याय

इस इंटरव्यू में संकेत उपाध्याय ने ‘द रेड माइक’ की कार्यप्रणाली, कंटेंट स्ट्रैटेजी और भारतीय मीडिया व पत्रकारिता को लेकर अपने दृष्टिकोण पर खुलकर अपने विचार शेयर किए हैं।

पंकज शर्मा 1 year ago

जाने-माने पत्रकार और सीनियर न्यूज एंकर संकेत उपाध्याय ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म 'द रेड माइक' (The Red Mike) की शुरुआत की है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार सुनील सैनी और सौरभ शुक्ला के साथ मिलकर शुरू किए गए ‘द रेड माइक’ ने महज 10 महीनों में सात लाख सब्सक्राइबर्स से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है। इस प्लेटफॉर्म के उद्देश्यों, इसकी स्थापना के पीछे की सोच और इसके माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता में किए जा रहे नए प्रयोगों पर संकेत उपाध्याय ने समाचार4मीडिया से विशेष बातचीत की है। इस इंटरव्यू में संकेत उपाध्याय ने ‘द रेड माइक’ की कार्यप्रणाली, कंटेंट स्ट्रैटेजी और भारतीय मीडिया व पत्रकारिता को लेकर अपने दृष्टिकोण पर खुलकर अपने विचार शेयर किए हैं। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

: इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत का विचार कैसे आया?

इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत के पीछे एक अहम कारण था-अपनी बात कहने की आजादी। एक समय था जब बड़े चैनल्स के बिना अपनी बात को लोगों तक पहुंचाना मुश्किल था, लेकिन आज ऐसा नहीं है। एक पत्रकार के तौर पर, मैं और मेरी टीम महसूस कर रहे थे कि हमें अपनी आवाज को स्वतंत्रता के साथ लोगों तक पहुंचाना चाहिए। दर्शकों का भी यही आग्रह था कि हम अपनी आवाज को एक अलग मंच पर लेकर आएं। इसलिए, हमने 'द रेड माइक' की शुरुआत की और यह एक सुखद सफर रहा है।

: इस प्लेटफॉर्म का नाम 'द रेड माइक' रखने के पीछे क्या सोच थी?

यह नाम चुनने में काफी विचार-विमर्श हुआ। हमने अपने प्लेटफॉर्म का एक साधारण और अर्थपूर्ण नाम रखना चाहा। लाल रंग हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है-यह क्रांति, जीवन, प्यार, और ऊर्जा का प्रतीक है। यह नाम भीड़ से अलग हटकर था और इसमें एक गहराई थी। इससे जुड़ी एक और बात ये है कि लोग सोचते थे कि कहीं यह किसी विचारधारा से प्रेरित तो नहीं, पर हमारे लिए यह नाम लाल रंग के व्यापक अर्थ को दर्शाने वाला था।

: इस नए प्लेटफॉर्म को शुरू करने में किस प्रकार की चुनौतियां आईं?

सबसे बड़ी चुनौती थी 'इज्जत बनाम ईएमआई' की लड़ाई। एक मिडिल क्लास व्यक्ति के तौर पर हमेशा एक चिंता रहती है कि नौकरी छोड़ने पर अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को कैसे निभाया जाएगा। लेकिन जब हमारे अंदर यह विश्वास पक्का हो गया कि हम इसे कर सकते हैं, तब हमने t estनिर्णय को लिया। इसके अलावा, फंडिंग भी एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि हम केवल एक स्टूडियो में बैठकर कार्यक्रम नहीं करते, बल्कि रिपोर्टिंग पर भी फोकस करते हैं। परंतु, हमने अपने खर्चों को सावधानीपूर्वक मैनेज किया और यह समझ लिया कि अच्छी नीयत हो तो कठिनाई से बाहर निकलने का रास्ता मिल ही जाता है।

: निजी तौर पर इस निर्णय का आप पर क्या असर पड़ा?

यह एक चुनौतीपूर्ण निर्णय था। पहले हम किसी और ब्रैंड का हिस्सा थे, लेकिन अब खुद एक ब्रैंड बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी पहचान अब 'द रेड माइक' से है और यही हमारी सबसे बड़ी सफलता है। एक मजेदार किस्सा भी शेयर करना चाहूंगा, ‘एक बार एक टैक्सी ड्राइवर ने मुझे पहचान कर कहा कि आपने ’द रेड माइक’ जॉइन किया है। वह यह मान रहा था कि ’द रेड माइक’ एक बड़ा चैनल है और इस बात से मुझे बहुत खुशी हुई कि हमारे ब्रैंड को लोग पहचानने लगे हैं।

: आपके सब्सक्राइबर्स की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है, इस सफलता का क्या कारण है?

हमारे प्लेटफॉर्म की सफलता का कारण है हमारे दर्शकों का भरोसा। हमने इस भरोसे को सहेजकर, दर्शकों को सही और सच्ची खबरें देने का प्रयास किया है। ‘द रेड माइक’ केवल एक यूट्यूब चैनल नहीं, बल्कि एक मूवमेंट है, जो सच्ची पत्रकारिता को वापस लाने का प्रयास कर रहा है। हम केवल लोकप्रियता की दौड़ में नहीं हैं, बल्कि तथ्यों पर आधारित, सही और सार्थक खबरें देने में विश्वास करते हैं। हमारे दर्शक भी इसे समझते हैं और इसी कारण हमें उनका लगातार समर्थन मिल रहा है।

: अपने कंटेंट या यूं कहें कि विषय-वस्तु को आप कैसे चुनते हैं? क्या कोई खास स्ट्रैटेजी है?

विषयों का चयन हमारे पत्रकारिता के वर्षों के अनुभव के आधार पर होता है। हमारी टीम में तीन पीढ़ियों के पत्रकार हैं और हमारे विचार कभी-कभी अलग भी होते हैं, लेकिन यही बात हमारी खबरों में विविधता लाती है। हम जनता की वास्तविक समस्याओं और सरोकारों पर फोकस करते हैं, न कि केवल राजनीतिक ड्रामा पर। उदाहरण के लिए, हमने ऐसे मुद्दों को उठाया जो सीधे लोगों के जीवन पर असर डालते हैं, जैसे मोबाइल स्क्रीन में ग्रीन लाइन्स की समस्या, जो लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलें हल करने की कोशिश करती है।

: 'द रेड माइक' की ब्रैंड वैल्यू को बनाए रखने के लिए आपकी रणनीति क्या है?

ब्रैंड वैल्यू भरोसे से बनती है। हमारा विश्वास है कि पत्रकारिता में भरोसा सबसे अहम चीज है। हमारे दर्शक हम पर भरोसा करते हैं और यही हमें अपने लक्ष्य को पूरा करने में मदद करता है। हम मीडिया के बिग बॉसीकरण से दूर रहकर सच्ची और सार्थक खबरों को प्राथमिकता देते हैं। हम एल्गोरिदम के पीछे नहीं भागते, बल्कि वो खबरें पेश करते हैं जो जनता के दिल से जुड़ती हैं। यही हमारा एकमात्र 'सीक्रेट' है।

: मीडिया पर तमाम दबाव और पक्षपात के आरोप लगते हैं। आपकी नजर में मीडिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए क्या चुनौतियां हैं, खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर? 

सबसे पहले, निष्पक्षता की जो अवधारणा है, वो बहुत महत्त्वपूर्ण है, लेकिन इसे पूरी तरह निष्पक्षता के अर्थ में समझना जरूरी है। मेरा मानना है कि जब तक हम जीवित हैं, पूरी तरह से न्यूट्रल होना संभव नहीं है, क्योंकि हर व्यक्ति की अपनी विचारधारा होती है। हमारे दर्शक भी हमसे एक दृष्टिकोण की अपेक्षा करते हैं, मगर ये जरूरी है कि ये दृष्टिकोण तथ्यों पर आधारित हो।  आज की मीडिया में समस्या तब आती है, जब लोग पहले से निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं और फिर तथ्यों को ढूंढते हैं ताकि अपने निष्कर्ष को सिद्ध कर सकें। हमारा प्रयास रहता है कि जो भी दृष्टिकोण हो, वह तथ्यों पर आधारित हो और अगर कभी भूल हो भी जाए, तो उसे सुधारने में हमें संकोच नहीं होता।  

लंबे समय में दर्शक आपकी नीयत को देखता है। आपकी सच्चाई और पारदर्शिता दर्शकों के साथ विश्वास बनाती है। हमें अपने दर्शकों को जानकारी का स्रोत भी बताना चाहिए। यह पारदर्शिता दर्शकों में आपके प्रति विश्वास बढ़ाती है। पारंपरिक मीडिया के सिद्धांतों को अगर हम नजरअंदाज करेंगे, तो वह हमारे विश्वास को कमजोर करेगा।  

: द रेड माइक की शुरुआत हुए करीब 10 महीने हो गए हैं। इस दौरान कोई खास अनुभव या ऐसा पल रहा हो जिसे आप विशेष रूप से साझा करना चाहेंगे?  

इस दौरान कई यादगार पल आए। हमारे लिए यह बहुत बड़ा बदलाव था, क्योंकि हम पत्रकारिता के साथ-साथ अब इस क्षेत्र में उद्यमिता को भी समझने लगे हैं। पत्रकारिता करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, खासकर जब आपको इस व्यवसाय को भी साथ में संभालना हो। एक खास अनुभव तो हमारा पहला इवेंट ‘द रेड माइक विद अखिलेश यादव’ था, जिसमें हमने अखिलेश यादव के साथ एक संवाद स्थापित किया। यह हमारा पहला इवेंट था और हमें बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसने हमें और अधिक आत्मविश्वास दिया। 

संकेत उपाध्याय के साथ इस पूरे इंटरव्यू को आप यहां देख सकते हैं:


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