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सुधीर चौधरी ने बताया, लोगों का न्यूज चैनल्स से भरोसा क्यों हो रहा है कम
टीवी चैनल्स की टीआरपी और ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाने के ‘खेल’ में न्यूज का प्रसार और उसके इस्तेमाल के तरीकों में काफी बदलाव देखा गया है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
टीवी चैनल्स की टीआरपी और ज्यादा से ज्यादा राजस्व जुटाने के ‘खेल’ में न्यूज का प्रसार और उसके इस्तेमाल के तरीकों में काफी बदलाव देखा गया है। डिजिटाइजेशन ने इंडस्ट्री को एक नई रफ्तार दी है। इससे टेक्नोलॉजी में विकास के साथ न्यूज इस्तेमाल करने के नए रास्ते भी खुले हैं। टेलिविजन पत्रकारिता कई बदलावों से गुजरी है और अब दर्शकों की राय को एक आकार देने में भी सहायक बनी है। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) ने खबरें प्राप्त करने के पैटर्न में आए बदलावों, खबरों के डिजिटलीकरण आदि तमाम मुद्दों पर ‘जी न्यूज’ (Zee News) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:
वर्ष 2019 में न्यूजरूम्स में किस तरह की बड़े बदलाव देखने को मिले हैं? कोई ऐसा व्यवधान आया हो, जिसके बारे में आप बताना चाहें?
2019 बहुत ही रोमांचक साल रहा। जहां तक खबरों की बात करें तो कई ऐसी खबरें रहीं, जो हफ्तों तक ही नहीं बल्कि महीनों तक चर्चा में बनी रहीं। बालाकोट, आम चुनाव, कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाया जाना जैसी कई अन्य खबरें रहीं, जिसकी वजह से 2019 न केवल रोमांचक साल रहा, बल्कि यह खबरों से भरा हुआ रहा।
न्यूज रूम में सबसे बड़ी चुनौती थी कि फेक न्यूज का मुकाबला कैसे किया जाए। अब कौन सी खबर या खबर को किस तरह से पेश किया जाए यही सबसे बड़ी चुनौती नहीं रह गई है, बल्कि खबरों को सत्यापित करना भी एक बड़ी चुनौती है। इसलिए, एक बड़ा अंतर यह है कि अब हमारे पास खबरों के कई स्रोत हैं। खबरें अब हर जगह से आ रही हैं और हमारे पास बहुत अधिक असत्यापित स्रोत और असत्यापित खबरें हैं। इसलिए अब कम्पटीशन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। अब कई लोग हर तरह की खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करना चाहते हैं, फिर चाहे वह सत्यापित हों या न हो। हर खबर को फिल्टर करना अब बहुत मुश्किल हो रहा है, क्योंकि खबरें बहुत ही ज्यादा हैं। न्यूज के डिजिटाइजेशन के कारण भी चीजें काफी बदली हैं। अब न्यूज के लिए लोगों के पास तमाम विकल्प हैं। टेक्नोलॉजी का बेहतर और व्यापक इस्तेमाल करना भी काफी महत्वपूर्ण है। रोजाना नई-नई टेक्नोलॉजी आ रही हैं, इससे न्यूज इस्तेमाल करने के तरीके भी बदल रहे हैं।
ऐसे समय में जब डिजिटल मीडिया में भारी वृद्धि देखी जा रही है, क्या आपको लगता है कि यह टीवी न्यूज चैनल्स के लिए खतरा है?
मेरा मानना है कि डिजिटल मीडिया से टीवी न्यूज चैनल्स को कोई खतरा नहीं है। न्यूज प्रसार के सभी रूप बने रहेंगे और इससे लोगों के पास तमाम विकल्प होंगे। न्यूज के इस्तेमाल को और आसान बनाने में डिजिटल भी एक अन्य माध्यम बन गया है।
खबरों के लिहाज से वर्ष 2019 काफी अच्छा साल रहा और उस दौरान कई मौकों पर न्यूज की व्युअरशिप जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GEC) से ज्यादा निकल गई। आपके लिए पिछले साल ऐसी तीन कौन सी बड़ी घटनाएं रहीं, जिन्हें आपने नेटवर्क पर चलाया?
पिछले साल ‘जी न्यूज’ ने तमाम महत्वपूर्ण खबरें चलाईं, लेकिन मेरी नजर में कठुवा बलात्कार कांड की इन्वेस्टीगेटिव न्यूज काफी बड़ी खबर थी, जिसे ‘जी’ ने पिछले साल कवर किया था। इस मामले में हमने एक युवा को झूठा फंसने से बचाया था। इसके अलावा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और सीएए-एनआरसी को लेकर की गई कवरेज भी हमारी बड़ी न्यूज कवरेज में शामिल रही।
टीवी पत्रकारिता में मोजो (MoJo) और तमाम नई-नई टेक्नोलॉजी शुरू की जा रही हैं। ऐसे में आपने अपने न्यूजरूम्स में किस तरह की टेक्नोलॉजी को शामिल किया है?
‘जी’ में हमने न्यूजरूम के वर्कफ्लो को बदलने के लिए ‘Integrated Multimedia Newsroom’ (IMN) जैसी पहल शुरू की है। दरअसल, यह एक कॉमन किचन की तरह काम करता है, जहां पर हम हर तरह का कंटेंट तैयार कर रहे हैं, जो टीवी, डिजिटल, सोशल मीडिया, लॉन्ग फॉर्मेट, शॉर्ट फॉर्मेट, रेडियो, प्रिंट सबके लिए है। एक ही टीम व्युअर्स के अनुसार, डिजिटल से लेकर प्रिंट और टीवी समेत अन्य प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट तैयार कर रही है। दूसरी बात ये है कि हमने अपने इंटरनेशनल चैनल ‘विऑन’ (WION) के द्वारा देश से बाहर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। इसके द्वारा हम दुनिया के लगभग हर हिस्से से जुड़े हुए हैं। इसलिए, आजकल न्यूज ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी पर आधारित होती जा रही है। लगभग सभी मोजो किट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और हम भी कर रहे हैं। पहले के बड़े-बड़े और भारी उपकरणों की तुलना में अब हल्के और आसानी से कहीं भी ले जाने वाले उपकरण आ गए हैं, जिससे काम काफी आसान और तेज हो गया है।
आपकी नजर में वर्ष 2019 की तुलना में यह साल न्यूज के हिसाब से कैसा रहेगा। क्या आपको लगता है कि इस साल टीवी पत्रकारिता में कुछ बड़ा हो सकता है?
जी हां, मेरा मानना है कि पिछली साल की तुलना में खबरों के लिहाज से यह साल ज्यादा बड़ा और रोमांचक होगा। पहले के मुकाबले न्यूज और ज्यादा महत्वपूर्ण होने जा रही हैं। अब लोग सिर्फ न्यूज और ब्रेकिंग न्यूज देखना नहीं चाहते, बल्कि उन्हें इसमें ओपिनियन भी चाहते हैं। मेरा मानना है कि आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा लोग न्यूज चैनल्स को देखेंगे। न्यूज की संख्या भी पहले के मुकाबले दिनोंदिन बढ़ रही है और बड़ी खबरें आ रही हैं। इसलिए मेरा मानना है कि पिछली साल की तुलना में यह साल न्यूज के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है और कई बड़ी न्यूज मिलेंगी।
मुझे यह भी लगता है कि जैसे-जैसे हम समय के साथ आगे बढ़ रहे हैं, खबरों की विश्वसनीयता घट रही है। लोगों का न्यूज चैनल्स पर भरोसा कम हो रहा है। मेरी नजर में ऐसा होने के दो मुख्य कारण हैं। पहला ये कि तमाम चैनल्स द्वारा टीआरपी की दौड़ में आगे बढ़ने के चक्कर में न्यूज की क्रेडिबिलिटी कम हो रही है और दूसरा यह कि आज के दौर में कई चैनल्स एजेंडा पर आधारित पत्रकारिता कर रहे हैं। स्वस्थ पत्रकारिता करने और लोकतंत्र में समाज को चौथे स्तंभ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए न्यूज चैनल्स को इन दो चुनौतियों से मुकाबला करना होगा।
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