होम / साक्षात्कार / मैगजीन इंडस्ट्री को आगे बढ़ने के लिए इस तरह के कदम उठाने की जरूरत है: अनंत नाथ

मैगजीन इंडस्ट्री को आगे बढ़ने के लिए इस तरह के कदम उठाने की जरूरत है: अनंत नाथ

‘दिल्ली प्रेस’ (Delhi Press) के एग्जिक्यूटिव पब्लिशर और ‘AIM’ के वाइस प्रेजिडेंट अनंत नाथ ने मैगजीन बिजनेस से जुड़े तमाम प्रमुख मुद्दों पर समाचार4मीडिया से खुलकर बातचीत की।

पंकज शर्मा 2 years ago

देश में पत्रिकाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस’ (AIM) के प्रमुख इवेंट ‘इंडियन मैगजीन कांग्रेस’ (IMC) का 24 मार्च को वृहद आयोजन किया गया। दिल्ली के द ओबेरॉय होटल में हुए इस कार्यक्रम के दौरान देश के प्रमुख मैगजीन पब्लिशर्स में शुमार ‘दिल्ली प्रेस’ (Delhi Press) के एग्जिक्यूटिव पब्लिशर और ‘AIM’ के वाइस प्रेजिडेंट अनंत नाथ ने मैगजीन बिजनेस से जुड़े तमाम प्रमुख मुद्दों पर समाचार4मीडिया से खुलकर बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

सबसे पहले इंडियन मैगजीन कांग्रेस और इसके उद्देश्य के बारे में बताएं?

हम पिछले 12 साल से इसे करते आ रहे हैं। इस तरह के किसी भी आयोजन का यही मुद्दा रहता है कि उस इंडस्ट्री में जो नए-नए बदलाव आ रहे हैं, उसके बारे में डिस्कस करें और अपने अनुभव शेयर करें। निश्चित रूप से इसमें नेटवर्किंग भी शामिल होती है। बाहर के लोगों से काफी कुछ नई चीजें पता चलती हैं। यानी, जैसे अन्य किसी भी कॉन्फ्रेंस में इस तरह के तीन-चार प्रमुख एजेंडे होते हैं, उसी तरह के एजेंडे इस कार्यक्रम में भी होते हैं।

मैगजीन पब्लिशिंग इंडस्ट्री से जुड़े तमाम लोगों को एक मंच पर लाने के लिए वर्ष 2006 में इस आयोजन की शुरुआत हुई थी, जिसमें एडिटर्स, पब्लिशर्स, मीडिया संस्थानों के डिजिटल हेड्स, पॉलिसीमेकर्स, मीडिया संस्थानों के मालिक, मार्केटर्स, मीडिया प्लानर्स के साथ ही रिसर्चर और इंडस्ट्री से जुड़े विश्लेषक शामिल होते हैं। यह इस आयोजन का 12वां एडिशन है।

हालांकि,  कोविड के चलते इस बार एसोसिएशन चार साल के अंतराल के बाद इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इस साल इस कांग्रेस की थीम रखी गई है कि कैसे डिजिटल युग में भी मैगजींस लोगों को जोड़े रखने के लिए (Building Engaged Communities) सबसे प्रभावी माध्यम हैं। ‘इंडियन मैगजीन कांग्रेस’ को लेकर हमारा फोकस रहा है कि डिजिटल की दुनिया में मैगजींस की जगह क्या है, इस पर हम सारी सोच रखें।    

आज डिजिटल काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे दौर में मैगजींस को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए किस तरह की चुनौतियों/समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और इस दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

लोग मैगजींस को कंटेंट के लिए खरीदते हैं, यानी उस कंटेंट में काफी रिसर्च और गहराई (विस्तार) शामिल होती है। कड़े एडिटोरियल प्रोसेस के बाद किसी भी अच्छी मैगजीन का कंटेंट तैयार होता है। मैगजीन का कंटेंट एक बड़े और खास पाठक वर्ग के लिए तैयार होता है, जिसकी अभिरुचि के बारे में संपादकीय टीम अच्छे से समझती है और अपने कंटेंट में वह शामिल करने की पूरी कोशिश करती है। इस कंटेंट के जरिये संपादकीय टीम उस पाठक वर्ग के जीवन में एक बड़ी उपयोगिता निभाती है, फिर वह चाहे किसी टॉपिक में (एंटरटेनमेंट, इंफॉर्मेशन या लाइफस्टाइल आदि) समस्या समाधान के रूप में हो अथवा अन्य किसी भी रूप में हो।

मैं यही कहना चाहूंगा कि आज के दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए मैगजींस को कंटेंट पर फोकस रखना होगा और पाठकों की रुचि को समझते हुए उस दिशा में काम करना होगा। यकीनन, डिजिटल के आने के बाद से कंटेंट का कॉम्पटीशन काफी बढ़ गया है। ऐसे में आज के दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए मैगजींस को कंटेंट की गहराई (Depth) को बनाए रखने की जरूरत है।

कंटेंट के अलावा उसे सर्व करने के लिए डिजिटल मीडिया/सोशल मीडिया के टूल्स भी अडॉप्ट करने पड़ेंगे। जैसे पहले न्यूजपेपर और मैगजीन पब्लिशर को प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में निवेश करना पड़ता था, अब वह निवेश सीएमएस, एसईओ, सोशल मीडिया प्रमोशन यानी इस तरह के ईको सिस्टम में शिफ्ट हो गया है। लेकिन, मैं फिर कहूंगा कि कंटेंट पर ज्यादा फोकस करना पड़ेगा और एडिटोरियल टीम को यह समझना जरूरी है कि उनका पाठक वर्ग कौन है और किस तरह का कंटेंट चाहता है।

कोविड का मीडिया समेत तमाम बिजनेस पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उस दौरान कई मैगजींस बंद हो गईं और तमाम मैगजींस का सर्कुलेशन घट गया। अब जबकि स्थिति सामान्य होने लगी है। ऐसे में क्या मैगजीन बिजनेस का सर्कुलेशन पहले की तरह वापस आ गया है?

इस बारे में मैं कहूंगा कि मैगजीन बिजनेस का सर्कुलेशन धीरे-धीरे वापस पटरी पर आ रहा है। ये कहना गलत होगा कि मैगजीन इंडस्ट्री कोविड पूर्व की स्थिति पर वापस आ गई है। हालांकि, कोविड के बाद जो गैप आ गया था, इंडस्ट्री उससे काफी उबर गई है। डिजिटल के आने से यह फायदा हुआ है कि कोविड के दौरान तमाम मैगजींस ने अपनी वेबसाइट्स बना लीं। जो मैगजींस पहले पूरी तरह प्रिंट पर फोकस्ड थीं, उन्होंने भी अपनी बड़ी वेबसाइट बना ली हैं या किसी एक वेबसाइट पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसकी वजह से मैगजींस की रीच यानी पाठकों तक पहुंच काफी बढ़ गई है।

मैगजींस के पास यह विकल्प है कि उस पहुंच को पेड सबस्क्राइवर्स में कैसे परिवर्तित करें। मैगजींस को आज रीडर तक अपनी जानकारी ज्यादा से ज्यादा पहुंचाने का काम डिजिटल कर रहा है। यानी तमाम मैगजीन पब्लिशर्स ने प्रिंट और डिजिटल के पैकेज तैयार कर लिए हैं और जो रेवेन्यू अथवा सर्कुलेशन कम हो गया है, उसे सबस्क्रिप्शन मॉडल के जरिये पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा मानना है कि मैगजींस इस बात पर फोकस रखें कि कैसे प्रिंट और डिजिटल का सही पैकेज बनाएं। डिजिटल को अपनी रीच, इंगेजमेंट और नए रीडर्स लाने के लिए इस्तेमाल करें, वहीं कंटेंट को बहुत बेहतर रखें ताकि नए पाठकों को पेड सबस्क्राइबर्स बना सकें। इनमें भी जो मैगजींस को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं, उन्हें प्रिंट और डिजिटल दोनों तरह के पेड पाठक वर्ग में शामिल कर सकें।        

तमाम अखबारों/मैगजींस ने सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाया हुआ है। यानी बिना सबस्क्राइब किए आप उस अखबार अथवा मैगजीन को नहीं पढ़ सकते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि इससे रीडरशिप प्रभावित होती है और प्रिंट मीडिया को कम पाठक मिलते हैं?

पब्लिकेशंस को यह सोचना होगा कि वह किस तरह का पाठक वर्ग चाहते हैं। क्या वह ऐसा पाठक वर्ग चाहते हैं जो मुफ्त में कंटेंट पढ़कर चला जाए अथवा ऐसा पाठक वर्ग चाहते हैं कि जो उनके कंटेंट को इतनी अहमियत दे कि उसे कंज्यूम के लिए भुगतान करना चाहे। बार-बार यही बात सामने आ रही है कि जो फ्री वाला पाठक वर्ग है, उससे आप विज्ञापन से पैसे नहीं बना सकते हैं, खासकर ऑनलाइन की बात करें तो। रही बात फिजिकल की तो उस समय भी वह पाठक मैगजीन खरीदता ही था और मैगजीन कोई सस्ता प्रॉडक्ट नहीं है। वह उस मैगजीन को खरीदता था, तभी एडवर्टाइजर के लिए उस रीडर की कद्र थी।

मेरा मानना है कि फ्री रीडर की कोई कद्र नहीं होती। एक तो एडवर्टाइजर उस रीडर की कद्र नहीं करता, क्योंकि उसके पास अन्य ऑप्शंस होते हैं, वहीं उससे पब्लिकेशन को भी कोई फायदा नहीं होता। ऐसे में यह एक चॉइस है। यह काफी मुश्किल चॉइस है, लेकिन इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं है कि आप अपनी लार्ज रीडरशिप से ध्यान हटाएं और फोकस रीडरशिप बनाएं जो आपकी कद्र करे और आपके कंटेंट की कद्र करे, जिससे उनसे पेड सबस्क्रिप्शन के जरिये पैसा आए और यह भी ध्यान दें कि हम उसे एडवर्टाइजर्स को इस तरह बताकर बेचें कि ये हमारे इंगेज रीडर्स हैं और इनकी कद्र करें, सिर्फ आंकड़ों पर न जाएं।

भारत में मैगजीन बिजनेस के भविष्य को किस तरह देखते हैं और आने वाले समय में क्या उम्मीदें हैं?

देखिए, बहुत सारी चीजें हैं और हम इसे एक लाइन में नहीं कह सकते हैं। मुझे लगता है कि किसी मैगजीन की एडिटोरियल टीम यदि अपने कंटेंट के जरिये ज्यादा से ज्यादा रीडर्स को इंगेज कर सकती है, तो उसके लिए आगे बहुत संभावनाएं हैं। उसके आसपास भी हमें बहुत सारी चीजें जैसे- टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग, सोशल मीडिया और इवेंट्स आदि करनी होंगी। यानी हमें तमाम तरह की चीजें करनी पड़ेंगी और फोकस रखना पड़ेगा कि कैसे हम ज्यादा से ज्यादा पाठकों को अपने साथ जोड़ें, कैसे उन्हें अपने साथ बनाए रखें और कैसा कंटेंट बनाएं कि रीडर वैल्यू करे। वो ठीक नहीं किया तो बाकी सारी चीजें बेकार हैं।


टैग्स पंकज शर्मा दिल्‍ली प्रेस इंटरव्यू साक्षात्कार एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजींस एआईएम अनंत नाथ इंडियन मैगजीन कांग्रेस
सम्बंधित खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

1 week ago

पत्रकारिता में इन बातों पर फोकस जरूरी, बाकी सब अपने आप संभल जाएगा: संकेत उपाध्याय

समाचार4मीडिया से बातचीत में जाने-माने पत्रकार संकेत उपाध्याय का कहना था- ईको सिस्टम बंटोरने के इस सिस्टम में जागरूक हो जाना ही एक ईको सिस्टम है।

1 week ago

अब ‘मैड मेन’ नहीं, ‘मशीन माइंड्स’ का है जमाना: सर मार्टिन सोरेल

S4 Capital के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने डॉ. अनुराग बत्रा से बातचीत में बताया कि एआई के दौर में विज्ञापन जगत में कैसे आगे बढ़ें और कौन-सी बड़ी कंपनियां पिछड़ रही हैं।

1 week ago

टीवी व डिजिटल में मुकाबले की बहस गलत, प्लेटफॉर्म की सीमाओं से आगे बढ़ें: आशीष सहगल

टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क के नए CEO और मीडिया व एंटरटेनमेंट के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल ने कहा कि टीवी और डिजिटल के बीच मुकाबले की चर्चा एक गलत धारा है।

18-December-2025

सफलता के लिए बदलाव की रफ्तार पकड़नी होगी: उदय शंकर

जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने CII बिग पिक्चर समिट में भारतीय मीडिया के भविष्य पर SPNI के एमडी व सीईओ गौरव बनर्जी से बातचीत की।

03-December-2025


बड़ी खबरें

TV से सोशल मीडिया व AI तक बदला दौर, पर पत्रकारिता की असली आत्मा आज भी कायम: सुधीर चौधरी

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में गुरुवार को दिग्गज पत्रकार और न्यूज एंकर सुधीर चौधरी ने टीवी पत्रकारिता से लेकर डिजिटल और AI के दौर तक के सफर पर खुलकर बात की।

16 hours ago

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन–CCI मामले की सुनवाई 11 मई तक टाली

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के बीच चल रहे मामले की सुनवाई अब 11 मई 2026 तक टाल दी है।

16 hours ago

AI, टेक्नोलॉजी और भरोसे की कसौटी पर खड़ी न्यूज इंडस्ट्री, DNPA कॉन्क्लेव में मंथन

नई दिल्ली में आयोजित डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में मीडिया, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी से जुड़े बड़े लीडर्स ने इस पर विस्तार से चर्चा की।

15 hours ago

DNPA Conclave 2026: तस्वीरों में देखें कार्यक्रम की झलकियां

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की ओर से नई दिल्ली के Shangri-La Eros होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में डिजिटल मीडिया की बदलती दुनिया पर खुलकर चर्चा हुई।

17 hours ago

राणा यशवंत विवाद पर न्यूज इंडिया मैनेजमेंट की सफाई, चेयरमैन ने रखा अपना पक्ष

हिंदी न्यूज चैनल न्यूज इंडिया में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ रहे राणा यशवंत की ओर से सोशल मीडिया पर सामने आए बयान के बाद अब चैनल मैनेजमेंट की तरफ से भी इस पूरे मामले पर विस्तार से अपना पक्ष रखा गया है।

18 hours ago